For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

AMAN SINHA
Share on Facebook MySpace

AMAN SINHA's Friends

  • अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी
  • Samar kabeer
  • लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
  • रौशन जसवाल विक्षिप्‍त
 

AMAN SINHA's Page

Latest Activity

AMAN SINHA and रौशन जसवाल विक्षिप्‍त are now friends
Nov 30, 2025
AMAN SINHA posted blog posts
Nov 13, 2024
AMAN SINHA posted a blog post

बस बहुत हुआ, अब जाने दो

बस बहुत हुआ, अब जाने दो, साँस जरा तो आने दो,घुटन भरे इस कमरे में, जरा धूप तो छट कर आने दो,बस बहुत हुआ, अब जाने दो।बहुत सुनी कटाक्ष तेरी, बात-बात पर दुत्कार तेरी,शूल के जैसे बोल तेरे, चुन-चुन कर मुझे हटाने दो।खामोशी में है प्यार मेरा, ना मुझ पर कुछ उपकार तेरा,मुझको जो गरजू समझा है, उस भरम को अब मिट जाने दो,बस बहुत हुआ, अब जाने दो।तूने जो बोला मान लिया, देर लगी पर जान लिया,सदा पास रही पर साथ नहीं, अब झूठे बंधन टूट जाने दो।मेरे अपनों को कोसा है, जीभ से दिल को नोंचा है,मेरे जज़्बातों का जो मोल…See More
Aug 8, 2024
AMAN SINHA posted a blog post

बात कुछ और निकली है

बात कुछ और सोची थी, बात कुछ और निकली हैमेरे दिलबर के दिल की कहानी कुछ और निकली हैबड़ी फुर्सत से उस रब ने करी थी कारीगरी लेकिनजो बन के है आई वो जवानी कुछ और निकली हैसुनाई थी जो तुमने ही कहानी, फिर से दोहरा दोमेरे वीरान गुलिस्तां में डाली फूलों की लहरा दोतेरे आने से जो खुशबू हवा में घुल सी जाती थीतू है अब भी वही, लेकिन वो खुशबू कुछ और निकली हैखनक थी चूड़ियों में जो, झनक थी पायलों में जोबिना श्रृंगार के लगती थी सादगी, चांद सी थी जोमगर अब दाग जो है लगा उस कोरे से दामन परचुनर धानी सी थी जो तेरी अभी…See More
Jul 29, 2024

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on AMAN SINHA's blog post काश कहीं ऐसा हो जाता
"आदरणीय अमन सिन्हा जी इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर। ना तू मेरे बीन रह पाता (बिन)"
Jun 2, 2024

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर commented on AMAN SINHA's blog post यह धर्म युद्ध है
"आदरणीय अमन सिन्हा जी, इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई। सादर"
Jun 2, 2024
AMAN SINHA posted a blog post

यह धर्म युद्ध है

रण भूमी में अस्त्र को त्यागे अर्जुन निःस्तब्ध सा खडा हुआ बेसुध सा निःसहाय सा केशव के चरणों मे पडा हुआ कहता था ना लड पायेगा, वार एक ना कर पायेगा शत्रु का है भेष भले पर वो अपना है जो अडा हुआ कैसे मैं उनपर प्रहार करूँ, जिनका मैं इतना सम्मान करूँ वे अनुज है मेरे, अग्रज भी हैं, उनपर कैसे मैं आघात करूँ वहाँ प्राण प्रिये पितामह हैं और क्रूर सही पर मामा हैहै पथ से भटके भ्रात मेरे भले आततायी का जामा है है मात प्रिये वो चाची घर पर कैसे उनका आँचल सूना कर दूँ हाँ प्रण लिया पर कैसे मैं रक्त रंजित वो झोली कर…See More
Mar 23, 2024
AMAN SINHA posted blog posts
Mar 19, 2024
AMAN SINHA posted a blog post

हर बार नई बात निकल आती है

बात यहीं खत्म होती तो और बात थी यहाँ तो हर बात में नई बात निकल आती है यूँ लगता है जैसे कि ये कोई बरगद का पेड़ है जहां से भी खोदो एक नई साख निकल आती है उलझने ऐसी है कि कोई छोड़ मिलती ही नहीं एक को खींचो तो संग मे दो चार चली आती है खुला है माँझा पड़े है बिखरे कई तार यहाँ खुले छत पर जैसे कोई पडी जाल नजर आती है कही थी जो बात तुमने जो बर्फी में लपेटे हमको परत जो उतरी नीम कि बौछार नजर आती है बड़ा सोचकर पड़ता है नज़र करना लफ्जों को ज़ुबां से फिसलकर जो निकली तो गुनहगार नज़र आती है जिसे होता है ग़ुमा अपने…See More
Feb 26, 2024

