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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, लोकतंत्र की महत्ता पर सुंदर रचना हुई है. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. "
Sunday
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"आदरणीय शैख़ शहजाद उस्मानी साहब सादर, मतदाओं के प्रकार बताते सुंदर छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. "
Sunday
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"नेता शायद भूल  गए हैं, अब विकास की बातें। होड़  मची है  सभी दलों में, देने   की सौगातें।। मर्यादा सबने ही  त्यागी, नेता जहर   उगलते। सारे हथकंडे  अपनाकर, जनता को  ये छलते।।...........आज के परिदृश्य को…"
Sunday
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"छन्न पकैया छन्न पकैया, आज करो इक वादा ।हारे जीते चाहे कोई, बची रहे मर्यादा।।.........................बिलकुल ! यही जरूरी है साहब.  आदरणीय बागी जी सादर नमस्कार, जन-जन का मार्ग दर्शन करती सुन्दर प्रस्तुति.  हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर."
Sunday
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"छन्न पकैया छन्न पकैया, आतंकी चकराते। घाटी में वोटिंग में जब सब, डर को धता दिखाते।।.......वाह ! लोकतंत्र की शक्ति को दर्शाता सुंदर छंद रचा है आपने.  आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते सुंदर छंद रचे हैं आपने. हार्दिक…"
Sunday
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"किसी भुलावे और लोभ में,हरगिज ना बिक जाएंजनहित में मतदाता बनकर, अपना फर्ज निभाएं......वाह ! सुंदर सन्देश है.  आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी सादर, प्रदत्त चित्र को सार्थकता प्रदान करती उत्तम प्रस्तुति. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. "
Sunday
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"छन्न पकैया छन्न पकैया, मत को नहीं नकारें । बनती और बिगडती देखी, इक मत से सरकारें ।४।.........बहुत उत्तम. इसका भी भान होना जरूरी है . छन्न पकैया छन्न पकैया, खाएं चना चबेना | जो नेता हो अच्छा सबसे, वोट उसी को देना || आदरणीय भाई सत्यनारायण सिंह जी…"
Sunday
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"पाँच बरस में वर्षा होती दादुर टर-टर्राते भागा-दौड़ी करते दिखते सबकी नींद उड़ाते..............वाह ! बहुत खूब.  अवसर आये तो जुड़ जाता  अनजाना इक नाता  हाथी भी साइकिल पर बैठा  पंजा दिखा हिलाता  देने कुर्बानी जुड़ जाती मस्तानों की…"
Sunday
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"चलो निकालें मिलकर सारे , चुभे विगत जो काँटे । क्यों ऐसी सरकार चुनें जो , जाति धर्म में बाँटे ।।  समरसता के पोषक को हम , सत्ता में पहुँचाएँ । लोकतंत्र का पर्व निकट है , चलो सहर्ष मनाएँ ।।.........वाह ! आज की एक बड़ी चिंता पर सुंदर कलम चलाई है…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
")छन्न पकैया छन्न पकैया, वोट डालने जाओजिसने धोका हमें दिया है, फ़ौरन उसे हराओ........सत्य कहा है आपने.  छन्न पकैया-छन्न पकैया, अवसर मिला भुनाओ | झूठे का मत बटन दबाओ , सच्चे को जितवाओ || छन्न पकैया-छन्न पकैया, अपना फर्ज निभाएं | लोकतंत्र को…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"सार छंद उपमाएं सुन्दर, भाव सभी हैं प्यारे | भाग्योदय सूर्योदय लगते, मन को सुंदर नारे || लोकतंत्र को सबल बनाने, मत देने है जाना | भूले से भी हम ना भूलें, अपना फर्ज निभाना || आदरणीय अजय गुप्ता जी सादर, प्रदत्त चित्र पर सुंदर सार छंद रचे हैं आपने.…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
" आदरणीय सत्यनारायण सिंह जी सादर नमस्कार, सुन्दर भावपूर्ण छंद रचे है आपने. किन्तु सार हैं या सरसी  देख लें. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"नेताओं के वादे झूठे, किंतु हमें क्या लेना। नंगों में जो कम नंगा है, वोट उसे ही देना॥.........वाह ! वाह ! यही मजबूरी है आज की.  जान रहे हैं हम यह सारे, ये खोटा वो खोटा | फिरभी है सन्देश सही यह, नहीं दबाना नोटा || ऐरे-गैरे  को मत…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त विषय पर जनता को जागरूक करने का प्रयास करती सुंदर दोहावली रची है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. छंद के मान से कुछ जगह सुधार की संभावना भी रह गई है. सादर "
Apr 13
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"आदरणीया बबिता गुप्ता जी सादर, प्रस्तुत छंद रचना को सराहने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार. सादर. "
Apr 13
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"आदरणीया राजेश कुमारी जी सादर नमस्कार, प्रस्तुत छंदों पर आपकी सुन्दरतम प्रतिक्रिया से सृजन कार्य सार्थकता पा गया. आपका बहुत-बहुत आभार. सादर. "
Apr 13

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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Ashok Kumar Raktale's Blog

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

रसाला छंद एक प्रयास – (भ न ज भ ज ज ल)

जीवन विषम अबोध , जानकर ना डर मानव |

प्राप्त प्रथम कर ज्ञान, ज्ञान बिन पार न हो भव ||

अंतर तल अँधियार , दूर कर रोशन हो मग |

हो जगमग हर पंथ , पंथ अति रोशन हो जग ||

 

श्रेष्ठ जटिल हर कर्म, है मनुज उन्नति दायक |

भूल बिसर मत कृत्य, सत्य हर भूपति नायक ||

भूमि सतह पर स्वर्ग, कर्म बिन हो कब संभव |

जीवन पथ पर कर्म , धर्म सम भूल न मानव ||

 

मानव परहित कार्य , हैं न बस दाहकता दुख |

कष्ट सहन कर लाख, एक यदि जीवन का सुख…

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Posted on September 22, 2017 at 1:30pm — 2 Comments

आया मधुमास (अति बरवै पर आधारित गीत)

सजनी ने साजन को, खींच लिया पास |

अमराई फूल गई, आया मधुमास ||

  

धूप खिली निखरी-सी, आयी मुस्कान |

बागों में छेड़ दिया, भँवरों ने तान ||

कलियों के मन जागी, खिलने की आस......... 

खिड़की से झाँक रही, जिद्दी है धूप |

रंग बिना लाल हुआ, गोरी का रूप  ||

सखियों की सुधियों में, कौंधा परिहास........... 

 

डाली है अल्हड पर , फिरभी है भान |

बौराए महुए के , खींच रही कान ||

महक रहे वन-कानन, महका…

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Posted on February 2, 2017 at 11:00pm — 21 Comments

‘वागीश्वरी’ सवैया पर एक प्रयास

१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२

भजो राम को या भजो श्याम को या, भजो नित्य ही मित्र माँ बाप को |

चुनों धर्म का मार्ग सच्चा हमेशा , बढ़ावा न देना कभी पाप को,

सिखाना सभी को सिखाना स्वतः को, भुलाना यहाँ व्यर्थ संताप को,

नई ये हवाएं कहें क्या सुनो तो, सुनो थाप को वक्त की चाप को ||

तजो लाज सारी करो कर्म अच्छे, रहोगे जहां में तभी शान से |

न लेना किसी का न देना किसी का, जिलाता यही मार्ग सम्मान से,

बिना कर्म पाते सभी दुःख देखो,…

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Posted on November 5, 2016 at 10:53pm — 9 Comments

Comment Wall (25 comments)

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At 10:20pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

 
 
 

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