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Rachna Bhatia
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Rachna Bhatia replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी मानवता से ओतप्रोत वहीं सटीक तंज़ कसती हुई बहुत अच्छी लघुकथा । हार्दिक बधाई।"
Jul 31
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"2122 1122 1122 22         1 पूछ बैठें हैं जो हमसे कि महब्बत क्या है  पहले वो हमको बता दें ये शरारत क्या है 2 वो झुका लेते हैं नज़रों को मिला कर नज़रे ग़र न है इश्क़ ये तो और महब्बत क्या है 3 दिल कभी इससे कभी उससे…"
Jun 25
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- दर्द हरने लगते हैं
"आदरणीय सुशील सरना जी हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 24
Sushil Sarna commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- दर्द हरने लगते हैं
"वाह आदरणीया जी बहुत खूबसूरत सृजन है । हार्दिक बधाई आदरणीया जी"
Jun 23
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- दर्द हरने लगते हैं
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, ग़ज़ल तक आने तथा इस्लाह देने के लिए हार्दिक धन्यवाद। आदरणीय समर कबीर सर् की इस्लाह आने के बाद आवश्यक सुधार कर लेती हूँ। सादर।"
Jun 22
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- दर्द हरने लगते हैं
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, ग़ज़ल तक आने तथा इस्लाह देने के लिए हार्दिक धन्यवाद। आदरणीय समर कबीर सर् की इस्लाह आने के बाद आवश्यक सुधार कर लेती हूँ। सादर।"
Jun 22
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- दर्द हरने लगते हैं
"आदरणीय लक्ष्मण धामी"‌‌भाई हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 22
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- दर्द हरने लगते हैं
"आ. रचना बहन सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jun 22
Chetan Prakash commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- दर्द हरने लगते हैं
"मुहतरमा, रचना भाटिया निर्मल, आदाब,  अच्छी  गज़ल कही, आपने  ! किचिंत  तीसरे  शे'र के ऊला  मे, मेरी नज़र  में, सुधार की गुंजाइश  है  ! "तेरे बस एक इशारे पे  ही ए जान ए जाँ " …"
Jun 22
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल- दर्द हरने लगते हैं

1212  1122  1212    22 /1121हम आह जब कभी महफ़िल में भरने लगते हैंनज़र में भर के वो हर दर्द हरने लगते हैं2जुनून-ए-इश्क़ में अब क्या सुनाएँ हाल-ए-दिलख़याल आते ही उनका सँवरने लगते हैं3तेरे बस एक इशारे प ही ओ जान-ए-जाँशरारतें मेरे लब ख़ुद ही करने लगते हैं4भुलाएँ भी तो उन्हें किस तरह भुलाएँ हमफ़फोले यादों के जब तब उभरने लगते हैं 5वो ख़्वाहिश-ए- ग़म-ए दिल का मुदावा करने कोरुत-ए-फ़िराक़ प इल्ज़ाम धरने लगते हैं6पकड़ के हाथ वो करते हैं मुतमुइन "निर्मल"परेशाँ राहों से जब हम गुज़रने लगते हैं मौलिक व…See More
Jun 22
Rachna Bhatia commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (... तमाशा बना दिया)
"आदरणीय अमीरुद्दीन "अमीर" जी  बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। "
Jun 21
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-गूँगा कर दिया
"आदरणीय नाथ सोनांचली जी, ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने का हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 11
नाथ सोनांचली commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-गूँगा कर दिया
"आद0 रचना भाटिया जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 9
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल-गूँगा कर दिया