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on AMAN SINHA's blog post आँख मिचौली
"रचना की विषयवस्तु बहुत रोचक है एक बहुत सुदर बाल रचना बन सकती है यह बस थोड़ा मात्राओं और तुकांत पर ध्यान दीजिये सुन्दर प्रयास है .. बहुत बधाई प्रिय अमन भाई "
Jan 16, 2024
AMAN SINHA posted a blog post

आँख मिचौली

आ जा खेले आँख मिचौली, तू मेरा मैं तेरी हमजोली बंद करूँ मैं आँखों को तू जाकर कहीं छूप जाए पर देख मुझे तू सतना ना दूर कहीं छिप जाना ना ऐसा न हो तू पुकारे मुझे, मैं दूर कहीं खो जाऊं मैं आऊँ मैं आऊँ मैं आऊँकहाँ है तू पर्दे के पीछे, या जा छुपा पलंग के नीचे कैसे मैं तुझे ढूंढ निकालूँ जाने कहाँ छुप के बैठा है गर तू बाहर ना आया सूरत ना अपनी दिखलाया मैं तुझे मिल पाने में फिर विफल कहीं ना हो जाऊँ मैं आऊँ मैं आऊँ मैं आऊँघर का कोना कोना देखा बाग देखा बगीचा देखा किधर तू छुप के जा बैठा है थक जाऊँ तुझे खोज ना…See More
Jan 7, 2024
AMAN SINHA posted a blog post

किसे बताएं

किसे बताए फिक्र किसे है, मेरे रहने की मर जाने की किसे पड़ी यहाँ पर मेरी लिखी बात दोहराने की मेरे खातिर यहाँ भले क्यूँ अपने आँसू बर्बाद करे किसको इतनी मोहब्बत मुझसे जो समय अपना बेकार करे सब अपने है बस अपने हैं, अपने बनकर रह जाएंगे मगर कभी आफनो के खातिर अपने ना हो पाएंगे किससे किसको चाहत इतनी, जो खड़ा रहे बाज़ार में भरी दोपहरी बिन छाया के अपनाने के इंतजार में आज जो मुझको कहने ना दे, गीत मुझे जो गाने न देचाहे मेरे लिखने का हक़ साथ हो मगर लिखने ना दे  मैं ना बोला बात मेरी, तो दीवारें बतियाएंगे मेरे…See More
Dec 31, 2023
AMAN SINHA posted a blog post

सुख या संतोष

दोनों में से क्या तुम्हें चाहिए सुख या के संतोष क्षणभंगुर सा हर्ष चाहिए, या जीवन भर का रोष खुशी का जीवन लम्हो सा है, अब आए अब जाए छोटी सी उदासी मन की पहाड़ हर्ष का ढाए खुशी स्वभाव से चंचल पानी, कल कल बहता जाए कभी यहाँ है कभी वहाँ है स्थिर ना होने पाए खूशी है फूटे गागर जैसा कभी पूरा ना पड़ने पाए जिस गति से पहुंचे हम तक, दो गुनी चाल से जाए जितना पास जगाए हममे अपने आने की राह जाते समय अफसोस सहारे अलविदा हमें कह जाए पर संतोष है पूजी के जैसी हर दिन बढ़ता जाए चाहे समय हो ऊंचा नीचा हर समय काम ये आए संतोष…See More
Nov 9, 2023
Dr. Vijai Shanker commented on AMAN SINHA's blog post किसे अपना कहेंं हम यहाँ
"आदरणीय अमन सिन्हा जी , बहुत ही सार गर्भित , व्यंगात्मक और ज्ञानवर्धक प्रस्तुति के लिए ह्रदय से बधाई, सादर ,"
Nov 8, 2023
Sushil Sarna commented on AMAN SINHA's blog post किसे अपना कहेंं हम यहाँ
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति सर"
Nov 5, 2023
AMAN SINHA posted a blog post

