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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले के दोनों मिसरों में 'ना' की बंदिश होने से मतला दोषपूर्ण हो गया है । बाक़ी अशआर में बह्र तो आपने साध ली लेकिन शिल्प और व्याकरण पर ध्यान देने की ज़रूरत…"
1 minute ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"मेरे लायक़ जो भी सेवा हो मैं हर समय हाज़िर हूँ ।"
9 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"//गीत तूने ग़म का ही हमको सुनाया उम्रभर ज़िन्दगी तुझको हसीं नग़्मा समझ बैठे थे हम // मैंने तो कुछ शब्द इधर उधर किये हैं,अर्थ कहाँ बदल रहा है?अपने और मेरे सुझाए मिसरे पर थोड़ा ग़ौर करें ।"
13 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"शुक्रिय:"
19 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जनाब दण्डपाणि 'नाहक़' जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"कृपया नाम से पहले आदर सूचक शब्दों का प्रयोग करें ।"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
""गीत तूने ग़म का ही  हमको सुनाया उम्रभर  ज़िन्दगी तुझको हसीं नग़्मा समझ बैठे थे हम" ठीक है,लेकिन ऊला में तनाफ़ुर है,यूँ कर सकते हैं:- 'गीत ग़म का तूने ही हमको सुनाया उम्र भर' 'फिर' शब्द का इस्तेमाल आपने जान बूझ कर…"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"दुष्यंत मुस्तनद शाइर नहीं है,ऐसी बेशुमार ग़लतियाँ उसके कलाम में पाई जाती हैं,और नए साहित्यकार उसी को संग-ए-मील समझ कर मंज़िल से भटक जाते हैं ।"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जनाब अजय गुप्ता जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'थी अमानत सांसें और तोहफ़ा समझ बैठे थे हम' इस मिसरे में 'तोहफ़ा' को "तुहफ़ा'' कर लें ।"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जनाब अनीस 'अरमान' जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'बालों में गजरा लगाये छत पे फिर तुम आ गए फिर तुम्हारे जूड़े को हाला समझ बैठे थे हम'  इस शैर के दोनों मिसरों में 'फिर' शब्द…"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"रेख़्ता पर बहुत कुछ ग़लत होता है,उस पर भरोसा न करें ।"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"'गलफत' को "ग़फ़लत" और 'जुंबिश' को "जुम्बिश" करना उचित होगा ।"
9 hours ago
Samar kabeer and रवि भसीन 'शाहिद' are now friends
9 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"//'शम्अ' को 22 और 21 दोनों तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है// "शम'अ" को 22 पर नहीं ले सकते,21 पर ही लेना उचित है ।"
9 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जनाब मुनीश तन्हा जी आदाब,तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'था वहम अपना जिसे तेरा समझ बैठे थे हम' इस मिसरे में 'वहम' ग़लत शब्द है,सहीह शब्द है "वह्म" और इसका वज़्न 21 होता है,मिसरा यूँ कर सकते…"
22 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"//ए को दो पर लिया है सर// 'ए' को 2 पर नहीं ले सकते,इसे 2 पर इस सूरत में लेंगे जब इज़ाफ़त से पहले हर्फ़-ए-इल्लत हो,अन्यथा नहीं ।"
yesterday

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Samar kabeer's Blog

एक ताज़ा ग़ज़ल

7 फेलुन 1 फ़ा

मेरी यादों से वो यारो जब भी घबराते हों गे

माज़ी के क़िस्सों से अपने दिल को बहलाते हों गे

काले बादल शर्म से पानी पानी हो जाते हों गे

बाम प आकर जब वो अपनी ज़ुल्फ़ें लहराते हों गे

जैसे हमको यार हमारे समझाने आ जाते हैं

उसके भी अहबाब यक़ीनन उसको समझाते हों गे

हम तो उनके हिज्र में तारे गिनते रहते हैं शब भर

वो तो अपने शीश महल में चैन से सो जाते हों…

Continue

Posted on February 13, 2020 at 5:55pm — 5 Comments

'देखो हिंदौस्तान फूँकता है'

2122 1212 112/22

जिस्म में पहले जान फूँकता है

बाद-अज़-जाँ अज़ान फूँकता है

सब्र कर शब गुज़र ही जाएगी

क्यों ये अपना मकान फूँकता है

अपनी नफ़रत की आग से कोई

देखो हिंदौस्तान फूँकता है

पास आकर वो गर्म साँसों से

मेरे दिल का जहान फूँकता है

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है

रोज़ आयात पढ़…

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Posted on August 6, 2019 at 3:00pm — 18 Comments

एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल

अरकान:-12112 12112

न छाँव कहीं,न कोई शजर

बहुत है कठिन,वफ़ा की डगर

अजीब रहा, नसीब मेरा

रुका न कभी,ग़मों का सफ़र

तलाश किया, जहाँ में बहुत

कहीं न मिला, वफ़ा का गुहर

तमाम हुआ, फ़सान: मेरा

अँधेरा छटा, हुई जो सहर

ग़मों के सभी, असीर यहाँ

किसी को नहीं, किसी की ख़बर

बहुत ये हमें, मलाल रहा

न सीख सके, ग़ज़ल का हुनर

हबीब अगर, क़रीब न हो

अज़ाब लगे, हयात…

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Posted on July 4, 2019 at 2:30pm — 34 Comments

ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा

है उजागर ये हक़ीक़त ओ बी ओ

मुझको है तुझसे महब्बत ओ बी ओ

तेरे आयोजन सभी हैं बेमिसाल

तू अदब की एक जन्नत ओ बी ओ

कहते हैं अक्सर ,ये भाई योगराज

तू है इक छोटा सा भारत ओ बी ओ

सीखने वाले यही कहते सदा…

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Posted on April 1, 2019 at 11:00am — 42 Comments

Comment Wall (31 comments)

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At 8:18am on January 21, 2020, Bhupender singh ranawat said…

आदरणीय Samar Kabeer साहब रचना की सराहना  के लिए आपका बहुत बहुत आभार । आपने जो advice दी हैं उनका में ध्यान रखूँगा। पुनः आपका आभार ।

At 9:23am on September 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय समर क़बीर साहब को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव आपको सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें।हमेशा स्वस्थ रहें और दीर्घायु बनें।उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान हों।

At 12:33am on August 7, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय समर कबीर साहब आदाब जी मैं जरूर ग़ज़ल के शिल्प और व्याकरण पर मेहनत करूँगा यक़ीनन मैं जल्दबाज़ी करने लगा हूँ मुआफ़ी चाहता हूँ
At 8:06pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय समर कबीर साहब आदाब, बहुत शुक्रिया सब आपकी कृपा है कृपा बनी रहे ! आपकी तबीयत ख़राब होने के बावजूद आप समय निकाल कर जो मदद करते है बहुत शुक्रिया!
At 12:24pm on June 27, 2019, Samar kabeer said…

अब एडिट नहीं होगा,संकलन से पहले,वहाँ लिख दें टंकण त्रुटि है ।

At 12:09pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय जनाब समर कबीर साहब आदाब, बहुत शुक्रिया आपका बस आपकी कृपा यूँ ही बनी रहे ! आपने ठीक कहा 'यारो ' का यारों हो गया है जो कि मेरी टाइपिंग भूल है
लेकिन मुझसे एडिट नहीं हो पा रहा
At 9:59pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
हौसला बढ़ाने के लिए बहुत शुक्रिया, सब आपकी कृपा है
कृपा दृस्टि बनाये रखें ! आपका आदेश सर माथे पर
At 10:06pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब
अपेक्षा है की गलतियों को भी इंगित करें
At 12:20pm on March 22, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
बहुत शुक्रिया सब आपका ही आशीर्वाद है
कृपा बनायें रखें
At 3:34pm on March 12, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर सर आपके मार्गदर्शन का हमेशा आकांक्षी रहूँगा!
 
 
 

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मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"बहुत सुंदर ग़ज़ल की बधाई हो"
14 minutes ago
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"सुंदर ग़ज़ल की बधाई"
15 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"शुक्रिय:"
19 minutes ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय मोहन बेगोवाल साहब, आदाब। प्रभावशाली मिसरों से सजी इस सुंदर ग़ज़ल की रचना पर आपको हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय दण्डपाणि भाई, आपको इस सुंदर ग़ज़ल की तख़लीक़ पर दिली मुबारक़बाद। "
1 hour ago
Md. Anis arman replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"समझ आ गया सर आगे से ध्यान रखूंगा "
1 hour ago
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"शख्स जिस को देख दीवाना समझ बैठे थे हम l जब गली गुजरा तो पहचाना समझ बैठे थे हम l अब न जीतेगा ज़माना…"
1 hour ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय समर कबीर साहब, इस मौज़ू पर रौशनी डालने के लिए और मन का भ्रम दूर करने के लिए बहुत आभारी हूँ।…"
1 hour ago
dandpani nahak commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर  जी आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है  हार्दिक बधाई स्वीकार…"
2 hours ago

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