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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post यूँ इश्क का इक सुकून हूँ मैं..
"//कौन * जी ये काफ़िया गलत है । इसपर जानकारी चाहिए थी // इस पर क्या जानकारी चाहिए? //क्या किसी शब्द का एक मिसरे दो बार आना दोष पूर्ण होता है// किसी शब्द का एक मिसरे में दो बार आना,दोष भी है,और हुनर भी है,आपके मिसरे में ये उचित नहीं है । 'मैं…"
10 hours ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'ख़बर  मुझको  है तेरे इश्क़ की बलन्दी से' इस मिसरे की बह्र चेक करें ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post अंतिम स्वीकार ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on Jitendra sharma's blog post लौट के आये उड़ान से - ग़ज़ल
"जनाब जितेंद्र शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'जो हौसला लिये थे चले आशियान से' इस मिसरे में क़ाफ़िया दुरुस्त नहीं सहीह  शब्द है, 'आशियाना' देखियेगा  । 'है लग रहा बदलती हवा के रुझान…"
15 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post यूँ इश्क का इक सुकून हूँ मैं..
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,ग़ज़ल अभी समय चाहती है,बहरहाल बधाई स्वीकार करें । दूसरे शैर के सानी में दो बार "मैं"? 'अभी भी शक है कि कौन हूं मैं' इस मिसरे में क़ाफ़िया दोष है ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post थम रही हैं क्यों नहीं ये सिसकियाँ (२५ )
""दुख़्त" दुख़्तर का मुख़फ़्फ़फ़् नहीं "दुख़" है,देखियेगा ।"
yesterday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post थम रही हैं क्यों नहीं ये सिसकियाँ (२५ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'अब घरों में भी कहाँ महफ़ूज़ है ' इस मिसरे में 'है' को "हैं" कर लें । 'दुख्त* पर लागू पुराने क़ायदे' इस मिसरे…"
Wednesday
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post करो कुछ याद उनको जो गये हैं- ग़ज़ल
"जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
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Samar kabeer commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (हम अपनी ज़िंदगी भर ज़िंदगी बर्दाश्त करते हैं)
"जनाब बलराम धाकड़ जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतला तो आप पर फिट बैठता है,हा हा हा.. 'बस अपने दो निवालों के लिए मीलों तलक उड़कर, कबूतर चिट्ठियों की तस्करी बर्दाश्त करते हैं' ये शैर तार्किकता की दृष्टि से मुनासिब…"
Wednesday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post बच्चा है तू (लघुकथा )
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post इजाजत हो तुम्हारी तो चिरागों को बुझा लूँ मैं
"जनाब डॉ. आशुतोष मिश्रा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'उन्हें बस हो खबर हर राज आँखों से जता लूँ मैं' इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें, 'हर' की जगह "तो" कर लें तो ऐब निकल जायेगा । 'तुम्हारे…"
Wednesday
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post मत समझना मैं...(गजल)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post क्यूँ हर्फ़ अता करते हो, ख़ैरात की तरह-----ग़ज़ल
"अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'लफ़्ज़ों में अगर कहना हो "क्या हो मेरे लिए"' इस मिसरे में 'लफ़्ज़' का बहुवचन "अल्फ़ाज़" होता है,देखियेगा ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ज़िंदगी ने कुछ सबक़ हमको सिखाकर दम लिया ( २४ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले के दोनों मिसरों में 'ज़िन्दगी'शब्द खटक रहा है,अगर ऊला में 'शाइरी' कर दें तो? ठीक इसी तरह दूसरे शैर के दोनों मिसरों में…"
Tuesday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"बहुत बहुत शुक्रिया मुहतरमा अनीता शर्मा जी ।"
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'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन

1212     1122     1212      22

ग़ज़ल

उठा है ज़ह्न में सबके सवाल,किसकी है

तू जिस पे नाच रहा है वो ताल किसकी है

खड़े हुए हैं सर-ए-राह आइना लेकर

हमारे सामने आए मजाल किसकी है

ज़रा सा ग़ौर करोगे तो जान जाओगे

वतन को आग लगाने की चाल किसकी है

हमें तू बेवफ़ा कहता है ,ये तो देख ज़रा

लबों पे सबके वफ़ा की मिसाल किसकी…

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Posted on January 16, 2019 at 8:30pm — 20 Comments

