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Chandresh Kumar Chhatlani
  • Male
  • Udaipur, Rajasthan
  • India
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Chandresh Kumar Chhatlani! - A Programmer in Udaipur / Rajasthan / India

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pratibha pande commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"जिसे पीड़ित समझा गया वो शातिर निकला  वाह .. बोध कथा से प्रतीक लेकर शानदार सृजन  हार्दिक बधाई आदरणीय चंद्रेश  जी "
Apr 20
Rahila commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"समसामयिक रचना,बेहद प्रभावी और वर्तमान हालातों पर सटीक चोट करती हुई। बहुत बधाई आपको"
Apr 20
Tasdiq Ahmed Khan commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"जनाब चंद्रेश कुमार साहिब, अच्छी लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।"
Apr 19
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
" वर्तमान/ समसामयिक नकारात्मक घटनाचक्र/ यथार्थ पर तमाम मीडिया में प्रकाशित हो रही विभिन्न विधाओं में रचनाओं से हटकर मेरे नज़रिए में उपरोक्त बेहद सकारात्मक संदेश वाहक रचना में 'भेड़िया' एक बहुआयामी बिम्ब/प्रतीक के रूप में…"
Apr 19
Dr Ashutosh Mishra commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"आदरणीय चंद्रेश जी ..रचना का अंत भावुक बनाने वाला है ...इस शानदार प्रयास पर हार्दिक बधाई सादर "
Apr 19
Samar kabeer commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"जनाब चन्द्रेश जी आदाब,बहुत अच्छी लघुकथा है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Apr 19
TEJ VEER SINGH commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय चन्द्रेश जी। एक लंबे अरसे के बाद आपकी एक लाज़वाब रचना पढ़ने को मिली। बेहतरीन प्रस्तुति। मेरे विचार से वह लड़का ही भेड़ और बकरी लेकर चंपत हो गया। इसलिये ही भेड़िया भूखा रह गया। लघुकथा बेहद तीखा कटाक्ष छोड़ गयी है।यही तो लघुकथा का अनकहा…"
Apr 19
Neelam Upadhyaya commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"आदरणीय चंद्रेश कुमार जी, एक मशहूर कहानी की लघुकथा के रूप में प्रस्तुति अच्छी लगी । आदरणीय नीलेश जी से मैं भी सहमत हूँ – "अंत में भेड़िया भूखा क्यूँ रहा ""
Apr 19
Nilesh Shevgaonkar commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"आ. चित्रेश जी,अच्छी   कथा हुई है ..अंत में भेड़िया भूखा क्यूँ रहा यह समझ नहीं  पाया मैं.सादर "
Apr 18
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post भेड़िया आया था (लघुकथा)
"वाह/आह.... //“भेड़िया आया... भेड़िया आया...” // ... एक मशहूर कहावत/बोधकथा के कथानक को समसामयिक    संदर्भित करते हुए बेहतरीन पटाक्षेप के साथ उम्दा विचारोत्तेजक रचना के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब डॉ.…"
Apr 18
Chandresh Kumar Chhatlani posted a blog post

भेड़िया आया था (लघुकथा)

“भेड़िया आया... भेड़िया आया...” पहाड़ी से स्वर गूंजने लगा। सुनते ही चौपाल पर ताश खेल रहे कुछ लोग हँसने लगे। उनमें से एक अपनी हँसी दबाते हुए बोला, “लो! सूरज सिर पर चढ़ा भी नहीं और आज फिर भेड़िया आ गया।“ दूसरा भी अपनी हँसी पर नियंत्रण कर गंभीर होते हुए बोला, “उस लड़के को शायद पहाड़ी पर डर लगता है, इसलिए हमें बुलाने के लिए अटकलें भिड़ाता है।“                                  तीसरे ने विचारणीय मुद्रा में कहा, “हो सकता है... दिन ही कितने हुए हैं उसे आये हुए। आया था तब कितना डरा हुआ था। माता-पिता को रास्ते…See More
Apr 18
Nita Kasar commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"बच्चे बच्चे होते है ।घर,स्कूल का परिवेश उसकी मानसिकता का निर्माण करता है।ज़िम्मेदार अपनी ज़िम्मेदारी से बच नही सकते ।सशक्त कथा के लिये बधाई आद० चंद्रेश छतलानी जी ।"
Feb 8
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"बहुत ही गंभीर विषय का चयन किया है आपने..लघु कथा पूर्ण रूप से अपनी बात कहने में सक्षम रही..सादर बधाई"
Feb 7
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"आद0 चंर्देश जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन लघुकथा लिखी आपने, बहुत बहुत बधाई"
Feb 7

