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TEJ VEER SINGH
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TEJ VEER SINGH posted a blog post

कब तक  - लघुकथा –

कब तक  - लघुकथा –"अम्मा, ये सारी टोका टोकी, रोकथाम केवल मेरे लिये ही क्यों है?""यह सब तेरी भलाई के लिये ही है बिटिया।""क्या अम्मा?, मेरी भलाई के अलावा कभी भैया के बारे में भी सोच लिया करो।""अरे उसका क्या सोचना? मर्द मानुष है, जैसा भी है सब चल जायेगा।""इसलिये उसके किसी काम में रोकटोक नहीं।रात को बारह बजे आये तो भी चलेगा।और मैं दिन में भी अकेली कहीं नहीं जा सकती।"“तू समझती क्यों नहीं मेरी बच्ची?""क्या समझूं अम्मा? भैया बारहवीं में तीन साल से फेल हो रहा है लेकिन उसकी पढ़ाई चालू है। मैंने दसवीं में…See More
22 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मुझे भी पढ़ना है - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब जी।आदाब।"
Thursday
Samar kabeer commented on TEJ VEER SINGH's blog post मुझे भी पढ़ना है - लघुकथा –
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब, अच्छी लघुकथा लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post मुझे भी पढ़ना है - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।"
Nov 22
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on TEJ VEER SINGH's blog post मुझे भी पढ़ना है - लघुकथा –
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी प्रेरणादायक और समस्यामूलक कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Nov 21
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मुफलिसी में ही जिसका गुजारा हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।लाज़वाब गज़ल। उसको जूठन का मतलब न समझाइएजिस ने पहना हो  सब का उतारा हुआ।२ कौन ले थाह  उस की  सघन पीर कीवोट जिस को  दिया  वो नकारा हुआ।६। *"
Nov 21
TEJ VEER SINGH posted a blog post

मुझे भी पढ़ना है - लघुकथा –

मुझे भी पढ़ना है - लघुकथा –"ऐ सुमन, मुन्ना नहीं दिखाई दे रहा?""काहे परेशान हो? अभी आ जायेगा।""अरे तू समझती काहे नहीं है। यह गाँव देहात नहीं है।शहर का मामला है। एक मिनट में बच्चा गायब हो जाता है।""हम सब जानते हैं इसलिये उसकी दादी माँ भी साथ गयी हैं।""अरे मगर गये कहाँ हैं वे दोनों?""और कहाँ जायेंगे? दो साल से स्कूल जाने का सपना मन में पाल रखा है। स्कूल की प्रार्थना की घंटी सुनते ही दौड़ जाता है।""अब क्या करें सुमन? घर की माली हालत तो तुम देख ही रही हो। काम धंधा सब इस कोरोना बीमारी ने चौपट कर…See More
Nov 21
TEJ VEER SINGH commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुमसे ग़ज़ल ने कुछ नहीं बोला?
"हार्दिक बधाई आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज' जी। बेहतरीन गज़ल। एक  पत्थर  झील में  फेंका कि जुम्बिश होझील के  खामोश जल ने कुछ नहीं  बोला"
Nov 20
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post छोटू - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज जी।"
Nov 19
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post खंडित मूर्ति - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज जी।"
Nov 19
TEJ VEER SINGH commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : मज़ा (गणेश जी बाग़ी)
"हार्दिक बधाई आदरणीय गणेश जी बागी जी। लाज़वाब लघुकथा।कितने कम शब्दों में कितनी गहरी बात। बहुत खूब।"
Nov 19
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दीपावली - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' ( गजल )
"हार्दिक बधाई आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी। लाज़वाब गज़ल। घुट गया है आज तम का दम अकेले में यहाँकह रही झोपड़  अटारी  पर सजी दीपावली।५।**"
Nov 19
TEJ VEER SINGH commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय समर कबीर साहब जी।आदाब। लाज़वाब गज़ल। ज़िल्ल-ए-सुब्हानी अगर कुछ आपसे बच पाए तोहम ग़रीबों को भी थोड़ी शादमानी चाहिए"
Nov 19
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post लूटा गया था रात में अस्मत को जिसकी ढब -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी। लाज़वाब गज़ल। हाकिम हुआ मगर न हुई जन की पीर निजनीरो सा फिर ये कौन  रियासत में आ गया।६"
Nov 3
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on TEJ VEER SINGH's blog post खंडित मूर्ति - लघुकथा –
"एक और बेहतरीन लघु कथा आदरणीय बधाई...अंतिम से पहली पंक्ति हालाँकि नकारात्मक है लेकिन लघु कथा की जान वही है।"
Nov 1
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on TEJ VEER SINGH's blog post छोटू - लघुकथा –
"बहुत ही शानदार भाव चित्रण है आदरणीय...लघु कथा गागर में सागर की तरह ही होनी चाहिए।जिसे पढ़ कर तृप्ति भी हो और प्यास भी।"
Nov 1

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कब तक  - लघुकथा –

कब तक  - लघुकथा –

"अम्मा, ये सारी टोका टोकी, रोकथाम केवल मेरे लिये ही क्यों है?"

