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सूबे सिंह सुजान
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सूबे सिंह सुजान's blog post ग़ज़ल - इधर उधर की बातें
"आद0 सूबे सिंह सुजान जी सादर। अभिवादन।। ग़ज़लका बढ़िया प्रयास किया आपने।अरकान नहीं लिखा आपने। इस प्रस्तुति पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Dec 26, 2017
सूबे सिंह सुजान commented on सूबे सिंह सुजान's blog post ग़ज़ल - इधर उधर की बातें
"आप सभी सम्मानित सदस्यों का बहुत बहुत धन्यवाद । एक पुरानी ग़ज़ल थी । कमियाँ हैं स्वीकार्य हैं ।"
Dec 25, 2017
Samar kabeer commented on सूबे सिंह सुजान's blog post ग़ज़ल - इधर उधर की बातें
"जनाब सूबे सिंह सुजान जी आदाब,बहुत अर्से बाद आपकी रचना के दर्शन हुए,कहाँ थे भाई ? ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ग़ज़ल में क़ाफ़िया दोष है,आप 'ईं' का क़ाफ़िया लेकर चले लेकिन उसे निबाह नहीं सके,और न आपने शब्दों में अनुस्वार…"
Dec 24, 2017
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सूबे सिंह सुजान's blog post ग़ज़ल - इधर उधर की बातें
"हार्दिक बधाई, आ. भाई सूबे सिंह जी।"
Dec 24, 2017
Mohammed Arif commented on सूबे सिंह सुजान's blog post ग़ज़ल - इधर उधर की बातें
"आदरणीय सूबे सिंह जी आदाब,                          ग़ज़ल कहने का प्रयास अच्छा है । ग़ज़ल के ऊपर आपने ग़ज़ल के अर्कान नहीं लिखे हैं । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Dec 24, 2017
Kalipad Prasad Mandal commented on सूबे सिंह सुजान's blog post ग़ज़ल - इधर उधर की बातें
"आ सूबे सिंह जी , बढ़िया गाजी हुई है , गुणी की प्रतीक्षा कीजिये | बधाई आपको |"
Dec 23, 2017
सूबे सिंह सुजान posted a blog post

ग़ज़ल - इधर उधर की बातें

हमने भी की इधर-उधर की बातें... तुमने समझी इधर-उधर की बातें...खो गये अर्थ वायदों के जब, याद आयी इधर-उधर की बातें...जब सरेआम चोरी पकडी गई, फिर भी की इधर-उधर की बातें...रोज वो ताश खेलने बैठें, धूप करती इधर-उधर की बातें..मुझ पे विश्वास कर महब्बत में, छोड पगली इधर-उधर की बातें..मौलिक व अप्रकाशितSee More
Dec 22, 2017
सूबे सिंह सुजान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"आपका शुद्धिकरण बेहतरीन है सादर नमन "
Dec 22, 2017
सूबे सिंह सुजान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"वाह वाह अच्छा प्रयास है "
Dec 22, 2017
सूबे सिंह सुजान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"आपकी ग़ज़ल के हर शेर में नयापन है बहुत बहुत बधाई हो ।"
Dec 22, 2017
सूबे सिंह सुजान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"महिमा श्री जी की ग़ज़ल बेहतरीन है दाद हाज़िर है "
Dec 22, 2017
सूबे सिंह सुजान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"बहुत शानदार "
Dec 22, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
कुरूक्षेत्र,हरियाणा
Native Place
करनाल
Profession
09017609226
About me
एक अध्यापक के साथ कवि हूँ।मुख्यतया ग़ज़ल लेखन करता हूँ।एक प्रथम हिंदी ग़ज़ल संग्रह 2007( सीने में आग) में प्रकाशित हुआ तथा विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होते रहे हैं ।

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ग़ज़ल - इधर उधर की बातें

हमने भी की इधर-उधर की बातें...
तुमने समझी इधर-उधर की बातें...

खो गये अर्थ वायदों के जब,
याद आयी इधर-उधर की बातें...

जब सरेआम चोरी पकडी गई,
फिर भी की इधर-उधर की बातें...

रोज वो ताश खेलने बैठें,
धूप करती इधर-उधर की बातें..

मुझ पे विश्वास कर महब्बत में,
छोड पगली इधर-उधर की बातें..

