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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
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  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

लेखन में आत्ममुग्धता की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके खतरे-एक परिचर्चा /// प्रस्तुति – डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

 भारतीय संस्कृति में विनम्रता का महत्वपूर्ण स्थान रहा है I अपनी  तारीफ सुनकर आज भी विनम्र लोग शील सँकोच से सिकुड़ जाते हैं I  पर पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से अब इसे अच्छा  नही माना जाता I आज आप तभी…Continue

Started yesterday

‘साहित्य में सृजन की प्रेरणा और विकास का उत्स’ - एक परिचर्चा   :: प्रस्तुति डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

 दिनांक 23 दिसम्बर, दिन रविवार को ओ.बी.ओ लखनऊ-चैप्टर की ‘साहित्य संध्या‘ वर्ष 2018 में सभी प्रतिभागियों को परिचर्चा कि लिए एक विषय दिया गया थ – “साहित्य में सृजन की प्रेरणा और विकास का उत्स“ I इस…Continue

Started Jan 12

मुल्ला दाउद  के ‘चंदायन’ से मुतासिर रहे है जायसी -डॉ, गोपाल नारायन श्रीवास्तव
4 Replies

‘पद्मावत’ मूवी के आने पर आज का आत्ममुग्ध भारतीय यह जान सका कि मलिक मुहम्मद ‘जायसी’ नाम का भी कोई कवि भी था, जिसने अवधी लोक-भाषा में ‘पद्मावत’ जैसा महाकाव्य लिखा I साहित्य के नव अनुरागी भी जायसी को इस…Continue

Started this discussion. Last reply by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव Jan 8.

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या- माह अक्टूबर,  2018- एक प्रतिवेदन  -डा. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

21 अक्टूबर 2018, दिन रविवार को लोकप्रिय कथाकार डॉ. अशोक शर्मा के आवास, 81 विनायकपुरम, विकासनगर. लखनऊ पर उन्हीं के संयोजन से ओ.बी.ओ लखनऊ-चैप्टर की ‘साहित्य संध्या‘ माह अक्टूबर का आयोजन हुआ I इस आयोजन…Continue

Started Nov 15, 2018

 

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

लेखन में आत्ममुग्धता की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके खतरे-एक परिचर्चा /// प्रस्तुति – डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

 भारतीय संस्कृति में विनम्रता का महत्वपूर्ण स्थान रहा है I अपनी  तारीफ सुनकर आज भी विनम्र लोग शील सँकोच से सिकुड़ जाते हैं I  पर पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से अब इसे अच्छा  नही माना जाता I आज आप तभी स्मार्ट है जब  ‘आई डिज़र्व इट’ या ‘आई एम् डूइंग वेल’ कहना आपको आ जाता है I आधुनिकीकरण की इस दौड़ में स्मार्ट होना आवश्यक है I परन्तु इससे आत्ममुग्धता लोगों पर हावी हो रही है i मनोविज्ञान में इसे एक बीमारी अर्थात नार्सीसस पर्सनेलिटी डिसऑर्डर कहा गया है I इसी विचार से दिनांक 13 दिसम्बर, दिन रविवार को…See More
20 hours ago
सर्वेश कुमार मिश्र commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post फर्स्ट-साईट-लव (लघुकथा )
"वाह्ह्ह्हह्ह्! 'माफ़ कीजिएगा..." निःशब्द"
Sunday
सर्वेश कुमार मिश्र commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post फर्स्ट-साईट-लव (लघुकथा )
"वाह्ह्ह्हह्ह्! अंतिम पंक्ति 'मैं विवाहित हूँ" निःशब्द"
Sunday
Mahendra Kumar commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post फर्स्ट-साईट-लव (लघुकथा )
"बढ़िया लघुकथा है आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।"
Jan 16
Sheikh Shahzad Usmani commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post फर्स्ट-साईट-लव (लघुकथा )
"आदाब। वाक़ई होता तो ऐसा भी है  अधिकतर बुद्धिजीवी पुरूषों के साथ। आजकल की लड़िकयां तो यूं जुगाड़ से सब कुछ कह या कहलवा देतीं हैं और 'दूध का दूध, पानी  का पानी' या 'एक-तरफ़ा प्रेमाकर्षण- कहानी' सुस्पष्ट हो जाती है, वरना…"
Jan 14
Sheikh Shahzad Usmani commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post फर्स्ट-साईट-लव (लघुकथा )
"आदाब। वाक़ई होता तो ऐसा भी है  अधिकतर बुद्धिजीवी पुरूषों के साथ। आजकल की लड़िकयां तो यूं जुगाड़ से सब कुछ कह या कहलवा देतीं हैं और 'दूध का दूध, पानी  का पानी' या 'एक-तरफ़ा प्रेमाकर्षण- कहानी' सुस्पष्ट हो जाती है, वरना…"
Jan 14
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post फर्स्ट-साईट-लव (लघुकथा )
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 14
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

