For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")


सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
  • भोपाल, मध्यप्रदेश
  • India
Share

MWonline.in

Loading… Loading feed

मिथिलेश वामनकर's Discussions

ओबीओ परिवार, भोपाल की मासिक साहित्यिक संगोष्ठी : एक रिपोर्ट
7 Replies

ओबीओ परिवार, भोपाल की मासिक साहित्यिक संगोष्ठी : एक रिपोर्ट दिनांक 13 मई 2017 को…Continue

Started this discussion. Last reply by Ravi Prabhakar May 24.

ओबीओ भोपाल की त्रैमासिक साहित्यिक संगोष्ठी (16 अप्रैल 2017)
4 Replies

ओबीओ भोपाल की त्रैमासिक साहित्यिक संगोष्ठी(16 अप्रैल 2017)दिनांक 16 अप्रैल 2017 को ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार, भोपाल के चेप्टर की प्रथम त्रैमासिक साहित्यिक संगोष्ठी, दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के शिरढोणकर सभागार में आयोजित हुई। जिसमें…Continue

Started this discussion. Last reply by KALPANA BHATT May 11.

ओबीओ मासिक साहित्यिक-गोष्ठी (भोपाल) : एक रिपोर्ट (मार्च 2017)
4 Replies

ओबीओ मासिक साहित्यिक-गोष्ठी (भोपाल) : एक रिपोर्ट (मार्च 2017) आज दिनांक 04 मार्च 2017 को आदरणीय हरिवल्लभ शर्मा जी एवं आदरणीया सीमा शर्मा जी के निवास रीगल टाउन, अवधपुरी, भोपाल में ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार सदस्यों की साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया…Continue

Started this discussion. Last reply by Dr Ashutosh Mishra Mar 6.

ओबीओ सदस्यों की भोपाल में बैठक व काव्य-गोष्ठी : एक रिपोर्ट - 26 फरवरी 2017
12 Replies

ओबीओ सदस्यों की भोपाल में बैठक व काव्य-गोष्ठी : एक रिपोर्ट आज दिनांक 26 फरवरी 2017 को आदरणीय तिलकराज कपूर जी के निवास साकेत नगर भोपाल में ओपन बुक्स ऑनलाइन ओबीओ सदस्यों की बैठक एवं काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया. बैठक का विषय आगामी माहों में भोपाल में…Continue

Started this discussion. Last reply by मिथिलेश वामनकर Mar 2.

"ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-76 में प्रस्तुत एवं स्वीकृत हुई रचनाओं का संकलन
18 Replies

श्रद्धेय सुधीजनो !"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-76 जोकि दिनांक 11 फरवरी 2017, दिन शनिवार को समाप्त हुआ, के दौरान प्रस्तुत एवं स्वीकृत हुई रचनाओं को संकलित कर प्रस्तुत किया जा रहा है.इस बार के आयोजन का विषय था – "झुग्गियाँ". पूरा प्रयास किया गया है, कि…Continue

Started this discussion. Last reply by सुरेश कुमार 'कल्याण' Apr 8.

भोपाल में ओबीओ सदस्यों की साहित्य संध्या : एक रिपोर्ट
19 Replies

भोपाल में ओबीओ सदस्यों की साहित्य संध्या : एक रिपोर्ट आज दिनांक 29 जनवरी 2017 को हमारे निवास बागमुगलिया भोपाल में ओपन बुक्स ऑनलाइन ओबीओ सदस्यों की साहित्य संध्या का आयोजन किया गया. जिसकी अध्यक्षता मशहूर शायर जनाब ज़हीर कुरैशी जी द्वारा की गई.…Continue

Started this discussion. Last reply by शिज्जु "शकूर" Feb 20.

