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Saurabh Pandey
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Saurabh Pandey's Discussions

कविता की विकास यात्रा : नयी कविता, गीत और नवगीत (भाग -२) // --सौरभ
7 Replies

भाग - २=====’दूसरा सप्तक’ की भूमिका लिखते समय अज्ञेय ने कहा है, कि, ’प्रयोग का कोई वाद नहीं है । हम वादी नहीं रहे, न ही हैं, न प्रयोग अपने आप में इष्ट या साध्य है ।’ वे आगे कहते हैं - ’जो लोग प्रयोग…Continue

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Sep 6, 2016.

कविता की विकास यात्रा : नयी कविता, गीत और नवगीत (भाग -१) // --सौरभ
8 Replies

मानवीय विकासगाथा में काव्य का प्रादुर्भाव मानव के लगातार सांस्कारिक होते जाने और संप्रेषणीयता के क्रम में गहन से गहनतर तथा लगातार सुगठित होते जाने का परिणाम है । मानवीय संवेदनाओं को सार्थक अभिव्यक्ति…Continue

Started this discussion. Last reply by Kalipad Prasad Mandal Sep 26, 2016.

ओबीओ, लखनऊ चैप्टर वार्षिकोत्सव-2016
56 Replies

सुपरिचित साहित्यिक-संस्था ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम (ओबीओ) के लखनऊ चैप्टर ने चैप्टर के संयोजक डॉ. शरदिन्दु मुकर्जी के निर्देशन में दिनांक 22 मई 2016 को स्थानीय डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, लोक निर्माण…Continue

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Jun 1, 2016.

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक- 62 की समस्त संकलित रचनाएँ
31 Replies

श्रद्धेय सुधीजनो !"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-६२, जोकि दिनांक १२ दिसम्बर को समाप्त हुआ, के दौरान प्रस्तुत एवं स्वीकृत हुई रचनाओं को संकलित कर प्रस्तुत किया जा रहा है. इस बार के आयोजन का शीर्षक था -…Continue

Started this discussion. Last reply by सीमा शर्मा मेरठी Dec 18, 2015.

 

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम् .. "
10 hours ago

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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post हिंदी-दिवस : चार दोहे // सौरभ
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपने दोहों में लेखन   दोहों में कर टिप्पणी.. किया हमें अति मुग्ध  ओबीओ का यह पटल, विद्वत सुधी प्रबुद्ध !  हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय "
Wednesday
Samar kabeer commented on Saurabh Pandey's blog post हिंदी-दिवस : चार दोहे // सौरभ
"जनाब सौरभ पाण्डेय जी आदाब, बहुत उम्द: तंज़ में डूबे अच्छे दोहे कहे आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । बचपन से हम 'हिन्दी' शब्द को आधे न से लिखते पढ़ते आये हैं,लेकिन आजकल जिसे देखो इस शब्द की "हिंदी" अनुस्वार से लिखने लगा…"
Tuesday

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Saurabh Pandey commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत : अमावस की कविता (गणेश बाग़ी)
"ग़ज़ब !  भाई गनेस जी !! .. चामत्कारिक बिंबों से आपने, सच कहूँ, तो अनायास प्रतीत होते, अलिप्त-से दीखते दैनिक प्रवाह में प्रचण्ड प्रवाह पैदा कर दिया है. यथार्थबोध का ऐसा सान्द्र निवेदन कम ही समक्ष आता है.  यदि कहूँ कि यह कविता मुझे यहाँ पटल…"
Monday
बसंत कुमार शर्मा commented on Saurabh Pandey's blog post हिंदी-दिवस : चार दोहे // सौरभ
"आ. सौरभ पांडे जी सादर नमस्कार  बहुत सटीक प्रहार किया है आपने आज के दिखावे पर  बधाई स्वीकारें "
Monday
Nilesh Shevgaonkar commented on Saurabh Pandey's blog post हिंदी-दिवस : चार दोहे // सौरभ
"आ. सौरभ सर,दिवस मनाने के ढकोसले को बेहतरीन ढ़ंग से उजागर करते हुए दोहों के लिए बधाई सादर "
Monday
Sushil Sarna commented on Saurabh Pandey's blog post हिंदी-दिवस : चार दोहे // सौरभ
"आदरणीय सौरभ जी, सादर प्रणाम, हिंदी दिवस पर यथार्थ को उजागर करती बेहतरीन दोहावली। दिल से बधाई स्वीकार करें सर। सादर"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post हिंदी-दिवस : चार दोहे // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन । हिन्दी दिवस की सच्चाई उजागर करते उत्तम दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई । हिन्दी का गुणगान कर, बढ़चढ़ कर सब आजकल से फिर नियमित करो, अंग्रेजी में काज।।**बच्चे सब कन्वेन्ट में, बढ़चढ़ पढ़ने भेजहिन्दी के सम्मान में, इक दिन चीखो…"
Monday

