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सूबे सिंह सुजान
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सूबे सिंह सुजान commented on सूबे सिंह सुजान's blog post कविता - कौओं के पितृ स्थान
"सभी सुधी जनों का आभार"
Dec 3
सूबे सिंह सुजान shared their blog post on Facebook
Nov 28
सूबे सिंह सुजान commented on सूबे सिंह सुजान's blog post कविता - कौओं के पितृ स्थान
"सभी विशिष्ट जनों से आग्रह करना चाहता हूँ कि इस कविता की समीक्षा करने की कृपा करें ।  मैं इस कविता को देखना चाहता हूँ कि यह किन किन अर्थों में समझी जा रही है या सकती है ।"
Nov 27
सूबे सिंह सुजान commented on सूबे सिंह सुजान's blog post कविता - कौओं के पितृ स्थान
"लक्ष्मण धामी मुसाफिर साहब,  आपकी आवश्यक टिप्पणी के लिए आभार । कविता की यदि आप समीक्षा कर सकें तो बहुत आभार होगा । मैं अपनी कविता को देखना चाहता हूँ कि यह किन किन अर्थों में समझी जा रही है या सकती है ।"
Nov 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सूबे सिंह सुजान's blog post कविता - कौओं के पितृ स्थान
"आ. भाई सूबे सिंह जी, बहुत खूब तंज कसा है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 27
सूबे सिंह सुजान commented on सूबे सिंह सुजान's blog post कविता - कौओं के पितृ स्थान
"समर कबीर साहब बहुत बहुत शुक्रिया "
Nov 27
Samar kabeer commented on सूबे सिंह सुजान's blog post कविता - कौओं के पितृ स्थान
"जनाब सूबे सिंह सुजान जी आदाब,उम्दा तंज़ करती उम्दा कविता,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 27
सूबे सिंह सुजान posted a blog post

कविता - कौओं के पितृ स्थान

कौए अब अपने पितृ स्थान के लिए स्कूल के बच्चों के हिस्से में आई अनुदान राशि को हड़प ले गये ।और अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए राजनीति को यूँ अपनाया कि विधायक, सरपंच मजबूर हैं सरकारी सहायता को पितृों तक भेजने के लिए ।अन्य पक्षियों को छोड़कर केवल कौओं की वोटो की गिनती के मायने जियादा हैं । शेर भी लाचार हैं वे अब शिकार नहीं करते वे शिकार हो जाते हैं । शेरों को हमेशा कौओं ने सरकश में नचवाया ।कबूतरों ने आँखें बंद कर ली हैं बंदर और तोते सबकी नकल करना भूल कर अब केवल कौओं की नकल करते हैं…See More
Nov 27
सूबे सिंह सुजान commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -9 (मां जिधर भी नज़र उठाती है, वो ज़मीं हँसती मुस्कुराती है)
"बहुत अच्छे भाव व्यक्त हुए "
Nov 27
सूबे सिंह सुजान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आपकी बात जायज है यह विचार मुझे भी आया था कि अन्तर्विरोध है। लेकिन कहन हो गई है आपने ठीक कहा आभार ।"
Oct 20
सूबे सिंह सुजान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"दंडपाणि जी,नमस्कार ।   आपके दंड को स्वीकार करता हूँ "
Oct 20
सूबे सिंह सुजान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"शुक्रिया जी, "
Oct 20
सूबे सिंह सुजान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"Shukriya aakash ji"
Oct 20
सूबे सिंह सुजान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"शेख साहब आपकी मेहरबानी है ।बहुत बहुत शुक्रिया जनाब "
Oct 19
सूबे सिंह सुजान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"नर्म लहजे में बात की उनसे, फिर भी पत्थर कहा गया है मुझे । बहुत खूबसूरत कहा है  मुबारक हो "
Oct 19
सूबे सिंह सुजान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"अच्छे शेर हुए हैं मोहतरम । बधाई हो "
Oct 19

Profile Information

Gender
Male
City State
कुरूक्षेत्र,हरियाणा
Native Place
करनाल
Profession
09017609226
About me
एक अध्यापक के साथ कवि हूँ।मुख्यतया ग़ज़ल लेखन करता हूँ।एक प्रथम हिंदी ग़ज़ल संग्रह 2007( सीने में आग) में प्रकाशित हुआ तथा विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होते रहे हैं ।

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कविता - कौओं के पितृ स्थान

कौए अब अपने पितृ स्थान के लिए

स्कूल के बच्चों के हिस्से में आई

अनुदान राशि को हड़प ले गये ।

और अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए

राजनीति को यूँ अपनाया

कि विधायक, सरपंच मजबूर हैं

सरकारी सहायता को पितृों तक भेजने के लिए ।

अन्य पक्षियों को छोड़कर

केवल कौओं की वोटो की गिनती

के मायने जियादा हैं ।



शेर भी लाचार हैं

वे अब शिकार नहीं करते

वे शिकार हो जाते हैं ।

शेरों को हमेशा

कौओं ने सरकश में नचवाया…

Continue

Posted on November 26, 2018 at 11:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल - इधर उधर की बातें

हमने भी की इधर-उधर की बातें...
तुमने समझी इधर-उधर की बातें...