2122 2122 2122 2121 उसने मेरे ज़ख़्मों का ऐसे मुदावा कर दियासी के आहों का मुहाना उनको गूँगा कर दिया2जिसने मेरा कद बढ़ा कर सबसे ऊँचा कर दिया उसने सी कर लब मेरे किरदार बौना कर दिया3घर जलाकर अपना जिसके दर प कर दी रौशनीउसने घबरा कर धुँएँ से शोर बरपा कर दिया4ख़त्म होते ही नहीं हैं ज़िन्दगी के मसअलेबैठते ही इक के दूजे ने तमाशा कर दिया5साथ देता ही नहीं है मेरे दिल का हौसला ज़िन्दगी ने ऐसे मुझको पारा पारा कर दिया6कर गया घर ख़ौफ़ दिल में तीरगी हुजरे में हैसाफ़गोई ने ज़हाँ में इतना रुसवा कर दिया7ख़ास ये…See More
Jun 9
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-गूँगा कर दिया
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार।सर् , आपने सहीह कहा "साथ देता नहीं है मेरे दिल का हौसला" इसमें ही शब्द छुट गया है। "साथ देता ही नहीं है मेरे दिल का हौसला" बाक़ी सुधार आपके कहे अनुसार कर लिए हैं। हौसला बढ़ाने तथा इस्लाह देने के…"
Jun 8
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-गूँगा कर दिया
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ओबीओ के तरही मिसरे पर ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I    साथ देता नहीं है मेरे दिल का हौसला ---ये मिसरा बह्र में नहीं है, शायद लिखते समय कोई शब्द छूट गया है I  कर गया घर ख़ौफ़ दिल में और…"
Jun 8

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ग़ज़ल- दर्द हरने लगते हैं

1212  1122  1212    22 /112

1

हम आह जब कभी महफ़िल में भरने लगते हैं

नज़र में भर के वो हर दर्द हरने लगते हैं

2

जुनून-ए-इश्क़ में अब क्या सुनाएँ हाल-ए-दिल

ख़याल आते ही उनका सँवरने…

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Posted on June 21, 2022 at 8:21pm — 7 Comments

ग़ज़ल-गूँगा कर दिया

2122 2122 2122 212

1

 उसने मेरे ज़ख़्मों का ऐसे मुदावा कर दिया

सी के आहों का मुहाना उनको गूँगा कर दिया

2

जिसने मेरा कद बढ़ा कर सबसे ऊँचा कर दिया

 उसने सी कर लब मेरे किरदार बौना कर दिया

3

घर जलाकर अपना जिसके दर प कर दी रौशनी

उसने घबरा कर धुँएँ से शोर बरपा कर दिया

4

ख़त्म होते ही नहीं हैं ज़िन्दगी के मसअले

बैठते ही इक के दूजे ने तमाशा कर दिया

5

साथ देता ही नहीं है मेरे दिल का…

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Posted on May 31, 2022 at 7:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल-अपना है कहाँ

2122 2122 2122 212

1

औरों के जैसा मुकद्दर यार अपना है कहाँ

अपने दिल का जोर उसके दिल प चलता है कहाँ

2

रात होती है कहाँ और दिन गुज़रता है कहाँ

मन मुआफ़िक़़ ज़िन्दगी में जीना मरना है कहाँ

3

एक दिन में कुछ नहीं पर एक दिन होगा ज़रूर

आदमी ये सब्र तब तक यार रखता है कहाँ'

4

आज तक कोई नहीं यह जान पाया दोस्तो

इस ज़माने को बनाने वाला रहता है कहाँ

 5

किस तरह भर लूँ उनींदी आँखों में ख़्वाबों के…

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Posted on May 6, 2022 at 10:30am — 8 Comments

ग़ज़ल -दिल लगाना छोड़ दें

2122 2122 2122 212

1

अश्क पीना छोड़ दें हम दिल लगाना छोड़ दें 

एक उनकी मुस्कुराहट पर ज़माना छोड़ दें

2

हर किसी के आप दिल में आना जाना छोड़ दें

इश़्क को सौदा समझ क़ीमत लगाना छोड़ दें

3

कह दें अपनी चूड़ियों से खनखनाना छोड़ दें 

दिल के रिसते ज़ख़्मों पर यूँ सरसराना छोड़ दें

4

लग गए हों ताले ख़ामोशी के जिनके होठों पर 

उनसे उम्मीदें सदाओं की लगाना छोड़ दें 

5

कब तलक फिरते रहेंगे आप ग़म के सहरा…

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Posted on April 5, 2022 at 9:00pm — 8 Comments

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