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अजय गुप्ता
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कैलेंडर

नौ तारीख तक कैलेंडर न आने से असुविधा होती है। यदि पहले से निर्धारित हो और 1-2 तारीख तक कैलेंडर आ जाए तो आसानी हो जाये।उम्मीद है आयोजक इस और ध्यान देंगेContinue

Started Apr 9, 2018

 

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अजय गुप्ता commented on अजय गुप्ता's blog post एक ग़ज़ल (वैलेंटाइन डे स्पेशल)
"जी, शुक्रिया। "
8 hours ago
Samar kabeer commented on अजय गुप्ता's blog post एक ग़ज़ल (वैलेंटाइन डे स्पेशल)
"'प्रेम पथ पर अब कहाँ जीवन विकल्पों के बिना ' यूँ कर लें ।"
11 hours ago
अजय गुप्ता commented on अजय गुप्ता's blog post एक ग़ज़ल (वैलेंटाइन डे स्पेशल)
"आदरणीय समर साहब आप ने बहुत उत्तम सुझाव दिया जो निश्चित रूप से लय बढ़ाएगा। लेकिन इससे इता का ऐब आ जायेगा। कृपया मार्गदर्शन करें।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on अजय गुप्ता's blog post एक ग़ज़ल (वैलेंटाइन डे स्पेशल)
"जनाब अजय गुप्ता जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'प्रेम पथ पर अब विकल्पों के बिना जीवन नहीं' इस मिसरे में तनाफ़ुर देखें,'नहीं की जगह "कहाँ" कर सकते हैं ।"
Saturday
अजय गुप्ता posted a blog post

एक ग़ज़ल (वैलेंटाइन डे स्पेशल)

एक ग़ज़ल।**********बँध गई हैं एक दिन से प्रेम की अनुभूतियाँबिक रही रैपर लपेटे प्रेम की अनुभूतियाँशाश्वत से हो गई नश्वर विदेशी चाल मेंभूल बैठी स्वयं को ऐसे प्रेम की अनुभूतियाँप्रेम पथ पर अब विकल्पों के बिना जीवन नहींआज मुझ से, कल किसी से, प्रेम की अनुभूतियाँपाप से और पुण्य से हो कर पृथक ये सोचिएलज्जा में लिपटी हैं क्यों ये प्रेम की अनुभूतियाँपरवरिश बंधन में हो तो दोष किसको दीजियेकैसे पहचानेंगे बच्चे प्रेम की अनुभूतियाँ#मौलिक व अप्रकाशितSee More
Feb 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अजय गुप्ता's blog post एक ग़ज़ल (हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया)
"आ. भाई अजय जी ,अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Feb 8
अजय गुप्ता commented on अजय गुप्ता's blog post एक ग़ज़ल (हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया)
"शुक्रिया समर साहब।"
Feb 7
Samar kabeer commented on अजय गुप्ता's blog post एक ग़ज़ल (हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया)
"जनाब अजय गुप्ता जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 7
अजय गुप्ता posted a blog post

एक ग़ज़ल (हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया)

