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Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जनाब महेन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । लगता है आपने ग़ज़ल जल्दबाज़ी में कही है,इसी वजह से कई मिसरे शिल्प से भटक रहे हैं । मतले का ऊला मिसरा यूँ होना था:- 'लिपटी हुई लहू में अगर आसतीं रहे' दूसरे शैर का सानी…"
12 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"मेरे कहे को मान देने के लिए धन्यवाद आपका ।"
36 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जी,ज़रूर,प्रयासरत रहें,और मंच पर अपनी सक्रियता बनाये रखें ।"
41 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"दूसरे शैर का सानी मिसरा यूँ कर लें तो बह्र में हो जाएगा:- 'आसान सब है साथ अगर हमनशीं रहे'"
47 minutes ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"//लगता है आपने बिना सोचे समझे लम्बा कमेन्ट कर दिया । शायद आपने फ़िरोज़ुल लुग़ात की तरफ़ नहीं देखा,आपको अपने सारे कमेन्ट का जवाब मिल जाता ।// जनाब तस्दीक़ साहिब मैं कभी बिना सोचे समझे कमेन्ट नहीं करता । मेरे पास फ़िरोज़ुल लुग़ात का नया एडीशन है जो 2014 में…"
2 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"बहना 'में'और 'मेरा'में तनाफ़ुर नहीं है क्योंकि पहले 'में'के साथ 'ए की मात्रा अनुस्वार के साथ है ।"
15 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जनाब अमित कुमार'अमित'जी आदाब,अभी आपको क़ाफिये की पहचान नहीं है,ओबीओ पर ग़ज़ल की कक्षा का लाभ लें,मुशायरे में सहभागिता के लिए धन्यवाद ।"
15 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ शैर दर शैर मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
15 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जनाब डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास दिल लुभाने वाला है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । कुछ बातें आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा । 'मेरी हरेक साँस में शामिल हो ये दुआ दुनियाँ हमारे यार की हर दम हसीं रहे' इस शैर में…"
15 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"बहना राजेश कुमारी जी आदाब,अरे वाह, क्या बढ़िया ग़ज़ल कही आपने,मज़ा आ गया,मुग्ध हूँ हर शैर पर,बहुत ख़ूब, शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'ये ताज तख़्त'राज'तेरे हो न हों मगर अल्लाह मेरे पाँव के नीचे ज़मीं रहे' मक़्ते में आप…"
16 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
17 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जनाब मुनीष तन्हा साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
17 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"मनजीत कौर जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । कुछ बातें आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा । व्याकरण के हिसाब से आपकी ग़ज़ल का मतला यूँ होना चाहिए:- 'माँगा था रब से,साथ कोई हमनशीं रहे पहलू में मेरे आप सी इक महजबीं रहे' सानी मिसरे…"
17 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । ये ग़ज़ल आपके स्तर की नहीं,लगता है जल्दबाज़ी में कही है । मतले का सानी मिसरा मफ़हूम पैदा करने से क़ासिर है, और क़ाफ़िया 'तुहीं'? हुस्न-ए-मतला में…"
21 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जनाब दिलबाग विर्क जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । दूसरा शैर बह्र से भटक गया है,देखियेगा ।"
21 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-89
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग्गज़ल अभी बहुत समय चाहती है,मुशायरे में सहभाग़िता केलिए धन्यवाद ।"
23 hours ago

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'आपके पास है जवाब कोई'

फ़ाइलातुन मफ़ाइलुन फ़इलुन/फेलुन





मेरे ग़म का है सद्दे बाब कोई

आपके पास है जवाब कोई



सुनके मेरी ग़ज़ल कहा उसने

अपने फ़न में है कामयाब कोई



उतनी भड़केगी आतिश-ए-उल्फ़त

जितना बरतेगा इज्तिनाब कोई



सबसे उनको छुपा के रखता हूँ

तोड़ डाले न मेरे ख़्वाब कोई



पास है जिनके दौलत-ए-ईमाँ

उन पर आता नहीं अज़ाब कोई



कोई उस पर यक़ी नहीं करता

अच्छा बन जाए जब ख़राब कोई



आमने सामने हों जब दोनों

उनको देखे कि माहताब… Continue

Posted on November 12, 2017 at 3:06pm — 28 Comments

"अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा"

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन



अगर वो मुफ़लिसी को रौनक़-ए-बाज़ार कर देगा

कई महरुमियों को बर सर-ए-पैकार कर देगा



सभी ने कर लिया इक़रार, लेकिन जानता है वो

अभी इक आदमी बाक़ी है जो इंकार कर देगा



किताबों में लिखा है उसको जन्नत की बशारत है

वफ़ा की राह में क़ुर्बान जो घर बार कर देगा



मिलाएगा अगर हर बात में जो हाँ में हाँ उसकी

उसे नीलाम वो इक दिन सर-ए-बाज़ार कर देगा



हमारे इश्क़ का चर्चा अभी सरगोशियों तक है

जो बाक़ी काम है वो सुब्ह का… Continue

Posted on November 1, 2017 at 11:44am — 60 Comments

'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फाइलुन



दूर कितनी शादमानी और है

कुछ दिनों की जाँ फिशानी और है



मेरे फ़न की दाद सबने दी मुझे

आपकी बस क़द्रदानी और है



हो चुकीं सब मौत की तैयारियाँ

दोस्तों की नोहा ख़्वानी और है



है ख़बर सबको बहादुर वो नहीं

उसकी वज्ह-ए-कामरानी और है



दास्तान-ए-इश्क़ तो तुम सुन चुके

ज़िन्दगानी की कहानी और है



दोस्तों से तो मुआफ़ी मिल गई

मुझको ख़ुद से सरगरानी और है



लग रहा है उनकी बातों से "समर"

