For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

All Blog Posts (17,949)

ग़ज़ल-राम जी

2122 2122 212 

1

सत्य के पथ पर चलाएँ राम जी

रहना मर्यादित सिखाएँ राम जी

2

ज़ात मज़हब से न रखकर वास्ता

प्रेम का रस्ता दिखाएँ राम जी…

Continue

Added by Rachna Bhatia on April 21, 2021 at 6:01pm — No Comments

बिना बात की बात

बिना बात की बात बनाते,

लोग यहाँ दिख जाते हैं

जैसे उल्लू सीधा होता,

वैसे ही बिक जाते हैं।

धर्म नहीं जानें क्या होता,

क्या जानें परिभाषा को

रिश्तों को अब मान नहीं है,

स्थान नहीं कुछ आशा को।

दशरथ घर से बाहर हैं अब,

पूत वहाँ का राजा है,

देकर वचन भूल जाना बस,

यही समय से साधा है

सरयू को अपमानित करते,

गंगा दूषित होती है

देख नज़ारा प्रतिदिन का यह,

भारत भू अब रोती है।

राम नहीं है घट में लेकिन,

झंडों पर…

Continue

Added by सतविन्द्र कुमार राणा on April 21, 2021 at 2:46pm — No Comments

मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...

जो पहले मौत दे, फिर जिंदगानी कौन देता है

मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है

यहां तालाब नदियां जब कई बरसों से सूखे हैं

खुदा जाने हमें पीने को पानी कौन देता है

हमारी जिंदगी ठहरी हुई इक झील है लेकिन

ये उम्मीदों के दरिया को रवानी कौन देता है

जमीं से आसमां तक का सफर हम कर चुके लेकिन

नहीं मालूम मंजिल की निशानी कौन देता है

परिंदे भी समझते हैं कि पर कटने का खतरा है

इन्हें फिर हौसला ये आसमानी कौन देता…

Continue

Added by atul kushwah on April 20, 2021 at 5:30pm — 2 Comments

नानी की कमी जीवन पर्यन्त याद आएगी!

नानी की कमी जीवन पर्यन्त याद आएगी ,

आंखें मेरी क्षण-क्षण अक्षुओं से भर आएंगी

खाये जिनके बनाये गर्मियों में चांवल और दाल,

छोड़ के हम नाती-पोतों को कब दूर चली जाएगी…

Continue

Added by Rohit Dubey "योद्धा " on April 20, 2021 at 11:00am — No Comments

काँटा

मैं काँटा हूँ
जाने कितने काँटे चुभा दिये लोगों ने
मेरे बदन में अपने शूल शब्दों के
जमाने ने देखी तो सिर्फ
मुझसे मिलने वाली वेदना को देखा
मेरी तीक्ष्ण नोक को देखा…
Continue

Added by Sushil Sarna on April 19, 2021 at 8:30pm — No Comments

यहाँ बस आदमी के भाव ही मंदे बहुत हैं - ग़ज़ल

मापनी  १२२२ १२२२ १२२२ १२२ 

 

धवल हैं वस्त्र, नीयत के मगर गंदे बहुत हैं 

चिरैया देख! दाने कम उधर फंदे बहुत हैं 

 

मचा है शोर मँहगाई का चारों ओर लेकिन 

यहाँ बस आदमी के भाव ही मंदे बहुत हैं 

 …

Continue

Added by बसंत कुमार शर्मा on April 19, 2021 at 12:35pm — 4 Comments

कैसी विपदा कैसा डर

सुनसान सड़क, सुनसान रात है, सुनसान सबके अन्तर्मन

कैसे विपदा आन पड़ी ये, दुख, तड़प और है उलझन ||

 

चिराग भुझ रहे हर पल, हर क्षण, लगा दो चाहे तन, मन, धन

कड़ा समाधान न मिला अभी तक, जकड़ रहा है गहरा तम ||

 

भूख, प्यास और खाली है घर, रोजी रोटी भी हो गई बंद

वायु में जैसे विष घुला है, कैसा संकट ये कैसा कष्ट ||

 

हर पीड़ित अब यही पूछता, भूख लगने पर हो बंधन

पापी-खाली पेट तो मान रहा न, कैसे इच्छापूर्ति करेगा रंक ||

 

हाथ…

Continue

Added by PHOOL SINGH on April 18, 2021 at 10:00am — No Comments

कहानी.........

कहानी ..........

