For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Nilesh Shevgaonkar
  • Male
  • Indore
  • India
Share

Nilesh Shevgaonkar's Friends

  • Subodh Bajpai
  • Hemant kumar
  • Gurpreet Singh
  • Anuj
  • Manoj kumar Ahsaas
  • jaan' gorakhpuri
  • Hari Prakash Dubey
  • harivallabh sharma
  • Amit Kumar "Amit"
  • गिरिराज भंडारी
  • Baidyanath Saarthi
  • Alok Mittal
  • CHANDRA SHEKHAR PANDEY
  • Madan Mohan saxena
  • जितेन्द्र पस्टारिया

Nilesh Shevgaonkar's Groups

 

Nilesh Shevgaonkar's Page

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"आ. नीरज जी,हम तो कबीर जैसे अनपढ़ जुलाहे हैं.... धुन पकडकर कह लेते हैं... किताबें आपको मुबारक़ जिनसे पढ़कर कमेंट डिलीट करने पड़ते हैं...हमारा काम चिट्ठियां लिखना है ... पते याद  रखना कबूतरों की ज़िम्मेदारी है ...वैसे आपके लिखे अरकान (221 2122…"
14 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"आ. नीरज जी,कमेंट्स क्यूँ  डिलीट    कर दिए आपने अपने..जिस में आपने घोषणा की थी कि ऐसी कोई बहर मौजूद नहीं है किसी अच्छी किताब में और आपकी वो गर्वोक्ति जिसमें आपने कहा  कि आप ऐसी कई ग़ज़ल की कक्षाएं पीछे छोड़ आये हैं. ?खैर....अपनी…"
14 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"आ. नीरज जी,आलोचकों और शाइरों में यही फर्क  है ..आप नाम खोजते रहिये  बहर का ..हम उस बहर पर ग़ज़ल  कहते रहेंगे ..मोमिन और इक़बाल ..इन्साफ की डगर पे ...बच्चो दिखाओ चल के ....आश्चर्य है कि आप  ने इस बह्र को नहीं पढ़ा ...//ये अरकान भी गलत…"
15 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"शायद इससे कोई राहत मिले आ. नीरज जी को "
15 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"आ नीरज जी, अरकान दूसरे हों या तीसरे सारे जहाँ से अच्छा की तकतीअ कर के देख लें। सा 2 रे 2 ज 1 हाँ 2/ से 1 अच 2 छा 2// हिन 2 दो 2 स 1 ता 2/ ह 1 मा 2 रा 2 यानी 2212, 122,,, 2212, 122 अब इन्हें किसी भी कॉम्बिनेशन में लिखें, धुन यही रहेगी। वैसे ग़ज़ल की…"
15 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post वादों की बरसात न कर
"आ. बसंत कुमार जी अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई .उससे भीतरघात  न कर...इससे  भीतरघात  न कर (दूर की चीज़ को उससे और क़रीब को इससे)सादर "
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to योगराज प्रभाकर's discussion लघुकथा विधा : तेवर और कलेवर
"बहुत प्रेरक और लाभपरक जानकारी दी आपने आदरणीय साधुवाद "
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"आ. पंकजोम प्रेम जी,आपको मंच पर  पहली बार पढने का अवसर मिला है.ग़ज़ल सिर्फ शब्दों का संयोजन अथवा भावों की मालिका नहीं है. ग़ज़ल में भी बनते कोशिश व्याकरण के नियमों जैसे कर्ता ने कर्म को..आदि का ख़याल रखा जाय तो मिसरे भी बेहतर  होते हैं  …"
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"आ, सतविंदर भाई, थोड़े और चिंतन की आवश्यकता है ग़ज़ल पर। अंतिम मिसरा देख लें, बहर छोड़ रहा है। सादर"
20 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जैसे धुल कर आईना फ़िर चमकीला हो जाता है,
"शुक्रिया आ. रामबली गुप्ता जी "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"मातृभाषा आपकी है ..हर प्रदेश की नहीं.. लोगों पर अपनी पसंद थोपी नहीं जा सकती.. सम्मान पाना है तो ऐसी रचनाएँ रचनी पड़ेंगी कि लोग मजबूर हो जायं पढने के लिए ."
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जैसे धुल कर आईना फ़िर चमकीला हो जाता है,
"आ. नीरज जी,आपकी टिप्पणी न शिल्प पर थी न कथ्य पर... आप  ये बता रहे थे कि आपको क्या पसंद है...और क्या नापसंद.आपके ही अंतिम वाक्य  को माना जाय तो आप जान  गए होंगे कि मैं प्रशंसा का भूखा नहीं हूँ.... मंतव्य समझता हूँ...इसलिए मुझे मीठे और…"
yesterday
Niraj Kumar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जैसे धुल कर आईना फ़िर चमकीला हो जाता है,
"आदरणीय निलेश जी, \\एक बीमारी का इलाज एक ही दवाई से किया जाता है \\ दिक्कत ये है कि आपने जिसे दवा समझ रखा है वह अपने आप में बीमारी है मधुमेह के रोगी को मिठाई से बहुत प्यार होता है . \\आगे भी यही शेर आपको कई बार पढ़ने को मिल सकता है\\ ये शेर मैंने…"
yesterday
रामबली गुप्ता commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जैसे धुल कर आईना फ़िर चमकीला हो जाता है,
"वाह वाह वाह क्या बात है भाई नीलेश नूर जी। बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुई है। हर शैर सवा शेर है। आकाश भर बधाई स्वीकारें। सादर"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on गिरिराज भंडारी's blog post तरही ग़ज़ल - दो पहर की धूप भी अच्छी लगी ( गिरिराज भंडारी )
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. गिरिराज जी,बधाई ...जब किया तो बन्दगी अच्छी लगी.... (बंदगी स्त्र्लिंगी शब्द है .. किया खलल डाल रहा है )जब  भी की तो बन्दगी अच्छी लगी  सादर "
yesterday
Nilesh Shevgaonkar commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"ख़ुदा-ए-सुखन मीर की ग़ज़ल है ...होती है गरचे कहने से यारो पराई बात पर हम से तो थंबे न कभू मुँह पर आई बात.. जाने न तुझ को जो ये तसन्नो तू उस से कर तिस पर भी तो छुपी नहीं रहती बनाई बात.. लग कर तदरौ रह गए दीवार-ए-बाग़ से रफ़्तार की जो तेरी सबा ने चलाई…"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