उनके… Continue

Posted on October 22, 2017 at 10:56am — 45 Comments

तरही ग़ज़ल नम्बर 2

नोट :-"तरही मुशायरे में जितनी ग़ज़लें शामिल हुईं, इस ग़ज़ल के क़वाफ़ी उन सबसे अलग हैं"



मफ़ऊल फ़ाइलातु मुफ़ाईल फ़ाइलुन



लेकर गई है हमको जिहालत कहाँ कहाँ

मांगी है तेरे वास्ते मन्नत कहाँ कहाँ



ये आज तेरे पास जो दौलत के ढेर हैं

सच बोल तूने की है ख़ियानत कहाँ कहाँ



अब तक भरी हुई थी जो तेरे दिमाग़ में

फैलाई है वो तूने ग़िलाज़त कहाँ कहाँ



तूने वतन को बेचा है अपने मफ़ाद में

होती है देखें तेरी मज़म्मत कहाँ कहाँ



फ़हरिस्त इसकी अब तो बताना… Continue

Posted on August 2, 2017 at 3:00pm — 27 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 10:54am on October 9, 2016, सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' said…
आदरणीय समर कबीर साहिब प्रणाम आपको।

गजल विधा सिखने का इच्छुक हूँ और मैंने दूसरी गजल आज इस पटल पर रखी है।

आपके आने से मेरा घर जग जगमगाया।

आपक नजर कर मुझे कुछ सुझाव देंगे तो आगे से मुझे कुछ सीखने में मदद मिलेगी। सादर
At 11:29am on September 26, 2016, Kalipad Prasad Mandal said…

आदरणीय समीर कबीर साहिब आदाब , आपको थोड़ा कष्ट दे रहा हूँ क्योंकि ग़ज़ल में जितनी जानकारी आपको है शायद मेरी जानकारी में और कोई नहीं है | मैं कुछ शे'र ग़ालिब के पढ़ रहा था और उनके बहर जांच कर रहा था अपनी जानकारी केलिए | दो शेर में अटक गया हूँ ,नीचे लिखा है :-

बेनिया/जी हद से गुज/री , बन्दा पर/वर कब तलक 

२१२/ २२१ २/           1222        / २२१२ 

हम कहें/गे हाले  दिल, और आ/प फरमाएं/गे क्या 

२१२/     २२१    २ /   २१२ /    १  222   /२२(१२)

गर किया /नासेह ने/ हमको कै/द ,अच्छा यूं स/ही 

२१२/      २२१२/      212     /२२ २१/२ 

ये जुनू/ने -इश्क के /अंदाज़ छुट /जायेंगे क्या 

212/   २२१२/        221२/       2212

कृपया आप इस्नके सही बहर बताने का कष्ट करें |

सादर 

At 11:08pm on September 24, 2016, Samar kabeer said…
सरिता जी आप किस विषय में
पूछ रही हैं ?
At 9:14pm on September 24, 2016, sarita panthi said…
आदरणीय सर क्या मैंने अब सही जगह पोस्ट की है ?
At 3:16pm on September 19, 2016, Dipu mandrawal said…
आदरणीय समीर कबीर जी आपने मेरी कविताओं को पढ़ा और पसंद किया इसके लिए मेरा प्रणाम स्वीकार करें । Dipu Mandrawal
At 12:07pm on July 26, 2016, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय समर सर मेरे मित्रता के निवेदन को स्वीकार करके आपने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है मेरे तकरीबन हर रचना को आपका मार्गदर्शन मिलता  रहा है इससे अगले रचना में एक नयी सोच मिलती है आपका स्नेह और आशीवाद यूं ही सतत मिलता रहे इस कामना के और सदर प्रणाम के साथ सादर 

At 9:46pm on February 1, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय Samar kabeer जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:06am on October 24, 2015, Tasdiq Ahmed Khan said…

janab samar kabeer sahab aadab,    hosla afzayi ke liye shukriya ,  1. ar ka matlab hai agar...aur 2.chhar ka matlab hai  ..khayal.

At 6:40pm on March 18, 2015, pratibha tripathi said…

आदरणीय समर कबीर जी आपको माह कि सर्वश्रेष्ठ रचना के हेतु चुने जाने के लिए बधाई प्रेषित करती हूँ । ये सच है कि ग़ज़ल को लिखना और उसमे खिताब पाना बहुत ही प्रशंशनीय है ,आपको एक बार फिरसे बधाई हो सादर । 

At 7:09pm on March 16, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ०समर कबीर जी

सर्वश्रेष्ठ लेखन  कोई हंसी खेल नहीं  .आपको यह पुरस्कार प्राप्य हुआ . आपको मेरी भूरि-भूरि  बधायी .

 
 
 

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