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TEJ VEER SINGH
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TEJ VEER SINGH commented on Rahila's blog post ***माँ का वेलेंटाइन***(लघुकथा)राहिला
"हार्दिक बधाई आदरणीय राहिला आसिफ़ जी। बेहतरीन लघुकथा।एक यथार्थ को आपने लघुकथा में तब्दील कर दिया। सच में किताबों से बढ़कर कोई दोस्त नहीं होता।सादर।"
Tuesday
TEJ VEER SINGH commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post सामाजिक विद्रूपताओं पर एक गीत (वीर रस)
"हार्दिक बधाई आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'जी।लेखकीय जिम्मेवारी का पूर्ण निर्वहन करते हुये एक बेहतरीन,समसामयिक और कटाक्षपूर्ण गीत।"
Feb 11
TEJ VEER SINGH commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post आशियाँ' - लघुकथा
"हार्दिक बधाई आदरणीय वीर मेहता जी। एक बेहतरीन सशक्त लघुकथा।मज़ा आगया।शुरू से अंत तक लाज़वाब।"
Feb 10
TEJ VEER SINGH commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post एक गीत पिता के नाम
"हार्दिक बधाई आदरणीयसुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप जी।बेहतरीन प्रस्तुति।"
Feb 9
TEJ VEER SINGH commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (तुम्हारे ख़त जो मेरे नाम पर नहीं आते)
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'जी।बेहतरीन गज़ल। भला भी वक़्त तुम्हारे लिये बुरा होगा सलीक़े जीने के तुमको अगर नहीं आते"
Feb 9
TEJ VEER SINGH commented on विनय कुमार's blog post जरुरत- लघुकथा
"हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी।हृदय स्पर्शी लघुकथा।"
Feb 9
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post भीड़तंत्र - लघुकथा
"हार्दिक आभार आदरणीय राजेश कुमारी जी।"
Feb 7
TEJ VEER SINGH commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post पकोड़े (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी। पकोड़ा पुराण पर बेहतरीन विश्लेषण करती उत्तम लघुकथा।"
Feb 7
TEJ VEER SINGH commented on rajesh kumari's blog post आया अगर शबाब तकब्बुर भी आयेगा'(ग़ज़ल 'राज')
"हार्दिक बधाई आदरणीय राजेश कुमारी जी। लाज़वाब गज़ल। आना न मेरी जिन्दगी में तुम कभी सनम ,आए तो फुर्कतों का तसव्वुर भी आयेगा'कमसिन रहे वो नाज़नीं यारो दुआ करोआया अगर शबाब तकब्बुर भी आयेगा'"
Feb 7
TEJ VEER SINGH commented on Mohammed Arif's blog post कविता--बहुत बेईमानी लगता है
"हार्दिक बधाई आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ साहब जी। बेहतरीन कविता।"
Feb 7
TEJ VEER SINGH commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने तुम्हारे वास्ते क्या क्या नहीं किया - सलीम रज़ा
"हार्दिक बधाई आदरणीय सलीम रज़ा रेवा साहब जी। बेहतरीन गज़ल। उससे भला उम्मीद-ए-वफा किस तरह करें जिसने किसी के साथ भी अच्छा नहीं किया"
Feb 7

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on TEJ VEER SINGH's blog post भीड़तंत्र - लघुकथा
"अच्छा व्यंग कसा है आज की राजनीति और क़ानून व्यवस्था पर सच भी है जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली बात हो रही है . बहुत बहुत बधाई आद० तेजवीर सिंह जी "
Feb 6
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post भीड़तंत्र - लघुकथा
"हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।आदाब। बस इसी तरह खोज खबर देते रहिये और मेल मिलाप बनाये रखिये।सादर।"
Feb 5
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post भीड़तंत्र - लघुकथा
"हार्दिक आभार आदरणीय सलीम रज़ा रेवा साहब जी।"
Feb 5
SALIM RAZA REWA commented on TEJ VEER SINGH's blog post भीड़तंत्र - लघुकथा
"वाह वाह.. तेजवीर सिंह जी.. बहुत खूबसूरत लघुकथा हुई है मुबारक़बाद कुबूल फरमाएं"
Feb 5
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post भीड़तंत्र - लघुकथा
"हार्दिक आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी।"
Feb 5

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भीड़तंत्र - लघुकथा

 इंडिया गेट पर गुलाब सिंह अपने औटो से  जा रहा था। तभी वहाँ तैनात हवलदार रोशन ने उसे रोक दिया।

"आज इधर से वाहनों के लिये मार्ग बंद है। केवल पैदल यात्री ही जा सकते हैं"।

"भाई, आज अचानक ऐसा क्यों"?

