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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's blog post जग में करूँ प्रसार (गीत) - रामानुज लक्ष्मण
"आद0 रामानुज लड़ीवाला जी सादर अभिवादन,बहुत सुंदर गीत,बधाई स्वीकार करें । अच्छा लगा पढ़कर।"
9 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Manoj kumar shrivastava's blog post चरित्र गिर रहा है
"आद0 मनोज जी सादर अभिवादन, रचना में आप शब्दो की मितव्ययिता लाईये, और शब्दों के दुहराव से बचिए, भावों को बांधने के लिए बहुत प्रसार पाठक को उबाऊपन बना देता है। आपका प्रयास उत्तम है। आपके लेखनी में धार है। बधाई देता हूँ इस सृजन पर। सादर"
9 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post आज फिर दर्द छलका:-मोहित मुक्त
"आद0 मोहित जी सादर अभिवादन, बढ़िया रचना लिखी आपने, हार्दिक बधाई आपको इस प्रस्तुति पर।"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SALIM RAZA REWA's blog post छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे - सलीम रज़ा रीवा
"तूने छोड़ा अगर साथ मेरा कभी हिज्र मे तेरे घुट घुट के मर जाएँगे वऐश वाह, आद0 सलीम भाई जी मतले से लेकर मकते तक बेह्तरीन ग़ज़ल कही आपने। दिल से हार्दिक बधाई निवेदित है आपको।"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post बंद किताब ...
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बहुत गहरी सोच को प्रतिबिंबित करती अतुकांत, पढ़ते पढ़ते भावों में खोने को बरबस खिंचती।बहुत बहुत बधाई इस अतुकांत पर।"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- अभी तक शख्स वो जिन्दा है साहब
"आद0 रामअवध विश्वकर्मा जी सादर अभिवादन। बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने। सभी हैं अपनी अपनी जिद पे कायम, किसी की कौन अब सुनता है साहब यह शैर बेहद पसंद आया। बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर। सादर"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मज़ाहिया ग़ज़ल
"आद0 तस्दीक अहमद खान साहब आपने बताया कि 5वे शैर का ऊला मिसरा बह्र में नहीं है। मेकअप से खा गए धोका अगर जो आप भी मेकअप से 2122 खा गए धो 2122 का अगर जो 2122 आप भी 212 फिर बेबहर कैसे? स्पष्ट करें तो हमे समझने में आसानी होगी।"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मज़ाहिया ग़ज़ल
"आद0तस्दीक अहमद खान साहब सादर अभिवादन, आपकी ग़ज़ल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन का हृदय तल से आभार। आपका सुझाव उत्तम है। तजरबा शब्द पर मुझे संशय है क्योकि मैंने शब्दकोश में इसे ताज्रीबा लिखा पाया था। पुनश्च आभार आपका"
10 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मज़ाहिया ग़ज़ल
"जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब ,सुन्दर ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं। सही शब्द "तजरबा" है शेर 5 का उला मिसरा बह्र में नहीं है ।"खा गए मेक अप से धोका आप उल्फ़त में अगर "सही लगे तो तब्दील कर लीजियेगा"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मज़ाहिया ग़ज़ल
"आद0 रामअवध विश्वकर्मा जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर उपस्थिति और सुखनवाजी का हृदय तल से आभार।"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद0 प्रतिभा पांडेय जी सादर अभिवादन, आपको जन्म दिवस की हार्दिक शुभेक्षा। दीर्घायु बनें, ऐसी कामना करता हूँ।"
10 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मज़ाहिया ग़ज़ल
"वाह बहुत ही खूबसूरत हास्य ग़ज़ल है बधाई आदरणीय कुशक्षत्रप जी"
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

मज़ाहिया ग़ज़ल

गर कुँवारे ही मरे क्या ताज्रीबा ले जाएँगेसाथ बस मैरीज ब्योरो का पता ले जाएँगेरोज ही मिलते रहे कपड़ो पे लम्बे बाल जोइक न इक दिन आप तो घर से निकाले जाएँगेबात दिल की कह न पाए वक़्त पर जो आप तोदूसरे ही उनको फिर दुल्हन बना ले जाएँगेकरके गलती आँख से आँसू गिराना सीख लोमार से बेगम की ये आँसू बचा ले जाएँगेमेकअप से खा गए धोका अगर जो आप भीफिर तो लैला की जगह मम्मी भगा ले जाएँगेखटमलों को जाँच लो सोने से पहले नाथ जीये वगरना वस्ल का सारा मज़ा ले जाएँगे(मौलिक व अप्रकाशित)See More
12 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post महिला सशक्तिकरण (कामरूप छःन्द)
"आद0 तस्दीक अहमद खान साहब सादर अभिवादन, रचना के भावों को आत्मसात कर बेह्तरीन प्रतिक्रिया से अवगत कराने और बधाई के लिए हृदय तल से आभार।"
15 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post महिला सशक्तिकरण (कामरूप छःन्द)
"आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम, मेरी रचना पर आपका आशीष मिला, रचनाकर्म सार्थक हुआ। आपके उत्साहवर्धन से और बेहतर लिखने की प्रेरणा मिलती है, बहुत बहुत आभार आपका।"
15 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post महिला सशक्तिकरण (कामरूप छःन्द)
"जनाब सुरेन्द्र नाथ साहिब ,महिलाओं का दर्द बयान करते सुन्दर कामरूप छन्द हुए हैं ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
yesterday

