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मोहन बेगोवाल
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Mahendra Kumar commented on मोहन बेगोवाल's blog post जो पतंगों को उड़ाता है।
"इस प्रयास के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय मोहन बेगोवाल जी। कृपया आदरणीय समर कबीर सर की बात का संज्ञान ले। सादर।"
Wednesday
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post जो पतंगों को उड़ाता है।
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ग़ज़ल अभी बहुत समय चाहती है,बह्र, शिल्प,व्याकरण पर अभी आपको क़ाबू पाना होगा,इसके लिए ओबीओ पर "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" समूह का लाभ लें ।"
Tuesday
मोहन बेगोवाल posted a blog post

जो पतंगों को उड़ाता है।

जो पतंगों को उड़ाता है।डोर खुद भी छोड़ जाता है।जख्म सबको दिखाना मत,हर न मरहम इस लगाता है।पास आकर बैठ जाये जो,क्यूँ वो आसूँ फिर छुपा ता है।क्या हुआ देखों अँधेरे को,बीज सपने क्यूँ चुराता है।कलम कैसी भी रही होगी,सोच अक्सर वो लिखाता है।“मौलिक व अप्रकाशितSee More
Tuesday
राज़ नवादवी commented on मोहन बेगोवाल's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है. बधाई स्वीकार करें, बाक़ी मंच के असातिज़ा से मिली राय पे अमल कर लाभान्वित हों. सादर "
Jan 6
मोहन बेगोवाल posted a blog post

ग़ज़ल

पास  रखना है भला जो। छोड़ देेेेना दिल जला  जो।क्या मनाये वो  खुशी को,खुद मनाने  दिल चला जो।रौशनी हम तब  मिली है , रात भर  दीया जला जो।आम का   बन  खास  जाना, कुछ तो अच्छा दिन ढला जो।रोज़   कहता   मुझ  बता दे राज़  उस  खोला  भला जो।मौलिक व अप्रकाशितSee More
Jan 6
मोहन बेगोवाल commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : वो ज़हर का प्याला है, उठाना ही नहीं था
"   आदरनीय महेंदर जी, बहुत सुंदर ग़ज़ल  सभी अश'आर बहुत उम्दा "
Jan 5
Mahendra Kumar commented on मोहन बेगोवाल's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. रदीफ़ से कई जगह न्याय नहीं हो पाया. देखिएगा. सादर."
Jan 4
मोहन बेगोवाल posted a blog post

ग़ज़ल

पास  रखना है भला जो। छोड़ देेेेना दिल जला  जो।क्या मनाये वो  खुशी को,खुद मनाने  दिल चला जो।रौशनी हम तब  मिली है , रात भर  दीया जला जो।आम का   बन  खास  जाना, कुछ तो अच्छा दिन ढला जो।रोज़   कहता   मुझ  बता दे राज़  उस  खोला  भला जो।मौलिक व अप्रकाशितSee More
Jan 4
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post ग़ज़ल
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ,लेकिन ग़ज़ल में भाव स्पष्ट नहीं हैं और :- 'फूल बन कैसे खिला जो' इस शैर में क़ाफ़िया ही बदल गया है ,देखियेगा ।"
Jan 3
मोहन बेगोवाल posted a blog post

