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Rachna Bhatia
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय सर, जी । मैं इसे ही ढूंढ रही थी।गलत जगह पर आपसे और राजेश कुमारी जी से क्षमा चाहती हूँ। सादर।"
Saturday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय समर कबीर सर,आदाब। सर ग़ज़ल तक आने तथा मेरा हौसला बढ़ाने के लिए आपकी बहुत बहुत आभारी हूँ।  बेहद शुक्रिया सादर।"
Saturday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय सर, बहुत अच्छी इस्लाह ,बहुत बहुत शुक्रिया। सादर"
Saturday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय दयाराम मैठानी जी हौसला बढ़ाने के लिए बेहद शुक्रिया।"
Saturday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय अमित कुमार'अमित' जी,उत्साह बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
Saturday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी,मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
Saturday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीया राजेश कुमारी जी, आपको मेरी कोशिश पसंद आई। बहुत बहुत धन्यवाद।"
Saturday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय समर कबीर सर आदाब,सर हौसला अफज़ाई के लिए आपकी बहुत आभारी हूँ।सर क्या ऐसा कर सकते हैं "भगवान से जुदा भी दिखाना बहुत हुआ " सादर"
Saturday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"221    2121   1221     212                       1 बस अब ख़ुदा को बीच में लाना बहुत हुआ  उसका ले नाम कुफ़्र भी ढाना बहुत हुआ                      2 मैं पूछता हूं तुझसे, तू मुझको हिसाब दे क्यों मेरे दिल में ग़म का ठिकाना बहुत…"
Saturday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय अमीरुद्दीन ख़ान ' अमीर ' जी बहुत लाजवाब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें।"
Saturday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय दयाराम मैठानी जी तरही मिसरे पर बेहतरीन ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें।"
Friday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय अजीत शर्मा ' आकाश' जी बेहतरीन ग़ज़ल,बधाई स्वीकार करें। ए हुक्मराँ न.. लाजवाब शे'र रहा ।"
Friday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान जी लाजवाब ग़ज़ल हुई बधाई।"
Friday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर ' जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें। आदरणीय तीसरे में किस्सा के बदले मुझे जुमला बेहतर लग रहा है। सादर।"
Friday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय नादिर ख़ान जी लाजवाब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें।"
Friday
Rachna Bhatia commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएँ :
"वाह वाह वाह शानदार क्षणिकाएँ। आदरणीय सुशील सरना जी हार्दिक बधाई।"
Apr 4

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

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ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

1

गर्म अफ़वाहों का बाज़ार ख़ुदा ख़ैर करे

बिक रहा झूठ का अख़बार ख़ुदा ख़ैर करे

2

चार सिक्कों की ख़नक जेब में क्या होने लगी

हो गए हम भी तलबगार ख़ुदा ख़ैर करे

3

शांत लहरों में भी कश़्ती को सहारा न मिला

डूबी मँझधार में पतवार ख़ुदा ख़ैर करे

4

इश़्क था या कि अज़ीयत ओ फ़ज़ीहत का सफर

है अलम दिल का पुर आज़ार ख़ुदा ख़ैर करे



बाँध रक्खा है किनारों ने संमदर ऐसे

रुक गई लहरों की रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर… Continue

Posted on April 2, 2020 at 1:31pm — 4 Comments

ग़ज़ल

212 1212 1212 1212



सिर पे पांव रख हमारे,चढ़ रहे हो सीढ़ियाँ

फैंक दलदलों में यार,मांगते हो माफियाँ



जिंदगी में देख लीं,बहुत सी हमने आंधियाँ

खत्म हो चुके हैं अश्क,बंद सी हैं सिस्कियाँ



दास्ताने जिंदगी, सुना सके न हम कभी

दर खुदा के आ खड़े,ले चंद हम भी अर्जि़याँ



छा रही है तीरगी,न रोशनी दिखे कहीं

मौत है बुला रही,दे जिंदगी भी धमकियाँ



चापलूसी बोलती,न महनतों का मोल है

लग रही जगह जगह, इमान की ही बोलियाँ



साथ छोड़ चल… Continue

Posted on June 10, 2019 at 7:55pm — 5 Comments

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