हिलता है तो लगता ज़िंदा है सायालेकिन चुप है, शायद गूँगा है सायाकहने में तो है अच्छा हमराही परसिर्फ़ उजालों में सँग होता है सायासूरज सर पर हो तो बिछता पाँवों मेंआड़ में मेरी धूप से बचता है सायाअसमंजस में हूँ मैं तुमसे ये सुनकरअँधियारे में तुमने देखा है सायावो पौधा महफूज़ रहे पर फले नहींजिस ऊपर बरगद का रहता है सायामेरे सिवा ये सबके गले से लगता हैकैसे मानूँ मेरा अपना है सायागाँव में साये खुल्ले-खुल्ले रहते हैंशहर में तो साये पर गिरता है सायाबड़े नसीबों वाले हैं वो लोग 'अजेयजिनके सर पर मात-पिता का है…See More
Feb 7
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"यादों को सब्ज़ करती हवाएँ मुझे न दोअब ठूँठ ही भला हूँ फ़ज़ाएँ मुझे न दो जब से तुम आई पास खिली मेरी ज़िंदगीफिर बुझ न जाए रंग खलाएँ मुझे न दो कहते हो मेरे साथ चलो जाम छोड़ करअपना बना के अपनी बलाएँ मुझे न दो आगे बढूँ खुदाया मुझे दो वो हौंसलापीछे न हटने…"
Jan 26
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"फ़र्क़**** चरर्रर्रर्रर.....चरर्रर्रर्रर.....चर्रर्रर।सुमित ने कार का ब्रेक पैडल दबा कर छोड़ा, फिर दबाया, छोड़ा और दबाया। गाड़ी चरचरा कर आवाज़ करती हुई रुक गई। एक क्षण को उसके और उसके साथ वाली सीट पर बैठी पत्नी मानसी के होश फ़ाख्ता हो गए। अभी कुछ क्षण पहले…"
Dec 30, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"बहुत अलहदा अशआर। सुंदर ग़ज़ल शिज्जू जी। मुबारक"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"रवि जी बहुत उम्दा ग़ज़ल। बहुत पसंद आई। बधाई"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"अतेंद्र जी अच्छी ग़ज़ल हुई। मुबारकबाद"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"जी, क्या बात कही। शुक्रिया।"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
""भी" जानबूझ कर लिखा है। राजशाही में तो हुक्मरां खुद को विधाता समझता ही है, जम्हूरियत में भी ऐसा ही हो गया। यह कहने का प्रयास है।"
Dec 28, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Karnal (Haryana)
Native Place
Karnal
Profession
Business
About me
ग़ज़ल, कविता, लघुकथा लेखन में रूचि. 3 ऑनलाइन पुस्तकें प्रकाशित. एक काव्य संग्रह हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित. parivartaaajkal.com पर 'अजय की कलम' के शीर्षक से नियमित कॉलम

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एक ग़ज़ल (वैलेंटाइन डे स्पेशल)

एक ग़ज़ल।

**********

बँध गई हैं एक दिन से प्रेम की अनुभूतियाँ

बिक रही रैपर लपेटे प्रेम की अनुभूतियाँ

शाश्वत से हो गई नश्वर विदेशी चाल में

भूल बैठी स्वयं को ऐसे प्रेम की अनुभूतियाँ

प्रेम पथ पर अब विकल्पों के बिना जीवन नहीं

आज मुझ से, कल किसी से, प्रेम की अनुभूतियाँ

पाप से और पुण्य से हो कर पृथक ये सोचिए

लज्जा में लिपटी हैं क्यों ये प्रेम की अनुभूतियाँ

परवरिश बंधन में हो तो दोष किसको दीजिये

कैसे पहचानेंगे…

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Posted on February 14, 2019 at 1:54pm — 4 Comments

एक ग़ज़ल (हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया)

हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया

लेकिन चुप है, शायद गूँगा है साया

कहने में तो है अच्छा हमराही पर

सिर्फ़ उजालों में सँग होता है साया

सूरज सर पर हो तो बिछता पाँवों में

आड़ में मेरी धूप से बचता है साया

असमंजस में हूँ मैं तुमसे ये सुनकर

अँधियारे में तुमने देखा…

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Posted on February 7, 2019 at 12:38pm — 3 Comments

ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)

दिखे हरसूँ अँधेरा है

कहाँ जाने सवेरा है

 

नहीं दिखता कहीं रस्ता

कुहासा है घनेरा है

 

हुनर सीखें नए कैसे

गुरु बिन आज चेरा है

 

चुराता जा रहा साँसें

समय है या लुटेरा है

 

बनाता है जो इंसा को

ये जीवन वो ठठेरा है

 

नहीं शिकवा है साँपों से

डसे जाता सपेरा है

 

नहीं घर रास है मुझको

दिलों में ही बसेरा है

 

तेरा क्या और क्या मेरा

चले माया का फेरा…

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Posted on December 10, 2018 at 7:30pm — 5 Comments

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At 12:18pm on November 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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