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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

मध्यकालीन हिदी साहित्य में होली का कोलाज - डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

हिन्दी साहित्य में काल विभाजन के अनुसार आदिकाल और आधुनिक काल के बीच का समय मध्ययुग (1318ई०-1843ई०) कहलाता है I इस प्रकार भक्ति एवं रीतिकाल की सम्पूर्ण अवधि हिन्दी साहित्येतिहास का मध्यकाल है I…Continue

Started 20 hours ago

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह फरवरी 2019 – एक प्रतिवेदन
2 Replies

रविवार, दिनांक 24 फरवरी 2019 को मनोज शुक्ल ‘मनुज के सौजन्य से इंजीनियरिंग कालेज. लखनऊ के समीप स्थित स्टेट बैंक की बिल्डिंग में आगमन संस्था और ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की एक संयुक्त काव्य गोष्ठी हुयी I इस…Continue

Started this discussion. Last reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव 20 hours ago.

उपन्यास के निकष पर - ‘शिव :: अलौकिक व्यक्तित्व की लौकिक-यात्रा’                                                 डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
2 Replies

 हिंदी साहित्यकारों ने भारतीय मिथकों के दैवीय चरित्रों को उपन्यासों में मानवीकृत करने के बहुतेरे प्रयास किये हैं I रामायण और महाभारत के नायक, उपनायक अथवा विख्यात चरित्रों पर बड़े विशद और प्रभावी…Continue

Started this discussion. Last reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Feb 25.

बदलते रहे है हिंदी कविता में संयोग शृंगार के प्रतिमान  ///    डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव

काव्य-शास्त्र के अनुसार वियोग शृंगार के चार प्रकार हैं –पूर्वराग, मान, प्रवास और करुण I इसकी दस दशायें होती हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भरतमुनि ने जो 33 संचारी या व्यभिचारी भाव बताये हैं वे…Continue

Started Feb 6

 

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Latest Activity

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted discussions
19 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह फरवरी 2019 – एक प्रतिवेदन
"आ० शरदिंदु जी का कथन स्वीकार्य है i इस गडबडी का मुख्य्कार्न है कार्यक्रम की आडियो रिकार्डिंग का किन्ही कारणों से डिलीट हो जाना  सदस्यों ने भी अपनी पढ़ी  रचनाओं को दोबारा देने में आलस्य किया और कुछ के फोन न०  भी उपलब्ध नही थे I …"
20 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
sharadindu mukerji replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह फरवरी 2019 – एक प्रतिवेदन
"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण जी,फरवरी 2019 की गोष्ठी का प्रतिवेदन आने में देर हुई है जिसका सीधा असर प्रतिवेदन पर पड़ा है. कम से कम तीन रचनाकारों की प्रस्तुति को आप भूल गये जिनमें आदरणीया नमिता सुन्दर जी की रचना भी है. नमिता जी सुश्री संध्या सिंह जी के साथ…"
yesterday
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
TEJ VEER SINGH commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )
"हार्दिक बधाई आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी। वरिष्ठ जनों की बच्चों जैसी खाद्य पदार्थों के प्रति रुचि होना।उसकी पूर्ति ना होने से उत्पन्न आंतरिक पीड़ा और उनकी प्रतिबंधित खान पान व्यवस्था पर लाज़वाब लघुकथा।"
Tuesday
विनय कुमार commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )
"वाह, बहुत बढ़िया और हक़ीक़त के करीब की रचना, बुढ़ापे में तो खाने पीने की लालसा और बढ़ जाती है लेकिन स्वास्थ्य साथ नहीं देता. बहुत बहुत बधाई इस बढ़िया लघुकथा के लिए आ डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब"
Tuesday
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )
"वर्तमान में पारिवारिक परिवेश में पनपते विचारों का गहन मंथन चित्रित किया है सर आपने। इस लघु कथा में एक कटु यथार्थ को दर्शाती मार्मिक व्यथा सजीव हो उठी। इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए दिल से बधाई एवं नमन आदरणीय डॉ गोपल जी।"
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )
"वाह। बेहतरीन व एकदम उम्दा और तीखी, विचारोत्तेजक।  परहेज़ चलते हुए भी मीठी वाणी में दुलार सहित वैकल्पिक रुचि स्वल्पाहार कराना चाहिए बहू व बेटे द्वारा। हार्दिक बधाई और आभार इस अहम मुद्दे को उठाने हेतु आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहिब।"
Monday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )

