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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर,  प्रदत्त विषय पर बहुत सुंदर बाल रचना हुई है. फिरभी थोड़ा और समय दें तो कुछ और निखार इस रचना में आयेगा. कागज़ की हम नाव बनाते फिर पानी पे उसे चलाते।.........यहाँ यदि कौनसे पानी में चलाते आ जाए जैसे वर्षा जल,पोखर…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"रिमझिम में यूँ भीग तनिक तनमन की तूँ प्यास बुझा क्यों चलता  है  अरे! बावले   छाता  खोले   पावस में।9।.......वाह ! बहुत खूब. आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी सादर प्रदत्त विषय पावस पर बहुत खूबसूरत गजल कही है आपने. सभी अशआर…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"आदरणीया नयना कानिटकर जी सादर, प्रदत्त विषय आधारित गीत पर सुंदर प्रयास हुआ है आपका. बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"दिन वर्षा के आ गए,  भरे तलैया ताल रही रात भर जागती,  झुग्गी है बेहाल ......वर्षाऋतु की खुशियों के साथ ही सर्वाधिक त्रास झुग्गियां ही झेलतीं हैं. आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सादर, प्रदत्त विषय पर दोनों ही कुण्डलिया छंद बहुत उत्तम रचे हैं…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, आपकी सुंदर प्रतिक्रिया पाकर मेरा रचना सफल हुआ.बहुत -बहुत आभार. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब सादर नमस्कार, प्रदत्त विषय पर मेघदूत की पंक्तियों का कुकुभ और ताटंक छंद के माध्यम से बहुत ही प्रवाहमयी भावानुवाद किया है आपने, मन बारम्बार इसे पढ़ना चाह रहा है. इस सुंदर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
Jul 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"सावन माह चढ़ा है सर पे ,  साजन जा परदेस बसे । किस सौतन के रूप जाल में , मेरे भोलेनाथ फँसे ।.............वाह ! वाह ! बहुत खूब साहब. आदरणीय सतीश मापतपुरी साहब सादर नमस्कार, पावस में विरहन के मनोभाव को दर्शाता बहुत सुंदर गीत हुआ है साहब, भाव गेयता…"
Jul 15
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"आदरणीय बृजेन्द्र नाथ सिंह जी सादर आपको  प्रस्तुत चौपाइयों में पावस के भावों ने मोहित किया मेरी रचना सफल हुई. आपका हार्दिक आभार. सादर ."
Jul 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी सादर आपको प्रस्तुत छंद पसंद आये मेरा रचनाकर्म सफलता पा गया. आपका दिल से आभार . सादर."
Jul 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"आदरणीय भाई सतविन्द्र कुमार जी सादर, प्रस्तुत चौपाइयों पर आपकी सुंदर छ्न्द्सिक प्रतिक्रिया पाकर मन प्रसन्न हुआ. आपका हार्दिक आभार. सादर."
Jul 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"आदरणीय  तस्दीक एहमद खान साहब सादर, आपको यह चौपाइयां अच्छी लगी मेरा रचनाकर्म सफल हुआ है. आपका दिल से आभार. सादर."
Jul 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"आदरणीय  वासुदेव अग्रवाल साहब सादर, सुंदर छान्दसिक प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करने के लिए आपका अतिशय आभार. सादर ."
Jul 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी सादर, प्रदत्त विषय पर खूबसूरत गजल कही है आपने .बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें.सादर."
Jul 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब सादर, प्रदत्त विषय पर खुबसूरत गजल कही है आपने. सच है तपते ग्रीष्म के पश्चात बारिश आती है तो मन में खुशियाँ भर देती है. बहुत-बहुत बधाई. सादर."
Jul 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"आदरणीय बृजेन्द्र नाथ मिश्रा जी सादर, प्रदत्त विषय पर बहुत सुंदर रचना हुई है. वर्षा ऋतु के कई दृश्य आपने  उपस्थित कर दिए हैं. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर."
Jul 14
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-81
"मोहन सोहन श्याम मुरारी| मीना रीना और दुलारी || सँग लिए सबको है भैया || चला रहे कागज की नैया ||........वाह !  कागज़ की नाव और बचपन का अटूट नाता रहा है. आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी सादर प्रदत्त विषय पर रची  सुंदर बाल कविता की प्रस्तुति के…"
Jul 14

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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Ashok Kumar Raktale's Blog

आया मधुमास (अति बरवै पर आधारित गीत)

सजनी ने साजन को, खींच लिया पास |

अमराई फूल गई, आया मधुमास ||

  

धूप खिली निखरी-सी, आयी मुस्कान |

बागों में छेड़ दिया, भँवरों ने तान ||

कलियों के मन जागी, खिलने की आस......... 

खिड़की से झाँक रही, जिद्दी है धूप |

रंग बिना लाल हुआ, गोरी का रूप  ||

सखियों की सुधियों में, कौंधा परिहास........... 

 

डाली है अल्हड पर , फिरभी है भान |

बौराए महुए के , खींच रही कान ||

महक रहे वन-कानन, महका…

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Posted on February 2, 2017 at 11:00pm — 21 Comments

‘वागीश्वरी’ सवैया पर एक प्रयास

१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२

भजो राम को या भजो श्याम को या, भजो नित्य ही मित्र माँ बाप को |

चुनों धर्म का मार्ग सच्चा हमेशा , बढ़ावा न देना कभी पाप को,

सिखाना सभी को सिखाना स्वतः को, भुलाना यहाँ व्यर्थ संताप को,

नई ये हवाएं कहें क्या सुनो तो, सुनो थाप को वक्त की चाप को ||

तजो लाज सारी करो कर्म अच्छे, रहोगे जहां में तभी शान से |

न लेना किसी का न देना किसी का, जिलाता यही मार्ग सम्मान से,

बिना कर्म पाते सभी दुःख देखो,…

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Posted on November 5, 2016 at 10:53pm — 9 Comments

माता मैं ना जाऊँगा

कितने कष्ट सहे हैं तूने , कैसे मुझे पढ़ाया है,

तुझे छोड़कर घर से बाहर, मैंने कदम बढाया है |

अनचाहे ही माता तुझको , मैंने आज रुलाया है

भाग्य विधाता ने भी देखो, कैसा खेल रचाया है ||

 

 

रुक जाता मैं माता क्षणमें, बस कहने की देरी थी,

जाऊँ मैं परदेस मगर माँ, ये जिद भी तो तेरी थी |

देवों को नित पूजा तूने , माला भी नित फेरी थी,

तुझको छोड़ कहीं जाऊँ मैं, ये ईच्छा कब मेरी थी ||

 

 

दमकुंगा बन कुंदन लेकिन, काम न तेरे…

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Posted on September 17, 2016 at 9:30pm — 13 Comments

हर कली अब कमल हो रही है

212  212  212  2

 

जिन्दगी अब सरल हो रही है

बात हर इक गजल हो रही है 

 

दलदली हो चुकी है जमीं पर,

हर कली अब कमल हो रही है

 

तितलियाँ भर रहीं हैं उड़ानें

नीति बेशक सफल हो रही है

 

आ रहा है कहीं से उजाला

रौशनी आजकल हो रही है

 

मखमली हो रही हैं हवाएं

मेंढकी भी विकल हो रही है

 

है दरोगा बड़ा लालची वो

धारणा अब अटल हो रही है

 

मौलिक/अप्रकाशित.

Posted on July 28, 2016 at 11:00pm — 15 Comments

Comment Wall (24 comments)

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At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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