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Archana Tripathi
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Archana Tripathi replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लघुकथा हितैषी" सम्मान
"आ. रवि यादव जी को हार्दिक बधाई ,साथ ही ओबीओ की समस्त प्रबंधन समूह को इस उत्कृष्ट कदम के लिए हार्दिक बधाई "
Dec 13, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"हार्दिक धन्यवाद आपका आ.चंद्रेश जी"
Sep 30, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"हार्दिक धन्यवाद आपका आ.सीमा"
Sep 30, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"शुक्रिया आदरणीय"
Sep 30, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"उत्साहवर्धक टिपण्णी के लिए हार्दिक आभार आपका आ.मो.आरिफ जी ,"
Sep 29, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"उम्दा सीख के साथ आयोजन की प्रथम प्रविष्टि के लिए हार्दिक बधाई आ.मो. आरिफ जी"
Sep 29, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-30
"स्नेह का उजाला टी.वी पर अबला वृद्धा की तस्वीर देख रमन और रेवती के मन मे असख्यं सवाल सिर उठा रहे थे कि आखिरकार अम्मा जी वहां कैसे पहुंच गई ? अस्वस्थता के चलते वे तो बड़े भाई साहब के यहां थी।इसी तरह आंतरिक जद्दोजहद करते पुलिस स्टेशन पहुंचते ही रमन ने…"
Sep 29, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)
"कथा पर अमूल्य समय और साकारात्मक प्रतिक्रिया द्वारा उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक धन्यवाद आ.सुनील वर्मा जी"
Aug 30, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)
"कथा पर अमूल्य समय और साकारात्मक प्रतिक्रिया द्वारा उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक धन्यवाद आ.तस्दीक़ अहमद खान जी"
Aug 30, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)
"हमारे विवाह के लिए प्रस्थापित मूल्यों पर करारा वार करती उम्दा कथा,लेकिन उच्च पदाधिकारी ,सम्पन्न या विद्वान सभी मे मनुष्यता नही ?ओर यह कथा विषय को कैसे सार्थक कर रही हैं ।क्षमा सहित"
Aug 30, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)
"अनकहे ममत्व को दर्शाती बढिया कथा के लिए हार्दिक बधाई आ.वसुधा गाडगिल जी"
Aug 30, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)
"वाह!स्त्री का अनकहा पुरुष कब समझ पाया हैं,बढिया प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आ.शेख शहजाद उस्मानी जी"
Aug 30, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)
"वाह !उम्दा सामन्जयस निकल कर आया आपकी कथा से, चिल्ला चिल्लाकर सामन्जयस पर भाषण देने वालों को उम्दा सीख देती प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आ.विनय कुमार जी"
Aug 30, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)
"बहुधा हमारे संस्कार हमे उन पथरीली राहों पर चलने से रोकते हैं जो उज्ज्वल भविष्य के लिए उत्तम होते हैं,इसी बात को दर्शाती उत्तम कथा ,बढिया न्याय भी कर रही हैं कथा शीर्षक से।हार्दिक बधाई आ.शशि बंसल जी"
Aug 30, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)
"एक पिता द्वारा उत्तम कदम,इस बढिया लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई आ.तस्दीक अहमद खान जी"
Aug 30, 2017
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-29 (विषय: अनकहा)
"अनुसरणकर्ता क्रोध में उबलते बड़े भैया रक्षिता पर चीख पड़े , " तुम्हे इतने दिनों से समझा रहा हूँ लेकिन तुम मान नही रही हो।मुझे कठोर कदम उठाने पर विवश मत करो।" लंबे चौड़े संयुक्त परिवार की एम. ए. कर रही रक्षिता समझ गयी थी कि पुनः किसी ने आग…"
Aug 30, 2017

Profile Information

Gender
Female
City State
Tanakpur, Uttarakhand
Native Place
Allahabad
Profession
housewife
About me
चलना ही जिंदगी है।

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औपचारिक्ता की दरकार

औपचारिक्ता की दरकार "

" पागलों की तरह भागते हुए लेक्चरर शिल्पी ने कॉलेज में आये उस नवयुवक को आलिंगन में यूँ जकड़ लिया जैसे वह भाग ना पाये।यह बात पुरे कालेज में जंगल में आग की तरह फैल गयी।जितने मुँह उतनी बातें और उतने ही लांछन!