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-75 (डायमण्ड जुबली अंक) में प्रस्तुत रचनाएँ
56 Replies

श्रद्धेय सुधीजनो !"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-75 (डायमण्ड जुबली अंक) जोकि दिनांक 14 जनवरी 2017 को समाप्त हुआ, के दौरान प्रस्तुत एवं स्वीकृत हुई रचनाओं को संकलित कर प्रस्तुत किया जा रहा है.इस बार के आयोजन का विषय था – "किसान". पूरा प्रयास किया गया…Continue

Started this discussion. Last reply by मिथिलेश वामनकर Jan 26.

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-74 में स्वीकृत रचनाओं का संकलन
26 Replies

श्रद्धेय सुधीजनो !"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-74, जोकि दिनांक 10 दिसम्बर 2016 को समाप्त हुआ, के दौरान प्रस्तुत एवं स्वीकृत हुई रचनाओं को संकलित कर प्रस्तुत किया जा रहा है.इस बार के आयोजन का विषय था – "कतार". पूरा प्रयास किया गया है, कि रचनाकारों की…Continue

Started this discussion. Last reply by मिथिलेश वामनकर Jan 29.

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-73 में प्रस्तुत एवं स्वीकृत रचनाओं का संकलन
10 Replies

श्रद्धेय सुधीजनो !"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-73, जोकि दिनांक 12 नवम्बर 2016 को समाप्त हुआ, के दौरान प्रस्तुत एवं स्वीकृत हुई रचनाओं को संकलित कर प्रस्तुत किया जा रहा है.इस बार के आयोजन का विषय था – "प्रदूषण". पूरा प्रयास किया गया है, कि रचनाकारों…Continue

Started this discussion. Last reply by मिथिलेश वामनकर Nov 23, 2016.

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-72 में प्रस्तुत एवं स्वीकृत रचनाएँ
4 Replies

श्रद्धेय सुधीजनो !"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-72, जोकि दिनांक 15 अक्टूबर 2016 को समाप्त हुआ, के दौरान प्रस्तुत एवं स्वीकृत हुई रचनाओं को संकलित कर प्रस्तुत किया जा रहा है.इस बार के आयोजन का विषय था – "सरहद". पूरा प्रयास किया गया है, कि रचनाकारों की…Continue

Started this discussion. Last reply by मिथिलेश वामनकर Nov 23, 2016.

मिथिलेश वामनकर's Friends

  • Abhishek kumar singh
  • Alok nigam
  • कुमार मुकुल
  • आशीष सिंह ठाकुर 'अकेला'
  • Mirza Hafiz Baig
  • Dr. Arpita.c.raj
  • Kalipad Prasad Mandal
  • स्वाति सोनी 'मानसी'
  • Rajkumar Shrestha
  • Arun Arnaw Khare
  • KALPANA BHATT
  • रामबली गुप्ता
  • MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI
  • motilal
  • रोहिताश्व मिश्रा
 

आपका हार्दिक स्वागत है :: मिथिलेश वामनकर

मेरी रचनाएँ

                                

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

       

http://obo.antarmann.com

-------------

मेरे बारे में

मैं मिथिलेश वामनकर, पेशे से शासकीय सेवक हूं . मेरा जन्म म.प्र. राज्य के बैतूल जिले के गोराखार नामक एक आदिवासी बहुल गाँव में 15 जुलाई 1981 में हुआ. पापा जब बस्तर के स्कूल मास्टर से डिप्टी कलेक्टर बने तो शहर का मुंह देखना नसीब हुआ. इसके बाद पापा के ट्रांसफ़रों में ही मिडिल और हाईस्कूल बीत गये. 