‘साहित्य में सृजन की प्रेरणा और विकास का उत्स’ - एक परिचर्चा   :: प्रस्तुति डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

 दिनांक 23 दिसम्बर, दिन रविवार को ओ.बी.ओ लखनऊ-चैप्टर की ‘साहित्य संध्या‘ वर्ष 2018 में सभी प्रतिभागियों को परिचर्चा कि लिए एक विषय दिया गया थ – “साहित्य में सृजन की प्रेरणा और विकास का उत्स“ I इस विषय पर प्रतिभागियों ने जोशो खरोश से भाग लिया उनके विचार यहाँ पर प्रस्तुत हैं i डा. शरदिंदु मुकर्जी  ने कहा , “ अपने अन्टार्टिक अभियानों में समय काटने के लिये मैं  किसी  न किसी सहकर्मी के बर्थ डे या मैरिज एनीवर्सरी अदि अवसरों पर कुछ साहित्यिक गतिविधि करता था I वह लोगों को बहुत पसंद आया I ऐसा नहीं कि सब…See More
Jan 14
Sheikh Shahzad Usmani commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post फर्स्ट-साईट-लव (लघुकथा )
"आदाब। वाक़ई होता तो ऐसा भी है  बेचारे पुरूषों के साथ। लड़िकयां तो यूं जुगाड़ से सब कुछ कह या कहलवा देतीं हैं और दूध का दूध,पान का पानी या एक-तरफ़ा कहानी सुस्पष्ट हो जाती है, वरना पुरुष ही स्वयं से उलझता रहकर स्वयं पर भड़ास निकाल कर दूसरों के…"
Jan 13
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

फर्स्ट-साईट-लव (लघुकथा )

दोनों सर्विस में थे I दोनों एक ही मंजिल के दैनिक रेल यात्री थे I दोनों के बीच आँखों-आँखों में प्यार का व्यापार कुछ माह चला I प्लेटफार्म में, ट्रेन के कम्पार्टमेंट में दोनों एक दूसरे को ढूंढते I लडकी सोचती कि पहले लडका पहल करे, पर लडका नैन- सुधारस पान कर ही संतुष्ट था I एक दिन लडकी की सहेलियों ने कहा –‘ मि० शील-संकोच से तुझे ही बात करनी पड़ेगी i’            लडकी ने साहस किया I एक दिन ट्रेन से उतरकर उसने लडके से कहा -‘आप को ऐतराज न हो तो हम साथ-साथ काफी पी सकते हैं ?’ ‘यहाँ आप सर्विस करते हैं ?’…See More
Jan 13
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on विनय कुमार's blog post कसक- लघुकथा
"आ० आपके प्रस्तुति  का अंदाज इस कथा को विशेष धज देता है i  बहुत बधाई i "
Jan 12
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion मुल्ला दाउद  के ‘चंदायन’ से मुतासिर रहे है जायसी -डॉ, गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"प्रिय अलोक , आपकी टीप  से ही साबित होता है कि आपने आलेख को ध्यान से पढ़ा है I मैं आपका आभारी हूँ i सस्नेह I "
Jan 8
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion मुल्ला दाउद  के ‘चंदायन’ से मुतासिर रहे है जायसी -डॉ, गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"आ० समर कबीर साहिब , आपसे मुतासिर हूँ i आप हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं I "
Jan 8
Alok Rawat replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion मुल्ला दाउद  के ‘चंदायन’ से मुतासिर रहे है जायसी -डॉ, गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"आदरणीय गोपाल नारायण श्रीवास्तवजी, आपका "चंदायन" और "पद्मावत" से सम्बंधित तुलनात्मक आलेख पढ़ा। ये बात बिलकुल सत्य है कि फिल्म पद्मावत के बाद बहुत से लोगों को पद्मावत और मालिक मुहम्मद जायसी के विषय में ज्ञात हुआ होगा। अन्यथा…"
Jan 7
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted an event

