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Dayaram Methani
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"अब तो हर क़ातिल मसीहा बन गया है दोस्तोंख़त्म कर दे जो भरोसा उसका मत सम्मान कर l.........बहुत सही कहा श्रीमान। भूल जाए पिछ्ले वादे और करे वादे नए उसकी फितरत में है धोका उसका मत सम्मान कर l .............आजकल सभी नेता व दलों पर यह बात खरी लगती…"
3 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"पाकर झूठा सम्मानकद बढ़ता ही गयामगर अपनी हीनज़रों में गिरता गया ।  ........आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, अत्यंत सुदर कटाक्ष एवं सत्य।"
9 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी,  प्रोत्साहन हेतु बहुत धन्यवाद एवं आभार।"
12 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
14 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"मुक्तक विषय: सम्मान (1)समय का सम्मान कीजै वरना पछतायेंगे आप, बीते पल को कभी वापस नहीं ला पायेंगे आप, वक्त रुकता नहीं किसी के लिए लाख जतन कीजिये, व्यर्थ गंवाया तो हाथ मलते रह जायेंगे आप। (2) पैसे देकर ही जयकारा लगवाया तो क्या किया, बेगारों से हार…"
10 hours ago
Dayaram Methani commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बड़ें यकीन से कहकर गया है फिर कोई ।खुदा मिलेंगे तुझे दूरियां मिटाने से ।।.........बहुत ही सुंदर भाव भरा शेर। भरम बनाए रखें दोस्ती का दुनिया में ।ये रिश्ते टूट न जाएं यूँ आजमाने से ।।..........जीवन की सच्चाई व्यक्त करता शेर। आदरणीय बहुत अच्छी गज़ल…"
yesterday
Dayaram Methani commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल: आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है
"आदरणीय फूल सिंह जी, प्रोत्साहन देने के लिए बहुत बहुत आभार।"
Thursday
Dayaram Methani commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल: आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है
"आदरणीय राज नवादवी जी, टिप्पणी कर प्रोत्साह देने के लिए आपका बहु बहुत आभार।"
Thursday
PHOOL SINGH commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल: आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है
"अच्छी ग़ज़ल बन पड़ी है बधाई स्वीकारें"
Thursday
राज़ नवादवी commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल: आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है
"आदरणीय दयाराम मेथानी जी, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद. सादर. "
Thursday
Dayaram Methani commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल: आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी,  आपकी टिप्पणी से प्रोत्साहन मिला। आपने जो सुझाव दिया है उस पर अवश्य विचार करुंगा। यदि आप अपना सुझाव आैर अधिक स्पष्ट करें तो मेरे लिए सहायक होगा। बहुत बहुत धन्यवाद। कृपया भविष्य में भी इसी तरह मार्ग दर्शन करते रहें। सादर।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल: आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है
"आ. भाई दयाराम जी, गजल का अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई । दीप अंधेरी डगर में अब जलाता कौन है यह मिसरा लय में नहीं है देखियेगा । शेष शुभ शुभ.."
Thursday
Dayaram Methani posted a blog post

ग़ज़ल: आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है

2122 2122 2122 212 आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है है सभी में दाग दुनिया को बताता कौन हैकाम मजहब का हुआ दंगे कराना आजकल आग दंगों की वतन में अब बुझाता कौन हैआंधियाँ तूफान लाते है तबाही हर जगह दीप अंधेरी डगर में अब जलाता कौन हैदेश में शोषण किसानों का हुआ अब तक बहुत दाल रोटी दो समय उनको दिलाता कौन है बात मेठानी सुनो सबकी सदा तुम ध्यान से भय हमारी जिन्दगी से अब भगाता कौन है( मौलिक एवं अप्रकाशित )- दयाराम मेठानीSee More
Thursday
Dayaram Methani commented on क़मर जौनपुरी's blog post गज़ल -15 (हस्ती ही मिट गई है तेरे इस ग़ुलाम की )
"आदरणीय कमर जौनपुरी जी बहुत अच्छी गज़ल हुई है। ये शेर तो लाजवाब है --- अब ज्ञान बाँटने का है ठेका उन्हें मिलाजो खा रहे हैं मुफ़्त में बिल्कुल हराम की   सुंदर सृजन हेतु बधाई स्वीकार करें।"
Dec 7
Dayaram Methani commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post ओढ़े बुढ़ापा  जी  रहा  बचपन कोई न हो - ( गजल)- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जल जाएँ जिसकी आग से मासूम बच्चियाँडूबा हवस में  इस  तरह  यौवन कोई न हो।५।........अति सुंदर। सामयिक। संसद में उनको  जाने  से  अब  के तो रोकियेकोशिश है जिनकी और अब मंथन कोई न हो।६। .......देश की राजनीति पर हकीकत का…"
Dec 4
Dayaram Methani commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर जी, बहुत बहुत आभार। गज़ल के प्रयास पर आपकी समीक्षा से उत्साहवर्धन हुआ है। आपने जो सुझाव दिये है उनके लिए तहे दिल से आभार।"
Dec 2

Profile Information

Gender
Male
City State
BHILWARA
Native Place
BHILWARA
Profession
journlist and writer
About me
I like to read and write kavita, gazal, short stories and artical.

