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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज''s Page

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar shrivastava's blog post चरित्र गिर रहा है
"बहुत ही बढ़िया रचना..बधाई"
Nov 21
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rahila's blog post परित्यागी (कविता)राहिला
"अच्छी कविता हुई आदरणीया..सादर"
Nov 21
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण रामानुज लडीवाला's blog post जग में करूँ प्रसार (गीत) - रामानुज लक्ष्मण
"उत्तम भावपूर्ण गीत हुआ आदरणीय..सादर"
Nov 21
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on santosh khirwadkar's blog post कुछ मिठास पाने को .....संतोष
"बहुतखूब ग़ज़ल कही आदरणीय..बधाई"
Nov 21
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post मुहब्बत भी निभाना अब सज़ा होने लगा है
"वाह बहुतखूब ग़ज़ल हुई.. बधाई"
Nov 21
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post महिला सशक्तिकरण (कामरूप छःन्द)
"वाह वाह खूब..नारी महिमा का बखान करते हुए सुन्दर रचना..."
Nov 21
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

गीत... ओ बरसते मेघ प्यारे-बृजेश कुमार 'ब्रज'

मनोरम छंद SISS SISS पे आधारित गीतओ बरसते मेघ प्यारेचल रही पुरवा सुहानीप्रीत की कहती कहानीनीर जो अम्बर से बरसेआसुओं की है रवानीबात ये उनको बता रेओ बरसते मेघ प्यारेखुशनुमा कुछ पल चुरा लूँसंग तेरे मैं भी गा लूँबीत जायेगा ये मौसमआँख में तुझको समा लूँरुक जरा सा हे सखा रेओ बरसते मेघ प्यारेराह तेरी तकते तकतेसाल बीता है बिलखतेजो बसे थे उर नगर मेंरह गये सपने सुलगतेमोर दादुर भी पुकारेओ बरसते मेघ प्यारेपतझरों की आँधियों मेंपुष्प की बरबादियों मेंचीखता उपवन अकेलामौन सी आबादियों मेंहै क़यामत ये सदा रेओ बरसते…See More
Nov 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"बड़ी उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय..बधाई"
Nov 18
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (नाज़ कब वो भी उठा पाते हैं दीवाने का )
"वाह वाह आदरणीय खूब ग़ज़ल हुई..सादर"
Nov 18
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"उम्दा ग़ज़ल हुई आदरणीय प्रदीप जी.."
Nov 17
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत... ओ बरसते मेघ प्यारे-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय समर कबीर जी ऐसा लिख कर शर्मिंदा न करें..आप बड़े है और सदैव सम्माननीय हैं..आपसे हमेशा कुछ न कुछ सीखने को ही मिलता है..सादर"
Nov 17
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत... ओ बरसते मेघ प्यारे-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"जी,इस गीत में तुकान्तता सही है,ग़लती मेरी है कि 'आँधियों'वाली पंक्ति को नज़र अंदाज़ कर गया,क्षमा चाहता हूँ ।"
Nov 17
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत... ओ बरसते मेघ प्यारे-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"जी,इस गीत में तुकान्तता सही है,क्षमा चाहता हूँ,'आंधियों'वाली पंक्ति को मैं नज़र अंदाज़ कर गया था ।"
Nov 17
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत... ओ बरसते मेघ प्यारे-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय सौरभ जी आपकी टिप्पड़ी से मन में उत्पन्न संशय दूर हुआ आपका ह्रदय से अभिनन्दन..बाकी सुधार करता हूँ..सादर"
Nov 17

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत... ओ बरसते मेघ प्यारे-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"गीत-विधा के अनुसार इस प्रस्तुति में तुकान्तता को लेकर कोई समस्या नहीं है.  ’साल’ पुल्लिंग हुआ करता है. गीत रचना के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ "
Nov 17
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत... ओ बरसते मेघ प्यारे-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"ओह्ह..आपका इशारा समझ गया...अभी भी थोडा संशय है..क्या तुकांत का निर्धारण पहली दो पंक्तियों से नहीं हो जाता है?? अर्थात प्रथम दो पंक्तियों में तुकांत इयों हुआ तो आगे सिर्फ वही नहीं माना जा सकता??सादर"
Nov 16

