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TEJ VEER SINGH
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TEJ VEER SINGH commented on Mohammed Arif's blog post बारिश की क्षणिकाएँ
"हार्दिक बधाई आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी।बेहतरीन क्षणिकायें।"
1 hour ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post खरा सोना - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी।कुछ लोग अति अनुशासन प्रिय होते हैं। एक कारण यह भी हो सकता है।"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on TEJ VEER SINGH's blog post खरा सोना - लघुकथा –
"आदरणीय तेजवीर जी आदाब,                          आजकल हमारे समाज में संतान को लेकर काफी अपेक्षाएँ बढ़ गई है । सारी उम्मीदें और सपनें हम संतान में देखते हैं । इस चक्कर में हम बच्चों को…"
3 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ख्वाब कोई तो मचलना चाहिए
"हार्दिक बधाई आदरणीय बसंत कुमार जी।बेहतरीन गज़ल। आये’ जब भी आँच अपने मान और सम्मान पर तब हमारा रक्त थोड़ा तो उबलना चाहिए"
12 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल। कर्ज कुछ तो वतन का है तुम पर।खून को दागदार मत करना ।।"
12 hours ago
TEJ VEER SINGH posted a blog post

खरा सोना - लघुकथा –

खरा सोना - लघुकथा –आज मेरा अखबार नहीं आया था तो सुबह नाश्ते के बाद अपने मित्र जोगिंदर सिंह के घर अखबार पढ़ने की गरज़ से टहलते टहलते पहुँच गया।जैसे ही लोहे का गेट खोल कर अंदर घुसा तो देखा कि जोगिंदर का बेटा धूप में खड़ा किताब पढ़ रहा था।मैं उससे इसकी वज़ह पूछने ही वाला था कि जोगिंदर ने आवाज़ लगा दी,"आजा भाई मलिक, क्या सही वक्त पर आया है। चाय आ रही है"।मैंने कुर्सी जोगिंदर के पास खींचते हुए पूछा,"भाई, यह तेरा छोरा इतनी तेज़ धूप में क्यों पढ़ रहा है। इससे क्या दिमाग तेज़ चलता है"?"अरे नहीं यार उसे सज़ा मिली…See More
12 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Sushil Sarna's blog post हार ....
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी। बेहतरीन प्रस्तुति।"
Saturday
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी। बेहतरीन गज़ल। सत्ता में बैठ कर वो बहुत माल खा रहा ।यह बात भी कहीं तो उछाला करे कोई ।।"
Saturday
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post निकम्मा - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज'जी।"
Saturday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on TEJ VEER SINGH's blog post निकम्मा - लघुकथा –
"वाह आदरणीय बहुत ही ग़ज़ब की लघु कथा है वाकई..पढ़ते हुए बहुत अच्छा लगा.."
Friday
TEJ VEER SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post कुछ कही कुछ अनकही है
"हार्दिक बधाई आदरणीय बसंत कुमार जी।बेहतरीन गज़ल। इस कदर छाया है दिल पर हर जगह दिखता वही है"
Friday
TEJ VEER SINGH commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास
"हार्दिक बधाई आदरणीय मनोज अहसास जी।बेहतरीन गज़ल। ये समझ आता नही अपनो में बेगाना है कौनमतलबी शर्तें जुड़ी है हर किसी सहयोग में"
Friday
TEJ VEER SINGH commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- ख़ुद-परस्ती का दायरा क्या था / दिनेश कुमार
"हार्दिक बधाई आदरणीय दिनेश कुमार जी।बेहतरीन गज़ल। क्यों मैं बर्बादियों का सोग करूँजब मैं आया, यहाँ मेरा क्या था"
Friday
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post निकम्मा - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय राजेश कुमारी जी।"
Friday
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post निकम्मा - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोरे जी।"
Friday

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on TEJ VEER SINGH's blog post निकम्मा - लघुकथा –
"सच में दिल छू गई लघु कथा आद० तेजवीर सिंह जी ..बेहतरीन "
Thursday

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RETIRED GOVT.SERVANT
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STARTED SHORT STORY WRITING FROM LAST TWO YEARS

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खरा सोना - लघुकथा –

खरा सोना - लघुकथा –

आज मेरा अखबार नहीं आया था तो सुबह नाश्ते के बाद अपने मित्र जोगिंदर सिंह के घर अखबार पढ़ने की गरज़ से टहलते टहलते पहुँच गया।

जैसे ही लोहे का गेट खोल कर अंदर घुसा तो देखा कि जोगिंदर का बेटा धूप में खड़ा किताब पढ़ रहा था।

