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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"हमने तुमको तो मियाँ नेक बशर जाना थावादा करना ही न था जबकि मुकर जाना था देख कर फौज बड़ी पीठ दिखाई क्यों थीइससे अच्छा तो तुझे रण में ही मर जाना था ग़लतियाँ सबसे ही होती हैं जवानी में मगरआया जिस वक़्त बुढापा तो सुधर जाना था फर्क क्या पड़ता उसे राह में…"
4 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post सन्त भूषण रविदास
"आद0 भैया डॉ छोटेलाल सिंह जी सादर अभिवादन। संत शिरोमणि रविदास जी को याद करती बेहतरीन दोहे पर बधाई आपको"
Tuesday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Hariom Shrivastava's blog post (कल पुलवामा हमले में शहीद 42 जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए) - एक कुण्डलिया छंद-
"आद0 हरिओम श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। बढ़िया कुण्डलिया लिखा आपने, बधाई स्वीकार कीजिये"
Tuesday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on rakesh gupta's blog post शांति की बलिवेदी पर, निर्मम हत्याएं ओर नही
"आद0 राकेश गुप्ता जी सादर अभिवादन। मातृभूमि पर जान न्योछावर करनर वाले अमर बलिदानियों को आपने रचना के माध्यम बढ़िया श्रद्धांजलि अर्पित की है। बधाई स्वीकार कीजिये। वैसे पूरी रचना में मुझे शिल्प समझ में नहीं आया। सादर"
Tuesday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post जब तिरंगे में लिपट गांव वो आया होगा (२८ )
"आद0   गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत जी सादर अभिवादन।आपने बेहतरीन ग़ज़ल से भारत माँ के वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी है, मेरे भी भाव इस रचना में समाहित हैं। बधाई स्वीकार कीजिये। "
Tuesday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Ganga Dhar Sharma 'Hindustan''s blog post भारत माता करे पुकार...
"आद0गंगाधर शर्मा हिंदुस्तान जी सादर अभिवादन। ओज का प्रवाह करती बढिया रचना पर बधाई समर्पित है। इस रचना में आपने अलग अलग शिल्प आधारित छंद का प्रयोग किया है जैसे पहला बंद आल्हा छंद"
Tuesday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि)
"आद0 तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन। आपने बेहतरीन ग़ज़ल के माध्यम से पुलवामा के शहीदों को श्रंद्धाजलि दी है। नमन करता हूँ लेखनी को और नम आँखों से पर गर्वपूर्ण उन जवानों को श्रद्धांजलि भी अर्पित करता हूँ"
Tuesday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है
"आद0 सतविंद्र कुमार राणा जी सादर अभिवादन। बहुत बहुत आभार आपका"
Feb 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है
"आद0 दिगंबर नासवा जी सादर अभिवादन। आभार आपका"
Feb 15
सतविन्द्र कुमार राणा commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है
"बेहतरीन अशआर! हारदुक बधाई"
Feb 12
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आद0 बबिता जी सादर अभिवादन। आभार आपका"
Feb 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। आपकी प्रशंशा से लेखन को बल मिला, आभार आपका"
Feb 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आद0 शहज़ाद शेख उस्मानी साहब सादर अभिवादन  बढ़िया रचना के साथ आयोजन में सहभागिता के लिए आभार आपका"
Feb 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आद0 कल्पना भट्ट जी सादर अभिवादन। प्रकृति से खुद को जोड़ती इस रचना पर आपको दिल से बधाई"
Feb 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आद0 सौरभ पांडेय जी सादर प्रणाम। दिल से विषय पर क्या लिखा जाए, इस उधेड़बुन में मैं भी लगा था पर आपकी इस रचना ने मुझे भी कुछ लिखने को प्रेरित किया और प्रणामस्वरूप आज मैं भी कुछ लिख पाने में सक्षम हुआ। कंठ हो अवरूद्धन, फिर आज रो ले! बात हो!अधर न…"
Feb 11
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-100
"आद0 दयाराम मैथानी साहब सादर अभिवादन। बढिया मुक्तक कहा आपने, बधाई स्वीकार कीजिये।"
Feb 11

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

ग़ज़ल-किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है

अरकान-1222  1222  122

किनारा हूँ तेरा तू इक नदी है

बसी तुझ में ही मेरी ज़िंदगी है।।

हमारे गाँव की यह बानगी है

पड़ोसी मुर्तुज़ा का राम जी है।।

ख़यालों का अजब है हाल यारो

गमों के साथ ही रहती ख़ुशी है।।

घटा गम की डराए तो न डरना

अँधेरे में ही दिखती चाँदनी है।।

मुकम्मल कौन है दुनिया में यारो

यहाँ हर शख़्स में कोई कमी है।।

बनाता है महल वो दूसरों का

मगर खुद की टपकती झोपड़ी…

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Posted on February 4, 2019 at 7:00am — 8 Comments

प्रार्थना (मधुमालती छंद पर आधारित)

( १४ मात्राओं का सम मात्रिक छंद सात-सात मात्राओं पर यति, चरणान्त में रगण अर्थात गुरु लघु गुरु)

कर जोड़ के, है याचना, मेरी सुनो, प्रभु प्रार्थना।

बल बुद्धि औ, सदज्ञान दो, परहित जियूँ, वरदान दो।।

निज पाँव पे, होऊं खड़ा, संकल्प लूँ, कुछ तो बड़ा।

मुझ से सदा, कल्याण हो, हर कर्म से, पर त्राण हो।।

अविवेक को, मैं त्याग दूँ, शुचि सत्य का, मैं राग दूँ।

किंचित न हो, डर काल का, विपदा भरे, जंजाल का।।

लेकर सदा, तव नाम को, करता रहूँ, शुभ…

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Posted on January 30, 2019 at 11:01am — 4 Comments

जागो उठो हे लाल तुम (मधुमालती छंद)

(14 मात्राओं का सम मात्रिक छंद, सात सात मात्राओं पर यति, चरणान्त में रगण अर्थात गुरु लघु गुरु)

जागो उठो, हे लाल तुम, बनके सदा, विकराल तुम ।

जो सोच लो, उसको करो, होगे सफल, धीरज धरो।।

भारत तुम्हें, प्यारा लगे, जाँ से अधिक, न्यारा लगे।

मन में रखो, बस हर्ष को, निज देश के, उत्कर्ष को।।

इस देश के, तुम वीर हो, पथ पे डटो, तुम धीर हो।

चिन्ता न हो, निज प्राण का, हर कर्म हो, कल्याण का।।

हो सिंह के, शावक तुम्हीं, भय हो तुम्हें,…

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Posted on January 16, 2019 at 6:00am — 8 Comments

वन्दना (दुर्मिल सवैया)

कर जोड़ प्रभो विनती अपनी, तुम ध्यान रखो हम दीनन का।

हम बालक बृंद अबोध अभी, कुछ ज्ञान नहीं जड़ चेतन का

चहुओर निशा तम की दिखती, मुख ह्रास हुआ सच वाचन का

अब नाथ बसों हिय में सबके, प्रभु लाभ मिले तव दर्शन का ।।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 6, 2019 at 1:06pm — 2 Comments

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At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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"नमन साहब ... हर शेर कमाल है ग़ज़ल का ... दिल से दाद कबूल फरमाएं ... आखरी शेर तो दिल से मिक्ली दुआ है…"
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