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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 94 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रथम चरण दोहा प्रथम, नहीं रचा है ठीक | गौरस से लेकिन बने , सत्य पूत निर्भीक || आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते उत्तम दोहे रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर."
Sunday
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"गोरस पूरित डोल में, विस्तृत सागर क्षीर।मातु चकित है देख के, दुग्ध मुखी गंभीर।दृश्य मनोरम कर गया, मधुमय यह संसार।।........वाह ! वाह ! प्रदत्त चित्र के भावों को पूरी तरह शब्दों में उतार दिया है.  आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी सादर, प्रदत्त…"
Sunday
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"बच्चे का पालन सरल, हों बुजुर्ग जो संग। है एकल परिवार तो,पालन बनता जंग।।............बिलकुल ! सहमत हूँ.  आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते उत्तम और संदेशात्मक  दोहे रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
Sunday
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"आदरणीय तसदीक़ एहमद खान साहब सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र पर रचे दोहे आपको चित्र अनुरूप लगे मेरा रचना कार्य सफल हुआ. आपका बहुत-बहुत आभार. सादर. "
Sunday
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"ग्राम्य लोक का जो मिला, उत्तम हमको चित्र | उसमें रमकर रच दिए , बस कुछ दोहे मित्र || आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, प्रस्तुत दोहा छंदों पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया से मेरे सृजन कार्य को बल मिला है. बहुत-बहुत आभार. सादर. "
Sunday
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"दोहे भाये आपको , सृजन हुआ तब  ख़ास | सफल हुआ मिथिलेश जी, मेरा आज प्रयास || आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी सादर, प्रदत्त चित्र पर रचे दोहों पर आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया पाकर सृजन कार्य सफल हुआ. हार्दिक आभार आपका. सादर. "
Sunday
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"आदरणीया प्रतिभा पांडे जी सादर, प्रस्तुत दोहावली पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया पाकर रचनाकर्म सफल हुआ है. आपका बहुत-बहुत आभार. सादर. मिली बधाई आपसे , छाया है उल्लास | मनभावन दोहावली, है बस एक प्रयास ||"
Sunday
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"खुशबू सचमुच गाँव की, ले आया है चित्र | मिली बधाई आपसे, सफल हुआ मैं मित्र || आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रस्तुत दोहा छंदों को सराहने केलिए आपका हृदयातल से आभार. सादर. "
Sunday
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत दोहों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका अतिशय आभार. सादर. छंद सिखाये आपने, तभी बढ़ा यह चाव | गुरुवर के आशीष से, मुखर हो गये भाव ||"
Sunday
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"आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी सादर, प्रस्तुत दोहों को बेहतरीन पाने केलिए आपका बहुत-बहुत आभार. सादर. "
Sunday
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"'नित-दिन' खटका है मुझे, उत्तम पर संदेश | रहे निरोगी दूग्ध  से , जग में रंक-नरेश || आदरणीया राजेश कुमारी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर सुंदर और सार्थक दोहावाली रची है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. "
Sunday
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"परामुखी ही हो गया, अंतिम दोहा छंद | परिभाषित पर चित्र है, आया है आनंद || आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते सुंदर दोहे रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. "
Sunday
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"माँ दादी की आरजू, सत्य एक श्रीमान | दुग्धपान के दृश्य से, की उत्तम पहचान || आदरणीय तसदीक़ एहमद खान साहब सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र पर सुंदर दोहावली रची है आपने साथ ही बेटा-बेटी में हो रहे फर्क पर चित्र को साधते हुए भी सुंदर दोहे रचे हैं. हार्दिक…"
Sunday
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"नयी नजर से देखकर, किया वीर तैयार | अब तो निश्चित मान लो, दुश्मन का संहार || आदरणीय भाई सत्यनारायण सिंह जी सादर, प्रदत्त चित्र को एक नए नजरिये से देखा है आपने और समसामयिक परिस्थिति अनुसार रंग देकर उत्तम दोहे रचे हैं. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें.…"
Sunday
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"सत्य गाय का दूध है, माँ के दूध समान | पोषण पर छह माह ले, माँ से ही संतान || आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर नमस्कार, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते सुन्दर दोहे रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. "
Sunday
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"दोहे.   अपनापन कहते किसे, क्या होता है प्यार | सिखलाता है चित्र यह , बार-बार हरबार ||   गोरस पीता मग्न हो , दूधमुँहा नादान | अचरज से माँ देखती, ले मुख पर मुस्कान ||   झिझक रही है माँ मगर, दादी ने ली ठान | पय पीकर ही पूत यह, होगा कल…"
Saturday

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Ujjain
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Ujjain
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service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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Ashok Kumar Raktale's Blog

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

रसाला छंद एक प्रयास – (भ न ज भ ज ज ल)

जीवन विषम अबोध , जानकर ना डर मानव |

प्राप्त प्रथम कर ज्ञान, ज्ञान बिन पार न हो भव ||

अंतर तल अँधियार , दूर कर रोशन हो मग |

हो जगमग हर पंथ , पंथ अति रोशन हो जग ||

 

श्रेष्ठ जटिल हर कर्म, है मनुज उन्नति दायक |

भूल बिसर मत कृत्य, सत्य हर भूपति नायक ||

भूमि सतह पर स्वर्ग, कर्म बिन हो कब संभव |

जीवन पथ पर कर्म , धर्म सम भूल न मानव ||

 

मानव परहित कार्य , हैं न बस दाहकता दुख |

कष्ट सहन कर लाख, एक यदि जीवन का सुख…

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Posted on September 22, 2017 at 1:30pm — 2 Comments

आया मधुमास (अति बरवै पर आधारित गीत)

सजनी ने साजन को, खींच लिया पास |

अमराई फूल गई, आया मधुमास ||

  

धूप खिली निखरी-सी, आयी मुस्कान |

बागों में छेड़ दिया, भँवरों ने तान ||

कलियों के मन जागी, खिलने की आस......... 

खिड़की से झाँक रही, जिद्दी है धूप |

रंग बिना लाल हुआ, गोरी का रूप  ||

सखियों की सुधियों में, कौंधा परिहास........... 

 

डाली है अल्हड पर , फिरभी है भान |

बौराए महुए के , खींच रही कान ||

महक रहे वन-कानन, महका…

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Posted on February 2, 2017 at 11:00pm — 21 Comments

‘वागीश्वरी’ सवैया पर एक प्रयास

१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२

भजो राम को या भजो श्याम को या, भजो नित्य ही मित्र माँ बाप को |

चुनों धर्म का मार्ग सच्चा हमेशा , बढ़ावा न देना कभी पाप को,

सिखाना सभी को सिखाना स्वतः को, भुलाना यहाँ व्यर्थ संताप को,

नई ये हवाएं कहें क्या सुनो तो, सुनो थाप को वक्त की चाप को ||

तजो लाज सारी करो कर्म अच्छे, रहोगे जहां में तभी शान से |

न लेना किसी का न देना किसी का, जिलाता यही मार्ग सम्मान से,

बिना कर्म पाते सभी दुःख देखो,…

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Posted on November 5, 2016 at 10:53pm — 9 Comments

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At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

At 11:53pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

 
 
 

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