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Gurpreet Singh
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Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"वाह वाह आदरणीय आसिफ़  ज़ैदी जी , , बहुत ही शानदार ग़ज़ल कही आपने । मतला बेहद पसंद आया । बहुत बहुत मुबारकबाद आपको "
Jan 25
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"आदरणीय नादिर खान जी , वाह वाह बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है ।  बधाई स्वीकर करें "
Jan 25
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"लिल्लाह अब तो ऐसी सज़ाएँ मुझे न दोजो ख़्वाब सारी रात जगाएँ मुझे न  इतने सितम हुए हैं यहाँ इसकी आड़ मेंहर शख़्स कह रहा है वफ़ाएँ मुझे न दो बढ़ने लगेगा यूँ तो मरज़ और भी मेरामैं हूँ मरीज़-ए-इश्क़ दवाएँ मुझे न दो वाह वाह आदरणीय समर सर जी , बहतरीन अशआर…"
Jan 25
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"वाह वाह आदरणीय महेन्द्र कुमार जी , , बहुत खूबसरत ग़ज़ल कही आपने इस बार भी । बधाई स्वीकार करें ।  ' पर कब कहा मैंने कि जफ़ाएँ मुझे न दो'      इस मिसरे में ' मैने ' को शायद (12) के वज़न पर लेना सही नहीं हो "
Jan 25
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-103
"जब दर्दे दिल दिया है दवाएँ मुझे न दो।अब और ज़िन्दगी की दुआएँ मुझे न दो।।   वाह वाह आदरणीय अशफ़ाक अली जी , बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है , , मुबारकबाद "
Jan 25
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय समर सर जी , बहुत बहुत शुक्रिया । आप के सुझावों से शेर बहुत बेहतर हो गए हैं जी ।  बहुत बहुत धन्यवाद "
Dec 28, 2018
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"हौसला अफज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय शिज्जू शकूर जी "
Dec 28, 2018
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आपका तहे दिल से शुक्रिया आदरणीय Md. anis sheikh जी "
Dec 28, 2018
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"शुक्रिया आदरणीय अजय गुप्ता जी "
Dec 28, 2018
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"उसको देखा है बदलते रंग गिरगिट की तरह ।आदमी को देखिए कितना सयाना बन गया ।। नफरतों के दौर में फेंके गए पत्थर बहुत ।जोड़ कर मेरा भी यारो आशियाना बन गया ।। वाह वाह आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी ,  बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही आपने । बधाई स्वीकर करें…"
Dec 28, 2018
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय मिर्ज़ा जावेद बेग़ जी , इस उम्दा ग़ज़ल के लिए बहुत दाद और मुबारकबाद आपको । "
Dec 28, 2018
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय पंकज कुमार जी ,  बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही आपने ।  बधाई स्वीकार करें । "
Dec 28, 2018
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी । छोटी और दमदार ग़ज़ल कही आपने । वाह वाह बहुत बढ़िया ग़ज़ल "
Dec 28, 2018
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय समर सर जी , उम्दा ग़ज़ल कही आपने !  हमेशा की तरह मुशायरे को चार चाँद लगा दिए आपने । "
Dec 28, 2018
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"इस में गिरती हर नदी थी मीठे पानी की अगरतो बताओ किस तरह सागर ये खारा बन गया वाह वाह आदरणीय महेंद्र कुमार जी , बहुत ही खूबसरत ग़ज़ल कही है आपने । मुबारकबाद "
Dec 28, 2018
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"वाह आदरणीय अशफ़ाक अली जी,  बहुत अच्छी ग़ज़ल से मुशायरे का आगाज़ किया है आपने। बहुत बहुत मुबारकबाद "
Dec 28, 2018

Profile Information

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Male
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Patiala Punjab
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India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

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ग़ज़ल

(2122-2122-2122-212)

मुश्किलें कितनी हैं अपने दरमियाँ गिनता रहा ।

बैठ कर मैं राह की दुश्वारियाँ गिनता रहा ।

आँखों में अश्कों का दरिया चढ़ के जब उतरा तो फ़िर,

मैं तो बस ख़्वाबों की डूबी कश्तियाँ गिनता रहा ।

और करता भी तो क्या वो नौजवां बेरोज़गार,

दी हैं कितनी नौकरी कीअरज़ियाँ गिनता रहा ।

राजनेता को न था मतलब किसी इंसान से,

वो तो केवल धोतियाँ और टोपियाँ गिनता रहा ।

वो रहे गिनते मुनाफ़ा कारख़ाने का उधर,…

Continue

Posted on July 8, 2018 at 7:50am — 17 Comments

(ग़ज़ल - इस्लाह के लिए) अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ -(गुरप्रीत सिंह)

22-22-22-22-22-2



अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ।

अपने आँसू ख़ुद ही पोंछा करता हूँ।



देर तलक आईना देखा करता हूँ।

जाने उसमें किसको ढूँढा करता हूँ।



दिल में दर्द उठे तो फ़िर क्या करता हूँ?

बस उसकी तस्वीर से शिक्वा करता हूँ।



क्या वो अब भी याद मुझे करता होगा?

ख़ुद से ऐसी बातें पूछा करता हूँ।



एक न इक दिन पत्थर पिघलेगा पगले!

ये कह के दिल को बहलाया करता हूँ।



शाम ढले वो तोड़ दिया करता हूँ मैं,

सुब्ह जो अक्सर ख़ुद… Continue

Posted on November 4, 2017 at 11:30am — 12 Comments

तरही ग़ज़ल (पहले ये बतला दो उसने छुप कर तीर चलाए तो)- गुरप्रीत सिंह

लाख करे कोशिश सोने की फ़िर भी नींद न आए तो।

एक अधूरा ख़्वाब किसी को सारी रात जगाए तो ।



तुम तो हौले से 'ना' कह के अपने रस्ते चल दोगे,

लेकिन किसी का अम्बर टूटे और धरती फट जाए तो ।



हाँ मैं तेरे ज़ुल्म के बारे में न ज़ुबाँ से बोलूँगा,

पर क्या होगा गर महफ़िल में आँख मेरी भर आए तो ।



फ़िर बतलाना सीने ऊपर वार बचाना है कैसे,

पहले ये बतला दो उसने छुप कर तीर चलाए तो ।



वो गर नज़रों से ही छू ले तो दिल धक धक करने लगे,

जाने क्या हो गर वो सचमुच आकर… Continue

Posted on November 2, 2017 at 1:30pm — 9 Comments

ग़ज़ल --इस्लाह के लिए

      (122-122-122-12)

रहे हम तो नादां ये क्या कर चले

कि दौर ए जफ़ा में वफ़ा कर चले।

वो तूफ़ान के जैसे आ कर चले

मेरा आशियाना फ़ना कर चले।

रक़ीबों की तारीफ़ की इस क़दर

कि चहरा मेरा ज़र्द सा कर चले'

कहीं जाग जाएँ न इस ख़ौफ़ से

हम आँखों में सपने सुला कर चले

ज़मीं हमको बुज़दिल का ताना न दे

तो फिर हम ये नज़रें उठा कर चले।

तड़पते रहे अधजले कुछ हरूफ़

वो जब मेरे खत को जला कर…

Continue

Posted on August 16, 2017 at 4:30pm — 13 Comments

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At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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