बूढ़े ने आँखें बंद किये-किये ही करवट ली I उसका ध्यान किचन से आती आवाज की ओर चला गया I‘कैसा बना है ?’– बहू ने पूछा I‘बहुत बढ़िया‘- बेटे ने कहा –‘थोड़ा चटनी और डालो I हाँ बस--बस I’‘अच्छा लगा---? नमक ठीक पड़ा है न ?’‘हाँ, बहुत मजेदार है I थोडा और कुरकुरा करो I’‘जल जायेंगे ---‘‘जलेंगे नहीं, बस थोड़ा लाल हो जाय I ‘- लडके ने उकसाया  I फिर जैसे उसे कुछ याद आया –‘पापा कहाँ हैं ?’बूढ़े की आँखों में चमक आयी I कम से कम बेटे को तो उसकी फ़िक्र है I उसके सामने गरमा-गरम पकौड़े की प्लेट नाच उठी I मन में आशा की किरण…See More
Monday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted an event

गोपाल नारायण श्रीवास्तव at डी1/343 , सेक्टर-एफ़, जानकीपुरम, लखनऊ

March 17, 2019 from 3pm to 5pm
समस्त सम्मानित सदस्य ओबीओ             ओबीओ, लखनऊ चैप्टर सभी सदस्यों से मिल रहे सहयोग का आभारी है Iश्री मयंक श्रीवास्तव जी ने अवगत कराया ही कि माह मार्च 2019 की गोष्ठी का आयजन उनके द्वारा किया जाएगा  i इस क्रम में अवगत कराना है कि यह गोष्ठी दिनांक 17 मार्च 2019, दिन रविवार को श्री मृगांक  श्रीवास्तव जी के घर पर होगी I कार्यक्रम के प्रथम चरण में ‘मध्यकाल की हिन्दी कविता में होली’ विषय पर परिचर्चा होगी I सदस्य अपनी पसंद के किसी एक या अधिक कवि पर चर्चा कर सकते हैं I दूसरे चरण में काव्य-पाठ होगा I…See More
Mar 7
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion उपन्यास के निकष पर - ‘शिव :: अलौकिक व्यक्तित्व की लौकिक-यात्रा’                                                 डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"आ० शुक्ल जी , आपका आभार कि आप मेरी समीक्षा पर आये  i आपने न्यास की जो व्याख्या कि वह उचित ही है   I आपने शिव को समझने के लिए 'नम: शिवाय शान्ताय" पढ़ने की अनुशसा की I इसका भी  स्वागत  है  I शिव के बारे में जो…"
Feb 25
Dr T R Sukul replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion उपन्यास के निकष पर - ‘शिव :: अलौकिक व्यक्तित्व की लौकिक-यात्रा’                                                 डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"पहली बात :- उपन्यास संस्कृत शब्द ‘‘न्यास’’ का अर्थ है, स्थापन करना। जैसे, 1. जब गृह निर्माण किया जाता है तो सर्वप्रथम कुछ पत्थरों को नीव में रखा जाता है, इसे कहते हैं शिलान्यास (शिला पत्थर, न्यास स्थापना करना) हमारे देश में…"
Feb 23
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

उपन्यास के निकष पर - ‘शिव :: अलौकिक व्यक्तित्व की लौकिक-यात्रा’                                                 डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 हिंदी साहित्यकारों ने भारतीय मिथकों के दैवीय चरित्रों को उपन्यासों में मानवीकृत करने के बहुतेरे प्रयास किये हैं I रामायण और महाभारत के नायक, उपनायक अथवा विख्यात चरित्रों पर बड़े विशद और प्रभावी आख्यान रचे गये, जिनमे से अनेक बहुत लोक प्रिय भी हुए I इस मुहिम में रामकुमार ‘भ्रमर’ और नरेंद्र कोहली जैसे कथाकारों का अवदान कौन भूल सकता है I इन मिथकीय आख्यानों को प्रायश: कथाकारों ने अपनी मौलिक उद्भावनाओं से कहीं-कहीं अतिरंजित भी किया है I मौलिक उद्भावनायें निःसंदेह साहित्य को समृद्ध करती हैं I किन्तु…See More
Feb 18
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post बच्चा है तू (लघुकथा )
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 13
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post बच्चा है तू (लघुकथा )
"वाह आदरणीय गोपाल जी बहुत ही मार्के की लघु कथा का सृजन किया है आपने सर। एक यथार्थ को उजागर करती इस प्रस्तुति के लिए दिल से बधाई। यही सब तो हो रहा है आजकल। घास दिखाते जाओ काम कराते जाओ। अति सुंदर।"
Feb 12
Surkhab Bashar commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post बच्चा है तू (लघुकथा )
"आ. डॉ.  गोपाल  नारायन श्रीवास्तव जी  बहुत सुंदर ढंग से लघू कथा लिखी है ऐसा हर   दफ्तर मे अमूमन होता ही है वाह वाह वाह वाह वाह "
Feb 12

