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दिनेश कुमार
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  • पुण्डरी। हरियाणा
  • India
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Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"सानी मिसरे का सुझाव उत्तम है ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"'जो काम ही न किया उसका इश्तिहार किया' दो बार 'किया' शब्द आ रहा है ।"
15 hours ago
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"'जो काम ही न किया उसका इश्तिहार किया' इस मिसरे में 'ही' शब्द खटक रहा है,इसे यूँ करें तो:- "जो काम करते नहीं उसका इश्तिहार किया""
15 hours ago
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"बहुत सही सलाह आदरणीय निलेश सर जी। आभार सर।"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"सानी में भी काम को अहले सियासत कर लें सादर "
yesterday
दिनेश कुमार commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जो किताबों ने दिया वो फ़लसफ़ा अपनी जगह.
"मुश्किल रदीफ़ को बहुत सहजता से निभाया है आपने आदरणीय निलेश सर जी।  सभी अशआर बहुत अच्छे लगे। उम्दा ग़ज़ल के लिये हार्दिक बधाई, सर।"
yesterday
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय निलेश सर जी।  मैं वास्तव में ही यही कहना चाह रहा था लेकिन मिसरा नहीं बना पाया ---  जो काम ही न किया उस का इश्तेहार…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"आ. दिनेश जी बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है ..मतले के ऊला में एक सुझाव है ,, देखिये जो काम ही न किया उस  का इश्तेहार किया .ये कौन आया है साहिल से लौट कर प्यासा यहाँ तकाबुल-ए-रदीफ़ की सूरत बन रही है .. वैसे मेरा कोई आग्रह नहीं है ...लेकिन…"
yesterday
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"बहुत बहुत शुक्रिया आ. हर्ष महाजन जी।"
yesterday
Harash Mahajan commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"वाह आ० दिनेश जी बेहद ही खूबसूरत अल्फ़ाज़ से सजी आपकी ये ग़ज़ल पर ढ़ेरों दाद । वसूल पाइयेगा । सादर ।"
yesterday
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय समर सर जी। इनायत आपकी।"
yesterday
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"बहुत बहुत शुक्रिया आ. श्याम नारायण जी। "
yesterday
Samar kabeer commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
yesterday
Shyam Narain Verma commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"बहुत खूब ! इस सुंदर गजल हेतु बधाई स्वीकारें ।"
yesterday
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
"हौसला अफ़ज़ाई के लिए शुक्रिया आपका आ. नीलम जी। "
yesterday
Neelam Upadhyaya commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार
""तमाम अहले-चमन भी सज़ा के भागी हैं अगर उक़ाब ने गोरैया का शिकार किया" आदरणीय दिनेश कुमार जी, बहुत ही उम्दा गजल पर मुबारकबाद ।"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
कैथल हरियाणा
Native Place
कैथल
Profession
अध्यापक

दिनेश कुमार's Blog

ग़ज़ल -- जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया // दिनेश कुमार

1212----1122----1212----112/22

जो काम बस का नहीं, उसका इश्तिहार किया

यही तो काम सियासत ने बार बार किया

तमाम अहले-चमन भी सज़ा के भागी हैं

अगर उक़ाब ने गोरैया का शिकार किया

उन्हें तो शौक़ था वादों पे वादे करने का

और एक हम थे कि वादों पे ए'तिबार किया

ये कौन आया है साहिल से लौट कर प्यासा

ये किसकी प्यास ने दरिया को शर्मसार किया

मुक़ाम उनको ही हासिल हुआ है दुनिया में

जिन्होंने राह की दुश्वारियों को पार किया

जो इसके साथ न चल पाया रह…

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Posted on April 18, 2018 at 9:39am — 15 Comments

ग़ज़ल -- तृष्णाओं के भँवर में फँसा बद-हवास था // दिनेश कुमार

221 - - 2121 - - 1221 - - 212

तृष्णाओं के भँवर में फँसा बद-हवास था

सब कुछ था मेरे पास मगर मैं उदास था

जीवन के मयकदे में कुछ हालत थी यूँ मेरी

होंठों पे प्यास हाथ में खाली गिलास था

हर आदमी के ज़ेह्न में रक़्साँ थी बेकली

दुनियावी ख़्वाहिशात का हर कोई दास था

आह्वान बंद का था सियासत के नाम पर

होगा नहीं वबाल फ़क़त इक क़यास था

भगवे हरे में बँट गया फिर शह्रे-दुश्मनी

चारों तरफ़ इक आलमे-ख़ौफ़ो-हिरास था

तूफ़ाँ में रात जिसका सफ़ीना बचा…

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Posted on April 8, 2018 at 6:25pm — 12 Comments

ग़ज़ल --- असर होता है // दिनेश कुमार

2122--1122--1122--22

.

एक पत्थर पे भी उल्फ़त का असर होता है

दिल मे जज़्बा हो तो दीवार में दर होता है

.

घुप अँधेरे में उजाले की किरण सा जीवन

जो भी जी जाए, वो दुनिया में अमर होता है

.

उसको हालात की गर्मी की भला क्या चिन्ता

जिसकी दहलीज़ पे अनुभव का शजर होता है

.

आपसी प्यार मकीनों में हो, घर तब होगा

दरो-दीवार का ढांचा तो खँडर होता है

.

वो न सह पायेगा इक पल भी हक़ीक़त की तपिश

जिसके ख़्वाबों का महल मोम का घर होता…

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Posted on December 31, 2017 at 1:33pm — 20 Comments

ग़ज़ल -- "इसके आगे बस ख़ुदा का नाम है" / दिनेश कुमार

2122--2122--212

भाग्य तेरे कर्म का परिणाम है

तुझ पे ही निर्भर तेरा अंजाम है

मेरे हमराही को भी ठोकर लगी

मेरे दिल को अब ज़रा आराम है

सिर्फ़ सच की राह पर चलता हूँ मैं

आबला-पाई मेरा इनआ'म है

उसकी मर्ज़ी है अता कुछ भी करे

बस दुआ करना हमारा काम है

शख़्सियत अपनी निखारो मुफ़्त में

मुस्कुराहट का न कोई दाम है

हम फ़क़ीरों की नज़र से देखिये

जिस्म इक मन्दिर है पावन धाम है

हम यथा सम्भव मदद सब की करें

आदमीयत का यही पैग़ाम…

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Posted on December 26, 2017 at 6:46am — 18 Comments

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At 8:41am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
आदरणीय श्री दिनेश कुमार जी सर्वश्रेष्ठ रचना के लिए हार्दिक बधाई।
At 2:19pm on June 18, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय दिनेश जी आपकी रचना को यह सम्मान मिलना ही था इस उपलब्धि पर आपको हार्दिक बधाई

At 1:01pm on June 18, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय दिनेश कुमार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - सर से छप्पर ले गया को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:03pm on February 20, 2015, khursheed khairadi said…

आदरणीय दिनेश जी ,आपकी सक्रियता निर्विवाद रूप से स्वीकार्य है |मेरी ग़ज़लों पर भी आपका स्नेह निरंतर बरसता रहा है |आपको महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है |आपकी उत्कृष्ट रचनाओं ने मंच को साहित्य से परिपूर्ण किया है और आगे भी करती रहेगी |सादर अभिनंदन |

At 1:19pm on February 18, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

AADARNEE DINESH JEE

सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई i सादर i

At 10:53pm on February 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय दिनेश भाई जी "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) चुने जाने पर बहुत बहुत  बधाई स्वीकार करें |

At 9:07pm on February 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
दिनेश कुमार जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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