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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी
  • Male
  • बाग़पत, उत्तर प्रदेश.
  • India
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी आदाब,  रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभारी हूँ। आपके विचार में रचना में केवल दो पंक्तियाँ त्रुटिहीन होने से बावजूद आपने मेरा उत्साहवर्धन किया, ये आपके बडप्पन को दर्शाता है। ये सही है कि…"
8 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"2122 - 2122 - 2122 - 212 झाँकी इक तालीम की आओ मैं दिखला दूँ तुम्हें सीखना चाहो अगर कुछ आओ सिखला दूँ तुम्हें जाम लगने पर जहाँ संयम न खोते नागरिक  शहर इक भारत का ऐसा आओ बतला दूँ तुम्हें प्रेरणादायक हुई तस्वीर भी ये जाम की  दे रही संदेश…"
12 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी आदाब, सुंदर व सार्थक रचना के लिए बधाई स्वीकार करें। "
13 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (ऐ ख़ुदा दिल को क्या हुआ है ये)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
20 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (ऐ ख़ुदा दिल को क्या हुआ है ये)
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। सुन्दर गजल हुई है।हार्दिक बधाई। "
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (ऐ ख़ुदा दिल को क्या हुआ है ये)
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और दाद-ओ-तहसीन से नवाज़ने के लिए तह-ए-दिल से शुक्रिया। "
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (ऐ ख़ुदा दिल को क्या हुआ है ये)
"पेट में तितलियाँ सी उड़ती हैंइश्क़ की क्या ही इब्तिदा है ये..........वाह ! बहुत खूब.  आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है. बहुत-बहुत मुबारकबाद  क़ुबूलें. सादर"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी posted a blog post

ग़ज़ल (ऐ ख़ुदा दिल को क्या हुआ है ये)

2122 - 1212 - 22/112ऐ ख़ुदा  दिल को  क्या  हुआ  है ये किसकी  चाहत  में खो  गया  है येपेट  में   तितलियाँ   सी  उड़ती  हैं इश्क़  की  क्या  ही  इब्तिदा  है  येयाद-ए-जानाँ  तो  है दवा  है  गोया दिल-ए-मुज़्तर  का  आसरा   है  येकौन  सुन  पायेगा   मेरे   दिल  की दिल-ए-सोज़ाँ   तो   बे-सदा   है  येसोज़-ए-दिल से हुआ है दिल बेकल सद्र   से   फिर  धुआँ   उठा   है  येफिर   तेरे   शौक़िया   निशाने   पर दिल  मेरा   हाय !  आ  गया  है  येअब तो रहने दो बस करो न 'अमीर' भूत    कैसा    तुम्हें   चढ़ा   …See More
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी left a comment for Piyush Laddha
"जनाब Piyush Laddha जी आदाब, ओ बी ओ के मंच पर आपका हार्दिक स्वागत है। "
Sep 17
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post नज़्म (बे-वफ़ा)
"''तुम जिसे ज़ीनत-ए-गुल समझे थे अरमान मेरे" कृपया इस मिसरे को यूँ पढ़ें- ''तुम जिसे ज़ीनत-ए-गुल समझे वो अरमाँ थे मेरे" धन्यवाद।"
Sep 17
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी posted a blog post

ग़ज़ल (तुम्हारी एक अदा पर ही मुस्कराने की)

1212 / 1122 / 1212 / 22(112)तुम्हारी एक अदा पर ही मुस्कराने की लगी है शर्त सितारों में जगमगाने की तुम्हारे आने से फिर लौट आई है रौनक़ भुला चुके थे अदा लब तो मुस्कुराने की तुम्हीं ने आ के ये वीराना कर दिया रौशन तमन्ना थी न ज़रा हमको झिलमिलाने की छुपा लूँ आओ तुम्हें मैं इन्हीं निगाहों में नज़र लगे न कहीं तुम को इस ज़माने की तड़प रहा है मेरी याद में मेरा मोहसिन सिखा के कारीगरी मुझको भूल जाने की चले ही जाएँगे ऐ दिल दिलासा देकर वो निभा रहे हैं कोई रस्म फिर ज़माने की हुआ नहीं है कभी नाख़ुनों से गोश्त…See More
Sep 17
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Sushil Sarna's blog post हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे. . . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, हिन्दी दिवस के अवसर पर शानदार दोहे हुए हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
Sep 15
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on जयनित कुमार मेहता's blog post इक वह्म ऐतबार से आगे की चीज़ है (ग़ज़ल)
"आदरणीय जयनित कुमार मेहता जी आदाब, ग़ज़ल के हर एक शे'र में एक से बढ़कर एक मोती पिरोए हैं आपने हार्दिक बधाई स्वीकार करें। 'कुछ है जो इस दिवार से आगे की चीज़ है'... इस मिसरे में 'दिवार' को 'दयार' कर सकते…"
Sep 15
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी posted a blog post

ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)

1212 / 1122 / 1212 / 22उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की निकल सकेगी न हसरत हमें मिटाने की जहाँ ये सारा हमारा वतन रहेगा, सुनो हमारे वास्ते गर्दिश है सब ज़माने की जिसे भी देखिये पत्थर लिये हुए है वो करेगा बात यहाँ कौन दिल मिलाने कीतड़प के ख़ुद ही मेरी राह पर पड़ा है वो बना रहा था जो बातें मुझे भुलाने की जिसे भी देखिये वो होश-मंद है यारोसुनेगा कौन यहाँ बात फिर दिवाने कीकिया था हमने इसी वास्ते ये दिल पत्थरकरेंगे बात मुसल्सल वो दिल दुखाने की खड़ा है सर पे तेरे मौत का फ़रिश्ता यूँ तलाश जैसे उसे हो…See More
Sep 15
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post नज़्म (बे-वफ़ा)
"आदरणीय योगराज प्रभाकर जी सादर अभिवादन, ओ बी ओ के प्रधान सम्पादक होने के नाते मेरी टिप्पणीयों की भाषा को आपके द्वारा ख़ारिज किये जाने का मैं सम्मान करता हूँ।  काश! अतीत में मेरे विरुद्ध की गयी अमर्यादित एवं अभद्र शब्दावली के विरुद्ध भी आपने ऐसे…"
Sep 15

