For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Samar kabeer
Share

Samar kabeer's Friends

  • गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत '
  • V.M.''vrishty''
  • mirza javed baig
  • पीयूष कुमार द्विवेदी
  • dandpani nahak
  • Ajay Tiwari
  • श्याम किशोर सिंह 'करीब'
  • santosh khirwadkar
  • Ambesh Tiwari
  • आशीष सिंह ठाकुर 'अकेला'
  • Mirza Hafiz Baig
  • surender insan
  • Kalipad Prasad Mandal
  • KALPANA BHATT ('रौनक़')
  • रामबली गुप्ता
 

Samar kabeer's Page

Latest Activity

Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल अभी समय चाहती है,लगता है जल्दी में कही गई है । 'वगर्ना देश  तो  कब  का  ये  सँवर जाना था' ये मिसरा बह्र से ख़ारिज है । 'वो…"
2 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"मुहतरमा अंजलि 'सिफ़र' जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
4 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब दिगंबर नासवा जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'हाथ छूते ही उसे यूँ भी बिखर जाना था' इस मिसरे में 'हाथ छूते' की जगह "हाथ लगते"करना उचित होगा । 'उम्र भर यूँ भी भटकन था जिधर जाना…"
4 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
4 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
4 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब सुरख़ाब बशर साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
4 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'आ सका उतना मैं नज़दीक न उल्फ़त में सनम,आपके इश्क़ में क्या हद से गुज़र जाना था' इस शैर के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,अगर ऊला में 'उतना'…"
4 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब मिर्ज़ा जावेद बैग साहिब आदाब,तरही मिसरे पर उम्दा ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब शरीफ़ अहमद क़ादरी "हसरत" साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'हमसफ़र बन के तेरा साथ निभाते कैसेहम मुसाफिर थे हमे लोट के घर जाना था' इस शैर के बारे में जनाब योगराज प्रभाकर साहिब की इस्लाह मुफ़ीद…"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"ज़िल्ले इलाही का इक़बाल बुलन्द हो ।"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब मिथिलेश वामनकर जी आदाब,बहुत अर्से बाद आपकी ग़ज़ल से रूबरू हो रहा हूँ,बहुत उम्दा ग़ज़ल कही आपने तरही मिसरे पर,इस उम्दा ग़ज़ल के लिए दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'आपको सत्य से चुपचाप मुकर जाना था' इस मिसरे में एक बारीक बिंदु की तरफ़…"
6 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "OBO लाइव तरही मुशायरे"/"OBO लाइव महा उत्सव"/"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता के सम्बन्ध मे पूछताछ
"एक बार आपका  "gmail" "Sync" करके देख लीजिए , हो सकता उससे आपका काम हो जाए ।"
8 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"वामन नहीं भाई, मिथिलेश वामनकर साहिब लिखें ।"
20 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब मिथिलेश वामनकर जी आदाब,बहुत अरसे बाद मुशायरे का फीता काटने की बधाई,ग़ज़ल पर पुनः आता हूँ ।"
20 hours ago
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post कभी सदा-ए-दिल-ए-यार जो सुनी होती (३१)
"'ख़ला* न आज मरासिम के बीच होती गर' "ख़ला" शब्द पुल्लिंग है,देखियेगा ।"
yesterday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post कभी सदा-ए-दिल-ए-यार जो सुनी होती (३१)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
ujjain
Native Place
ujjain
Profession
Poet
About me
poet

Samar kabeer's Blog

'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन

1212     1122     1212      22

ग़ज़ल

उठा है ज़ह्न में सबके सवाल,किसकी है

तू जिस पे नाच रहा है वो ताल किसकी है

खड़े हुए हैं सर-ए-राह आइना लेकर

हमारे सामने आए मजाल किसकी है

ज़रा सा ग़ौर करोगे तो जान जाओगे

वतन को आग लगाने की चाल किसकी है

हमें तू बेवफ़ा कहता है ,ये तो देख ज़रा

लबों पे सबके वफ़ा की मिसाल किसकी…

Continue

Posted on January 16, 2019 at 8:30pm — 20 Comments

"तरही ग़ज़ल नम्बर 4

नोट:-

तरही मुशायरा अंक-100 में 87 ग़ज़लें पोस्ट हुईं,मेरी इस ग़ज़ल में जो क़वाफ़ी इस्तेमाल हुए हैं वो बिल्कुल नये हैं ।

पहले सिल पर घिसा गया है मुझे

फिर जबीं पर मला गया है मुझे

जाल हूँ इक सियासी लीडर का

नफ़रतों से बुना गया है मुझे

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे

कहदो तक़दीर से बखेरे नहीं

करके वो एक जा गया है…

Continue

Posted on October 24, 2018 at 5:54pm — 40 Comments

"हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल

कितनी प्यारी ये मनभावन हिन्दी है

भारत की वैचारिक धड़कन हिन्दी है

जो लिखता हूँ हिन्दी में ही लिखता हूँ

मेरी ख़ुशियों का घर आँगन हिन्दी है

रफ़ी, लता,मन्नाडे को तुम सुन लेना

इन सबकी भाषा और गायन हिन्दी है

भारत में कितनी हैं भाषाएँ लेकिन

सारी भाषाओँ का यौवन हिन्दी है

पहले मैं अक्सर उर्दू में लिखता था

अब तो मेरा सारा लेखन हिन्दी है

मुझको तो लगती है ये भाषा…

Continue

Posted on September 13, 2018 at 11:39pm — 33 Comments

"बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"