पढ़ सको तो पढ़कर देखो

जिन्दगी की हर परत

कोई न कोई कहानी है

कल्पना की बैसाखियों पर

यथार्थ की हवेलियों में

शब्दों की खोलियों में

दिल के गलियारों में

टहलती हुई

कोई न कोई कहानी है

पत्थरों के बिछौनों पर

लाल बत्ती के चौराहों पर

बसों पर लटकी हुई

रोटी के लिए भटकी हुई

आँखों के बिस्तर पर बे-आवाज

कोई न कोई कहानी है

सच

पढ़ सको…

Continue

Added by Sushil Sarna on April 16, 2021 at 5:09pm — No Comments

रश्मियाँ दिखतीं नहीं - ग़ज़ल

मापनी  २१२२ २१२२ २१२२ २१२ 

उपवनों में फूल कलियाँ तितलियाँ दिखतीं नहीं 

रोज कोयल खोजती अमराइयाँ दिखतीं नहीं 

 

हो गई आँखों से ओझल ऋतु बसंती प्यार की

तप रहा मन का मरुस्थल बदलियाँ दिखतीं नहीं

 

कौन सा यह आवरण ओढ़ा हुआ है आपने…

Continue

Added by बसंत कुमार शर्मा on April 16, 2021 at 1:19pm — 10 Comments

कुछ उक्तियाँ

कैसी फ़ितरत के लोग होते हैं ?

दूसरे की आँखों में धूल झोंकने हेतु

नम्बर वही मोबाइल पर

नाम कुछ और जोड़ लेते हैं

दुर्जनों के दुर्वचन

सहिष्णुता की परख होते हैं

अपनी नहीं खुद उनकी

औक़ात बता देते हैं

उनकी माँ नहीं थीं, मेरे पिता

वे मुझमें माँ ढूँढते रहे,मैं उनमें पिता

उन्हे ना माँ मिलीं, ना मुझे पिता

मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Usha Awasthi on April 16, 2021 at 10:43am — 4 Comments

चेहरे पर मुस्कान बनाकर बैठे हैं (ग़ज़ल)

22 22 22 22 22 2

.

चेहरे पर मुस्कान बनाकर बैठे हैं

जो नकली सामान बनाकर बैठे हैं

दिल अपना चट्टान बनाकर बैठे हैं

पत्थर को भगवान बनाकर बैठे हैं

जो करते बातें तलवार बनाने की…

Continue

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 14, 2021 at 9:30pm — No Comments

मन पर दोहे ...........

मन पर दोहे ...........

मन माने तो भोर है, मन माने तो शाम ।
मन के सारे खेल हैं, मन के सब संग्राम । 1।
हर मन को मिलता नहीं, मन वांछित परिणाम ।
मन फल की चिन्ता करे, मन अशांति का धाम ।2।…
Continue

Added by Sushil Sarna on April 13, 2021 at 1:30pm — 6 Comments

अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२

अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं

तो ख़ुश्बू में सने सब आँकड़े भरपूर खट्टे हैं

मधुर हम भी हुये तो देश को मधुमेह जकड़ेगा 

वतन के वासिते होकर बड़े मज़बूर, खट्टे…

Continue

Added by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on April 12, 2021 at 10:28pm — 6 Comments

कोरोना को हराना है।

हमने तो अब  ये ठाना है

कोरोना   को   हराना  है

अब  साथ  न  छूटेगा  ये 

वादा   हमें   निभाना   है

कोरोना   को   हराना  है... कोरोना को हराना है। 

जाना  हो   जब   ज़रूरी 

सबसे  दो  गज़  की  दूरी  

कर   हाथ    सेनिटाइज़्ड 

और मास्क भी लगाना है 

कोरोना   को    हराना  है... कोरोना को हराना है। 

बाहर  से  जब भी आओ

अच्छी     तरह    नहाओ

ज्वर, छींक हो या  खाँसी

डाॅक्टर को ही दिखाना है 

कोरोना   को   …

Continue

Added by अमीरुद्दीन 'अमीर' on April 12, 2021 at 7:02pm — 6 Comments

नग़मा: इक रोज़ लहू जम जायेगा इक रोज़ क़लम थम जायेगी

22 22 22 22 22 22 22 22

इक रोज़ लहू जम जायेगा इक रोज़ क़लम थम जायेगी

ना दिल से सियाही निकलेगी ना सांस मुझे लिख पायेगी

जिस रोज़ नये लब गाएंगे जिस रोज़ मैं चुप हो जाऊंगा

इक चाँद फ़लक से उतरेगा इक रूह फ़लक तक जायेगी

फिर नये नये अफ़सानों में कुछ नये नये चहरे होंगे

फिर नये नये किरदारों के किरदार नये गहरे होंगे

फिर कोई पिरोयेगा रिश्तों को नये नये अल्फाज़ों में

फिर कोई पुरानी रश्मों को ढालेगा नये रिवाज़ों…

Continue

Added by Aazi Tamaam on April 11, 2021 at 8:00pm — 7 Comments

गरीबी ........

गरीबी..........
कैसी होती है गरीबी
शायद
तिमिर के गहन आवरण को
भेदने में असफल होती
जुगनू की
क्षीण सी रोशनी…
Continue

Added by Sushil Sarna on April 11, 2021 at 12:00pm — 4 Comments

लघुकथा-- नहले पर दहला

" कूड़े मल इस दुकान को मैंने खरीद लिया है, अब से एक हफ़्ते में खाली कर देना"

" क्या.... क्या बकवास कर ती हो, मैं कई वर्ष पुराना किरायेदार हूँ, मेरी रोज़ी - रोटी चलती है, यहाँ से! बिल्कुल खाली नहीं करूँगा" ! कूड़े मल कस्बे का बड़ा किराना व्यापारी था! बूढ़े, कमज़ोर राम आसरे का मूल किरायेदार था जिसको उसने किराया देना बंद कर दिया था! हारकर राम आसरे ने दबंग, झगड़ालू औरत सुनहरी देवी को आधी कीमत अग्रिम लेकर पावर आफ अटार्नी कर दी थी! 

