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Archana Tripathi
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TEJ VEER SINGH left a comment for Archana Tripathi
"जन्म दिन की हार्दिक बधाई आदरणीय अर्चना त्रिपाठी जी।"
Nov 4
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"वाकई में मोबाइल प्रेम में हम दीवानगी की हद लांघ गए हैं बढिया प्रश्न उठाया आपने अपनी कथा के माध्यम से।हार्दिक बधाई आपको आ. ओमप्रकाश क्षत्रिय जी"
Oct 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आज हर बात के लिए ठेकेदारी हो रही हैं।शिक्षा व्यवस्था पर भी करारा वार किया हैं आपने हार्दिक बधाई आपको आ. टी आर शुक्ल जी"
Oct 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"बढिया कथा, यही ह्यो रहा हूं आजकल सभी एकदूसरे पर उंगली उठाने में व्यस्त।हार्दिक बधाई आ. मनन कुमार सिंह जी"
Oct 30
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"अमूल्य समय देने के लिए हार्दिक धन्यवाद आपका आ.नीलम उपाध्याय जी"
Aug 31
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"  आ. वीर मेहता जी कथा पर समय देने और अमूल्य मार्गदर्शन के लिए ह्रदय तल से आपकी आभारी हूँ।"
Aug 31
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आपका हार्दिक आभार"
Aug 31
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"वाह !सीमा जी आपने बहुत ही बड़ी विसंगति की ओर ध्यान केंद्रित किया हैं।हमजिस धर्म को मानते हैं उसका पूर्ण सम्मान चाहते हैं इसके विपरीत अन्यों के धर्म का अपमान करने में जरा भी ग्लानि नही महसूस करते।हार्दिक बधाई आपको"
Aug 31
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आपका हारफिक धन्यवादब"
Aug 31
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"उत्साहवर्धन के लिए आभार आपका , अंदर एक भय विराजमान था कि कथा स्वीकृत होगी या नही।आपकी टिप्पणी ने उसे दूर कर दिया।"
Aug 31
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"हार्दिक धन्यवाद आपका "
Aug 31
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"ऐसी आस्था का चमत्कार मैने भी देखा हैं।बढिया कथा हार्दिक बधाई आ. ओमप्रकाश क्षत्रिय जी"
Aug 31
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"बढिया कथा, आपने एक नया दृष्टिकोण दिखाया हैं धार्मिक आस्थाओं पर ,वह भी साकारत्मक, हार्दिक बधाई आपको आ. डॉ. विजय शंकर जी"
Aug 31
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आपका हार्दिक धन्यवाद अजय गुप्ता जी, बविष्य में भी आपके मार्गदर्शन हेतु प्रतीक्षारत"
Aug 31
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"रचना पर अमूल्य समय देने के लिए आपका हार्दिक आभार आ. समर कबीर जी "
Aug 31
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-41
"आपका हार्दिक धन्यवाद"
Aug 31

Profile Information

Gender
Female
City State
Tanakpur, Uttarakhand
Native Place
Allahabad
Profession
housewife
About me
चलना ही जिंदगी है।

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औपचारिक्ता की दरकार

औपचारिक्ता की दरकार "

" पागलों की तरह भागते हुए लेक्चरर शिल्पी ने कॉलेज में आये उस नवयुवक को आलिंगन में यूँ जकड़ लिया जैसे वह भाग ना पाये।यह बात पुरे कालेज में जंगल में आग की तरह फैल गयी।जितने मुँह उतनी बातें और उतने ही लांछन!

अपने ऊपर लगते लांछनों ने उसे भीतर तक तोड़ दिया और आज तो उनकी पराकाष्ठा हो गयी थी ।लेकिन कभी-भी हार ना मानने वाली शिल्पी सभ्य सहयोगियों से दो-चार हो ली।



" मैं क्यों बदचलन आवारा हूँ कोई बताएगा मुझे ? क्योकि मैं सबसे हँसकर बात करती हूँ? क्योकि मैंने… Continue

Posted on February 18, 2016 at 3:34pm — 8 Comments

कंगली (लघुकथा )

साक्षी ने सारी सीमाएं विवाह पूर्व ही तोड़ दी थी ।विवश हो उसके प्रेम विवाह को सहमति देनी पड़ी लेकिन विवाह के मात्र आठ माह बाद तीन माह की पुत्री को लेकर लौट आयी थी । बिटिया तीन वर्ष की हो गयी थी ।साक्षी ने पुनः विवाह कर लिया बेटी ननिहाल में ही पल रही थी।इसी बात से संतोष था की वह ससुराल में रम जाय लेकिन -

" माँ अब मैं उस घर नहीं जाउंगी।"



"क्यों ? अब क्या हो गया ?"



"उसे पत्नी नहीं माँ के लिए नौकरानी चाहिए थी और वह तो पूरा कंगला हैं ,मैंने तो उसकी चमक देख ब्याह किया… Continue

Posted on October 27, 2015 at 11:52pm — 13 Comments

वंश वृद्धि (लघुकथा)

कवि सम्मेलन के आगाज़ के साथ ही नवांकुर कवि के कविता पाठ करते ही मरघट सा सन्नाटा पसर गया।बामुश्किल नामी कवी ने बात आगे बढ़ाते हुए कहा -

" इन्हें कलम चलानी तो आती नहीं फिर माहौल खराब करने के लिए यहाँ किसने आमन्त्रित किया हैं ?"

" अरे , शर्मा जी इन नवांकुरों को मैंने आमन्त्रित किया हैं ।इन्हें सिखाना भी तो जरुरी हैं।"

" ये केवल नाम बटोरना चाहते हैं ,लगन मेहनत से कोई वास्ता नहीं इनका।इन्हें मंच से हटाया जाय "

"शर्मा जी, ये हमे अपना आदर्श मानते हैं "

" तो हम ही मंच छोड़ देते…

Continue

Posted on September 14, 2015 at 12:46am — 24 Comments

सामन्जस्य की परिभाषा (लघुकथा )

प्रतियोगी परीक्षाओं में मिली असफलता से निखिल अवसादग्रस्त हो चला था। पत्नी स्नेहा को मिली नौकरी से गृहस्थी की गाडी सुचारू रूप से चलने लगी थी।लेकिन दोहरी जिम्मेदारी के बोझ तले वह बुरी तरह पीस रही थी। जिसका असर उसके व्यवहार में भी परिलक्षित हो रहा था ।

आज घर में घुसते ही साफ -सुथरा घर , और टेबल पर लगे खाने से आती खुशबू से स्नेहा भौचक्की थी, की निखिल कहने लगा -



"पढ़ते-पढ़ते थक गया था सो खाना बना लिया। शायद तुम्हे पसंद आ जाए। "

पसंद-नापसन्द से परे वह अपने घर में पति-पत्नी के मध्य… Continue

Posted on August 27, 2015 at 4:34pm — 9 Comments

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At 11:04am on November 4, 2018, TEJ VEER SINGH said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई आदरणीय अर्चना त्रिपाठी जी।

At 6:31pm on August 23, 2015, brajesh kumar tripathi said…

Dhanyavad priy archana ji .Aapke sneh ke liye aabhari hain.kshama karengi,kyonki aaj mera vah computer khrab hai jispar Devnagari me likha ja sakta hai.

punah anekashah abhar.

 main samprati Faizabad Ayodhya me nivas kar raha hun.Allahabad bank se sewanivritt hua hun.

mera mob.9935802996,8576884809 hain

 brajesh kumar tripathi

 
 
 

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