Nilesh Shevgaonkar's Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

Nilesh Shevgaonkar's Blog

ग़ज़ल नूर की -जैसे धुल कर आईना फ़िर चमकीला हो जाता है,

22/ 22/ 22/ 22/ 22/ 22/ 22/ 2 

.

जैसे धुल कर आईना फ़िर चमकीला हो जाता है,

रो लेता हूँ, रो लेने से मन हल्का हो जाता है.

.

मुश्किल से इक सोच बराबर की दूरी है दोनों में,

लेकिन ख़ुद से मिले हुए को इक अरसा हो जाता है.

.

फोकस पास का हो तो मंज़र दूर का साफ़ नहीं रहता,

मंजिल दुनिया रहती है तो रब धुँधला हो जाता है.

.

मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारे में कोई काम नहीं मेरा

अना कुचल लेता हूँ अपनी तो सजदा हो जाता…

Continue

Posted on September 16, 2017 at 2:30pm — 35 Comments

ग़ज़ल नूर की -दिल ने थोड़ा मलाल रक्खा है

२१२२,१२१२,२२ (११२)

.

दिल ने थोड़ा मलाल रक्खा है

तेरी यादों को पाल रक्खा है.

.

रोज़ मरता हूँ..और मरता हूँ 

फिर भी ख़ुद को सँभाल रक्खा है. 

.

यूँ तो अंजाम जानता हूँ मगर

एक सिक्का उछाल रक्खा है.

.

मैं तेरी शोख़ियाँ पकड़ लूँगा

मैंने आँखों में जाल रक्खा है.

.

तेरे मिलने तलक जुदाई का

फ़ैसला मैंने टाल रक्खा है. 

.

ख़ूब पीता हूँ..छक के पीता हूँ

ख़ुद का कितना ख़याल रक्खा है.

.

और सारा कुसूर अँधेरे का…

Continue

Posted on September 1, 2017 at 11:36am — 29 Comments

ग़ज़ल नूर की - हैरान क्या करेगा कोई मोजज़ा मुझे

२२१/ २१२१/ १२२१/ २१२



हैरान क्या करेगा कोई मोजज़ा मुझे,

दुनिया का हर तमाशा लगे ख़्वाब सा मुझे.