"तरही ग़ज़ल नम्बर 4

नोट:-

तरही मुशायरा अंक-100 में 87 ग़ज़लें पोस्ट हुईं,मेरी इस ग़ज़ल में जो क़वाफ़ी इस्तेमाल हुए हैं वो बिल्कुल नये हैं ।

पहले सिल पर घिसा गया है मुझे

फिर जबीं पर मला गया है मुझे

जाल हूँ इक सियासी लीडर का

नफ़रतों से बुना गया है मुझे

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे

कहदो तक़दीर से बखेरे नहीं

करके वो एक जा गया है…

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Posted on October 24, 2018 at 5:54pm — 40 Comments

"हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल

कितनी प्यारी ये मनभावन हिन्दी है

भारत की वैचारिक धड़कन हिन्दी है

जो लिखता हूँ हिन्दी में ही लिखता हूँ

मेरी ख़ुशियों का घर आँगन हिन्दी है

रफ़ी, लता,मन्नाडे को तुम सुन लेना

इन सबकी भाषा और गायन हिन्दी है

भारत में कितनी हैं भाषाएँ लेकिन

सारी भाषाओँ का यौवन हिन्दी है

पहले मैं अक्सर उर्दू में लिखता था

अब तो मेरा सारा लेखन हिन्दी है

मुझको तो लगती है ये भाषा…

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Posted on September 13, 2018 at 11:39pm — 33 Comments

"बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"

ग़ज़ल

बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ

मैं नफ़रतों का ही क़िस्सा तमाम करता चलूँ

अब आख़िरत का भी कुछ इन्तिज़ाम करता चलूँ

दिल-ओ-ज़मीर को अपने मैं राम करता चलूँ

जहाँ जहाँ से भी गुज़रूँ ये दिल कहे मेरा

तेरा ही ज़िक्र फ़क़त सुब्ह-ओ-शाम करता चलूँ

अमीर हो कि वो मुफ़लिस,बड़ा हो या छोटा

मिले जो राह में उसको सलाम करता चलूँ

गुज़रता है जो परेशान मुझको करता है

तेरे ख़याल से…

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Posted on September 1, 2018 at 3:12pm — 52 Comments

Comment Wall (21 comments)

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At 11:38pm on February 10, 2019, Rafique Nagori said…

बहुत अच्छा और उस्तादाना फन से भरा हुआ कलाम है समर साहब का

At 10:48pm on January 26, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय आपकी कृपा है
At 9:05am on January 25, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय जनाब समर कबीर साहब
प्रणाम
तरही मुशायरा 103 के लिए प्रयास किया है

इत्तिला की फिर से वो न आएँ मुझे न दो
मैं जा चुका हूँ अब तो सदाएँ मुझे न दो

खामोश सच है,झूठ हुआ बातुनी बहुत
उस पे चुप रहने की अदाएँ मुझे न दो

मैं थक चुका हूँ उस का इन्तजार कर कर के
अब और जिंदगी की दुआएँ मुझे न दो

इस बार जो गया न कभी लौट पाउंगा
'हर बार दूर जा के सदाएँ मुझे न दो

आवाम हूँ मुल्क का कुछ तो रहम करो
सब के जुर्म की अब तो सजाएँ मुझे न दो

कृपा कर सुझाव देवें
At 12:57pm on January 14, 2019, गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' said…

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे ---क्या बात है समर कबीर साहेब लाजवाब अशआर हुए हैं | दाद ही दाद क़ुबूल फ़रमाएं | 

At 11:38am on December 25, 2018, Surkhab Bashar said…

जनाब समर कबीर साहब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही है आपने 

हर शेर का़बिले दाद है 

  • मुबारक बाद कुबूल करें
At 11:39pm on August 19, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय प्रणाम!
एवम् शुक्रिया मैं निरंतर सुधर करूँगा
At 6:09pm on August 7, 2018, Kishorekant said…

आपका आभार आदरणीय समर कबीर जी । आप की सुचना के अनुसार अभ्यास शुरु कर दिया है । आशा है आगे भी आपका मार्गदर्शन मिलता रहेगा ।भूलों के लिये दरगुजर करें ।

At 8:05pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय
समर कबीर महोदय प्रणाम
आपका आदेश सर माथे पर
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
 
 
 

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डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी सादर अभिवादन चित्रानुरूप बहुत ही सुंदर दोहे सटीक भाव बहुत बहुत बधाई"
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"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब।"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है
"आद0 दिगंबर नासवा जी सादर अभिवादन। आभार आपका"
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