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SALIM RAZA REWA
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SALIM RAZA REWA posted photos
6 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"यहाँ रचना पर चर्चा होने से हम जैसे न जाने कितने सीखने वाले लाभान्वित होते हैं, शायद आपको इस बात का इल्म नहीं है, अन्यथा इतने दिन से आप मंच से जुड़े हैं, कम से कम इस तरह की भाषा का उपयोग न करते। सादर"
Mar 22, 2018
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"आद0 सलीम साहब सादर अभिवादन। आपकी टिपण्णी इस मंच के नियमों के एकदम प्रतिकूल है भाई जी। बेहद निराशाजनक और बेअदब भी। आपसे इस तरह की भाषा की मुझे उम्मीद न थीं। ख़ैर, शायद आपकी सिर्फ प्रशंशा वाली जगह पसन्द है तो कोई क्या कर सकता है, सादर"
Mar 22, 2018
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"सारा विवाद पढ़ा जो भी हो बहुत निराशाजनक है.. हालाँकि ग़ज़ल बहुत खूब कही है आदरणीय सलीम साहब.."
Mar 21, 2018

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम साहब आपकी टिप्पणी बेहद निराशाजनक और बेअदबी से लबरेज है, ऐसे में आपकी सदस्यता निलंबित करना इस मंच हेतु अंतिम समाधान है, अनुरोध है कि आप अपनी रचनाओं को सुरक्षित कर लें । सादर ।"
Mar 20, 2018
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"आपको आप का मंच मुबारक हो... और हाँ कुछ गंदे लोंगो की हिटलर शाही ने इस मंच को जकड़ लिया है... उस गंदे लोंगो को आप इस ग्रुप का एडमिन बना दीजिए.. जो किसी की बात ना सुने और सब पे धौंस जमाए... और कुछ लोग तो इस ग्रुप में ज्यादा ही बोलते हैं.. ...... अभी…"
Mar 20, 2018

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम रज़ा साहब, आप तो इस ओ बी ओ परिवार के पुराने सदस्य हैं फिर यहाँ के कायदे, व्यवहार क्यों भूल गए ! हम सभी एक दुसरे से बहुत ही आदर के साथ सीखते और और एक दुसरे को बहुत ही प्रेम के साथ सिखाते हैं. इस मंच पर या कही भी अगर आप अपनी कृतियों को…"
Mar 20, 2018
SALIM RAZA REWA posted a blog post

धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा

2122 2122 212 धूप का बिस्तर लगाकर सो गए छांव सिरहाने दबाकर सो गए - गुफ़्तगू की दिल मे ख़्वाहिश थी मगर वो मेरे ख़्वाबों में आकर  सो गए - तंग थी चादर तो हमने यूँ किया पांव सीने से लगाकर सो गए -लड़ते लड़ते मुश्किलों से उम्र भर  अब तो बिलकुल थकथका कर सो गए - उनकी नींदों पर निछावर मेरे ख़ाब जो ज़माने को जगाकर सो गए - बे-कसी में और क्या करते भला ख़ुद को ही समझा-बुझा कर सो गए - दीप यादों के रहे रोशन फ़क़त वो चराग़-ए-जाँ बुझा कर सो गए ________________________ मौलिक व अप्रकाशितSee More
Mar 20, 2018
SALIM RAZA REWA commented on Samar kabeer's blog post 'मासूम पे इल्ज़ाम लगाना ही नहीं था'
"जनाब समर साहब, ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद, ज़माना ही नहीं थी.. हो गया इसे था कर लीजिएगा,"
Mar 20, 2018
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय समर साहब. आप कौन होते हैं ये कहने वाले की मंच से दूर रहें, और हाँ बात वह मानी जाती है जो मानने लायक होती है, और हर कोई मानता है, सादर"
Mar 19, 2018
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"//आप अपने विद्यार्थियों को सिखाने के लिए दूसरे की ग़ज़ल का इंतख़ाब करें...// जनाब सलीम साहिब आप शायद ये भूल गए हैं कि ये फ़ेसबुक नहीं ओबीओ का मंच है, और यहाँ ऐसा कभी नहीं होता,यहाँ रचना को देखा जाता है,रचनाकार को नहीं,इस मंच का मक़सद ही सीखना और सिखाना…"
Mar 19, 2018
Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"आ. सलीम साहब,एक महत्वपूर्ण बात रह गयी   थी... और वो यह कि यहाँ कोई मेरा विद्यार्थी नहीं है ..  मैं  मानता हूँ   कि हम सब   विद्यार्थी हैं..सादर "
Mar 19, 2018
Nilesh Shevgaonkar commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"आ. सलीम साहब,इस मंच की परम्परा है कि अगर किसी को रचना में कोई त्रुटी  दोष लगे   तो वो उसे इंगित कर के चर्चा कर सकता है   जिस से अंतत: सब लाभान्वित होते हैं...इसी परम्परा के अंतर्गत मैं   उसी ग़ज़ल को चुनुँगा जिस…"
Mar 19, 2018
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय बसंत कुमार जी, ग़ज़ल पर आपकी शिरक़त के लिए शुक्रिया."
Mar 19, 2018
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब तस्दीक साहब, ग़ज़ल पर आपकी शिरक़त और मशविरे के लिए शुक्रिया,"
Mar 19, 2018
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा
"आ. नीलेश भाई, आप अपने विद्यार्थियों को सिखाने के लिए दूसरे की ग़ज़ल का इंतख़ाब करें..."
Mar 19, 2018

