For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Gurpreet Singh jammu
Share on Facebook MySpace

Gurpreet Singh jammu's Friends

  • santosh khirwadkar
  • MANINDER SINGH
  • बृजमोहन स्वामी 'बैरागी'
  • Ravi Shukla
  • दिनेश कुमार
  • Nilesh Shevgaonkar
  • vijay nikore
  • मिथिलेश वामनकर
 

Gurpreet Singh jammu's Page

Latest Activity

Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"आदरणीय दयाराम मेथानी जी वाह बहुत खूबसूरत गिरह लगाई आपने। मतला थोड़ा अस्पष्ट लग रहा है जी"
May 28
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"वाह आदरणीय सूबे सिंह सुजान जी बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने"
May 28
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"बहुत शुक्रिया आदरणीय dandpani nahak जी"
May 28
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"बहुत शुक्रिया आदरणीय रिचा यादव जी। जी ग़ज़ल में कमियां हैं। शुक्रिया आपने उनकी तरफ इशारा किया। बेहतरी की लिए कोई सुझाव हो तो जरूर बताइएगा जी"
May 28
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"शुक्रिया आदरणीय अमित स्वप्निल जी"
May 28
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"शुक्रिया आदरणीय दयाराम मेथानी जी"
May 28
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"वाह आदरणीय तसदीक अहमद खां जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने। आशकारा, खसलत , इन शब्दों के अर्थ बताने की कृपा करें जी।"
May 28
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"वज्ह होनी चाहिए जीने की उसने इसलियेज़ख़्म भरते ही नया इक दर्द पैदा कर दिया।      वाह वाह आदरणीय सालिक गणवीर जी क्या बात है, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने।    वो न आया मुझसे मिलने........    ये शेर भरती का…"
May 28
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"वाह आदरणीय संजय शुक्ला जी बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने"
May 28
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"उसने क्या कल को मुझे मिलने का वादा कर दियाहाय मेरा आज का दिन कितना लंबा कर दिया मैने बोला चाय में मीठा नहीं है चख के देखउसने चख कर चाय तो क्या कप भी मीठा कर दिया रात जब तन्हा था दिल और हर तरफ सुनसान थीदेख कर मौका तेरी यादों ने हमला कर दिया उम्र…"
May 27
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-143
"वाह वाह आदरणीय अनिल कुमार सिंह जी बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल से मुशायरे की शुरूआत की है आपने। बहुत पसंद आई आपकी ये ग़ज़ल"
May 27
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आदरणीय आज़ी तमाम जी, इस अच्छी ग़ज़ल से मुशायरे का आग़ाज़ करने के लिए मुबारकबाद। आदरणीय नीलेश सर जी से सहमत हूं। देखिए आप ने लिखा हैसोहबतों में आ के तेरी दिन सुहाने हो गएयह लाइन असल में ऐसे होनी चाहिएतेरी सोहबतों में आ के मेरे दिन सुहाने हो गएलेकिन…"
Jan 28
Gurpreet Singh jammu commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उस के नाम पे धोखे खाते रहते हो
"वाह आदरणीय नीलेश सर, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने।"
Dec 31, 2021
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर सर जी। "
Dec 21, 2021
Samar kabeer commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें । 'मेरी आँखों के ख़ित्ते में अक्सर रहती बारिश है' इस मिसरे में उचित लगे तो 'रहती' की जगह "होती" कर लें । ग़ज़ल लिखते समय इस बात का ध्यान रखें कि ग़ज़ल…"
Dec 10, 2021
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी जी"
Dec 10, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
Patiala Punjab
Native Place
India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

Gurpreet Singh jammu's Blog

ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू

22-22-22-22-22-22-22-2

उस लड़की को डेट करूँ ये मेरी पहली ख़्वाहिश है।

और ये ख़्वाहिश पूरी हो जाए बस ये दूजी विश है।

हँसना, शर्माना, भरमाना और फिर ना ना ना करना,

उस लड़की का हर इक नख़रा सचमुच कितना गर्लिश है।

मेरा बांकपना और उसकी मस्ती जब आपस में मिले,

ये जो प्यार हमारा है ये उस पल की पैदाइश है।

मेरे ख़्वाब में आना हो तो छाता लेकर आना तुम,

मेरी आँखों के ख़ित्ते में अक्सर रहती बारिश है।

क्यों न हुई वो मेरी?…

Continue

Posted on December 2, 2021 at 7:39pm — 8 Comments

ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू

22-22-22-22-22-2

तुम कोई पैग़ाम कभी तो भिजवाओ।

वरना मेरे कबूतर वापिस दे जाओ।

जिसको तुमने अपने दिल से भुलाया है,

क्या ये वाजिब है खुद उसको याद आओ ?

