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अजय गुप्ता
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कैलेंडर

नौ तारीख तक कैलेंडर न आने से असुविधा होती है। यदि पहले से निर्धारित हो और 1-2 तारीख तक कैलेंडर आ जाए तो आसानी हो जाये।उम्मीद है आयोजक इस और ध्यान देंगेContinue

Started Apr 9, 2018

 

अजय गुप्ता's Page

Latest Activity

अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"फ़र्क़**** चरर्रर्रर्रर.....चरर्रर्रर्रर.....चर्रर्रर।सुमित ने कार का ब्रेक पैडल दबा कर छोड़ा, फिर दबाया, छोड़ा और दबाया। गाड़ी चरचरा कर आवाज़ करती हुई रुक गई। एक क्षण को उसके और उसके साथ वाली सीट पर बैठी पत्नी मानसी के होश फ़ाख्ता हो गए। अभी कुछ क्षण पहले…"
Dec 30, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"बहुत अलहदा अशआर। सुंदर ग़ज़ल शिज्जू जी। मुबारक"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"रवि जी बहुत उम्दा ग़ज़ल। बहुत पसंद आई। बधाई"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"अतेंद्र जी अच्छी ग़ज़ल हुई। मुबारकबाद"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"जी, क्या बात कही। शुक्रिया।"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
""भी" जानबूझ कर लिखा है। राजशाही में तो हुक्मरां खुद को विधाता समझता ही है, जम्हूरियत में भी ऐसा ही हो गया। यह कहने का प्रयास है।"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई जनाब "ताज साहब।"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"विस्तृत इस्लाह के लिए आभार समर साहब। आप की हर सलाह को अपना लिया है। ज़रीआ और बेरह्म का मुझे पता नहीं था। गिरह में वाक़ई मज़ेदार चूक हुई। :)) ' एक जैसी शक्लो-सूरत की हज़ारों मूर्तियाँ,हाँ ये मुमकिन है अगर इक बार साँचा बन गया' यहां कहने का…"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"शुक्रिया शिज्जू साहब"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"शुक्रिया अनीस जी"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आम-इंसां इसके हाथों का खिलौना बन गया,हुक्मरां ज़म्हूरियत में भी विधाता बन गया। मुफ़्त की हर चीज़ हमको कर रही है आलसी,हम को लगता, चैन से खाने का ज़रिया बन गया। जो बड़े बेफ़िक्र होकर लड़ रहे थे हर चुनाव,फाँस उनके कंठ की ताज़ा नतीजा बन गया। हार से जो, सबकी…"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"बहुत सुंदर अशआर। दूसरा शेर बहुत अच्छा लगा।"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"वाह। बहुत उम्दा अशआर। बधाई"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"अनीस जी अच्छी ग़ज़ल हुई है। मुबारकबाद स्वीकार करें।"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"मोहन जी अच्छी ग़ज़ल हुई। क़ाफिये की भूल हुई है। देखिएगा।"
Dec 28, 2018
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"गजेंद्र जी......वाह, वाह, वाह। हर शेर पर इसके अलावा और कुछ कहने नहीं बनता। बहुत सुंदर अशआर।"
Dec 28, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Karnal (Haryana)
Native Place
Karnal
Profession
Business
About me
ग़ज़ल, कविता, लघुकथा लेखन में रूचि. 3 ऑनलाइन पुस्तकें प्रकाशित. एक काव्य संग्रह हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित. parivartaaajkal.com पर 'अजय की कलम' के शीर्षक से नियमित कॉलम

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अजय गुप्ता's Blog

ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)

दिखे हरसूँ अँधेरा है

कहाँ जाने सवेरा है

 

नहीं दिखता कहीं रस्ता

कुहासा है घनेरा है

 

हुनर सीखें नए कैसे

गुरु बिन आज चेरा है

 

चुराता जा रहा साँसें

समय है या लुटेरा है

 

बनाता है जो इंसा को

ये जीवन वो ठठेरा है

 

नहीं शिकवा है साँपों से

डसे जाता सपेरा है

 

नहीं घर रास है मुझको

दिलों में ही बसेरा है

 

तेरा क्या और क्या मेरा

चले माया का फेरा…

Continue

Posted on December 10, 2018 at 7:30pm — 5 Comments

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At 12:18pm on November 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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