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Dr. Chandresh Kumar Chhatlani
  • Male
  • Udaipur, Rajasthan
  • India
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Chandresh Kumar Chhatlani! - A Programmer in Udaipur / Rajasthan / India

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Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नया पकवान / लघुकथा / चंद्रेश कुमार छतलानी
"रचना पसंद कर उस पर अपनी टिप्पणी देने हेतु हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सर. साभार."
Jul 4
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नया पकवान / लघुकथा / चंद्रेश कुमार छतलानी
"आ. भाई चंद्रेश जी, अच्छी कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jun 29
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नया पकवान / लघुकथा / चंद्रेश कुमार छतलानी
"रचना पसंद कर उस पर अपनी टिप्पणी देने हेतु हार्दिक आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी सर एवं आदरणीय समर कबीर जी सर. साभार."
Jun 29
Samar kabeer commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नया पकवान / लघुकथा / चंद्रेश कुमार छतलानी
"जनाब चंद्रेश जी आदाब, अच्छी लघुकथा लिखी आपने, बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 24
TEJ VEER SINGH commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नया पकवान / लघुकथा / चंद्रेश कुमार छतलानी
"हार्दिक बधाई आदरणीय चंद्रेश जी। बहुत सारगर्भित एवम मारक लघुकथा।राजा की न्याय प्रणाली पर तीखा कटाक्ष। आज की शासन व्यवस्था को झकझोरती प्रतीकात्मक शैली की लाज़वाब प्रस्तुति।"
Jun 23
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani posted a blog post

नया पकवान / लघुकथा / चंद्रेश कुमार छतलानी

एक महान राजा के राज्य में एक भिखारीनुमा आदमी सड़क पर मरा पाया गया। बात राजा तक पहुंची तो उसने इस घटना को बहुत गम्भीर मानते हुए पूरी जांच कराए जाने का हुक्म दिया।सबसे बड़े मंत्री की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई जिसने गहन जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश की। राजा ने उस लंबी-चौड़ी रिपोर्ट को देखा और आंखें छोटी कर संजीदा स्वर में कहा, "एक लाइन में बताओ कि वह क्यों मरा?"सबसे बड़े मंत्री ने अत्यंत विनम्र शब्दों में उत्तर दिया, "हुज़ूर, क्योंकि वह भूखा था।"सुनते ही राजा की आंखें चौड़ी हो गईं और उसने आंखे तरेर कर…See More
Jun 22
vijay nikore commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post मेरे ज़रूरी काम / अतुकांत कविता / चंद्रेश कुमार छतलानी
"रचना अच्छी लगी। बधाई, मित्र चंद्रेश जी।"
Mar 5
Samar kabeer commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post मेरे ज़रूरी काम / अतुकांत कविता / चंद्रेश कुमार छतलानी
"जनाब चंद्रेश जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 28
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani posted a blog post

मेरे ज़रूरी काम / अतुकांत कविता / चंद्रेश कुमार छतलानी

जिस रास्ते जाना नहींहर राही से उस रास्ते के बारे में पूछता जाता हूँ।मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ। जिस घर का स्थापत्य पसंद नहींउस घर के दरवाज़े की घंटी बजाता हूँ।मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ। कभी जो मैं करता हूं वह बेहतरीन हैवही कोई और करे - मूर्ख है - कह देता हूँ।मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ। मुझे गर्व है अपने पर और अपने ही साथियों परकोई और हो उसे तो नीचा ही दिखाता हूँ।मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ। मेरे कदमों के निशां पे है जो चलताउसे अपने हाथ पकड कर चलाता हूँ।मैं अपनी अहमियत ऐसे…See More
Feb 25
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Manan Kumar singh's blog post कान और कांव कांव(लघुकथा)
"गजब की रचना। बहुत-बहुत बधाई इस सृजन हेतु।"
Feb 25
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani updated their profile
Feb 25
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नए बीज / कविता
"रचना पसंद करने और अपनी टिप्पणी द्वारा मेरा उत्साहवर्धन करने हेतु बहुत-बहुत आभार आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सर।"
Feb 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नए बीज / कविता
"आ. भाई चंद्रेश जी, अच्छी कविता हुई है । हार्दिक बधाई । "
Feb 17
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नए बीज / कविता
"आदाब जनाब समर कबीर जी सर, कविता पर आकर मेरी हौसला अफ़ज़ाई करने के लिए दिली शुक्रिया आपका।"
Feb 17
Dr. Chandresh Kumar Chhatlani commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नए बीज / कविता
"रचना पसंद करने और अपनी टिप्पणी द्वारा मेरा उत्साहवर्धन करने हेतु बहुत-बहुत आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी सर।"
Feb 17
Samar kabeer commented on Dr. Chandresh Kumar Chhatlani's blog post नए बीज / कविता
"जनाब चंद्रेश जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 16

