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Nilesh Shevgaonkar
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  • Indore
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PHOOL SINGH commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सँभाले थे तूफ़ाँ उमड़ते हुए
"वाह-वाह क्या बात है बहुत ही सूंदर ग़ज़ल, बधाई स्वीकारें"
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सँभाले थे तूफ़ाँ उमड़ते हुए
"आद0 नीलेश भाई जी सादर अभिवादन। बढिया ग़ज़ल कही आपने,,बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 11
सतविन्द्र कुमार राणा commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"आदरणीय नीलेश भाई नमन सादर! उम्दा गजल कही है। बधाई बहुत बहुत"
Nov 8
सतविन्द्र कुमार राणा commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सँभाले थे तूफ़ाँ उमड़ते हुए
"आदरणीय नीलेश भाई जी, उम्दा अशआर निकले हैं। दिली मुबारकबाद"
Nov 8
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"धन्यवाद आ. रवि जी "
Nov 6
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"धन्यवाद आ. मोहम्मद आरिफ साहब "
Nov 6
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"धन्यवाद आ. अजय जी "
Nov 6
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"धन्यवाद आ. छोटेलाल सिंह जी "
Nov 6
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"धन्यवाद आ. तेजवीर जी "
Nov 6
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"शुक्रिया आ. समर सर,बांग्लादेश से भारत आने की आपाधापी में धन्यवाद ज्ञापित करने में देरी  हुई इसका खेद है "
Nov 6
Ravi Shukla commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"आदरणीय निलेश जी, उम्दा ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई. मैं किसी को जोड़ने में घट भी जाऊँ ग़म न हो ज़िन्दगानी के गणित में इतनी नादानी रहे.. इस के लिए अलग से बधाई "
Nov 6
Mohammed Arif commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"आदरणीय निलेश जी आदाब,                    बहुत ही शानदार और धारदार ग़ज़ल । इस ग़ज़ल का हर शे'र मुझे पसंद है । दिली मुबारकबाद कुबूल करें ।"
Nov 4
Ajay Tiwari commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"आदरणीय निलेश जी, उम्दा ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Nov 3
डॉ छोटेलाल सिंह commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"आदरणीय नीलेश नूर साहब बहुत अच्छी गजल लिखने के लिए हार्दिक बधाई"
Nov 3
TEJ VEER SINGH commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"हार्दिक बधाई आदरणीय निलेश जी। बेहतरीन गज़ल। क़त्ल होते वक़्त भी मैं मुस्कुराता ही रहूँ ताकि क़ातिल को मेरे ता-उम्र हैरानी रहे. "
Nov 3
Samar kabeer commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"जनाब निलेश 'नूर' साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । ' क़ाफ़िला यादों का गुज़रे रेगज़ार-ए-दिल से जब आँखों में लाज़िम है सारी रात तुग़्यानी रहे' इस शैर पर अलग से दाद ।"
Nov 3
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"शुक्रिया आ. संतोष दादा "
Nov 3
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"शुक्रिया आ. लक्ष्मण जी "
Nov 3
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"शुक्रिया आ. बसंत जी "
Nov 3
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे
"शुक्रिया आ. राज़ साहब "
Nov 3

Profile Information

Gender
Male
City State
Indore-MP
Native Place
Indore-MP
Profession
Civil Engineer

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Nilesh Shevgaonkar's Blog

ग़ज़ल नूर की- सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे

.

सोचिये फिर डूबने में कितनी आसानी रहे

उनकी आँखों में जो मेरे वास्ते पानी रहे.

.

मैं किसी को जोड़ने में घट भी जाऊँ ग़म न हो

ज़िन्दगानी के गणित में इतनी नादानी रहे.

.

क़त्ल होते वक़्त भी मैं मुस्कुराता ही रहूँ

ताकि क़ातिल को मेरे ता-उम्र हैरानी रहे.

.

क़ाफ़िला यादों का गुज़रे रेगज़ार-ए-दिल से जब

आँखों में लाज़िम है सारी रात तुग़्यानी रहे.

.

क्यूँ भला सोचूँ वो दुश्मन है मेरा या कोई दोस्त

मैं रहूँ…

Continue

Posted on November 2, 2018 at 6:45pm — 29 Comments

ग़ज़ल नूर की- सँभाले थे तूफ़ाँ उमड़ते हुए

सँभाले थे तूफ़ाँ उमड़ते हुए

मुहब्बत से अपनी बिछड़ते हुए.

