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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post लघुकथा-पराकाष्ठा
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय आरिफ जी...सादर"
12 hours ago
Mohammed Arif commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post लघुकथा-पराकाष्ठा
"आदरणीय बृजेश कुमार जी आदाब,                              बहुत ही बेहतरीन लघुकथा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
13 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post लघुकथा-पराकाष्ठा
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय श्याम नारायण सिंह जी...सादर"
17 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post लघुकथा-पराकाष्ठा
"रचना पटल पे आपका हार्दिक अभिनन्दन एवं आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी...सादर"
17 hours ago
Shyam Narain Verma commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post लघुकथा-पराकाष्ठा
"बहुत बढ़िया कहानी , हार्दिक बधाई आपको"
23 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post लघुकथा-पराकाष्ठा
"हार्दिक बधाई आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज जी।मार्मिक लघुकथा।"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

लघुकथा-पराकाष्ठा

मोबाइल पर मेल का नोटिफिकेशन देख मोहन की आँखें चमक उठीं।शायद पायल का मेल हो।जल्दी से मेल खोला..हाँ ,ठीक 17 दिन बाद पायल का मेल था।अक्सर मेल नोटिफिकेशन देख खिल जाता है मोहन लेकिन अक्सर मायूसी ही हाथ लगती।खैर देखूं तो सही क्या लिखा है...अपने चश्मे को ठीक करता हुआ मोहन मेल पढ़ने लगा।"56 को हो गईं हूँ मैं और आप भी 60-65 तो होंगे ही,अब तो बता दो क्या मायने रखती हूँ मैं?और क्यों?" पिछले 40 सालों से ये सवाल कई बार पूछा था पायल ने लेकिन "कुछ सवालों को लाजबाब रहने दो" कह कर हर बार टाल गया मोहन।पर…See More
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Mohammed Arif's blog post कविता--कश्मीर अभी ज़िंदा है भाग-2
"आदरणीय आरिफ जी बहुत ही सही चित्रण किया है आपने.. ये तय है पीढियां गुजर जाएँगी लेकिन कश्मीर था कश्मीर है और सदैव रहेगा.."
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Mahendra Kumar's blog post बलि (लघुकथा)
"वाह आदरणीय क्या ही शानदार लघु कथा लिखी है...ये बहुत ही विकराल समस्या है स्पेशली हिन्दू धर्म में जहाँ एक बार शादी के बाद उसे तोडना पाप की तरह देखा जाता जाता है..जीवन में कई गलत निर्णय हो जाते हैं उनमे सुधार किया जाना चाहिए...लेकिन माफ़ी के साथ कहना…"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post लट जाते हैं पेड़- एक गीत
"वाह आदरणीय बहुत ही सुन्दर साथक गीत...बधाई"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Neelam Upadhyaya's blog post हाइकू
"वाह सुन्दर बहुत सुन्दर आदरणीया"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on TEJ VEER SINGH's blog post चुनावी घोषणायें  - लघुकथा –
"उम्दा कटाक्ष किया है लघुकथा के माध्यम से आदरणीय...सादर"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (हो गई उनकी महरबानी है)
"अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय..."
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rakshita Singh's blog post बेबसी...
"बहुत ही खूब भावों से भरी हुई रचना में लिए बधाई आदरणीया..."
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post दे गया दर्द कोई साथ निभाने वाला
"उम्दा ग़ज़ल कही है आदरणीय त्रिपाठी जी..."
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on vijay nikore's blog post परदेशी-बाबू
"आदरणीय विजय जी आपकी कवितायेँ  शुरू से लेकर अंत तक पाठक को बांध लेती हैं..प्रस्तुत कविता भी उसी श्रेणी में शोभायमान है...सादर"
yesterday

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noida
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jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

लघुकथा-पराकाष्ठा

मोबाइल पर मेल का नोटिफिकेशन देख मोहन की आँखें चमक उठीं।शायद पायल का मेल हो।जल्दी से मेल खोला..हाँ ,ठीक 17 दिन बाद पायल का मेल था।अक्सर मेल नोटिफिकेशन देख खिल जाता है मोहन लेकिन अक्सर मायूसी ही हाथ लगती।खैर देखूं तो सही क्या लिखा है...अपने चश्मे को ठीक करता हुआ मोहन मेल पढ़ने लगा।"56 को हो गईं हूँ मैं और आप भी 60-65 तो होंगे ही,अब तो बता दो क्या मायने रखती हूँ मैं?और क्यों?" पिछले 40 सालों से ये सवाल कई बार पूछा था पायल ने लेकिन "कुछ सवालों को लाजबाब रहने दो" कह कर हर बार टाल गया मोहन।पर…

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Posted on June 22, 2018 at 5:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल...पिछले कुछ दिनों से-बृजेश कुमार 'ब्रज'

फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुन

हूँ बहुत हैरान पिछले कुछ दिनों से

ज़ीस्त है हलकान पिछले कुछ दिनों से

चाँद भी है आजकल कुछ खोया खोया

रातें हैं वीरान पिछले कुछ दिनों से

आदमी हूँ आदमी के काम आऊँ

है यही अरमान पिछले कुछ दिनों से

कौड़ियों के भाव बिकती हैं अनाएं

मर गया ईमान पिछले कुछ दिनों से

जोश में है भीड़ 'ब्रज' आक्रोश भी है

बस नहीं है जान पिछले कुछ दिनों से

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

बृजेश कुमार…

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Posted on June 12, 2018 at 5:00pm — 14 Comments

गीत...धीरे धीरे आओ चन्दा (सार छंद 16,12 पर आधारित गीत)

धीरे धीरे आओ चन्दा

धीरे धीरे आओ

होंठों पर मुस्कान सजाये

सोया है मृग छौना

आहट से तेरी टूटेगा

उसका ख्वाब सलोना

बात समझ भी जाओ चन्दा

धीरे धीरे आओ

तुम चलते हो पीछे पीछे

चलते हैं सब तारे

और तुम्हारी सुंदरता पर

इठलाते हैं सारे

तुम तो मत इतराओ चन्दा

धीरे धीरे आओ

ऐसे भी कुछ घर आँगन हैं

बसते जहाँ अँधेरे

भूख वहाँ करताल बजाये

संध्या और सबेरे

उस दर भी मुस्काओ चन्दा

धीरे…

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Posted on June 8, 2018 at 6:30pm — 18 Comments

ग़ज़ल...आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये-बृजेश कुमार 'ब्रज'

2122 2122 2122 212

दर्द दिल के आशियाँ में इस क़दर पाले गये

आँख से लाली गई ना पांव से छाले गये

रोटियों से भूख की इतनी अदावत बढ़ गई

पेट में सूखे निवाले ठूंस के डाले गये

इस क़दर उलझे हुये हैं आलम-ए-तन्हाई में

मकड़ियां यादों की चल दी भाव के जाले गये

मुफ़लिसी की आँधियाँ थीं याद के थे खंडहर

नीव भी कमजोर थी सो टूट सब आले गये

ख़्वाब की आँखों से 'ब्रज' घटती नहीं हैं दूरियां

बात दीगर है सभी पलकों तले पाले गये…

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Posted on April 30, 2018 at 4:00pm — 10 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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