For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Dayaram Methani
  • Male
  • Bhilwara - rajsthan
  • India
Share

Dayaram Methani's Groups

 

Dayaram Methani's Page

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"धन्यवाद आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"धन्यवाद आदरणीय समर कबीर जी। आपका सुझाव अच्छा है। भविष्य में असका ध्यान रखूंगा।  सादर"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"आभार आदरणीय कल्पना भट्ट जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी। आपकों भी नव वर्ष की बहुत बहुत शंभकामनायें।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"प्रोत्साहन हेतु बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय छोटेलाल सिंह जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"प्रशंसा हेतु धन्यवाद आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय छोटेलाल सिंह जी।"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"तीन मुक्तक(1)मौसम कैसा भी आये जीवन चलता रहता है, भूखा बचपन गन्दी गलियों में पलता रहता है, थोथे नारों का ही घना जंगल है अपना वतन, नेताओं का सुख जनता का दुख बढ़ता रहता है। (2)सुख और दुख का ही संगम है ये जिन्दगी, हौसले बिन लगती दुर्गम है ये ज़िन्दगी,…"
Friday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"एक भाई, भाई को ही मार देमज़हबों का क्या यही पैग़ाम है-------------अति सुंदर।"
Dec 22, 2017
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-86
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, बहुत सुंदर रचना एवं करारा कटाक्ष।"
Dec 9, 2017
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-86
"आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी, प्रशंसा द्वारा प्रोत्साहन के लिये बहुत बहुत आभार। ।"
Dec 9, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
BHILWARA
Native Place
BHILWARA
Profession
journlist and writer
About me
I like to read and write kavita, gazal, short stories and artical.

Dayaram Methani's Blog

ग़ज़ल

ग़ज़ल

2122  2122  2122  212

याद करे दुनिया तुझे ऐसी निशानी छोड़ जा,

जोश भर दे जो सभी में वो जवानी छोड़ जा।

नाम पर तेरे कभी कोई उदासी हो नहीं,

प्यार से भरपूर कुछ यादें सुहानी छोड़ जा।

देश की खातिर लुटाओ जान अपनी शान से,

हर किसी की आँख में दो बूँद पानी छोड़ जा।

हो भरोसा हर किसी को तेरी बातों पर सदा,

देश हित की प्रेरणा दे वो बयानी छोड़ जा।

मौत आतीे है सभी को देख ‘‘मेठानी’’ यहां,

गर्व हो अपनाें को कुछ ऐसी…

Continue

Posted on January 16, 2015 at 9:55am — 16 Comments

चार मुक्तक

चार मुक्तक

1.

झुकाना पड़े सिर मां को ऐसा कारोबार मत कीजिये,

अपने लहू से जिसने पाला उसे लाचार मत कीजिये,

कर सको तो करो ऐसा काम जगत में कि गर्व हो तुम पर,

कोख मां की हो जाये लज्जित ऐसा व्यवहार मत कीजिये,

2.

बरस बीत जाते है किसी के दिल में जगह पाने में,

एक गलत फहमी देर नहीं लगाती साथ छुड़ाने में,

बहुत नाजुक होती है मानवीय रिश्तों की डोर यहां,

नफरत में देर नहीं लगाते लोग पत्थर उठाने में।

3.

हर बात की अपनी करामात होती है,

कभी ये हंसाती तो…

Continue

Posted on December 2, 2013 at 11:09pm — 8 Comments

मुक्तक

1.

जो चाहते हो सब मिलेगा, कोशिश करके तो देख,

अंधेरा मिट जायेगा, एक दीप जला करके तो देख,

आंसू बहाने से कभी मंजिल नहीं है मिला करती,

तू मझधार में अपनी नाव कभी उतार करके तो देख।



2..

करके अहसान किसी पर जताया मत कीजिये,

अपने काम को दुनिया में गिनाया मत कीजिये,

मेरे बिना चलेगा नहीं यहां किसी का काम,

ऐसे विचार दिल में कभी लाया मत कीजिये।

3.

आओ अब अंधविश्वासों को भुला कर देखते है,

इस धरा पर प्रेम की गंगा बहा कर देखते…

Continue

Posted on October 17, 2013 at 12:00am — 13 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

विरह अग्नि में दह-दह कर के

गीत मात्र भार १६ १६ बहला रहा रोज इस दिल को,  किस्से बचपन के कह कर के.तेरी महकी महकी यादें,मैंने रख…See More
8 minutes ago
SALIM RAZA REWA posted a blog post

हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा

221 2121 1221 212 हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया दुश्वारियों को पांव के नीचे दबा दिया - मेरी…See More
8 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल जला गया जो गली से अभी गुजर के मुझे
"वाह लाजबाब अशआर, बेहतरीन गजल के लिए बहुत बहुत बधाई आपको "
9 minutes ago
सतविन्द्र कुमार replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीया राजेश दीदी हार्दिक बधाई स्वीकारें!"
1 hour ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post समय का फेर(लघु कथा)
"शुक्रिया।"
1 hour ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद० सुशील सरना जी ,जब अपनों की  मुबारकबाद मिलती है तो मन मस्तिष्क में नव ऊर्जा का संचार होता…"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद० अफरोज़ साहब , आपकी मुबारकबाद सर आँखों पर बहुत बहुत शुक्रिया आपका ."
2 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय राजेश कुमारी जी इस सम्मान के लिए आपको तहे दिल से मुबारकबाद। ऊपरवाले से प्रार्थना है की वो…"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद० महेंद्र कुमार जी ,आपका तहे दिल से बेहद शुक्रिया ."
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद० समर भाई जी ,आप जैसे विद्वान् उरूज के हस्ताक्षर का आशीर्वाद भी मेरे लिए किसी इनाम से कम नहीं…"
2 hours ago
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post असाधारण आस
"अँधियारे सूने में अब मेरी अनवस्थाएँ गहरी एक दिया आस का फिर भी जलती लो से काँप-काँप है बटोरता…"
2 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद० मोहम्मद आरिफ़ जी ,दिल से बेहद शुक्रगुज़ार हूँ .मेरा नेट आज ही ठीक हुआ .आपने यहाँ मेरी उपलब्धि को…"
2 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service