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अमीरुद्दीन 'अमीर'
  • Male
  • बाग़पत, उत्तर प्रदेश.
  • India
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अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब आज़ी तमाम साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया। सादर। "
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, तरही मिसरे पर ग़ज़ल का उम्दा प्रयास है मुबारकबाद पेश करता हूँ। ''फ़ूल से आती हुई मुश्क छिपाई न गई'' इस मिसरे का वाक्य विन्यास ठीक नहीं है, ग़ौर फ़रमाइये 'मुश्क' एक तरह की ख़ुश्बू जो एक…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब मुनीश तन्हा जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ।"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। ''इसलिये लोग मिलाते रहे हाँ में हाँ तेरी'' इस मिसरे की बह्र चेक कर लें।  सादर। "
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। ''उससे खुद झूठ की क्योंकर ये नुमाई न गई।६।'' इस मिसरे में क़ाफ़िया ठीक नहीं है, समर कबीर साहिब से सहमत हूँ क्योंकि…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब कृष मिश्रा गोरखपुरी साहिब आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"मुहतरमा राजेश कुमारी जी आदाब, तरही मिसरे पर उम्दा ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"मुहतरमा ऋचा यादव जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब रवि शुक्ला जी आदाब, तरही मिसरे पर मुकम्मल मुरस्सा ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब संजय शुक्ला जी आदाब, शानदार ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब नाथ सोनांचली जी आदाब, उम्दा ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब निलेश बरई जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें, गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें। "
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
"जनाब आज़ी तमाम साहिब आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें, गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें। "
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128
""क्या हुआ उन से अगर बात बनाई न गई " 2122 - 1122 - 1122 - 22/112 तुम से पूछी न गई हम से बताई न गई  बात आख़िर वो ज़माने से छुपाई न गई  वो कहानी जो रिसालों में पढी है तुम ने  दास्ताँ हमसे कभी तुमको सुनाई न गई   यूँ तो…"
12 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Krish mishra 'jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~ 'इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत'
"जनाब कृष मिश्रा 'जान' साहिब आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। इश्क मुहब्बत चाहत उल्फत रश्क मुसीबत रंज कयामत। ऊला मिसरे की तरह सानी को भी असरदार बनाने के लिए सानी में 'रश्क' की जगह 'दर्द' करना मुनासिब…"
Tuesday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post नग़्मा (घटा ग़मों की वही....)
"जनाब कृष मिश्रा 'जान' साहिब आदाब, नग़्मा पर आपकी दाद, मुबारकबाद और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया। सादर। "
Tuesday

Profile Information

Gender
Male
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BAGHPAT , UTTAR PRADESH.
Native Place
BARAUT
Profession
Private job
About me
उर्दु शायरी हिन्दी में लिखने और पढ़ने का शौक़ है॥

अमीरुद्दीन 'अमीर''s Blog

नग़्मा (घटा ग़मों की वही....)

1212 - 1122 - 1212 - 22

घटा ग़मों की वही दिल पे छा गई फिर से 

वो दास्तान ज़ुबाँ पर जो आ गई फिर से 

ये उम्र कैसे कटेगी कहाँ बसर होगी 

अँधेरी रात की जाने न कब सहर होगी 

शिकस्त सारी उमीदें मिटा गई फिर से 

घटा ग़मों की वही दिल पे छा गई फिर से 

मुझे गुमाँ भी नहीं था हबीब बदलेगा 

बदल गया है मगर, यूँ नसीब बदलेगा? 

बहार बनके ख़िज़ाँ ही जला गई फिर से 

घटा ग़मों की वही दिल पे छा गई फिर…

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Posted on February 22, 2021 at 8:30am — 4 Comments

ग़ज़ल (कब से बैठे हैं तेरे दर पे सनम)

2122 - 1122 - 112

कब से बैठे हैं तेरे दर पे सनम

अब तो हो जाए महरबान करम......1

ग़ैर समझो न हमें यार सुनो

हम तुम्हारे हैं तुम्हारे ही थे हम....... 2

बात चाहे न मेरी मानो, सुनो! 

कीलें राहों में उगाओ न सनम....... 3

देके हमको भी अज़ीयत ये सुनो

दर्द तुमको भी तो होगा नहीं कम... 4

हम भी इन्सान हैं समझो तो ज़रा

देखो अच्छे नहीं इतने भी सितम....5

जिस्म से जान जुदा होती…

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Posted on February 15, 2021 at 9:32pm — 5 Comments

ग़ज़ल (इक है ज़मीं हमारी इक आसमाँ हमारा)

2212 -  1222 -  212 -  122

इक है ज़मीं हमारी इक आसमाँ हमारा

इक है ये इक रहेगा भारत हमारा प्यारा

हिन्दू हों या कि मुस्लिम सारे हैं भाई-भाई 

होंगे न अब कभी भी तक़्सीम हम दुबारा 

यौम-ए-जम्हूरियत पर ख़ुशियाँ मना रहे हैं 

हासिल शरफ़ जो है ये, ख़ूँ भी बहा हमारा 

अपने शहीदों को तुम हरगिज़ न भूल जाना

यादों को दिल में उनकी रखना जवाँ…

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Posted on February 6, 2021 at 7:27pm — 5 Comments

ग़ज़ल (दामन बचा के हमने दिल पर उठाए ग़म भी)

2212 - 1222 - 212 - 122

दामन बचा के हमने दिल पर उठाए ग़म भी

बेदाग़ हो गये हैं सब कुछ लुटा के हम भी

कुछ ख़्वाब थे हसीं कुछ अरमाँ थे प्यारे प्यारे

अहल-ए-वफ़ा से तालिब थे तो वफ़ा के हम भी 

उस शख़्स-ए-बावफ़ा से सबने वफ़ा ही पाई

ये बात और है के हम को मिले हैं ग़म भी 

गर्दिश में हूँ अगरचे रौशन है दिल की महफ़िल 

लब ख़ुश्क़ हैं तो क्या है आँखे हैं मेरी नम भी 

ज़ुल्फ़ों की छाँव मिलती पलकों का साया…

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Posted on February 2, 2021 at 11:28pm — 6 Comments

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At 6:21pm on March 9, 2020, Samar kabeer said…

जनाब अमीरुद्दीन साहिब,ओबीओ पर आपका स्वागत है,मैं हर ख़िदमत के लिए हाज़िर हूँ ।

 
 
 

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