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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
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  • Tinsukia
  • India
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Friends

  • बृजेश कुमार 'ब्रज'
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"
 

बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Page

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"शेख शहज़ाद उस्मानी जी आभार।"
Sunday
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"सौरभजी आभार"
Sunday
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"सुचि बहन बहुत बहुत आभार।"
Sunday
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"आ0 अखिलेश जी उत्तम सुझाव और सार्थक प्रतिक्रया के लिये आभार"
Sunday
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"वाह आदरणीय अखिलेश जी सभी दोहे प्रदत चित्र के हर रूप के अनुरूप और मूल समस्या की जड़ को व्याख्यित करते हुए। इस प्रस्तुति की हृदय तल से बधाई। बेटे पत्थरबाज हैं, मातु पिता धृतराष्ट्र। एक प्रांत कश्मीर से, परेशान है राष्ट्र॥  वाह शानदार रूपक।"
Saturday
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"आ0 तस्दीक़ जी प्रदत्त चित्र पर बहुत ही सार्थक और मंजे हुए दोहे आपने रचे हैं, हृदय तल से बधाई स्वीकार करें। 3 रे दोहे में शब्दों के क्रम से लय भटकाव है। खड़े सड़क पर सरफिरे सही क्रम होगा।"
Saturday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
"आ0 हरिहर झा जी दोहों को आपसे सम्मान मिला, बहुत बहुत आभार।"
Saturday
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"हरिहर झा जी सभी दोहे विषय अनुकूल एवं सार्थक। आपको प्रस्तुति की बधाई।  "
Saturday
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"आदरणीय सौरभ पांडे जी बहुत ही सुंदर व सार्थक दोहों से छंदोत्सव का आपने शुभारम्भ किया है। इस प्रस्तुति पर हृदय से बधाई स्वीकार करें।"
Saturday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 93 in the group चित्र से काव्य तक
""कश्मीरी पत्थरबाजों पर दोहे" धरती का जो स्वर्ग था, बना नर्क वह आज।गलियों में कश्मीर की, अब दहशत का राज।। भटक आज सब नव युवक, फैलाते आतंक।सड़कों पर तांडव करें, होकर के निःशंक।। उग्रवाद की शह मिली, भटक गये कुछ छात्र।बन कर पत्थरबाज वे, आज…"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आ0 अखिलेश जी समस्त रचनाओं की बहुत बहुत बधाई।"
Jan 12
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आ0 महेंद्र कुमारजी बहुत बहुत आभार।"
Jan 12
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आ0 शेख उस्मानीजी एक से बढ़कर एक हाइकुओं की बहुत बधाई।"
Jan 12
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आ0 महेंद्र कुमारजी प्रदत विषय को समेटती सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई।"
Jan 12
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आ0 शेख उस्मानी साहिब उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार।"
Jan 12
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आ0 समर कबीर साहिब रचना के अनुमोदन के लिए बहुत बहुत आभार।"
Jan 12

Profile Information

Gender
Male
City State
Tinsukia
Native Place
Tinsukia
Profession
कवि
About me
परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; स्थान - सुजानगढ़ (राजस्थान) रुचि - हर विधा में कविता लिखना। मुक्त छंद, पारम्परिक छंद, हाइकु, मुक्तक इत्यादि। गीत ग़ज़ल में भी रुचि है। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। मैं नारायणी साहित्य अकादमी से जुड़ा हुवा हूँ। हमारी नियमित रूप से मासिक कवि गोष्ठी होती है जिनमें मैं नियमित रूप से भाग लेता हूँ। नारायणी के माध्यम से मैं देश के प्रतिष्ठित साहित्यिकारों से जुड़ा हुवा हूँ। whatsup के कई ग्रुप से जुड़ा हुवा हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। Blog - narayanitsk.blogspot.com बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Blog

ग़ज़ल (आज फैशन है)

ग़ज़ल (आज फैशन है)

1222 1222 1222 1222

लतीफ़ों में रिवाजों को भुनाना आज फैशन है,

छलावा दीन-ओ-मज़हब को बताना आज फैशन है।

ठगों ने हर तरह के रंग के चोले रखे पहने,

सुनहरे स्वप्न जन्नत के दिखाना आज फैशन है।

दबे सीने में जो शोले जमाने से रहें महफ़ूज़,

पराई आग में रोटी पकाना आज फैशन है।

कभी बेदर्द सड़कों पे न ऐ दिल दर्द को बतला,

हवा में आह-ए-मुफ़लिस को उड़ाना आज फैशन है।

रहे आबाद हरदम ही अना की बस्ती…

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Posted on May 2, 2018 at 8:30am — 13 Comments

ग़ज़ल (कैसी ये मज़बूरी है)

ग़ज़ल (कैसी ये मज़बूरी है)

22 22 22 22 22 22 22 2

गदहे को भी बाप बनाऊँ कैसी ये मज़बूरी है,

कुत्ते सा बन पूँछ हिलाऊँ कैसी ये मज़बूरी है।

एक गाम जो रखें न सीधा चलना मुझे सिखायें वे,

उनकी सुन सुन कदम बढ़ाऊँ कैसी ये मज़बूरी है।

झूठ कपट की नई बस्तियाँ चमक दमक से भरी हुईं,

उन बस्ती में घर को बसाऊँ कैसी ये मज़बूरी है।

सबसे पहले ऑफिस आऊँ और अंत में घर जाऊँ,

मगर बॉस को रिझा न पाऊँ कैसी ये मज़बूरी है।

ऊँचे घर…

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Posted on April 22, 2018 at 3:30pm — 13 Comments

ग़ज़ल(याद आती हैं जब)

ग़ज़ल(याद आती हैं जब)

212 212 212 212

याद आतीं हैं जब आपकी शोखियाँ,

और भी तब हसीं होतीं तन्हाइयाँ।

आपसे बढ़ गईं इतनी नज़दीकियाँ,

दिल के लगने लगीं पास अब दूरियाँ।

डालते गर न दरिया में कर नेकियाँ,

हारते हम न यूँ आपसे बाज़ियाँ।

गर न हासिल वफ़ा का सिला कुछ हुआ,

उनकी शायद रही कुछ हों मज़बूरियाँ।

मिलता हमको चराग-ए-मुहब्बत अगर,

राह में स्याह आतीं न दुश्वारियाँ।

हुस्नवालों से दामन बचाना ए…

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Posted on April 3, 2018 at 8:30am — 9 Comments

ग़ज़ल ,(तेरे चहरे की जब भी अर्गवानी याद आएगी।)

ग़ज़ल ,(तेरे चहरे की जब भी अर्गवानी याद आएगी।)

1222 1222 1222 1222

तेरे चहरे की रंगत अर्गवानी याद आएगी,

हमें होली के रंगों की निशानी याद आएगी।

तुझे जब भी हमारी छेड़खानी याद आएगी

यकीनन यार होली की सुहानी याद आएगी।

मची है धूम होली की जरा खिड़की से झाँको तो,

इसे देखोगे तो अपनी जवानी याद आएगी।

जमीं रंगीं फ़ज़ा रंगीं तेरे आगे नहीं कुछ ये,

झलक इक बार दिखला दे पुरानी याद आएगी।

नहीं कम ब्लॉग में मस्ती…

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Posted on March 2, 2018 at 11:30am — 9 Comments

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At 7:13pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
श्री बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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