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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाइयाँ और असीम शुभकमनाएं...."
Dec 3
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 बहन राजेश कुमारी जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन ग़ज़ल,, मतला वाह,, बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन ग़ज़ल हुई है,, बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 मोहन बेगोवाल जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर बेहतरीन प्रयास किया आपने,, बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 अजंलि गुप्ता जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर बेहतरीन प्रयास आपका,, बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 जितेंद्र जी सादर अभिवादन। बढिया ग़ज़ल कही आपने। आली जनाब समर कबीर साहब की इस्लाह पर गौर कीजयेगा। बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 अशफ़ाक़ अली जी सादर अभिवादन। उम्दा ग़ज़ल हुई हैं बढ़ाओ स्वीकार कीजिये"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 श्लेष जी सादर अभिवादन। बेहतरीन ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 सुरेन्द्र इंसान जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर मेरी बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 मुन्नवर अली जी सादर अभिवादन।बहुत उम्दा ग़ज़ल पेश की आपने,, बहुत बहुत बधाई आपको"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 अजय गुप्ता जी सादर अभिवादन। बढिया ग़ज़ल पेश की है आपने।बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 रवि शुक्ल जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने,, मतला बेहद खूबसूरत। शेष शैर भी कमाल के। बहुत बहुत बधाई आपको इस प्रस्तुति पर"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 गजेंद्र श्रोत्रिय जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कही है आपने।  बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 अनीस शेख जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने मुशायरे में,, दाद के साथ बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 मिर्ज़ा जावेद जी सादर आभार आपका"
Nov 23
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101
"आद0 तस्दीक अहमद खान साहब सादर अभिवादन। क्या खूब ग़ज़ल कही, बहुत खूब,, शैर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद कुबूल करें"
Nov 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

"अखबार" पर तीन कुण्डलिया

कल घटना जो भी घटी, नभ थल जल में यार

उसे शब्द में बाँधकर, लाता है अखबार

लाता है अखबार, बहुत कुछ नया पुराना

अर्थ धर्म साहित्य, ज्ञान का बड़ा खजाना

पढ़के जिसे समाज, सजग रहता है हरपल

सबका है विश्वास, आज भी जैसे था कल।1।

जैसा कल था देश यह, वैसा ही कुछ आज

बदल रही तारीख पर, बदला नहीं समाज

बदला नहीं समाज, सुता को कहे अभागिन

लूटा गया हिज़ाब, कहीं जल गई सुहागिन

कचरे में नवजात, आह! जग निष्ठुर कैसा

समाचार सब आज, दिखे है कल ही…

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Posted on November 11, 2018 at 5:00pm — 6 Comments

सामाजिक विद्रूपताओं पर गीत

बात लिखूँ मैं नई पुरानी, थोड़ी कड़वी यार

सही गलत क्या आप परखना, विनती बारम्बार।।

झेल रहा है बचपन देखो,

बस्तों का अभिशाप

सदा प्रथम की हसरत पाले,

दिखते हैं माँ बाप।।

पढ़ो रात दिन नम्बर पाओ, कहना छोड़ो यार

सही गलत क्या आप परखना, विनती बारम्बार।।

गुंडे और मवाली के सिर,

सजे आजकल ताज

पढ़े लिखे हैं झोला ढोते,

पर है मौन समाज।।

सबको चिंता एक यहाँ बस, हो स्वजाति सरकार

सही गलत क्या आप परखना, विनती…

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Posted on September 25, 2018 at 7:30pm — 13 Comments

राखी पर कुछ कुण्डलिया

कच्चे धागों से जुड़ा, रक्षाबंधन पर्व

बहना बाँधे डोर जब, भैया करता गर्व

भैया करता गर्व, नेग बहना को देकर

प्रण जीवन रक्षार्थ, वचन खुश बहना लेकर

रेशम बाँधे प्रीत, सनातन रिश्ते सच्चे

बाँटे खुशी अपार, भले हैं धागे कच्चे।1।

सावन में बदरा घिरे, बहने लगी बयार

प्यार बाँटने आ गया, राखी का त्योहार

राखी का त्योहार, सजीं चहुओर दुकानें

ट्रांजिस्टर पर खूब, बजें राखी के गाने

जात धर्म से दूर, भाव है कितना पावन

बँधे स्नेह की डोर, मास आये…

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Posted on August 26, 2018 at 1:00pm — 19 Comments

श्रमिकों के जीवन पर आधारित मेरे 21 दोहे

कहीं बनाते हैं सड़क, कहीं तोड़ते शैल

करते श्रम वे रात दिन, बन कोल्हू के बैल।1।

नाले देते गन्ध हैं, उसमें इनकी पैठ

हवा प्रवेश न कर सके, पर ये जाएँ बैठ।2।

काम असम्भव बोलना, सम्भव नहीं जनाब

पलक झपकते शैल को, दें मुट्ठी में दाब।3।

चना चबेना साथ ले, थोड़ा और पिसान

निकलें वे परदेश को, पाले कुछ अरमान।4।

सुबह निकलते काम पर, घर से कोसों दूर

भूमि शयन हो शाम को, होकर श्रम से चूर।5।

ईंट जोड़…

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Posted on May 7, 2018 at 5:30pm — 25 Comments

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At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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