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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कीजियेगा हुस्न वालों से मुहब्बत देख कर )
"बहतर है जनाब ।"
4 hours ago
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कीजियेगा हुस्न वालों से मुहब्बत देख कर )
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब, उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मक़्ते के ऊला मिसरे में 'ही' भर्ती का शब्द है,देखियेगा ।"
7 hours ago
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post नज़्म (इंसानियत का ख़ून )
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,बहुत ही मार्मिक और सच्ची नज़्म,आपने पूरी वारदात को बहुत सलीक़े से नज़्म किया है,हर दर्दमंद इंसान इस पर आब दीद्: है, लेकिन सरकार आज भी ख़ामोश है, हर तरफ़ ये अस्मत दरी होती रहेगी,और हुक्मरां ऐसे ही तमाशा देखते रहेंगे । भाई आपने…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जो किताबों ने दिया वो फ़लसफ़ा अपनी जगह.
"जनाब निलेश 'नूर' साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मतले के दोनों मिसरों में 'ह' ख़फ़ी के क़ाफ़िये आ गए हैं,जो उर्दू के लिहाज़ से ग़लत माने जाते हैं,ये आप जानते भी हैं । दूसरे शैर के सानी मिसरे में…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"जनाब चन्द्रेश जी आदाब,बहुत अच्छी लघुकथा है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post इन्तिजार ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । कुछ सुझाव हैं :- 'दफन'--"दफ़्न" 'इश्क'---"इश्क़" 'चश्म-ऐ----"चश्म-ए-" 'स्याह से ख़्वाब मिले'--"स्याह…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकान्त कविता : अजन्मी कविता
"'प्रत्यक्षदर्शियों' बहुत उम्दा है ।"
12 hours ago
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"सानी मिसरे का सुझाव उत्तम है ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"'जो काम ही न किया उसका इश्तिहार किया' दो बार 'किया' शब्द आ रहा है ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"'जो काम ही न किया उसका इश्तिहार किया' इस मिसरे में 'ही' शब्द खटक रहा है,इसे यूँ करें तो:- "जो काम करते नहीं उसका इश्तिहार किया""
15 hours ago
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post देखा, अनदेखा देखा! (लघुकथा) :
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बहुत ख़ूब वाह, उम्दा लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post एक ताज़ा ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आपका ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on Harash Mahajan's blog post अब ज़माना दे हवा इतनी ज़रा (गैर मुरद्दफ़)
"तज्रिबा इत/फ़ाइलातुन2122,(तज्रिबा 212) ना है सूरत /फ़ाइलातुन2122,मात्रा पतन के साथ देख कर/फाइलुन 212 सही शब्द 'तज्रिबा' है "तज़र्बा" नहीं । बाक़ी ठीक है ।"
Tuesday
Naveen Mani Tripathi commented on Samar kabeer's blog post एक ताज़ा ग़ज़ल
"वाह सर वाह । आपकी ग़ज़लें तो बहुत ही अच्छी होती हैं । आपको पढ़कर नए मफ़हूम मिलते हैं ।       बहुत ही प्रभवशाली प्रस्तुति है । तहे दिल से बधाई ।।"
Tuesday
Samar kabeer commented on Neelam Upadhyaya's blog post योजना
"मोहतरमा नीलम उपाध्याय जी आदाब,बहुत उम्दा रचना,बहतरीन कटाक्ष,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday

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एक ताज़ा ग़ज़ल

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलुन/फ़इलुन

इसलिये आने से कतराते हैं ईमाँ वाले

तेरे कूचे में उधम करते हैं शैताँ वाले

.

ये किसी ख़तरे की आमद का इशारा तो नहीं

ख़्वाब क्यों मुझको दिखाता है वो तूफ़ाँ वाले

.

और सब कुछ यहाँ तब्दील हुआ है लेकिन

घर में दस्तूर हैं अब तक वही अम्माँ वाले

.

बाग़बाँ ने वो सितम तोड़े हैं इनपर देखो

कितने सहमे हुए रहते हैं गुलिस्ताँ वाले

.

रह्म करना किसी बिस्मिल पे गवारा ही…

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Posted on April 6, 2018 at 3:00pm — 28 Comments

'ओबीओ की आठवीं सालगिरह का तुहफ़ा'

फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन



मेरी सारी वफ़ा ओबीओ के लिये

काम करता सदा ओबीओ के लिये




दिल यही चाहता है मेरा दोस्तो

जान करदूँ फ़िदा ओबीओ के लिये




आठ क्या,आठ सो साल क़ाइम रहे

है यही इक दुआ ओबीओ के लिये



मेरे दिल में कई साल से दोस्तो

जल रहा इक दिया ओबीओ के लिये…



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Posted on April 2, 2018 at 3:00pm — 36 Comments

'ग़ालिब' की ज़मीन में ग़ज़ल नम्बर 2'

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फेलुन

लोग हैरान थे,रिश्ता सर-ए-महफ़िल बाँधा

उसने जब अपनी रग-ए-जाँ से मेरा दिल बाँधा

हर क़दम राह मलाइक ने दिखाई मुझ को

मैंने जब अज़्म-ए-सफ़र जानिब-ए-मंज़िल बाँधा

जितने हमदर्द थे रोने लगे सुनकर देखो

अपने अशआर में जब मैंने ग़म-ए-दिल बाँधा

जल गये जितने सितारे थे फ़लक पर यारो

अपनी ज़ुल्फ़ों में जब उसने मह-ए-कामिल बाँधा

शुक्र तेरा करें किस मुंह से…

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Posted on March 27, 2018 at 12:31pm — 22 Comments

'मासूम पे इल्ज़ाम लगाना ही नहीं था'

मफ़ऊल मफ़ाईल मफ़ाईल फ़ऊलुम

सोई हुई ख़्वाहिश को जगाना ही नहीं था

ख़्वाबों में मेरे आपको आना ही नहीं था

बाग़ी है अगर तुझ से तो अब कैसी शिकायत

औलाद का हक़ तुझको दबाना ही नहीं था

वो होके पशेमान यही बोल रहे हैं

मासूम पे इल्ज़ाम लगाना ही नहीं था

सब,झूट यही कह के यहाँ बोल रहे थे

सच बोलने वालों का ज़माना ही नहीं था

बहरों की ये बस्ती है "समर" जान गये थे

फिर तुमको यहाँ शोर…

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Posted on March 19, 2018 at 2:00pm — 37 Comments

Comment Wall (14 comments)

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At 8:05pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय
समर कबीर महोदय प्रणाम
आपका आदेश सर माथे पर
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

At 9:46pm on February 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय Samar kabeer जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:06am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

janab samar kabeer sahab aadab,    hosla afzayi ke liye shukriya ,  1. ar ka matlab hai agar...aur 2.chhar ka matlab hai  ..khayal.

 
 
 

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"बहतर है जनाब ।"
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"आ.विजय निकोरे साहिब ,दिल के एहसास बयान करती सुन्दर रचना हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।"
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"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब, उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मक़्ते के ऊला…"
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Tasdiq Ahmed Khan commented on Neelam Upadhyaya's blog post बेटी का विवाह
"मुहतर्मा नीलम साहिबा ,दिल को छू लेने और संदेश देती सुन्दर लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।"
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