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धूप का विस्तार लगाकर सो गए - सलीम रज़ा रीवा

2122 2122 212

धूप का बिस्तर लगाकर सो गए

छांव सिरहाने दबाकर सो गए

-

गुफ़्तगू की दिल मे ख़्वाहिश थी मगर

वो मेरे ख़्वाबों में आकर  सो गए

-

तंग थी चादर तो हमने यूँ किया

पांव सीने से लगाकर सो गए

-

लड़ते लड़ते मुश्किलों से उम्र भर 

अब तो बिलकुल थकथका कर सो गए

-

उनकी नींदों पर निछावर मेरे ख़ाब

जो ज़माने को जगाकर सो गए

-

बे-कसी में और क्या करते भला

ख़ुद को ही समझा-बुझा कर सो गए

-

दीप यादों के रहे…

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Posted on March 18, 2018 at 11:00pm — 19 Comments

दे सोच कर सज़ाएं गुनहगार हम नहीं - सलीम रज़ा रीवा

221   2121   1221   212 

दे सोच कर सज़ाएं गुनहगार हम नहीं

ये तू भी जानता है ख़तावार हम नहीं

-

जिस पर किया भरोसा वही दे गया  दगा

लेकिन किसी भी शख़्स से बे-ज़ार हम नहीं

-

दिल तो दिया था जान भी तुझपे निसार की

फिर क्यूँ  तेरी नज़र में तेरा प्यार हम नहीं    

-

जिनकी खुशी के वास्ते सब कुछ लुटा दिया

उफ़ वो ही कह रहे हैं वफादार हम नहीं

-

हैरत है दिल के पास थे जिनके सदा 'रज़ा'

अब तो उन्ही के प्यार के हक़दार हम नहीं

____________________

मौलिक व…

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Posted on March 8, 2018 at 2:58pm — 15 Comments

हाँथो में तेरे हमदम जादू नहीं तो क्या है - SALIM RAZA REWA

221 2122 221 2122

हाथों में तेरे हमदम कैसा ये फ़न छुपा है 

मिट्टी को तू ने छूकर सोना बना दिया है

-

उस दिन से जाने कितनी नज़रें लगी हैं मुझपर 

जिस दिन से तूने मुझको अपना बना लिया है

-

यूँ ही रहे सलामत खिलता हुआ ये चेहरा 

तू ख़ुश रहे हमेशा  मेरी यही दुआ है

-

आंखें हैं सुर्ख़  रुख़ पर बिखरे हुए हैं गेसू

हिज्रे सनम में शब भर क्या जागता रहा है

-

इक पल में मुस्कुराना इक पल में रूठ जाना

तेरी इसी अदा ने दीवाना कर दिया है

-

तेरी ख़ुशी में…

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Posted on March 7, 2018 at 8:02am — 20 Comments

रूठो न दिलदार कि होली आई है- होली गीत-सलीम रज़ा

रूठो न दिलदार कि होली आई है

झूम उठा संसार कि होली आई है

-

साजन हैं परदेस न भाए रंग-अबीर 

गोरी के आँखों से बहता झर-झर नीर

ख़त में साजन को ये लिखकर भेजा है 

तुम बिन नहीं क़रार कि होली आई है

-

होली के दिन बदला हर रुख़सार लगे 

रंग-बिरंगा होली का श्रंगार लगे

पिए भांग हैं मस्त फाग की टोली में 

बरसे रंग-फुहार कि होली आई है

-

होली के दिन बड़ों का आशीर्वाद रहे 

छोटो के संग होली का पल याद रहे

हर मज़हब के लोग खुशी मे खोए हैं 

रंगो का…

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Posted on March 1, 2018 at 5:51pm — 25 Comments

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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
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"आदरणीय सुर्खाब बशर जी हार्दिक बधाई स्वीकार करे उम्दा ग़ज़ल कही आपने"
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"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें अच्छी प्रस्तुति"
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"बहुत खूब ग़ज़ल आदरणीय मुनीश तन्हा जी हार्दिक बधाई"
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dandpani nahak left a comment for मिथिलेश वामनकर
"आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी आदाब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का"
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"प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें आद० मोहन बेगोवाल जी "
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"बहुत खूब आद० नवीन मणि जी अच्छी ग़ज़ल कही है बहुत बहुत मुबारकबाद कुबूलें "
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"अच्छी ग़ज़ल कही है मुनीश तनहा जी दिल से दाद प्रेषित है "
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"मोहतरम तस्दीक साहब आपका बहुत बहुत शुक्रिया नवाज़िश "
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"जनाब अनीस शेख़ जी बहुत बहुत शुक्रिया नवाज़िश "
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"आद० मुनीश तनहा जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया नवाज़िश "
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