For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मोहन बेगोवाल
  • Male
  • Amritsar
  • India
Share

मोहन बेगोवाल's Friends

  • Amit Kumar "Amit"
  • गिरिराज भंडारी
  • Dr. Swaran J. Omcawr
  • राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'
  • मिथिलेश वामनकर

मोहन बेगोवाल's Groups

 

मोहन बेगोवाल's Page

Latest Activity

मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
" आदरनीय सतविन्द्र जी, बहुत धन्यवाद "
Mar 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
" आदरनीय मनन जी , सुंदर लघुकथा के लिए बहुत बधाई स्वीकार करें "
Mar 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"  आदरनीय तेजवीर जी , कमाल की लघुकथा के लिए बहुत बहुत बधाई हो "
Mar 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदरनीय कनक जी , अच्छी लघुकथा के लिए बधाई हो "
Mar 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदरनीय योगराज जी, आज के समय पर लिखी बहुत ही सुंदर लघुकथा के लिए बधाई हो "
Mar 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदरणीय सर जी,आप जी का बहुत धन्यवाद, सोचता इसको ऐसे कर सकते हैं l ||उस समय साथ मिलकर ही गाँव में इक दूसरे के धर्म स्थलों का निर्माण किया गया था l ||"
Mar 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आप ठीक सोचते होंगे, मगर मेरे गाँव में अभी कुछ जगह जो बहुत अच्छे तरीके से मेरे गाँव के लोगों ने संभाली हुई हैं l"
Mar 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदरणीय उम प्रकाश जी, सुंदर लघुकथा के लिए बधाई हो l "
Mar 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदरणीय बागी जी, बहुत सुंदर लघुकथा के लिए बधाई हो l "
Mar 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"अमानत जब देश का बटवारा हुआ, गाँव की आबादी का बड़ा हिस्सा इस तरफ़ से उस तरफ़ चला गया l मगर उनका पूजा स्थल इधर ही रह गया, जैसे यहाँ आने वालों का उस तरफ़l गाँव की बड़ी मसीत भी, उस दौर की याद दिलाती हुई गाँव के बीच ख़डी है, इस के आस पास ही जाने वालों की बड़ी…"
Mar 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदरणीया बबिता जी, बहुत अच्छे से बुनी लघुकथा के लिए बधाई हो l"
Mar 30
मोहन बेगोवाल posted a blog post

तरही ग़ज़ल

 शख्स उसको भी तो दीवाना समझ बैठे थे हम l जो था अच्छा उस को बेचारा समझ बैठे थे हम l अब न जीतेगा ज़माना भी हमेशा की तरह, जिस तरह का था उसे वैसा समझ बैठे थे हम l गीत गाया था बहारों पर सुनाया था कहाँ, जब ख़िज़ाँ को भी अगर अपना समझ बैठे थे हम l फूल ये बिखरा तो खुशबू सा शजर बनता मिला, "इस ज़मीन ओ आसमां को क्या समझ बैठे थे हम l" ये जहाँ बदला मगर ये जिंदगानी क्यूँ नहीं, झूठ दुनिया जिस कहे सच्चा समझ बैठे थे हम lमौलिक व अप्रकाशित"See More
Mar 29
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरनीय नाहक जी, ग़ज़ल के लिए बधाई हो "
Mar 28
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
" आदरनीय समर जी, गलती के लिए मुआफी चाहता हूँ "
Mar 28
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
" आदरनीय सालिक जी, अच्छी ग़ज़ल के बधाई हो "
Mar 28
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरनीय राज़ जी , बहुत ही सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई हो "
Mar 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical Teacher
About me
Gazalgo , Punjabi Writer

मोहन बेगोवाल's Blog

तरही ग़ज़ल

 शख्स उसको भी तो दीवाना समझ बैठे थे हम l

जो था अच्छा उस को बेचारा समझ बैठे थे हम l



अब न जीतेगा ज़माना भी हमेशा की तरह,

जिस तरह का था उसे वैसा समझ बैठे थे हम l



गीत गाया था बहारों पर सुनाया था कहाँ,

जब ख़िज़ाँ को भी अगर अपना समझ बैठे थे हम l



फूल ये बिखरा तो खुशबू सा शजर बनता मिला,

"इस ज़मीन ओ आसमां को क्या समझ बैठे थे हम l"



ये जहाँ बदला मगर ये जिंदगानी क्यूँ नहीं,

झूठ दुनिया जिस कहे सच्चा समझ बैठे थे हम…

Continue

Posted on February 25, 2020 at 12:00am — 1 Comment

तरही ग़ज़ल

जब अँधेरा ये मिटाने को सितारा निकला l

चाँद पीछे न रहा बन के हमारा निकला



उसने जब तक न सुनाई थी कहानी हमको

कौन हमको ये बताता वो सहारा निकला



हम तो निकले थे ज़माने को दिखाने उल्फ़त

पर हकीक़त में वही प्यार तुम्हारा निकला



सोच कर बात सुनाई है मगर फिर भी क्यूँ,

राहरौ और ग़लत उनका इशारा निकला



इस यकीं से ही उमीदों को जगाया हम ने

“तुझ से ऐ दिल न मगर काम हमारा निकला”



