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Sushil Sarna
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Sushil Sarna posted blog posts
30 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Sushil Sarna's blog post बरसात ....
"जनाब सुशील सरना साहिब, बरसात के मौसम के स्वागत में सुन्दर कविता हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |"
11 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं(6) :
"वाह बहुत खूब,,,,"
12 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post कुछ क्षणिकाएं(6) :
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,उम्दा क्षणिकाएँ लिखीं आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
12 hours ago
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post स्वप्न ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । "अपने पावों के लिए" इस पंक्ति में "पावों" शब्द ठीक है क्या?"
12 hours ago
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post बरसात ....
"   सदैव  समान, एक और सुन्दर कविता अपकी कलम से। हार्दिक बधाई।"
21 hours ago
Rakshita Singh commented on Sushil Sarna's blog post स्वप्न ....
"आदरणीय सुशील जी नमस्कार! बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ, हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
gumnaam pithoragarhi commented on Sushil Sarna's blog post स्वप्न ....
"वाकई सपने धीरे धीरे रूप बदलते हैं......"
yesterday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Sushil Sarna's blog post स्वप्न ....
"चूजे से सपनो में देखा है जिनको उनको पंख लग गए, और वे सब.... जीवन का यथार्थ है| बहुत सुंदर लिखा है आपने आदरणीय सुशिल सरना जी| बधाई स्वीकारें|"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

स्वप्न ....

स्वप्न .... कल तकचूजे से मेरे स्वप्नरोशनी से डरते थेहर वक्तपलकों से चिपके रहते थे लेकिन आजवो चूजे से स्वप्नकिशोर हो गए हैंअपनी दहलीज़ लांघने कोउत्सुक हैंअपने पाँव के लिएज़मीन तलाशते हैंअपने लिएउन्मुक्त आसमान ढूंढते हैंउड़ने के लिए किशोर स्वप्नव्यस्क होते हीजताने लगे हैंअपने अधिकारपलकों की चौखट केबाहर भी सुशील सरनामौलिक एवं अप्रकाशितSee More
yesterday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post बरसात ....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बारिश के मौसम के स्वागत में अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Neelam Upadhyaya commented on Sushil Sarna's blog post बरसात ....
"आदरणीय सुशिल सरना जी। सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Saturday
Rakshita Singh commented on Sushil Sarna's blog post बरसात ....
"आदरणीय सुशील जी, शब्दों की बौछारों से मन को भिगो देने वाली बहुत ही सुन्दर रचना । बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

बरसात ....

बरसात ....मेघों की गर्जना चपला की अटखेलियां फुहारों में भीगी तेज हवाएँ वातायन के पटों का शोर करवटों की रात लो फिर आ गई वस्ल की यादें लिए फिर आज बरसातवो चेहरे से उसका बूंदे हटाना लटें सुलझाना हौले से मुस्कुराना सच कहाँ भूलेगी वो शर्मीली सी बात कि याद ले आई फिर आज बरसातबारिश की बूंदों की अजब सी अगन स्पर्शों की आहट से घबराया मन न और हां की हो गयी साज़िश समर्पण के भावों की हो गई बारिश ले आई आज फिर करीब तुझको मेरे बुझती नहीं है आतिश ये दिल की करने लगी ताज़ा रुख़सत के लम्हे रुला गई आँखों को फिर आज…See More
Friday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब ... आपको ईद मुबारक। अल्लाह आपकी झोली अपनी रहमतों से भर दे , आपको अच्छी सेहत बख़्शे।"
Friday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"सर आपको भी ईद मुबारक और शुभकामनाएं। अल्लाह आपकी झोली अपनी रहमतों से भर दे।"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Jaipur-Rajasthan
Native Place
New Delhi
Profession
Retired from Central Govt.Service as Superintending Officer
About me
I am a simple,sentimental and transparent person.Poetry is my hobby and passion

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Sushil Sarna's Blog

कुछ क्षणिकाएं(6) :

कुछ क्षणिकाएं(6) :

1

नैनों का मौन

आमंत्रण

परिणाम

अभ्यंतर में

हुआ आभूषित

मौन

समर्पण

...................

