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SALIM RAZA REWA
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Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
May 2
Tasdiq Ahmed Khan commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब, गज़ब के एहसास से सजी उम्दा ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं I "
May 2
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा
"आद0 सलीम साहब सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपको दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ"
May 1
Sushil Sarna commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा
"अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब और ख़ुश्बू निचो रही है शब oo मेरे ख़ाबों की ओढ़कर चादर मेरे बिस्तर पे सो रही है शब आदरणीय सलीम रजा रीवा साहिब , आदाब। ... गज़ब के अहसास पिरोये हैं आपने ग़ज़ल में । आपकी कल्पना और कलम को सलाम। दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं…"
May 1
राज़ नवादवी commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम रज़ा साहब, आदाब. सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे बधाई क़ुबूल करें. सादर. "
May 1
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-49
"वाह वाह बहुत ख़ूब मुबारकबाद अच्छी लघुकथा कही है भाई वीर मेहता जी. "
Apr 30
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-49
" जनाब तेज वीर साहिब, प्रदत्त विषय पर सीख देती सुंदर लघुकथा हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं ll"
Apr 30
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-49
"जनाब ओमप्रकाश साहिब, प्रदत्त विषय पर उम्दा लघुकथा हुई है मुबारकबाद क़ुबुल करें l"
Apr 30
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-49
"आदरणीय विनय कुमार जी,, बहुत शुक्रिया आपकी पुरखुलूस मोहब्बत का, "
Apr 30
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-49
"अदरणीय वीरेंद्र जी, आपको लघुकथा पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ, बहुत बहुत शुक्रिया "
Apr 30
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-49
"मोहतरम तस्दीक़ साहब, आपकी मोहब्बत और हौसला अफज़ाई के लिए बेहद ममनून ओ मशक़ूर हूँ, "
Apr 30
बसंत कुमार शर्मा commented on SALIM RAZA REWA's blog post अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम जी को सादर नमस्कार, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई, बधाई आपको "
Apr 30
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-49
"अदरणीय योगराज प्रभाकर जी, बहुत ही ख़ूबसूरती  से आपने तराशा है  आपकी नज़र-ए-इनायत के लिए तहे दिल से शुक्रिया "
Apr 30
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Apr 30
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-49
"जनाब विनय कुमार साहिब, सीख देती उम्दा लघुकथा हुई है मुबारकबाद क़ुबुल करें l "
Apr 30
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-49
"वाह वाह बहुत ख़ूब मुबारकबाद जनाब तस्दीक साहब,  शुरू से आखि़र तक ख़ूबसूरत ..  फ़िर वो बगीचे में खड़े पेड़ की तरफ़ इशारा करते हुए बोले, "उसमें जो पिछले साल पत्ते आए वो पेड़ को छोड़ कर जारहे हैं, नए पत्ते आ रहे हैं, वो ये ग़म हर साल…"
Apr 30

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अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा

2122 1212 22

अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब

और ख़ुश्बू निचो रही है शब

oo

मेरे ख़ाबों की ओढ़कर चादर

मेरे बिस्तर पे सो रही है शब

oo

अब अंधेरों से जंग की ख़ातिर

कुछ चराग़ों को बो रही है शब

oo

सुब्ह--नौ के क़रीब आते ही

अपना अस्तित्व खो रही है शब

oo

दिन के सदमों को सह रहा है दिन

रात का बोझ ढो रही है शब

___________________

"मौलिक व…

Continue

Posted on April 29, 2019 at 10:51am — 6 Comments

जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह - सलीम रज़ा रीवा

1212 1122 1212 22/112

--

जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह 

तुम्हारे लब हैं गुलाबों की पंखुड़ी की तरह 

oo

शगुफ्ता चेहरा ये  ज़ुलफें ये नरगिसी आँखे 

तेरा हसीन तसव्वुर है शायरी की तरह 

oo

अगर ऐ जाने तमन्ना तू छत पे आ जाए 

अंधेरी रात भी चमकेगी चांदनी की तरह

oo

यूँ ही न बज़्म से तारीकियाँ हुईं ग़ायब

कोई न कोई तो आया है…

Continue

Posted on April 18, 2019 at 9:55am — 7 Comments

हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ  -सलीम रज़ा रीवा

मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईलु फ़ाइलुन

.

हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ तो क्या करें 

ऐसे में उनसे दूर ना जाएँ तो क्या करें 

oo

उसकी अना ने सारे तअल्लुक़ मिटा दिए 

उस बे-वफ़ा को भूल  जाएँ तो क्या करें   

oo

मीना भी तू है मय भी तू साक़ी भी जाम भी

आँखों में तेरी डूब न जाएँ तो क्या करें

oo

कश्ती को डूबने से बचाया बहुत मगर 

हो जाएं गर…

Continue

Posted on April 8, 2019 at 4:30pm — 10 Comments

आख़िर ये इश्क़ क्या है - सलीम रज़ा रीवा

मफ़ऊल फ़ाइलातुन मफ़ऊल फ़ाइलातुन

_____________

आख़िर ये इश्क़ क्या है जादू है या नशा है

जिसको भी हो गया है पागल बना दिया है

oo

हाथो में तेरे हमदम जादू नहीं तो क्या है

मिट्टी को तू ने छूकर सोना बना दिया है

oo

उस दिन से जाने कितनी नज़रें लगी हैं मुझपर

जिस दिन से तूने मुझको अपना बना लिया है

oo

खिलता हुआ ये चेहरा यूँ ही रहे सलामत

तू ख़ुश रहे हमेशा मेरी यही…

Continue

Posted on April 4, 2019 at 9:13am — 6 Comments

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