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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"आदरणीय अवनीश जी सादर धन्यवाद"
19 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी सुधार किए हैं...हाँ मआनी के लिए कुछ उचित अभी कर नहीं पाया...लेकिन उसमें भी सुधार हो सकता है। एक बार फिर आपका हार्दिक धन्यवाद"
19 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-अलग है

122     122     122     122हक़ीक़त जुदा थी कहानी अलग है सुनो ख़्वाब से ज़िंदगानी अलग  है ये गरमी की बारिश सुकूँ है अगरचे मग़र आँख से बहता पानी अलग है है खानाबदोशों की ख़ामोश  बस्ती यहाँ ज़िन्दगी का मआनी अलग  है मियां  शायरी  को ज़रा  मांजियेगाकहे ऊला कुछ और सानी अलग है पढ़ें गौर से  जल्दबाजी  न  कीजे ग़ज़ल  की मधुरता रवानी अलग है सँजोता नहीं 'ब्रज' ह्रदय में किसी को तसव्वुर  तेरा  शादमानी  अलग  है(मौलिक एवं अप्रकाशित) बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
yesterday
Awanish Dhar Dvivedi commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"सुन्दर सृजन। हार्दिक शुभकामनायें।"
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"//मैंने भी "ज़िन्दगी का" शब्द लिया है ..."ज़िन्दगी के" नहीं...थोड़ा सा और प्रकाश डालें क्या "ज़िन्दगी का" लेना उचित नहीं है??// आदरणीय ब्रज जी , मानी=अर्थ (एकवचन), मआनी= अनेकार्थ (बहुवचन) अब आप ख़ुद फ़ैसला कर लें।  1.…"
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी मैंने भी "ज़िन्दगी का" शब्द लिया है ..."ज़िन्दगी के" नहीं...थोड़ा सा और प्रकाश डालें क्या "ज़िन्दगी का" लेना उचित नहीं है??"
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी,  //फसाना पूर्णरूप से काल्पनिक हो सकता है लेकिन कहानी कई बार सत्य भी होती है...// जनाब, फ़साना और कहानी पर्यायवाची शब्द हैं, कहानी सच्ची भी हो सकती है मगर उसे सच्ची कहानी या सत्यकथा कहेंगे।  //मआनी शब्द बहुवचन है…"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी ग़ज़ल की विस्तृत समीक्षा के लिए हार्दिक आभार आपका...फसाना और कहानी में थोड़ा अन्तर होना चाहिए... फसाना पूर्णरूप से काल्पनिक हो सकता है लेकिन कहानी कई बार सत्य भी होती है...इसलिए फसाना और कहानी अलग अलग लिया है...हालांकि आपका…"
Sunday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"पुनश्च: //पढ़ो गौर से जल्दबाजी न कीजे... कीजै के साथ 'पढ़ो' नहीं 'पढ़ें' चलेगा।// भूल सुधार : कीजै के साथ 'पढ़ो' नहीं 'पढ़िये' चलेगा।"
Saturday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-अलग है
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ख़ूबसूरत ख़याल के साथ ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। फ़साना जुदा था कहानी अलग है.... जनाब फ़साना और कहानी एक ही बात है।  सुनो ख़्वाब से ज़िंदगानी अलग है.... ऊला यूँ कर सकते हैं - हक़ीक़त जुदा…"
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-अलग है

122     122     122     122हक़ीक़त जुदा थी कहानी अलग है सुनो ख़्वाब से ज़िंदगानी अलग  है ये गरमी की बारिश सुकूँ है अगरचे मग़र आँख से बहता पानी अलग है है खानाबदोशों की ख़ामोश  बस्ती यहाँ ज़िन्दगी का मआनी अलग  है मियां  शायरी  को ज़रा  मांजियेगाकहे ऊला कुछ और सानी अलग है पढ़ें गौर से  जल्दबाजी  न  कीजे ग़ज़ल  की मधुरता रवानी अलग है सँजोता नहीं 'ब्रज' ह्रदय में किसी को तसव्वुर  तेरा  शादमानी  अलग  है(मौलिक एवं अप्रकाशित) बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
Aug 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आँसू
"बहुत बहुत आभार आदरणीय धामी जी...सादर"
Aug 4
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आँसू
"आ. भाई बृजेश जी, सादर अभिवादन। बहुत खूबसूरत गजल हुई है । असीम हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Jul 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आँसू
"हौसलाफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया जनाब अमीरुद्दीन जी..."
Jul 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आँसू
"धन्यवाद आदरणीय गुमनाम जी...बहुत बहुत धन्यवाद"
Jul 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-आँसू
"रचना पटल पे आपका हार्दिक अभिनंदन एवं आभार आदरणीया अनीता जी..."
Jul 19

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Male
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noida
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jhansi

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ग़ज़ल-अलग है

122     122     122     122

हक़ीक़त जुदा थी कहानी अलग है

सुनो ख़्वाब से ज़िंदगानी अलग  है



ये गरमी की बारिश सुकूँ है अगरचे

मग़र आँख से बहता पानी अलग है



है खानाबदोशों की ख़ामोश  बस्ती

यहाँ ज़िन्दगी का मआनी अलग  है



मियां  शायरी  को ज़रा  मांजियेगा

कहे ऊला कुछ और सानी अलग है



पढ़ें गौर से  जल्दबाजी  न …

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Posted on August 6, 2022 at 8:30am — 9 Comments

ग़ज़ल-आँसू

2122 2122

उल्फ़तों की रीत आँसू
वेदना के मीत आँसू

तुम ग़ज़ल में ढल गईं तो
बन गये संगीत आँसू

पीर ने दर खटखटाया
आ गये मनमीत आँसू

आँसुओं के रूप कितने
मुस्कुराहट प्रीत आँसू

प्रेम के पावन सफ़र में
हार 'ब्रज' है जीत आँसू

(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on July 14, 2022 at 8:59am — 8 Comments

ग़ज़ल-जल उठा

2122       2122       2122       212

नफ़रतों की  आग भड़की भाईचारा  जल उठा

ख़ौफ़ इतना है कि दरिया का किनारा जल उठा



भीड़  ने  पकड़ा  किसी  को, देखते  ही  देखते

अम्न की उम्मीद उल्फ़त का सितारा जल उठा
 

वहशियों ने  वहशतों की तोड़  दी हर एक  हद

फिर कोई अरमान,आँखों का सहारा जल उठा


आह ये  नफ़रत  नगर  से  गाँव  कैसे आ  गई

खेत झुलसे हैं  कहीं खलिहान सारा जल…
Continue

Posted on April 22, 2022 at 8:24pm — 2 Comments

ग़ज़ल-दुख

1222      1222      1222       122

किसी की बेरुख़ी है या सनम हालात  का दुख

परेशां  हूँ हुआ  है अब तुझे किस बात का दुख



तुम्हें  तो  पड़  गई  हैं  आदतें  सी  रतजगों  की

तुम्हें क्या फ़र्क़ पड़ता बढ़ रहा जो रात का दुख



जमाती  सर्दियाँ, फुटपाथ  का  घर, पेट  ख़ाली

उन्हें  सोने  नहीं  देता  कई  हालात  का  दुख



भिंगोते  रात  का आँचल  बशर अपने  ग़मों से…

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Posted on December 30, 2021 at 11:00am — 5 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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