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JAWAHAR LAL SINGH
  • Male
  • Jamshedpur, Jharkhand.
  • India
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JAWAHAR LAL SINGH replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"प्रदत्त विषय पर सुन्दर प्रस्तुति हुई है, आदरणीय विजय प्रकाश शर्मा जी, बधाई !"
Saturday
JAWAHAR LAL SINGH replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"सराहना हेतु हार्दिक आभार आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी!"
Saturday
JAWAHAR LAL SINGH replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी साहब, आपने स्वान और बादलों के माध्यम से बहुत सारी समस्यायों और हरकतों पर तंज कसा है. सादर बधाई स्वीकारें!"
Saturday
JAWAHAR LAL SINGH replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"सभी दोहे एक से बढ़कर एक आदरणीय लक्ष्मण धामी जी! बधाई स्वीकारें!"
Saturday
JAWAHAR LAL SINGH replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"बहुत ही सुन्दर रचना हुई है आदरणीय सतविंदर कुमार राणा जी, बधाई स्वीकारें!"
Saturday
JAWAHAR LAL SINGH replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी!"
Saturday
JAWAHAR LAL SINGH replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"दूसरी प्रस्तुति  काश कि सावन रिम झिम होता, बगियों में झूला भी होता झूला पर सखियाँ भी होती, दूर कहीं पर साजन होता. खिल खिल बच्चे मुस्काते से, सर पे माँ का आँचल होता. खेतों में कजरी की गूंजें, हर्षित हर घर आँगन होता. वर्षा रानी रूठ गई है, आशाएं…"
Saturday
JAWAHAR LAL SINGH replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय अशोक कुमार रक्तले साहब!"
Saturday
JAWAHAR LAL SINGH replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"आदरणीय सतविंदर राणा साहब, अनुमोदन के लिए हार्दिक आभार!"
Saturday
JAWAHAR LAL SINGH replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"आदरणीय लक्ष्मण धामी साहब, सराहना के लिए हार्दिक आभार!"
Saturday
JAWAHAR LAL SINGH replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"आदरणीय समर कबीर साहब, मूल प्रति में सुधार कर लूँगा. एकाध भूल हो जाती है. आपका सुझाव मह्त्वपूर्ण है. सादर आभार! "
Saturday
JAWAHAR LAL SINGH commented on JAWAHAR LAL SINGH's blog post खुद्दार
"सार्थक और समीक्षात्मक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब! मैं भी संतुष्ट तो नहीं था. पर भाव जो मन में थे उसे ही लिख दिया. सादर!"
Friday
JAWAHAR LAL SINGH replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-105
"पहली प्रस्तुति  रिमझिम पड़े फुहार! रिमझिम पड़े फुहार, बूँद अमृत सा लागे, तृषित भूमि पर धार, जब जन हर्षण लागे कोकिल कूके डाली डाली, माली करता है रखवाली आम बगीचे से अब तोड़ो, जिह्वा से अब नाता जोड़ो   खेतों आई बहार, कृषक जन हर्षण लागे पेड़ सभी अब…"
Friday
Samar kabeer commented on JAWAHAR LAL SINGH's blog post खुद्दार
"जनाब जवाहर लाल सिंह जी,रचना अभी समय चाहती है ।"
Thursday
JAWAHAR LAL SINGH posted a blog post

खुद्दार

सौंपी थी जिसे चाबी खुद्दार समझकरसारा सामान लेकर चाबी वो दे गयाकरता रहा भरोसा ताउम्र उसी परगुस्ताख़ की शक्ल भी धुँधला वो कर गया.मायूस न हो ज़िंदगी बस थोड़ा सब्र करउसका ही था ये मान न वो तेरा ले गया.ख़ुदा ने दी है रहमत आख़िर किसलिएअपना तू रख ईमान क्या बसेरा ले गया!(मौलिक और अप्रकाशित)  - जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर See More
Jul 10
JAWAHAR LAL SINGH commented on DR. HIRDESH CHAUDHARY's blog post मन नहीं करता
"बहुत सुन्दर समसामयिक रचना, बधाई स्वीकारे आदरणीया डॉ. हृदेश चौधरी जी! "
Jul 10

Profile Information

Gender
Male
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JAMSHEDPUR
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SERVICE
About me
INTRESTED IN HINDI LITRATURE, HINDU REILIGION,POLITICS.

JAWAHAR LAL SINGH's Blog

खुद्दार

सौंपी थी जिसे चाबी खुद्दार समझकर
सारा सामान लेकर चाबी वो दे गया
करता रहा भरोसा ताउम्र उसी पर
गुस्ताख़ की शक्ल भी धुँधला वो कर गया.
मायूस न हो …
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Posted on July 10, 2019 at 4:00pm — 2 Comments

कुछ दोहे - क्रोध पर

बड़े लोग कहते रहे, जीतो काम व क्रोध.