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on December 22, 2017 at 8:57pm — 6 Comments

ग़ज़ल - क्या आपके दिल में है ?बता क्यों नहीं देते?

ग़ज़ल

क्या आपके दिल में है,बता क्यों नहीं देते ?

नजरों से मेरी पर्दा उठा क्यों नहीं देते ?



ये किसलिये अहसान के नीचे है दबाया?

मुझको मेरी कमियों की सज़ा क्यों नहीं देते ?



कुछ गलतियाँ करवाती हैं मज़बूरियाँ सबसे

तुम तो बड़े हो गलती भुला क्यों नहीं देते?



हालाँकि सराबोर महब्बत से हूँ लेकिन

मौसम ये बहारों के मज़ा क्यों नहीं देते?



ये कौन ज़ुदा शख्स मेरे पीछे पड़ा है

सब पूछते हैं मुझसे,बता क्यों नहीं देते ?



जो शख्स… Continue

Posted on September 19, 2016 at 11:04pm — 12 Comments

तरह ग़ज़ल -याद रख अगर कच्चा रास्ता नहीं होता

तरह ग़ज़ल

याद रख,अगर कच्चा रास्ता नहीं होता

आज तू सड़क पर यूँ दौड़ता नहीं होता ।

आदमी करेगा बेशर्म हरक़तें अक्सर,

ना समझ नहीं है,के जानता नहीं होता!!

तेज गति समय पहले मौत को बुलाती है

आप धीरे चलते तो हादसा नहीं होता

प्यार के मरासिम ऐसे निभाये जाते हैं

फूल को देखना तो है तोड़ना नहीं होता

क्यों ख़फा है दुनिया से,फैसला बदल अपना

इस जहाँ में हर कोई बेवफ़ा नहीं होता वो तो खूबसूरत है,हर नज़र उसी पर है

ग़म न कीजिए,वो गर आपका नहीं होता।

वो… Continue

Posted on July 13, 2016 at 1:09am — 12 Comments

ग़ज़ल -चाहता हूँ उसे कमल कहना ।

चाहता हूँ उसे कमल कहना
चाँदनी और गंगा जल कहना
उसकी तारीफ़ जो रहा करता
भूल ही जाउंगा ग़ज़ल कहना
मायने अब समझ नहीं आते
अब विफल को नहीं विफल कहना
दिल दुखाने में जो सफल हो जाए
आजकल उनको ही सफल कहना
मुस्कुराहट मुझे सिखाती है
आँसुओं पर कोई ग़ज़ल कहना ।


मौलिक व अप्रकाशित ।

Posted on April 2, 2016 at 12:08am — 4 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 10:10am on August 17, 2016, सूबे सिंह सुजान said…
Ji
At 8:07pm on February 10, 2014, Sarita Bhatia said…

आदरणीय भाई सूबे सिंह जी हार्दिक आभार 

मेरे प्रोफाइल पर सबसे पहला कमेंट भी आपने ही दिया था आशीर्वाद स्नेह बनाये रखें 

At 8:44am on March 6, 2013, Abhinav Arun said…

आदरणीय श्री सुजान जी आपकी सशक्त रचना "कच्चा रास्ता " को माह की श्रेष्ठ रचना का  पुरस्कार प्रदान किये जाने पर हार्दिक बधाई और साहित्य सेवा हेतु हार्दिक शुभकामनायें भी !!

At 11:41pm on March 5, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय श्री सुबे सिंह सुजान जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की रचना "कच्चा रास्ता" को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना पुरस्कार के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको पुरस्कार राशि रु 1100 /- और प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस नामित कृपया आप अपना नाम (चेक / ड्राफ्ट निर्गत हेतु), तथा पत्राचार का पता व् फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

At 11:09am on August 29, 2012, Naval Kishor Soni said…

आपका आभार ।

At 6:36pm on August 26, 2012, Admin said…

तरही ग़ज़ल पोस्ट करने हेतु सर्वप्रथम मुख्य पृष्ठ पर फोरम से "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६ को क्लिक कर ले, अथवा सीधे मुशायरा पोस्टर को भी क्लिक कर सकते है, उसके बाद खुलने वाले पृष्ठ पर मुशायरे के सम्बन्ध में नियम आदि की जानकारी के नीचे बने बड़े बाक्स में अपनी ग़ज़ल पेस्ट कर Add Reply को क्लिक कर ले | 

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