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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त विषय पर जनता को जागरूक करने का प्रयास करती सुंदर दोहावली रची है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. छंद के मान से कुछ जगह सुधार की संभावना भी रह गई है. सादर "
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"आदरणीया बबिता गुप्ता जी सादर, प्रस्तुत छंद रचना को सराहने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार. सादर. "
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"आदरणीया राजेश कुमारी जी सादर नमस्कार, प्रस्तुत छंदों पर आपकी सुन्दरतम प्रतिक्रिया से सृजन कार्य सार्थकता पा गया. आपका बहुत-बहुत आभार. सादर. "
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर आपकी सराहना से रचना को मान मिला है. हार्दिक आभार आपका. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"आदरणीय भाई नादिर खान साहब सादर, प्रस्तुत छंदों पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया सृजन को सफलता प्रदान कर रही है. हार्दिक आभार आपका. सादर. "
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, आपकी सराहना से मेरे प्रयास को बल मिला है. आपका दिली शुक्रिया. सादर "
Saturday
dandpani nahak left a comment for Ashok Kumar Raktale
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"ठेठ चुनावी वादे-सी है बात तुम्हारी मानूँ कैसे?..........वाह ! खूब.  आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, प्रदत्त विषय पर सुंदर प्रस्तुति है आपकी. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. "
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"हमें ‘‘महादानी’’ घोषित कर,हमारी ही गर्दन पर सवार होपेट में लात मारेंगे।और हम!चंद टुकड़ों के बदलेपूछ हिलाते अपनी वफादारी.. ..सतत निभाएंगे!!!...........वाह ! सत्य कहा है साहब.  आदरणीय टी आर शुक्ल साहब सादर, प्रदत्त विषय पर…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"कितने निर्वर हो गए, देखो नेता आज। झूठे वादों से करें, जन मानस पर राज।। ५...........वाह ! बहुत खूब. आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, प्रदत्त विषय पर सुन्दर दोहावली रची है आपने. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर "
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी सादर, प्रदत्त विषय पर नेताओं की सच्चाई दर्शाती खुबसूरत गजल हुई है.हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर."
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"आदरणीय हरिहर झा साहब सादर, प्रदत्त विषय पर  चुनाव में नेताओं की कारीगिरी और जनता की लाचारगी पर बहुत सुन्दर नवगीत रचा है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर. "
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"कुण्डलिया   झूठा है जो झूठ को, बना रहा हथियार | अपनी कुछ कहता नहीं, बाक़ी कहे हजार || बाकी कहे हजार , बुराई उसकी इसकी, वादों से कब मित्र, भरी है झोली किसकी, सुनकर कवि से सत्य, सदा ही वह तो रूठा, वादे फिरभी झूठ, कर रहा नेता झूठा ||   आये…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"जुगाड़ की राजनीति में सिद्धांतों से परे झूठे वादों की पोटली लिए जारी है कोशिशें हर मौके को कैश करा लेने की ........सत्य कहा है साहब. यह तो अब एक नया सिद्धांत ही तैयार हो गया है 'चुनावी सिद्धांत' काम ... इच्छा और संघर्ष चाहता है ईमानदारी का…"
Apr 13
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"कुछ अधमरे साँप सपेरों के पिटारों से निकल कर जंगल की तरफ़ भागने लगे  पूछा तो बोले पाँच साल से क़ैद में थे  अब और नये साँप आ गये तो हम जान बचाकर भाग निकले ..............वाह ! आपने यह कहा तो व्यंग में है किन्तु सच मानों तो हर बार और विषैले…"
Apr 13
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-102
"छन्न पकैया छन्न  पकैया, मति  का  ताला खोलो।  वोट किसे देना है़ तुमको, पहले मन में तोलो॥..............वाह ! सत्य कहा है. मगर मन कुछ कहता है दिल  कुछ कहता है और गलतियां होती जा रहीं है. आदरणीया राजेश कुमारी जी सादर नमस्कार,…"
Apr 13

Profile Information

Gender
Male
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Ujjain
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Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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Ashok Kumar Raktale's Blog

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

रसाला छंद एक प्रयास – (भ न ज भ ज ज ल)

जीवन विषम अबोध , जानकर ना डर मानव |

प्राप्त प्रथम कर ज्ञान, ज्ञान बिन पार न हो भव ||

अंतर तल अँधियार , दूर कर रोशन हो मग |

हो जगमग हर पंथ , पंथ अति रोशन हो जग ||

 

श्रेष्ठ जटिल हर कर्म, है मनुज उन्नति दायक |

भूल बिसर मत कृत्य, सत्य हर भूपति नायक ||

भूमि सतह पर स्वर्ग, कर्म बिन हो कब संभव |

जीवन पथ पर कर्म , धर्म सम भूल न मानव ||

 

मानव परहित कार्य , हैं न बस दाहकता दुख |

कष्ट सहन कर लाख, एक यदि जीवन का सुख…

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Posted on September 22, 2017 at 1:30pm — 2 Comments

आया मधुमास (अति बरवै पर आधारित गीत)

सजनी ने साजन को, खींच लिया पास |

अमराई फूल गई, आया मधुमास ||

  

धूप खिली निखरी-सी, आयी मुस्कान |

बागों में छेड़ दिया, भँवरों ने तान ||

कलियों के मन जागी, खिलने की आस......... 

खिड़की से झाँक रही, जिद्दी है धूप |

रंग बिना लाल हुआ, गोरी का रूप  ||

सखियों की सुधियों में, कौंधा परिहास........... 

 

डाली है अल्हड पर , फिरभी है भान |

बौराए महुए के , खींच रही कान ||

महक रहे वन-कानन, महका…

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Posted on February 2, 2017 at 11:00pm — 21 Comments

‘वागीश्वरी’ सवैया पर एक प्रयास

१२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२२ १२

भजो राम को या भजो श्याम को या, भजो नित्य ही मित्र माँ बाप को |

चुनों धर्म का मार्ग सच्चा हमेशा , बढ़ावा न देना कभी पाप को,

सिखाना सभी को सिखाना स्वतः को, भुलाना यहाँ व्यर्थ संताप को,

नई ये हवाएं कहें क्या सुनो तो, सुनो थाप को वक्त की चाप को ||

तजो लाज सारी करो कर्म अच्छे, रहोगे जहां में तभी शान से |

न लेना किसी का न देना किसी का, जिलाता यही मार्ग सम्मान से,

बिना कर्म पाते सभी दुःख देखो,…

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Posted on November 5, 2016 at 10:53pm — 9 Comments

Comment Wall (25 comments)

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At 10:20pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

At 1:51pm on February 27, 2013, Meena Pathak said…

सादर आभार 

 
 
 

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