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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दिनेश कुमार विश्वकर्मा जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते और पूर्व काल की बैलगाड़ी से जोड़कर सुन्दर छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर  आवागमन है, गाड़ियों की, शाम हो या भोर ।।....गाड़ियों का"
Jun 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दयाराम मेठानी साहब सादर, प्रदत्त चित्र पर दोनों ही छंद सुन्दर रचे हैं आपने और ऐसी मुसीबत से बचने के लिए छोटे परिवार का मन्त्र भी अच्छा दिया है. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर"
Jun 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी सादर, कामरूप छंद पर आपका अच्छा प्रयास है. किन्तु यह छंद दो पंक्तियों का न होकर चार पंक्तियों का होता है. तब आपकी प्रस्तुति की दस पंक्तियों को कितने छंद समझा जाये ? तीन खण्ड के चरण में प्रथम यति पश्चात गुरु लघु के नियम का भी…"
Jun 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करने के साथ ही समाज हित की नसीहत देते सुन्दर कामरूप छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर"
Jun 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"कामरूप छंद   अचरज मत करो,बैठ देखो, एक दो छह सात। दे सकोगे तब, चाक दो से, चार को भी मात। कोई नियम या, कायदा है, डाल उस पर धूल। चल भी पड़ो अब, शान से तुम, कुछ न होगी भूल।।   आती हो पुलिस, रोकने या, टोकने बेकार। कुछ भी न सोचो,माँग माफ़ी, डाल दो…"
Jun 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार. आपके दोनों ही सुझाव उत्तम है. सादर."
May 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन हेतु हृदय से आभार आपका. सादर."
May 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दिनेश कुमार विश्वकर्मा जी सादर, प्रदत्त चित्र पर पाँचों छंद आपने. तालिबान इतिहास पर सुन्दर रचे हैं. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
May 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र अनुसार प्रथम छंद में चित्र को परिभाषित किया है तो दूसरे में तालिबान की मनःस्थिति का वर्णन और तृतीय में सन्देश. तीनों ही छंद सुन्दर रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
May 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्र अनुरूप सुन्दर कामरूप छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. द्वितीय छंद के अंतिम चरण में अखियाँ कि वर्तनी देख लें. सादर "
May 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"कामरूप छंद   जीवन मिला है, क्यों मुझे यह, क्यों मिली है प्यास । मुझको किताबें, चाहिये थीं, पर मिला वनवास । बंदूक लेकर, मैं फिरूँ अब, भागता दिनरात । बेचैन लगता, आदमी वह, सोचकर यह बात ।।   बंदूक से कब, पा सका है, कौन अब तक ज्ञान । कब-कब मिला…"
May 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"महिमा श्री शायद २००७ के लगभग जागरण जंक्शन पर साथ-साथ ब्लॉग लिखने से परिचय में आयी. लगभग एक साथ ही ओ बी ओ से जुड़ीं. २०१४ में हल्द्वानी में हुए ओ बी ओ के प्रथम कार्यक्रम में उससे मुलाक़ात का अवसर मिला था. गद्य लेखन उसे अधिक प्रिय था. अपनी कुछ कवितायेँ…"
Apr 28
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
" सही कहा है आपने. 'दृढ़ संकल्प इरादा' और फाँके ........दोनों पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है. सादर"
Apr 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर नमस्कार आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, /वैशाख जेठ की गर्मी में/..........जी ! आपने इस पंक्ति में वैशाख के त्रिकल पश्चात एक और त्रिकल जेठ रखकर मात्रिक संतुलन किया है किन्तु शब्द में प्रयुक्त वर्णों का उच्चारण मुझे गेयता में बाधक प्रतीत हो…"
Apr 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"जी ! सादर नमस्कार, "अच्छे छंद लिखे हैं, किंतु " चैत्र और बैशाख महीना" सत्तरह मात्राएं हैं !"......आप कह रहे हैं तो अवश्य १७ मात्राएँ होंगी किन्तु मैं समझ नहीं पा रहा हूँ यह मात्रा वृद्धि कौन से शब्द के कारण हो रही है. कृपया कुछ…"
Apr 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 132 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी सादर, प्रदत्त चित्र पर अच्छे छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. फिर भी  अपनी/ पानी ...का तुक उचित नहीं है. जबकि पांचवे छंद के प्रथम चरण में १७ मात्राएँ हो रही हैं. छठा छंद अपना अर्थ स्पष्ट नहीं कर पा रहा है. देख…"
Apr 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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ग़ज़ल

1222 1222 1222



मिला था जो हमें पल खो दिया हमने

मुलायम नर्म मखमल खो दिया हमने ।

*

बचा रख्खे हैं यादों के नुकीले शर

मज़े से झूमता कल खो दिया हमने ।

*

उड़ा दी खुशबुएँ जो साथ रहती थीं

गँवा दी उम्र संदल खो दिया हमने ।

*

मुहब्बत नाम से हर दिन जिहालत की

सुकूँ था एक आँचल खो दिया हमने ।

*

सवालों पर सवालों की थीं बौछारें

जवाब आए तो संबल खो…
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Posted on September 22, 2021 at 8:00pm — 10 Comments

गज़ल

 221 1222 221 1222

 

उसकी ये अदा आदत इन्कार पुराना है

बेचैन नहीं करता ये प्यार पुराना है ।

 

ये हुस्न नया पाया उसने है सताने को

ये जिस्म तमन्नाएं इसरार पुराना है ।…

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Posted on June 4, 2020 at 10:30pm — 11 Comments

गज़ल

उठाओ नजर रहगुज़र देख लो ।

यहाँ जिन्दगी का सफ़र देख लो ।

 

नियम कायदे तो बने हैं कई

मगर भंग हैं सब जिधर देख लो ।

 

न भय है न चिंता न है शर्म ही

बना है बशर जानवर देख लो ।

 

कहीं लूट है तो कहीं क़त्ल है

किसी भी नगर की ख़बर देख लो ।

 

गले मिल रहे दोस्त खंजर लिए

बदलते समय का असर देख लो ।

 

करें फ़िक्र उनकी जो हैं नापसंद

सियासत का है ये हुनर देख लो ।

 

बिछा हर तरफ सिर्फ कंक्रीट…

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Posted on October 2, 2019 at 10:00pm — 8 Comments

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

Comment Wall (26 comments)

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At 9:23am on April 21, 2020, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी सादर प्रणाम !बहुत धन्यवाद ! कुण्डलिया के लिए बिलकुल नया हूँ ये दूसरी ही कोशिश है आशा है आप के सानिध्य से कुछ सीख सकूंगा !
आपने ऐसे संशोधित किया वाह्ह्हह्ह्ह्ह क्या कहूँ बेहतरीन ! आपकी कृपा बनी रहे !
At 10:20pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

 
 
 

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"शंका निवारण करने के लिए धन्यवाद आदरणीय धामी भाई जी।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, निम्न पंक्तियों को गूगल करें शंका समाधान हो जायेगा।//अपने सीपी-से अन्तर में…"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। अच्छी समसामयिक गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post गज़ल
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कभी तो पढ़ेगा वो संसार घर हैं - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई इन्द्रविद्यावाचस्पति जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
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