           ये पूरा समय छत्ती्सगढ़ और विशेषकर बस्तर में बीता.  वर्ष 2001 में हम छत्तीसगढ़ छोड़ मध्य-प्रदेश आ गए.  वर्ष 2007 में पी.एस.सी .से चयनित हुआ और मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग में वाणिज्यिक कर अधिकारी के रूप में भोपाल में पदस्थ हुआ।  पदोन्नति पश्चात असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर जबलपुर में पदस्थ हूँ।   वर्ष 2010 में विवाह हुआ । एक पुत्री का पिता बन गया हूँ तो जीवन में एक नया और रोमांचित कर देने वाला अहसास भर गया है. अपनी इस छोटी सी दुनिया में सुखी हूँ ।

-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

http://www.antarmann.com/

-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

o लघुकथा

o नज़्म

 

o दोहे

o माहिया और छंद 

 

o नवगीत / गीत / अतुकांत

o ग़ज़ल

०ग़ज़ल

  1. रंगमंच ये सारा उसका
  2. मैं रैक बना हूँ
  3. तुम भी न बस
  4. लफ्ज़ सजाना पड़ता है
  5. अंततः विदा पाई
  6. ग़ज़लों को भी गीला होते देखा है
  7. जलता रहा रात भर
  8. कभी हाथ तो हिला दे
  9. उन्हें कांटे चुभोने दो
  10. कितनी किसे हिसाब क्या
  11. खबर है ये झूठी सबा चाहता हूँ
  12. मेरा दर्द दिल से निकाल दे
  13. व्यवहार भैयाजी
  14. कुर्बान तो गया
  15. पनिहारियाँ नहीं चलतीं
  16. जिस्म आबशार करे
  17. नया 'परकास' अच्छे दिन
  18. क्यूँ आज हवाओं में?
  19. कुरआन पढ़कर आरती
  20. जाने कैसा फंदा है
  21. होगा तो क्या होगा?
  22. बेटियाँ जो तरक्की करें
  23. कुछ तो कहो, कुछ जवाब दो
  24. दुनिया बिलकुल छोटी है
  25. मेरे रू-ब-रू ही नहीं
  26. इसी तरह से ग़ज़ल हुई है 
  27. बता क्या होगा ?
  28. मसरूफ है दुआ करने
  29. ज़रा सी बात पे फिर आज मुँह फुला आया
  30. नज़र इंसान की घातक हुई क्या?
  31. इस तरह आज हमें होश में आने का नहीं
  32. कभी ये रहा है बेहद, कभी मुख़्तसर रहा है
  33. जरा सा पास आकर देख तो लो
  34. धूप की तकसीम में कुछ तो हुआ है देखना
  35. गुलशन में फिर भौंरा आया, बढ़िया है
  36. दौर बदला है बदल जा ऐ सुखनवर साथ चल 
  37. ये काम बदी वाले, गर अपने नहीं होते
  38. संसार हो गया है, अब अंगहीन जैसे
  39. होंठों पे जिनके दीप जलाने की बात है
  40. नज़र अपनी सितारों पर टिकाने से जरा पहले
  41. ये लॉन एक खफ़ा-सी किताब है कोई
  42. तसव्वुफ़ का है आलम, जिंदगी रोने नहीं देती