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Saurabh Pandey posted a blog post

हिंदी-दिवस : चार दोहे // सौरभ

दिन भर का उत्साह है, पन्द्रह दिन का प्यार हिंदी हित कुछ झूठ-सच, कुछ भावुक उद्गार .. सरकारी है घोषणा, सजे-धजे हैं मंच'हिंदी भाषा राष्ट्र की', दिन भर यही प्रपंच 'हिंदी-हिंदी' कर सभी, बजा रहे निज गाल हम भकुआए देखते.. 'हिंदी-दिवस' उबाल माँ-बोली को जानिए ज्यों माता का प्यारफिर हिंदी की बाँह धर.. सीखें जग-व्यवहार !***(मौलिक और अप्रकाशित) See More
Monday

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Saurabh Pandey commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (रोला छंद पर आधारित )
"अंतर्निहित उत्कट-भावों को समर्थ शब्द तथा सुगढ़ विन्यास मिले हैं. सादर बधाइयाँ, आदरणीय गोपाल नारायनजी     अलबत्ता, ’कठिन’ को पचा पाना मेरे लिए वस्तुतः कठिन हो रहा है. मैं शब्दकल के अनुसार इसके ’न’ को मात्र एक…"
Sep 2

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-112 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सत्विन्द्र कुमार जी, आप का आना ... फिर भी मेरा मन प्यासा ..  :-)) शुभातिशुभ"
Aug 23

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-112 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी, कमल को अधार बनाने के बावज़ूद चित्र को जिस तरह से आपने शीर्षक बनाया है. यह भी कौशल और काव्य-सोच का परिचायक है.  इस उत्तम रचना के लिए हार्दिक बधाई तथा अशेष शुभकामनाएँ  शुभातिशुभ  "
Aug 23

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-112 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दिनेश कुमार विश्वकर्मा जी, बहुत खूब ! आपने कमल को विषय बना कर पठनीय छंद रचना की है. हार्दिक बधाइयाँ  शुभ-शुभ"
Aug 23

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-112 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह ! बहुत खूब !!   आदरणीय अजय जी, आपका रचना-कर्म शिल्प सम्बन्धी बाधाओं को पार करने के स्थान पर उन्हें समाहित करता हुआ पद-रचना का कारण बना रहा है. तुकान्तता के विधान के अनुसार आधार-पंक्ति को एक बार पुनः देख लेना उचित…"
Aug 23

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-112 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय मुकुल जी, छंदो के विन्यास में शब्दों को सजाने का अभ्यास करना उत्तम प्रयास-प्रक्रिया है. विश्वास है, आप इस प्रक्रिया के बाद सार्थक वाक्य-रचना करनेु लगेंगे.  आपकी तार्किक रचनाओं की प्रतीक्षा रहेगी.  अग्रिम शुभकामनाएँ."
Aug 23

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-112 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा जी, आपने कमल के फूल के माध्यम से, अर्थात इसे बिम्ब बना कर, आपने बहुत कुछ सार्थक कह दिया है. यही काव्य में वैचारिकता या नवाचार को प्रश्रय देता है.  खुद से निकल कर दूसरों के दर्द को तू बाँट ले उनके ह्रदय के कोहरे को धूप बनकर…"
Aug 23

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-112 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश भाईजी,  आयोजन का प्रारंभ आपकी रचना से हुआ, हार्दिक बधाई.  बहुवचन की पंक्तियोंं को हैं के साथ समाप्त करें. बाकी शुभातिशुभ "
Aug 22

