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Samar kabeer
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Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
""ग़ज़ाला" का अर्थ है हिरन का मादा बच्चा । और "ग़ज़ाल" का अर्थ है हिरन का बच्चा ।"
9 hours ago
Samar kabeer commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post कविता(मुक्तछंद) - डटे रहो
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब, अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'शिकारी आ गए हैं देख सारे गजाला की सदा में चीखता हूँ' इस शैर का भाव स्पष्ट नहीं है, 'गजाला' का अर्थ क्या है?"
Monday
Samar kabeer commented on Usha Awasthi's blog post किस्से हैं, कहानी है
"मुहतरमा ऊषा अवस्थी जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।"
Monday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post नकेलें ग़म के मैं नथुनों में डालूँ (६६)
" // मेहमान  को वजन में अधिकतर सुख़नवरोँ के कलाम में २२१ ही देखा है २१२१ नहीं | इतना ही नहीं जिस भी लफ्ज़ में दूसरा अक्षर "ह" होता है उसमें उससे पहले के अक्षर की एक मात्रा गिरती हुई देखी है | जैसे मेहरबानी =१२२२ ,मोहलत =२२ , मेहनत…"
Monday
Samar kabeer commented on SALIM RAZA REWA's blog post सुख उसका दुख उसका है - सलीम 'रज़ा' रीवा
"//उसकी हु/ कूमत है हर सू वो जो चाहे सो होना है' 2 11/ 22 // 'उसकी' शब्द अपने आप में 22 है तो मात्रा पतन करके आप उसे 21 क्यों करना चाहते हैं?"
Monday
Samar kabeer commented on प्रशांत दीक्षित 'सागर''s blog post ग़ज़ल- ज़िन्दगी में
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । ज़िन्दगी में । 'हर मर्ज़ की दवा है,बस प्यार ज़िन्दगी में' इस मिसरे में 'मर्ज़' शब्द ग़लत है,सहीह शब्द है "मरज़",इसकी जगह…"
Sunday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"जनाब सतविन्द्र कुमार राणा जी आदाब,प्रदत्त विषय पर अच्छे दोहे लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'कहीं ख़ुश्कती सांस हैं, कहीं उन्हीं पर ज़ोर।' इस पंक्ति में ' ख़ुश्कती' शब्द किस भाषा का है,और इसका अर्थ क्या है,बताने का…"
Sunday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"मुहतरमा सुनन्दा झा साहिब: आदाब,प्रदत्त विषय पर अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । पानी से ही जीवित रहते ,जीव जंतु या झाड़ ।कम हो तो सूखा कहलाता ,अधिक हुआ तो बाढ़।' इस पद में तुकांतता सहीह नहीं है,देखियेगा ।"
Sunday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब, प्रदत्त विषय पर अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post माँ .....
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्द: कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Samar kabeer commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post नकेलें ग़म के मैं नथुनों में डालूँ (६६)
"जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'मुसीबत आ गई मेहमान बनकर' इस मिसरे में 'मेहमान' को "महमान" कर लें,क्योंकि 'मेहमान' का वज़्न 2121 है ।"
Sunday
Samar kabeer commented on Sushil Sarna's blog post वो ईश तो मौन है ...
"जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत सुंदर और प्रभावशाली रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"जनाब प्रशांत दीक्षित 'सागर' जी आदाब,"जल" विषय पर बहुत सुंदर और प्रभावशाली रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, प्रदत्त विषय पर बहुत अच्छे दोहे लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-108
"जनाब बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी आदाब,प्रदत्त विषय पर अच्छे जनक छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday

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'देखो हिंदौस्तान फूँकता है'

2122 1212 112/22

जिस्म में पहले जान फूँकता है

बाद-अज़-जाँ अज़ान फूँकता है

सब्र कर शब गुज़र ही जाएगी

क्यों ये अपना मकान फूँकता है

अपनी नफ़रत की आग से कोई

देखो हिंदौस्तान फूँकता है

पास आकर वो गर्म साँसों से

मेरे दिल का जहान फूँकता है

आग तो सर्द हो चुकी कब की

क्यों अबस राखदान फूँकता है

हुक्म से रब के ल'अल मरयम का

देखो मुर्दे में जान फूँकता है

रोज़ आयात पढ़…

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Posted on August 6, 2019 at 3:00pm — 9 Comments

एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल

अरकान:-12112 12112

न छाँव कहीं,न कोई शजर

बहुत है कठिन,वफ़ा की डगर

अजीब रहा, नसीब मेरा

रुका न कभी,ग़मों का सफ़र

तलाश किया, जहाँ में बहुत

कहीं न मिला, वफ़ा का गुहर

तमाम हुआ, फ़सान: मेरा

अँधेरा छटा, हुई जो सहर

ग़मों के सभी, असीर यहाँ

किसी को नहीं, किसी की ख़बर

बहुत ये हमें, मलाल रहा

न सीख सके, ग़ज़ल का हुनर

हबीब अगर, क़रीब न हो

अज़ाब लगे, हयात…

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Posted on July 4, 2019 at 2:30pm — 34 Comments

ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा

है उजागर ये हक़ीक़त ओ बी ओ

मुझको है तुझसे महब्बत ओ बी ओ

तेरे आयोजन सभी हैं बेमिसाल

तू अदब की एक जन्नत ओ बी ओ

कहते हैं अक्सर ,ये भाई योगराज

तू है इक छोटा सा भारत ओ बी ओ

सीखने वाले यही कहते सदा…

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Posted on April 1, 2019 at 11:00am — 40 Comments

एक ग़ज़ल रुबाइ की बह्र में

मफ़ऊल मफ़ाईल मफ़ाईल फ़अल

221     1221   1221    12

पाना जो शिखर हो तो मेरे साथ चलो

ये अज़्म अगर हो तो मेरे साथ चलो

दीवार के उस पार भी जो देख सके

वो तेज़ नज़र हो तो मेरे साथ चलो

होती है ग़रीबों की वहाँ दाद रसी

तुम ख़ाक बसर हो तो मेरे साथ चलो

पत्थर पे खिलाना है वहाँ हमको कँवल

आता ये हुनर हो तो मेरे साथ चलो

हर शख़्स वहाँ कड़वा…

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Posted on March 6, 2019 at 5:55pm — 21 Comments

Comment Wall (30 comments)

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At 9:23am on September 8, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय समर क़बीर साहब को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें। ईश्वर सदैव आपको सुख, शाँति और समृद्धि प्रदान करें।हमेशा स्वस्थ रहें और दीर्घायु बनें।उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान हों।

At 12:33am on August 7, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय समर कबीर साहब आदाब जी मैं जरूर ग़ज़ल के शिल्प और व्याकरण पर मेहनत करूँगा यक़ीनन मैं जल्दबाज़ी करने लगा हूँ मुआफ़ी चाहता हूँ
At 8:06pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय समर कबीर साहब आदाब, बहुत शुक्रिया सब आपकी कृपा है कृपा बनी रहे ! आपकी तबीयत ख़राब होने के बावजूद आप समय निकाल कर जो मदद करते है बहुत शुक्रिया!
At 12:24pm on June 27, 2019, Samar kabeer said…

अब एडिट नहीं होगा,संकलन से पहले,वहाँ लिख दें टंकण त्रुटि है ।

At 12:09pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
परम आदरणीय जनाब समर कबीर साहब आदाब, बहुत शुक्रिया आपका बस आपकी कृपा यूँ ही बनी रहे ! आपने ठीक कहा 'यारो ' का यारों हो गया है जो कि मेरी टाइपिंग भूल है
लेकिन मुझसे एडिट नहीं हो पा रहा
At 9:59pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
हौसला बढ़ाने के लिए बहुत शुक्रिया, सब आपकी कृपा है
कृपा दृस्टि बनाये रखें ! आपका आदेश सर माथे पर
At 10:06pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहब
अपेक्षा है की गलतियों को भी इंगित करें
At 12:20pm on March 22, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय समर कबीर साहब आदाब
बहुत शुक्रिया सब आपका ही आशीर्वाद है
कृपा बनायें रखें
At 3:34pm on March 12, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय समर कबीर सर आपके मार्गदर्शन का हमेशा आकांक्षी रहूँगा!
At 11:42pm on February 23, 2019, dandpani nahak said…
जी बहुत शुक्रिया आदरणीय
ये तो आपकी कृपा से ही संभव हुआ है
 
 
 

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"आ. भाई ब्रिजेश जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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"आ. भाई दण्डपाणि जी, हार्दिक धन्यवाद।"
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"आ. भाई सुशील जी, उत्तम दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post छंद मुक्त कविता : रावण दहन
"आ. भाई गणेश जी , बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
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Manoj kumar Ahsaas commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
"इस जानकारी के लिए बेहद शुक्रिया सर मैं इस शेर पर पुनः विचार करता हूँ सादर"
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Samar kabeer commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल
""ग़ज़ाला" का अर्थ है हिरन का मादा बच्चा । और "ग़ज़ाल" का अर्थ है हिरन का बच्चा ।"
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थामूँ तोरी बाँहे गोरी / तिन्ना छंद

2 2 2 2चोरी-चोरी।ओ री छोरी।थामूँ तोरी।बाँहे गोरी।जागे नैना।पूरी रैना।खोएँ चैना।भूले बैना।आजा…See More
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TEJ VEER SINGH replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय सुभाष लखेरा जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।"
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