  1. बह्र-ए-रमल : हम क्या करेंगे (14 रुक्ऩी)
  2. दीप के हौसले याद आने लगे (16 रुक्ऩी )
  3. सूरजमुखी के पास जा  
  4. हमारा फन नहीं देखा  
  5. कोई कारवां भी दिखा नही
  6. खुदा बोलता है
  7. किसी खामोश बैठी शायरी से
  8. गैर की ग़ज़ल थी तू...
  9. ज़रा सा बाज़ आ जाओ
  10. जमीं को कभी ये इज़ाज़त नहीं है
  11. पुराना- नया क्या ?
  12. अजब बनाया हुआ फरिश्तों
  13. एक मुट्ठी गालियाँ
  14. बाजरे की बालियाँ
  15. आखिर क्यों मैं ऐसा हूँ
  16. जवां परिंदे
  17. रिश्तें है बेतार
  18. छग्गन तेरी खेती तो हरियाई है
  19. पाँव में जंजीर है
  20. ये बम क्या करे
  21. गज़ब का छा रहा हूँ मैं
  22. घी डालना होगा
  23. पानी बना होगा
  24. बूँद भी नहीं मिलती
  25. मैं ही फ़क़त नादान हूँ
  26. कई पत्थर उछाले है
  27. तुलना इक तराजू से
  28. सीधा तीरथ-धाम किया
  29. पागल.! वहाँ से दूर रख
  30. आपकी ज़िद वही पुरानी थी
  31. बस्तर नहीं देखे जाते
  32. जो पढ़ेंगे आप वो साभार है
  33. बिगड़ता है किसी का क्या?
  34. शायरी का हुनर नहीं आता
  35. चलो अपनी सुनाते हैं 
  36. उछाल के बिजली के तार पर
  37. कुछ न कुछ आप करते रहें
  38. आदत टला-टली है
  39. मुम्बईया मजाहिया ग़ज़ल
  40. ताबिश हमेशा पास रखता हूँ
  41. जीवन उजड़ा नक्सल जैसा
  42. काम आप को करना पड़ेगा जी
  43. ख़ुल्द से भी मुहब्बत नहीं रही
  44. समय के साथ बदलेगी
  45. वो बदल जाए खुदारा बस इसी उम्मींद पर
  46. होरी के उसी गोदान जैसा हूँ
  47. नशे में हूँ मैं, मगर फिर भी चेतना ही लगे
  48. पूछते रह गए आप क्या कर चले?
  49.  गुमसुम क्यों नदी का तीर है?
  50. बंदगी जिनका सफीना था, वही पार गए
  51. हरेक बात, करामात कह रहा हूँ मैं
  52. दीप से सजा है घर, जिन्दगी का उत्सव है
  53. मखमली चाँदनी रोज आया करो
  54. तेरे होंठों से जुदा जाम रहा हूँ लेकिन