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Saurabh Pandey replied to Saurabh Pandey's discussion गजल (भोजपुरी) // -सौरभ in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय लक्ष्मण भाई जी, यह आपकी सदाशयता ही नहीं, आपके साहित्यानुराग का ज्वाज्वल्यमान उदाहरण है कि भोजपुरी भाषी न होते हुए भी आपने रचना पर न केवल उचित समय दिया, बल्कि उदारमना बधाई भी दी. मैं आपके उत्साहवर्द्धन पर हृदयतल से आभारी हूँ.  सादर "
Aug 8

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Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइसे होई गंगा पार in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह ! नीतिपरक रचना से साहित्य में योगदान ला बहुते धन्नबाद, भाई आशीष जी. ढेर दिन प आपके रचना देखि रगल बानीं. हमहूँ पटल प कम आ पावेनीं.  काशिका भोजपुरी के रस में पगाइल एह रचना के आल्हा छंद के विन्यास प जवना सहज ढङ से निर्वहन कइल गइल बा ऊ मन के…"
Aug 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Saurabh Pandey's discussion गजल (भोजपुरी) // -सौरभ in the group भोजपुरी साहित्य
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन । भाषा के लिहाज से गजल को समझने में थोड़ी सी दिक्कत तो हुई पर मन प्रफुल्लित हो गया । इस स्थानीय भाषा की बेहतरीन गजल के लिए ढेरों बधाइयाँ ।"
Aug 7

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Allahabad
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I am a person with heart.

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हिंदी-दिवस : चार दोहे // सौरभ


दिन भर का उत्साह है, पन्द्रह दिन का प्यार
हिंदी हित कुछ झूठ-सच, कुछ भावुक उद्गार ..

 

सरकारी है घोषणा, सजे-धजे हैं मंच
'हिंदी भाषा राष्ट्र की', दिन भर यही प्रपंच

 

'हिंदी-हिंदी' कर सभी, बजा रहे निज गाल
हम भकुआए देखते.. 'हिंदी-दिवस' उबाल

 

माँ-बोली को जानिए ज्यों माता का प्यार
फिर हिंदी की बाँह धर.. सीखें जग-व्यवहार !
***
(मौलिक और अप्रकाशित) 

Posted on September 14, 2020 at 10:11am — 6 Comments

ग़ज़ल - पत्थरों से रही शिकायत कब ? // --सौरभ

२१२२ १२१२ २२/११२

 

अब दिखेगी भला कभी हममें..

आपसी वो हया जो थी हममें ?

 

हममें जो ढूँढते रहे थे कमी

कह रहे, ’ढूँढ मत कमी हममें’ !

 

साथिया, हम हुए सदा ही निसार

पर मुहब्बत तुम्हें दिखी हममें ?

 

पूछते हो अभी पता हमसे

क्या दिखा बेपता कभी हममें ?

 

पत्थरों से रही शिकायत कब ?

डर हथेली ही भर रही हममें !

 

चीख भरने लगे कलंदर ही..

मत कहो, है बराबरी हममें !

 

नूर ’सौरभ’…

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Posted on December 25, 2019 at 11:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल - इन्हीं चुपचाप गलियों में जिये रिश्ते तलाशेंगे // सौरभ

1222 1222 1222 1222

 

सिरा कोई पकड़ कर हम उन्हें फिर से तलाशेंगे

इन्हीं चुपचाप गलियों में जिये रिश्ते तलाशेंगे 

 

अँधेरों की कुटिल साज़िश अगर अबभी न समझें तो 

उजालों के लिए मिट्टी के फिर दीये तलाशेंगे 

 

कभी उम्मीद से भारी नयन सपनों सजे तर थे

किसे मालूम था ये ही नयन सिक्के तलाशेंगे !

