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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Page

Latest Activity

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। देर से जन्म दिन की शुभकामनाएं देने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ। पर सच कहूँ तो व्यस्तता में यह देखना भूल हो जाती है अन्यथा आपकी रचनाओँ पर परिवार ने बहुत प्यार बरसाया है। सादर"
Aug 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद0 तस्दीक अहमद खान जी को उनके जन्मदिवस की हार्दिक बधाई। "
Aug 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। वाह, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल। बधाई देता हूँ आपको इस ग़ज़ल पर। सादर"
Jul 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आद0 तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने। बहुत खूबसूरत अशआर। वाह। शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। सड़"
Jul 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आद0 राज साहब सादर अभिवादन। दाद और मुबारकबाद के लिए हार्दिक आभार।"
Jul 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। आपका आशीष मिला, ग़ज़ल कहना सफल हो गयी। सादर आभार आपका"
Jul 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आद0 गुरप्रीत जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर उपस्थित होकर उत्साह बढ़ाने के लिए हार्दिक आभार।"
Jul 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आद0 नीलेश भाई जी सादर अभिवादन। बधाई के लिए आभार आपका। सादर"
Jul 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आद0 गुरप्रीत सिंह जी सादर अभिवादन। बढिया ग़ज़ल पर आपको बधाई देता हूँ। आद0 समर साहब की बातों को संज्ञान में लीजियेगा। सादर"
Jul 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जब बिछड़के हम यहाँ और वो वहाँ हो जाएंगेसाथ गुजरे पल सभी तब दास्ताँ हो जाएँगे।। नर्क से बदतर लगेगी ज़िन्दगी सबको यहाँजात मजहब से अगर हम बदगुमाँ हो जाएँगे।। रहबरों को जिम्मेदारी का अगर अहसास होपास सबके रोटी कपड़ा और मकाँ हो जाएँगे।। हम अगर झूठी…"
Jul 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। मतले से मकते तक हर एक शैर कुछ न कुछ बेहतरीन खयाल को अपने अंदर समाहित किया हुआ।वाह वाह वाह। बहुत ही बेहतरीन। हम तो आपकी गज़लों से सीखते है। आपको शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।"
Jul 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आद0 नीलेश भाई जी सादर अभिवादन। बेहतरीन ग़ज़ल आपके हवाले से पढ़ने को मिली। वाह वाह। इस शैर का क्या कहना रूह का पंछी जो उड़ जाए तो ये सारे क़फ़स या मिलेंगे ख़ाक में या फिर धुआँ हो जाएँगे. शैर दर शैर बधाई कुबूल कीजिये।"
Jul 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आद0 राज नवादवी साहब सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन ग़ज़ल से मुशायरे की शुरुआत की आपने। शैर दर शैर दाद के साथमुबारकबाद पेश करता हूँ"
Jul 27
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आद0अखिलेश भाई जी सादर अभिवादन। कुकुभ और कुण्डलिया दोनों छंद चित्रानुरूप बेहतरीन रचे आपने। शासकीय स्कूलों की परेशानियों का बहुत बेहतरीन ढंग से कलम चलाई आपने। बधाई स्वीकार कीजिये मेरी। सादर"
Jul 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"कविवर नीरज जी को हम सबकी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि। ॐ शांति"
Jul 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 87 in the group चित्र से काव्य तक
"आद0 तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन रचना। अच्छा लगा पढ़कर। बहुत बहुत बधाई आपको। सादर"
Jul 20

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

श्रमिकों के जीवन पर आधारित मेरे 21 दोहे

कहीं बनाते हैं सड़क, कहीं तोड़ते शैल

करते श्रम वे रात दिन, बन कोल्हू के बैल।1।

नाले देते गन्ध हैं, उसमें इनकी पैठ

हवा प्रवेश न कर सके, पर ये जाएँ बैठ।2।

काम असम्भव बोलना, सम्भव नहीं जनाब

पलक झपकते शैल को, दें मुट्ठी में दाब।3।

चना चबेना साथ ले, थोड़ा और पिसान

निकलें वे परदेश को, पाले कुछ अरमान।4।

सुबह निकलते काम पर, घर से कोसों दूर

भूमि शयन हो शाम को, होकर श्रम से चूर।5।

ईंट जोड़…

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Posted on May 7, 2018 at 5:30pm — 24 Comments

उसकी लाठी आवाज नहीं करती (लघुकथा)

"अरे रमेश ये कैसे हुआ? और बेटे की हालत कैसी है? मुझे तो जैसे ही खबर लगी,भागा-भागा चला आ रहा हूँ"  आई सी यू के बाहर खड़े रमेश से रतन ने पूछा।

रतन को देखते ही रमेश रो पड़ा। फिर अपने को संभालते हुए बोला-"क्या बताऊँ तुम्हें, मेरे घर के पास जो हाई वोल्टेज तार का खम्बा लगा हुआ था, वही कल अचानक गिर गया। और फिर ये…."

बोलते-बोलते वह फफक पड़ा।

रतन ढाँढस देते हुए बोला- "मित्र हिम्मत न हारो। सब कुछ ठीक हो जाएगा। .....डॉक्टर्स क्या कह रहे…

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Posted on March 27, 2018 at 7:44am — 16 Comments

सामाजिक विद्रूपताओं पर एक गीत (वीर रस)

देख दुर्दशा यार वतन की, गीत रुदन के गाता हूँ

कलम चलाकर कागज पर मैं, अंगारे बरसाता हूँ

कवि मंचीय नहीं मैं यारों, नहीं सुरों का ज्ञाता हूँ

पर जब दिल में उमड़े पीड़ा, रोक न उसको पाता हूँ

काव्य व्यंजना मै ना जानूँ, गवई अपनी भाषा है

सदा सत्य ही बात लिखूँ मैं, इतनी ही अभिलाषा है

आजादी जो हमे मिली है, वह इक जिम्मेदारी है

कलम सहारे उसे निभाऊं, ऐसी सोच हमारी है

काल प्रबल की घोर गर्जना, लो फिर मैं ठुकराता हूँ

देख…

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Posted on February 11, 2018 at 6:18am — 9 Comments

ग़ज़ल (तुम्हारे ख़त जो मेरे नाम पर नहीं आते)

अरकान-1212  1122  1212  22

तुम्हारे ख़त जो मेरे नाम पर नहीं आते

तो दुश्मनों के भी चहरे नज़र नहीं आते

सतर्क आप रहें हर घड़ी निगाहों से

लुटेरे दिल के कभी पूछ कर नहीं आते

भला भी वक़्त तुम्हारे लिये बुरा होगा

सलीक़े जीने के तुमको अगर नहीं आते

बदल दिए हैं हमीं ने मिजाज मौसम के

भिगोने अब्र हमें बाम पर नहीं आते

हमेशा पीछे भी क्या देखना जमाने में

समय जो बीत गए लौट कर नहीं…

Continue

Posted on February 7, 2018 at 6:51pm — 8 Comments

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At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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