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अजय गुप्ता
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अजय गुप्ता's Discussions

कैलेंडर

नौ तारीख तक कैलेंडर न आने से असुविधा होती है। यदि पहले से निर्धारित हो और 1-2 तारीख तक कैलेंडर आ जाए तो आसानी हो जाये।उम्मीद है आयोजक इस और ध्यान देंगेContinue

Started Apr 9, 2018

 

अजय गुप्ता's Page

Latest Activity

अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"लग चुका है जंग इक तो, कुंद से कुदालों मेंऔर काम करना है, दुमकटे उजालों में। मकड़ियाँ उदासी की, रात दिन चिमड़ती हैंयादें तेरी उलझी हैं, दिल में लटके जालों में। हाथ को बना थाली, प्याज़ रख लिया कच्चाहोती जो ग़रीबी वो, देख लो निवालों में। भीड़ में ही चलते…"
7 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"  वाह भाई सतविंदर जी बहुत सुंदर रूपक रचे हैं एवं बहुत ही मधुर गीत बना है। बधाई"
Jul 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"  बहुत सुंदर रचना हुई अखिलेश जी हार्दिक बधाई"
Jul 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"  आदरणीय सौरभ पांडे जी रचना पर आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक आभार"
Jul 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
" बहुत आभार बहुत आभार भाई अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी"
Jul 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"आभार प्रतिभा जी"
Jul 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
" धन्यवाद सतविंदर भाई"
Jul 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
" शुक्रिया भाई अमित जी"
Jul 21
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत सुंदर"
Jul 20
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"शुक्रिया भाई उस्मानी जी। गाँठें का आपका बिंदु ठीक है। फुलवाड़ी देसज शब्द के रूप में कईं जगह देखने को मिल जाता है"
Jul 20
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"गुलमोहर के रँग (सार छंद) ****************** खिला नहा कर बूटा-बूटा, महकी हर फुलवाड़ी,गुलमोहर की शाखें पहनें, हैं नारंगी साड़ी। ऐसे बरसे मेघ सजन रे, भीगा मेरा तन-मन,कोयल की कूकों से गूँजा, जाग उठा है उपवन। मंद-मंद बहती समीर ने, रँग की गाँठे…"
Jul 20
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"एक सामान्य से प्रयास पर इतनी विस्तृत इस्लाह के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय समर साहब। आपका हर सुझाव ध्यान में रहेगा और निश्चित तौर पर आगे भी अच्छा लिखने में मददगार साबित होगा। अपना स्नेहहस्त यूँ ही बनाये रखें।"
Jun 28
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"एक त्वरित प्रयास हास्य में किया है। किन्तु यदि किसी की भावनाएं या मंच की गरिमा जाने-अनजाने आहत हुई हैं तो अग्रिम क्षमा प्रार्थना सहित प्रबंधकों से निवेदन है कि वो कभी भी इसे हटा सकते हैं।"
Jun 28
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-108
"यार इक मेरा पहलवान था कंजर निकलाजब चुकाने को कहा कर्ज़ तो मुग्दर निकला मैंने जिस आँख में झाँका वही भैंगी निकलीमैंने जिस हाथ को चूमा वही खंजर निकला इश्क़ के किस्से जिसे अपने सुनाए चढ़ कर,फूटी किस्मत वो तो माशूक़ का शौहर निकला दिलरुबा का है कोई भाई…"
Jun 28
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"मास्टर जहाँ हाथ लगायेगा वहाँ से मास्टरपीस ही निकलेगा।  बहुत ही बढ़िया और बहुत ही बधाई आदरणीय समर साहब"
May 31
dandpani nahak left a comment for अजय गुप्ता
"आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब आपने मेरी ग़ज़ल पढ़ी उसे सराहा उसके लिए बहुत शुक्रिया"
May 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Karnal (Haryana)
Native Place
Karnal
Profession
Business
About me
ग़ज़ल, कविता, लघुकथा लेखन में रूचि. 3 ऑनलाइन पुस्तकें प्रकाशित. एक काव्य संग्रह हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित. parivartaaajkal.com पर 'अजय की कलम' के शीर्षक से नियमित कॉलम

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एक ग़ज़ल (वैलेंटाइन डे स्पेशल)

एक ग़ज़ल।

**********

बँध गई हैं एक दिन से प्रेम की अनुभूतियाँ

बिक रही रैपर लपेटे प्रेम की अनुभूतियाँ

शाश्वत से हो गई नश्वर विदेशी चाल में

भूल बैठी स्वयं को ऐसे प्रेम की अनुभूतियाँ

प्रेम पथ पर अब विकल्पों के बिना जीवन नहीं

आज मुझ से, कल किसी से, प्रेम की अनुभूतियाँ

पाप से और पुण्य से हो कर पृथक ये सोचिए

लज्जा में लिपटी हैं क्यों ये प्रेम की अनुभूतियाँ

परवरिश बंधन में हो तो दोष किसको दीजिये

कैसे पहचानेंगे…

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Posted on February 14, 2019 at 1:54pm — 4 Comments

एक ग़ज़ल (हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया)

हिलता है तो लगता ज़िंदा है साया

लेकिन चुप है, शायद गूँगा है साया

कहने में तो है अच्छा हमराही पर

सिर्फ़ उजालों में सँग होता है साया

सूरज सर पर हो तो बिछता पाँवों में

आड़ में मेरी धूप से बचता है साया

असमंजस में हूँ मैं तुमसे ये सुनकर

अँधियारे में तुमने देखा…

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Posted on February 7, 2019 at 12:38pm — 3 Comments

ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)

दिखे हरसूँ अँधेरा है

कहाँ जाने सवेरा है

 

नहीं दिखता कहीं रस्ता

कुहासा है घनेरा है

 

हुनर सीखें नए कैसे

गुरु बिन आज चेरा है

 

चुराता जा रहा साँसें

समय है या लुटेरा है

 

बनाता है जो इंसा को

ये जीवन वो ठठेरा है

 

नहीं शिकवा है साँपों से

डसे जाता सपेरा है

 

नहीं घर रास है मुझको

दिलों में ही बसेरा है

 

तेरा क्या और क्या मेरा

चले माया का फेरा…

Continue

Posted on December 10, 2018 at 7:30pm — 5 Comments

Comment Wall (2 comments)

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At 12:56pm on May 26, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अजय गुप्ता जी आदाब आपने मेरी ग़ज़ल पढ़ी उसे सराहा उसके लिए बहुत शुक्रिया
At 12:18pm on November 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आ. आनीस जी, अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई।"
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"आ.भाई पंकज जी, बेहतरीन बंद के साथ सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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"आ. भाई मोहन जी, सुंदर प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
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"आ. भाई गुरप्रीत जी,अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
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"आ. अंजलि जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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"आ. दण्डपाणि जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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"आ. राजेश दी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है ।"
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"आ. भाई मुनीश जी, प्रयास आच्छा है हार्दिक बधाई ।"
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"आ. भाई नादिर जी, अच्छी गजल के लिए हार्दिक बधाई ।"
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"आ. भाई असद जैदी जी, गजल का सुंदर प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई ।"
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"लोग कम हुए आना, मस्जिदों शिवालों मेंढूँढते खुदा अब वो, डूब मय के प्यालों में।१।***यूँ वफा कहाँ…"
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