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मोहन बेगोवाल
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मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"2122 2122 2122 212बाँटती है सोच जो होनी बिगानी चाहिए l प्यार बाँटे जो सुनानी अब कहानी चाहिए l1 टोकते हो जिस तरह तुम क्या करोगे उस तरह,क्या गुज़ारी बाप जो दुनिया पुरानी चाहिए l 2 कुछ पलों का साथ जब ये उस निभाना था नहीं, उम्र भर की बात क्यूँ फिर दिल…"
Friday
Deepalee Thakur commented on मोहन बेगोवाल's blog post बंद दरवाज़ा (लघुकथा)
"लघुकथा का अच्छा प्रयास ,थोड़ी और कसावट से निखर जाएगी, सुझाव मात्र ।"
Oct 14
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post बंद दरवाज़ा (लघुकथा)
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब, लघुकथा का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 14
मोहन बेगोवाल posted a blog post

बंद दरवाज़ा (लघुकथा)

"आंटी जी, अगर उस दिन आप ने शिंदो के सर पर हाथ न रखा होता तो पता नहीं ये कहाँ होती।" रज्जो ने कहाकीमत तो इसकी  पहले ही लग चुकी थी,बस उस दिन तो पैसे देने थे, मालिक को । शिंदो को तो इस बारे कुछ पता ही नही था।“भला हो उस के साथ डांस पार्टी में काम करने वाली का”,रज्जो ने बात बढ़ाते हुए कहा।"उसने बता दिया,वरना पता नहीं कहाँ कहाँ बिक गई चुकी होती, अब तक  ।जब मालिक ने कहा कि कल वह किसी और डांस पार्टी के साथ काम करेगी " तब उसे खनक गई थी,कि इस के आगे़ क्या होने वाला है।"तब शिंदो को मैं आप के पास ले…See More
Oct 10
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-65 (विषय: "उम्मीद का दामन")
"आदरणीया बबिता जी , उम्मीद के आदमी की अंदर की शकित को जगाना अति जरूरी है , जिस से उम्मीद बनी रहती है , इस लिए साथ के उन लोगों को खुद ही कोशिश करनी होगी , अपने लिए . बहुत सुंदर लघुकथा के लिए बधाई हो "
Aug 31
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-65 (विषय: "उम्मीद का दामन")
"उम्मीद  का दामन "ये अक्सर कहा जाता हैं, मनुष्य को उमीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए l हो सकता है, ये सच भी हो? मगर उस उम्मीद को बनाये रखने के लिए कोई रास्ता भी तो निकलना चाहिए, तब ही उस रास्ते पर चलने की कोशिश की जा सकेगी" , राज़ बिस्तर पर…"
Aug 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-63 (विषय: मातृभूमि)
"आदाब शेख जी, बहुत शुक्रिया जी"
Jun 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-63 (विषय: मातृभूमि)
"आदरणीय रवि जी, सुंदर लघुकथा के लिए मुबारकां"
Jun 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-63 (विषय: मातृभूमि)
"     आदरनीया बबीता जी ,अच्छी लघुकथा के लिए बधाई हो  "
Jun 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-63 (विषय: मातृभूमि)
"       मातृभूमि (लघुकथा) कुछ दिन से मैं चुपचाप उदास-सा रहने लगा l मेरी यादों के झरोके में कई तरह की बातें कहानी पड़ी हैं l लेकिन आज मुझको, मेरे बाप की कई बार सुनाई कहानी याद आ रही है l जब भी मौका मिलता है बाप उस कहानी को सुनने के…"
Jun 30
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-63 (विषय: मातृभूमि)
"    आदरनीय अर्चना जी , बहुत संवेदनशील लघुकथा के लिए बधाई हो "
Jun 29
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
" आदरनीया रजेश जी , अच्छी ग़ज़ल लिए  बधाई हो "
Jun 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
"   आदरनीय सालिक जी , बहुत अच्छी ग़ज़ल कही , बधाई हो "
Jun 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
" आदरनीय विजय जी , अच्छी ग़ज़ल कहे के लिए बधाई हो     "
Jun 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
" सर जी , आप जी की बहुत मेहरबानी , कोशिश जारी है , जी , आप जी की कोशशों के खुद की मश्क की बदौलत  इक दिन सफल होंगे , यकीं कर सकते हैं "
Jun 27
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-120
" आदरनीय अनीश भाई जी , बहुत शुक्रिया "
Jun 27

