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सतविन्द्र कुमार राणा
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सतविन्द्र कुमार राणा posted a blog post

नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना- ग़ज़ल

1222 1222 122 नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना दिखो नजदीक लेकिन दूर होना।कली का कुछ समय को ठीक है, पर नहीं अच्छा चमन, मगरूर होना।अँधेरों में उजालों को दे रस्ता चिरागों का न थकना चूर होनाकोई कहता इसे वरदान है ये खले लेकिन किसी को हूर होना।अभी सूखा नहीं रख ले तसल्ली दिखेगा ज़ख्म का नासूर होना।कदम तो चूम लेगी जीत तेरे है बाकी बस तुझे मंजूर होना।मौलिक अप्रकाशितSee More
Sunday
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-109 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन के लिए सादर आभार"
May 17
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-109 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी, सुन्दर सृजन!"
May 17
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"सुन्दर चित्रानुरूप छन्द रचना के लिए सादर बधाई आदरणीय"
May 17
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"आदरणीया प्रतिभा दीदी, सादर आभार नमन!"
May 17
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"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी, सादर हार्दिक आभार नमन"
May 17
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"दूल्हा होता राजा लेकिन, अब है भीगी बिल्ली देख-देख कर उसको भैया, लोग उड़ाते खिल्ली गर्मी से बेहाल हुए पर, नहीं इसी का रोना लारी-घोड़ी कैद खड़ी हैं, साहब है कोरोना। बहुत सुंदर छन्द कहे, आदरणीय जयपुरी जी"
May 17
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"किस की जग पर मार यह, समझे सही सुजान जीव मगर निर्जीव जो, उसका सकल वितान उसका सकल वितान, चैन देकर है लेता भय का रच संसार, कैद सबको कर देता सतविंदर हैरान, देख करतूतें इसकी प्रश्न यही  बस एक, रही रचना यह किसकी? बहुत सुन्दर् सृजन आदरणीय अशोक कुमार…"
May 17
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"कितना ही चाहे कड़ा, पड़े समय का वार इच्छा लेकिन मनुज की, नहीं सकेगा मार नहीं सकेगा मार, चलेंगे कारज सारे डोली में अब बैठ, चले वर वधु के द्वारे वाहक बनें कहार, करें कोशिश हो जितनी दुनिया पकड़े चाल, रुकेगी बोलो कितनी। बहुत बढ़िया आदरणीया  प्रतिभा…"
May 17
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-109 in the group चित्र से काव्य तक
"नवगीत (आधार सार छन्द) गाड़ी-वाड़ी बंद खड़ी सब, पथ पर स्वयं सवारी कोई खाए ठूँस-ठूँस कर, दिखे कहीं लाचारी सन्नाटे में जन-जीवन है, सन्नाटे का उत्सव मानव कैदी हुआ स्वयं का, पंछी करते कलरव कुदरत कोशिश कर करती है, कुछ अपनी तैयारी। ढोल पड़े है कहीं कून में,…"
May 16
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"सुख तो बढ़ कर कई गुणा हो, दुःख मगर जाता है हार संग खड़ा मिलता है सब को, जब-जब अपना घर-परिवार। कोई छोटा बहुत जहाँ में, कोई अधिक बड़ा है तात लेकिन अच्छा कभी नहीं है, इक-दूजे को देना मात सबके पोषण की चिंता हो, मिले सभी को रोटी-भात जग पूरा ही घर जैसा…"
May 10
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-61 (विषय: प्रकृति)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी सादर नमन, विद्यार्जन, आर्थिक उत्थान और ओहदेदार होने के बावजूद कुछ वर्ग के लोग आज भी इन बातों का सामना करते हैं। जातीयता प्रत्यक्ष या परोक्ष अपना यह बदरूप यदा-कदा दिखाती रहती है। निस्संदेह प्राचीन समय के हालातों में…"
Apr 30
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-61 (विषय: प्रकृति)
"आदरणीय सलिल गनवीर जी, सादर नमन। प्रयास पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए सादर आभार।"
Apr 30
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-61 (विषय: प्रकृति)
"आदरणीय तेजवीर जी, अनुमोदन एवं उत्साहवर्धन के लिए सादर हार्दिक आभार"
Apr 30
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-61 (विषय: प्रकृति)
"आदरणीय तेजवीर जी सादर नमन, सामयिक हालात में भले ही मानव जाति एक डर के साये में दिन काट रही है, लेकिन इन दिनों के लॉक डाउन ने पर्यावरणऔर प्रकृति के अनेकों वर्ष के दोहन की प्रतिपूर्ति की है। एक साकारात्मक सन्देश देती हुई उत्तम प्रस्तुति के लिए हार्दिक…"
Apr 30
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-61 (विषय: प्रकृति)
"आदरणीया कनक जी सादर नमन, खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है। जब मौसम बहार का हो तो कोंपलें फूटती ही हैं, फिर पौधा हो, बड़ा वृक्ष। हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति के लिए।"
Apr 30

Profile Information

Gender
Male
City State
करनाल हरियाणा
Native Place
गाँव व डाक बालराजपूतान
Profession
अध्यापक
About me
I am a simple person living simply.I have interests in reading,movies and enjoy these timely.try to write somthings when there is time to do so.Believe in nationalism as an ideology.

