आंचलिक साहित्य

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  • सुरेश कुमार 'कल्याण'

    दिल आपणे नै डाट भाई रै ।
    क्यूं ठारया सिर पै खाटभाई रै ।

    अस्त्र शस्त्र बतेरे देखे।
    देखी सबकी काट भाई रै ।

    भाइयां मैं तो रल कै रै ले।
    क्यूं बण रया तों लाट भाई रै ।

    बाहर कितनिए मौज मिल्ज्या।
    घर बरगे नी ठाठ भाई रै ।

    बुराई जे तनै आंदी दिखै।
    भेड़ ले आपने पाट भाई रै ।

    सब की सोच एक सी कोनी।
    बातां नै ना चाट भाई रै।

    कोई चुस्सै बलदी चिलम नै।
    कोई पाणी का माट भाई रै।

    'कल्याण' मन की गांठ खोल दे।
    हाँ भर कै ना नाट भाई रै।।

    मौलिक एवम् अप्रकाशित
    सुरेश कुमार 'कल्याण'

  • Jaihind Raipuri

    गीत (छत्तीसगढ़ी )

    जय छत्तीसगढ़ जय-जय छत्तीसगढ़

    माटी म ओ तोर मंईया मया हे अब्बड़

    जय छत्तीसगढ़ जय-जय छत्तीस गढ़

    हिन्द के तैं हिरदै हव धान के कटोरा

    बिस्नुभोग, जवाँफूल ले भर भर बोरा

    तस्मई खुरमी, भजिया, लाड़ू जलेबी

    हरेली, मड़ई, कमरछठ, तीजा अउ पोरा

    बुड़ती राजनांदगाव ले उत्ती रैगढ़

    जय छत्तीसगढ़ जय-जय छत्तीसगढ़

    सुआ, राउत-नाचा, भरथरी पंडवानी

    लोरी, ददरिया,फुगड़ी आनी-बानी

    गिल्ली-डंडा, रेस टीप, भौँरा अउ बाँटी

    बासी चटनी संग छत्तीसगढ़ीया खांटी

    उन्नति के रद्दा म जी बढ़ आघू बढ़

    जय छत्तीसगढ़ जय- जय छत्तीसगढ़

    महानदी, इंद्रावती, अरपा, सोंढूर

    हमार महतारी बर,जल हे भरपूर

    हमन सबले सच्चा, हमन सबले बढ़िया

    हमन ढाई कोटि,सब्बो छत्तीसगढ़िया

    नवा छत्तीसगढ़ हमन गढ़बो जी सुघ्घड़

    जय छत्तीसगढ़ जय- जय छत्तीसगढ़

    माटी म ओ तोर मंईया मया हे अब्बड़

    मौलिक एवं अप्रकाशित 

  • Jaihind Raipuri

    कुंडलिया छत्तीसगढ़ी

    छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान

    सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान

    लइका अऊ सियान,तभ्भो सब मन शर्माथे

    हिन्दी म जी गाथे, इंग्लिश म गोठियाथे

    अपन भाखा उन्नति, का आने मन ह करही

    आव जी गोठियाव, भाखा म छत्तीसगढ़ी

    मौलिक एवं अप्रकाशित