 

दिखे है दरमियाँ अपने बहुत.. पर खो गया है जो

उसे परदे, भरी चादर, रुँधे तकिये तलाशेंगे 

 

हृदय में भाव था उसने निछावर…

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Posted on October 27, 2019 at 12:00pm — 12 Comments

तीन मुक्तक // - सौरभ

सितारे-चाँद, अच्छे दिन, ऋणों की बात जपनी है

सजा कर बेचना है स्वप्न ये पहचान छपनी है

बनाते हम बड़ी बातें तथा जुमले खपाते हैं

सियासत तुम समझते हो मगर दूकान अपनी है 

 

जिन्हें तो चिलचिलाती धूप का अनुभव नहीं होना

कभी हाथों जिन्हें सामान कोई इक नहीं ढोना

जिन्हें ज़ेवर लदी उड़ती-मचलती औरतों का साथ

वही मज़दूर-मेहनत औ’ ग़मों का रो रहे रोना 

 

सियासत की, धमक से औ’ डराया ख़ूब अफ़सर भी

लिखा है पत्रिका में इंकिलाबी लेख जम कर भी

उठा कर…

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Posted on May 2, 2019 at 7:30pm — 14 Comments

Comment Wall (129 comments)

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At 9:22am on December 3, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय सौरभ पांडे जी को जन्म दिवस की हार्दिक बधाई एवम असीमित शुभ कामनायें।

At 1:00pm on May 26, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी आदाब मैं बता नहीं सकता कितना खुश हूँ कि मेरी रचना को आपने सराहा बहुत शुक्रिया आगे भी आपका स्नेह मिलता रहेगा ऐसी आशा करता हूँ
At 8:21pm on October 22, 2017, Ramkunwar Choudhary said…
आप को सादर प्रणाम, मैं पहली बार कुछ लिखने का प्रयास कर रहा हूँ। मैंने भुजंगप्रयात छंद के आधार पर कुछ लिखने का प्रयास किया है। भाव, सौंदर्य, मात्राओं आदि की त्रुटियां बताकर मेरा मार्गदर्शन करें। मैं आपका आभारी रहूँगा..................
जहाँ ये दिलों की दगा का अखाड़ा,
किसी ने मिलाया किसी ने पछाड़ा;
यहाँ प्यार है बेसहारा बगीचा,
किसी ने बसाया किसी ने उजाड़ा;
At 7:09pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 5:11pm on December 3, 2015, मोहन बेगोवाल said…

आदरणीय सौरभ जी, आप जी को जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई हो 

At 3:57am on December 3, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

At 9:54am on October 2, 2015, सतविन्द्र कुमार राणा said…
पूजनीय सौरभ पाण्डेय सर मैं आपके द्वारा दिए गए सुझावों एवम् मार्गदर्शन के लिए कृतार्थ हूँ।"चुप्पी" इस मञ्च पर मेरी प्रथम प्रस्तुति है।आप सब सुधिजनों के सानिध्य में आया एक नव विद्यार्थी हूँ।आपके मार्गदर्शन का सदैव आकांक्षी रहूँगा।मेरी रचना के अवलोकन एवम् समीक्षा के लिए हार्दिक आभार।
At 8:07pm on July 20, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीय सौरभ जी नमस्कार --- सर आपके द्वारा इस दोहे को "मेघ मिलें जब मेघ से, शोर करें घनघोर,प्रेम गीत बजने लगें, सृष्टि में चहूँ और"
वैधानिक रूप से सही नहीं माना। द्वितीय पंक्ति के सम चरण में 'चहूँ' को यदि 'चहुं ' से सही कर दिया जाए तो मात्रिक ह्रास नहीं होगा और त्रुटि सही हो जाएगी। क्या यही वैधानिक त्रुटि है या कोई ओर ?कृपया मेरी जिज्ञासा को शांत करें ताकि भविष्य में इस तरह की त्रुटि से बचा जा सके।
सादर …

At 5:17am on March 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय सौरभ सर, वाल पर आपकी उपस्थिति ने श्रम को सार्थक कर दिया. वाल के कलेवर पर मिली पहली प्रतिक्रिया है.  आपके आशीर्वाद और शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभारी हूँ . नमन 

At 10:58am on February 17, 2015, लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' said…

आ. भाई सौरभ जी,सादर अभिवादन । नगर से बाहर होने के कारण परिसंवाद में उपस्थित न हो पाने व आपसे रूबरू न हो पाने का मलाल रहेगा । पहले उम्मीद थी कि सुबह तक वापसी सभ्भव हो जाएगी । किंतु किसी कारणवश नहीं पहुच सका । इस कारण अपनी उपस्थिति सम्भव नहीं हो पायी । क्षमा प्रार्थी हूँ ।

 
 
 

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