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सूबे सिंह सुजान
  • Male
  • kurukshetra,haryana
  • India
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Profile Information

Gender
Male
City State
कुरूक्षेत्र,हरियाणा
Native Place
करनाल
Profession
09017609226
About me
एक अध्यापक के साथ कवि हूँ।मुख्यतया ग़ज़ल लेखन करता हूँ।एक प्रथम हिंदी ग़ज़ल संग्रह 2007( सीने में आग) में प्रकाशित हुआ तथा विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होते रहे हैं ।

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सूबे सिंह सुजान's Blog

ग़ज़ल - गण हुए तंत्र के हाथ कठपुतलियाँ

ग़ज़ल   

गण हुए तंत्र के हाथ कठपुतलियाँ

अब सुने कौन गणतंत्र की सिसकियाँ

 

इसलिए आज दुर्दिन पड़ा देखना

हम रहे करते बस गल्तियाँ गल्तियाँ 

चील चिड़ियाँ सभी खत्म होने लगीं

बस रही हर जगह बस्तियाँ बस्तियाँ 

पशु पक्षी जितने थे, उतने वाहन हुए

भावना खत्म करती हैं तकनीकियाँ. 

कम दिनों के लिए होते हैं वलवले

शांत हो जाएंगी कल यही आँधियाँ   

अब न इंसानियत की हवा लग रही

इस तरफ आजकल बंद…

Continue

Posted on January 25, 2019 at 6:27am — 4 Comments

ग़ज़ल - गण हुए तंत्र के हाथ कठपुतलियाँ

              ग़ज़ल 

गण हुए तंत्र के हाथ कठपुतलियाँ

अब सुने कौन गणतंत्र की सिसकियाँ

इसलिए आज दुर्दिन पड़ा देखना

हम रहे करते बस गल्तियाँ गल्तियाँ

चील चिड़ियाँ सभी खत्म होने लगीं

बस रही हर जगह बस्तियाँ बस्तियाँ

पशु पक्षी जितने थे, उतने वाहन हुए

भावना खत्म करती हैं तकनीकियाँ

कम दिनों के लिए होते हैं वलवले

शांत हो जाएंगी कल यही आँधियाँ

अब न इंसानियत की हवा लग…

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Posted on January 24, 2019 at 9:32pm — 7 Comments

नज़्म - नया साल

नज़्म      नया साल

इन दिनों पिछले साल आया था

पेड़ की टहनी पर नया पत्ता

वक्त की मार से हुआ बूढ़ा

आज आखिर वह शाख से टूटा ।

जन्मदिन हर महीने आता था

और वो और खिलखिलाता था

वो मुझे देख मुस्कुराता था

मैं उसे देख मुस्कुराता था ।

जिन दिनों वो जवान होता था

पेड़ पौधों की शान होता था

उस तरफ सबका ध्यान होता था

और वो आंगन की शान होता था ।

उसके चेहरे में ताब होता था

मुस्कुराना गुलाब होता…

Continue

Posted on December 31, 2018 at 2:30pm — 5 Comments

कविता - कौओं के पितृ स्थान

कौए अब अपने पितृ स्थान के लिए

स्कूल के बच्चों के हिस्से में आई

अनुदान राशि को हड़प ले गये ।

और अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए

राजनीति को यूँ अपनाया

कि विधायक, सरपंच मजबूर हैं

सरकारी सहायता को पितृों तक भेजने के लिए ।

अन्य पक्षियों को छोड़कर

केवल कौओं की वोटो की गिनती

के मायने जियादा हैं ।



शेर भी लाचार हैं

वे अब शिकार नहीं करते

वे शिकार हो जाते हैं ।

शेरों को हमेशा

कौओं ने सरकश में नचवाया…

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Posted on November 26, 2018 at 11:00pm — 6 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 10:10am on August 17, 2016, सूबे सिंह सुजान said…
Ji
At 8:07pm on February 10, 2014, Sarita Bhatia said…

आदरणीय भाई सूबे सिंह जी हार्दिक आभार 

मेरे प्रोफाइल पर सबसे पहला कमेंट भी आपने ही दिया था आशीर्वाद स्नेह बनाये रखें 

At 8:44am on March 6, 2013, Abhinav Arun said…

आदरणीय श्री सुजान जी आपकी सशक्त रचना "कच्चा रास्ता " को माह की श्रेष्ठ रचना का  पुरस्कार प्रदान किये जाने पर हार्दिक बधाई और साहित्य सेवा हेतु हार्दिक शुभकामनायें भी !!

At 11:41pm on March 5, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय श्री सुबे सिंह सुजान जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की रचना "कच्चा रास्ता" को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना पुरस्कार के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको पुरस्कार राशि रु 1100 /- और प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस नामित कृपया आप अपना नाम (चेक / ड्राफ्ट निर्गत हेतु), तथा पत्राचार का पता व् फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

At 11:09am on August 29, 2012, Naval Kishor Soni said…

आपका आभार ।

At 6:36pm on August 26, 2012, Admin said…

तरही ग़ज़ल पोस्ट करने हेतु सर्वप्रथम मुख्य पृष्ठ पर फोरम से "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६ को क्लिक कर ले, अथवा सीधे मुशायरा पोस्टर को भी क्लिक कर सकते है, उसके बाद खुलने वाले पृष्ठ पर मुशायरे के सम्बन्ध में नियम आदि की जानकारी के नीचे बने बड़े बाक्स में अपनी ग़ज़ल पेस्ट कर Add Reply को क्लिक कर ले | 

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