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Abid ali mansoori
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Abid ali mansoori commented on Abid ali mansoori's blog post आलोचना के स्वर // आबिद अली मंसूरी!
"Aadarniye nadir Khan ji, bahut-bahut shukriya!!!!"
Apr 16
Sheikh Shahzad Usmani commented on Abid ali mansoori's blog post जीवन पथ पर..//गीत!
"बहुत ही गंभीर, सुंदर, आह्वान करती विचारोत्तेजक रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब आबिद अली मंसूरी साहिब।"
Feb 22
Sheikh Shahzad Usmani commented on Abid ali mansoori's blog post जैसी तुम हो मॉंं // आबिद अली मंसूरी!
"बहुत कुछ कह डालने की चाहत में गागर में सागर भर डाला आपने। तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब आबिद अली मंसूरी साहिब। इस भावपूर्ण रचना  को विस्तार देकर बढ़िया छंदबद्ध सृजन भी आप कर सकते हैं।"
Feb 22
Abid ali mansoori commented on Abid ali mansoori's blog post अजनबी की तरह (नज़्म) // आबिद अली मंसूरी!
"हारदिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब!"
Nov 11, 2016
Abid ali mansoori commented on Abid ali mansoori's blog post अजनबी की तरह (नज़्म) // आबिद अली मंसूरी!
"हार्दिक आभाऋ आदरणीय गिरिराज जी!"
Nov 11, 2016
Samar kabeer commented on Abid ali mansoori's blog post अजनबी की तरह (नज़्म) // आबिद अली मंसूरी!
"जनाब आबिद अली मंसूरी साहिब आदाब,पहली बार आपकी रचना से रूबरू हुआ हूँ,अच्छी लगी आपकी नज़्म,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।"
Nov 10, 2016

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Abid ali mansoori's blog post अजनबी की तरह (नज़्म) // आबिद अली मंसूरी!
"बहुत सुन्दर , अच्छी लगी आपकी कविता , हार्दिक बधाइयाँ , आ. आबिद भाई ।"
Nov 10, 2016
Dr T R Sukul and Abid ali mansoori are now friends
Nov 10, 2016
Abid ali mansoori posted a blog post

अजनबी की तरह (नज़्म) // आबिद अली मंसूरी!

जब चले थे कभी हम अनजान राहों पर..एक दूसरे के साथहमसफ़र बनकर,कितनी कशिश थीमुहब्बत की..उसपहली मुलाकात में,चलो..! फिर चलें हमआजउसी मुकाम परजहां मिले थे कभी..हमअजनबी की तरह!===========(मौलिक व अप्रकाशित)___ आबिद अली  मंसूरी!See More
Nov 10, 2016
Abid ali mansoori posted a blog post

आलोचना के स्वर // आबिद अली मंसूरी!

कौन सुनता हैकौन सुनना चाहता हैकिसे पसन्द है आलोचना अपनीएक कड़वा सचछिपा होता हैआलोचना के शब्दों मेंजिसेनहीं चहते हमस्वीकार करना,जानते हैंअपने अन्दर फ़ैलेखरपतवारों को सभीपर नहीं चाहतेउखाड़नाउनकी जड़ों को,कभी-कभीअकारण हीकरना पड़ता हैसामनाआलोचनाओं के बबंडर कायह मानसिकताहोती हैकुछ लोगों कीअच्छे कोबुरा कहने की,भटक जाते हैंउद्देश्य से अपनेऔरटेक देते हैं घुटनेहमउनके आगेजैसाकुछ लोग चाहते हैं,कड़वे होते हैंमिठास नहीं होतीइनमेंमिश्री सीजीवन में निरंतरआगे बढ़नेऔर अच्छा बनने कीसीख देते हैंहमेंकितने प्रेरकऔर सार्थक…See More
Dec 10, 2015
Abid ali mansoori commented on Abid ali mansoori's blog post आलोचना के स्वर // आबिद अली मंसूरी!
"आदरणीय सौरभ जी ह्रदय से आभार आपका, शायद मुझे इससे आगे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि आपने अच्छे से समझाया है, आपके मार्गदर्शन के लिए भी ह्रदय से आभारी हूं, आशा है यह सहयोग हमेसःआ बनाए रखेंगे, विलम्ब के लिए क्षमाप्रार्थी हूं!"
Dec 10, 2015
Abid ali mansoori commented on Abid ali mansoori's blog post आलोचना के स्वर // आबिद अली मंसूरी!
"आदरणीया नीता जी हार्दिक आभार आपका, विलम्ब के लिए क्षमाप्रार्थी हूं!"
Dec 10, 2015
Abid ali mansoori commented on Abid ali mansoori's blog post आलोचना के स्वर // आबिद अली मंसूरी!
"आदरणीया कॉंंता जी हार्दिक आभार आपका, विलम्ब के लिए क्षमाप्रार्थी हूं!"
Dec 10, 2015
kanta roy commented on Abid ali mansoori's blog post आलोचना के स्वर // आबिद अली मंसूरी!
"जानते हैंअपने अन्दर फ़ैलेखरपतबारों को सभीपर नहीं चाहतेउखाड़नाउनकी जड़ों को,---------बहुत ही गहरी और सच्ची बात कही है यहाँ आपने अपनी रचना के माध्यम से आदरणीय आबिद अली मंसूरी जी ,इस शानदार रचना के लिए बधाई आपको।"
Dec 4, 2015
Nita Kasar commented on Abid ali mansoori's blog post आलोचना के स्वर // आबिद अली मंसूरी!
"आलोचनाओं के संबंध में बहुत उम्दा रचना प्रस्तुत की है बधाई आपको आद० आबिद अली मंसूरी जी ।"
Dec 2, 2015

