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Dayaram Methani
  • Male
  • Bhilwara - rajsthan
  • India
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Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय प्रतिभा पांडे जी, आपको मुक्तक पसंद आये ये जान कर अच्छा लगा। प्रोत्साहन हेतु बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार।"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय राजेश कुमारी जी, प्रोत्साहन हेतु बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार।"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय उस्मानी साहब, प्रोत्साहन हेतु बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार।"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय तस्दीक अहमद खां साहब जी, प्रदत्त विषय पर सुंदर सृजन हेतु बधाई। मुखड़े की पंक्ति ...... हैं ज़ात और धरम मुफलिसी बड़ी प्रतिरोध...इस पंक्ति में बड़ी के साथ प्रतिरोध कुछ जम नहीं रहा। यदि उचित लगे तो बड़ी को कई कर लें तो पंक्ति इस प्रकार हो जायेगी…"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी, सुंदर सृजन हेतु बधाई।दिल में गर प्रतिरोध नहीं,फिर कैसे जीवन जीते हैंजुल्म सितम जो सहन करें वो, घूँट जहर का पीते हैं"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' जी, प्रदत्त विषय पर सुंदर सृजन हेतु बधाई।"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय नादिर खान जी, प्रदत्त विषय पर सुंदर सृजन। बधाई स्वीकार करें।प्रतिरोध प्रतिकार भी है मजबूर को मज़बूत बनाने पाखण्ड को दूर भगाने और झूठ को आईना दिखाने का ताकि हावी न हो जाए सच पर .. अति सुंदर।"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय अखिलेश कुमार श्रीवास्तव जी, कटाक्ष करती बहुत सुंदर रचना। बधाई स्वीकार करें।"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी,अति सुंदर सृजन। मधु मालती छंद में देश हित के युग्म अति सुंदर। बधाई स्वीकार करें।"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी, प्रोत्साहन देने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार।"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी,टिप्पणी करके प्रोत्साहन देने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार।"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय डा. छोटेलाल जी, प्रोत्साहन देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार। कृपा दृष्टि बनायें रखें। सादर।"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय समर कबीर साहब, रचना पर टिप्पणी करने एवे सुझाव देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार। जहां तक तुकांतता की बात है तो आदरणीय मैने अती उच्चारण पर तुकांत बनाया टलती, गिरती, बुझती। आपने इसे सही नहीं बताया है तो मैं अवश्य ही इस बारे में विचार कर…"
Jan 12
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"मुक्तकप्रतिरोध (1) मुंह फेर लेने से आपदा टलती नहीं है, प्रतिरोध बिन जुल्म की दीवार गिरती नहीं है, कुँआ किसी के पास चल कर आता नहीं यारों, कुएं के पास जाये बिन प्यास बुझती नहीं है। (2) अन्याय विरुद्ध प्रतिरोध का अधिकार हमारा है, हर जोर जुल्म की टक्कर…"
Jan 11
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"एक दूजे के यहाँ सब ख़ून के प्यासे हुएआज अपने देश का माहौल कैसा बन गया........बहुत सुंदर व सामयिक। बधाई आपको।"
Dec 28, 2018
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय समर कबीर जी, बहुत सुंदर गज़ल है।  सारी दुनिया के लिये वो सिन रसीदा है मगरसामने जब माँ के पहुँचा एक बच्चा बन गया .........वाह ! क्या बात कही। मां के सामने बड़े से बड़ा आदमी भी बच्चा ही होता है। सच्चाई बयान की आपने। मेरे क़दमों में पड़ा…"
Dec 28, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
BHILWARA
Native Place
BHILWARA
Profession
journlist and writer
About me
I like to read and write kavita, gazal, short stories and artical.

Dayaram Methani's Blog

गज़ल नफरत

गज़ल
फेलुन x 4 (16 मात्रा)


नफरत की आग लगाना है
मजहब तो एक बहाना है

खूब लाभ का है ये धंधा
बस इक अफवाह उड़ाना है

हर तरफ खून की है बातें
लाशों का ही नजराना है

धर्म नाम के है दीवाने
जुनून बस खून बहाना है

जला रहे जो अपना ही घर
दर्पण उनको दिखलाना है

शुभ आस करो कुछ ‘‘मेठानी’’
अब नई सुबह को लाना है।

(मौलिक एवं अप्रकाशित)
- दयाराम मेठानी

Posted on December 18, 2018 at 1:51pm — 5 Comments

ग़ज़ल: आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है

2122 2122 2122 212



आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है

है सभी में दाग दुनिया को बताता कौन है

काम मजहब का हुआ दंगे कराना आजकल

आग दंगों की वतन में अब बुझाता कौन है

आंधियाँ तूफान लाते है तबाही हर जगह

दीप अंधेरी डगर में अब जलाता कौन है

देश में शोषण किसानों का हुआ अब तक बहुत

दाल रोटी दो समय उनको दिलाता कौन है



बात मेठानी सुनो सबकी सदा तुम ध्यान से

भय हमारी जिन्दगी से अब भगाता कौन है

( मौलिक…

Continue

Posted on December 12, 2018 at 10:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल

2122 2122 2122 2122



हैं जो अफसानें पुराने, सब भुलाना चाहता हूँ

इस धरा को स्वर्ग-जैसा ही बनाना चाहता हूँ

देश में अपने सदा सद्भाव फैलाएँ सभी जन

अब सभी दीवार नफरत की गिराना चाहता हूँ

दिल सभी का हो सदा निर्मल नदी-जैसा धरा पर

अब परस्पर प्यार करना ही सिखाना चाहता हूँ

धन कमाऊँगा मगर धोखा न सीखूँगा किसी से

हर कदम अपना पसीना ही बहाना चाहता हूँ

है ये तेरा, है ये मेरा की लड़ाई खत्म हो अब

और खुशियाँ संग सबके…

Continue

Posted on December 1, 2018 at 12:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल

ग़ज़ल

2122  2122  2122  212

याद करे दुनिया तुझे ऐसी निशानी छोड़ जा,

जोश भर दे जो सभी में वो जवानी छोड़ जा।

नाम पर तेरे कभी कोई उदासी हो नहीं,

प्यार से भरपूर कुछ यादें सुहानी छोड़ जा।

देश की खातिर लुटाओ जान अपनी शान से,

हर किसी की आँख में दो बूँद पानी छोड़ जा।

हो भरोसा हर किसी को तेरी बातों पर सदा,

देश हित की प्रेरणा दे वो बयानी छोड़ जा।

मौत आतीे है सभी को देख ‘‘मेठानी’’ यहां,

गर्व हो अपनाें को कुछ ऐसी…

Continue

Posted on January 16, 2015 at 9:55am — 16 Comments

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