खो गये अर्थ वायदों के जब,
याद आयी इधर-उधर की बातें...

जब सरेआम चोरी पकडी गई,
फिर भी की इधर-उधर की बातें...

रोज वो ताश खेलने बैठें,
धूप करती इधर-उधर की बातें..

मुझ पे विश्वास कर महब्बत में,
छोड पगली इधर-उधर की बातें..

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on December 22, 2017 at 8:57pm — 6 Comments

ग़ज़ल - क्या आपके दिल में है ?बता क्यों नहीं देते?

ग़ज़ल

क्या आपके दिल में है,बता क्यों नहीं देते ?

नजरों से मेरी पर्दा उठा क्यों नहीं देते ?



ये किसलिये अहसान के नीचे है दबाया?

मुझको मेरी कमियों की सज़ा क्यों नहीं देते ?



कुछ गलतियाँ करवाती हैं मज़बूरियाँ सबसे

तुम तो बड़े हो गलती भुला क्यों नहीं देते?



हालाँकि सराबोर महब्बत से हूँ लेकिन

मौसम ये बहारों के मज़ा क्यों नहीं देते?



ये कौन ज़ुदा शख्स मेरे पीछे पड़ा है

सब पूछते हैं मुझसे,बता क्यों नहीं देते ?



जो शख्स… Continue

Posted on September 19, 2016 at 11:04pm — 12 Comments

तरह ग़ज़ल -याद रख अगर कच्चा रास्ता नहीं होता

तरह ग़ज़ल

याद रख,अगर कच्चा रास्ता नहीं होता

आज तू सड़क पर यूँ दौड़ता नहीं होता ।

आदमी करेगा बेशर्म हरक़तें अक्सर,

ना समझ नहीं है,के जानता नहीं होता!!

तेज गति समय पहले मौत को बुलाती है

आप धीरे चलते तो हादसा नहीं होता

प्यार के मरासिम ऐसे निभाये जाते हैं

फूल को देखना तो है तोड़ना नहीं होता

क्यों ख़फा है दुनिया से,फैसला बदल अपना

इस जहाँ में हर कोई बेवफ़ा नहीं होता वो तो खूबसूरत है,हर नज़र उसी पर है

ग़म न कीजिए,वो गर आपका नहीं होता।

वो… Continue

Posted on July 13, 2016 at 1:09am — 12 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 10:10am on August 17, 2016, सूबे सिंह सुजान said…
Ji
At 8:07pm on February 10, 2014, Sarita Bhatia said…

आदरणीय भाई सूबे सिंह जी हार्दिक आभार 

मेरे प्रोफाइल पर सबसे पहला कमेंट भी आपने ही दिया था आशीर्वाद स्नेह बनाये रखें 

At 8:44am on March 6, 2013, Abhinav Arun said…

आदरणीय श्री सुजान जी आपकी सशक्त रचना "कच्चा रास्ता " को माह की श्रेष्ठ रचना का  पुरस्कार प्रदान किये जाने पर हार्दिक बधाई और साहित्य सेवा हेतु हार्दिक शुभकामनायें भी !!

At 11:41pm on March 5, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय श्री सुबे सिंह सुजान जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की रचना "कच्चा रास्ता" को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना पुरस्कार के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको पुरस्कार राशि रु 1100 /- और प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस नामित कृपया आप अपना नाम (चेक / ड्राफ्ट निर्गत हेतु), तथा पत्राचार का पता व् फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

At 11:09am on August 29, 2012, Naval Kishor Soni said…

आपका आभार ।

At 6:36pm on August 26, 2012, Admin said…

तरही ग़ज़ल पोस्ट करने हेतु सर्वप्रथम मुख्य पृष्ठ पर फोरम से "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २६ को क्लिक कर ले, अथवा सीधे मुशायरा पोस्टर को भी क्लिक कर सकते है, उसके बाद खुलने वाले पृष्ठ पर मुशायरे के सम्बन्ध में नियम आदि की जानकारी के नीचे बने बड़े बाक्स में अपनी ग़ज़ल पेस्ट कर Add Reply को क्लिक कर ले | 

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