मिथिलेश वामनकर's Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

Profile Information

Gender
Male
City State
mp
Native Place
betul
Profession
सहायक आयुक्त, म. प्र. वाणिज्यिक कर विभाग
About me
मैं मिथिलेश वामनकर, पेशे से शासकीय सेवक हूं . मेरा जन्म म.प्र. राज्य के बैतूल जिले के गोराखार नामक एक आदिवासी बहुल गाँव में 15 जुलाई 1981 में हुआ. बचपन गाँव की धूल-मिट्टी खेलते और गाँव के एकमात्र प्रायमरी स्कूल में बेंत और तमाचों के बीच बीता. पापा जब बस्तर के स्कूल मास्टर से डिप्टी कलेक्टर बने तो शहर का मुंह देखना नसीब हुआ. इसके बाद पापा के ट्रांसफ़रों में ही मिडिल और हाईस्कूल बीत गये. कविताई का चस्का मुझे पापा से ही लगा। ये पूरा समय छत्ती्सगढ़ और विशेषकर बस्तर में बीता और मैं “छत्तीसगढ़ियां सबले बढ़ियां” बनता रहा. इधर कालेज आया तो बी.एस सी. यानी साइंस की पढ़ाई में मन नहीं लगा और तीन साल की स्नातक डिग्री पंचवर्षीय-कार्यक्रम के तहत पूरी हुई. मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ विभाजन के बाद मुझें भारत-विभाजन का दर्द समझ आया| वर्ष 2001 में हम छत्तीसगढ़ छोड़ मध्य-प्रदेश आ गए. हां…इस दर्मियान एक सॄजनात्मक कार्य अवश्य करता रहा कि एक उपन्यास, बीसियों – कहानियां और सैकड़ों – गज़ले (जिन्हें तब मैं गज़लें समझता था) कवितायें आदि लिख गया और इंटरनॆट का चस्का लगा तो कुछ दिन वेब – डिजाइनिंग भी की. फ़िर दिमाग दूसरी तरफ़ लगा और पी.एस.सी. की तैयारी में लग गया. इस बीच मैंने पी.एस. सी. में वैकल्पिक विषय के रूप में इतिहास और हिंदी साहित्य लिया तो उन्ही विषयों पर आधारित "विजयमित्र" नाम से ब्लॉग बना लिया। आज इस ब्लॉग पर हिट्स की कुल संख्या लगभग 15 लाख से अधिक है। खैर, पी.एस.सी की तैयारी और ब्लॊगिंग साथ-साथ चलती रही। वर्ष 2007 में पी.एस.सी .से चयनित हुआ और मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग में वाणिज्यिक कर अधिकारी के रूप में भोपाल में पदस्थ हुआ। इसी दौरान विभागीय हेल्पलाइन की एक हिंदी में साइट "हेल्पटैक्स" बनाई तो काफी दिनों तक चर्चित रहने का आनंद लेता रहा। पदोन्नति पश्चात असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर जबलपुर के बाद पुनः भोपाल में पदस्थ हूँ। अब शासकीय सेवा के साथ ब्लॊगिंग, गीत, गज़ल, कविता, कहानियां आदि लिख लेता हूं या औपचारिक शब्दों में कहें तो साहित्य सेवा भी कर लेता हूँ. इधर ज़िन्दगी को समझने, उधेड़ने,, बुनने, कुछ पाऊं तो उसे गुनने, अतीत में झाकनें और कल्पनाओं की उड़ान भरने के अलावा कोई खास काम नहीं करता. अभी जबलपुर मे रह रहा हूँ और यही सब करने या न करने का भ्रम पाले बैठा हूँ. वर्ष 2010 में भोपाल में आकस्मिक रूप से घटित एक घटना की तरह प्रेम विवाह किया जिसमे देशी लव स्टोरी के समस्त तत्व समाहित थे। शादी करके एक पुत्री का पिता बन गया हूँ तो जीवन में एक नया और रोमांचित कर देने वाला अहसास भर गया है . पत्नी की खुशियाँ और बेटी की किलकारियां असीम सुख देती है जिससे वास्तव में जीवन की सार्थकता समझ आती है। अपनी इस छोटी सी दुनिया में सुखी हूँ । अतीत की स्मॄतियों के छालों और फ़ूलों में सिमटकर, भविष्य के चिंतन में किसी दरवेश सा वर्तमान को सहेज-संजोकर खुश रहता हूँ. कभी खुद के तो कभी सब के बारे में सोच लेता हूँ । मैं हूँ । मैं ज़िंदा हूँ. …… हम ज़िंदा है। सचमुच हम ज़िंदा है, ये सिद्ध करने की एक और नाकाम कोशिश में लग जाता हूँ. बस इतनी सी बातें है मेरे बारे में। कम से कम अब तक तो खुद को इतना ही समझ पाया हूँ।

मिथिलेश वामनकर's Videos

  • Add Videos
  • View All

Comment Wall (91 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 5:57pm on January 11, 2017, Abhishek kumar singh said…
हार्दिक आभार ओपेन बुक मे शामिल करने के लिए
At 11:10am on December 13, 2016, कुमार मुकुल said…
भाई मिथिलेश जी, बहुत बहुत धन्‍यवाद।
At 6:46pm on September 7, 2016, Arun Arnaw Khare said…

आप सभी का कोटिशः धन्यवाद... आपने मुझे ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में शामिल कर लिया...

At 3:16pm on September 1, 2016, आशीष सिंह ठाकुर 'अकेला' said…

मिथिलेश जी...सर्वप्रथम तो आप सभी का कोटिशः धन्यवाद... आपने मुझे ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में शामिल कर लिया...
मैं इस पर आभार व्यक्त करता हूँ आपका...मैंने मात्रिक गणना आदि कुछ लेख पड़े जो की काफ़ी फायदेमंद है हम सभी के लिए..इस समूह को बनाने एवं इसके सफल संचन हेतु आप बधाई के पात्र हैं.. मैं भी अपनी रचनाएं यहाँ पोस्ट कर अग्रजों का, गुरुजनों का आशीष एवं उनका मार्गदर्शन पाता रहूँ.. यही आशा करता हूँ ...
आपका दिन मंगलमय हो!!!