मैं उससे इसकी वज़ह पूछने ही वाला था कि जोगिंदर ने आवाज़ लगा दी,"आजा भाई मलिक, क्या सही वक्त पर आया है। चाय आ रही है"।

मैंने कुर्सी जोगिंदर के पास खींचते हुए पूछा,"भाई, यह तेरा छोरा इतनी तेज़ धूप में क्यों पढ़ रहा है। इससे क्या दिमाग तेज़…

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Posted on July 16, 2018 at 10:14pm — 2 Comments

निकम्मा - लघुकथा –

निकम्मा - लघुकथा –

 धर्मचंद जी शिक्षा विभाग से रिटायर अधीक्षक थे। चार बेटे थे। सभी पढ़े लिखे थे। सबसे बड़ा डाक्टर था जो अमेरिका में बस गया था। दूसरा इंजीनियर आस्ट्रेलिया में था। तीसरा दिल्ली में प्रोफ़ेसर था। चौथा बेटा भी पूर्ण रूप से शिक्षित था। जॉब भी मिल रहे थे मगर दूसरे शहरों में। लेकिन वह माँ बापू को अकेले छोड़ने के पक्ष में नहीं था।अतः वह इसी प्रयास में था कि उसे अपने ही शहर में नौकरी मिले।लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अंततः उसने पिता की सलाह पर मकान के बाहरी हिस्से में एक मेडीकल स्टोर खोल…

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Posted on July 10, 2018 at 1:21pm — 15 Comments

समय बड़ा बलवान - लघुकथा –

समय बड़ा बलवान - लघुकथा –

माँ मरणासन्न स्थिति में चारपाई पर पड़ी थी। संजीव चारपाई के पास बैठा आँसू बहा रहा था।

"क्यों रोये जा रहा है पगले? जाना तो सभी को एक दिन पड़ता ही है"।

"माँ, मैं इसलिये नहीं रो रहा हूँ। मेरे रोने की वज़ह कुछ और है"?

"अरे सब भूल जा अब। मेरा आखिरी वक्त है, खुशी खुशी विदा कर दे”|

"नहीं माँ, मैं जीवन भर सुशीला को माफ़ नहीं कर सकूंगा"?

"ओह, तो तू अपनी घरवाली सुशीला से नाराज है क्योंकि वह तेरे साथ मुझे देखने नहीं आई"?

"माँ, तू बहुत…

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Posted on July 5, 2018 at 5:16pm — 16 Comments

थप्पड़  -  लघुकथा –

थप्पड़  -  लघुकथा –

आज तीन साल बाद सतीश जेल से छूट रहा था। उसे सोसाइटी के मंदिर में चोरी के इल्ज़ाम में सज़ा हुई थी| घरवालों ने गुस्से में ढंग से केस की पैरवी भी नहीं की थी। । पिछले तीन साल के दौरान भी कोई उसे मिलने नहीं गया था। इसलिये घर में सब किसी अनहोनी  के डर से आशंकित  थे|

जेल से जैसे ही सतीश बाहर आया तो देखा कि उसे जेल पर लेने कोई नहीं आया । उसने कुछ दोस्तों को फोन किये, जो चोरी के माल में ऐश करते थे। लेकिन सब  बहाना बना कर टालमटोल कर गये।

घर पर पहुंच कर पता चला कि…

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Posted on July 2, 2018 at 4:30pm — 16 Comments

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At 4:09pm on December 8, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीय तेजवीर सिंह जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें। 

At 8:19pm on December 4, 2015, kanta roy said…

वाह ! आदरणीय तेजवीर जी , गौरव का ये पल , आपका माह के सक्रीय सदस्य  चुने जाने के उपलक्ष्य में बहुत ख़ुशी महसूस हुई।  बधाई प्रेषित है।  

At 12:21pm on November 29, 2015, amod shrivastav (bindouri) said…
माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिए हार्दिक बधाई नमन सर
At 12:57pm on November 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तेज वीर सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:39pm on May 29, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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"आ0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर साहब सप्रेम आभार और तहे दिल से शुक्रिया ।"
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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 तेजवीर सिंह साहब ग़ज़ल तक आने के लिए तहे दिल से शुक्रिया और आभार व्यक्त करता हूँ ।"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर बहुत बहुत आभार और तहे दिल से शुक्रियः । मैंने रब्त बनाने का प्रयास किया था सम्भवतः…"
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"आ0 बबिता गुप्ता जी हार्दिक आभार ।"
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"आ0 तेजवीर सिंह साहब बहुत बहुत शुक्रिया ।"
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"आ. भाई दिनेश जी, बहुत अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी सादर अभिवादन । सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई।"
1 hour ago

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