मैने कहा जब,तुमने दिल को ज़ख़्म दिया,

वो बोले, कितना गहरा है, दिखलाओ।

जब से तुम बिछड़े हो, खुद से दूर हूं मैं,

प्लीज़ किसी दिन मुझ को मुझ से मिलवाओ।

आंखों में हैं ख्वाब भरे, पर नींद उड़ी,

गर ये प्यार नहीं तो क्या है, समझाओ।

'वो' कब के…

Continue

Posted on November 15, 2021 at 11:30am — 6 Comments

दो ग़ज़लें (2122-1212-22)

1.

शमअ  देखी न रोशनी देखी । 

मैने ता उम्र तीरगी देखी । 

देखा जो आइना तो आंखों में, 

ख़्वाब की लाश तैरती देखी । 

टूटे दिल का हटाया मलबा तो, 

आरज़ू इक दबी पड़ी देखी । 

एक इक पल डरावना सा लगा, 

इतने पास आ के ज़िन्दगी देखी । 

मैने इंसानियत रह ए हक़ पर, 

दो कदम चल के हांफती देखी 

2.

आप ने क्या कभी परी देखी । 

मैने यारो अभी अभी देखी । 

उसकी आँखों में सुब्ह सी…

Continue

Posted on July 14, 2019 at 12:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल

(2122-2122-2122-212)

मुश्किलें कितनी हैं अपने दरमियाँ गिनता रहा ।

बैठ कर मैं राह की दुश्वारियाँ गिनता रहा ।

आँखों में अश्कों का दरिया चढ़ के जब उतरा तो फ़िर,

मैं तो बस ख़्वाबों की डूबी कश्तियाँ गिनता रहा ।

और करता भी तो क्या वो नौजवां बेरोज़गार,

दी हैं कितनी नौकरी कीअरज़ियाँ गिनता रहा ।

राजनेता को न था मतलब किसी इंसान से,

वो तो केवल धोतियाँ और टोपियाँ गिनता रहा ।

वो रहे गिनते मुनाफ़ा कारख़ाने का उधर,…

Continue

Posted on July 8, 2018 at 7:50am — 17 Comments

Comment Wall (3 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 8:13pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी आदाब , बहुत बहुत शुक्रिया
हौसला अफ़जाई का मेरे ग़ज़ल कहने का प्रयास आपको पसंद आया दिल से शुक्रगुज़ार हूँ!
At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय मुसाफिर साहब हार्दिक आभार सादर"
8 minutes ago
मनोज अहसास commented on मनोज अहसास's blog post अहसास की ग़ज़ल:मनोज अहसास
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर प्रणाम कृपा दृष्टि बनाये रखें बहुत बहुत आभार सादर"
8 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"कहते हैं न, धीरे-धीरे रे मना, धीरे सबकुछ होय..  एक समय से इस निर्णय की प्रतीक्षा थी. देर आयद,…"
8 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"वाह। एक बहुत ही उम्दा सृजन विषयांतर्गत। निश्चित रूप से यह एक संस्मरणात्मक शैली की बढ़िया लघुकथा हो…"
11 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"आदाब। आपकी धारदार रोचक शैली और शिल्प में बढ़िया रचना। हार्दिक बधाई जनाब मनन कुमार सिंह जी। आप जैसे…"
11 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"सादर नमस्कार। मेरी जानकारी अनुसार गद्य में 'संस्मरण' सर्वथा एक भिन्न महत्वपूर्ण विधा है…"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"आदाब। हार्दिक स्वागत। पंक्ति इंगित करते हुए कम शब्दों में सारगर्भित समीक्षात्मक टिप्पणी, राय और…"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"आ. भाई नाथ सोनांचली जी, अभिवादन। अच्छी लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
12 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"आपको रचना पर देखना सुखद है।हार्दिक आभार आदरणीया प्राची जी"
14 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"हार्दिक आभार आदरणीय "
14 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"हार्दिक आभार आदरणीय तेज वीर सिंह जी"
14 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-92 (विषय: रोटी)
"ओह आजकल आधुनिक परिवेश में चपातियों का गिन कर बनाया जाना और सबका अलग अलग कमरों में भी खाना अकेले खा…"
14 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service