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Chandresh Kumar Chhatlani
  • Male
  • Udaipur, Rajasthan
  • India
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Chandresh Kumar Chhatlani! - A Programmer in Udaipur / Rajasthan / India

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Nita Kasar commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"बच्चे बच्चे होते है ।घर,स्कूल का परिवेश उसकी मानसिकता का निर्माण करता है।ज़िम्मेदार अपनी ज़िम्मेदारी से बच नही सकते ।सशक्त कथा के लिये बधाई आद० चंद्रेश छतलानी जी ।"
Feb 8
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"बहुत ही गंभीर विषय का चयन किया है आपने..लघु कथा पूर्ण रूप से अपनी बात कहने में सक्षम रही..सादर बधाई"
Feb 7
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"आद0 चंर्देश जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन लघुकथा लिखी आपने, बहुत बहुत बधाई"
Feb 7

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"ओह्ह्ह ....बहुत मारक लघु कथा लिखी है एक ज्वलंत मुद्दे पर आजकल न जाने क्या हो गया लोगों कि इतनी कुत्सित मानसिकता क्यूँ हो रही है सोचनीय स्थिति है चारो और . बहुत बहुत बधाई आपको आद० चंद्रेश कुमार छतलानी जी |"
Feb 6
Dr. Vijai Shanker commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"परिवेश भी शिक्षा देता है और बहुत प्रभावी और बहुत असरदार। यह बात परिवार के साथ-साथ हमें तो शायद अपने सम्पूर्ण परिवेश के सन्दर्भ में अभी भी सीखनी है। बधाई, आदरणीय चंद्रेश कुमार छटलानी जी , सादर।"
Feb 6
vijay nikore commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"लघु कथा अच्छी लगी। हार्दिक बधाई।"
Feb 5
Mohammed Arif commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"आदरणीय चंद्रेश छतलानी जी आदाब,                             बहुत ही सामयिक और गंभीर मुद्दे पर लिखी गई लघुकथा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 5
Samar kabeer commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"जनाब डॉ.चन्द्रेश छतलानी जी आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
TEJ VEER SINGH commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय चंद्रेश जी।बेहतरीन लघुकथा।शिक्षा के मंदिरों में व्याप्त रैगिंग से जुड़े घटना क्रम और उससे होने वाले भयानक परिणाम को दर्शाती एक लाज़वाब लघुकथा।"
Feb 4
Sheikh Shahzad Usmani commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
" बहुत ही उम्दा और गंभीर सामयिक मुद्दों पर बढ़िया सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब डॉ. चन्द्रेश कुमार छतलानी साहिब। बहुत कुछ बाख़ूबी अनकहे में भी सम्प्रेषित हुआ है।"
Feb 4
Chandresh Kumar Chhatlani posted a blog post

शह की संतान (लघुकथा)

तेज़ चाल से चलते हुए काउंसलर और डॉक्टर दोनों ही लगभग एक साथ बाल सुधारगृह के कमरे में पहुंचे। वहां एक कोने में अकेला खड़ा वह लड़का दीवार थामे कांप रहा था। डॉक्टर ने उस लड़के के पास जाकर उसकी नब्ज़ जाँची, फिर ठीक है की मुद्रा में सिर हिलाकर काउंसलर से कहा, "शायद बहुत ज़्यादा डर गया है।" काउंसलर के चेहरे पर चौंकने के भाव आये, अब वह उस लड़के के पास गया और उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछा, "क्या हुआ तुम्हें?" फटी हुई आँखों से उन दोनों को देखता हुआ वह लड़का कंधे पर हाथ का स्पर्श पाते ही सिहर उठा। यह देखकर काउंसलर…See More
Feb 4
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"धर्म की राजनीति पर अच्छा कटाक्ष करती रचना के सृजन हेतु सादर बधाई स्वीकार करें आदरणीय विनय कुमार सिंह जी सर|"
Jan 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"बहुत ही अच्छा सन्देश देती हुई रचना कही है आदरणीय भाई सतविन्द्र कुमार जी, हार्दिक बधाई स्वीकार करें इस सृजन हेतु|"
Jan 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"बहुत ही अच्छी रचना हुई है आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी साहब, सादर बधाई स्वीकार करें इस सृजन हेतु| मेरे अनुसार रचना के शीर्षक पर कुछ कार्य और किया जा सकता है| सादर विचारार्थ,"
Jan 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"गजब की रचना कही है आदरणीया प्रतिभा जी, सादर बधाई स्वीकार करें इस सृजन हेतु|"
Jan 31
Chandresh Kumar Chhatlani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"आदरणीय सर, आपकी हर रचना तारीफ़ से बहुत ऊपर होती हैं, हम सभी को बहुत कुछ सिखाते हुए| सादर नमन आपको इस एक और बेहतरीन रचना से परिचय कराने हेतु|"
Jan 31

