For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Rachna Bhatia
Share
 

Rachna Bhatia's Page

Latest Activity

Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीया राजेश कुमारी जी शानदार ग़ज़ल की हार्दिक बधाई।मतला बेहद लाजवाब है।"
Jul 24
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय अमीरूद्दीन अमीर जी लाजवाब ग़ज़ल की बधाई।"
Jul 24
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय नादिर ख़ान जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें।"
Jul 24
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"मुहतरमा रचना भाटिया जी, आदाब। आपने बताया है कि 'निर्मल' तख़ल्लुस आपको बेहतर लग रहा है, मगर ग़ौर करें कि 'निर्मल' शब्द पुल्लिंग है। आप चाहें तो अपने नाम 'रचना' को भी अपना तख़ल्लुस रख सकती हैं, या जो भी आपको बेहतर लगे।…"
Jun 10
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल

2122 2122 212.जो तुम्हारा है हमारा क्यों नहीं ये किसी ने भी बताया क्यों नहीं शह्र से मज़दूर आए गांव क्यों वक़्त पर उनको सँम्हाला क्यों नहीं लाख तारे आसमाँ पर थे मगर इक भी मेरी छत पे आया क्यों नहीं ख़्वाहिशों की भीड़ से ही पूछ लो मुझको इक पल का सहारा क्यों नहीं ज़िन्दगी भी दे रही ता'ना हमें लफ़्ज़ खु़शियों का लिखाया क्यों नहीं हारते हैं ग़म से "निर्मल" रोज़ ही जीतना हमको सिखाया क्यों नहीं मौलिक व अप्रकाशितSee More
Jun 9
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अमीरुद्दीन ' अमीर ' जी ग़ज़ल तक आने तथा क़ीमती समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। "आसमाँ में तारे ..." इस्लाह के लिए धन्यवाद। जी निर्मल ही मेरा तख़ल्लुस है और रचना मेरा नाम है , इसलिए मुझे निर्मल ही बेहतर लग रहा है। आदरणीय…"
Jun 9
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"मुहतरमा रचना भाटिया जी, आदाब। ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें।  "लाख तारे आसमाँ पर थे मगर          तारे आसमाँ पर नहीं आसमाँ में होते हैं। इसलिए चाहें तो  इक भी मेरी छत पे आया क्यों नहीं. …"
Jun 8
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल

2122 2122 212.जो तुम्हारा है हमारा क्यों नहीं ये किसी ने भी बताया क्यों नहीं शह्र से मज़दूर आए गांव क्यों वक़्त पर उनको सँम्हाला क्यों नहीं लाख तारे आसमाँ पर थे मगर इक भी मेरी छत पे आया क्यों नहीं ख़्वाहिशों की भीड़ से ही पूछ लो मुझको इक पल का सहारा क्यों नहीं ज़िन्दगी भी दे रही ता'ना हमें लफ़्ज़ खु़शियों का लिखाया क्यों नहीं हारते हैं ग़म से "निर्मल" रोज़ ही जीतना हमको सिखाया क्यों नहीं मौलिक व अप्रकाशितSee More
Jun 7
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय सर, जी । मैं इसे ही ढूंढ रही थी।गलत जगह पर आपसे और राजेश कुमारी जी से क्षमा चाहती हूँ। सादर।"
May 23
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय समर कबीर सर,आदाब। सर ग़ज़ल तक आने तथा मेरा हौसला बढ़ाने के लिए आपकी बहुत बहुत आभारी हूँ।  बेहद शुक्रिया सादर।"
May 23
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय सर, बहुत अच्छी इस्लाह ,बहुत बहुत शुक्रिया। सादर"
May 23
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय दयाराम मैठानी जी हौसला बढ़ाने के लिए बेहद शुक्रिया।"
May 23
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय अमित कुमार'अमित' जी,उत्साह बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
May 23
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी,मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
May 23
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीया राजेश कुमारी जी, आपको मेरी कोशिश पसंद आई। बहुत बहुत धन्यवाद।"
May 23
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आदरणीय समर कबीर सर आदाब,सर हौसला अफज़ाई के लिए आपकी बहुत आभारी हूँ।सर क्या ऐसा कर सकते हैं "भगवान से जुदा भी दिखाना बहुत हुआ " सादर"
May 23

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल

2122 2122 212

.