गोपाल नारायण श्रीवास्तव at D -1225, इंदिरा नगर

January 13, 2019 from 3pm to 6pm
ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर की मासिक गोष्ठी See More
Jan 7
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post नव् वर्ष
"आदरणीय मंगलाशीष स्वीकार है सपरिवार मंगल होय सादर ॐ"
Jan 3

Profile Information

Gender
Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

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फर्स्ट-साईट-लव (लघुकथा )

दोनों सर्विस में थे I दोनों एक ही मंजिल के दैनिक रेल यात्री थे I दोनों के बीच आँखों-आँखों में प्यार का व्यापार कुछ माह चला I प्लेटफार्म में, ट्रेन के कम्पार्टमेंट में दोनों एक दूसरे को ढूंढते I लडकी सोचती कि पहले लडका पहल करे, पर लडका नैन- सुधारस पान कर ही संतुष्ट था I एक दिन लडकी की सहेलियों ने कहा –‘ मि० शील-संकोच से तुझे ही बात करनी पड़ेगी i’

            लडकी ने साहस किया I एक दिन ट्रेन से उतरकर उसने लडके से कहा -‘आप को ऐतराज न हो तो हम साथ-साथ काफी पी सकते हैं…

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Posted on January 13, 2019 at 8:30pm — 5 Comments

नव् वर्ष

समय की होती अद्भुत चाल I गया कुछ लेकर-देकर साल II

बिछाकर पलक पांवड़े द्वार I किया हमने जिसका सत्कार II

वर्ष नव यह आया अभिराम I लिए सुन्दर सपने अविराम II

पूर्ण होंगे संभावित कार्य I कृपा बरसाएंगे सब आर्य II

सभी को शुभ हो नूतन वर्ष I सभी का मंगल, हो उत्कर्ष II

सभी के सपने हों साकार I सभी का हुलसित हो संसार II

सभी का मुखरित हो उल्लास I सभी के अधरों पर हो हास II

वर्ष भर हो जय-जय का शोर I वर्ष भर हो आँगन में रोर II

वर्ष भर उत्सव रहे वदान्य I वर्ष भर पूरित हो…

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Posted on January 1, 2019 at 4:56pm — 3 Comments

रगों में बहता खून  (लघुकथा )

 कैदी ! तुझसे कोई  मिलने आया है I’ –जेल के सिपाही ने सूचना दी  I अगले ही पल काले कोट में एक वकील प्रकट हुआ I

‘आपकी पत्नी ने मुझे आपका वकील एपॉइंट किया है I आप मुझे सच-सच बताइए कि आपने मैरिज-कोर्ट में अपने बेटे की हत्या क्यों की ? क्या आपकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी ?’

     कैदी कुछ नहीं बोला I उसने मुँह फेर लिया I वकील असमंजस में पड़ गया I कुछ देर चुप रहकर वह बोला –‘ देखिये अगर आप ही सहयोग नहीं करेंगे तो मैं आपकी मदद कैसे कर पाऊंगा ?’

‘वकील साहब, आप अपना समय बर्बाद कर रहे…

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Posted on December 20, 2018 at 6:24pm — 4 Comments

खामियाजा ( लघु कथा )

‘बाबू जी, ग्यारह महीने हो गए, मगर अब तक मुझे  पेंशन, बीमा, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण कुछ भी नहीं मिला I

‘मिलेगा कैसे अभी स्वीकृत ही कहाँ हुआ ?’

‘पर काहे नहीं हुआ ? हमने तो रिटायर होने के छः माह पहले ही सारे प्रपत्र भर कर दे दिए थे I’

‘ज्यादा भोले मत बनो, तुमने भी साठ साल की उम्र तक नौकरी की है I तुम्हें  नहीं पता सरकारी काम–काज कैसे होता है ?’

‘पता है बाबू जी, इसीलिये मैंने आपको पैसे पहले ही दे दिए थे I ‘

‘हां, तो तुम्हे फंड तो मिल गया न…

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Posted on December 12, 2018 at 8:55pm — 7 Comments

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At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

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