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"ओह्ह्ह ....बहुत मारक लघु कथा लिखी है एक ज्वलंत मुद्दे पर आजकल न जाने क्या हो गया लोगों कि इतनी कुत्सित मानसिकता क्यूँ हो रही है सोचनीय स्थिति है चारो और . बहुत बहुत बधाई आपको आद० चंद्रेश कुमार छतलानी जी |"
Feb 6
Dr. Vijai Shanker commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"परिवेश भी शिक्षा देता है और बहुत प्रभावी और बहुत असरदार। यह बात परिवार के साथ-साथ हमें तो शायद अपने सम्पूर्ण परिवेश के सन्दर्भ में अभी भी सीखनी है। बधाई, आदरणीय चंद्रेश कुमार छटलानी जी , सादर।"
Feb 6

Profile Information

Gender
Male
City State
Udaipur Rajasthan
Native Place
Udaipur Rajasthan
Profession
Lecturer

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Chandresh Kumar Chhatlani's Blog

भेड़िया आया था (लघुकथा)

“भेड़िया आया... भेड़िया आया...” पहाड़ी से स्वर गूंजने लगा। सुनते ही चौपाल पर ताश खेल रहे कुछ लोग हँसने लगे। उनमें से एक अपनी हँसी दबाते हुए बोला, “लो! सूरज सिर पर चढ़ा भी नहीं और आज फिर भेड़िया आ गया।“

 

दूसरा भी अपनी हँसी पर नियंत्रण कर गंभीर होते हुए बोला, “उस लड़के को शायद पहाड़ी पर डर लगता है, इसलिए हमें बुलाने के लिए अटकलें भिड़ाता है।“

                                  

तीसरे ने विचारणीय मुद्रा में कहा, “हो सकता है... दिन ही कितने हुए हैं उसे आये हुए। आया था तब…

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Posted on April 18, 2018 at 7:00pm — 10 Comments

शह की संतान (लघुकथा)

तेज़ चाल से चलते हुए काउंसलर और डॉक्टर दोनों ही लगभग एक साथ बाल सुधारगृह के कमरे में पहुंचे। वहां एक कोने में अकेला खड़ा वह लड़का दीवार थामे कांप रहा था। डॉक्टर ने उस लड़के के पास जाकर उसकी नब्ज़ जाँची, फिर ठीक है की मुद्रा में सिर हिलाकर काउंसलर से कहा, "शायद बहुत ज़्यादा डर गया है।"

 

काउंसलर के चेहरे पर चौंकने के भाव आये, अब वह उस लड़के के पास गया और उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछा, "क्या हुआ तुम्हें?"

 

फटी हुई आँखों से उन दोनों को देखता हुआ वह लड़का कंधे पर हाथ का स्पर्श…

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Posted on February 3, 2018 at 10:10pm — 10 Comments

वैध बूचड़खाना (लघुकथा)

सड़क पर एक लड़के को रोटी हाथ में लेकर आते देख अलग-अलग तरफ खड़ीं वे दोनों उसकी तरफ भागीं। दोनों ही समझ रही थीं कि भोजन उनके लिए आया है। कम उम्र का वह लड़का उन्हें भागते हुए आते देख घबरा गया और रोटी उन दोनों में से गाय की तरफ फैंक कर लौट गया। दूसरी तरफ से भागती आ रही भैंस तीव्र स्वर में बोली, “अकेले मत खाना इसमें मेरा भी हिस्सा है।”

गाय ने उत्तर दिया, “यह तेरे लिए नहीं है... सवेरे की पहली रोटी मुझे ही मिलती है।”

“लेकिन क्यूँ?” भैंस ने उसके पास पहुँच कर प्रश्न…

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Posted on December 17, 2017 at 2:03pm — 21 Comments

पराजित हिन्द (लघुकथा)

“जय हिन्द सर।” उसने जोश भरे स्वर में कहा। मोबाइल फोन पर बात करते हुए वह तन कर भी खड़ा था।

“जय हिन्द।” दूसरी तरफ से आवाज़ आई।

“हुजूर, बात यह है कि... मॉडर्न स्कूल के प्रिंसिपल साब ने बुलाया था। दिवाली पर वे आपको लैपटॉप और ए.सी. उपहार में देना चाहते हैं।”

“क्यूँ?” दूसरी तरफ से प्रश्न पूछा गया लेकिन संयत स्वर में।

“हुजूर, उनके स्कूल में फीस दूसरे स्कूलों से थोड़ी-बहुत ज़्यादा है, ऐसी ही कुछ और छोटी-मोटी कमियाँ थीं तो... जिला शिक्षा अधिकारी साहब ने उनको पाबन्द कर दिया।…

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Posted on October 16, 2017 at 4:30pm — 5 Comments

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At 4:37pm on April 2, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

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