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Sushil Sarna
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vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post लौट आओ ....
" माता-पिता के प्रति बहुत ही सुन्दर, मार्मिक भावपूर्ण रचना। हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील जी।"
1 hour ago
Ravi Shukla commented on Sushil Sarna's blog post लौट आओ ....
"आदरणीय सुशील जी मॉं की अनुपस्थिति को रेखांकित करती कविता के लिये हार्दिक बधाई निवेदित है । सादर"
7 hours ago
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post लौट आओ ....
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, सुंदर भावों का गुलदस्ता पेश किया । माता-पिता जीवन के आधार स्तंभ होते हैं । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
9 hours ago
Mohit mishra (mukt) commented on Sushil Sarna's blog post लौट आओ ....
"क्या भावपूर्ण कविता लिखी है आदरणीय सुशील जी आपने , बधाई। "
16 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post लौट आओ ....
"जनाब सुशील सरना साहिब आदाब,बहुत सुंदर भावुक कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
19 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

लौट आओ ....

लौट आओ .... बहुत सोता था थक कर तेरे कांधों पर मगर जब से तू सोयी है मैं आज तक बंद आँखों में भी चैन से सो नहीं पाया माँजब भी लगी धूप तुम छाया बन कर आ गए जब से तुम गए हो मुझे धूप चिढ़ाती है छाया में भी बहुत सताती है पापाडांटते थे जब पापा माँ तुम मुझे अपनी ममता में छुपाती थीडांटती थी जब माँ मुझे पापा से पैसे लेने पर अधरों पे हल्की सी मुस्कान लिए पापा आप मुझे अपने कांधों पर उठा कर ले जाते थेमाँ लौट आओ मैं अब पापा से पैसे न लूँगा पापा अब लौट आओ मुझे तुम्हारी डांट बहुत प्यारी हैसुशील सरनाSee More
23 hours ago
Sushil Sarna commented on Dr.Prachi Singh's blog post चलो अब अलविदा कह दें......
"न मैं अब राह देखूँगी, न अब मुझको पुकारो तुम न अब उम्मीद होगी ये कि फिर मुझको सँवारो तुममुझे हर बार बहलाकर यहीं तुम रोक लेते होमगर अब खोल दो बंधन मुझे अब दूर जाना है....हमें उन्मुक्त उड़ना हैन बाँधें इन उड़ानों कोसुबह हमको जगाती है, चलो अब अलविदा कह…"
23 hours ago
Sushil Sarna commented on rajesh kumari's blog post हैं वफ़ा के निशान समझो ना (प्रेम को समर्पित एक ग़ज़ल "राज')
"झुक गया है तुम्हारे कदमों मेंये मेरा आसमान समझो नावाह आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत ही शानदार अशआर कहे है आपने। इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Monday
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post दरगाह
"आदरणीय विजय निकोर साहिब , आदाब   ... हमेशा की तरह एक गहन अभिव्यक्ति समेटे अप्रतिम प्रस्तुति को  आपने अपने पाठकों को नवाज़ा है।  इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए दिल से बधाई स्वीकार करें सर। "
Monday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post एक मुट्ठी राख़ ..../अंगड़ाइयों से...
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सृजन को मान देने का हार्दिक आभार। ""
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नज़र की हदों से .....
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सृजन को मान देने का हार्दिक आभार। "
Saturday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post नज़र की हदों से .....
"जनाब सुशील सरना जी सादर,बहुत उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Thursday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post एक मुट्ठी राख़ ..../अंगड़ाइयों से...
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन, बहुत खूबसूरत सृजन, बधाई निवेदित हैं।"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post नज़र की हदों से .....
"आदरणीय  laxman dhami जी सृजन के भावों को आत्मीय प्रशंसा से अलंकृत करने का हार्दिक आभार।"
Aug 17
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post ज़िंदगी...
"आदरणीय narendrasinh chauhan जी सृजन के भावों को आत्मीय प्रशंसा से अलंकृत करने का हार्दिक आभार।"
Aug 17
Sushil Sarna posted blog posts
Aug 17

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

Sushil Sarna's Blog

लौट आओ ....

लौट आओ .... 

बहुत सोता था

थक कर

तेरे कांधों पर

मगर

जब से

तू सोयी है

मैं

आज तक

बंद आँखों में भी

चैन से

सो नहीं पाया

माँ

जब भी लगी

धूप

तुम

छाया बन कर

आ गए

जब से

तुम गए हो

मुझे

धूप

चिढ़ाती है

छाया में भी

बहुत सताती है

पापा

डांटते थे

जब पापा

माँ

तुम मुझे

अपनी ममता में

छुपाती थी

डांटती थी

जब माँ…

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Posted on August 22, 2017 at 5:52pm — 5 Comments

एक मुट्ठी राख़ ..../अंगड़ाइयों से...

एक मुट्ठी राख़ ....

न ये सुबह तेरी है न रात तेरी है l
आबगीनों सी बंदे हयात तेरी  है l
इतराता है क्यूँ तू मैं की क़बा में -
एक मुट्ठी राख़ औकात  तेरी  है l

........................................

अंगड़ाइयों से...

उम्र जब अपने शबाब पर होती है l
तो मोहब्बत भी बेहिसाब  होती है l
जवां अंगड़ाइयों से मय बरसती है -
हर मुलाक़ात हसीन ख़्वाब होती है l

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित  

Posted on August 17, 2017 at 4:38pm — 2 Comments

नज़र की हदों से .....

नज़र की हदों से .....

अग़र

तेरे बिम्ब ने

मेरे स्मृति पृष्ठ पर

दस्तक

न दी होती

मैं कब का

तेरी नज़र की

हदों से

दूर हो गया होता

शायद

रह गया था

कोई क्षण

अधूरी तृषा लिए

तृप्ति के

द्वार पर

अगर

तेरी तृषा के

स्पंदन ने

मेरी श्वासों को

न छुआ होता

सच

मैं कब का

तेरी नज़र की

हदों से

दूर हो गया होता

शायद

लिपटा था

कोई मूक निवेदन

अपनी…

Continue

Posted on August 13, 2017 at 9:17pm — 12 Comments

नज़र की हदों से .....

नज़र की हदों से .....

अग़र

तेरे बिम्ब ने

मेरे स्मृति पृष्ठ पर

दस्तक

न दी होती

मैं कब का

तेरी नज़र की

हदों से

दूर हो गया होता

शायद

रह गया था

कोई क्षण

अधूरी तृषा लिए

तृप्ति के

द्वार पर

अगर

तेरी तृषा के

स्पंदन ने

मेरी श्वासों को

न छुआ होता

सच

मैं कब का

तेरी नज़र की

हदों से

दूर हो गया होता

शायद

लिपटा था

कोई…

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Posted on August 13, 2017 at 9:00pm — 2 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, Kewal Prasad said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, Kewal Prasad said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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