Profile Information

Gender
Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

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उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )

बूढ़े ने आँखें बंद किये-किये ही करवट ली I उसका ध्यान किचन से आती आवाज की ओर चला गया I

‘कैसा बना है ?’– बहू ने पूछा I

‘बहुत बढ़िया‘- बेटे ने कहा –‘थोड़ा चटनी और डालो I हाँ बस--बस I’

‘अच्छा लगा---? नमक ठीक पड़ा है न ?’

‘हाँ, बहुत मजेदार है I थोडा और कुरकुरा करो I’

‘जल जायेंगे ---‘

‘जलेंगे नहीं, बस थोड़ा लाल हो जाय I ‘- लडके ने उकसाया  I फिर जैसे उसे कुछ याद आया –‘पापा कहाँ हैं ?’

बूढ़े की आँखों में चमक आयी I कम से कम बेटे को तो उसकी फ़िक्र है I उसके…

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Posted on March 18, 2019 at 2:30pm — 5 Comments

बच्चा है तू (लघुकथा )

 न्याय के मंदिर की मेरी पहली परिक्रमा थी i कोर्ट के आदेश के अनुसार मुझे एक कर्मचारी की सैलरी कोर्ट में जमा करनी थी I मैं ठीक दस बजे चेक लेकर कोर्ट पहुंच गया I कैशियर साहब ग्यारह बजे आये और बोले –‘इसे स्टैंडिंग काउंसल से वेरीफाई करा के लाओ I’

स्टैंडिंग काउंसल ने डांट लगाई –‘हाउ यू डेयर कम डायरेक्टली टू मी I कम थ्रू माय आफिस I’  मैं आफिस गया I संबंधित बाबू सीट पर नहीं थे I वह एक घंटे बाद आये और आकर मोबाईल पर बतियाने लगे I दस मिनट बाद खाली हुए तो झुंझलाकर बोले- ‘क्या है…

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Posted on February 9, 2019 at 11:00pm — 4 Comments

कुम्भ स्नान (लघुकथा )

‘अरे राम-राम, संगम से इतनी दूर भी गंगा का किनारा साफ़ नहीं I सब ससुर किनारे में ही निपटान करत है i ऐसे में गंगा नहाय से का फायदा ? मगर हमरे घरैतिन के सिर पर तो कुम्भ सवार रहै I’- पंडित जी ने नाव वाले से कहा I नाव में कुछ और सवारियाँ भी थीं, परन्तु किसी का भी चेहरा धुंधलके और घने कुहरे के कारण साफ़ नजर नही आता था I

मल्लाह ने स्वीकार की मुद्रा में धीरे से ‘हूँ------‘ कहा और नाव खेने में मशगूल हो गया I    

‘इनका होश ही नाहीं i’– पंडिताइन ने ठंढी बयार से बचाने के लिए गोद में पड़े अपने…

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Posted on February 3, 2019 at 5:41pm — 3 Comments

फर्स्ट-साईट-लव (लघुकथा )

दोनों सर्विस में थे I दोनों एक ही मंजिल के दैनिक रेल यात्री थे I दोनों के बीच आँखों-आँखों में प्यार का व्यापार कुछ माह चला I प्लेटफार्म में, ट्रेन के कम्पार्टमेंट में दोनों एक दूसरे को ढूंढते I लडकी सोचती कि पहले लडका पहल करे, पर लडका नैन- सुधारस पान कर ही संतुष्ट था I एक दिन लडकी की सहेलियों ने कहा –‘ मि० शील-संकोच से तुझे ही बात करनी पड़ेगी i’

            लडकी ने साहस किया I एक दिन ट्रेन से उतरकर उसने लडके से कहा -‘आप को ऐतराज न हो तो हम साथ-साथ काफी पी सकते हैं…

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Posted on January 13, 2019 at 8:30pm — 5 Comments

Comment Wall (55 comments)

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At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

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