"यह सब तेरी भलाई के लिये ही है बिटिया।"

"क्या अम्मा?, मेरी भलाई के अलावा कभी भैया के बारे में भी सोच लिया करो।"

"अरे उसका क्या सोचना? मर्द मानुष है, जैसा भी है सब चल जायेगा।"

"इसलिये उसके किसी काम में रोकटोक नहीं।रात को बारह बजे आये तो भी चलेगा।और मैं दिन में भी अकेली कहीं नहीं जा सकती।"

“तू समझती क्यों नहीं मेरी बच्ची?"

"क्या समझूं अम्मा? भैया बारहवीं में तीन साल…

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Posted on November 28, 2020 at 9:52am

मुझे भी पढ़ना है - लघुकथा –

मुझे भी पढ़ना है - लघुकथा –

"ऐ सुमन, मुन्ना नहीं दिखाई दे रहा?"

"काहे परेशान हो? अभी आ जायेगा।"

"अरे तू समझती काहे नहीं है। यह गाँव देहात नहीं है।शहर का मामला है। एक मिनट में बच्चा गायब हो जाता है।"

"हम सब जानते हैं इसलिये उसकी दादी माँ भी साथ गयी हैं।"

"अरे मगर गये कहाँ हैं वे दोनों?"

"और कहाँ जायेंगे? दो साल से स्कूल जाने का सपना मन में पाल रखा है। स्कूल की प्रार्थना की घंटी सुनते ही दौड़ जाता है।"

"अब क्या करें सुमन? घर की माली हालत तो तुम…

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Posted on November 20, 2020 at 6:22pm — 4 Comments

खंडित मूर्ति - लघुकथा –

खंडित मूर्ति - लघुकथा –

"सुमित्रा, यह लाल पोशाक वाली लड़की तो वही है ना जिसकी खबर कुछ महीने पहले अखबार में छपी थी।"

"हाँ माँ यह वही है।"

"इसके साथ स्कूल के चपरासी ने जबरदस्ती की थी ना।"

"हाँ माँ,वही है। आप क्या कहना चाहती हो?"

"मैं यह कहना चाहती हूँ कि इसे पूजा में किसने बुलाया?"

"माँ यह मेरी बेटी के साथ पढ़ती है। उसकी दोस्त है। उसने इसे मुझसे पूछ कर ही बुलाया है।"

"यानी यह तुम्हारी मर्जी से यहाँ आयी है। सब कुछ जानते बूझते हुए।"

“माँ , वह…

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Posted on October 23, 2020 at 1:14pm — 8 Comments

छोटू - लघुकथा –

छोटू - लघुकथा –

पत्रकार सम्मेलन से लौटते हुए एक ढावे पर चाय पीने रुक गया।ढावे पर एक नौ दस साल के बच्चे को काम करते देख मेरे अंदर की पत्रकारिता जनित मानवता जाग उठी।मैंने उसे इशारे से बुलाया,"क्या नाम है तुम्हारा?"

वह मेरे चेहरे को टुकुर टुकुर देख रहा था। मैंने पुनः वही प्रश्न दोहराया।वह तो फिर भी वैसे ही गुमसुम खड़ा रहा लेकिन ढावे का मालिक आगया,"साहब, इसका नाम छोटू है।यह गूंगा बहरा है।"

"इसके माँ बाप कहाँ हैं?"

"ये अनाथ है।"

"मैं इसकी एक फोटो ले…

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Posted on October 17, 2020 at 10:58am — 4 Comments

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At 5:41pm on November 18, 2019, JAWAHAR LAL SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी!

At 10:17am on September 8, 2019, Samar kabeer said…

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,आपकी महब्बतों के लिए दिल की गहराई से धन्यवाद ।

At 9:51pm on August 31, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय तेजवीर सिंह जी नमस्कार ! बहुत धन्यवाद् आपका आपने समय निकाला मेरी पहली ही लघुकथा के लिए और मेरा हौसला बढ़ाया आपका बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 10:43pm on August 15, 2019, Dr T R Sukul said…
हार्दिक धन्यवाद आदरणीय तेजवीर सिंह जी।
At 1:42pm on July 28, 2018, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय तेजवीर जी आपकी लघु कथाओं का नियमित पाठक हूँ और इस विधा पर लिखने का प्रयास भी आप सबकी रचनाएँ पढ़कर करता हूँ / आपके मित्रों की सूची में शामिल होना मेरे लिए सुखद है सादर प्रणाम के साथ 

At 4:09pm on December 8, 2015, Sushil Sarna said…

आदरणीय तेजवीर सिंह जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें। 

At 8:19pm on December 4, 2015, kanta roy said…

वाह ! आदरणीय तेजवीर जी , गौरव का ये पल , आपका माह के सक्रीय सदस्य  चुने जाने के उपलक्ष्य में बहुत ख़ुशी महसूस हुई।  बधाई प्रेषित है।  

At 12:21pm on November 29, 2015, amod shrivastav (bindouri) said…
माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने के लिए हार्दिक बधाई नमन सर
At 12:57pm on November 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तेज वीर सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:39pm on May 29, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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