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Richa Yadav
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Welcome, Richa Yadav "Riya"

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"इससे बढ़कर नहीं कुछ किसी के लिएजी रहे हैं सभी फैमिली के लिए 1"
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"आदरणीय जयनित जी बहुत शुक्रिया आपका सादर"
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"आदरणीय Zaif जी बहुत शुक्रिया आपका, वाक़ई ग़ज़ल निखरी सुझाव से सादर"
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"आदरणीय नाहक जी बहुत शुक्रिया आपका सादर"
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"आदरणीय अमित जी बहुत शुक्रिया आपका,जी ज़रूर सादर"
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"आदरणीय शकूर जी बहुत शुक्रिया ये बात इस तरह विस्तार से समझाने के लिए,आभार सादर"
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"आदरणीय नीलेश जी बहुत शुक्रिया आपका । सादर"
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"आदरणीय नाथ जी बहुत शुक्रिया आपका । सादर"
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"आदरणीय अमीर जी बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका,सभी सुधार कर लिए हैं सादर"
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"जी आदरणीय सुधार किया ,आभार आपका सादर "
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"आदरणीया राखी जी नमस्कार ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार कीजिए गुणीजनों की बात क़ाबिले ग़ौर है सादर"
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"आदरणीय अमित जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार कीजिए  गुणीजनों की इस्लाह से बहतर हुई सादर"
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"आदरणीय आशीष जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार कीजिए,अच्छे सुझाव भी आये ग़ज़ल निखर जाएगी सादर"
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"आदरणीय सालिक जी नमस्कार ख़ूब हुई ग़ज़ल बधाई स्वीकार कीजिए सादर"
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"आदरणीय अमीर जी नमस्कार बहुत ख़ूब हुई ग़ज़ल गिरह ख़ूब बधाई स्वीकार कीजिए सादर"
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"आदरणीय नादिर जी नमस्कार बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार कीजिए,अच्छे अशआर हुए सादर"
Jan 28

Profile Information

Gender
Female
City State
Faridabad Haryana
Native Place
Alaahabad U.P.
Profession
home maker
About me
computer engineer by heart Shayar

Richa Yadav's Blog

ग़ज़ल-हर बात अपने दिल की बताई नहीं जाती।

221 2121 1221 212



हर बात अपने दिल की बताई नहीं जाती

करके कोई दुआ भी यूँ गाई नहीं जाती।1

दिल आपकेे है बस में ये अब जानते हैं हम

जादूगरी ऐसी भी दिखाई नहीं जाती।2

हैं दर्द-ओ-ग़म भरे हुए इतने कि क्या कहें

ये दास्तान दिल की सुनाई नहीं जाती।3

ये बदगुमानी आपकी आई है बीच में

बिगड़ी है इतनी बात बनाई नहीं जाती।4

फिर साथ होगी होली दीवाली की धूम भी

हमसे अकेले ईद मनाई नहीं जाती।5

दिल आपका दुखा तो…

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Posted on December 7, 2020 at 1:29pm — 4 Comments

मिस्मार दिल का ये दर-ओ-दीवार हो गया

बह्र:- 221 2121 1221 212

मिस्मार दिल का ये दर-ओ-दीवार हो गया

मुद्दत हुई तो यार का दीदार हो गया

वो जो चला गया है मेरा शह्र छोड़ कर

लगता है ऐसा मुझको मैं बीमार हो गया

बेमोल ही रहे न किया ज़िंदगी से ग़म

तूने छुआ मुझे तो मैं दीनार हो गया

था मर्ज़ ऐसा जिसकी नहीं थी दवा कोई

तू हाथ थाम कर मेरा तीमार हो गया

तूने गले लगाया "रिया" को मेरे ख़ुदा

लगता है जैसे क़द मेरा मीनार हो गया

"मौलिक व…

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Posted on October 30, 2020 at 3:30pm — 10 Comments

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