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Gurpreet Singh
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Gurpreet Singh commented on Samar kabeer's blog post जनाब निलेश 'नूर' की ज़मीन में ग़ज़ल नम्बर 2 (कुछ नये क़वाफ़ी के साथ)
"आदरणीय समर सर जी , इस ज़मीन में आपकी यह दूसरी ग़ज़ल भी बेहतरीन रही ,, मक़्ता बेहद पसंद आया"
Jul 13
Gurpreet Singh commented on rajesh kumari's blog post हाशिये पर आपकी दस्तार है कुछ कीजिये (ग़ज़ल राज)
"आदरणीया राजेश जी ,, वाह , बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल ,, सभी अशआर बढ़िया ,, मकता ख़ास तौर पर बहुत पसंद आया"
Jul 13
Gurpreet Singh commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"बहुत खूब आदरणीय मनोज अहसास जी ,, बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही आपने"
Jul 13
Gurpreet Singh commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- ख़ुद-परस्ती का दायरा क्या था / दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश जी ,, बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई है,,बधाई स्वीकार करें"
Jul 13
vijay nikore commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल
"वाह, सच मज़ा आ गया आपकी गज़ल पड़ कर। हार्दिक बधाई।"
Jul 12
Gurpreet Singh commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय आलोक रावत जी , पहली बार इस मंच पर आपकी ये ग़ज़ल पढ़ी , और निश्चित ही बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है। और हाँ  इस्लाह तो उस्ताद ही करेंगे , मैं तो खुद एक अदना सा विद्यार्थी हूँ ग़ज़ल का। जो प्रश्न मन उठते है उन पर आपस में बातचीत से सीखने की कोशिश रहती है।…"
Jul 11
Gurpreet Singh commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय आलोक रावत जी , आपकी इस मंच पर शायद ये पहली ग़ज़ल है और निश्चित ही बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है। और हाँ मैंने कोई इस्लाह नहीं की इस पर , इस्लाह तो उस्ताद ही करेंगे , मैं तो खुद एक अदना सा विद्यार्थी हूँ ग़ज़ल का। जो प्रश्न मन उठते है उन पर आपस में बातचीत…"
Jul 11
Ajay Tiwari commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय गुरप्रीत जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. "
Jul 11
Gurpreet Singh commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय आलोक रावत जी , नमस्कार , बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने ,इसके लिए बहुत बहुत बधाई आपको। ये शेर तो बेहद पसंद आया ज़रा हम भी तो देखें धार उन क़ातिल निगाहों कीसुना है वो इसी ख़ंजर से सबकी जान लेते हैं मंच के नियमों के मुताबिक ग़ज़ल की बह्र लिखना भी…"
Jul 10
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल
"शुक्रिया नीलेश सर जी ...इस ज़मीन पर आपकी और समर सर जी की बेहतरीन गजलें पढ़ कर ही ये ग़ज़ल कहने की प्रेरणा मिली "
Jul 10
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल
"शुक्रिया आदरणीय सुशील सरना जी ..आपको कोशिश पसंद आई , अच्छा लगा "
Jul 10
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल
"shukriya aadarniya . neelam upadhyaya ji "
Jul 10
Nilesh Shevgaonkar commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल
"आ. गुरप्रीत जी,आप का इंतज़ार था. आप की ग़ज़ल का अंदाज़ आकर्षित करता है,,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है.. बधाई स्वीकार करें "
Jul 10
Sushil Sarna commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल
"आँखों में अश्कों का दरिया चढ़ के जब उतरा तो फ़िर, मैं तो बस ख़्वाबों की डूबी कश्तियाँ गिनता रहा । ... वाह आदरणीय बहुत खूबसूरत ग़ज़ल बनी है। हार्दिक बधाई।"
Jul 9
Neelam Upadhyaya commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय  गुरप्रीत सिंह जी, खूबसूरत ग़ज़ल की पेशकश के लिए मुबारकबाद ।  "
Jul 9
Gurpreet Singh commented on राज लाली बटाला's blog post आप पर किस की मिह्ऱबानी है
"बहुत अच्छी ग़ज़ल है आ.राज लाली बटाला जी। वधाई कबूल करो जी।"
Jul 9

