2122 1212 22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस कीहो इज़ाफ़ा कहीं न दिक़्क़त में मुझ से मुझ ही को दूर करने को आयी तन्हाई शब ए फुर्क़त में तुम ख़यालों में…See More
दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर ।।लगने को ऐसा लगे, जैसे सब हों साथ । वक्त पड़े तो छोड़ दे, खून, खून का हाथ ।।पहले जैसे अब कहाँ, जीवन में …See More
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी
छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान
सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान
लइका अऊ सियान,तभ्भो सब मन शर्माथे
हिन्दी म जी गाथे, इंग्लिश म गोठियाथे
अपन भाखा उन्नति, का आने मन ह करही
आव जी…"
२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक ऐसा कवच मढ़ सके आदमी।२।*दूर नफ़रत का जंजाल करले अगरदो कदम तब कहीं बढ़ सके आदमी।३।*खींचने में लगे …See More
दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर ।।लगने को ऐसा लगे, जैसे सब हों साथ । वक्त पड़े तो छोड़ दे, खून, खून का हाथ ।।पहले जैसे अब कहाँ, जीवन में …See More