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

गीत... ओ बरसते मेघ प्यारे-बृजेश कुमार 'ब्रज'

मनोरम छंद SISS SISS पे आधारित गीत



ओ बरसते मेघ प्यारे



चल रही पुरवा सुहानी

प्रीत की कहती कहानी

नीर जो अम्बर से बरसे

आसुओं की है रवानी

बात ये उनको बता रे

ओ बरसते मेघ प्यारे



खुशनुमा कुछ पल चुरा लूँ

संग तेरे मैं भी गा लूँ

बीत जायेगा ये मौसम

आँख में तुझको समा लूँ

रुक जरा सा हे सखा रे

ओ बरसते मेघ प्यारे



राह तेरी तकते तकते

साल बीता है बिलखते

जो बसे थे उर नगर में

रह गये सपने सुलगते

मोर दादुर… Continue

Posted on November 14, 2017 at 6:30pm — 23 Comments

गीत... हर आहट पर यूँ लगता है जैसे हों साजन आये-बृजेश कुमार 'ब्रज'

हर आहट पर यूँ लगता है

जैसे हों साजन आये



घिर घिर आये कारे बादल

वैरी कोयल कूक उठी

अरमानों ने अंगड़ाई ली

और करेजे हूक उठी

बागों बीच पपीहा बोले

अमुआ डाली बौराये

हर आहट पर यूँ लगता है

जैसे हों साजन आये



खिड़की पर मायूसी पसरी

दरवाजों ने आह भरी

आँगन ज्यूँ शमशान हुआ है

कोने कोने डाह भरी

कब तक साँस दिलासा देगी

कब तक पायल भरमाये

हर आहट पर यूँ लगता है

जैसे हों साजन आये



फिर दिल ने आवाज लगाई

गौर करो… Continue

Posted on November 2, 2017 at 6:00pm — 29 Comments

कविता...​​ बदले हुये इंसान की बातें -बृजेश कुमार 'ब्रज'

सुबह से लेकर सांझ की बातें

इक खत में कैसे लिख दूँ

सूरज से लेकर चांद की बातें

इक खत में कैसे लिख दूँ



कैसे लिख दूँ मैं भँवरे का

कलियों से हुआ जो प्रेम मिलन

कैसे लिख दूँ कि बेलों ने

पेड़ों को बाँधा था आलिंगन

प्रीत पतिंगा दिए से करे

पगले के बलिदान की बातें

इक खत में कैसे लिख दूँ

जीवन और शमशान की बातें

इक खत में कैसे लिख दूँ



कैसे लिख दूँ की तुम बिन

उदास आँखों का दरपन

रूठी ​​हुई बहारें हैं

उजड़ा हुआ है… Continue

Posted on October 30, 2017 at 8:39pm — 8 Comments

गीत-क्रंदन कर उठे हैं भावना के द्वार पर-बृजेश कुमार 'ब्रज'

सभी पंक्तियों का मात्रा भार

2122 2122   2122 212 के क्रम में



गीत क्रंदन कर उठे हैं

भावना के द्वार पर



वेदना में याचना के

शब्द गीले हो गए

यातना के काफिलों से

पथ सजीले हो गए

आँसुओं की बेबसी में

दर्द की मनुहार पर

गीत क्रंदन कर उठे हैं

भावना के द्वार पर



आदमी में आदमी सा

क्या बचा है सोचिये?

पीर क्या है मुफलिसों की?

ये कभी तो पूछिये

हो रही फाकाकशी हर

तीज पर त्यौहार पर

गीत क्रंदन कर उठे…

Continue

Posted on October 19, 2017 at 1:00pm — 16 Comments

Comment Wall (2 comments)

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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