At 6:19pm on August 30, 2016, Gurpreet Singh said…
जी बहूत बहुत धन्यवाद मिथिलेश ji
At 10:27am on August 29, 2016, Gurpreet Singh said…
आदरणीय मिथिलेश जी. मैं obo का नया सदस्य हूँ.क्या मैं इस मंच पर अपनी तरफ़ से कोइ चर्चा शुरू कर सकता हूँ.जिस में कि मैं गज़ल के बारे में अपने प्रश्न पूछ सकूं और जो सदस्य जवाब देना चाहे वहाँ दें सके. अगर हाँ तो कैसे? या ऐसा ही कुछ और हो सके. Mehrbaani
At 8:07am on August 23, 2016, डा॰ सुरेन्द्र कुमार वर्मा said…

आदरणीय मिथिलेशजी,

सादर वन्दे. क्षमा करें, मैं अंतरजाल और OBO पर नियमित नहीं हूँ और न ही तकनिकी रूप से कुशल हूँ, सीख रहा हूँ. आपकी सद्भावनाओं पर आज दृष्टि पड़ी, आभार व्यक्त न कर पाने का अपराधी और क्षमा प्रार्थी हूँ. वैसे मैंने कभी अपना जन्म दिन मनाया नहीं, क्यूंकि ऐसी ख़ुशी और ग़म मैंने नहीं पाले. आजकल के ये सामान्य शिष्टाचार हैं, मैं इनमे अनाड़ी हूँ पर आपकी शुभकामनाओं हेतु आभार व्यक्त करता हूँ- बहुत विलम्ब हो गया है. कई प्रशंसकों को भी उत्तर नहीं दे पाता...अन्यथा लेते होंगे..मनसा सबको आभार व्यक्त करता हूँ. पुनश्च आभार.

At 8:35pm on August 14, 2016, अलका ललित said…

आदरणीय मिथिलेश वामनकर सर जी,ओ.बी.ओ. परिवार का सदस्य बनने का जो गौरव आप ने मुझे दिया उसके लिये दिल से आभार ,अभी सीखना शुरू किया है हमने, आपके निर्देशन में शायद हम भी कुछ अच्छा लिखना सीख जायें। 

At 4:52pm on July 7, 2016, Dr.Rupendra Kumar Kavi said…

namaskar

At 7:41pm on June 9, 2016, SudhenduOjha said…

आदरणीय मिथिलेश जी,

कह के तो नहीं गया था,

-पर सामान रह गया था

 

समय का ऐसा सैलाब,

-वजूद भी बह गया था

क्या आए हो सोच कर,

-हर चेहरा कह गया था

बाद रोने के यों सोचा,

-घात कई सह गया था

गिरा, मंज़िल से पहले,

-निशाना लह गया होगा

पुरजोर कोशिश में थी हवा,

-मकां ढह गया होगा

तुम आए, खैरमकदम!

-वरक मेरा दह गया होगा?

सादर,

 

मौलिक है, अप्रकाशित भी

सुधेन्दु ओझा

At 8:47am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

उपयोगी जानकारी देने हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार आपका आ.आदरणीय मिथिलेश वामनकर सर जी,अभी यहाँ की जानकारी  पूरी नहीं है,तो आपको जवाब देने में देर हो गई पुनः आभार आपका .

At 9:12am on May 20, 2016,
AMOM
Abha saxena
said…

शुक्रिया  मिथिलेश वामनकर जी ...:)

At 9:15pm on May 7, 2016, Sushil Sarna said…

Resp.Sir I have received the poem through Resp.Er.Ganesh jee,s mail.Thanks for ur kind cooperation.

