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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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"दोहों पर अभ्यास हो, लेकर सुन्दर भाव । बार-बार रचते रहें, और बढेगा चाव ।। आदरणीय भाई शैख़ शहजाद उस्मानी जी सादर, दोहों पर सुन्दर प्रयास हुआ है आपका. इस अभ्यास को निरंतरता दें तो और भी सुंदर दोहे आपकी कलम से निकलेंगे ऐसा विश्वास है. इस सुंदर…"
Monday
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"आदरणीय सौरभ जी सादर,  गुरुवर यदि संतुष्ट हों तब यह मेरे लिए किसी उपहार से कम नहीं है. प्रस्तुत छंद रचना पर समय निकालकर आपके उपस्थित होने व सृजन को आशीष देने के लिए हृदयतल से आभार. सादर नमन."
Monday
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"आदरणीय भाई सत्यनारायण सिंह जी सादर, प्रस्तुत छंद आपको सुंदर लगे मेरे सृजन को मान मिला है. आपका हृदय से आभार. सादर "
Monday
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"आदरणीय भाई शैख़ शहजाद उस्मानी जी सादर नमस्कार, जी ! आपको छंद के भाव प्रदत्त चित्र अनुरूप लगे. मेरी रचना सफल हुई. आपका बहुत-बहुत आभार. सादर. "
Monday
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"आदरणीय सौरभ जी सादर, सौंवे आयोजन ने अवसर दिया तो कुछ छंद रचने का कारण बन गया. आपसे सराहना पाकर सृजन कार्य सफल होता भी प्रतीत हो रहा है. आपका हृदयातल से आभार. सादर नमन."
Monday
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"आदरणीया रचना भाटिया जी सादर, प्रस्तुति पर आपकी उपस्थिति के लिए बहुत-बहुत आभार. प्रस्तुत छंद रचना आपको ह्रदय स्पर्शी लगी रचना कार्य सार्थक हुआ. सादर.  आप छन्दों का अभ्यास करें. प्रसन्नता होगी. सादर. "
Monday
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"आदरणीय सौरभ जी सादर, आपकी  उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया पाकर मेरा छंद सृजन कार्य सफल हुआ है. आपका बहुत-बहुत आभार. सादर. "
Monday
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"आदरणीय शैख़ शहज़ाद उस्मानी साहब सादर, प्रस्तुत दोहावली आपको चित्र के भाव प्रकट करती लगी. मेरा रचनाकर्म  सफल हुआ है. हार्दिक आभार. सादर. "
Monday
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, सत्य कहा है आपने. प्रस्तुति पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदयतल से आभार. सादर "
Monday
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"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत-बहुत आभार. सादर ."
Monday
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"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, सुंदर विषय और समय दोनों ने साथ दिया तो रचनाएं हो गईं. प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका ह्रदय से आभार. बारिश तब आनंद हुई ......इस पंक्ति में आया/ मिला का कोई काम नहीं है. यह तो बारिश के आनंद में परिवर्तन…"
Monday
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"छंद “हाकलि” (14 मात्राओं का सम-मात्रिक छंद. दो-दो पदों की तुकांतता के साथ अंत गुरु होना अनिवार्य है )   तीरों सी हैं बौछारें । भीगा घर छत दीवारें । भागे घर को चौपाये । पादप सारे मुस्काये ।।   जेष्ठ नहीं यह सावन है ।ऋतु लगती…"
Monday
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"आदरणीय श्लेष चंद्राकर जी सादर,ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छ्न्दोत्सव में आपका स्वागत है. प्रदत्त चित्र पर सुंदर कुण्डलिया छंद रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. किन्तु आपने एक ही कुण्डलिया क्यों डाली ? चित्र में तो और भी गुंजाइश थी. सादर.  कल…"
Monday
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"जी ! सादर "
Monday
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"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर नमस्कार, प्रस्तुत  छंदों पर उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए आपका ह्रदय से आभार. कुछ बातें कई बार अनायास भी हो जातीं हैं. सादर."
Monday
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"आदरणीय बाग़ी जी सादर, प्रस्तुत दोहों को सुन्दर पाने के लिए आपका ह्रदय से आभार. सादर "
Sunday

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I am a technical person and always talk in right angle.

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Ashok Kumar Raktale's Blog

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

रसाला छंद एक प्रयास – (भ न ज भ ज ज ल)

जीवन विषम अबोध , जानकर ना डर मानव |

प्राप्त प्रथम कर ज्ञान, ज्ञान बिन पार न हो भव ||

अंतर तल अँधियार , दूर कर रोशन हो मग |

हो जगमग हर पंथ , पंथ अति रोशन हो जग ||

 

श्रेष्ठ जटिल हर कर्म, है मनुज उन्नति दायक |

भूल बिसर मत कृत्य, सत्य हर भूपति नायक ||

भूमि सतह पर स्वर्ग, कर्म बिन हो कब संभव |

जीवन पथ पर कर्म , धर्म सम भूल न मानव ||

 

मानव परहित कार्य , हैं न बस दाहकता दुख |

कष्ट सहन कर लाख, एक यदि जीवन का सुख…

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Posted on September 22, 2017 at 1:30pm — 2 Comments

आया मधुमास (अति बरवै पर आधारित गीत)

सजनी ने साजन को, खींच लिया पास |

अमराई फूल गई, आया मधुमास ||

  

धूप खिली निखरी-सी, आयी मुस्कान |

बागों में छेड़ दिया, भँवरों ने तान ||

कलियों के मन जागी, खिलने की आस......... 

खिड़की से झाँक रही, जिद्दी है धूप |

रंग बिना लाल हुआ, गोरी का रूप  ||

सखियों की सुधियों में, कौंधा परिहास........... 

 

डाली है अल्हड पर , फिरभी है भान |

बौराए महुए के , खींच रही कान ||

महक रहे वन-कानन, महका…

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Posted on February 2, 2017 at 11:00pm — 21 Comments

‘वागीश्वरी’ सवैया पर एक प्रयास

१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२

भजो राम को या भजो श्याम को या, भजो नित्य ही मित्र माँ बाप को |

चुनों धर्म का मार्ग सच्चा हमेशा , बढ़ावा न देना कभी पाप को,

सिखाना सभी को सिखाना स्वतः को, भुलाना यहाँ व्यर्थ संताप को,

नई ये हवाएं कहें क्या सुनो तो, सुनो थाप को वक्त की चाप को ||

तजो लाज सारी करो कर्म अच्छे, रहोगे जहां में तभी शान से |

न लेना किसी का न देना किसी का, जिलाता यही मार्ग सम्मान से,

बिना कर्म पाते सभी दुःख देखो,…

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Posted on November 5, 2016 at 10:53pm — 9 Comments

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At 10:20pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

 
 
 

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. आनीस जी, अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ.भाई पंकज जी, बेहतरीन बंद के साथ सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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"आ. भाई मोहन जी, सुंदर प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. भाई गुरप्रीत जी,अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. अंजलि जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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"आ. दण्डपाणि जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. राजेश दी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. भाई मुनीश जी, प्रयास आच्छा है हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. भाई नादिर जी, अच्छी गजल के लिए हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. भाई असद जैदी जी, गजल का सुंदर प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"लोग कम हुए आना, मस्जिदों शिवालों मेंढूँढते खुदा अब वो, डूब मय के प्यालों में।१।***यूँ वफा कहाँ…"
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