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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८१
"भाई, चूँकि "सदफ़" शब्द अरबी भाषा का है,और अरबी भाषा के शब्दों में अमूमन इज़फ़त नहीं लगाई जाती,और 'सदफ़' का वज़्न भी 12 है न कि 'सद्फ'21,जैसे मिसाल के तौर पर शब्द है "अमल" अब इसमें इज़फ़त लगाने पर इसे 'अमले'…"
3 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post देर तक ....
"जनबसुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८२
"जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८१
"एक बात बताना भूल गया । ' दुख में फ़ौरन भी दवा काम नहीं करती है' इस मिसरे में 'भी' शब्द की जगह "ही" करना उचित होगा ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८१
"जनाब राज़ नवादवी साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'बूदे आफ़ाक़ी की दरमाँ नहीं है दुनिया में' इस मिसरे में 'की' को "का" कर लें । ' सदफ़े नाचीज़ में तख़लीक़े गुहर होने तक' इस मिसरे में…"
15 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on Surkhab Bashar's blog post ग़ज़ल: फिर ज़िंदगी से अपनी पहचान हो न जाए
"जनाब सुरख़ाब बशर साहिब आदाब,ओबीओ के तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । '  मज़लूम पे सितम के तुम ती मत चलाओ' इस मिसरे में टंकण त्रुटि है 'ती' को "तीर" कर लें । 'अपना समझ के जिस की…"
15 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"//  अहहहा// भाई अजय जी आदाब,इतनी मुख़्तसर टिप्पणी?ये तो ओबीओ की परिपाटी नहीं है,बहरहाल आपका शुक्रिया ।"
yesterday
अजय गुप्ता commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"अहहहा"
yesterday
Samar kabeer commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"भाई लक्ष्मण धामी जी,मेरी टिप्पणी स्पष्ट है,आपने ध्यान से नहीं पढ़ी शायद,इस शब्द का सहीह तलफ़्फ़ुज़(उच्चारण)"ज़ाए" है न कि 'ज़ाया'"
yesterday
Samar kabeer commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ' जरा सा वक़्त भी ज़ाया नहीं करतें' इस मिसरे में "ज़ाया" क़ाफ़िया सहीह नहीं है,सहीह शब्द है "ज़ाए",जिसे आम तौर पर लोग "ज़ाया" बोलते…"
Wednesday
Samar kabeer commented on PHOOL SINGH's blog post जाम से मुक्त, सारे शहर को कर दूँ
"जनाब फूल सिंह जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (प्यार का हर दस्तूर निभाना पड़ता है)
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'जिस में दिल दाँव पे लगाना पड़ता है' ये मिसरा शायद टंकण त्रुटि का शिकार है? "
Wednesday
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा's blog post छोटी सी प्रेम कहानी ( लघुकथा )
"जनाब सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा जी आदाब,लघुकथा का प्रयास अच्छा है लेकिन अभी कुछ समय चाहता है, इसे कुछ और कसने की ज़रूरत है,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Tuesday
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा's blog post छोटी सी प्रेम कहानी ( लघुकथा )
"// सूंदर रचना// जनाब फूल सिंह जी,पटल की कुछ रचनाओं पर आपकी टिप्पणियों पढ़ीं,जो इसी तरह की हैं,आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि ऐसी टिप्पणियां देना ओबीओ की परिपाटी नहीं है,ये सोशल मीडिया पर चलता होगा,चूँकि ये सीखने सिखाने का पटल है,इसलिए यहाँ किसी…"
Tuesday
Samar kabeer commented on अजय गुप्ता's blog post ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)
"जनाब अजय गुप्ता जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । सबसे पहली बात ये कि आपने मंच के नियमानुसार मौलिक व अप्रकाशित नहीं लिखा है । ' दिखे हरसूँ अँधेरा है' इस मिसरे में 'हरसूँ' को "हरसू" कर लें…"
Tuesday

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"तरही ग़ज़ल नम्बर 4

नोट:-

तरही मुशायरा अंक-100 में 87 ग़ज़लें पोस्ट हुईं,मेरी इस ग़ज़ल में जो क़वाफ़ी इस्तेमाल हुए हैं वो बिल्कुल नये हैं ।

पहले सिल पर घिसा गया है मुझे

फिर जबीं पर मला गया है मुझे

जाल हूँ इक सियासी लीडर का

नफ़रतों से बुना गया है मुझे

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे

कहदो तक़दीर से बखेरे नहीं

करके वो एक जा गया है…

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Posted on October 24, 2018 at 5:54pm — 38 Comments

"हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल

कितनी प्यारी ये मनभावन हिन्दी है

भारत की वैचारिक धड़कन हिन्दी है

जो लिखता हूँ हिन्दी में ही लिखता हूँ

मेरी ख़ुशियों का घर आँगन हिन्दी है

रफ़ी, लता,मन्नाडे को तुम सुन लेना

इन सबकी भाषा और गायन हिन्दी है

भारत में कितनी हैं भाषाएँ लेकिन

सारी भाषाओँ का यौवन हिन्दी है

पहले मैं अक्सर उर्दू में लिखता था

अब तो मेरा सारा लेखन हिन्दी है

मुझको तो लगती है ये भाषा…

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Posted on September 13, 2018 at 11:39pm — 31 Comments

"बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"

ग़ज़ल

बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ

मैं नफ़रतों का ही क़िस्सा तमाम करता चलूँ

अब आख़िरत का भी कुछ इन्तिज़ाम करता चलूँ

दिल-ओ-ज़मीर को अपने मैं राम करता चलूँ

जहाँ जहाँ से भी गुज़रूँ ये दिल कहे मेरा

तेरा ही ज़िक्र फ़क़त सुब्ह-ओ-शाम करता चलूँ

अमीर हो कि वो मुफ़लिस,बड़ा हो या छोटा

मिले जो राह में उसको सलाम करता चलूँ

गुज़रता है जो परेशान मुझको करता है

तेरे ख़याल से…

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Posted on September 1, 2018 at 3:12pm — 44 Comments

जनाब निलेश 'नूर' की ज़मीन में ग़ज़ल नम्बर 2 (कुछ नये क़वाफ़ी के साथ)

मैं तो उसकी पे ब पे अंगड़ाइयाँ गिनता रहा

और वो दामन की मेरे धज्जियाँ गिनता रहा

सौ गुनह होते ही पूरे मारना था इसलिये

मैं भी इक शिशुपाल की बदकारियाँ गिनता रहा

मेरे सीने पर सितम की मश्क़ वो करते रहे

और मैं मासूम दिल की किर्चियाँ गिनता रहा

काम जब कुछ भी नहीं था ओबीओ पर दोस्तो

'नूर' साहिब की मैं कूड़ेदानियाँ गिनता रहा

मेरी बर्बादी पे ख़ुश होकर अज़ीज़ों ने "समर"

कितनी…

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Posted on July 11, 2018 at 10:00am — 31 Comments

Comment Wall (16 comments)

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At 11:39pm on August 19, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय प्रणाम!
एवम् शुक्रिया मैं निरंतर सुधर करूँगा
At 6:09pm on August 7, 2018, Kishorekant said…

आपका आभार आदरणीय समर कबीर जी । आप की सुचना के अनुसार अभ्यास शुरु कर दिया है । आशा है आगे भी आपका मार्गदर्शन मिलता रहेगा ।भूलों के लिये दरगुजर करें ।

At 8:05pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय
समर कबीर महोदय प्रणाम
आपका आदेश सर माथे पर
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

 
 
 

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