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Gurpreet Singh
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Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"वो लौट आता है फिर से फ़साद फ़ितनों मे अतीत आदमी का जानवर से निकला था वाह वाह आदरणीय गजेन्द्र जी.. बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है"
9 hours ago
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई आपको"
9 hours ago
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय अशफाक अली जी.. खूबसूरत ग़ज़ल हुओं है..बहुत मुबारकबाद आपको"
9 hours ago
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"वाह आदरणीय मोहम्मद नायाब जी.. बहुत दिलकश ग़ज़ल कही है आपने..मतला, तीसरा,पांचवां और गिरह का शेर खास तौर पर पसंद आए"
9 hours ago
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय रवी शुक्ला जी...आपने जवाब लिया..लेकिन सर जी मैं आखिरी शेर कि बात कर रहा था"
23 hours ago
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह )
"आदरणीय आशुतोष जी,, कोशिश को सराहने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद "
yesterday
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह )
"शुक्रिया आदरणीय सुनील प्रसाद जी,, कोशिश रहेगी आपके कहे मुताबिक लेखनी को निखारने की "
yesterday
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह )
"शुक्रिया आदरणीय अनुराग जी "
yesterday
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह )
"शुक्रिया आदरणीय गिरिराज जी "
yesterday
Gurpreet Singh commented on सुनील प्रसाद(शाहाबादी)'s blog post ग़ज़ल- खता होते होते
"आदरणीय सुनील प्रसाद जी,, इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए आपको बहुत बधाई "
yesterday
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"वाह वाह आदरणीय समर कबीर जी,, आपका अंदाज़ ए बयां ,, क्या बात है,,  सभी अशआर बहुत ही खूबसूरत,,और गिरह भी क्या हट के और शानदार लगाई है आपने,, मक़्ते के ऊला की तक्तीय नहीं कर पा रहा हूँ सर जी "
yesterday
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय रवि सर जी,, बहुत शानदार ग़ज़ल हुई है,,, सभी अशआर अच्छे लगे,, गिरह बहुत पसंद ै "
yesterday
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय मनीष तनहा जी,, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है "
yesterday
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी,, इस अच्छी ग़ज़ल के लिए आपको बधाई "
yesterday
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"वाह बहुत अच्छी ग़ज़ल आदरणीय लक्षमण धामी जी "
yesterday
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"वाह वाह आदरणीय साजिद हाश्मी जी ,, क्या ही शानदार  ग़ज़ल कही है ,आपने,  वाक़ई मज़ा आ गया "
yesterday

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India
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Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

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ग़ज़ल --इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह )

(2122-2122-2122-212)

पहले सूरज सा तपें खुद को ज़रा रोशन करें

फिर थमें मत फिर किसी को चाँद सा रोशन करें।

ये नहीं, कोई दिया बस इक दफ़ा रोशन करें

गर करें, बुझने पे उसको बारहा रोशन करें।

मेरी भी वो ही तमन्ना है जो सारे शह्र की

आप मेरे घर में आएं घर मेरा रोशन करें।

सामने है इक चराग़ और आप के हाथों में शमअ

आप किस उलझन में हैं जी?क्या हुआ? रोशन करें!

तीरगी के हैं नुमाइंदे सभी इस शह्र में

कौन है…

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Posted on May 23, 2017 at 10:04am — 22 Comments

ग़ज़ल (22-22-22-22-22-22-22-2)

 

22   22   22   22   22   22   22   2



दिल के तख़्त पे हाए हमने किस ज़ालिम को बिठा लिया 

दिल की बस्ती को ही उजाड़ा उसने ऐसा काम किया।

 

'लुटे हुए अरमानों को वापिस लाऊंगा' बोला था  

लेकिन जो था पास हमारे वो भी हमसे छीन लिया।

 

अब कहता है, इश्क़ में सब आशिक़ ऐसा ही करते हैं 

मैंने भी गर झूठे वादे किए तो कोई पाप किया।

 

कितनी बार रकीबों ने अरमानों के सर काटे हैं 

और वो बस इतना कहते हैं बुरा किया भई बुरा…

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Posted on May 5, 2017 at 11:00am — 17 Comments

तरही ग़ज़ल (212-212-212-212)

(212-212-212-212)

मेरे सुर से तेरा सुर मिलाना हुआ

और जीवन मेरा इक तराना हुआ ॥



मैने देखी है इक चलती फ़िरती ग़ज़ल

है मिजाज इस लिए शायराना हुआ ॥



आइए हमनशी बैठिए पलकों पर

ये कहें  ख्वाब में कैसे आना हुआ ॥



थी दवा तो वही काम तब कर गई

जब तेरा अपने हाथों पिलाना हुआ ॥



वो भी लगने लगे अब मुझे अपने से

"जब से गैरों के घर आना जाना हुआ ॥"



हज़्म कैसे करेंगे मेरी ये ग़ज़ल

वो जो खाते हैं बारीक छाना हुआ ॥



देख के…

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Posted on May 5, 2017 at 10:47am — 24 Comments

ग़ज़ल (12122-12122-12122-12122)

न बैठो इतने करीब मेरे कहीं मेरा दिल मचल न जाए

अब इतनी भी दूर तो न जाओ ये जान मेरी निकल न जाए ।।

 

जो बर्फ़ अरमानों पर जमी है तेरी तपिश से पिघल न जाए

पिघल गई गर तो मेरी आँखों की झील भर के उछल न जाए ।।

 

बड़ा ही शातिर ये वक़्त है फिर नई कोई चाल चल न जाए

मिलन से पहले घड़ी विरह की मिलन का लम्हा निगल न जाए ।।

 

तेरी छुअन से हुई वो जुम्बिश की दिल की धड़कन बिखर गई है

 न छूना मुझ को सनम दुबारा ये साँस जब तक सँभल न जाए…

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Posted on April 18, 2017 at 10:50am — 14 Comments

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At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
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नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
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