अपने ऊपर लगते लांछनों ने उसे भीतर तक तोड़ दिया और आज तो उनकी पराकाष्ठा हो गयी थी ।लेकिन कभी-भी हार ना मानने वाली शिल्पी सभ्य सहयोगियों से दो-चार हो ली।



" मैं क्यों बदचलन आवारा हूँ कोई बताएगा मुझे ? क्योकि मैं सबसे हँसकर बात करती हूँ? क्योकि मैंने… Continue

Posted on February 18, 2016 at 3:34pm — 8 Comments

कंगली (लघुकथा )

साक्षी ने सारी सीमाएं विवाह पूर्व ही तोड़ दी थी ।विवश हो उसके प्रेम विवाह को सहमति देनी पड़ी लेकिन विवाह के मात्र आठ माह बाद तीन माह की पुत्री को लेकर लौट आयी थी । बिटिया तीन वर्ष की हो गयी थी ।साक्षी ने पुनः विवाह कर लिया बेटी ननिहाल में ही पल रही थी।इसी बात से संतोष था की वह ससुराल में रम जाय लेकिन -

" माँ अब मैं उस घर नहीं जाउंगी।"



"क्यों ? अब क्या हो गया ?"



"उसे पत्नी नहीं माँ के लिए नौकरानी चाहिए थी और वह तो पूरा कंगला हैं ,मैंने तो उसकी चमक देख ब्याह किया… Continue

Posted on October 27, 2015 at 11:52pm — 14 Comments

वंश वृद्धि (लघुकथा)

कवि सम्मेलन के आगाज़ के साथ ही नवांकुर कवि के कविता पाठ करते ही मरघट सा सन्नाटा पसर गया।बामुश्किल नामी कवी ने बात आगे बढ़ाते हुए कहा -

" इन्हें कलम चलानी तो आती नहीं फिर माहौल खराब करने के लिए यहाँ किसने आमन्त्रित किया हैं ?"

" अरे , शर्मा जी इन नवांकुरों को मैंने आमन्त्रित किया हैं ।इन्हें सिखाना भी तो जरुरी हैं।"

" ये केवल नाम बटोरना चाहते हैं ,लगन मेहनत से कोई वास्ता नहीं इनका।इन्हें मंच से हटाया जाय "

"शर्मा जी, ये हमे अपना आदर्श मानते हैं "

" तो हम ही मंच छोड़ देते…

Continue

Posted on September 14, 2015 at 12:46am — 24 Comments

सामन्जस्य की परिभाषा (लघुकथा )

प्रतियोगी परीक्षाओं में मिली असफलता से निखिल अवसादग्रस्त हो चला था। पत्नी स्नेहा को मिली नौकरी से गृहस्थी की गाडी सुचारू रूप से चलने लगी थी।लेकिन दोहरी जिम्मेदारी के बोझ तले वह बुरी तरह पीस रही थी। जिसका असर उसके व्यवहार में भी परिलक्षित हो रहा था ।

आज घर में घुसते ही साफ -सुथरा घर , और टेबल पर लगे खाने से आती खुशबू से स्नेहा भौचक्की थी, की निखिल कहने लगा -



"पढ़ते-पढ़ते थक गया था सो खाना बना लिया। शायद तुम्हे पसंद आ जाए। "

पसंद-नापसन्द से परे वह अपने घर में पति-पत्नी के मध्य… Continue

Posted on August 27, 2015 at 4:34pm — 9 Comments

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At 6:31pm on August 23, 2015, brajesh kumar tripathi said…

Dhanyavad priy archana ji .Aapke sneh ke liye aabhari hain.kshama karengi,kyonki aaj mera vah computer khrab hai jispar Devnagari me likha ja sakta hai.

punah anekashah abhar.

 main samprati Faizabad Ayodhya me nivas kar raha hun.Allahabad bank se sewanivritt hua hun.

mera mob.9935802996,8576884809 hain

 brajesh kumar tripathi

 
 
 

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