.

समुन्दर नमाज़ी लगे है कोई

जबीं साहिलों पे रगड़ते हुए.

.

हिमालय सा मानों कोई बोझ है

लगा शर्म से मुझ को गड़ते हुए.

.

“हर इक साँस ने”; उन से कहना ज़रूर  

उन्हें ही पुकारा उखड़ते हुए.  

.

हराना ज़माने को मुश्किल न था  

मगर ख़ुद से हारा मैं लड़ते  हुए.

.

ज़रा देर को शम्स डूबा जो “नूर”

मिले मुझ को जुगनू अकड़ते हुए.

.

निलेश "नूर"

मौलिक/…

Continue

Posted on October 28, 2018 at 10:30am — 21 Comments

ग़ज़ल नूर की - मुझ को कहा था राह में रुकना नहीं कहीं

मुझ को कहा था राह में रुकना नहीं कहीं

सदियों को नाप कर भी मैं पहुँचा नहीं कहीं.

.

ज़ुल्फ़ें पलक दरख़्त सभी इक तिलिस्म हैं

इस रेग़ज़ार-ए-ज़ीस्त में साया नहीं कहीं.

.

तुम क्या गए तमाम नगर अजनबी हुआ

मुद्दत हुई है घर से मैं निकला नहीं कहीं.

.

अँधेर कैसा मच गया सूरज के राज में

जुगनू, चराग़ कोई सितारा नहीं कहीं.

.

खेतों को आस थी कि मिटा देगा तिश्नगी

गरजा फ़क़त जो अब्र वो बरसा नहीं कहीं.

.

ये और बात है कि अदू को चुना गया…

Continue

Posted on October 23, 2018 at 12:00pm — 18 Comments

ग़ज़ल नूर की - रफ़्ता रफ़्ता अपनी मंज़िल से जुदा होते गए

रफ़्ता रफ़्ता अपनी मंज़िल से जुदा होते गए,

राह भटके लोग जिनके रहनुमा होते गए.

.

तज़र्बे मिलते रहे कुछ ज़िन्दगी में बारहा

कुछ तो मंज़िल बन गए कुछ रास्ता होते गए.

.  

चुस्कियाँ ले ले के अक्सर मय हमें पीती रही  

वो नशा होती गयी हम पारसा होते गए.

.

उन चिराग़ों के लिए सूरज ने माँगी है दुआ

सुब्ह तक जलते रहे जो फिर हवा होते गए.

.

ज़िन्दगी की राहों पर जब धूप झुलसाने लगी

पल तुम्हारे साथ जो गुज़रे घटा होते गए.

.

फिर मुहब्बत के सफ़र…

Continue

Posted on August 8, 2018 at 1:46pm — 14 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 8:49pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय नीलेश सर प्रणाम
बहुत शुक्रिया
At 2:21pm on September 16, 2017, Afroz 'sahr' said…
आदरणीय निलेश जी आपने ख़ाकसार की बात की ताईद की बहुत आभार प्रकट करता हूँ !सादर
At 9:50pm on March 3, 2017, Hemant kumar said…
आदरणीय सर प्रणम ! मै ओ बी ओ मे काफीया पढ़ रहा हूं पर पल्ले कुछ भी नही पड़ रहा है ।
सर आपसे विनम्र आग्रह है काफीया निर्धारण पर पुनः प्रकाश डालने की अनुकंपा करें ।सादर..
At 2:37am on June 29, 2014, Adesh Tyagi said…
जनाबे-मोहतरम निलेश शेव्गाँवकर साहब, अल्फ़ाज़े-तहसीन का तहे-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
At 4:47am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)चुने जाने पर आ. नीलेश जी आपको दिली मुबारकबाद !

At 1:45pm on November 7, 2013, केवल प्रसाद 'सत्यम' said…

आ0 नीलेश भाई जी, आपको महीने का सकिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई।  सादर,

At 1:14pm on November 6, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

आदरणीय नीलेश भाई , सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिये आपको हार्दिक बधाईयाँ  !!!!!!

At 12:32pm on November 6, 2013,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करे | कृपया अपना पता और नाम (जिस नाम से ड्राफ्ट/चेक निर्गत होगा), बैंक खता विवरणी एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |

सादर । 


आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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