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SALIM RAZA REWA
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SALIM RAZA REWA commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (जो अज़मे तर्के उल्फ़त कर रहा है )
"वाह  वाह जनाब तस्दीक अहमद साहिब, क्या उम्दा गज़ल हुई है.. मुबारक़बाद क़ुबूल करें  दिले नादां दगा जिसकी है फ़ितरत उसी से तू महब्बत कर रहा है | मरीज़े इश्क़ की लौटी हैं साँसें कोई शायद अयादत कर रहा है | मिलेंगे हश्र में यह बोल कर…"
4 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on Samar kabeer's blog post 'दिल में हमारे दर्द-ए- महब्बत रखा गया'
"वाह वाह जनाब समर साहब, बहुत ही खूबसूरत रदीफ़ क़फ़िया से सजी ग़ज़ल हुई है एक एक शेर ख़ूबसूरत... मुबारक़बाद बाद.. जब इम्तिहान-ए-शौक़-ए- शहादत रखा गया इनआम उसका दोस्तो जन्नत रखा गया.. वाह. तकलीफ़ दूसरों की समझ पाएँ इसलिये दिल में हमारे दर्द-ए-महब्बत रखा…"
4 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"ज़नाब अफरोज साहब, ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद क़ुबूल करें "
22 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"अंजली जी ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई "
22 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"भाई नीलेश जी khooख़ूब ग़ज़ल के लिए बधाई "
22 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"वाह  वाह जनाब क्या ग़ज़ल हुई है मुबारक़बाद कुबूल फरमाएं,   माँगा उन्हें ख़ुदा से तहज्जुद में भी मगर जाएँ न अर्श पर ही दुआएँ तो क्या करें |  "
22 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"हर्ष महाज़न साहब,  ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद ,  जनाब समर साहब के मशविरे पर ध्यान  दे"
22 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय ग़ज़ल के लिए बधाई  मिसरे बह्र में नहीं है देखिएगा."
22 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"जनाब ख़ूबसूरत ग़ज़ल के  लिए मुबारक़बाद, 4 था शेर be बह्र है.. Yun कर lem6 "बचना तो पापियों से मुनासिब नहीं है अब " 5 वाँ नज़रे टिकी हुई हैं किसानो  कि आज  फिर "
22 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ तो क्या करें उस बेवफ़ा को भूल ना जाएँ तो क्या करें-यादें जिगर पे तीर चलाएँ तो क्या करें खाबों में भी जो आप ना आएँ तो क्या करें -खुशिओं का इंतज़ार मुझे मुद्दतों से है पीछा मगर न छोड़ें बलाएँ तो क्या करें -मीना भी तू है मय भी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on SALIM RAZA REWA's blog post मेरा हमदम है तो हर ग़म से बचाने आए - सलीम रज़ा रीवा
"सुंदर गजल हुई है आदरणीय हार्दिक बधाई ।"
Feb 19
नादिर ख़ान commented on SALIM RAZA REWA's blog post मेरा हमदम है तो हर ग़म से बचाने आए - सलीम रज़ा रीवा
"पाप धुल जाते हैं सुनते हैं यहां पर आ करलोग यूँ ही तो नहीं गंगा नहाने आए ...अच्छी गज़ल हुयी है मुबारकबाद जनाब  सलीम रज़ा साहब ..."
Feb 18
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SALIM RAZA REWA's blog post मेरा हमदम है तो हर ग़म से बचाने आए - सलीम रज़ा रीवा
"बहुत ही खूब ग़ज़ल कही आदरणीय..."
Feb 18
Rakshita Singh commented on SALIM RAZA REWA's blog post मेरा हमदम है तो हर ग़म से बचाने आए - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम जी बहुत ही बेहतरीन गजल, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 18
Anita Maurya commented on SALIM RAZA REWA's blog post मेरा हमदम है तो हर ग़म से बचाने आए - सलीम रज़ा रीवा
"वाह, खूबसूरत ग़ज़ल...."
Feb 17
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post मेरा हमदम है तो हर ग़म से बचाने आए - सलीम रज़ा रीवा
"राम अवध जी बहुत शुक्रिया"
Feb 16

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Gender
Male
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REWA M.P.
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REWA (M.P.)
Profession
MANAGER
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मेरा हमदम है तो हर ग़म से बचाने आए - सलीम रज़ा रीवा

2122 1122 1122 22

मेरा हमदम है तो हर ग़म से बचाने आए

मुश्किलों में भी मेरा साथ निभाने आए 

-

जिनको जीने की दुआ मैंने हमेशा दी है  

आज महफ़िल में वही ऊँगली उठाने आए

-

काम तलवारों से तीरों से सदा है जिनको

अम्न की बात वही मुझको सिखाने आए

-

पाप धुल जाते हैं सुनते हैं यहां पर आ कर

लोग यूँ ही तो नहीं गंगा नहाने आए 

-

दिल न तोड़ेंगे कभी इतना यक़ीं था जिनपर

बे वफाई का वो इल्ज़ाम लगाने आए

-

जिनके दिल में है महब्बत ऐ रज़ा तेरे…

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Posted on February 14, 2018 at 8:00pm — 9 Comments

हमने तुम्हारे वास्ते क्या क्या नहीं किया - सलीम रज़ा

221 2121 1221 212 

हमने तुम्हारे वास्ते क्या क्या नहीं किया

अफ़सोस तुमने हमपे भरोसा नहीं किया

-

जब से जुड़ा है नाम तेरा मेरे नाम से 

होटों ने फिर किसी का भी चर्चा नहीं किया

-

हमने हरेक ज़ुल्‍म गवारा किया मगर

हमने तुम्हारे प्यार का सौदा नहीं किया

-

उससे भला उमीद-ए-वफा किस तरह करें

जिसने किसी के…

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Posted on February 6, 2018 at 10:30pm — 14 Comments

जीने की आरज़ू तो है सब को खुशी के साथ - सलीम रज़ा रीवा

221 2121 1221 212 

जीने की आरज़ू तो है सब को खुशी के साथ

ग़म भी लगे हुए हैं मगर ज़िन्दगी के  साथ

-  

नाज़-ओ-अदा के साथ कभी बे-रुख़ी के साथ 

दिल में उतर  गया वो बड़ी सादगी के साथ

-  

आएगा मुश्किलों में भी जीने का फ़न तुझे

कुछ दिन गुज़ार ले तू मेरी ज़िन्दगी के साथ

-  

ख़ून-ए- जिगर निचोड़ के रखते हैं शेर में

यूँ ही नहीं है प्यार हमें  शायरी के…

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Posted on February 4, 2018 at 10:00am — 18 Comments

दूर दामन से तेरे गर्दिश-ए-अय्याम रहे - SALIM RAZA REWA

2122 1122 1122  22/112

ये हमारी है दुआ शाद तू गुलफा़म रहे

दूर ही तुझसे सदा गर्दिश-ए-अय्याम रहे

-

सारी दुनिया में तेरे इल्म की महके ख़ुश्बू

जब तलक चाँद सितारें  हों तेरा नाम रहे

-

इस तरह तेरे तसव्वुर में मगन हो जाऊँ

मुझको अपनों से न ग़ैरों से कोई काम रहे

-

जब तेरी दीद को हम शहर में तेरे पहुंचें

अपने दामन से न लिपटा कोई इल्ज़ाम रहे

-

तेरी ख़ुशहाली की हरपल ये दुआ करते हैं 

तेरे  दामन  में  ख़ुशी  सुब्ह रहे शाम रहे …

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Posted on February 1, 2018 at 7:30am — 26 Comments

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