कूड़े मल अब परेशान था! भागा-भागा अपने वकील साहब के…

Continue

Added by Chetan Prakash on April 11, 2021 at 4:00am — 1 Comment

कौन आया काम जनता के लिए- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२२/२१२२/२१२



कौन आया काम जनता के लिए

कह गये सब राम जनता के लिए।१।

*

सुख सभी रखते हैं नेता पास में

हैं वहीं दुख आम जनता के लिए।२।

*

देख पाती है नहीं मुख सोच कर

बस बदलते नाम जनता के लिए।३।

*

छाँव नेताओं  के हिस्से हो गयी

और तपता घाम जनता के लिए।४।

*

अच्छे वादे और बोतल वोट को

हो गये तय दाम जनता के लिए।५।

*

न्याय के पलड़े में समता है कहाँ

भोर नेता  साम …

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 8, 2021 at 10:01pm — 3 Comments

नज़्म: मटर

ज़िंदगी भी मटर के जैसी है 

तह खोलो बिखरने लगती है

कितने दाने महफूज़ रहते हैं उन फलियों की आगोशी में

कुछ टेढ़े से कुछ बुचके से कुछ फुले से कुछ पिचके से

हू ब हू रिश्तों के जैसे लगते हैं

कुनबे से परिवारों से कुछ सगे या रिश्तेदारों से

पर सभी आज़ाद होना चाहते हैं कैद से

रिवायतों से बंदिशों से बागवाँ से साजिशों से

ज़िंदगी भी मटर के जैसी है

तह खोलो बिखरने लगती है

(मौलिक व अप्रकाशित) 

आज़ी तमाम

Added by Aazi Tamaam on April 8, 2021 at 2:00pm — 4 Comments

नज़्म: ख़्वाहिश

कोई ख़्वाब न होता आँखों में 

कोई हूक न उठती सीने में

कितनी आसानी होती 

या रब तन्हा जीने में

दिल जब से टूटा चाहत में

रिंद बने पैमानों के

ढलते ढलते ढल गई

सारी उम्र गुजर गई पीने में

यूँ ही सांसें लेते रहना

यूँ ही जीते रहना बस

हर दिन साल के जैसा 'गुजरा

हर इक साल महीने में

दुनिया डूबी लहरों में

हम डूबे यार सफ़ीने में

देखीं कैसी कैसी बातें

अज़ब ग़ज़ब दुनियादारी

वो कितने ना पाक…

Continue

Added by Aazi Tamaam on April 8, 2021 at 11:30am — 1 Comment

Monthly Archives

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

1999

1970

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Aazi Tamaam commented on atul kushwah's blog post मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...
"सुंदर रचना के लिए सहृदय बधाई सादर प्रणाम आदरणीय अतुल जी"
1 minute ago
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल-राम जी

2122 2122 212 1सत्य के पथ पर चलाएँ राम जीरहना मर्यादित सिखाएँ राम जी2ज़ात मज़हब से न रखकर…See More
12 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई ब्रजेश कुमार जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक आभार."
15 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई बसंत कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक आभार."
15 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ( बेजान था मैं फिर भी तो मारा गया मुझे......(ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई आजी तमाम जी आदाब ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक आभार"
15 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा posted a blog post

बिना बात की बात

बिना बात की बात बनाते, लोग यहाँ दिख जाते हैं जैसे उल्लू सीधा होता, वैसे ही बिक जाते हैं।धर्म नहीं…See More
15 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on atul kushwah's blog post मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...
"आदरणीय  atul kushwah  जी सादर नमस्कार  बहुत बढ़िया गजल बधाई आपको "
19 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post कुछ उक्तियाँ
"आ0 सुशील सरन जी , हार्दिक आभार आपका"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी ।बहुत सुंदर सुझाव । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Usha Awasthi's blog post कुछ उक्तियाँ
"वाह भावपूर्ण प्रस्तुति आदरणीया ऊषा जी । हार्दिक बधाई"
yesterday
Rohit Dubey "योद्धा " posted a blog post

नानी की कमी जीवन पर्यन्त याद आएगी!

नानी की कमी जीवन पर्यन्त याद आएगी ,आंखें मेरी क्षण-क्षण अक्षुओं से भर आएंगीखाये जिनके बनाये…See More
yesterday
atul kushwah posted a blog post

मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता है...

जो पहले मौत दे, फिर जिंदगानी कौन देता है मेरे किरदार को ऐसी कहानी कौन देता हैयहां तालाब नदियां जब…See More
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service