2

पलकों के घरौंदों में

स्वप्न बोलते हैं

नैन

प्रभात में

यथार्थ

तौलते हैं

........................

3

चलो

हो गई मुलाकात

स्पर्शों की आंधी में

बीत गयी रात

हो गई प्रभात

............................

4

प्रेम

मौन अभिव्यक्ति…

Continue

Posted on June 18, 2018 at 4:30pm — 2 Comments

स्वप्न ....

स्वप्न ....
 
कल तक
चूजे से मेरे स्वप्न
रोशनी से डरते थे
हर वक्त
पलकों से…
Continue

Posted on June 18, 2018 at 3:30pm — 4 Comments

बरसात ....

बरसात ....

मेघों की गर्जना

चपला की अटखेलियां

फुहारों में भीगी तेज हवाएँ

वातायन के पटों का शोर

करवटों की रात

लो फिर आ गई

वस्ल की यादें लिए

फिर

आज बरसात

वो चेहरे से उसका

बूंदे हटाना

लटें सुलझाना

हौले से मुस्कुराना

सच कहाँ भूलेगी

वो शर्मीली सी बात

कि याद ले आई

फिर

आज बरसात

बारिश की बूंदों की

अजब सी अगन

स्पर्शों की आहट से

घबराया मन

न और हां की हो गयी…

Continue

Posted on June 15, 2018 at 7:19pm — 5 Comments

कुछ क्षणिकाएं :

कुछ क्षणिकाएं :

शर्मिन्दा हो गई

कुर्सी

बैठ गया

एक

नंगा इंसान

चुनावी साल में

वादों की गठरी लिए

.....................

शरमा गया

इंद्रधनुष

देखकर

धरा पर

इतनी

सफेदपोश

गिरगिटों को

..........................

सफ़ेद भिखारी

मांग रहे

भीख

छोटे भिखारी से

दिखा के

आश्वासनों की

चुपड़ी रोटी

.......................

आ गया

फिर से सावन

टरटराने लगे हैं…

Continue

Posted on June 13, 2018 at 6:46pm — 5 Comments

Comment Wall (34 comments)

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At 11:15pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुशील सरना जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "कविता : कितना अच्छा होता" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:35am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका मेल बॉक्स ब्लॉक होने के कारण मेल सेंड नहीं हो रहा है. 

At 1:29am on May 6, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सुशील सरना सर, विलम्ब से प्रत्युत्तर हेतु क्षमा. आपको मेल कर दिया है. सादर 

At 10:17pm on April 7, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ० सरना भाई जी, सादर  प्रणाम!

आपका हार्दिक स्वागत है.  मित्रता से भाग्योदय होता है ,  मैं धन्य हुआ. सादर

At 9:46am on April 1, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय सुशील जी ..महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 6:02am on March 20, 2016, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ०  सुशील सरना भाई जी, सादर प्रणाम!  आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. सादर

At 4:22pm on March 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सुशील सरना जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:00pm on February 17, 2016, Tasdiq Ahmed Khan said…

मोहतरम जनाब सुशील सरना  साहिब ,  यह  आप सब की हौसला अफ़ज़ाई का नतीजा है  , जिसके लिए   आप का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

At 8:47pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर हार्दिक शुभकामनाएं!
At 2:33pm on January 5, 2016, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

तन स्वस्थ रहे मन में उमंग...सुशील भाईजी आपको भी सपरिवार नव वर्ष की ढेरों  शुभकामनायें

 
 
 

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"आदरणीय तस्दीक़ जी नमस्कार,  आपकी शिर्कत व हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।"
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"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,क्या कहूँ इस रचना के बारे में,शब्द नहीं मिल रहे इसके अनुरूप,एक पंक्ति…"
8 hours ago
Rakshita Singh commented on Rakshita Singh's blog post तुम्हारे स्पर्श से....
"आदरणीय तस्दीक़ जी नमस्कार ,रचना पर आपकी शिर्कत के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।"
8 hours ago

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