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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Friends

  • बृजेश कुमार 'ब्रज'
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"
 

बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Page

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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post समान सवैया "रस और कविता"
"बहुत अच्छी रचना हुई आदरणीय अग्रवाल जी...हार्दिक बधाई"
Apr 1
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post समान सवैया "रस और कविता"
"जनाब बासुदेव अग्रवाल जी आदाब, बहुत समय के बाद आपको यहाँ देख कर प्रसन्नता हुई । अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 25
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

समान सवैया "रस और कविता"

विश्व कविता दिवस की हार्दिक शुभकामना।32 मात्रिक छंद "रस और कविता"मोहित होता जब कोई लख, पग पग में बिखरी सुंदरता।दाँतों तले दबाता अंगुल, देख देख जग की अद्भुतता।।जग-ज्वाला से या विचलित हो, वैरागी सा शांति खोजता।ध्यान भक्ति में ही खो कर या, पूर्ण निष्ठ भगवन को भजता।।या विरहानल जब तड़पाती, धू धू कर के देह जलाती। पूर्ण घृणा वीभत्स भाव की, या फिर मानव हृदय लजाती।।जग में भरी भयानकता या, रोम रोम भय से कम्पाती।।ओतप्रोत वात्सल्य भाव से, माँ की ममता जिसे लुभाती।।अरि की छाती वीर भाव से, छलनी करने भुजा…See More
Mar 21
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आ0 सुरेंद्र नाथ जी सरसी छंद की बहुत ही सार्थक सृजन की हृदय से बधाई।"
Sep 13, 2020
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आ0 आशीष यादव जी बहुत आभार।"
Sep 13, 2020
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आदरणीया सुनंदा झा जी बहुत आभार।"
Sep 13, 2020
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आ0 लक्ष्मण धामी जी बहुत बहुत आभार।"
Sep 13, 2020
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"आदरणीया सुनंदा जी बचपन के दिनों के अनेक रंगों को संजोती सुंदर रचना।"
Sep 13, 2020
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119
"ग़ज़ल ( जीभ दिखा कर) 2*15 जीभ दिखा कर यारों को ललचाना वो भी क्या दिन थे,उनसे फिर मन की बातें मनवाना वो भी क्या दिन थे। साथ खेलना बात बात में झगड़ा भी होता रहता,पल भर कुट्टी फिर यारी हो जाना वो भी क्या दिन थे। डींग हाँकने और खेलने में जो माहिर वो…"
Sep 12, 2020
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' added a discussion to the group राजस्थानी साहित्य
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गीत (रोज सुणै है कै)

रोज 'सुणै है कै' कै बाळो जद बोल्यो 'सुण धापाँ'।सुणकै मुळकी, हुयो हियो है तब सै बागाँ बागाँ।आज खटिनै से बागाँ माँ ये कोयलड़ी कूकी,पाणी सिंच्यो आज बेल माँ पड़ी जकी थी सूकी,मुख सै म्हारो नाँव सुन्यो तो म्हे तो मरग्या लाजाँ,रोज 'सुणै है कै' कै बाळो जद बोल्यो 'सुण धापाँ'।मनरै मरुवै री खुशबू अंगाँ सै फूटण लागी,सगळै तन में एक धूजणी सी इब छूटण लागी,राग सुनावै मन री कुरजाँ म्हे तो चढ़ग्या नाजाँ,रोज 'सुणै है कै' कै बाळो जद बोल्यो 'सुण धापाँ'।नेह-मेह बरसावण खातिर मन-बादलियो माच्यो,आज पिया रे रंग मँ सारो मेरो…See More
Aug 30, 2020
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आदरणीया सुनंदा झा.जी आपका हृदयतल से आभार।"
Aug 16, 2020
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आदरणीय.लक्ष्मण धामी जी आपका अतीव आभार।"
Aug 16, 2020
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ0 लक्ष्मण धामी जी बहुत सुंदर दोहे। बधाई। आजादी का पर्व है, घर घर मंगल गान।उड़े तिरंगा शान से, देश करे अभिमान।।"
Aug 15, 2020
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"(शहीदों की शहादत)2122*3+212 (गीतिका छंद आधारित)(पदांत 'मन में राखलो', समांत 'आज') भेंट प्राणों की दी जिनने आन रखने देश की,उन जवानों के हमैशा काज मन में राखलो।।भूल जाना ना उन्हें तुम ऐ वतन के दोसतों,उन शहीदों की शहादत आज मन में…"
Aug 15, 2020
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीया अंजलि गुप्ता जी आपका आभार।"
Jul 25, 2020
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी बहुत बहुत आभार।"
Jul 25, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Tinsukia
Native Place
Tinsukia
Profession
कवि
About me
परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; स्थान - सुजानगढ़ (राजस्थान) रुचि - हर विधा में कविता लिखना। मुक्त छंद, पारम्परिक छंद, हाइकु, मुक्तक इत्यादि। गीत ग़ज़ल में भी रुचि है। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। मैं नारायणी साहित्य अकादमी से जुड़ा हुवा हूँ। हमारी नियमित रूप से मासिक कवि गोष्ठी होती है जिनमें मैं नियमित रूप से भाग लेता हूँ। नारायणी के माध्यम से मैं देश के प्रतिष्ठित साहित्यिकारों से जुड़ा हुवा हूँ। whatsup के कई ग्रुप से जुड़ा हुवा हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। Blog - narayanitsk.blogspot.com बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Blog