जिंदगी हमने उधारी न गुज़ारी…

Continue

Posted on December 29, 2019 at 8:30am — 1 Comment

सयाने लोग

" वो लोग भी कमाल के होते हैं, जो कमाल की बाते करते हैं ।",उनकी मीटिंग खत्म होने के बाद पास बैठे आदमी ने कहा

"पर इन लोगों ने कभी चुप शांत रहने वाले लोगों के बारे भी सोचा है, वो भी कुछ दायरे संभाल रखें हैं ।" , उसने ख़ुद से पूछा

चुप व शांत रहने वालों की भी उन्हें प्रवाह करनी चाहिए, जब वे लोग आपस में बातें कर रहे होते हैं ।

"पर उनके लिए ये जानना भी ज़रूरी है कि इनकी सोच के दायरे से बड़ा भी कोई किसी का दायरा हो सकता है ।"

वहाँ बैठे आदमी ने फिर पूछ ही लिया, " भाई साहिब, आप जो…

Continue

Posted on October 3, 2019 at 3:30pm — 2 Comments

औरत : दर ब दर (लघुकथा )

विभाग की तरफ से सर्वेक्षण का काम पूरा होने के बाद, जूनियर स्टॉफ सदस्यों को विश्लेषण का काम दिया गया। जो टीम इस काम में लगाई गई, उस में एक पुरुष और महिला को चुना गया। विश्लेषण कर रहे जूनियर स्टॉफ के मन में परिणाम देख कर कुछ सवाल पैदा हो गए थे। जिन के बारे वह वरिष्ठ सदस्यों से पूछना चाहते थे। दो दिन के बाद वरिष्ठ स्टॉफ सदस्यों के सामने जब सर्वेक्षण का परिणाम रखा गया। तब पहला सवाल जो उन्होंने पूछा कि "एक वर्ष से कम उम्र के शिशुओं में पुरुषों की तुलना महिला शिशुओं की संख्या अधिक कैसे हो गई और वह…

Continue

Posted on October 1, 2019 at 10:39am — 1 Comment

Comment Wall (3 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 5:28pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहन जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 9:08pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 8:14pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

       

      आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपको शेर पसन्द आये . मै कृतार्थ हुई

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer is now friends with Dimple Sharma and Rupam kumar -'मीत'
25 minutes ago
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"हाँ, ठीक है ।"
26 minutes ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"//"राम करता चलूँ" यह मैं समज नहीं पाया इस लिए आपसे पूछ रहा हूँ// 'राम…"
28 minutes ago
Profile IconRupam kumar -'मीत' and Dimple Sharma joined Admin's group
Thumbnail

ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के…See More
36 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"दोस्त मुझे बस तुझसे एक शिकायत है तू पहले से काफ़ी सिगरेट पीता है    मुहतरम समर कबीर साहब…"
55 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"अब आख़िरत का भी कुछ इन्तिज़ाम करता चलूँ दिल-ओ-ज़मीर को अपने मैं राम करता चलूँ      …"
1 hour ago
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मुँह ज़ख्मों के शे'र सुनाकर सीता है
"इसकी तक़ती'अ ऐसे नहीं होगी,22 से करें:- तू पह-22 ले से-22 ज़ियादा-122 जो उचित नहीं…"
1 hour ago
Rupam kumar -'मीत' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post करेगा तू क्या मिरी वकालत (ग़ज़ल)
"आदरणीय रवि भसीन जी, मुझे अभी बहुत पढ़ना होगा इस ग़ज़ल को समझने के लिए आप ने बड़ी बात कही है शायद इस ग़ज़ल…"
1 hour ago
Rupam kumar -'मीत' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जो तेरी आरज़ू (ग़ज़ल)
"जो दबती जा रही हैं ख़्वाहिशें अबसवेरे देर तक सोने लगा हूँ  यह शेर मुझे बहुत पसंद आया रवि भसीन…"
1 hour ago
Dimple Sharma commented on Dimple Sharma's blog post कहीं नायाब पत्थर है , कहीं मन्दिर मदीना है
1 hour ago
Rupam kumar -'मीत' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ख़ुदा ख़ैर करे (ग़ज़ल)
"बड़े शाइर की यही पहचान होती है, अगर काफ़िया साथ देने लगे तो ग़ज़ल में ५ शेर से ज़ियादा शेर दिखते है,रवि…"
1 hour ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ये ग़म ताज़ा नहीं करना है मुझको
"डॉ छोटेलाल सिंह  जी आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ की आपने इस छोटे से बालक का हौसला…"
1 hour ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service