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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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SALIM RAZA REWA commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मकर संक्रान्ति (दोहा छंन्द)
"भाई सुरेन्द्र नाथ सिंह जी अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई."
Monday
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मकर संक्रान्ति (दोहा छंन्द)
"जनाब सुरेन्द्र  नाथ सिंह जी आदाब,बढ़िया दोहे लिखे,इस प्रस्तुति पर वधाई स्वीकार करें ।"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...इश्क़ चल के आ गया अपने हंसी अंजाम तक -बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आद0 बृजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने, शेष आली जनाब समर साहब कह चुके हैं। इस ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल -हुक्म की तामील करना कोई’ बेदाद नहीं-कालीपद 'प्रसाद'
"आद0 कालीपद प्रसाद जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल का बढ़िया प्रयास हुआ है, तथापि ग़ज़ल सा उतना सटीक बन नहीं पाया है। आपको इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई। सादर"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- मिला कुछ नहीं जाँच पड़ताल में।
"आद0 राम अवध जी सादर अभिवादन।बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई ।  गाल में' उचित प्रतीत नहीं होता सादर"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on somesh kumar's blog post कंधों का तनाव(कहानी )
"आद0सोमेश जी सादर अभिवादन। अच्छी कहानी लगी, कही कहीं कुछ घटनाएं अस्वाभाविक भी प्रतीत हुईं। बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति पर।सादर"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on विनय कुमार's blog post मुआफ़ी- लघुकथा
"आद0 विनय कुमार जी सादर अभिवादन।बढिया लघुकथा है,मार्मिक।बहुत बहुत बधाई इसपर।"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - तेरी आँखों में अभी तक है अदावत बाकी
"आद0 नवीन मणि जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही, आद0 समर साहब के इस्लाह से उत्तम। समर सहाब को नमन और आपको इस ग़ज़ल पर बधाई"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"आद0राहिला जी सादर अभिवादन।। बेहतरीन विषय को लेकर उम्दा लघुकथा कही आपने। बधाई इस प्रस्तुति पर"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SALIM RAZA REWA's blog post मुझसे ऐ जान-ए-जानाँ क्या हो गई ख़ता है -SALIM RAZA REWA
"आद0 सलीम रज़ा जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने,  बहुत बहुत बधाई, शेष गुनिजनो की बातों का संज्ञान लीजियेगा।"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post दूर कहीं सुख है मेरा (कविता)
"आद0 कल्पना जी सादर अभिवादन, बढ़िया कविता लिखी आपने, बहुत बहुत बधाई इसप्रस्तुति पर"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Manan Kumar singh's blog post विमोचन(लघु कथा)
"आद0 मनन कुमार सिंह जी सादर नमस्कार। बढ़िया लघुकथा, व्यंग कसते हुए, आजकल बहुत सम्पादक और लेखक हो गयेऐं।बधाई इस प्रस्तुति पर।"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mahendra Kumar's blog post बे-आवाज़ सिक्के /लघुकथा
"आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन।आपने गरीब लेबर वर्ग की दिक्कतों को लेकर जो ताना बुना है, वह विचारणीय है। इस प्रस्तुति पर बधाई"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"
"आद0 सुरेन्दर इंसान जी अच्छी ग़ज़ल कही आपने, बधाई"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SALIM RAZA REWA's blog post तू अगर बा - वफ़ा नहीं होता - सलीम रज़ा रीवा
"आद0 सलीम जी सादर अभिवादन। अच्छे अशआर हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Monday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohammed Arif's blog post कटाक्षिकाएँ
"आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन। बेहतरीन कताक्षिकाएँ लिखी आपने, दोनों उत्तम है। सच भी आज का यहीं है, अगर पहचान है तो बड़ा आदमी। अन्यथा करो संघर्ष। आपको इस प्रस्तुति पर बधाई देता हूँ"
Monday

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About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

मकर संक्रान्ति (दोहा छंन्द)

मकर राशि मे सूर्य का, ज्यों होता आगाज

बच्चे बूढ़े या युवा, बदलें सभी मिजाज।1।

भिन्न भिन्न हैं बोलियाँ, भिन्न भिन्न है प्रान्त

पर्व बिहू पोंगल कहीं, कहीं यहीं संक्रांत।2।

कहीं पर्व यह लोहड़ी, मने आग के पास

वैर भाव सब जल मिटे, झिलमिल दिखे उजास।3।

नदियों में डुबकी लगे, सब करें मकर स्नान

घर मे पूजा पाठ हो, सन्त लगाएं ध्यान।4।

उत्तरायणी पर्व पर, दान धर्म का योग

काले तिल में गुड़ मिले, लगे उसी का…

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Posted on January 14, 2018 at 11:47am — 2 Comments

मत्त सवैया (वीर रस की कविता)

क्षमाशीलता की इक सीमा, जब कोई उसको पार करे

शस्य श्यामला धरती का भी, पामर कोई प्रतिकार करे

काँप उठे धरती अम्बर तब, अरु महाप्रलय अवतार धरे

क़फ़न तिरंगे का पहने फिर, हर हाथ खड्ग तलवार धरे।1।



कुछ अधम उतारू करने को, भारत माँ के टुकड़े टुकड़े

ऐसी बातें सुनकर भी क्यों, हैं शस्त्र तुम्हारे मौन पड़े

जो देश धरा को गाली देते, उनके तुम क्यों हो साथ खड़े

रूप नहीं क्यों रौद्र दिखाते, शीश उड़ाते चिथड़े चिथड़े।2।



शत्रु सामने बलशाली हो, सम्मुख उसके तुम झुको… Continue

Posted on January 9, 2018 at 11:22am — 10 Comments

माँ के हाथों से जब खाया जाता है (ग़ज़ल)

अरकान-फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फ़ा

ऐसे रिश्ता यार निभाया जाता है

वक़्त पड़े तो ग़म भी खाया जाता है ।।

भूख लगी हो और न हो कुछ खाने को

बच्चे का फिर दिल बहलाया जाता है।।

लाख छुपाने से भी जब ये छुप न सके

फिर क्यों यारो इश्क़ छुपाया जाता है।।

तब होती है घर में बरकत ही बरकत

मुफ़लिस को महमान बनाया जाता है ।।

रुखा सूखा खाना लज़्ज़त दार लगे

माँ के हाथों से जब खाया जाता है ।।

चुंगल में सेठों के…

Continue

Posted on January 8, 2018 at 2:03pm — 12 Comments

गुड़ खाये गुलगुले से परहेज

पहली जनवरी की सुबह कुहरे की चादर लपेटे, रोज से कुछ अलग थी। सामने कुछ भी दिखाई नही दे रहा था। चाहे मौसम अनुकूल हो या प्रतिकूल, गौरव की दिनचर्या की शुरूआत मॉर्निंग वॉक से ही होती है, सो आज भी निकल गया हाथ मे एक टार्च लिए।

गली के चौराहे पर रोज की तरह शर्मा जी मिल गए। गौरव ने उनको हैप्पी न्यू ईयर बोला। पर शर्मा जी शुभकामना देने के बजाय भड़कते हुए बोले-

"अरे गौरव भाई! कौन से नव वर्ष की बधाई दे रहे हैं आप? आज आपको कुछ भी नया लग रहा है। क्या?"

क्यों? आपके…

Continue

Posted on January 4, 2018 at 1:30pm — 13 Comments

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At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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