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Mirza Hafiz Baig
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Welcome, Mirza Hafiz Baig!

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TEJ VEER SINGH commented on Mirza Hafiz Baig's blog post दर्द (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय मिर्ज़ा हाफ़िज़ बेग जी।आज की चिकित्सा व्यवस्था पर कटाक्ष करती बेहतरीन लघुकथा।"
1 hour ago
Neelam Upadhyaya commented on Mirza Hafiz Baig's blog post दर्द (लघुकथा)
"आदरणीय मिर्जा हाफिज बेग साहब,  नमस्कार ।  आजकल तो सुपर स्पेशलिटी के नाम पर खुलने वाले अस्पताल फाइव स्टार हॉस्पिटल हैं और इसी स्टेटस की फीस वसूल करते हैं।  अच्छे विषय पर बेहतरीन  लघुकथा  की प्रस्तुति । बधाई स्वीकार करें…"
2 hours ago
Mirza Hafiz Baig posted a blog post

दर्द (लघुकथा)

दर्द फिर उठा है। दर्द बहुत तेज़ है। कहते हैं, दर्द का हद से गुज़र जाना दवा है। ऐ दर्द गुज़र जा आज अपनी हदों से तू। ज़रा मैं भी तो देखूँ तेरा दवा हो जाना।दर्द सचमुच बड़ा बेदर्द है। वह सचमुच बढ़ता जाता है; अपनी हदों को पार करता हुआ। अब नही, अब नही.......। अब बर्दाश्त नही होता। लेकिन दर्द तो बेदर्द है। बढ़ता ही जा रहा है; बर्दाश्त की हदों को पार करता हुआ। अब लगता है, जैसे सिमट आया है एक ही जगह।दिल!आह, दर्द-ए-दिल। सिमट आता है एक ही मुकाम पर। लगता है जैसे दिल किसी शिकंजे में कसा जाता है। दम है कि घुटा जा…See More
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य 2
"बहुत खूब.."
Mar 22
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य
"हार्दिक बधाई.."
Mar 22
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य 2
"जनाब मिर्जा हाफिज जी सादर अभिवादन। पुनः एक बेहतरीन और शशक्त लघुकथा। बहुत बहुत बधाई जनाब। सादर"
Mar 22
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य
"जनाब मिर्जा हाफ़िज़ साहिब सादर अभिवादन। उम्दा लघुकथा लिखी आपने। बहुत बढ़िया लगा। बहुत बहुत बधाई आपको। सादर"
Mar 22
Tasdiq Ahmed Khan commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य
"जनाब मिर्ज़ा हाफ़िज़ साहिब ,उम्दा लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।"
Mar 21
Samar kabeer commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य 2
"जनाब मिर्ज़ा हफ़ीज़ बैग साहिब आदाब,बहुत ख़ूब वाह, शानदार प्रस्तुति,बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 21
Ajay Tiwari commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य 2
"आदरणीय हफ़ीज़ साहब, एक और सशक्त लघुकथा के लिए. हार्दिक बधाई."
Mar 21
Ajay Tiwari commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य
"आदरणीय हफ़ीज़ साहब, इस सशक्त लघुकथा के लिए. हार्दिक बधाई. किस्सागोई की शैली ने इसे अतिरिक्त धार और खूबसूरती दी है. सादर  "
Mar 21
somesh kumar commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य 2
"lghuktha me lekhak ka vishleshn ise km prbhavi krta lgta hai.ise ingit me hona chahie. khani me ye chal skta hai .aap ङ ka pyryog glt kr rhe hain yh pnchm vrn hai ang k rup me bola jata hai kripya  ड़ का pryog करें "
Mar 21
Mirza Hafiz Baig posted blog posts
Mar 21
Samar kabeer commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य
"जनाब मिर्ज़ा हफ़ीज़ बैग साहिब आदाब,बहुत अर्से बाद आपकी रचना के दर्शन हुए,कहाँ थे भाई? बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । मंच पर अपनी सक्रियता बनाये रखें ।"
Mar 20
somesh kumar commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य
"SAAMYIK rajniti pr achch ktaksh hai pr jnta me ashntosh एवं surksha dono का होना विरोधाभास lgta hai. PRVCHNATMK shaili khani ka prbhav km krti hai "
Mar 20
Nilesh Shevgaonkar commented on Mirza Hafiz Baig's blog post युद्ध और साम्राज्य
"बहुत ख़ूब.... शुक्र है महत्मा ने भक्तो कहा... मितरों sssss नहीं ;)सादर "
Mar 20