ग़ज़ल

बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ

मैं नफ़रतों का ही क़िस्सा तमाम करता चलूँ

अब आख़िरत का भी कुछ इन्तिज़ाम करता चलूँ

दिल-ओ-ज़मीर को अपने मैं राम करता चलूँ

जहाँ जहाँ से भी गुज़रूँ ये दिल कहे मेरा

तेरा ही ज़िक्र फ़क़त सुब्ह-ओ-शाम करता चलूँ

अमीर हो कि वो मुफ़लिस,बड़ा हो या छोटा

मिले जो राह में उसको सलाम करता चलूँ

गुज़रता है जो परेशान मुझको करता है

तेरे ख़याल से…

Continue

Posted on September 1, 2018 at 3:12pm — 52 Comments

Comment Wall (21 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:38pm on February 10, 2019, Rafique Nagori said…

बहुत अच्छा और उस्तादाना फन से भरा हुआ कलाम है समर साहब का

At 10:48pm on January 26, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय आपकी कृपा है
At 9:05am on January 25, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय जनाब समर कबीर साहब
प्रणाम
तरही मुशायरा 103 के लिए प्रयास किया है

इत्तिला की फिर से वो न आएँ मुझे न दो
मैं जा चुका हूँ अब तो सदाएँ मुझे न दो

खामोश सच है,झूठ हुआ बातुनी बहुत
उस पे चुप रहने की अदाएँ मुझे न दो

मैं थक चुका हूँ उस का इन्तजार कर कर के
अब और जिंदगी की दुआएँ मुझे न दो

इस बार जो गया न कभी लौट पाउंगा
'हर बार दूर जा के सदाएँ मुझे न दो

आवाम हूँ मुल्क का कुछ तो रहम करो
सब के जुर्म की अब तो सजाएँ मुझे न दो

कृपा कर सुझाव देवें
At 12:57pm on January 14, 2019, गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' said…

कोई बारूद की तरह देखो

सरहदों पर बिछा गया है मुझे ---क्या बात है समर कबीर साहेब लाजवाब अशआर हुए हैं | दाद ही दाद क़ुबूल फ़रमाएं | 

At 11:38am on December 25, 2018, Surkhab Bashar said…

जनाब समर कबीर साहब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही है आपने 

हर शेर का़बिले दाद है 

  • मुबारक बाद कुबूल करें
At 11:39pm on August 19, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय प्रणाम!
एवम् शुक्रिया मैं निरंतर सुधर करूँगा
At 6:09pm on August 7, 2018, Kishorekant said…

आपका आभार आदरणीय समर कबीर जी । आप की सुचना के अनुसार अभ्यास शुरु कर दिया है । आशा है आगे भी आपका मार्गदर्शन मिलता रहेगा ।भूलों के लिये दरगुजर करें ।

At 8:05pm on March 22, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय
समर कबीर महोदय प्रणाम
आपका आदेश सर माथे पर
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 5:21pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर जी
आपका बहुत बहुत शुक्रिया
At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Surkhab Bashar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आली जनाब बलराम धाकड़ साहब आदाब बहुत बहुत  शुक्रिया आपने मुझ ख़ाक सार की ग़ज़ल  आपने पसंद…"
4 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय Balram Dhakar जी ,हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया"
5 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय बासुदेव जी , ग़ज़ल में शिरक़त और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहेदिल से शुक्रिया"
6 minutes ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय mirza javed beig जी ,हौसला अफ़ज़ाई के लिए दिली शुक्रिया"
7 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय लक्ष्मण जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर प्रस्तुति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर।"
34 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीया अंजलि जी, सादर अभिवादन। ग़ज़ल के सभी अशआर ख़ूबसूरत हुए हैं। दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल…"
37 minutes ago
Md. anis sheikh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"सोचते रह गए हम हौसला कर जाना था  आग के दरिया में हमको भी उतर जाना था | क्यूँ बग़ावत नहीं की…"
39 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय दिगंबर जी, सादर अभिवादन। ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर।"
40 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब तस्दीक़ साहब, सादर अभिवादन। ग़ज़ल के सभी अशआर बहुत खूबसूरत हुए हैं। इस सुन्दर ग़ज़ल के लिए शेर दर…"
47 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आदरणीय सुरेंद्र जी, सादर अभिवादन। इस बहुत खूबसूरत प्रस्तुति पर हृदयतल से बधाई स्वीकार करें। सादर।"
49 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर सिरकत , स्नेह व मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार । इंगित कमियों…"
51 minutes ago
Balram Dhakar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब सुरख़ाब साहब, आदाब। यूँ तो सभी शेर क़ाबिले दाद हुए हैं ग़ज़ल में लेकिन, ख़ार ही ख़ार नज़र आये हमें…"
54 minutes ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service