किसे अपना कहेंं हम यहाँ

किसे अपना कहें हम यहाँ खंजर उसी ने मारी जिसको गले लगाया किससे कहें हाल-ए-दिल यहाँ हर राज उसी ने खोला जिसे हमराज़ बनाया किसे जख्म दिखाये दिल का हार घाव उसी ने कुरेदा जिसको भी मरहम लगाया किसे साथी समझे अपना यहाँ मेरी जमीन उसी ने खींची जिसको कंधे पर बैठाया किसी चुने हमसफर अपना गड्ढा उसी ने खोदा जिसको रास्ता दिखलाया किसे बनाए मीत यहाँ मौके पर पीठ दिखाया जिसपर सबकुछ लुटायाकिससे करें उम्मीद यहाँ निवाला उसी ने छिना जिसको भूखा ना सुलाया कौन रहेगा साथ यहाँहर डोर उसी ने तोरी जिसको माला पहनाया किससे मांगे…See More
Oct 27, 2023

Profile Information

Gender
Male
City State
KOLKATA
Native Place
KOLKATA
Profession
WRITER
About me
NEW WRITER

AMAN SINHA's Blog

तुझे पाना ही बस मेरी चाह नहीं

तुझे पाना ही बस मेरी चाह नहीं,

बदन मिल जाना ही इश्क़ की राह नहीं।

जिस्म का क्या है, मिट्टी में मिल जाएगा,

हाँ, मगर रूह को कोई परवाह नहीं।

लबों ने लबों को तो बाद में छुआ,

पहले तू रूह से हमारा हुआ।…

Continue

Posted on November 10, 2024 at 7:59am

एक ही सत्य है, "मैं"

एक ही सत्य है, "मैं"

एक ही सत्य है, "मैं"

श्वेत हूँ मैं ,

और श्याम भी मैंं ।

मैं ही क्रोध हूँ,

और काम भी मैं।

उस ईश्वर का

मैं रूप नहीं,

स्वयं ईश्वर हूँ,

मैं दूत नहीं।

एक ही सत्य है, "मैं"

कर्म भी मैं हूँ,

और फल भी मैं,

धर्म भी मैं,

और अधर्म भी मैं।

कर्ता भी मैं,

और कांड भी मैं,

विपत्ति भी मैं,

और समाधान भी मैं।

तुम जितना

मुझमें समाओगे,

उतना ही

मुझको…

Continue

Posted on November 2, 2024 at 5:56am

बस बहुत हुआ, अब जाने दो

बस बहुत हुआ, अब जाने दो, साँस जरा तो आने दो,

घुटन भरे इस कमरे में, जरा धूप तो छट कर आने दो,

बस बहुत हुआ, अब जाने दो।

बहुत सुनी कटाक्ष तेरी, बात-बात पर दुत्कार तेरी,

शूल के जैसे बोल तेरे, चुन-चुन कर मुझे हटाने दो।

खामोशी में है…

Continue

Posted on August 4, 2024 at 4:10pm

बात कुछ और निकली है

बात कुछ और सोची थी, बात कुछ और निकली है

मेरे दिलबर के दिल की कहानी कुछ और निकली है

बड़ी फुर्सत से उस रब ने करी थी कारीगरी लेकिन

जो बन के है आई वो जवानी कुछ और निकली है

सुनाई थी जो तुमने ही कहानी, फिर से दोहरा दो

मेरे वीरान गुलिस्तां में डाली फूलों की लहरा दो

तेरे आने से जो खुशबू हवा में घुल सी जाती थी

तू है अब भी वही, लेकिन वो खुशबू कुछ और निकली है

खनक थी चूड़ियों में जो, झनक थी पायलों में जो

बिना…

Continue

Posted on July 23, 2024 at 8:03pm

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"   हमारे बिना यह सियासत कहाँजवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।... विडम्बना…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"   सूर्य के दस्तक लगानादेखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठितजिस समय…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"      तरू तरु के पात-पात पर उमढ़-उमढ़ रहा उल्लास मेरा मन क्यूँ उन्मन क्यूँ इतना…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, क्रोध विषय चुनकर आपके सुन्दर दोहावली रची है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से शुक्रिया.…"
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"   आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
10 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । हार्दिक बधाई "
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"वाहहहहहह आदरणीय क्या ग़ज़ल हुई है हर शे'र पर वाह निकलती है । दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं…"
10 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service