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मोहन बेगोवाल
  • Male
  • Amritsar
  • India
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मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"   आदरणीय अशफाक जी, सुंदर ग़'ज़ल के लिए बधाई ."
18 hours ago
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"जिंदगी में कहाँ ऐसा भी सफ़र बनता है lबिन उठायें यहाँ पावों से डगर बनता हैl जो मुसीबत मेरी अपनी ही कमाई लगती, ये बताना कि भगाने का हुनर बनता है l बांध लेगा जो हमारी कोई दुनिया ऐसे, आम से ख़ास बता कैसे बशर बनता है l इन उजालों में कहाँ साफ़ नज़र आयेगा,…"
19 hours ago
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post तरही ग़ज़ल
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ओबीओ के तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'जिस तरह का था उस वैसा समझ बैठे थे हम' इस मिसरे में 'उस' को "उसे" कर लें । 'ये जहाँ बदला मगर ये जिंदगी क्यूँ…"
Feb 25
मोहन बेगोवाल posted a blog post

तरही ग़ज़ल

 शख्स उसको भी तो दीवाना समझ बैठे थे हम l जो था अच्छा उस को बेचारा समझ बैठे थे हम lअब न जीतेगा ज़माना भी हमेशा की तरह, जिस तरह का था उस वैसा समझ बैठे थे हम lगीत गाया था बहारों पर सुनाया था कहाँ, जब ख़िज़ाँ को भी अगर अपना समझ बैठे थे हम lफूल ये बिखरा तो खुशबू सा शजर बनता मिला, "इस ज़मीन ओ आसमां को क्या समझ बैठे थे हम l"ये जहाँ बदला मगर ये जिंदगी क्यूँ नहीं, झूठ दुनिया जिस कहे सच्चा समझ बैठे थे हम lमौलिक व अप्रकाशित"See More
Feb 25
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"सर जी, बहुत शुक्रिया जी"
Feb 22
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"बहुत सुंदर ग़ज़ल की बधाई हो"
Feb 22
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"सुंदर ग़ज़ल की बधाई"
Feb 22
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"शख्स जिस को देख दीवाना समझ बैठे थे हम l जब गली गुजरा तो पहचाना समझ बैठे थे हम l अब न जीतेगा ज़माना ये हमेशा की तरह, खुद बनाया है इसे जैसा समझ बैठे थे हम l गीत हम ने तो बहारों को सुनाया था मगर, ये सुना दुनिया तुझे अपना समझ बैठे थे हम l टूट कर बिखरा…"
Feb 22
डॉ छोटेलाल सिंह commented on मोहन बेगोवाल's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय मोहन जी इस सुंदर गजल के लिए बहुत बहुत बधाई"
Jan 1
मोहन बेगोवाल posted a blog post

तरही ग़ज़ल

जब अँधेरा ये मिटाने को सितारा निकला l चाँद पीछे न रहा बन के हमारा निकला उसने जब तक न सुनाई थी कहानी हमको कौन हमको ये बताता वो सहारा निकला हम तो निकले थे ज़माने को दिखाने उल्फ़त पर हकीक़त में वही प्यार तुम्हारा निकला सोच कर बात सुनाई है मगर फिर भी क्यूँ, राहरौ और ग़लत उनका इशारा निकला इस यकीं से ही उमीदों को जगाया हम ने “तुझ से ऐ दिल न मगर काम हमारा निकला” जिंदगी हमने उधारी न गुज़ारी होती फिर न कहते कि सफ़र यार नकारा निकलामौलिक व अप्रकाशित See More
Dec 29, 2019
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-114
"रौशनी पढ़ा जाए जी"
Dec 27, 2019
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-114
"शनी साथ निभाने को सितारा निकला l जब अँधेरे को मिटाने ये उज़ारा निकला l अब तलक हम न सुनी थी जो कहानी तेरी, हम न देने कोई दिल दर्द सहारा निकला l हम तो निकले थे ज़माने को बताने खातर, भूल आये देखा दरिया न किनारा निकला l सोच कर बात सुनाई है मगर फिर भी…"
Dec 27, 2019
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-114
"रौशनी है ये बताने को सितारा निकला l अब अँधेरे को मिटाने है उज़ारा निकला l अब तलक हम न सुनी थी जो कहानी तेरी, अब न अपने कोई दिल दर्द सहारा निकला l हम तो निकले थे ज़माने को बताने खातर, क्या वो भूले जैसे दरिया न किनारा निकला l सोच कर बात सुनाई है मगर फिर…"
Dec 27, 2019
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post सयाने लोग
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,लघुकथा का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें ।"
Oct 7, 2019
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on मोहन बेगोवाल's blog post जहाँ ये कर दिखाना होगाl
"आ. भाई मोहन जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Oct 7, 2019
TEJ VEER SINGH commented on मोहन बेगोवाल's blog post सयाने लोग
"हार्दिक बधाई आदरणीय मोहन बेगोवाल जी।बेहतरीन लघुकथा।ऊपर से तीसरी पंक्ति में "प्रवाह" के स्थान पर मेरे विचार से "परवाह" होना चाहिये।"
Oct 5, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical Teacher
About me
Gazalgo , Punjabi Writer