"इस में इतना चोंकने वाली क्या बात है। आज मंत्री जी की रैली है"।

"वह किसलिये"?

 "मंत्री जी के दामाद को गिरफ़्तार ना किया जाय, इसलिये"।

"ऐसा क्या किया है उनके दामाद ने"?

 "उनका दामाद दरोगा है, उसने अपने ही मातहत एक हवलदार की पत्नी के साथ बलात्कार किया…

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Posted on February 3, 2018 at 11:00am — 16 Comments

घुटन – लघुकथा  -

घुटन – लघुकथा  -

"जुम्मन मियाँ, यह क्या हो गया हमारे शहर को। तिरंगा फ़हराने  को लेकर दंगा फ़साद और मोतें"?

"सुखराम जी, यह केवल हमारे शहर का मसला नहीं है। ऐसी खतरनाक़ हवायें तो सारे देश में चल रहीं हैं। कहीं झंडे को लेकर, कहीं गाय को लेकर और कहीं मंदिर के बहाने"।

"अरे मियाँ, आजकल तो बलात्कार की भी बाढ़ सी आगयी है। वह भी नाबालिग बच्चियों के साथ। पता नहीं, ईश्वर कहाँ सोया पड़ा है"?

"सुखराम भाई, सब कुछ ईश्वर के भरोसे थोड़े ही चलता है। हमारी सरकार और प्रशासन की भी तो कोई…

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Posted on January 30, 2018 at 2:15pm — 16 Comments

लघुकथा - प्यास  –

 लघुकथा - प्यास  –

फ़ौज़ी सौदान सिंह रात के गस्त पर था। उसकी पीने के पानी की बोतल खाली हो गयी। उसे प्यास लगी थी| इधर उधर नज़र दौड़ाई। यूनिट की चौकी बहुत दूर थी।

अचानक उसकी नज़र एक किसान पर पड़ी जो खेत में सिंचाई कर रहा था। सौदान सिंह को लगा कि उसके पास पानी अवश्य मिलेगा। अतः वह उसके पास चला आया,

"भाई जी, क्या आपके पास पीने का पानी मिलेगा"?

"वीर जी, तुम्हारी कौम क्या है"?

"भाई जी, आपके इस सवाल का पानी से क्या ताल्लुक़ है"?

" वीर जी, ताल्लुक़ है तभी तो पूछा…

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Posted on January 27, 2018 at 6:42pm — 10 Comments

बसंत - लघुकथा –

बसंत - लघुकथा –

रजनी के पति का जन्म बसंत पंचमी को हुआ था इसलिये घरवालों ने उसका नाम बसंत ही रख दिया था। रजनी उसके जन्म दिन को खूब जोश  के साथ मनाती थी। शादी को चार साल हुए थे लेकिन अभी तक उसकी गोद खाली थी। इसका एक मुख्य कारण उसके पति का सेना में होना भी था। चूंकि बसंत की तैनाती सीमा पर थी अतः परिवार साथ नहीं रख सकता था।

अभी कुछ दिन पहले एक फोन आया था कि बसंत लापता है, तलाश जारी है। रजनी के अरमानों पर तो मानो वज्रपात हो गया था। वह बसंत के जन्म दिन के लिये क्या क्या सपने बुन रही…

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Posted on January 22, 2018 at 6:20pm — 14 Comments

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At 4:09pm on December 8, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीय तेजवीर सिंह जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें। 

At 8:19pm on December 4, 2015, kanta roy said…

वाह ! आदरणीय तेजवीर जी , गौरव का ये पल , आपका माह के सक्रीय सदस्य  चुने जाने के उपलक्ष्य में बहुत ख़ुशी महसूस हुई।  बधाई प्रेषित है।  

At 12:21pm on November 29, 2015, amod srivastav (bindouri) said…
माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिए हार्दिक बधाई नमन सर
At 12:57pm on November 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तेज वीर सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:39pm on May 29, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

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