Profile Information

Gender
Male
City State
Udaipur Rajasthan
Native Place
Udaipur Rajasthan
Profession
Lecturer

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शह की संतान (लघुकथा)

तेज़ चाल से चलते हुए काउंसलर और डॉक्टर दोनों ही लगभग एक साथ बाल सुधारगृह के कमरे में पहुंचे। वहां एक कोने में अकेला खड़ा वह लड़का दीवार थामे कांप रहा था। डॉक्टर ने उस लड़के के पास जाकर उसकी नब्ज़ जाँची, फिर ठीक है की मुद्रा में सिर हिलाकर काउंसलर से कहा, "शायद बहुत ज़्यादा डर गया है।"

 

काउंसलर के चेहरे पर चौंकने के भाव आये, अब वह उस लड़के के पास गया और उसके कंधे पर हाथ रख कर पूछा, "क्या हुआ तुम्हें?"

 

फटी हुई आँखों से उन दोनों को देखता हुआ वह लड़का कंधे पर हाथ का स्पर्श…

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Posted on February 3, 2018 at 10:10pm — 10 Comments

वैध बूचड़खाना (लघुकथा)

सड़क पर एक लड़के को रोटी हाथ में लेकर आते देख अलग-अलग तरफ खड़ीं वे दोनों उसकी तरफ भागीं। दोनों ही समझ रही थीं कि भोजन उनके लिए आया है। कम उम्र का वह लड़का उन्हें भागते हुए आते देख घबरा गया और रोटी उन दोनों में से गाय की तरफ फैंक कर लौट गया। दूसरी तरफ से भागती आ रही भैंस तीव्र स्वर में बोली, “अकेले मत खाना इसमें मेरा भी हिस्सा है।”

गाय ने उत्तर दिया, “यह तेरे लिए नहीं है... सवेरे की पहली रोटी मुझे ही मिलती है।”

“लेकिन क्यूँ?” भैंस ने उसके पास पहुँच कर प्रश्न…

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Posted on December 17, 2017 at 2:03pm — 21 Comments

पराजित हिन्द (लघुकथा)

“जय हिन्द सर।” उसने जोश भरे स्वर में कहा। मोबाइल फोन पर बात करते हुए वह तन कर भी खड़ा था।

“जय हिन्द।” दूसरी तरफ से आवाज़ आई।

“हुजूर, बात यह है कि... मॉडर्न स्कूल के प्रिंसिपल साब ने बुलाया था। दिवाली पर वे आपको लैपटॉप और ए.सी. उपहार में देना चाहते हैं।”

“क्यूँ?” दूसरी तरफ से प्रश्न पूछा गया लेकिन संयत स्वर में।

“हुजूर, उनके स्कूल में फीस दूसरे स्कूलों से थोड़ी-बहुत ज़्यादा है, ऐसी ही कुछ और छोटी-मोटी कमियाँ थीं तो... जिला शिक्षा अधिकारी साहब ने उनको पाबन्द कर दिया।…

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Posted on October 16, 2017 at 4:30pm — 5 Comments

रावण का चेहरा (लघुकथा)

हर साल की तरह इस साल भी वह रावण का पुतला बना रहा था। विशेष रंगों का प्रयोग कर उसने उस पुतले के चेहरे को जीवंत जैसा कर दिया था। लगभग पूरा बन चुके पुतले को निहारते हुए उसके चेहरे पर हल्की सी दर्द भरी मुस्कान आ गयी और उसने उस पुतले की बांह टटोलते हुए कहा, "इतनी मेहनत से तुझे ज़िन्दा करता हूँ... ताकि दो दिनों बाद तू जल कर खत्म हो जाये! कुछ ही क्षणों की जिंदगी है तेरी..." 

कहकर वह मुड़ने ही वाला था कि उसके कान बजने लगे, आवाज़ आई,

"कुछ क्षण?"

वह एक भारी स्वर था जो उसके कान में…

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Posted on September 30, 2017 at 12:30pm — 4 Comments

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At 4:37pm on April 2, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

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