ग़ज़ल

पास  रखना है भला जो। छोड़ देेेेना दिल जला  जो।क्या मनाये वो  खुशी को,खुद मनाने  दिल चला जो।रौशनी हम तब  मिली है , रात भर  दीया जला जो।आम का   बन  खास  जाना, कुछ तो अच्छा दिन ढला जो।रोज़   कहता   मुझ  बता दे राज़  उस  खोला  भला जो।मौलिक व अप्रकाशितSee More
Jan 2
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"   कमाल की लघुकथा पेश की,बधाई हो"
Dec 31, 2018
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"अनीता जी, बहुत ही उम्दा लघुकथा के लिए बधाई हो"
Dec 31, 2018
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"   बहुत सुंदर लघुकथा में प्यार की कमाल की पेशकारी पेश की,बधाई हो"
Dec 31, 2018
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"दोस्त बहुत मेहरबानी जी"
Dec 31, 2018
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"    चेतना बिलू का छोटू अभी दो साल का भी नहीं हुआ, घर वाले आज फिर बिलू पर दूसरे बच्चे के लिए दबा बना रहे सुनीता को जता रहे थे,मगर सुनीता इस लिए पहले ही विरोध कर चुकी थी। “देख तेरे पास इक बच्चा है, अगर इसे कुछ हो गया…"
Dec 30, 2018
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-45 (विषय: चेतना)
"बहुत ही सुंदर अर्थ भरपूर लघुकथा,गरीब के बारे ऐसे विचार कई बार अक्सर ही सुनने को मिलते हैं"
Dec 30, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical Teacher
About me
Gazalgo , Punjabi Writer

मोहन बेगोवाल's Blog

जो पतंगों को उड़ाता है।

जो पतंगों को उड़ाता है।
डोर खुद भी छोड़ जाता है।
जख्म सबको दिखाना मत,
हर न मरहम इस लगाता है।
पास आकर बैठ जाये जो,
क्यूँ वो आसूँ फिर छुपा ता है।
क्या हुआ देखों अँधेरे को,
बीज सपने क्यूँ चुराता है।
कलम कैसी भी रही होगी,
सोच अक्सर वो लिखाता है।
“मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 14, 2019 at 4:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल

पास  रखना है भला जो।
छोड़ देेेेना दिल जला  जो।

क्या मनाये वो  खुशी को,
खुद मनाने  दिल चला जो।

रौशनी हम तब  मिली है ,
रात भर  दीया जला जो।

आम का   बन  खास  जाना,
कुछ तो अच्छा दिन ढला जो।

रोज़   कहता   मुझ  बता दे
राज़  उस  खोला  भला जो।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 2, 2019 at 5:00pm — 3 Comments

मुजरिम : लघुकथा

आठवीं कक्षा तीसरा पीरीयड नैतिक शिक्षा का चल रहा था। जिंदगी अच्छे से कैसे गुजारी जाए के बारे सवाल मैडम से बच्चे पूछ रहे थे। मैडम सोचती है कि ऐसे सवाल तो हम ने भी पूछे थे,मगर हमारी जिंदगी का हिस्सा क्यूँ नहीं बने, वह सोचने लगी।

अब यही सवाल बच्चे उन से पूछ रहे हैं। क्या ऐसे करने से तबदीली आ सकती व्यहार से मैडम ने अपने आप से सवाल पुछाा।

"मगर जब वह जवाब की कौशिश करती है तो वह सोचती है क्यूँ न हम कहने की जगह करने को कहें,मगर ये तो तभी होगा जब हम खुद करेंगे,उस ने अपने सवाल का खुद को…

Continue

Posted on July 25, 2018 at 2:00pm — 4 Comments

पर्दा (लघुकथा)

पर्दा

हर समय मुस्कराता चेहरा, और दूसरों के चेहरे पे मुस्कराहट बिखेर देना उस का बाएँ हाथ का काम था।

कई बार मैं खुद छुप कर आईने के सामने उस जैसा मुस्कराने की कोशिश करता, मगर असफल रहता ।

तब खुद को कहता “क्या कमी है, अगर मैं मुस्करा दूँ तो कौन सा पहाड़ गिर जायेगा ?”

मगर कल शाम से सारा मौहला उदास नज़र आ रहा था ।

किसी ने आकर बताया कि सुबह के दस बज गए, अभी तक दरवाज़ा नहीं खुला था।

मैं और भी उदास हो गया,पता नहीं चल रहा ऐसा क्यूँ हुआ।

तब मेरे कानों में इक आवाज़ सुनाई… Continue

Posted on May 12, 2018 at 6:18pm — 5 Comments

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At 5:28pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहन जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 9:08pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 8:14pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

       

      आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपको शेर पसन्द आये . मै कृतार्थ हुई

 
 
 

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