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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी सादर, प्रदत्त चित्र को बहुत सुंदरता से सरसी छंदों में परिभाषित किया है आपने. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. दोनों के पैर आकाश में,...यहाँ अवश्य गेयता का कुछ आभाव लग रहा है. प्रथम बार दी प्रतिक्रिया शायद हवा में ही रह गई,…"
Saturday
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"आदरणीया सुनन्दा झा जी सादर, प्रदत्त चित्र को सुन्दरता से परिभाषित किया है आपने प्रस्तुत आल्हा छंदों में. सिखा रहा है वीर शिष्य को ,उलट पलटकर करना वार । कैसे बचना है दुश्मन से ,नहीं हाथ जब हो तलवार । बांधो कपड़ा एक हाथ पर ,भटकाओ दुश्मन का ध्यान । मौका…"
Saturday
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"आदरणीय अरुण निगम साहब सादर, प्रदत्त चित्र को गुरु चेले के युद्धाभ्यास के रूप में बहुत ही सुन्दरता से परिभाषित करते तीनों ही छंद सुंदर रचे हैं. परम्परागत विधाओं को बढ़ावा मिले यह भी आवश्यक है. हार्दिक बधाई. सादर."
Saturday
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"आदरणीय भाई सत्यनारायण सिंह जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते बहुत सुंदर आल्हा छंद रचे हैं आपने. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सारे दुश्मन को यह ढेर ......सारे के साथ दुश्मनों आना चाहिए था. यदि सारे की जगह 'हर इक' करलें तो यह अच्छा…"
Saturday
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"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सादर,  आपको आल्हा छंदों की यह प्रस्तुति सुंदर लगी. मेरा प्रयास सफल हुआ. बहुत-बहुत आभार. सादर."
Saturday
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"आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब सादर नमस्कार, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए आपका हृदयातल से आभार. सादर ."
Saturday
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"आदरणीय अरुण कुमार निगम साहब सादर नमस्कार, आपको आल्हा छंदों की मेरी यह प्रस्तुति अच्छी लगी मेरे रचनाकर्म को मान मिला. हार्दिक आभार. एक रहा ललकार देख लो ........अधूरी पंक्ति पढने से अपूर्णता लगना सहज है साहब. सादर."
Saturday
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत आल्हा छंदों पर आपसे आल्हा में ही इतनी सुंदर प्रतिक्रिया पाकर अभिभूत हूँ. रचना कर्म को सफलता प्रदान करने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार. सादर."
Saturday
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"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रस्तुत आल्हा छंद आपको चित्र अनुरूप लगे मेरी रचना सफल हुई. बहुत-बहुत आभार. आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत है. सादर."
Saturday
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"प्रस्तुत आल्हा छंदों को प्रदत्त चित्र अनुरूप पाने के लिए आपका दिल से आभार आदरणीय तस्दीक एहमद खान साहब. सादर."
Saturday
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"प्रस्तुत आल्हा छंदों को सार्थकता प्रदान करती प्रतिक्रिया के लिए आपका हृदयातल से आभार आदरणीय समर कबीर साहब. सादर नमन."
Saturday
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"भारत का ये खेल पुराना, दोनों बढ़ा रहे तौक़ीर । क़ैद कर लिया इस मंज़र को,देखो तुम भी ये तस्वीर ।। दोनों कर्तब दिखलाते हैं,लेकर हाथों में शमशीर । सूरज डूब रहा है थक कर,लेकिन थके नहीं ये वीर ।।.......वाह ! बहुत खूब. आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार,…"
Friday
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"घेर घेरकर घोर गगन ज्यों,बरसे बादल मूसलधार। विद्युत सी तलवार चली हैं,पल में करती सीना पार। लाल वस्त्र की ढाल हाथ में,रोकन को तीखी तलवार। चीते जैसी फुर्ती के संग,इक दूजे पर करते वार।.........वाह ! बहुत सुंदर . संग या सँग देख लें. आदरणीय सुरेश कुमार…"
Friday
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"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सादर, बहुत सुंदर आल्हा छंद रचे हैं आपने. यह अवश्य है की यह रचना चित्र को पूरी तरह परिभाषित करती नहीं लग रही है. प्रदत्त चित्र ले लिए भावों पर रचे इन आल्हा छंदों के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें. डर कर जीना भी क्या जीना, डर है…"
Friday
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"आल्हा छंद   दृश्य साँझ का है यह सुंदर, आया सूरज दिन के तीर | उड़ते दिखते हैं धरती पर, निडर बहादुर दो - दो वीर || देख उन्हें होता है हमको , गगनचरों के जैसा भास | मगर हकीकत में दो मानव , आये करने युद्धाभ्यास ||     एक रहा ललकार देख लो ,…"
Friday
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"सादर आभार आदरणीय बागी जी. कल रात से ही ओ बी ओ लॉग इन में परेशानी आ रही थी. अब सही है पूर्व की भांति. पुनः आभार. सादर."
Friday

