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Open Books Online परिवार के सब सदस्य लोगन से निहोरा बा कि भोजपुरी साहित्य और भोजपुरी से जुड़ल बात ऐह ग्रुप मे लिखी सभे ।
by Saurabh Pandey
Jan 5
कतनो सोचऽ फिकिर करब ना जिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी कवनो नाता कवना कामें बबुआ जइबऽ जवना गाँवें जीउ जाँति के कतनो रहबऽ लोग न लगिहें तहरा ठावें बे मौसम के आन्ही-पानी चलत राहि अलबत्ते मोड़ी जिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी
घर के बान बिसारऽ बबुआ दुनिया गजब तमासा वाली माई के अँचरा के बहिरी मिलिहें भर-भर मनई जाली
डेग-डेग पऽ ठोकर दीही नवा सीख, भा किस्मत फोड़ी जिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी लूर सिखावल काम त आई अगर सीख सङ बुद्धी जागी जनला आ कइला के अंतर हर छन मनवा बूझे लागी
असहीं सबही मरद बनेले कब धावेले लङड़ी घोड़ी जिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी देवता-पीतर के मरजादा बाँची-जीही तहरे कान्ही आपन कुल के बंस-बसाहट तहरे गोड़े जतरा बान्ही
दिदिया दादी चचऊ के मन खऽर-जिउतिया माई जोड़ीजिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी ***मौलिक और अप्रकाशित
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भोजपुरी साहित्य
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Open Books Online परिवार के सब सदस्य लोगन से निहोरा बा कि भोजपुरी साहित्य और भोजपुरी से जुड़ल बात ऐह ग्रुप मे लिखी सभे ।
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अपना बबुआ से // सौरभ
by Saurabh Pandey
Jan 5
कतनो सोचऽ फिकिर करब ना
जिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी
कवनो नाता कवना कामें
बबुआ जइबऽ जवना गाँवें
जीउ जाँति के कतनो रहबऽ
लोग न लगिहें तहरा ठावें
बे मौसम के आन्ही-पानी
चलत राहि अलबत्ते मोड़ी
जिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी
घर के बान बिसारऽ बबुआ
दुनिया गजब तमासा वाली
माई के अँचरा के बहिरी
मिलिहें भर-भर मनई जाली
डेग-डेग पऽ ठोकर दीही
नवा सीख, भा किस्मत फोड़ी
जिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी
लूर सिखावल काम त आई
अगर सीख सङ बुद्धी जागी
जनला आ कइला के अंतर
हर छन मनवा बूझे लागी
असहीं सबही मरद बनेले
कब धावेले लङड़ी घोड़ी
जिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी
देवता-पीतर के मरजादा
बाँची-जीही तहरे कान्ही
आपन कुल के बंस-बसाहट
तहरे गोड़े जतरा बान्ही
दिदिया दादी चचऊ के मन
खऽर-जिउतिया माई जोड़ी
जिनिगी के हुलचुल ना छोड़ी
***
मौलिक और अप्रकाशित