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Samar kabeer
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Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"दोस्तो आदाब, आठ दिन से बाईं आँख की तकलीफ़ में मुब्तिला हूँ, यही वजह है कि मंच पर चाहते हुए भी हाज़िर नहीं हो पा रहा हूँ,आप सबसे दुआ की दरख़्वास्त है ।"
Saturday
Samar kabeer commented on Shaikh Zubair's blog post ग़ज़ल
"जनाब शैख़ ज़ुबैर अहमद साहिब आदाब,ओबीओ मंच पर आपका स्वागत है । ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'मुझे तुम फ़ोन करना,इबादत हो गई तो' इस शैर का मफ़हूम (भाव)स्पष्ट नहीं है,देखियेगा ।"
Jun 12
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे दो जून के - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर जी आदाब,अच्छे दोहे लिखे आपने,इसके लिए बधाई स्वीकार करें । 'कभी किसी को ना करे, भूख यहाँ बेहालरोटी सब दो जून की, पाकर हों खुशहाल' इस दोहे की तुकांतता क्या है? ग़ौर करें ।"
Jun 12
Samar kabeer commented on Neelam Upadhyaya's blog post कुछ हाइकू
"मुहतरमा नीलम उपाध्याय जी आदाब,अच्छे हाइकू लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 12
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"जनाब तेजवीर सिंह जी,बहुत दुखद समाचार,इस दुख की घड़ी में हम आपके साथ हैं,विनम्र श्रद्धांजलि ।"
Jun 12
Samar kabeer commented on Neelam Upadhyaya's blog post कुछ हाइकू
"मुहतरमा नीलम उपाध्याय जी आदाब, अच्छे हाइकू लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 12
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'फैंक दलदलों में यार,मांगते हो माफियाँ' इस मिसरे में 'माफियाँ' ग़लत शब्द है,सहीह शब्द है "मुआफ़ी" और इसका बहुवचन होगा "मुआफ़ियाँ",मिसरा…"
Jun 11
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post माहौल का फ़र्क़- लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 11
Samar kabeer commented on बृजेश नीरज's blog post धारा
"जनाब बृजेश नीरज जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 11
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post अलग अलग कारण- लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें । मुहतरमा प्रतिभा जी के सुझाव अच्छे हैं ।"
Jun 11
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए' इस मिसरे को यूँ कर लें,इसमें 'हज़फ़-ए-लफ़्ज़ का ऐब है:- 'कैसे होते हैं फ़ना प्यार निभाने के…"
Jun 11
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post शरणार्थी (लघुकथाएं )
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथाएं लिखीं,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 11
Samar kabeer commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"जनाब हरिओम श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छे कुण्डलिया छन्द लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 11
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post गर्मी पर 5 दोहे ....
"जी,अब ठीक है । मेरे कहे को मान देने के लिए धन्यवाद ।"
Jun 8
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post ईद ...
"'दीद आपके दे गए, ईदी हमको आज।धड़कन के बजने लगे, देखो दिल में साज ।।' इस दोहे की पहली पंक्ति में व्याकरण दोष भी है,जो मैं बताना भूल गया था,क्योंकि 'दीद' शब्द स्त्रीलिंग है,इसे यूँ कर सकते है:- 'दीद आपकी दे गई,ईदी हमको…"
Jun 8
Samar kabeer commented on Amar Pankaj (Dr Amar Nath Jha)'s blog post तेरी मेरे कहीं कुछ कहानी तो है
"जनाब अमर पंकज जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । दूसरे और तीसरे शैर के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,उन्हें हटा दें । 'ज़िंदगी अब तलक ये सुहानी भी है' इस मिसरे को यूँ कर लें:- 'ज़िन्दगी इसलिए तो सुहानी भी है'"
Jun 7

Profile Information

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Male
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ujjain
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ujjain
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Poet
About me
poet

Samar kabeer's Blog

ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा

है उजागर ये हक़ीक़त ओ बी ओ

मुझको है तुझसे महब्बत ओ बी ओ

तेरे आयोजन सभी हैं बेमिसाल

तू अदब की एक जन्नत ओ बी ओ

कहते हैं अक्सर ,ये भाई योगराज

तू है इक छोटा सा भारत ओ बी ओ

सीखने वाले यही कहते सदा…

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Posted on April 1, 2019 at 11:00am — 30 Comments

एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में

मफ़ऊल मफ़ाईल मफ़ाईल फ़अल

221     1221   1221    12

पाना जो शिखर हो तो मेरे साथ चलो

ये अज़्म अगर हो तो मेरे साथ चलो

दीवार के उस पार भी जो देख सके

वो तेज़ नज़र हो तो मेरे साथ चलो

होती है ग़रीबों की वहाँ दाद रसी

तुम ख़ाक बसर हो तो मेरे साथ चलो

पत्थर पे खिलाना है वहाँ हमको कँवल

आता ये हुनर हो तो मेरे साथ चलो

हर शख़्स वहाँ कड़वा…

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Posted on March 6, 2019 at 5:55pm — 19 Comments

'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन

1212     1122     1212      22

ग़ज़ल

उठा है ज़ह्न में सबके सवाल,किसकी है

तू जिस पे नाच रहा है वो ताल किसकी है

खड़े हुए हैं सर-ए-राह आइना लेकर

हमारे सामने आए मजाल किसकी है

ज़रा सा ग़ौर करोगे तो जान जाओगे

वतन को आग लगाने की चाल किसकी है

हमें तू बेवफ़ा कहता है ,ये तो देख ज़रा

लबों पे सबके वफ़ा की मिसाल किसकी…

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Posted on January 16, 2019 at 8:30pm — 20 Comments

"तरही ग़ज़ल नम्बर 4

नोट:-

तरही मुशायरा अंक-100 में 87 ग़ज़लें पोस्ट हुईं,मेरी इस ग़ज़ल में जो क़वाफ़ी इस्तेमाल हुए हैं वो बिल्कुल नये हैं ।

पहले सिल पर घिसा गया है मुझे

फिर जबीं पर मला गया है मुझे

जाल हूँ इक सियासी लीडर का

नफ़रतों से बुना गया है मुझे

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे

कहदो तक़दीर से बखेरे नहीं

करके वो एक जा गया है…

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Posted on October 24, 2018 at 5:54pm — 40 Comments

Comment Wall (26 comments)

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At 9:59pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
हौसला बढ़ाने के लिए बहुत शुक्रिया, सब आपकी कृपा है
कृपा दृस्टि बनाये रखें ! आपका आदेश सर माथे पर
At 10:06pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब
अपेक्षा है की गलतियों को भी इंगित करें
At 12:20pm on March 22, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
बहुत शुक्रिया सब आपका ही आशीर्वाद है
कृपा बनायें रखें
At 3:34pm on March 12, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर सर आपके मार्गदर्शन का हमेशा आकांक्षी रहूँगा!
At 11:42pm on February 23, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय
ये तो आपकी कृपा से ही संभव हुआ है
At 11:38pm on February 10, 2019, Rafique Nagori said…

बहुत अच्छा और उस्तादाना फन से भरा हुआ कलाम है समर साहब का

At 10:48pm on January 26, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय आपकी कृपा है
At 9:05am on January 25, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय जनाब समर कबीर साहब
प्रणाम
तरही मुशायरा 103 के लिए प्रयास किया है

इत्तिला की फिर से वो न आएँ मुझे न दो
मैं जा चुका हूँ अब तो सदाएँ मुझे न दो

खामोश सच है,झूठ हुआ बातुनी बहुत
उस पे चुप रहने की अदाएँ मुझे न दो

मैं थक चुका हूँ उस का इन्तजार कर कर के
अब और जिंदगी की दुआएँ मुझे न दो

इस बार जो गया न कभी लौट पाउंगा
'हर बार दूर जा के सदाएँ मुझे न दो

आवाम हूँ मुल्क का कुछ तो रहम करो
सब के जुर्म की अब तो सजाएँ मुझे न दो

कृपा कर सुझाव देवें
At 12:57pm on January 14, 2019, गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' said…

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे ---क्या बात है समर कबीर साहेब लाजवाब अशआर हुए हैं | दाद ही दाद क़ुबूल फ़रमाएं | 

At 11:38am on December 25, 2018, Surkhab Bashar said…

जनाब समर कबीर साहब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही है आपने 

हर शेर का़बिले दाद है 

  • मुबारक बाद कुबूल करें
 
 
 

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