मोहन बेगोवाल's Blog

तरही ग़ज़ल

 शख्स उसको भी तो दीवाना समझ बैठे थे हम l

जो था अच्छा उस को बेचारा समझ बैठे थे हम l



अब न जीतेगा ज़माना भी हमेशा की तरह,

जिस तरह का था उस वैसा समझ बैठे थे हम l



गीत गाया था बहारों पर सुनाया था कहाँ,

जब ख़िज़ाँ को भी अगर अपना समझ बैठे थे हम l



फूल ये बिखरा तो खुशबू सा शजर बनता मिला,

"इस ज़मीन ओ आसमां को क्या समझ बैठे थे हम l"



ये जहाँ बदला मगर ये जिंदगी क्यूँ नहीं,

झूठ दुनिया जिस कहे सच्चा समझ बैठे थे हम…

Continue

Posted on February 25, 2020 at 12:17am — 1 Comment

तरही ग़ज़ल

जब अँधेरा ये मिटाने को सितारा निकला l

चाँद पीछे न रहा बन के हमारा निकला



उसने जब तक न सुनाई थी कहानी हमको

कौन हमको ये बताता वो सहारा निकला



हम तो निकले थे ज़माने को दिखाने उल्फ़त

पर हकीक़त में वही प्यार तुम्हारा निकला



सोच कर बात सुनाई है मगर फिर भी क्यूँ,

राहरौ और ग़लत उनका इशारा निकला



इस यकीं से ही उमीदों को जगाया हम ने

“तुझ से ऐ दिल न मगर काम हमारा निकला”



जिंदगी हमने उधारी न गुज़ारी…

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Posted on December 29, 2019 at 8:30am — 1 Comment

सयाने लोग

" वो लोग भी कमाल के होते हैं, जो कमाल की बाते करते हैं ।",उनकी मीटिंग खत्म होने के बाद पास बैठे आदमी ने कहा

"पर इन लोगों ने कभी चुप शांत रहने वाले लोगों के बारे भी सोचा है, वो भी कुछ दायरे संभाल रखें हैं ।" , उसने ख़ुद से पूछा

चुप व शांत रहने वालों की भी उन्हें प्रवाह करनी चाहिए, जब वे लोग आपस में बातें कर रहे होते हैं ।

"पर उनके लिए ये जानना भी ज़रूरी है कि इनकी सोच के दायरे से बड़ा भी कोई किसी का दायरा हो सकता है ।"

वहाँ बैठे आदमी ने फिर पूछ ही लिया, " भाई साहिब, आप जो…

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Posted on October 3, 2019 at 3:30pm — 2 Comments

औरत : दर ब दर (लघुकथा )

विभाग की तरफ से सर्वेक्षण का काम पूरा होने के बाद, जूनियर स्टॉफ सदस्यों को विश्लेषण का काम दिया गया। जो टीम इस काम में लगाई गई, उस में एक पुरुष और महिला को चुना गया। विश्लेषण कर रहे जूनियर स्टॉफ के मन में परिणाम देख कर कुछ सवाल पैदा हो गए थे। जिन के बारे वह वरिष्ठ सदस्यों से पूछना चाहते थे। दो दिन के बाद वरिष्ठ स्टॉफ सदस्यों के सामने जब सर्वेक्षण का परिणाम रखा गया। तब पहला सवाल जो उन्होंने पूछा कि "एक वर्ष से कम उम्र के शिशुओं में पुरुषों की तुलना महिला शिशुओं की संख्या अधिक कैसे हो गई और वह…

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Posted on October 1, 2019 at 10:39am — 1 Comment

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At 5:28pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहन जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 9:08pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 8:14pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

       

      आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपको शेर पसन्द आये . मै कृतार्थ हुई

 
 
 

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ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आ. अंजलि जी, हार्दिक धन्यवाद।"
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