At 7:51pm on May 3, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी , नमस्कार  ... सर 66 वें लाइव समारोह में मैंने आपको प्रदत्त विषय पर एक अतुकांत रचना उत्सव में सम्मिलित करने हेतु अनुरोध किया था क्योँकि उस दौरान मैं दिल्ली गया हुआ था लेकिन भोपाल उत्सव के कारण वो सम्मिलित न हो सकी। आपसे अनुरोध है कि यदि वो रचना आपके मैसेज बॉक्स में सुरक्षित हो तो कृपया उसे सामान्य पोस्ट के अंतर्गत सम्मिलित करवा दें या मुझे मैसेज बॉक्स में प्रेषित कर दें ताकि मैं उसे पटल पर ला सकूं। आपसे सहयोग का अनुरोध है। धन्यवाद। 

At 9:44pm on April 21, 2016, Dr. Ehsan Azmi said…
मक़बरा का वज़्न है 212/211
At 9:40pm on April 21, 2016, Dr. Ehsan Azmi said…
धन्यवाद मिथीलेश भाई
At 7:08pm on April 21, 2016, Anuj said…

धन्यवाद मिथिलेश जी !

मुझे कुछ चीजे जननी थी . 

जैसे 'मकबरा ' का सही वजन क्या होगा .

अभी के लिए इतना ही .

At 1:16pm on March 23, 2016, raju mirza said…

mithilesh saheb aap ka bahot shukriya mujhey ummed hai k is page k baarey me aap meri puri madad karengey

At 3:21pm on March 7, 2016, Anupriya said…
शुक्रिया मिथलेश जी...अभी सीखना शुरू किया है हमने...गजलों में खास रुची है.. कोशिश रहेगी कि इस बार के तरही मुशायरे में हम भी शिरकत कर पाएं.
At 6:58pm on February 27, 2016, सीमा शर्मा मेरठी said…
वाह वाह्ह बहुत खूब गजल हुई मिथिलेश जी बधाई अआपको
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

SudhenduOjha posted blog posts
29 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post कुण्डलियाँ छंद पर प्रथम प्रयास - निलेश नूर
" धन्यवाद आ. सौरभ सर,विधान की कमियाँ इंगित करेंगे तो जल्दी सीख पाउँगा सादर "
45 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है
"भाई खुर्शीद जी मुग्ध कर दिया आपकी इस शानदार ग़ज़ल ने। मतले से लेकर मक्ते तक हर शैर दमदार है। दिल से…"
48 minutes ago
satish mapatpuri replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"रूपमाला या मदन छंद 24 मात्रायें … 14 / 10 पर यति …. पदान्त गुरु लघु से डाल पर छोटा…"
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"(1 ) कुंडली छन्द    ----------------- (१ ) दाना लाने के लिए ,चिड़ी गई है…"
2 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"इन्द्रवज्रा ऽऽ।    ऽऽ।   ।ऽ।   ऽऽ   रोके हुए दो कड़ियाँ…"
3 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"आपका सान्निध्य हमसभी का संबल है. आयोजन के हीरक जयंती अंक की आपको भी हार्दिक शुभकामनाएँ, आदरणीय…"
8 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ भाईजी छंदोत्सव - 31 [22/10/13] से मेरी भी यात्रा प्रारम्भ हुई थी और आपके साथ यह सफर अब…"
8 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 75 in the group चित्र से काव्य तक
"कुकुभ छंद [मात्रा 16 - 14  पदांत दो गुरुओं…"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on khursheed khairadi's blog post ग़ज़ल -- किसी का कहा मानता ही कहाँ है
"बहुत खूब, आदरणीय खुर्शीद भाई. अव्वल तो मंच पर आपका पुनः स्वागत है. फिर इस गहरी ग़ज़लग़ोई के लिए…"
8 hours ago
Manisha Saxena replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक 27 में स्वीकृत लघुकथाएँ
"भंवर   चलचित्र की भांति शांति की बातें रह रह कर दिमाग में घूम रहीं थीं इतनी सुन्दर व भोली लड़की…"
8 hours ago
KALPANA BHATT commented on KALPANA BHATT's blog post लो आ गया सावन ( कविता)
"Ji Adarniya Giriraj ji prayas karungi is rachna ko sudhar sakun . Sadar"
8 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service