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical Teacher
About me
Gazalgo , Punjabi Writer

मोहन बेगोवाल's Blog

बंद दरवाज़ा (लघुकथा)

"आंटी जी, अगर उस दिन आप ने शिंदो के सर पर हाथ न रखा होता तो पता नहीं ये कहाँ होती।" रज्जो ने कहा

कीमत तो इसकी  पहले ही लग चुकी थी,बस उस दिन तो पैसे देने थे, मालिक को ।

 शिंदो को तो इस बारे कुछ पता ही नही था।“भला हो उस के साथ डांस पार्टी में काम करने वाली का”,रज्जो ने बात बढ़ाते हुए कहा।

"उसने बता दिया,वरना पता नहीं कहाँ कहाँ बिक गई चुकी होती, अब तक  ।

जब मालिक ने कहा कि कल वह किसी और डांस पार्टी के साथ काम करेगी " तब उसे खनक गई थी,कि इस के आगे़ क्या होने वाला…

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Posted on October 10, 2020 at 2:00pm — 2 Comments

तरही ग़ज़ल

 शख्स उसको भी तो दीवाना समझ बैठे थे हम l

जो था अच्छा उस को बेचारा समझ बैठे थे हम l



अब न जीतेगा ज़माना भी हमेशा की तरह,

जिस तरह का था उसे वैसा समझ बैठे थे हम l



गीत गाया था बहारों पर सुनाया था कहाँ,

जब ख़िज़ाँ को भी अगर अपना समझ बैठे थे हम l



फूल ये बिखरा तो खुशबू सा शजर बनता मिला,

"इस ज़मीन ओ आसमां को क्या समझ बैठे थे हम l"



ये जहाँ बदला मगर ये जिंदगानी क्यूँ नहीं,

झूठ दुनिया जिस कहे सच्चा समझ बैठे थे हम…

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Posted on February 25, 2020 at 12:00am — 1 Comment

तरही ग़ज़ल

जब अँधेरा ये मिटाने को सितारा निकला l

चाँद पीछे न रहा बन के हमारा निकला



उसने जब तक न सुनाई थी कहानी हमको

कौन हमको ये बताता वो सहारा निकला



हम तो निकले थे ज़माने को दिखाने उल्फ़त

पर हकीक़त में वही प्यार तुम्हारा निकला



सोच कर बात सुनाई है मगर फिर भी क्यूँ,

राहरौ और ग़लत उनका इशारा निकला



इस यकीं से ही उमीदों को जगाया हम ने

“तुझ से ऐ दिल न मगर काम हमारा निकला”



जिंदगी हमने उधारी न गुज़ारी…

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Posted on December 29, 2019 at 8:30am — 1 Comment

सयाने लोग

" वो लोग भी कमाल के होते हैं, जो कमाल की बाते करते हैं ।",उनकी मीटिंग खत्म होने के बाद पास बैठे आदमी ने कहा

"पर इन लोगों ने कभी चुप शांत रहने वाले लोगों के बारे भी सोचा है, वो भी कुछ दायरे संभाल रखें हैं ।" , उसने ख़ुद से पूछा

चुप व शांत रहने वालों की भी उन्हें प्रवाह करनी चाहिए, जब वे लोग आपस में बातें कर रहे होते हैं ।

"पर उनके लिए ये जानना भी ज़रूरी है कि इनकी सोच के दायरे से बड़ा भी कोई किसी का दायरा हो सकता है ।"

वहाँ बैठे आदमी ने फिर पूछ ही लिया, " भाई साहिब, आप जो…

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Posted on October 3, 2019 at 3:30pm — 2 Comments

Comment Wall (3 comments)

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At 5:28pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहन जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 9:08pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 8:14pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

       

      आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपको शेर पसन्द आये . मै कृतार्थ हुई

 
 
 

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अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिए शुक्रिया।…"
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अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय निलेश जी ख़ाकसार की ग़ज़ल तक आने के लिये आभार। आपको भी आयोजन में सहभागिता हेतु बधाई। "
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नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"जी कोशिश करेंगे जल्दी आने की लेकिन ... और भी ग़म हैं .........   देर हो जाती है । सादर"
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