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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 115 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अंकित कुमार नौटियाल जी सादर प्रस्तुत रचना को सराहने के लिए आपका अतिशय आभार. सादर"
Nov 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 115 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रस्तुत छंदों की सराहना के लिए हार्दिक आभार आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी. सादर"
Nov 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 115 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अंकित कुमार नौटियाल जी सादर, सुन्दर प्रयास हुआ है आपका गीतिका छंदों पर.तृतीय छंद के अंतिम पंक्ति में शिल्प का पालन नहीं हुआ है. जबकि अंतिम छंद में तुक में चूक हुई है. देख लें. सादर"
Nov 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 115 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण  धामी जी सादर,  प्रदत्त चित्र पर सुंदर छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. पेड़ पत्थर शूल तक सम्बल बने देखे खड़ेआदमी पर सोचता बनते सहारा बस बड़े।।......बहुत सुंदर और शिक्षाप्रद पंक्तियाँ रची हैं आपने. सादर"
Nov 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 115 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दिनेश कुमार विश्वकर्मा जी सादर, प्रदत्त चित्र पर सुंदर गीतिका छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. यह अवश्य हुआ है कि अंतर्यति कुछ आगे सरक गई है. सादर."
Nov 22
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 115 in the group चित्र से काव्य तक
"गीतिका छंद   शेष हैं अब भी कहीं, मानव हृदय में प्यार-सा । चल रहा जिससे जगत, आभार-सा उपकार-सा । एक अपनापन कभी, लगने न देता भार-सा । बस यही इस वक्त है, आधार-सा आधार-सा ।।   नेक शैशव भी सहज, समझे जरा की आफतें । देखता है वो सहे, कैसी सदा ये…"
Nov 22
Ashok Kumar Raktale replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ परिवार के युवा साहित्यकार अरुन अनन्त की दैहिक विदाई
"अत्यंत दुखी कर देने वाला समाचार है. एक युवा साथी ऐसे गुपचुप चला जाए, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. ईश्वर प्रिय अरुण शर्मा अनंत को अपने श्री चरणों में स्थान दे व परिवारजनों को यह आघात सहने की शक्ति प्रदान करे. विनम्र श्रृद्धांजलि "
Oct 18
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर नमस्कार, प्रस्तुत छन्दों को सराह कर उत्साहवर्धन करने के लिए आपका हृदय से आभार. सादर "
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय मुकुल कुमार लीम्बड  जी सादर, प्रदत्त चित्र को बहुत सुन्दरता से परिभाषित किया है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. फिरभी 'हाँ' को 'हा' लिखना फ़ुर्सत को 'फूरसद' लिखना वर्तनी दोष हैं.सादर "
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया डॉ. वन्दना मिश्रा जी आपका "ओबीओ चित्र से काव्य तक छ्न्दोत्सव अंक-113" में स्वागत है. सादर. "
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, प्रदत्त चित्र पर चारों छंद सुंदर रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. फिरभी तृतीय छंद के प्रथम और द्वितीय पद की गेयता बाधित हो रही है. उसी तरह प्रस्तुति की अंतिम पंक्ति में भी गेयता की समस्या है. इसके अतिरिक्त छंदों में…"
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते सुंदर हरिगीतिका छंद रचे हैं  आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. प्रथम छंद की प्रथम पंक्ति के अतिरिक्त द्वितीय छंद की प्रथम पंक्ति पर भी ध्यान देने की आवश्यता है क्योंकि इस में…"
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सादर, प्रदत्त चित्र को नारियों की तरक्की के उत्तम भाव देकर आपने सुन्दरता से परिभाषित किया है. दोनों ही छंद बहुत सुंदर रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"हरिगीतिका   छूने चली हैं औरतें नभ, कम नहीं सच मर्द से । ये हारने वाली नहीं अब, मार से या दर्द से । कर एक दूजे का पकड़ कर, नित्य आगे बढ़ रहीं । मिल लक्ष्य पाने के लिए, ये सीढ़ियाँ नव चढ़ रहीं ।।   मैदान हो कोई कहीं भी, बैट या फुटबाल हो । हों…"
Sep 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-112 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, सुंदर हरिगीतिका छंद रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. यति चिन्हों का प्रयोग भी किया जाना चाहिए था. सादर "
Aug 23
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-112 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत छंद रचना प्रयास को सराहने के लिए आपका हृदय से आभार.सादर "
Aug 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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Ashok Kumar Raktale's Blog

गज़ल

 221 1222 221 1222

 

उसकी ये अदा आदत इन्कार पुराना है

बेचैन नहीं करता ये प्यार पुराना है ।

 

ये हुस्न नया पाया उसने है सताने को

ये जिस्म तमन्नाएं इसरार पुराना है ।…

Continue

Posted on June 4, 2020 at 10:30pm — 11 Comments

गज़ल

उठाओ नजर रहगुज़र देख लो ।

यहाँ जिन्दगी का सफ़र देख लो ।

 

नियम कायदे तो बने हैं कई

मगर भंग हैं सब जिधर देख लो ।

 

न भय है न चिंता न है शर्म ही

बना है बशर जानवर देख लो ।

 

कहीं लूट है तो कहीं क़त्ल है

किसी भी नगर की ख़बर देख लो ।

 

गले मिल रहे दोस्त खंजर लिए

बदलते समय का असर देख लो ।

 

करें फ़िक्र उनकी जो हैं नापसंद

सियासत का है ये हुनर देख लो ।

 

बिछा हर तरफ सिर्फ कंक्रीट…

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Posted on October 2, 2019 at 10:00pm — 8 Comments

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

रसाला छंद एक प्रयास – (भ न ज भ ज ज ल)

जीवन विषम अबोध , जानकर ना डर मानव |

प्राप्त प्रथम कर ज्ञान, ज्ञान बिन पार न हो भव ||

अंतर तल अँधियार , दूर कर रोशन हो मग |

हो जगमग हर पंथ , पंथ अति रोशन हो जग ||

 

श्रेष्ठ जटिल हर कर्म, है मनुज उन्नति दायक |

भूल बिसर मत कृत्य, सत्य हर भूपति नायक ||

भूमि सतह पर स्वर्ग, कर्म बिन हो कब संभव |

जीवन पथ पर कर्म , धर्म सम भूल न मानव ||

 

मानव परहित कार्य , हैं न बस दाहकता दुख |

कष्ट सहन कर लाख, एक यदि जीवन का सुख…

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Posted on September 22, 2017 at 1:30pm — 2 Comments

Comment Wall (26 comments)

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At 9:23am on April 21, 2020, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी सादर प्रणाम !बहुत धन्यवाद ! कुण्डलिया के लिए बिलकुल नया हूँ ये दूसरी ही कोशिश है आशा है आप के सानिध्य से कुछ सीख सकूंगा !
आपने ऐसे संशोधित किया वाह्ह्हह्ह्ह्ह क्या कहूँ बेहतरीन ! आपकी कृपा बनी रहे !
At 10:20pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

 
 
 

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