.

हालाँकि ख़ुशबू इल्म-ओ-अदब की नहीं हूँ मैं,

लेकिन बिख़रने का है बहुत तज़रिबा मुझे.

.

इक रोज़ मैं ही तेरे किसी काम आऊँगा,

गरचे तू मानता ही नहीं काम का मुझे.

.

तेरे कहे पे चल पड़ा हूँ आँखें मूँदकर

ठोकर लगे तो मौला मेरे थामना मुझे.

.

ये कौन मेरे हिज्र को करता है और तवील,

जीने की फिर ये कौन दुआ दे गया…

Continue

Posted on August 2, 2017 at 9:37am — 18 Comments

कुण्डलियाँ छंद पर प्रथम प्रयास - निलेश नूर

कुण्डलियाँ छंद पर प्रथम प्रयास 

.

बोझ बढ़ा आवाम पर मगर न आई लाज

लगी लेखनी को अजब भक्तिभाव की खाज.

भक्तिभाव की खाज जो आधी रात जगाये

अपनी बरबादी का ज्ञानी जश्न मनाये. 

व्यापारी का देश में बुरा हुआ है हाल

मौजी निकला घूमने.. देश करे हड़ताल.

.

.

अठरह फी से दिक्कत थी अट्ठाईस से प्यार

बड़े ग़ज़ब के तर्क हैं बड़े ग़ज़ब सरकार.

बड़े ग़ज़ब सरकार लगे जी एस टी प्यारा

भक्ति करेंगे और बनेंगे हम ध्रुव तारा.

पूजन…

Continue

Posted on July 11, 2017 at 5:30pm — 17 Comments

Comment Wall (7 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, Kewal Prasad said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

At 1:14pm on November 6, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय नीलेश भाई , सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिये आपको हार्दिक बधाईयाँ  !!!!!!

At 12:32pm on November 6, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करे | कृपया अपना पता और नाम (जिस नाम से ड्राफ्ट/चेक निर्गत होगा), बैंक खता विवरणी एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर । 


आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

रामबली गुप्ता commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post खुद से मुझ को अलग करो----- ग़ज़ल पंकज मिश्र द्वारा
"हो करते भी तुम याद मुझे, ये हिचकी से कहलाया तो। इस प्रकार करिये। तंकड़ त्रुटि हुई है।"
27 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post खुद से मुझ को अलग करो----- ग़ज़ल पंकज मिश्र द्वारा
"आदरणीय पंकज मिश्र जी मात्रिक बहर पर प्रयास अच्छा है। सादर बधाई स्वीकारें। बताना चाहूँगा कि इस बहर…"
32 minutes ago
Mohammed Arif commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"आदरणीय सतविंद्र कुमार जी आदाब, अच्छा प्रयास । बधाई स्वीकार करें । गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें ।"
48 minutes ago
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र उम्दा । मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी…"
50 minutes ago
Mohammed Arif commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय कालीपद प्रसाद जी आदाब, अच्छा प्रयास मगर गुणीजनों के आने का इंतज़ार करें। हार्दिक बधाई स्वीकार…"
55 minutes ago
Mohammed Arif commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post श्राद्ध.....लघुकथा..../अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीया अलका जी आदाब, आखिर आप इस लघुकथा के बहाने क्या कहना चाहती हैं ?"
1 hour ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post तरही ग़ज़ल
"आदाब और शुक्रिया आदरणीय गिरिराज भंडारी श्रीवास्तव जी "
1 hour ago
Kalipad Prasad Mandal posted a blog post

ग़ज़ल

काफिया : आये ; रदीफ़ :न बनेबहर : ११२२-| ११२२  ११२२  २२/११२      २१२२}तंज़ सुनना तो’ विवशता है’,…See More
1 hour ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post तरही ग़ज़ल
"आदाब और शुक्रिया आदरणीय महम्मद आरिफ साहिब "
1 hour ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post तरही ग़ज़ल
"आदाब और शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहिब "
1 hour ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post तरही ग़ज़ल
"शुक्रिया आदरणीय अफरोज सहर जी "
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
1 hour ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service