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Amit Kumar "Amit"
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Ravi Shukla commented on Amit Kumar "Amit"'s blog post गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।
"आदरणीय अमित जी ग़ज़ल की अच्छी कोशिश हुई है दिली मुबारकबाद पेश करता हूं आदरणीय समर कबीर साहब की इस्लाह से यकीनन हम सब को भी फायदा हुआ उसका संज्ञान लीजिये। सादर"
Jan 14
सुचिसंदीप अग्रवालl commented on Amit Kumar "Amit"'s blog post गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।
"अमित भाई, समर कबीर जी के मशवरे के बाद गजल में चार चाँद लग गए हैं। एक एक ग़ज़ल की बारीकियों को देखकर उसकी गलतियों से अवगत कराना और फिर सुधारना सबके बस की बात नहीं होती। कबीर भाई जी की इस निष्ठा और आत्मीयता को नमन करती हूं।"
Jan 9
सुचिसंदीप अग्रवालl commented on Amit Kumar "Amit"'s blog post गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।
"अमित भाई, समर कबीर जी के मशवरे के बाद गजल में चार चाँद लग गए हैं। एक एक ग़ज़ल की बारीकियों को देखकर उसकी गलतियों से अवगत कराना और फिर सुधारना सबके बस की बात नहीं होती। कबीर भाई जी की इस निष्ठा और आत्मीयता को नमन करती हूं।"
Jan 9
Samar kabeer commented on Amit Kumar "Amit"'s blog post गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।
"जनाब अमित कुमार "अमित" जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ' मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी' इस मिसरे में 'मिलुंगा' को "मिलूँगा" कर लें । ' इसे दिलबर के आंचल में जरा…"
Jan 8
Amit Kumar "Amit" posted a blog post

गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।

पिला दे घूंट दो मुझको, ज़रा नजरों से ऐ साकी।। मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी।।१।।अभी तो दिन भी बाकी है ये सूरज ही नहीं डूबा। इसे दिलबर के आंचल में जरा छुप जान दे साकी।।२।।जिसे पूजा किये हरदम जिसे समझा खुदा मैंने। किया बर्बाद मुझको तो उसी इन्सान ने साकी।।३।।मेरा महबूब भी तू है मेरा हमराज भी तू है। वे दुश्मन थे मेरे पक्के जो मेरे साथ थे साकी।।४।।नहीं इससे बड़ी कोई भी अब अपनी तमन्ना है। गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।।५।।यकीनन दर्द मेरा उनको भी महसूस होता है। सभी यूं ही नही पढते…See More
Jan 7
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय मो० आरिफ जी गजल पसंद करने और हौंसलाअफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Dec 29, 2018
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय सुरेंद्र जी गजल पसंद करने और हौंसलाअफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Dec 29, 2018
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आ० अंजलि जी गजल पसंद करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Dec 28, 2018
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय तस्दीक सर गजल पसंद करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Dec 28, 2018
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय समर कबीर साहब इतनी बारीकी से  गजल पर प्रकाश डाल कर उस्तादाना तरीके से गजल की त्रुटियां समझाने के लिए दिल की गहराइयों से धन्यवाद। आपके बताए हुए दोष दूर करने का प्रयास करूंगा। तक़ाबुल-ए-रदीफ़ दोष के विषय में गजल की कक्षा मैं पढ़ लूंगा। वैसे…"
Dec 28, 2018
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय लक्ष्मण भाई जी हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Dec 28, 2018
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय शिज्जू भाई जी हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Dec 28, 2018
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय अजय गुप्ता जी हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद"
Dec 28, 2018
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय लक्ष्मण भाई बहुत ही खूबसूरत गजल हुई बहुत-बहुत बधाइयां"
Dec 28, 2018
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
" आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी उम्दा ग़ज़ल कहने के लिए बहुत-बहुत बधाइयां"
Dec 28, 2018
Amit Kumar "Amit" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-102
"आदरणीय गंगाधर जी अच्छी ग़ज़ल कहने के लिए बधाइयां"
Dec 28, 2018

Profile Information

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Male
City State
Ujhani ,UP
Native Place
Ujhani
Profession
DM QA
About me
Amit

Amit Kumar "Amit"'s Blog

गज़ल - गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से साकी।

पिला दे घूंट दो मुझको, ज़रा नजरों से ऐ साकी।।

मिलुंगा मैं तुझे हर मोड़ पे पहचान ले साकी।।१।।

अभी तो दिन भी बाकी है ये सूरज ही नहीं डूबा।

इसे दिलबर के आंचल में जरा छुप जान दे साकी।।२।।

जिसे पूजा किये हरदम जिसे समझा खुदा मैंने।

किया बर्बाद मुझको तो उसी इन्सान ने साकी।।३।।

मेरा महबूब भी तू है मेरा हमराज भी तू है।

वे दुश्मन थे मेरे पक्के जो मेरे साथ थे साकी।।४।।

नहीं इससे बड़ी कोई भी अब अपनी तमन्ना है।

गमों का नाम हो जाये हमारे नाम से…

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Posted on January 6, 2019 at 10:30pm — 4 Comments

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At 6:50am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीय Amit Kumar साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर

At 5:13pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शीमान अमित कुमार जी नमस्कार
शुक्रिया आपका
At 5:01pm on September 29, 2014, Vivek Jha said…

थैंक्स अमित जी, उस दिन आपसे मिलकर काफी अच्छा लगा 

 
 
 

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