पर ये तो आते रहे, जीवन के अवरोध.  

माफी मांगो त्वरित ही, हो जाए अहसास.

होगे छोटे तुम नहीं, बिगड़े ना कुछ ख़ास.

क्रोध अगर आ जाय तो, चुप बैठो क्षण आप.

पल दो पल में हो असर, मिट जाएगा ताप .

रोकर देखो ही कभी, मन को मिलता चैन.

बीती बातें भूल जा, त्वरित सुधारो बैन  .

(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on February 6, 2019 at 10:50pm — 6 Comments

कुछ मुक्तक आँखों पर

अँखियों में अँखियाँ डूब गई,

अँखियों में बातें खूब हुई.

जो कह न सके थे अब तक वो,

दिल की ही बातें खूब हुई.

*

हमने न कभी कुछ चाहा था,

दुख हो, कब हमने चाहा था,

सुख में हम रंजिश होते थे,

दुख में भी साथ निबाहा था.

*

ऑंखें दर्पण सी होती है,

अन्दर क्या है कह देती है.

जब आँख मिली हम समझ गए,

बातें अमृत सी होती है.

*

आँखों में सपने होते हैं,

सपने अपने ही होते हैं,

आँखों में डूब जरा…

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Posted on August 22, 2016 at 7:00am — 16 Comments

देश में रहकर मुहब्बत देश से करते चलो!

देश में रहकर मुहब्बत, देश से करते चलो!

देश आगे बढ़ रहा है, तुम भी डग भरते चलो.

.

देश जो कि दब चुका था, आज सर ऊंचा हुआ है,

देश के निर्धन के घर में, गैस का चूल्हा जला है

उज्ज्वला की योजना से, स्वच्छ घर करते चलो.

देश में रहकर............

.

देश भारत का तिरंगा, हर तरफ लहरा रहा,

ऊंची ऊंची चोटियों पर, शान से फहरा रहा,

युगल हाथों से पकड़ अब, कर नमन बढ़ते चलो.

देश में रहकर............

.

देश मेरा हर तरफ से, शांत व आबाद…

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Posted on June 7, 2016 at 8:30am — 18 Comments

Comment Wall (15 comments)

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At 11:06am on November 4, 2018, TEJ VEER SINGH said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी।

At 10:17am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय जवाहर जी आपका हार्दिक आभार !

At 10:12am on May 12, 2013, बृजेश नीरज said…

आदरणीय जवाहर जी आपको यहां साथ देखकर मुझे अपार खुशी हुई। आपकी शुभकामनाओं हेतु हार्दिक आभार! अपना स्नेह यूं ही बनाए रखिएगा!
सादर!

At 10:57am on November 29, 2012, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…

सादर नमस्कार श्री जवाहर जी.............!!

At 2:41pm on May 20, 2012, Yogi Saraswat said…

बहुत बहुत धन्यवाद श्री जवाहर  जी  ! आपका  आशीर्वाद  मिला

At 7:14pm on April 12, 2012, Sarita Sinha said…

jawahar bhai sahab, namaskar,

meri kavita pasand karne ke liye dhanyvad...

'click' par click karne se to transliterate ka page khulta hai..kya wahan se copy/paste  karna hoga???

At 11:17pm on April 9, 2012, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

हे, मेरे ईश्वर,

हे मेरे परमात्मा,

दे इन्हें सदबुद्धि,

दे इन्हें आत्मा,

न लड़ें, ये खुद से,

कभी धर्म या भाषा के नाम पर,

प्रिय जवाहर जी जय श्री राधे --प्रभु आप के मन की बात सुनें ..सब एकीकृत हों प्यार इस चमन में गूंजे पुरवाई चले प्रेम और स्नेह की 

सुन्दर ...
भ्रमर ५ 


At 2:41pm on April 7, 2012, Mukesh Kumar Saxena said…

Shri jawahar ji aapne meri kavitayen pasand ki uske liye aabhari hun kirpya isi prakar haunsa badaye.dhanyabad.

At 12:47pm on April 2, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

aadarniy singh sahab ji , dhanyvad. ye apki mahanta hai.

At 5:43pm on March 22, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

abhar aapka sneh hetu mahodaya ji. aap to mala ke pendulam hain. shobha aap se hi hai.singh sahab ji.

 
 
 

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"कविता बहुत ही अच्छी लगी। बहुत समय के बाद आपकी कविता पढ़ने को मिली।  हार्दिक बधाई  शैख…"
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"आ0 कबीर साहब वेहतरीन इस्लाह हेतु हार्दिक आभार और नमन।"
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प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Abha saxena Doonwi's blog post ग़ज़ल: हर शख़्स ही लगा हमें तन्हा है रात को
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प्रदीप देवीशरण भट्ट shared Abha saxena Doonwi's blog post on Facebook
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