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SALIM RAZA REWA
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SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"भाई अमित जी ग़ज़ल के लिए बधाई, जमी रहे _ ठहरी या टिकी रहे ज़मीं रहे_ ज़मीन रहे... शायद समझ गए होंगे. सादर"
7 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"सुरेंद्र भाई आपकी महब्बत के लिए शुक्रिया,"
7 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जनाब समर साहब, ग़ज़ल में आपकी तारीफ़ लिखने का हौसला देता है,नाचीज़ हमेशा दुआओं का तलबगार है."
7 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"शुक्रिया अमित जी,"
7 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"वाह अफरोज साहिब आपकी ग़ज़ल और ख़ूबसूरत न हो.. ये हो ही नहीं सकता.. मुरस्सा ग़ज़ल के लिए मुबारक़बाद.... भाई तनाफुर का रोग आपको भी पकड़ लिया... ( में मेंरी ).... देखिएगा."
15 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"वाह... जनाब समर साहब वाह.. मुशाइरे की आगाज़ इतनी ख़ूबसूरत ग़ज़ल से करने के लिए मुबारक़बाद. मुरस्सा ग़ज़ल हुई है साहिब दाद क़ुबूल फरमाएं... उस बेवफ़ा से जाके ये कह देना दोस्तो हैं संग-ए-दर हज़ार ,सलामत जबीं रहे"
15 hours ago
SALIM RAZA REWA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"मेरे तसव्वुरात में जो भी  हसीं रहे !! ग़म है कि वो यक़ीन के लायक़ नहीं रहे !! मैंने तो ऐसा ख़्वाब में सोचा नहीँ कभी ! तर्के वफ़ा में आगे हमेशा तुम्हीं रहे !! हर कोई चाहता है वो जो चाहता हूं मैं ! चर्चा तेरा ही बज़्म में ए मह जबीं रहे !! मैं ने…"
16 hours ago
SALIM RAZA REWA posted a blog post

तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा

212 1222 212 1222तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैंरात - रात भर तेरा इंतज़ार करते हैं-तुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैंजाँ निसार करते थे जाँ निसार करते हैं-ख़ुश रहे हमेशा तू हर ख़ुशी मुबारक होये दुआ खुदा से हम बार - बार करते हैं-उँगलियाँ उठाते हैं लोग दोस्तों पर भीहम तो दुश्मनों पर भी ऐतबार करते हैं-वादा उसका सच्चा है लौट के वो आएगाइस उमीद पर अब भी इंतज़ार करते हैं-हम तो जान दे देते उनके इक इशारे परदोस्तों में वो हमको कब शुमार करते हैं-फूल सा खिला चेहरा आँख वो ग़ज़ालों सीमेरे ख़्वाब…See More
Thursday
vijay nikore commented on SALIM RAZA REWA's blog post छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे - सलीम रज़ा रीवा
"बहुत ही खूबसूरत गज़ल। हार्दिक बधाई।"
Thursday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"अली जनाब तस्दीक साहब, आपकी महब्बत के लिए शुक्रिया, मशविरे के लिए शुक्रिया, सिर्फ टाइपिंग की गलती है..और कुछ नहीं, उमीद लिखा ही गया था आटो करेक्शन की वज़ह से..उम्मीद ले लिया,(तवक़्क़ो भी ) अच्छा लफ्ज़ है,"
Wednesday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"शुक्रिया जनाब आरिफ साहब."
Wednesday
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"आली जनाब समर साहब, ग़ज़ल पे आपकी शिरक़त और मशविरे के लिए शुक्रिया, जनाब 'में' टाइप नहीं हुआ है, उम्मीद को उमीद ही पढ़ें ,"
Wednesday
Tasdiq Ahmed Khan commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब ,उम्दा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । शेर 5और6 का सानी मिसरा बह्र में नहीं आ रहा है ,मुनासिब समझें तो यूँ कर सकते हैं । (हम इसी तवक़्क़ो पर इनतजार करते हैं ),(आशिक़ों में वो हमको कब शुमार करते हैं )"
Wednesday
Mohammed Arif commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम रज़ा साहब आदाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । हर शे'र माक़ूल । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की बातों का संज्ञान लें ।"
Wednesday
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'इस उम्मीद पर अब भी इन्तिज़ार करते हैं' इस मिसरे में लय बाधित हो रही है,'उम्मीद' को "उमीद"कर लें । 'दोस्तों वो हमको कब शुमार करते हैं' ये मिसरा…"
Wednesday
SALIM RAZA REWA posted a blog post

तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा

212 1222 212 1222तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैंरात - रात भर तेरा इंतज़ार करते हैं-तुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैंजाँ निसार करते थे जाँ निसार करते हैं-ख़ुश रहे हमेशा तू हर ख़ुशी मुबारक होये दुआ खुदा से हम बार - बार करते हैं-उँगलियाँ उठाते हैं लोग दोस्तों पर भीहम तो दुश्मनों पर भी ऐतबार करते हैं-वादा उसका सच्चा है लौट के वो आएगाइस उमीद पर अब भी इंतज़ार करते हैं-हम तो जान दे देते उनके इक इशारे परदोस्तों में वो हमको कब शुमार करते हैं-फूल सा खिला चेहरा आँख वो ग़ज़ालों सीमेरे ख़्वाब…See More
Wednesday

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Gender
Male
City State
REWA M.P.
Native Place
REWA (M.P.)
Profession
MANAGER
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GAZAL WRITER

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तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं - सलीम रज़ा रीवा

212 1222 212 1222

तेरे प्यार में दिल को बेक़रार करते हैं

रात - रात भर तेरा इंतज़ार करते हैं

-

तुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैं

जाँ निसार करते थे जाँ निसार करते हैं

-

ख़ुश रहे हमेशा तू हर ख़ुशी मुबारक हो

ये दुआ खुदा से हम बार - बार करते हैं

-

उँगलियाँ उठाते हैं लोग दोस्तों पर भी

हम तो दुश्मनों पर भी ऐतबार करते हैं

-

वादा उसका सच्चा है लौट के वो आएगा

इस उमीद पर अब भी इंतज़ार करते…

Continue

Posted on November 22, 2017 at 8:30am — 6 Comments

छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे - सलीम रज़ा रीवा

212 212 212 212

छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगे

बिन तेरे आह भर-भर के मर जाएँगे

 -

चाँद भी देख कर उनको शरमाएगा 

मेरे महबूब जिस दम संवर…

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Posted on November 20, 2017 at 10:00am — 14 Comments

चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा

2122 2122 2122 212

चांद  का टुकड़ा है या कोई  परी या हूर है 

उसके चहरे पे चमकता हर घड़ी इक नूर है

-

हुस्न पर तो नाज़ उसको ख़ूब था पहले से ही …

Continue

Posted on November 17, 2017 at 10:30am — 13 Comments

सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे बड़ी रदीफ़ पर एक और ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा



212 212 212 212, 212 212 212 212

-

जब तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी /

लब तुम्हारी महब्बत में खो…

Continue

Posted on November 15, 2017 at 9:00am — 21 Comments

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"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । लगता है आपने ग़ज़ल जल्दबाज़ी…"
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"आदरणीय महेंद्र जी , उम्दा ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाएं.  सादर"
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"आदरणीय अजय तिवारी जी आदाब, हर शे'र माक़ूल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल…"
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Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय सलीम साहब, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाएं. सादर "
20 minutes ago
Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय गोपाल नारायण जी, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाएं. सादर "
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Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीया राजेश कुमारी जी, उम्दा ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाएं. 'इक नामचीन शह्र में बदनाम हो…"
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Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय सुरेन्द्रनाथ जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाएं. सादर "
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Ajay Tiwari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"आदरणीय तस्दीक साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाएं. सादर "
36 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"मेरे कहे को मान देने के लिए धन्यवाद आपका ।"
37 minutes ago

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