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I am a technical person and always talk in right angle.

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आया मधुमास (अति बरवै पर आधारित गीत)

सजनी ने साजन को, खींच लिया पास |

अमराई फूल गई, आया मधुमास ||

  

धूप खिली निखरी-सी, आयी मुस्कान |

बागों में छेड़ दिया, भँवरों ने तान ||

कलियों के मन जागी, खिलने की आस......... 

खिड़की से झाँक रही, जिद्दी है धूप |

रंग बिना लाल हुआ, गोरी का रूप  ||

सखियों की सुधियों में, कौंधा परिहास........... 

 

डाली है अल्हड पर , फिरभी है भान |

बौराए महुए के , खींच रही कान ||

महक रहे वन-कानन, महका…

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Posted on February 2, 2017 at 11:00pm — 21 Comments

‘वागीश्वरी’ सवैया पर एक प्रयास

१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२

भजो राम को या भजो श्याम को या, भजो नित्य ही मित्र माँ बाप को |

चुनों धर्म का मार्ग सच्चा हमेशा , बढ़ावा न देना कभी पाप को,

सिखाना सभी को सिखाना स्वतः को, भुलाना यहाँ व्यर्थ संताप को,

नई ये हवाएं कहें क्या सुनो तो, सुनो थाप को वक्त की चाप को ||

तजो लाज सारी करो कर्म अच्छे, रहोगे जहां में तभी शान से |

न लेना किसी का न देना किसी का, जिलाता यही मार्ग सम्मान से,

बिना कर्म पाते सभी दुःख देखो,…

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Posted on November 5, 2016 at 10:53pm — 9 Comments

माता मैं ना जाऊँगा

कितने कष्ट सहे हैं तूने , कैसे मुझे पढ़ाया है,

तुझे छोड़कर घर से बाहर, मैंने कदम बढाया है |

अनचाहे ही माता तुझको , मैंने आज रुलाया है

भाग्य विधाता ने भी देखो, कैसा खेल रचाया है ||

 

 

रुक जाता मैं माता क्षणमें, बस कहने की देरी थी,

जाऊँ मैं परदेस मगर माँ, ये जिद भी तो तेरी थी |

देवों को नित पूजा तूने , माला भी नित फेरी थी,

तुझको छोड़ कहीं जाऊँ मैं, ये ईच्छा कब मेरी थी ||

 

 

दमकुंगा बन कुंदन लेकिन, काम न तेरे…

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Posted on September 17, 2016 at 9:30pm — 13 Comments

हर कली अब कमल हो रही है

212  212  212  2

 

जिन्दगी अब सरल हो रही है

बात हर इक गजल हो रही है 

 

दलदली हो चुकी है जमीं पर,

हर कली अब कमल हो रही है

 

तितलियाँ भर रहीं हैं उड़ानें

नीति बेशक सफल हो रही है

 

आ रहा है कहीं से उजाला

रौशनी आजकल हो रही है

 

मखमली हो रही हैं हवाएं

मेंढकी भी विकल हो रही है

 

है दरोगा बड़ा लालची वो

धारणा अब अटल हो रही है

 

मौलिक/अप्रकाशित.

Posted on July 28, 2016 at 11:00pm — 15 Comments

Comment Wall (24 comments)

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At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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