For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Samar kabeer
Share

Samar kabeer's Friends

  • श्याम किशोर सिंह 'करीब'
  • santosh khirwadkar
  • Ambesh Tiwari
  • आशीष सिंह ठाकुर 'अकेला'
  • Mirza Hafiz Baig
  • surender insan
  • Kalipad Prasad Mandal
  • KALPANA BHATT
  • रामबली गुप्ता
  • Abhishek Kumar Amber
  • Arpana Sharma
  • डॉ पवन मिश्र
  • रोहिताश्व मिश्रा
  • बृजेश कुमार 'ब्रज'
  • Mahendra Kumar
 

Samar kabeer's Page

Latest Activity

Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post वादों की बरसात न कर
"जी,अब मिसरा ठीक है ।"
17 hours ago
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post दबी हर बात जिंदा क्यूँ करें हम (ग़ज़ल)
"जनाब तस्दीक़ साहिब सही शब्द "महब्बत"ही है, लुग़ात देख लें ।"
18 hours ago
Samar kabeer commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"आप हिन्दी के ग़म में घुले जा रहे हैं,और ख़ुद यहाँ 'हिन्दी'को 'हिंदी'लिख रहे हैं ,इसका सही उच्चारण "हिन्दी" है ।"
18 hours ago
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"आप मीर को पढ़ लें और ख़ुद तलाश करें,आपके पास बहुत वक़्त है, कहते हैं न 'अक़्लमंद को इशारा काफ़ी होता है' ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"एक बात बताना भूल गया था 'ग़ज़ल'शब्द में इज़ाफ़त नहीं लगाई जाती,इसे 'ग़ज़ल सहर की'लिखना मुनासिब होगा ।"
yesterday
Samar kabeer commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post एक पति की आत्मस्वीक्रति
"जनाब मुकेश जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"जनाब अफ़रोज़'सहर'साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'अजब मैं दिवाना ये क्या चाहता हूँ' इस मिसरे को अगर यूँ कर लिया जाये तो रवानी बढ़ जाएगी:- "अजब मैं दिवाना हूँ क्या चाहता…"
yesterday
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"बहरों के खेल निराले मेरे भय्या'"
yesterday
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post दबी हर बात जिंदा क्यूँ करें हम (ग़ज़ल)
"सही शब्द 'तोहफ़ा' नहीं "तुहफ़ा"वज़्न 22"
yesterday
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें । जनाब गिरिराज भंडारी जी से सहमत हूँ । आख़री शैर के ऊला मिसरे में 'लेकिन'शब्द की जगह 'देखो' शब्द मुनासिब होगा ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post तरही ग़ज़ल
"जनाब कालीपद प्रसाद मण्डल जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sunil Verma's blog post जड़ें (लघुकथा) -सुनील वर्मा
"जनाब सुनील वर्मा साहिब आदाब,हमेशा की तरह बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post दबी हर बात जिंदा क्यूँ करें हम (ग़ज़ल)
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
yesterday
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post जिसे ख़यालों में रखता हूँ - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
yesterday
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"जनाब रामबली गुप्ता जी आदाब,अरूज़ की नज़र से देखें तो इन अरकान पर कोई बह्र नहीं मिलेगी,लेकिन अरूज़ के जनक ख़लील बिन अहमद ने भी कुछ ख़ुद साख़ता बहूर का ज़िक्र किया है,होता ये है कि जब कोई शाइर अदब में अपना मक़ाम बना लेता है उसके बाद वो अपने बनाये हुए अरकान पर…"
yesterday
Samar kabeer commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post हिंदी क्यूँ ऐसे लगती ज्यूँ वृदाश्रम की माई है ;अलका 'कृष्णांशी'
"मोहतरमा अलका जी आदाब,अच्छा गीत हुआ,बधाई ।"
Sunday

Profile Information

Gender
Male
City State
ujjain
Native Place
ujjain
Profession
Poet
About me
poet

Samar kabeer's Blog

तरही ग़ज़ल नम्बर 2

नोट :-"तरही मुशायरे में जितनी ग़ज़लें शामिल हुईं, इस ग़ज़ल के क़वाफ़ी उन सबसे अलग हैं"



मफ़ऊल फ़ाइलातु मुफ़ाईल फ़ाइलुन



लेकर गई है हमको जिहालत कहाँ कहाँ

मांगी है तेरे वास्ते मन्नत कहाँ कहाँ



ये आज तेरे पास जो दौलत के ढेर हैं

सच बोल तूने की है ख़ियानत कहाँ कहाँ



अब तक भरी हुई थी जो तेरे दिमाग़ में

फैलाई है वो तूने ग़िलाज़त कहाँ कहाँ



तूने वतन को बेचा है अपने मफ़ाद में

होती है देखें तेरी मज़म्मत कहाँ कहाँ



फ़हरिस्त इसकी अब तो बताना… Continue

Posted on August 2, 2017 at 3:00pm — 27 Comments

'महब्बत कर किसी के संग हो जा'

