For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डूबते सूरज की बिदाई नववर्ष का स्वागत कैसे

डूबते सूरज की बिदाई नववर्ष का स्वागत कैसे 

पेड़ अपनी जड़ों को खुद नहीं काटता,
पतंग अपनी डोर को खुद नहीं काटती,
लेकिन मनुष्य आज आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ें और अपनी डोर दोनों काटता जा रहा है।
काश वो समझ पाता कि पेड़ तभी तक आज़ादी से मिट्टी में खड़ा है जबतक वो अपनी जड़ों से जुड़ा है और  पतंग भी तभी तक आसमान में उड़ने के लिए आजाद है जबतक वो अपनी डोर से बंधी है।
आज पाश्चात्य सभ्यता का अनुसरण करते हुए जाने अनजाने हम अपनी संस्कृति की जड़ों और परम्पराओं की डोर को काट कर किस दिशा में जा रहे हैं?
ये प्रश्न आज कितना प्रासंगिक लग रहा है जब हमारे समाज में महज तारीख़ बदलने की एक प्रक्रिया को नववर्ष के रूप में मनाने की होड़ लगी हो।
जब हमारे संस्कृति में हर शुभ कार्य का आरम्भ मन्दिर या फिर घर में ही ईश्वर की उपासना एवं माता पिता के आशीर्वाद से करने का संस्कार हो,उस समाज में कथित नववर्ष माता पिता को घर में छोड़, होटलों में शराब के नशे में डूब कर मनाने की परम्परा चल निकली हो।
जहाँ की संस्कृति में एक साधारण दिन की शुरुआत भी ब्रह्ममुहूर्त में सूर्योदय के दर्शन और सूर्य नमस्कार के साथ करने की परंपरा हो वहाँ का समाज कथित नए साल के पहले सूर्योदय के स्वागत के बजाय जाते साल के डूबते सूरज को बिदाई देने में डूबना पसंद कर रहा हो।
यह तो आधुनिक विज्ञान भी सिद्ध कर चुका है कि पृथ्वी जब अपनी धुरी पर घूमती है तो यह समय 24 घंटे का होता है जिससे दिन और रात होते हैं, एक नए दिन का उदय होता है और तारीख़ बदलती है।
जबकि पृथ्वी जब सूर्य का एक चक्र पूर्ण कर लेती है तो यह समय 365 दिन का होता है और इस काल खण्ड को हम एक वर्ष कहते हैं।
यानी नव वर्ष का आगमन वैज्ञानिक तौर पर पृथ्वी की सूर्य की एक परिक्रमा पूर्ण कर नई परिक्रमा के आरंभ के साथ होता है।
वो परिक्रमा जिसमें ॠतुओं का एक चक्र भी पूर्ण होता है।
सम्पूर्ण भारत में नववर्ष इसी चक्र के पूर्ण होने पर विभिन्न नामों से मनाया जाता है।
कर्नाटक में युगादि,तेलुगु क्षेत्रों में उगादि,महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा,सिंधी समाज में चैती चांद,मणिपुर में सजिबु नोंगमा नाम कोई भी हो तिथि एक ही है चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा,हिन्दू पंचांग के अनुसार सृष्टि की उत्पत्ति का दिन,नव वर्ष का पहला दिन,नवरात्रि का पहला दिन।
इस नववर्ष का स्वागत केवल मानव ही नहीं पूरी प्रकृति कर रही होती है।
ॠतुराज वसन्त प्रकृति को अपनी आगोश में ले चुके होते हैं,पेड़ों की टहनियाँ नई पत्तियों के साथ इठला रही होती हैं,
पौधे फूलों से लदे इतरा रहे होते हैं,
खेत सरसों के पीले फूलों की चादर से ढके होते हैं,
कोयल की कूक वातावरण में रस घोल रही होती है,
मानो दुल्हन सी सजी धरती पर कोयल की मधुर वाणी शहनाई सा रस घोल कर नवरात्रि में माँ के धरती पर आगमन की प्रतीक्षा कर रही हो।
नववर्ष का आरंभ माँ के आशीर्वाद के साथ होता है।
पृथ्वी के नए सफर की शुरूआत के इस पर्व को मनाने और आशीर्वाद देने स्वयं माँ पूरे नौ दिन तक धरती पर आती हैं।
लेकिन इस सबको अनदेखा करके जब हमारा समाज 31 दिसंबर की रात मांस और मदिरा के साथ जश्न में डूबता है और 1 जनवरी को नववर्ष समझने की भूल करता है तो आश्चर्य भी और दुख भी होता है।
क्योंकि आज भी हर भारतीय चाहे गरीब हो या अमीर, पढ़ा लिखा हो या अनपढ़ छोटे से छोटे और बड़े से बड़े काम के लिए "शुभ मुहूर्त" का इंतजार करता है। चाहे नई दुकान का उद्घाटन हो, गृहप्रवेश हो,विवाह हो,बच्चे का नामकरण हो,किसी नेता का शपथ ग्रहण हो, हर कार्य के लिए  "शुभ घड़ी"  की प्रतीक्षा की जाती है।
क्या होती है यह शुभ घड़ी ?
अगर हम हिन्दू पंचांग के नववर्ष के बजाय पश्चिमी सभ्यता के नववर्ष को स्वीकार करते हैं तो फिर  वर्ष के बाकी दिन हम पंचांग क्यों देखते हैं?
जब पूरे साल हम शुभ अशुभ मुहूर्त के लिए पंचांग खंगालते हुए उसके  "पूर्णतः वैज्ञानिक"  होने का दावा करते हैं तो फिर नववर्ष के लिए हम उसी पंचांग को अनदेखा कर पश्चिम की ओर क्यों ताकते हैं?
यह हमारी अज्ञानता है, कमजोरी है,हीन भावना है या फिर स्वार्थ है?
उत्तर तो स्वयं हमें ही तलाशना होगा।
क्योंकि बात अंग्रेजी नववर्ष के विरोध या समर्थन की नहीं है बात है प्रमाणिकता की।
हिन्दू संस्कृति में हर त्यौहारों की संस्कृति है जहाँ हर दिन एक त्यौहार है जिसका वैज्ञानिक आधार पंचांग में दिया है।
लेकिन जब पश्चिमी संस्कृति की बात आती है तो वहाँ नववर्ष का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
इसके बावजूद जब हम पश्चिम सभ्यता का अनुसरण करते हैं तो कमी कहीं न कहीं हमारी ही है जो हम अपने विज्ञान पर गर्व करके उसका पालन करने के बजाय उसका अपमान करने में शर्म भी महसूस नहीं कर रहे।
अपने देश के प्रति उसकी संस्कृति के प्रति और भावी पीढ़ियों के प्रति हम सभी के कुछ कर्तव्य हैं।
आखिर एक व्यक्ति के रूप में हम समाज को और माता पिता के रूप में अपने बच्चों के सामने अपने आचरण से एक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
समय आ गया है कि अंग्रेजी नववर्ष की अवैज्ञानिकता और भारतीय नववर्ष की वैज्ञानिक सोच को न केवल समझें बल्कि अपने जीवन में अपना कर अपनी भावी पीढ़ियों को भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित करें।
डाँ नीलम महेंद्र

 "मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 358

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service