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai
Native Place
Bhilai
Profession
service at Bhilai Steel Plant (SAIL)

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दर्द (लघुकथा)

दर्द फिर उठा है। दर्द बहुत तेज़ है। कहते हैं, दर्द का हद से गुज़र जाना दवा है। ऐ दर्द गुज़र जा आज अपनी हदों से तू। ज़रा मैं भी तो देखूँ तेरा दवा हो जाना।

दर्द सचमुच बड़ा बेदर्द है। वह सचमुच बढ़ता जाता है; अपनी हदों को पार करता हुआ। अब नही, अब नही.......। अब बर्दाश्त नही होता। लेकिन दर्द तो बेदर्द है। बढ़ता ही जा रहा है; बर्दाश्त की हदों को पार करता हुआ। अब लगता है, जैसे सिमट आया है एक ही जगह।

दिल!

आह, दर्द-ए-दिल। सिमट आता है एक ही मुकाम पर। लगता है जैसे दिल किसी शिकंजे में कसा…

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Posted on July 23, 2018 at 1:00pm — 2 Comments

युद्ध और साम्राज्य 2

पुराने ज़माने की बात है ।

        दो पङोसी देशों मे आपस सहयोग बढने लगा था । कहते हैं कि जब सहयोग बढता है तो परस्पर विश्वास जनम लेता है और विश्वास से प्रेम । प्रेम से मेल जोल बढता है और मेलजोल से खुशहाली आती है । लेकिन खुशहाल प्रजा भलीभांति शासित नही होती । क्योंकि खुशहाल व्यक्ति सम्पन्न होता है और समपन्न ही शक्तिशाली । फिर शक्तिशाली तो शासन ही करता है , उसे शासित नही किया जा सकता । गडरिया तो भेड़ों  के झुंड को ही चराता है , कभी शेरों के झुंड को चराते किसी को देखा गया है क्या ?…

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Posted on March 20, 2018 at 1:00pm — 5 Comments

युद्ध और साम्राज्य

एक राजा के राज्य मे जब प्रजा का असंतोष चरम पर पहुंच गया और साम्राज्य की रक्षा करना असंभव लगने लगा तो वह जंगल मे महात्मा की शरण मे जा पहुंचा ।

       "महात्मा ! विकट परिस्थिति है । उपाय बताएं ।" राजा ने हाथ जोङकर महात्मा से विनती की ।

       "उपाय तो आसान है राजन ।" महात्मा ने कहा "तेरे राज्य की कौनसी सीमा सबसे ज्यादा अशांत है ?"

       "कोई नही ! मेरे तो सभी पङोसी राजाओं से मधुर संबंध है । इससे बाहरी आक्रमण से देश सुरक्षित रहता है ।" राजा ने उत्तर दिया ।

      …

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Posted on March 20, 2018 at 1:00pm — 8 Comments

उल्टी गंगा

ट्राफ़िक पुलिस को देख उसे आईडिया आया । उसने झट अपनी बाईक किनारे लगाई, हेलमेट सिर से उतारकर बाईक के पीछे लटकाया । उस नोट बंदी के मारे ने, धड़धड़ाते हुये बाईक लेजाकर इन्स्पेक्टर के सामने रोकी ।

“सर, मेरा चालान काटिये मै हेल्मेट नही पहना हूं ।“ वह बोला ।

इन्स्पेक्टर ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा । पूछा – “दो सौ रुपये छुट्टे है ?”

उसने इन्कार मे सर हिलाया ।

“ठीक है, जब छुट्टे होंगे तब आना ।“ इन्स्पेक्टर ने कहा ।

“सर, आज ही …”

“ऐसा है बेटा । अपना हेल्मेट सिर पे…

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Posted on November 21, 2016 at 1:09am — 4 Comments

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At 6:19am on November 25, 2016, Sheikh Shahzad Usmani said…
आदाब। आप से मुझे लेखन संबंधी बहुत सी बातें सीखने को मिलेंगीं। शुक्रिया सूची में शामिल करने का मौका देने के लिए।
At 10:43pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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"हार्दिक आभार आदरणीय नीलम उपाध्याय जी।"
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" आदरणीय तेजवीर सिंह जी, अच्छी सन्देश परक लघुकथा की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें । "
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Neelam Upadhyaya commented on TEJ VEER SINGH's blog post सम्मान - लघुकथा –
" आदरणीय तेजवीर सिंह जी, अच्छी सन्देश परक लघुकथा की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें । "
2 hours ago

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