समान सवैया "रस और कविता"

विश्व कविता दिवस की हार्दिक शुभकामना।

32 मात्रिक छंद "रस और कविता"

मोहित होता जब कोई लख, पग पग में बिखरी सुंदरता।

दाँतों तले दबाता अंगुल, देख देख जग की अद्भुतता।।

जग-ज्वाला से या विचलित हो, वैरागी सा शांति खोजता।

ध्यान भक्ति में ही खो कर या, पूर्ण निष्ठ भगवन को भजता।।

या विरहानल जब तड़पाती, धू धू कर के देह जलाती।

पूर्ण घृणा वीभत्स भाव की, या फिर मानव हृदय लजाती।।

जग में भरी भयानकता या, रोम रोम भय से कम्पाती।।

ओतप्रोत…

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Posted on March 21, 2021 at 11:44am — 2 Comments

ग़ज़ल (तीर नज़रों का उनका चलाना हुआ)

212*

तीर नज़रों का उनका चलाना हुआ,

और दिल का इधर छटपटाना हुआ।

हाल नादान दिल का न पूछे कोई,

वो तो खोया पड़ा आशिक़ाना हुआ।

ये शब-ओ-रोज़, आब-ओ-हवा आसमाँ,

शय अज़ब इश्क़ है सब सुहाना हुआ।

अब नहीं बाक़ी उसमें किसी की जगह,

जिनकी यादों का दिल आशियाना हुआ।

क्या यही इश्क़ है, रूठा दिलवर उधर,

और दुश्मन इधर ये जमाना हुआ।

जो परिंदा महब्बत का दिल में बसा,

बाग़ उजड़ा तो वो बेठिकाना…

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Posted on September 30, 2019 at 5:49pm — 4 Comments

असबंधा छंद "हिंदी गौरव

असबंधा छंद "हिंदी गौरव

भाषा हिंदी गौरव बड़पन की दाता।

देवी-भाषा संस्कृत मृदु इसकी माता।।

हिंदी प्यारी पावन शतदल वृन्दा सी।

साजे हिंदी विश्व पटल पर चन्दा सी।।

हिंदी भावों की मधुरिम परिभाषा है।

ये जाये आगे बस यह अभिलाषा है।।

त्यागें अंग्रेजी यह समझ बिमारी है।

ओजस्वी भाषा खुद जब कि हमारी है।।

गोसाँई ने रामचरित इस में राची।

मीरा बाँधे घूँघर पग इस में नाची।।

सूरा ने गाये सब पद इस में प्यारे।

ऐसी थाती पा कर हम सब से…

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Posted on September 14, 2019 at 9:10am — 3 Comments

ग़ज़ल (देते हमें जो ज्ञान का भंडार)

गुरु पूर्णिमा के विशेष अवसर पर:-

बह्र:- 2212*4

देते हमें जो ज्ञान का भंडार वे गुरु हैं सभी,

दुविधाओं का सर से हरें जो भार वे गुरु हैं सभी।

हम आ के भवसागर में हैं असहाय बिन पतवार के,

जो मन की आँखें खोल कर दें पार वे गुरु हैं सभी।

ये सृष्टि क्या है, जन्म क्या है, प्रश्न सारे मौन हैं,

जो इन रहस्यों से करें निस्तार वे गुरु हैं सभी।

छंदों का सौष्ठव, काव्य के रस का न मन में भान…

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Posted on July 16, 2019 at 3:30pm — 2 Comments

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At 11:03pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय हौसला बढ़ने का
At 7:13pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
श्री बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

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