सतविन्द्र कुमार राणा's Blog

छोड़ दो काफ़ी सियासत हो गयी है

2122 2122 2122

.

जानते हैं तुम में ताकत हो गयी है,

और किस-किस पे ये आफत हो गयी है।

झूठ है जो, झूठ बिन कुछ भी नहीं, पर

अब जमाने में सदाक़त हो गयी है।

जब चमन का फूल होने का भरो दम,

क्यों चमन से ही अदावत हो गयी है?

जिस्म पर ठंडा लबादा, आग मुँह में,

जिसने रक्खे उसकी शुहरत हो गयी है।

कौम के अच्छे की खातिर काम हो अब,

छोड़ दो काफ़ी सियासत हो गयी है।

हर खुशी पर, मेरी बोलो तो भला क्यों,…

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Posted on January 2, 2020 at 12:00pm — 14 Comments

तेरा होना मेरा सर्जन है

मैं बीज पड़ा तेरे आँगन में

तेरी आर्द्रता से अंकुरण है

ये तन पौध बना फिर देख बढ़ा

तेरा होना मेरा सर्जन है।

कल-कल बहती हैं नदियाँ तुझ पर

मीठे-मीठे गीत सुनातीं हैं

जीवन को सींच रही हैं पल-पल

हरियाली को लेकर आतीं हैं

नित चलती पथ पर ये बिना रुके

आगे को ही बढ़ती जातीं हैं

बाधाओं को पार करें कैसे

ऐसा सबको पाठ पढ़ातीं हैं।

फिर मीत सिंधु के जा साथ मिलें

दिख जाता क्या प्रेम समर्पण है?

ये तन पौध बना फिर देख बढ़ा…

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Posted on November 2, 2019 at 11:00am — 2 Comments

नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना- ग़ज़ल

1222 1222 122
नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना
दिखो नजदीक लेकिन दूर होना।

कली का कुछ समय को ठीक है, पर
नहीं अच्छा चमन, मगरूर होना।

अँधेरों में उजालों को दे रस्ता
चिरागों का न थकना चूर होना

कोई कहता इसे वरदान है ये
खले लेकिन किसी को हूर होना।

अभी सूखा नहीं रख ले तसल्ली
दिखेगा ज़ख्म का नासूर होना।

कदम तो चूम लेगी जीत तेरे
है बाकी बस तुझे मंजूर होना।

मौलिक अप्रकाशित

Posted on September 20, 2019 at 2:00pm — 2 Comments

पत्थरों पे हैं इल्ज़ाम झूठे सभी-गजल

212 212 212 212

अब नए फूल डालों पे आने लगे

और' भ्रमर फिर ख़ुशी से हैं गाने लगे।

पत्थरों पे हैं इल्जाम झूठे सभी

राही के ही कदम डगमगाने लगे।

रहबरी तीरगी की रहे कर ते जो

अब वो सूरज को दीपक दिखाने लगे।

वादा वो ही किया जो था तुमने कहा

घोषणा क्यों चुनावी बताने लगे।

जिनको सोचा नजर हैं सही रख रहे

गौर कर देखा सारे ही काने लगे।

भैंस बहरी नहीं अब समझ लेगी सब

बीन ये सोच कर फिर बजाने…

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Posted on March 21, 2019 at 11:30am — 2 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 6:46am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय सतविन्द्र कुमार राणा  साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 7:34am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय सतविंदर भाई ये मार्गदर्शन आपके द्वारा ही दिया गया है। हार्दिक आभार ।
At 7:41am on January 27, 2016, Omprakash Kshatriya said…
बहुतबहुत शुक्रिया आप का आदरणीय सतविंदर कुमार जी . आप ने मेरा जन्म दिन याद रख कर मुझे अमूल्य/अतुल्य शुभकामनाएं दी. इस हेतु मैं आप का आजीवन ऋणी रहूंगा .
At 8:46pm on January 11, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
धन्यवाद आदरणीय sushil Sarna जी।आपको भी सपरिवार सादर शुभकामनाएं!
At 6:59pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 7:16pm on December 18, 2015, सतविन्द्र कुमार राणा said…
बहुत बहुत आभार आदरणीयEr Ganesh Jee Bagi सर।
At 7:54pm on December 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

सतविंदर कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:59am on October 2, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई सतविंदरजी, 

आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपको मेरी विवेचना तोषकारी लगी है.

आप किसी आयोजन या इवेण्ट पर अपनी भावनाएँ उसी थ्रेड में पोस्ट किया करें. यदि आपने अपना धन्यवाद ज्ञापन संकलित लघुकथाओं के पोस्ट में ही किया होता या अब भी कर दें तो यह अधिक उचित होगा.

पुनः धन्यवाद, भाईजी

 
 
 

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