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post नज़्म (बे-वफ़ा)
"श्री अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी जी. आपने अमित जी के ऐतराज़ को ख़ारिज किया है और मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब के लिए भी ना-ज़ेबा अलफ़ाज़ कहें हैं। मैं आपकी इन टिप्पणियों की भाषा को सिरे से खारिज करता हूँ। आपको सही और साहित्यिक भाषावाली में उत्तर…"
Sep 15

Profile Information

Gender
Male
City State
BAGHPAT , UTTAR PRADESH.
Native Place
BARAUT
Profession
Private job
About me
उर्दु शायरी हिन्दी में लिखने और पढ़ने का शौक़ है॥

अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's Blog

ग़ज़ल (ऐ ख़ुदा दिल को क्या हुआ है ये)

2122 - 1212 - 22/112

ऐ ख़ुदा  दिल को  क्या  हुआ  है ये

किसकी  चाहत  में खो  गया  है ये

पेट  में   तितलियाँ   सी  उड़ती  हैं

इश्क़  की  क्या  ही  इब्तिदा  है  ये

याद-ए-जानाँ  तो  है दवा  है  गोया

दिल-ए-मुज़्तर  का  आसरा   है  ये

कौन  सुन  पायेगा   मेरे   दिल  की

दिल-ए-सोज़ाँ   तो   बे-सदा   है  ये…

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Posted on September 23, 2022 at 9:48am — 4 Comments

ग़ज़ल (तुम्हारी एक अदा पर ही मुस्कराने की)

1212 / 1122 / 1212 / 22(112)

तुम्हारी एक अदा पर ही मुस्कराने की 

लगी है शर्त सितारों में जगमगाने की 

तुम्हारे आने से फिर लौट आई है रौनक़ 

भुला चुके थे अदा लब तो मुस्कुराने की 

तुम्हीं ने आ के ये वीराना कर दिया रौशन 

तमन्ना थी न ज़रा हमको झिलमिलाने की 

छुपा लूँ आओ तुम्हें मैं इन्हीं निगाहों में 

नज़र लगे न कहीं तुम को इस ज़माने की 

तड़प रहा है मेरी याद में मेरा मोहसिन 

सिखा के कारीगरी…

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Posted on September 17, 2022 at 1:12pm

ग़ज़ल (उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की)

1212 / 1122 / 1212 / 22

उठाओ जितनी भी चाहे क़सम ज़माने की 

निकल सकेगी न हसरत हमें मिटाने की 

जहाँ ये सारा हमारा वतन रहेगा, सुनो 

हमारे वास्ते गर्दिश है सब ज़माने की 

जिसे भी देखिये पत्थर लिये हुए है वो 

करेगा बात यहाँ कौन दिल मिलाने की

तड़प के ख़ुद ही मेरी राह पर पड़ा है वो 

बना रहा था जो बातें मुझे भुलाने की 

जिसे भी देखिये वो होश-मंद है यारो

सुनेगा कौन यहाँ बात फिर दिवाने…

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Posted on September 15, 2022 at 5:16pm

नज़्म (बे-वफ़ा)

2122 - 1122 - 1122 - 112/(22)

दिल धड़कने की सदा ऐसी भी गुमसुम तो न थी

इतनी बे-परवा मेरी जान कभी तुम तो न थी 

हम तड़पते ही रहे तुम को न अहसास हुआ 

अपनी उल्फ़त की कशिश इतनी सनम कम तो न थी 

सब ने देखा मेरी आँखों से बरसता सावन

थी वो बरसात बड़े ज़ोरो की रिम-झिम तो न थी

तुम जिसे ज़ीनत-ए-गुल समझे थे अरमान मेरे 

गुल पे क़तरे थे मेरे अश्कों के शबनम तो न थी 

क्यूँ न आहों ने मेरी आ के तेरे दिल को…

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Posted on September 6, 2022 at 11:02pm — 21 Comments

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At 6:21pm on March 9, 2020, Samar kabeer said…

जनाब अमीरुद्दीन साहिब,ओबीओ पर आपका स्वागत है,मैं हर ख़िदमत के लिए हाज़िर हूँ ।

 
 
 

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"जय-जय.  मैं आपकी प्रस्तुति पर अवश्य अपनी बातें रखूँगा. आपकी रचना पर पुन: आता हूँ."
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी इस छंद पर आपका प्रयास सचमुच प्रशंसनीय है। हार्दिक बधाई। गजल का मुझे कोई ज्ञान…"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी  छंद की प्रशंसा के लिए हार्दिक  धन्यवाद आभार आपका।"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ भाईजी छंद और चित्र को देखने के नजरिये की प्रशंसा के लिए हृदयतल से धन्यवाद् आभार आपका।…"
10 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"2122 - 2122 - 2122 - 212 झाँकी इक तालीम की आओ मैं दिखला दूँ तुम्हें सीखना चाहो अगर कुछ आओ सिखला…"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी आदाब, सुंदर व सार्थक रचना के लिए बधाई स्वीकार करें। "
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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 137 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण भाई साहब,  आपकी सार्थक रचना का सर्वप्रथम प्रस्तुत हो जाना बताता है कि…"
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