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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale posted a blog post

ग़ज़ल

1222 1222 1222मिला था जो हमें पल खो दिया हमनेमुलायम नर्म मखमल खो दिया हमने ।*बचा रख्खे हैं यादों के नुकीले तीरमज़े से झूमता कल खो दिया हमने ।*उड़ा दी खुशबुएँ जो साथ रहती थींगँवा दी उम्र संदल खो दिया हमने ।*मुहब्बत नाम से हर दिन जिहालत कीसुकूँ था एक आँचल खो दिया हमने ।*सवालों पर सवालों की थीं बौछारेंजवाब आए तो संबल खो दिया हमने ।*चली है जब हवा थर्रा गया आलमबरसता मस्त बादल खो दिया हमने ।*किनारा छू लिया फिर मोड़ दी कशतीवहम जागा धरातल खो दिया हमने ।  .मौलिक/अप्रकाशित.See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते तीनों ही छंद आपने अच्छे रचे हैं. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"लिया ठान है तो न रोके रुकेगी। उसे राह देने नदी ही झुकेगी।।......वाह ! वाह ! यही सच्चाई है प्रदत्त चित्र की आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सादर, प्रदत्त चित्र पर दोनों ही छंद आपके बहुत उत्तम हैं और चित्र के मर्म सीधे मुखरित कर रहे हैं. हार्दिक बधाई…"
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, प्रस्तुत छंद रचना की सराहना के लिए आपका हृदय से आभार. सादर"
Monday
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, आपके सुझाव और सुधारों से छंद रचना के भाव और भी मुखर हो गये हैं. अवश्य ही मुझे अंतिम छंद को और कुछ समय देने की आवश्यकता थी. हृदय से आभार आपका. सादर"
Monday
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"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रस्तुत छंद रचना की सराहना के लिए आपका हृदयतल से आभार. सादर"
Monday
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"जी ! आपने मेरी टिपण्णी को पढ़ा होता तो आप वही टिपण्णी पुनः नहीं करतीं जो आप एक बार कर चुकी हैं. सादर"
Monday
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"जी ! सादर"
Monday
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"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब सादर, भुजंगप्रयात छंद पर आपका प्रयास सुंदर है. हार्दिक बधाई स्वीकारें. आपने चित्र को सुन्दरता से परिभाषित किया है. किन्तु  कर, बा'रिश',तक ,बस, निरं'तर',तुम ,यदि .....यह शब्द एवं इंगित…"
Sunday
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"आदरणीया वन्दना जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार. "कृपया "शिक्षा की"  या "शिक्षा कि" को देखिएगा भाव अनुसार तो शिक्षा की सहेली होना चाहिए".......जी ! यहाँ 'कि' प्रयोग…"
Sunday
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"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, प्रस्तुत छंद रचना की सराहना कर मेरा मनोबल बढ़ाने के लिए आपका हृदयतल से आभार. सादर "
Sunday
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"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से आभार. सादर "
Sunday
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"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सादर, वाह ! प्रदत्त चित्र पर सुंदर प्रस्तुति आपकी. किन्तु मात्रिक और वार्णिक पर असावधानी हो गई है. पुनः प्रयास करना बेहतर होगा. सादर "
Sunday
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"आदरणीया वन्दना जी सादर, प्रदत्त चित्र पर संशोधित भुजंगप्रयात छंद आधारित सुंदर रचना आपने की है. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. फिर भी  प्रस्तुत रचना में कहीं यति या विराम चिन्हों का प्रदर्शित न किया जाना खटकता है साथ ही शीर्षक पर छंद आधारित रचना का…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 125 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र को बहुत सुन्दरता से परिभाषित करते सुंदर भुजंगप्रयात छंद रचे हैं आपने .हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Sunday
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"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, चित्र के दिए जाने के प्रयोजन को सार्थकता प्रदान करते सुन्दर भुजंगप्रयात छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. फिर भी नाँव /नाव जैसी अशुद्धियों से बचें. ले के / निरखे ....छान्दसिक तुकांतता नहीं है. वहीं फासला/हौसला या…"
Sunday

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I am a technical person and always talk in right angle.

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ग़ज़ल

1222 1222 1222



मिला था जो हमें पल खो दिया हमने

मुलायम नर्म मखमल खो दिया हमने ।

*

बचा रख्खे हैं यादों के नुकीले तीर

मज़े से झूमता कल खो दिया हमने ।

*

उड़ा दी खुशबुएँ जो साथ रहती थीं

गँवा दी उम्र संदल खो दिया हमने ।

*

मुहब्बत नाम से हर दिन जिहालत की

सुकूँ था एक आँचल खो दिया हमने ।

*

सवालों पर सवालों की थीं बौछारें

जवाब आए तो संबल खो दिया हमने…
Continue

Posted on September 22, 2021 at 8:00pm

गज़ल

 221 1222 221 1222

 

उसकी ये अदा आदत इन्कार पुराना है

बेचैन नहीं करता ये प्यार पुराना है ।

 

ये हुस्न नया पाया उसने है सताने को

ये जिस्म तमन्नाएं इसरार पुराना है ।…

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Posted on June 4, 2020 at 10:30pm — 11 Comments

गज़ल

उठाओ नजर रहगुज़र देख लो ।

यहाँ जिन्दगी का सफ़र देख लो ।

 

नियम कायदे तो बने हैं कई

मगर भंग हैं सब जिधर देख लो ।

 

न भय है न चिंता न है शर्म ही

बना है बशर जानवर देख लो ।

 

कहीं लूट है तो कहीं क़त्ल है

किसी भी नगर की ख़बर देख लो ।

 

गले मिल रहे दोस्त खंजर लिए

बदलते समय का असर देख लो ।

 

करें फ़िक्र उनकी जो हैं नापसंद

सियासत का है ये हुनर देख लो ।

 

बिछा हर तरफ सिर्फ कंक्रीट…

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Posted on October 2, 2019 at 10:00pm — 8 Comments

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

Comment Wall (26 comments)

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At 9:23am on April 21, 2020, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी सादर प्रणाम !बहुत धन्यवाद ! कुण्डलिया के लिए बिलकुल नया हूँ ये दूसरी ही कोशिश है आशा है आप के सानिध्य से कुछ सीख सकूंगा !
आपने ऐसे संशोधित किया वाह्ह्हह्ह्ह्ह क्या कहूँ बेहतरीन ! आपकी कृपा बनी रहे !
At 10:20pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

 
 
 

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