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Hari Prakash Dubey
  • Male
  • Haridwar,Uttarakhand
  • India
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narendrasinh chauhan commented on Hari Prakash Dubey's blog post रिश्तों का सच
"बहोत खूब सुन्दर रचना । हार्दिक बधाई ।"
Sep 12
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Hari Prakash Dubey's blog post रिश्तों का सच
"आ. भाई हरि प्रकाश जी, अच्छी कथा हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Sep 12
TEJ VEER SINGH commented on Hari Prakash Dubey's blog post रिश्तों का सच
"हार्दिक बधाई आदरणीय हरि प्रकाश दुबे जी।बेहतरीन लघुकथा।विवाहित जीवन की सच्चाई थोड़ी कड़वी है क्योंकि आदमी को शादी के बाद बीवी और माँ के बीच तालमेल बिठाने में बहुत कशमकश का सामना करना पड़ता है।"
Sep 11
Samar kabeer commented on Hari Prakash Dubey's blog post रिश्तों का सच
"जनाब हरिप्रकाश दुबे जी आदाब, बहुत समय बाद आपको पटल पर देखकर प्रसन्नता हुई,इतने दिन कहाँ रहे भाई? बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 11
विनय कुमार commented on Hari Prakash Dubey's blog post रिश्तों का सच
"वाह, वाह, बहुत गजब की लघुकथा लिखी है आपने, शानदार. आखिरी पैरा ने तो रचना में चार चाँद लगा दिया. बहुत बहुत बधाई आ हरी प्रसाद दुबे जी इस बेहतरीन रचना के लिए"
Sep 10
Hari Prakash Dubey posted a blog post

रिश्तों का सच

आज उसे अपने वादे के मुताबिक अपनी पत्नी के साथ पास के एक माॅल में ही फिल्म देखने जाना था। कुछ ज्यादा उत्साहित तो नहीं था, लेकिन फिर भी अपनी पत्नी के लिए कुछ 'खास' करने की खुशी उसके चेहरे पर दिखाई दे रही थी। आॅफिस की नोंक झोंक और रास्ते में ट्रैफिक की रोक टोक जैसी बाधाओं को पार कर, जब वो घर पहुंचा तो अत्याधिक शांति पाकर थोड़ा ठिठक सा गया। हाॅल में घुसते ही, एक जाना पहचाना चेहरा जो शायद कुछ किलोमीटर दूर रहता था, सामने आ गया।"अरे... मां तुम?""हां, आज तुम दोनों की सालगिरह है ना। मैंने सोचा तुम्हें…See More
Sep 10
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"aabhar aadarniya surender insan ji 1SADAR "
Mar 31
surender insan commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय आपकी रचना पढ़ी । बहुत उम्दा। अच्छा शीर्षक रखा आपने। कामयाब रचना। हर सिक्के के दो पहलू होते है अक्सर एक ही देखा जाता है। और जब दूसरा पहलू सामने आता है तो सच्चाई से मुह मोड़ा जाता है। आपकी रचना में व्यंग्य भी है और एक सार्थक संदेश भी । बहुत बहुत…"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय Sheikh Shahzad Usmani साहब, आपने रचना का मर्म समझा और आपका समीक्षात्मक विवेचन लाजवाब है ! एक प्रश्न मन में आ रहा है कि क्या यह हरदम जरूरी है कि लघुकथा का अंत सकारात्मक ही होना चाहिए? क्या सहज भाव काफी नही है? क्या इस तरह हम इस विधा को नैतिक…"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय Samar kabeer साहब, उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत धन्यवाद!  सादर अभिवादन।"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीया     KALPANA BHATT ('रौनक़') जी, इसे दुसरे व्यंगात्मक दृष्टिकोण से देखिये की एक गृहणी जिसे व्यापार की समझ नहीं है और वह समाधान देने की कोशिश कर रही है पर समस्याओं को सुनते ही उसे समझ ही नहीं आता की क्या करे तो वह पिंड…"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय Mohammed Arif साहब शुक्रिया आपका, पूरी कोशिश करूंगा आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का! सादर!"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी, यह समाधान लगता है आपको पसंद नहीं आया, निवेदन है एक बार आप इसे फिर से पढ़ें,इससे मुझे फिर से आपकी राय जानने का मौका मिलेगा , हार्दिक आभार आपका ! सादर।"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
" आदरणीय VIRENDER VEER MEHTA Bhai साहब आपने कई बार समझाया था कि whatsapp पर कलाकारी मत करो,यह फिर से उसी गलती का खामियाजा है:-) क्या लघुकथा vayangaatmak नहीं हो सकती है, यह जिज्ञासा है ! रचना पर आपकी अमूल्य टिप्पणी के लिए आभार ! सादर!"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"somesh kumar जी, आपकी बात शत प्रतिशत सही है,यह मजाक - मजाक में मैंने ही हिंगलिश में अपने कुछ फ्रेंड्स ग्रुप में ब्रॉडकास्ट कर दी थी पर शब्द इतने विस्तारित नहीं थे ,दरअसल लैपटॉप की हार्ड डिस्क क्रैश हो गई है और मैं उस समय नॉएडा में था ,सेल फोन…"
Mar 29
VIRENDER VEER MEHTA commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"भाई सोमेश कुमार जी से सहमत भाई हरी प्रकाश दुबे जी। रचना का मूल भाग वाहट्स एप्प पर कई नामों से नजर आ रहा है। वैसे भी कथा एक व्यंग से आगे नहीं बढ़ पाई है। और व्यंग्य कितना कारगर है ये तो कोई वरिष्ठ साहित्यकार ही बता सकता है। बरहाल प्रयास के लिये मेरी…"
Mar 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Haridwar Uttarakhand
Native Place
Haridwar
Profession
Service
About me
DPJ MBA