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Abid ali mansoori's blog post आलोचना के स्वर // आबिद अली मंसूरी!
"इस रचना में आलोचना को किसी के किये या किसी के व्यक्तित्व के नीर-क्षीर करने का संदर्भ लिया गया प्रतीत होता है. अधिक ज़ोर उस विन्दु पर है जहाँ किसी के बारे में सुधारात्मक किन्तु तीक्ष्णता के साथ बातें कही जाती हैं. वस्तुतः आलोचना तीक्ष्णता के साथ…"
Nov 17, 2015

Profile Information

Gender
Male
City State
Bareilly UP
Native Place
Bareilly
About me
Artist painter, president-Deshpremi radio listeners club,

बिन तेरे!

कितने तल्ख हैँ लम्हे

तेरे प्यार के वगैर
यह ग़म की आंधियां
यह तीरगी के साये
जैसे कोई ख़लिश
हो हवाओँ मेँ..
डसती हैँ मुझको पल-पल
पुरवाइयां
तेरी यादोँ की
बे रंग सी लगती है
ज़िंदगी अब तो
कुछ भी तो नहीँ जैसे
इन फिज़ाओँ मेँ...बिन तेरे!

(मौलिक व अप्रकाशित)

__आबिद अली मंसूरी

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अजनबी की तरह (नज़्म) // आबिद अली मंसूरी!

जब चले थे कभी 

हम 
अनजान राहों पर..
एक दूसरे के साथ
हमसफ़र बनकर,
कितनी कशिश थी
मुहब्बत की..
उस
पहली मुलाकात में,
चलो..! फिर चलें हम
आज
उसी मुकाम पर
जहां मिले थे कभी..
हम
अजनबी की तरह!
===========
(मौलिक व अप्रकाशित)
___ आबिद अली  मंसूरी!

Posted on November 9, 2016 at 10:25pm — 4 Comments

जैसी तुम हो मॉंं // आबिद अली मंसूरी!

तुमसे ही तो है

यह जीवन मेरा
तुम्हारी ही अमानत है
हर सांस मेरी
कर्ज़दार है
तुम्हारी ममता की
आत्मा हो तुम मेरी
तुमसे ही
संसार है मॉंं........
क्या लिखूं
मैं इससे आगे
असमर्थ हूं
एक मैं ही क्या
यह
सारा संसार भी
मॉं की ब्याख्या
नहीं कर सकता
क्योंकि मॉंं..
मॉंं होती है
जैसी, तुम हो…
Continue

Posted on November 5, 2015 at 9:00pm — 8 Comments

जीवन पथ पर..//गीत!

जीवन पथ पर चारो ओर फैला हुआ बस प्यार हो

आशाओँ का हमारी ऐसा एक संसार हो!

-

जाति-धर्म का न भेदभाव जहां हो

मानवता का बस बर्ताव वहां हो,

रहेँ हम सब मिलकर ऐसा एक घर-बार हो

...आशाओँ का हमारी ऐसा एक संसार हो!

-

स्वयं को समझेँगे जब एक समान

तभी बनेँगे हिन्दु,मुस्लिम,सिक्ख महान,

सब धर्मोँ की लागी एक कतार हो

...आशाओँ का हमारी ऐसा एक संसार हो!

-

जहां प्रेम हो पूजा, प्रेम जीवन हो

तन,मन,धन सब इसे अर्पण होँ,

सत्य,अहिँसा और प्रेम जीवन… Continue

Posted on November 5, 2015 at 1:23pm — 11 Comments

आलोचना के स्वर // आबिद अली मंसूरी!

कौन सुनता है

कौन सुनना चाहता है
किसे पसन्द है आलोचना अपनी
एक कड़वा सच
छिपा होता है
आलोचना के शब्दों में
जिसे
नहीं चहते हम
स्वीकार करना,
जानते हैं
अपने अन्दर फ़ैले
खरपतवारों को सभी
पर नहीं चाहते
उखाड़ना
उनकी जड़ों को,
कभी-कभी
अकारण ही
करना पड़ता है
सामना
आलोचनाओं के बबंडर…
Continue

Posted on November 3, 2015 at 8:30pm — 18 Comments

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At 10:44am on November 4, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
आपका स्वागत है आदरणीय आबिद जी , सादर।
At 9:10am on November 4, 2015, vijay nikore said…

आपसे मित्रता मेरे लिए हर्ष की बात है। हार्दिक धन्यवाद।

At 1:23pm on June 16, 2013, जितेन्द्र पस्टारिया said…
"तहे दिल से शुक्रिया...जनाब, आबिद अली साहब "
At 12:19am on June 9, 2013, Priyanka singh said…

thank u .....

At 12:28pm on June 8, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय आबिद जी आपका हार्दिक आभार !

 
 
 

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