जो तुम्हारा है हमारा क्यों नहीं

ये किसी ने भी बताया क्यों नहीं



शह्र से मज़दूर आए गांव क्यों

वक़्त पर उनको सँम्हाला क्यों नहीं



लाख तारे आसमाँ पर थे मगर

इक भी मेरी छत पे आया क्यों नहीं



ख़्वाहिशों की भीड़ से ही पूछ लो

मुझको इक पल का सहारा क्यों नहीं



ज़िन्दगी भी दे रही ता'ना हमें

लफ़्ज़ खु़शियों का लिखाया क्यों नहीं



हारते हैं ग़म से "निर्मल" रोज़ ही

जीतना हमको सिखाया क्यों नहीं…



Continue

Posted on June 6, 2020 at 9:00pm — 3 Comments

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

1

गर्म अफ़वाहों का बाज़ार ख़ुदा ख़ैर करे

बिक रहा झूठ का अख़बार ख़ुदा ख़ैर करे

2

चार सिक्कों की ख़नक जेब में क्या होने लगी

हो गए हम भी तलबगार ख़ुदा ख़ैर करे

3

शांत लहरों में भी कश़्ती को सहारा न मिला

डूबी मँझधार में पतवार ख़ुदा ख़ैर करे

4

इश़्क था या कि अज़ीयत ओ फ़ज़ीहत का सफर

है अलम दिल का पुर आज़ार ख़ुदा ख़ैर करे



बाँध रक्खा है किनारों ने संमदर ऐसे

रुक गई लहरों की रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर… Continue

Posted on April 2, 2020 at 1:31pm — 4 Comments

ग़ज़ल

212 1212 1212 1212



सिर पे पांव रख हमारे,चढ़ रहे हो सीढ़ियाँ

फैंक दलदलों में यार,मांगते हो माफियाँ



जिंदगी में देख लीं,बहुत सी हमने आंधियाँ

खत्म हो चुके हैं अश्क,बंद सी हैं सिस्कियाँ



दास्ताने जिंदगी, सुना सके न हम कभी

दर खुदा के आ खड़े,ले चंद हम भी अर्जि़याँ



छा रही है तीरगी,न रोशनी दिखे कहीं

मौत है बुला रही,दे जिंदगी भी धमकियाँ



चापलूसी बोलती,न महनतों का मोल है

लग रही जगह जगह, इमान की ही बोलियाँ



साथ छोड़ चल… Continue

Posted on June 10, 2019 at 7:55pm — 5 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बसंत कुमार शर्मा posted blog posts
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh posted a discussion

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 86 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

"ये ज़माना फिर कहाँ ये ज़िंदगानी फिर कहाँ "2122    2122   2122   212फाइलातुन  फाइलातुन  फाइलातुन…See More
1 hour ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"आदरणीय TEJ VEER SINGH जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल से शुक्रिया "
1 hour ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी आदाब , आपकी हौसला अफजाई और सुझाव हेतु दिल से…"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गजल- कोख में आने से साँसों के ठहर जाने तक
"हार्दिक बधाई आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी। बेहतरीन गज़ल। मुफ़लिसी…"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कितना मुश्किल होता है - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"हार्दिक बधाई आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी। बेहतरीन गज़ल। चाहे जितनी आग…"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय  डॉ नवीन मणि त्रिपाठी जी। बेहतरीन गज़ल। क्यूँ लिये थे मांग मुझसे मेरी…"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अछूतों सा - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी। बेहतरीन गज़ल। अछूतों से भी मत करना कभी…"
2 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी। बेहतरीन गज़ल। जो भी गए थे शहर सभी लौट आये…"
2 hours ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post शिवत्व
"बृजेश कुमार 'ब्रज जी,लक्षमण धामी 'मुसाफिर' जी,एवं आशीष यादव जी,आप सभी भाइयों को मेरा…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post सितारों के बिना ये आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"आ. भाई रूपम जी, बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
Manoj kumar Ahsaas posted a blog post

अहसास की ग़ज़ल :मनोज अहसास

2×15एक ताज़ा ग़ज़ललाखों ग़म की एक दवा है, सोचो ! कुछ भी याद नहीं. कोई शिकायत करने आए,कह दो कुछ भी याद…See More
5 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service