Profile Information

Gender
Male
City State
Patiala Punjab
Native Place
India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

Gurpreet Singh's Blog

ग़ज़ल

(2122-2122-2122-212)

मुश्किलें कितनी हैं अपने दरमियाँ गिनता रहा ।

बैठ कर मैं राह की दुश्वारियाँ गिनता रहा ।

आँखों में अश्कों का दरिया चढ़ के जब उतरा तो फ़िर,

मैं तो बस ख़्वाबों की डूबी कश्तियाँ गिनता रहा ।

और करता भी तो क्या वो नौजवां बेरोज़गार,

दी हैं कितनी नौकरी कीअरज़ियाँ गिनता रहा ।

राजनेता को न था मतलब किसी इंसान से,

वो तो केवल धोतियाँ और टोपियाँ गिनता रहा ।

वो रहे गिनते मुनाफ़ा कारख़ाने का उधर,…

Continue

Posted on July 8, 2018 at 7:50am — 17 Comments

(ग़ज़ल - इस्लाह के लिए) अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ -(गुरप्रीत सिंह)

22-22-22-22-22-2



अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ।

अपने आँसू ख़ुद ही पोंछा करता हूँ।



देर तलक आईना देखा करता हूँ।

जाने उसमें किसको ढूँढा करता हूँ।



दिल में दर्द उठे तो फ़िर क्या करता हूँ?

बस उसकी तस्वीर से शिक्वा करता हूँ।



क्या वो अब भी याद मुझे करता होगा?

ख़ुद से ऐसी बातें पूछा करता हूँ।



एक न इक दिन पत्थर पिघलेगा पगले!

ये कह के दिल को बहलाया करता हूँ।



शाम ढले वो तोड़ दिया करता हूँ मैं,

सुब्ह जो अक्सर ख़ुद… Continue

Posted on November 4, 2017 at 11:30am — 12 Comments

तरही ग़ज़ल (पहले ये बतला दो उसने छुप कर तीर चलाए तो)- गुरप्रीत सिंह

लाख करे कोशिश सोने की फ़िर भी नींद न आए तो।

एक अधूरा ख़्वाब किसी को सारी रात जगाए तो ।



तुम तो हौले से 'ना' कह के अपने रस्ते चल दोगे,

लेकिन किसी का अम्बर टूटे और धरती फट जाए तो ।



हाँ मैं तेरे ज़ुल्म के बारे में न ज़ुबाँ से बोलूँगा,

पर क्या होगा गर महफ़िल में आँख मेरी भर आए तो ।



फ़िर बतलाना सीने ऊपर वार बचाना है कैसे,

पहले ये बतला दो उसने छुप कर तीर चलाए तो ।



वो गर नज़रों से ही छू ले तो दिल धक धक करने लगे,

जाने क्या हो गर वो सचमुच आकर… Continue

Posted on November 2, 2017 at 1:30pm — 9 Comments

ग़ज़ल --इस्लाह के लिए

      (122-122-122-12)

रहे हम तो नादां ये क्या कर चले

कि दौर ए जफ़ा में वफ़ा कर चले।

वो तूफ़ान के जैसे आ कर चले

मेरा आशियाना फ़ना कर चले।

रक़ीबों की तारीफ़ की इस क़दर

कि चहरा मेरा ज़र्द सा कर चले'

कहीं जाग जाएँ न इस ख़ौफ़ से

हम आँखों में सपने सुला कर चले

ज़मीं हमको बुज़दिल का ताना न दे

तो फिर हम ये नज़रें उठा कर चले।

तड़पते रहे अधजले कुछ हरूफ़

वो जब मेरे खत को जला कर…

Continue

Posted on August 16, 2017 at 4:30pm — 13 Comments

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At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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