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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Friends

  • बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"मैं अभी ओबीओ पर चल रहे 'चित्र से काव्य तक'आयोजन में व्यस्त हूँ,आयोजन के बाद चर्चा करते हैं ।"
Friday
Niraj Kumar commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"आदरणीय बासुदेव जी, मैंने अपनी जानकारी के लिए पूछा था शायद जनाब समर कबीर साहब कुछ प्रकाश डाल सकें. सादर "
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"आ0 नीरज कुमार जी इस बहर में मैंने कुछ रचनाएँ देखी थी। लय अच्छी लगी तो हिन्दी की महिमा में यह एक रचना अगले साल लिखी थी जब मुझे बहर आदि के विषय में नहीं के बराबर जानकारी थी। यह शायद स्टेंडर्ड बहरों में से नहीं है।"
Friday
Niraj Kumar commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"आदरणीय बासुदेव जी, अरकान तो मैंने देख लिए थे मेरा मतलब इस बह्र के नाम से था. अरकान देखने से यह मुतकारिब मुसद्दस मुजायफ़ की कोई महजूफ बह्र लगती है लेकिन मुतकारिब मुसद्दस की कोई महजूफ बह्र मेरी जानकारी में ऐसी नहीं है जिसके अरकानों का क्रम…"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"आ0 नीरज कुमारजी आपका बहुत धन्यवाद। ग़ज़ल की बहर 22 122 22 // 22 122 22 बहर में"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"आ0 समर कबीर जी आपका हृदय से आभार। मुझे लय और मात्राओं में कहीं नुस्ख नज़र नहीं आया यदि कहीं आप बताते तो बात समझ में आती।"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Tinsukia
Native Place
Tinsukia
Profession
कवि
About me
परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; स्थान - सुजानगढ़ (राजस्थान) रुचि - हर विधा में कविता लिखना। मुक्त छंद, पारम्परिक छंद, हाइकु, मुक्तक इत्यादि। गीत ग़ज़ल में भी रुचि है। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। मैं नारायणी साहित्य अकादमी से जुड़ा हुवा हूँ। हमारी नियमित रूप से मासिक कवि गोष्ठी होती है जिनमें मैं नियमित रूप से भाग लेता हूँ। नारायणी के माध्यम से मैं देश के प्रतिष्ठित साहित्यिकारों से जुड़ा हुवा हूँ। whatsup के कई ग्रुप से जुड़ा हुवा हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। Blog - narayanitsk.blogspot.com बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Blog

ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)

भाषा बड़ी है प्यारी जग में अनोखी हिन्दी,

चन्दा के जैसे सोहे नभ में निराली हिन्दी।



पहचान हमको देती सबसे अलग ये जग में,

मीठी जगत में सबसे रस की पिटारी हिन्दी।



हर श्वास में ये बसती हर आह से ये निकले,

बन के लहू ये बहती रग में ये प्यारी हिन्दी।



इस देश में है भाषा मजहब अनेकों प्रचलित,

धुन एकता की डाले सब में सुहानी हिन्दी।



शोभा हमारी इससे करते 'नमन' हम इसको,

सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी।





आज हिन्दी दिवस…

Continue

Posted on September 14, 2017 at 11:30am — 41 Comments

आज़ादी का गीत

"आज़ादी का गीत"

(2212 122 अंतरा 22×4 // 22×3)

(तर्ज़- दिल में तुझे बिठा के)



भारत तु जग से न्यारा, सब से तु है दुलारा,

मस्तक तुझे झुकाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।।



सन सैंतालिस मास अगस्त था, तारिख पन्द्रह प्यारी,

आज़ादी जब हमें मिली थी, भोर अज़ब वो न्यारी।

चारों तरफ खुशी थी, छायी हुई हँसी थी,

ये पर्व हम मनाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।।



आज़ादी के नभ का यारों, मंजर था सतरंगा,

उतर गया था जैक वो काला, लहराया था तिरंगा।

भारत की जय थी गूँजी, अनमोल… Continue

Posted on August 15, 2017 at 1:29pm — 5 Comments

कृष्णावतार

"कृष्णावतार"



रास छंद। 8,8,6 मात्रा पर यति। अंत 112 से आवश्यक और 2-2 पंक्ति तुकांत आवश्यक।)



हाथों में थी, मात पिता के, सांकलियाँ।

घोर घटा में, कड़क रही थी, बीजलियाँ

हाथ हाथ को, भी ना सूझे, तम गहरा।

दरवाजों पर, लटके ताले, था पहरा।।



यमुना मैया, भी ऐसे में, उफन पड़ी।

विपदाओं की, एक साथ में, घोर घड़ी।

मास भाद्रपद, कृष्ण पक्ष की, तिथि अठिया।

कारा-गृह में, जन्म लिया था, मझ रतिया।।



घोर परीक्षा, पहले लेते, साँवरिया।

जग को करते,… Continue

Posted on August 14, 2017 at 11:35am — 5 Comments

राखी

"राखी" (चौपइया छंद)



पर्वों में न्यारी, राखी प्यारी,

सावन बीतत आई।

करके तैयारी, बहन दुलारी,

घर आँगन महकाई।

पकवान पकाए, फूल सजाए,

भेंट अनेकों लाई।

वीरा जब आया, वो बँधवाया,

राखी थाल सजाई।।



मन मोद मनाए, बलि बलि जाए,

नव उमंग है छाई।

भाई मन भाए, गीत सुनाए,

खुशियों में बौराई।

डाले गलबैयाँ, लेत बलैयाँ,

छोटी बहन लडाई।

भाल पे बिंदिया, ओढ़ चुनरिया,

जीजी मंगल गाई।।



जब जीवन चहका, बचपन महका,

तुम थी तब… Continue

Posted on August 7, 2017 at 6:21pm — 6 Comments

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At 7:13pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
श्री बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

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