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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post सूर्य उगाने जैसा हो- गीत
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,बहुत सुंदर गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
7 hours ago
Samar kabeer commented on SudhenduOjha's blog post जिसकी चाहत है उसे हूर औ जन्नत देदे।
"जनाब सुधेन्दु ओझा जी आदाब, ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,,कई मिसरे बह्र में नहीं हैं,ओबीओ पर ग़ज़ल की कक्षा का लाभ लें, इस प्रस्तुति पर बधाई आपको ।"
7 hours ago
Samar kabeer commented on babitagupta's blog post पिता वट वृक्ष की तरह होते हैं........[सामाजिक सरोकार]
"मोहतरमा बबीता गुप्ता जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
8 hours ago
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post मुफ़्त की ऑक्सीजन (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
8 hours ago
Samar kabeer commented on Neelam Upadhyaya's blog post पापा तुम्हारी याद में
"मोहतरमा नीलम उपाध्याय जी आदाब,पिता को समर्पित अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
8 hours ago
Samar kabeer commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-1
"जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,कश्मीर के दर्द को बयान करती बहुत गम्भीर और प्रभावशाली कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । दहाड़े--दहाड़ें जनाजों--जनाज़ों बेकसूर--बेक़सूर खून--ख़ून जखीरों--ज़ख़ीरों"
10 hours ago
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- फिर कोई मीठी शरारत हो गई है
"मेरे कहे को मान देने के लिए धन्यवाद ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (न मुँह को फेर के यूं आप जाएं ईद के दिन)
"जी,बहतर है ।"
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Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- फिर कोई मीठी शरारत हो गई है
"'रौशनी में और बर्कत हो गई है'"
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Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- फिर कोई मीठी शरारत हो गई है
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'ढूँढता हर रोज मिलने का बहाना' इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर है 'हर रोज',इस मिसरे को यूँ कर लें तो ये ऐब निकल जायेगा:- 'ढूँढता है रोज़ मिलने का…"
yesterday
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post पतझड़ -  लघुकथा –
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब, अच्छी लघुकथा लिखी आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post चलती का नाम औपचारिकता (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Rakshita Singh's blog post तुम्हारे स्पर्श से....
"मोहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । सातवीं पंक्ति में 'सबालों' को "सवालों" कर लें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post बरसात ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बारिश के मौसम के स्वागत में अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (न मुँह को फेर के यूं आप जाएं ईद के दिन)
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,ईद के मौक़े पर अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । दूसरे शैर के ऊला मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें 'हम मनाएं' । तीसरे शैर के ऊला मिसरे में 'पिछली' शब्द को "पिछले" करना मुनासिब…"
yesterday
Samar kabeer commented on gumnaam pithoragarhi's blog post ग़ज़ल .....
"जनाब गुमनाम जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'परदेश बनाया घर लेकिन' ये मिसरा मात्रा के हिसाब से ठीक है,लेकिन लय में नहीं है,इसे यूँ कर सकते हैं:- 'घर परदेस बनाया लेकिन' तीसरे शैर के ऊला मिसरे में 'ना'…"
yesterday

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Samar kabeer's Blog

'ग़ज़ल कहने जो बैठोगे तो नानी याद आएगी'

(चौथे शैर में तक़ाबल-ए-रदीफ़ नज़र अंदाज़ करे)

नसीहत जो बुज़ुर्गों की न मानी याद आएगी

हमें ता उम्र उनकी सरगरानी याद आएगी

मियाँ मश्क़-ए-सुख़न कर लो नहीं ये खेल बच्चों का

ग़ज़ल कहने जो बैठोगे तो नानी याद आएगी

ज़माने भर की आसाइश के जब सामाँ बहम होंगे

तुझे माँ-बाप की क्या जाँ फ़िशानी याद आएगी

जुड़ी होंगी मज़ालिम की बहुत सी दास्तानें भी

हवेली गाँव की जब ख़ानदानी याद…

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Posted on May 7, 2018 at 12:00pm — 34 Comments

'निलेश जी की ज़मीन में एक ग़ज़ल'

ज़िन्दगी में जो हुआ सूद-ओ-ज़ियाँ गिनता रहा

बैठ कर मैं आज सब नाक़ामियाँ गिनता रहा

बाग़बाँ को और कोई काम गुलशन में न था

फूल पर मंडराने वाली तितलियाँ गिनता रहा

और क्या करता बताओ इन्तिज़ार-ए-यार में

तैरती तालाब में मुर्ग़ाबियाँ गिनता रहा

रोकता कैसे मैं उनको नातवानी थी बहुत

बे अदब लोगों की बस गुस्ताख़ियाँ गिनता रहा

लोग भूके मर रहे थे और यारो उस…

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Posted on May 1, 2018 at 10:49am — 18 Comments

एक ताज़ा ग़ज़ल

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलुन/फ़इलुन

इसलिये आने से कतराते हैं ईमाँ वाले

तेरे कूचे में उधम करते हैं शैताँ वाले

.

ये किसी ख़तरे की आमद का इशारा तो नहीं

ख़्वाब क्यों मुझको दिखाता है वो तूफ़ाँ वाले

.

और सब कुछ यहाँ तब्दील हुआ है लेकिन

घर में दस्तूर हैं अब तक वही अम्माँ वाले

.

बाग़बाँ ने वो सितम तोड़े हैं इनपर देखो

कितने सहमे हुए रहते हैं गुलिस्ताँ वाले

.

रह्म करना किसी बिस्मिल पे गवारा ही…

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Posted on April 6, 2018 at 3:00pm — 28 Comments

'ओबीओ की आठवीं सालगिरह का तुहफ़ा'

फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन



मेरी सारी वफ़ा ओबीओ के लिये

काम करता सदा ओबीओ के लिये




दिल यही चाहता है मेरा दोस्तो

जान करदूँ फ़िदा ओबीओ के लिये




आठ क्या,आठ सो साल क़ाइम रहे

है यही इक दुआ ओबीओ के लिये



मेरे दिल में कई साल से दोस्तो

जल रहा इक दिया ओबीओ के लिये…



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Posted on April 2, 2018 at 3:00pm — 40 Comments

Comment Wall (14 comments)

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At 8:05pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय
समर कबीर महोदय प्रणाम
आपका आदेश सर माथे पर
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

At 9:46pm on February 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय Samar kabeer जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:06am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

janab samar kabeer sahab aadab,    hosla afzayi ke liye shukriya ,  1. ar ka matlab hai agar...aur 2.chhar ka matlab hai  ..khayal.

 
 
 

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