Profile Information

Gender
Male
City State
Udaipur Rajasthan
Native Place
Udaipur Rajasthan
Profession
Lecturer

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नया पकवान / लघुकथा / चंद्रेश कुमार छतलानी

एक महान राजा के राज्य में एक भिखारीनुमा आदमी सड़क पर मरा पाया गया। बात राजा तक पहुंची तो उसने इस घटना को बहुत गम्भीर मानते हुए पूरी जांच कराए जाने का हुक्म दिया।

सबसे बड़े मंत्री की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई जिसने गहन जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश की। राजा ने उस लंबी-चौड़ी रिपोर्ट को देखा और आंखें छोटी कर संजीदा स्वर में कहा, "एक लाइन में बताओ कि वह क्यों मरा?"

सबसे बड़े मंत्री ने अत्यंत विनम्र शब्दों में उत्तर दिया, "हुज़ूर, क्योंकि वह भूखा था।"

सुनते ही राजा की आंखें चौड़ी…

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Posted on June 22, 2020 at 12:30pm — 5 Comments

मेरे ज़रूरी काम / अतुकांत कविता / चंद्रेश कुमार छतलानी

जिस रास्ते जाना नहीं

हर राही से उस रास्ते के बारे में पूछता जाता हूँ।

मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ।

 

जिस घर का स्थापत्य पसंद नहीं

उस घर के दरवाज़े की घंटी बजाता हूँ।

मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ।

 

कभी जो मैं करता हूं वह बेहतरीन है

वही कोई और करे - मूर्ख है - कह देता हूँ।

मैं अपनी अहमियत ऐसे ही बढ़ाता हूँ।

 

मुझे गर्व है अपने पर और अपने ही साथियों पर

कोई और हो उसे तो नीचा ही दिखाता…

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Posted on February 25, 2020 at 12:40pm — 2 Comments

नए बीज / कविता

कुछ ख्वाबों के बीज लाकर

मैंने दिल के गमले में बोये थे।

पसीने का पानी पिलाकर

पौधे भी उगा दिये।

वो बात और है कि

गमले की मिट्टी मेरे दिल में भर गई।

और दिल भर देख भी नहीं…

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Posted on February 13, 2020 at 1:38pm — 6 Comments

आपका दिन (लघुकथा)

"मैं केक नहीं काटूँगी।" उसने यह शब्द कहे तो थे सहज अंदाज में, लेकिन सुनते ही पूरे घर में झिलमिलाती रोशनी ज्यों गतिहीन सी हो गयी। उसका अठारहवाँ जन्मदिन मना रहे परिवारजनों, दोस्तों, आस-पड़ौसियों और नाते-रिश्तेदारों की आँखें अंगदी पैर की तरह ताज्जुब से उसके चेहरे पर स्थित हो गयीं थी।

वह सहज स्वर में ही आगे बोली, "अब मैं बड़ी हो गयी हूँ, इसलिए सॉलिड वर्ड्स में यह कह सकती हूँ कि अब से यह केक मैं नहीं मेरी मॉम काटेगी।" कहते हुए उसके होठों पर मुस्कुराहट तैर गयी।

वहाँ खड़े अन्य सभी के…

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Posted on July 8, 2019 at 1:00pm — 3 Comments

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At 10:20pm on October 15, 2018, Sheikh Shahzad Usmani said…

आदाब।

आपकी अद्वितीय लघुकथा ''सत्यव्रत" भी मंच पर "फ़ीचर" किये जाने पर तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब डॉ. चन्द्रेश कुमार छतलानी  साहिब।

At 4:37pm on April 2, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आपका स्वागत है मित्र

 
 
 

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