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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-107 in the group चित्र से काव्य तक
"जी ! स्पष्ट हुआ. सादर प्रणाम."
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-107 in the group चित्र से काव्य तक
"उल्लाला छंद   केश कर्तनालय अलग, बना रहा पहचान है । पढ़ा-लिखा नाई लिए, पुश्तैनी दूकान है ।।   मोटी-मोटी पुस्तकें, लगतीं ग्रन्थ समान सब । लगतीं हैं सारी मुझे, सज्जा का सामान अब ।।   नहीं केश सौंदर्य का, लगा एक भी चित्र है । पुस्तक पढता…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-107 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्र पर सुंदर उल्लाला छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. आपके छंद देखकर मन मन में एक शंका उठी है. क्या इसके विषम चरणों का प्रारम्भ जगण से होना उचित है ?  क्योंकि हम इसे दोहे के दो विषम…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-107 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करता उल्लाला छंद आधारित सुंदर गीत रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-107 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र को हर कोण से परिभाषित करते सुंदर उल्लाला छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-113
"विषय : जीवन के रंग   आपा-धापी  चलती रहती, चैन न पाती श्वास कभी, घोर निराशा को भी हल्का, करती कोई आस कभी, कोई भी बेरंग न रहता मानव, पुष्प, पतंग आती जाती ऋतुओं जैसे, होते जीवन रंग .   जीत देखता है वह तपकर, जो भी यहाँ न हारे, वर्षा से…"
Mar 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-113
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी सादर, प्रदत्त विषय के भावों पर आधारित अच्छी गजल कही है आपने. बहुत बधाई. फिरभी प्रदत्त विषय का जिक्र भी किसी मिसरे में होता तो बेहतर होता. सादर "
Mar 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-113
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त विषय पर भिन्न रंगों की छटा बिखेरते सुंदर दोहे रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Mar 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-113
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, प्रदत्त विषय पर सुंदर गीत रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. फिरभी / पचे हाजमे की गोली से, दूजा भूखा अंग / समझ पाना कठिन है. सादर "
Mar 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-113
"तो कभी उदास /उदासी के रंग नीरस करते आदरणीया बबिता जी सादर, जीवन के रंगों की व्याख्या करती सुंदर प्रस्तुति. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर "
Mar 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रदत्त चित्र पर रचे उल्लाला छंदों को आपका आशीष मिला. रचना कर्म सार्थक हुआ. हार्दिक आभार आपका.सादर."
Feb 16
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रस्तुत छंदों को सराहने के लिए आपका दिल से आभार. सादर."
Feb 16
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्र पर रचे छंद आपको अच्छे लगे इसके लिए आपका हृदय से आभार. सादर. "
Feb 16
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"उल्लाला छंद   फूलों की हैं क्यारियाँ, बच्चों की तैयारियाँ । भूख बड़ी है ज्ञान से, कैसी ये  दुश्वारियाँ ।।   बच्चे करते वन्दना, हाथों को जोड़े हुए । ध्यान दे रहे मित्र पर, जो हैं मुख मोड़े हुए ।।   वर्दी में लगते सभी, प्यारे बच्चे…"
Feb 16
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते हुए सुंदर छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. आदरणीया सुनंदा झा जी का कहना सही है. तृतीय छंद के अंतिम चरण में एक मात्रा कम हो गई है. सादर. "
Feb 16
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-106 in the group चित्र से काव्य तक
"पढ़ने की है गर्ज या ,ललचाती हैं रोटियाँ।हाथ जोड़ बालक खड़ा ,प्यारी सी दो चोटियाँ।.......वाह !वाह ! बहुत सुंदरता से चित्र को परिभाषित कर रहा है यह छंद.  आदरणीया सुनंदा झा जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करती सुंदर छन्दावली रची है आपने. हार्दिक…"
Feb 16

Profile Information

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Male
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Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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Ashok Kumar Raktale's Blog

गज़ल

उठाओ नजर रहगुज़र देख लो ।

यहाँ जिन्दगी का सफ़र देख लो ।

 

नियम कायदे तो बने हैं कई

मगर भंग हैं सब जिधर देख लो ।

 

न भय है न चिंता न है शर्म ही

बना है बशर जानवर देख लो ।

 

कहीं लूट है तो कहीं क़त्ल है

किसी भी नगर की ख़बर देख लो ।

 

गले मिल रहे दोस्त खंजर लिए

बदलते समय का असर देख लो ।

 

करें फ़िक्र उनकी जो हैं नापसंद

सियासत का है ये हुनर देख लो ।

 

बिछा हर तरफ सिर्फ कंक्रीट…

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Posted on October 2, 2019 at 10:00pm — 8 Comments

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

रसाला छंद एक प्रयास – (भ न ज भ ज ज ल)

जीवन विषम अबोध , जानकर ना डर मानव |

प्राप्त प्रथम कर ज्ञान, ज्ञान बिन पार न हो भव ||

अंतर तल अँधियार , दूर कर रोशन हो मग |

हो जगमग हर पंथ , पंथ अति रोशन हो जग ||

 

श्रेष्ठ जटिल हर कर्म, है मनुज उन्नति दायक |

भूल बिसर मत कृत्य, सत्य हर भूपति नायक ||

भूमि सतह पर स्वर्ग, कर्म बिन हो कब संभव |

जीवन पथ पर कर्म , धर्म सम भूल न मानव ||

 

मानव परहित कार्य , हैं न बस दाहकता दुख |

कष्ट सहन कर लाख, एक यदि जीवन का सुख…

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Posted on September 22, 2017 at 1:30pm — 2 Comments

आया मधुमास (अति बरवै पर आधारित गीत)

सजनी ने साजन को, खींच लिया पास |

अमराई फूल गई, आया मधुमास ||

  

धूप खिली निखरी-सी, आयी मुस्कान |

बागों में छेड़ दिया, भँवरों ने तान ||

कलियों के मन जागी, खिलने की आस......... 

खिड़की से झाँक रही, जिद्दी है धूप |

रंग बिना लाल हुआ, गोरी का रूप  ||

सखियों की सुधियों में, कौंधा परिहास........... 

 

डाली है अल्हड पर , फिरभी है भान |

बौराए महुए के , खींच रही कान ||

महक रहे वन-कानन, महका…

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Posted on February 2, 2017 at 11:00pm — 21 Comments

Comment Wall (25 comments)

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At 10:20pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

 
 
 

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