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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted a blog post

प्रतीक्षा लौ ...

प्रतीक्षा लौ ...जवाब उलझे रहे सवालों में अजीब -अजीबख्यालों में प्रतीक्षा की देहरी पर साँझ उतरने लगी बेचैनियाँ और बढ़ने लगीं ह्रदय व्योम में स्मृति मेघ धड़कने लगे नैन तटों से प्रतीक्षा पल अनायास बरसने लगे सवाल अपने गर्भ में जवाबों को समेटे रात की सलवटों पर करवटें बदलते रहे अभिव्यक्ति कसमसाती रही कौमुदी खिलखिलाती रही संग रैन केमन शलभ के प्रश्न बढ़ते रहे जवाब प्रतीक्षा लौ में जलते रहेसुशील सरना मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
1 hour ago
Sushil Sarna posted a blog post

अधूरी सी ज़िंदगी ....

अधूरी सी ज़िंदगी ....कुछ अधूरी सी रही ज़िंदगी कुछ प्यासी सी रही ज़िंदगी चलते रहे सीने से लगाए एक उदास भरी ज़िंदगी जीते रहे मगर अनमने से जाने कैसे गुफ़्तगू करते कट गयी अधूरी सी ज़िंदगीढूंढते रहे कभी अन्तस् में कभी जिस्म पर रेंगते स्पर्शों में कभी उजालों में कभी अंधेरों में निकल गई छपाक से जाने कहाँ हमसे हमारी अधूरी सी ज़िंदगीबरसती रही आँखों से सावन के मेघों सी राह चलते रहे मोड़ निकलते रहे कोई साथ चला कोई बिछुड़ गया कब तन्हा रह गए बरसते नैन कुछ कह गए पुष्प कहीं सो गए शूल साथी हो गए नैन बूँद में सिमट गयी…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएँ :
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार।"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post वेदना ...
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार।"
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post वेदना ...
"बेहतरीन शब्दों को बड़े ही सलीके से पिरोया है कविता में..वाह"
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएँ :
"वाह आदरणीय उम्दा सारगर्भित रचना..बधाई"
Friday
Sushil Sarna commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post अहीर छंद "प्रदूषण"
"आदरणीय वासुदेव जी अति सुंदर और प्रवाहमयी सृजन के लिए दिल से बधाई ।"
Thursday
Sushil Sarna commented on रामबली गुप्ता's blog post वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता
"आदरणीय रामबली गुप्ता जी अति सुंदर और मनभावन सृजन के लिए दिल से बधाई ।"
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post वेदना ...
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर प्रणाम .... सृजन पर आपकी आत्मीय आशीर्वाद का दिल की असीम गहराईयों से हार्दिक आभार।"
Thursday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post वेदना ...
"सरना जी , हमेशा की तरह अद्भुत i "
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं :
"आदरणीय   Samar kabeer  जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएँ :
"आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan  जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएँ :
"आदरणीय   Samar kabeer  जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएँ :
"आदरणीय    TEJ VEER SINGH  जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post उम्र....
"आदरणीय   Tasdiq Ahmed Khan जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
Thursday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post उम्र....
"आदरणीय    Samar kabeer जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार। "
Thursday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

प्रतीक्षा लौ ...

प्रतीक्षा लौ ...

जवाब उलझे रहे

सवालों में

अजीब -अजीब

ख्यालों में

प्रतीक्षा की देहरी पर

साँझ उतरने लगी

बेचैनियाँ और बढ़ने लगीं

ह्रदय व्योम में

स्मृति मेघ धड़कने लगे

नैन तटों से

प्रतीक्षा पल

अनायास बरसने लगे

सवाल

अपने गर्भ में

जवाबों को समेटे

रात की सलवटों पर

करवटें बदलते रहे

अभिव्यक्ति

कसमसाती रही

कौमुदी

खिलखिलाती रही

संग रैन के

मन शलभ के प्रश्न

बढ़ते रहे

जवाब…

Continue

Posted on April 22, 2019 at 6:25pm

अधूरी सी ज़िंदगी ....

अधूरी सी ज़िंदगी ....

कुछ

अधूरी सी रही

ज़िंदगी

कुछ प्यासी सी रही

ज़िंदगी

चलते रहे

सीने से लगाए

एक उदास भरी

ज़िंदगी

जीते रहे

मगर अनमने से

जाने कैसे

गुफ़्तगू करते

कट गयी

अधूरी सी ज़िंदगी

ढूंढते रहे

कभी अन्तस् में

कभी जिस्म पर रेंगते

स्पर्शों में

कभी उजालों में

कभी अंधेरों में

निकल गई छपाक से

जाने कहाँ

हमसे हमारी

अधूरी सी ज़िंदगी

बरसती रही…

Continue

Posted on April 20, 2019 at 7:26pm

वेदना ...

वेदना ...

अंतस से प्रस्फुरित हो

अधर तीर पर

ठहर गए कुछ शब्द

मौन के आवरण को

भेदने के लिए

अंतस के उजास पर

तिमिर का अट्हास

मानो वेदना का चरम हो

स्पर्शों की आँधी

निर्ग्रंथ देह पर

बिखरी अनुभूतियों के

प्रतिबिम्ब अलंकृत कर गई

रश्मियाँ अचंभित थी

निर्ग्रंथ देह पर

अनुभूतियों के

विप्रलंभ शृंगार को देखकर

क्या यही है प्रेम चरम की परिणीति

तृषा और तृप्ति के संघर्ष का अंत

नैनों तटों पर तैरती

अव्यक्त…

Posted on April 17, 2019 at 8:06pm — 4 Comments

क्षणिकाएँ :

क्षणिकाएँ :

१.

झाँक सका है कौन

जीवन सत्य के गर्भ में

निर्बाध गति

मौन यति

शाँत या अशांत

बढ़ता है सदा

अदृश्य और अज्ञात लक्ष्य की ओर

हो जाता है सम्पूर्ण

एक अपूर्णता के साथ

एक जीवन

२.

लिख गया कोई

खारी बूँदों से

रक्तिम गालों पर

विरह के

स्मृति ग्रन्थ

रह गई दृष्टि

निहारती

सूने चिन्हों से अलंकृत

अवसन्न से

प्रेम पंथ

३.

हो गई समर्पित

जिसे अपना मान

कर गया वही…

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Posted on April 15, 2019 at 7:59pm — 8 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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