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फ़ऊलुन



हिमाक़त छोड़ दे फ़रहंग हो जा

महब्बत कर किसी के संग हो जा



ग़ज़ल मेरी सुना लहजे में अपने

मैं गूँगा हूँ मेरा आहंग हो जा



यहाँ घुट घुट के मरने से है बहतर

निकल मैदाँ में मह्व-ए-जंग हो जा



करे अपना के दुनिया फ़ख़्र जिस पर

वफ़ा का वो निराला ढंग हो जा



चढ़े इक बार जिस पर फिर न उतरे

महब्बत का तू ऐसा रंग हो जा



ये दुनिया सीधे साधों की नहीं है

उदासी छोड़ शौख़्-ओ-शंग हो जा



जुदा ता उम्र कोई कर न… Continue

Posted on July 24, 2017 at 12:00am — 26 Comments

'ये लहू दिल का चूस्ती है बहुत'

फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन/फ़ेलान

ज़ह्न में यूँ तो रौशनी है बहुत
पर जमी इसमें गंदगी है बहुत

इतना आसाँ नहीं ग़ज़ल कहना
ये लहू दिल का चूस्ती है बहुत

एक एक पल हज़ार साल का है
चार दिन की भी ज़िन्दगी है बहुत

चींटियाँ सी बदन पे रेंगती हैं
लम्स में तेरे चाशनी है बहुत

फ़न ग़ज़ल का "समर"सिखाने को
एक 'दरवेश भारती'है बहुत
---
लम्स-स्पर्श
समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

Posted on July 18, 2017 at 11:03am — 25 Comments

'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'

मफ़ाइलुन फ़्इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन

ख़ुलूस-ओ-प्यार की उनसे उमीद कैसे हो

जो चाहते हैं कि नफ़रत शदीद कैसे हो



छुपा रखे हैं कई राज़ तुमने सीने में

तुम्हारे क़ल्ब की हासिल कलीद् कैसे हो



बुझे बुझे से दरीचे हैं ख़ुश्क आँखों के

शराब इश्क़ की इनसे कशीद् कैसे हो



हमेशा घेर कर कुछ लोग बैठे रहते हैं

अदब पे आपसे गुफ़्त-ओ-शुनीद कैसे हो



इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइर

अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे… Continue

Posted on July 13, 2017 at 11:41am — 50 Comments

Comment Wall (12 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

At 9:46pm on February 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय Samar kabeer जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:06am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

janab samar kabeer sahab aadab,    hosla afzayi ke liye shukriya ,  1. ar ka matlab hai agar...aur 2.chhar ka matlab hai  ..khayal.

At 6:40pm on March 18, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय समर कबीर जी आपको माह कि सर्वश्रेष्ठ रचना के हेतु चुने जाने के लिए बधाई प्रेषित करती हूँ । ये सच है कि ग़ज़ल को लिखना और उसमे खिताब पाना बहुत ही प्रशंशनीय है ,आपको एक बार फिरसे बधाई हो सादर । 

At 7:09pm on March 16, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०समर कबीर जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन  कोई हंसी खेल नहीं  .आपको यह पुरस्कार प्राप्य हुआ . आपको मेरी भूरि-भूरि  बधायी .

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"आभार आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आपका , सादर नमन "
7 hours ago
रामबली गुप्ता commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - मैं उसकी ताब से खो कर हवास बैठा था ( गिरिराज भंडारी )
"वाह वाह आद0 गिरिराज भाई जी। बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
7 hours ago
Mohit mishra (mukt) posted a blog post

हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त

विश्व पटल की बात तो छोडो , भारत के सर्वस्व भूमि पर , त्याग आपसी रंजिश को , हर मुख हिंदी कब गायेगा ?…See More
Thursday
Ravindra Pandey commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)
"बन के लहू ये....... अत्यंत सुन्दर अभिव्यक्ति... हार्दिक बधाई स्वीकार करें... @बासुदेव जी...."
Thursday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर posted photos
Thursday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

ग़ज़ल (सबसे रहे ये ऊँची मन में हमारी हिन्दी)

भाषा बड़ी है प्यारी जग में अनोखी हिन्दी, चन्दा के जैसे सोहे नभ में निराली हिन्दी। पहचान हमको देती…See More
Thursday
Mohit mishra (mukt) commented on Manan Kumar singh's blog post हिंदी की हकीकत(लघु कथा)
"हकीकत को जीवंत करती सार्थक रचना। बधाई "
Thursday
Profile IconMilind Padki, Subhash Chandra Lakhera and Ajay Singh Rana joined Open Books Online
Thursday
Ashok Kumar Raktale added a discussion to the group पुस्तक समीक्षा
Thumbnail

समीक्षा : 'मन में भरो उजास'

“मन में भरो उजास” – कुण्डलिया छंद संग्रहछंदकार – सुभाष मित्तल ‘सत्यम्’प्रकाशक – बोधि प्रकाशन,…See More
Thursday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted a blog post

निहारता तो हूँ तुम्हें, चोरी से चुपके से- गजल, पंकज मिश्र

1212 1212 222 222निहारता तो हूँ तुम्हें, चोरी से चुपके सेविचारता तो हूँ तुम्हें, झपकी ले चुपके…See More
Thursday
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
Thursday
Manan Kumar singh posted a blog post

हिंदी की हकीकत(लघु कथा)

हिंदी की हकीकत*****विभाग(संस्था) में राजभाषा के कार्यान्वयन की समीक्षा का कार्यक्रम चल रहा था।…See More
Thursday

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service