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ग़ज़ल: आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है

2122 2122 2122 212



आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है

है सभी में दाग दुनिया को बताता कौन है

काम मजहब का हुआ दंगे कराना आजकल

आग दंगों की वतन में अब बुझाता कौन है

आंधियाँ तूफान लाते है तबाही हर जगह

दीप अंधेरी डगर में अब जलाता कौन है

देश में शोषण किसानों का हुआ अब तक बहुत

दाल रोटी दो समय उनको दिलाता कौन है



बात मेठानी सुनो सबकी सदा तुम ध्यान से

भय हमारी जिन्दगी से अब भगाता कौन है

( मौलिक…

Continue

Posted on December 12, 2018 at 10:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल

2122 2122 2122 2122



हैं जो अफसानें पुराने, सब भुलाना चाहता हूँ

इस धरा को स्वर्ग-जैसा ही बनाना चाहता हूँ

देश में अपने सदा सद्भाव फैलाएँ सभी जन

अब सभी दीवार नफरत की गिराना चाहता हूँ

दिल सभी का हो सदा निर्मल नदी-जैसा धरा पर

अब परस्पर प्यार करना ही सिखाना चाहता हूँ

धन कमाऊँगा मगर धोखा न सीखूँगा किसी से

हर कदम अपना पसीना ही बहाना चाहता हूँ

है ये तेरा, है ये मेरा की लड़ाई खत्म हो अब

और खुशियाँ संग सबके…

Continue

Posted on December 1, 2018 at 12:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल

2122  2122  2122  212

याद करे दुनिया तुझे ऐसी निशानी छोड़ जा,

जोश भर दे जो सभी में वो जवानी छोड़ जा।

नाम पर तेरे कभी कोई उदासी हो नहीं,

प्यार से भरपूर कुछ यादें सुहानी छोड़ जा।

देश की खातिर लुटाओ जान अपनी शान से,

हर किसी की आँख में दो बूँद पानी छोड़ जा।

हो भरोसा हर किसी को तेरी बातों पर सदा,

देश हित की प्रेरणा दे वो बयानी छोड़ जा।

मौत आतीे है सभी को देख ‘‘मेठानी’’ यहां,

गर्व हो अपनाें को कुछ ऐसी…

Continue

Posted on January 16, 2015 at 9:55am — 16 Comments

चार मुक्तक

चार मुक्तक

1.

झुकाना पड़े सिर मां को ऐसा कारोबार मत कीजिये,

अपने लहू से जिसने पाला उसे लाचार मत कीजिये,

कर सको तो करो ऐसा काम जगत में कि गर्व हो तुम पर,

कोख मां की हो जाये लज्जित ऐसा व्यवहार मत कीजिये,

2.

बरस बीत जाते है किसी के दिल में जगह पाने में,

एक गलत फहमी देर नहीं लगाती साथ छुड़ाने में,

बहुत नाजुक होती है मानवीय रिश्तों की डोर यहां,

नफरत में देर नहीं लगाते लोग पत्थर उठाने में।

3.

हर बात की अपनी करामात होती है,

कभी ये हंसाती तो…

Continue

Posted on December 2, 2013 at 11:09pm — 8 Comments

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"सार्थक रचना हेतु बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी साहब ......"
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"आदरणीय नादिर खान साहब सादर, प्रदत्त विषय पर दोनों ही क्षणिकाएँ सुंदर रची हैं आपने. हार्दिक बधाई…"
34 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"द्वितीय पेशकश भी बहुत ही उम्दा । हार्दिक बधाई आदरणीय नादिर ख़ान साहब ।"
35 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"समय का सम्मान कीजै वरना पछतायेंगे आप, बीते पल को कभी वापस नहीं ला पायेंगे आप, .......वाह…"
36 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"बहुत ही लाजवाब मुक्तक । हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय दयाराम मेथानी जी ।"
37 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय नादिर खान साहब आपको प्रस्तुत रचना सुन्दर लगी मेरा सृजन कार्य सफल हुआ. आपका अतिशय आभार. सादर."
40 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"हार्दिक आभार आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी ।"
40 minutes ago

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