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रिश्तों का सच

आज उसे अपने वादे के मुताबिक अपनी पत्नी के साथ पास के एक माॅल में ही फिल्म देखने जाना था। कुछ ज्यादा उत्साहित तो नहीं था, लेकिन फिर भी अपनी पत्नी के लिए कुछ 'खास' करने की खुशी उसके चेहरे पर दिखाई दे रही थी। आॅफिस की नोंक झोंक और रास्ते में ट्रैफिक की रोक टोक जैसी बाधाओं को पार कर, जब वो घर पहुंचा तो अत्याधिक शांति पाकर थोड़ा ठिठक सा गया। हाॅल में घुसते ही, एक जाना पहचाना चेहरा जो शायद…

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Posted on September 10, 2018 at 3:00pm — 5 Comments

समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे

राहुल ने जैसे ही रात को घर में कदम रखा वैसे ही उसका सामना अपनी धर्मपत्नी ‘कविता’ से हो गया । उसे देखते ही वह बोली “देख रही हूं आजकल, तुम बहुत बदल गए हो, मुझसे आजकल ठीक से बात भी नहीं करते हो ।”

 

नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, बस जरा काम का बोझ कुछ ज्यादा ही लग रहा है ।”

 

ये बहाना तो तुम कई दिनों से बना रहे हो, हाय राम ! कहीं तुम मुझसे कुछ छुपा तो नहीं रहे हो, “कौन है वो करमजली?”

 

यह सुनते ही राहुल का पारा चढ़ गया उसने झुंझुलाते हुए कहा “कविता,…

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Posted on March 27, 2018 at 8:23pm — 18 Comments

लाल सलाम: लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे

घने जंगलों के बीच जगह जगह लाल झंडे लगे हुए थे. सैनिकों की जैसी वर्दी में कुछ लोग आदिवासियों को समझा रहे थे, “सुनो इस जंगल, जमीन और सारे संसाधनों पर सिर्फ तुम्हारा और तुम्हारा ही हक़ है, इन पूंजीपतियों के और इनकी रखैल सरकार के खिलाफ, हम तुम्हारे लिए ही लड़ रहें है, इनको तो हम नेस्तनाबूद कर देंगें !”

“पर कामरेड अब तो सरकार हम पर ध्यान दे रही है, सड़क पानी उद्योग की व्यवस्था भी कर रही है, क्यों न इस लड़ाई को छोड़ दिया जाए, वैसे भी सालों से कितना खून बह रहा…

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Posted on August 4, 2017 at 11:43pm — 3 Comments

फिर भी :कविता :हरि प्रकाश दुबे

कितनी  सहज हो तुम

कोई रिश्ता नही

मेरा ओर तुम्हारा

फिर भी

अनगिनत पढ़ी जा रही हो,मुझे

बिन कुछ कहे

बस मुस्कुरा कर

अनवरत सुनी जा रही हो ,मुझे

बस यही अहसास काफी है

संपूर्ण होने का,मेरे लिए !!

"मौलिक व अप्रकाशित"

© हरि प्रकाश दुबे

Posted on August 2, 2017 at 11:30pm — 2 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 10:17pm on November 16, 2017, Manoj kumar shrivastava said…

क्षमा चाहता हूॅं आदरणीय मैं इस मंच पर सतत नहीं था।

At 7:01pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 10:39am on January 23, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
स्वागत है आपका आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी. आपकी मित्रता एक सम्मान है मेरे लिए।
सादर।
At 4:56pm on January 9, 2015, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय हरिप्रकाश जी ..आपका मित्र होना मेरे लिए सुखद है ..आपकी रचना को माह की श्रेष्ठ  रचना का सम्मान मिला इस सफलता के लिए आपको ढेर सारी बधाई सादर 

At 7:52pm on January 7, 2015, harivallabh sharma said…

आदरणीय Hari Prakash Dubey साहब स्वागत आपका, एवं माह की श्रेष्ठ आपकी रचना हेतु चयनित होने पर हार्दिक बधाई स्वीकारें..सादर.

At 5:11pm on January 3, 2015, vikram singh saini said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय हरि प्रकाश जी

At 9:55pm on December 29, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय  हरी प्रकाश दुबे  जी .... नमस्कार .... क्षमा चाहता हूँ लाइव चैट पर आपका मेसेज देख नहीं पाया तब मैं राहुल दांगी जी की ग़ज़ल पढ़ कर उस पर टीप लिख रहा था ... सादर 

At 11:51pm on December 15, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय  हरी प्रकाश दुबे  जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना " कविता : तुम्हारा घोंसला" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:34pm on November 20, 2014, Rita Gupta said…

धन्यवाद ,आभार आपका। 

At 5:57pm on November 10, 2014, vijay nikore said…

मित्रता का हाथ बढ़ाने के लिए आभार।

सादर,

विजय निकोर

 
 
 

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