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Male
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Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
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About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

मज़ाहिया ग़ज़ल

गर कुँवारे ही मरे क्या ताज्रीबा ले जाएँगे

साथ बस मैरीज ब्योरो का पता ले जाएँगे



रोज ही मिलते रहे कपड़ो पे लम्बे बाल जो

इक न इक दिन आप तो घर से निकाले जाएँगे



बात दिल की कह न पाए वक़्त पर जो आप तो

दूसरे ही उनको फिर दुल्हन बना ले जाएँगे



करके गलती आँख से आँसू गिराना सीख लो

मार से बेगम की ये आँसू बचा ले जाएँगे



मेकअप से खा गए धोका अगर जो आप भी

फिर तो लैला की जगह मम्मी भगा ले जाएँगे



खटमलों को जाँच लो सोने से पहले नाथ… Continue

Posted on November 20, 2017 at 5:40pm — 5 Comments

महिला सशक्तिकरण (कामरूप छःन्द)

नारी न अबला, आज सबला, हौसले की खान

हर गम सहे वो, बिन कहे वो, बिखेरे मुस्कान

ममतामयी वो, गुण क़ई जो, ईश का वरदान

सम्मान घर की, शक्ति नर की, देव गाते गान



शिशु साथ पाले, घर सँभाले, और बाहर नाम

उल्टी पवन हो, थल गगन हो, करे ना आराम

कंधा मिलाकर, पग बढ़ाकर, ख़डी है हर धाम

पीछे नहीं अब, वो करे सब, हर तरह के काम



घर से निकलती, साथ चलती, हर कदम अब नार

अपनी लगन से, नित सृजन से, रचे नव संसार

छोटा बड़ा हो, दुख खड़ा हो, वो न माने हार

देवी स्वरूपा,… Continue

Posted on November 16, 2017 at 7:43pm — 6 Comments

बशीर बद्र साहब की जमीन पर एक तरही ग़ज़ल

अरकान-: मफ़ाइलुन फ़्इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन



नया ज़माना नया आफ़ताब दे जाओ

मिटा दे जुर्म जो वो इन्क़िलाब दे जाओ



हज़ार बार कहा है जवाब दे जाओ,

मैं कितनी बार लुटा हूँ हिसाब दे जाओ||



मुझे पसंद नही मरना इश्क़ में यारो,

मुझे है शौक़ नशे का शराब दे जाओ||



वो कह रहे हैं खड़े होके बाम पर मुझ से,

तमाशबीन बहुत हैं नक़ाब दे जाओ ||



करम करो ये मेरे हाल पर चले जाना

*उदास रात है कोई तो ख़्वाब दे जाओ*||



अगर जगाना है सोए हुओं को ऐ… Continue

Posted on October 25, 2017 at 1:31pm — 41 Comments

जिन्हें आदत पड़ी हर बात में आँसू बहाने क़ई (ग़ज़ल)

अरकान-: मुफाईलुन मुफाईलुन मुफाईलुन मुफाईलुन



जिन्हें आदत पड़ी हर बात में आँसू बहाने की,

तमन्ना वो न पालें फिर किसी से दिल लगाने की



सर-ए-महफ़िल कभी पर्दा नहीं करता था वो ज़ालिम

तो फिर अब क्या ज़रूरत पड़ गई है मुँह छुपाने की



लिखूंगा बात जो सच हो बिना डर के ज़माने में,

यहीं इक शर्त थी ख़ुद से कलम अपनी उठाने की



ख़बर अपनी नहीं रहती मुझे, हालात ऐसे हैं

खबर क्यूँ पूछते हो फिर मियाँ सारे जमाने की



बना ख़ुद रास्ता अपना हुनर है तेरे हाथों… Continue

Posted on October 24, 2017 at 5:47am — 20 Comments

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At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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