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Manan Kumar singh
  • बिहार
  • India
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Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"बहुत बहुत आभार आदरणीया।"
Feb 9
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"आदरणीय समर जी,अब रचना गजल रूप में पेश है:                 *** छीन लेंगे वे आजादी, आजकल चर्चा बहुत है बेधड़क कुछ भी कहने की, आजकल चर्चा बहुत है।1 राह में भटके हुए जो,रास्ते…"
Feb 9
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"शुक्रिया भाई छोटेलाल जी।"
Feb 9
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"शुक्रिया,गजल वाले फोल्डर में संचित हो गई थी,इसीलिए।"
Feb 8
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"इसे अभी कविता ही कहें,आदरणीय।"
Feb 8
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-112
"           #गजल#                  *** छीन लेंगे वे आजादी, आजकल चर्चा बहुत है बेधड़क कुछ भी कहने की, आजकल चर्चा बहुत है।1 राह में भटके हुए…"
Feb 8
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post कान और कांव कांव(लघुकथा)
"जी शुक्रिया।"
Feb 5
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post कान और कांव कांव(लघुकथा)
"जी शुक्रिया।"
Feb 5
Manan Kumar singh's blog post was featured

कान और कांव कांव(लघुकथा)

कान और कांव कांव  *****एक आदमी(नकाब में) :तेरे कान कौवे ले गए।दूसरा:एं?पहला:और क्या?वो देखो, कौवे उड़ते जा रहे हैं।दूसरा व्यक्ति दो कौवों के पीछे दौड़ने लगा। उसके पीछे एक एक कर लोग दौड़ने लगे। कारवां बन गया....गुबार देखते बनता था ... कारवां के पिछले हिस्से में दौड़ते हांफते लोग एक दूसरे से सवाल करते कि आखिर वे कहां जा रहे हैं,क्या कर रहे हैं? हां, आगे के हिस्से की आवाज में आवाज जरूर मिलाते कि ' वापस दो,वापस दो...।' कोई कोई तो ' वापस लो..वापस लो..' की भी आवाज उठाता।भीड़ के पृष्ठ भाग में उड़ते दो…See More
Jan 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"आदरणीय,आपका आभार।"
Jan 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"जी आदरणीया,आपका बहुत बहुत आभार।"
Jan 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"जी आपका आभार।"
Jan 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"जी आभार आपका।कथित बिंदु पर आदरणीय योगराज जी ने भी ध्यान आकृष्ट कराया था।उक्त बिंदु का संज्ञान लिया गया है।समयानुसार परिस्थितियां बदलेंगी,तो लघुकथा भी अपना कलेवर बदलेगी।"
Jan 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"आभार आपका।"
Jan 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"आपका आभार आदरणीय योगराज जी।समयानुसार लघुकथा में अपेक्षित परिमार्जन लाजिमी रहेगा,और होगा भी।"
Jan 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"आपका आभार आदरणीय उस्मानी जी।"
Jan 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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Manan Kumar singh's Blog

ग्राहक फ्रेंडली(लघुकथा)

बैंक ने रेहन रखी संपत्तियों की नीलामी की सूचना छपवाई।साथ में फोन पर बात करती किसी लड़की की भी फोटो छप गई। बैंक वाले खुश थे कि इससे नीलामी प्रक्रिया का प्रचार प्रसार होगा,मुफ्त में ।उधर फोटो वाली लड़की आग - बबूला हो रही थी  --

' भला ऐसा कैसे कर सकते हैं ये बैंक वाले?'

' कर चुके,' दूसरे ग्राहक ने आं खें मटकाई।

' अरे मैं तो इस ऑफिस में कल पैसे जमा कराने आई थी,जब ये बैंक वाले अपने नोटिस बोर्ड की फोटो ले रहे थे...करम..ज ...ले सब।'

' और संपत्ति विवरण में आपकी भी फोटो…

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Posted on January 16, 2020 at 7:00pm — 5 Comments

कान और कांव कांव(लघुकथा)

कान और कांव कांव 

*****

एक आदमी(नकाब में) :तेरे कान कौवे ले गए।

दूसरा:एं?

पहला:और क्या?वो देखो, कौवे उड़ते जा रहे हैं।

दूसरा व्यक्ति दो कौवों के पीछे दौड़ने लगा। उसके पीछे एक एक कर लोग दौड़ने लगे। कारवां बन गया....गुबार देखते बनता था ... कारवां के पिछले हिस्से में दौड़ते हांफते लोग एक दूसरे से सवाल करते कि आखिर वे कहां जा रहे हैं,क्या कर रहे हैं? हां, आगे के हिस्से की आवाज में आवाज जरूर मिलाते कि ' वापस दो,वापस दो...।' कोई कोई तो ' वापस लो..वापस लो..' की भी आवाज…

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Posted on January 11, 2020 at 2:58pm — 4 Comments

जांच की रिपोर्ट

लड़की को डायरिया थी।आज उसे इस तीसरे नामी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।रिपोर्ट की फाइलें साथ थीं।घरवाले परेशान थे,पर हॉस्पिटल तो जैसे देवालय हो।सब लोग बड़े आराम से अपनी अपनी ड्यूटी में लगे थे।डॉक्टर आया।सुना था कि बड़ा डॉक्टर है।उसने सरसरी निगाह से कुछ ताजा रिपोर्टें देखी।फिर दवाएं लिखने लगा।तीमारदारों में से एक ने यूरिन कल्चर की रिपोर्ट की तरफ इंगित करना चाहा,पर डॉक्टर ने कोई तवज्जो नहीं दी।दवाएं लिख दी।इलाज शुरू हुआ।लड़की की तबीयत बिगड़ती ही गई।पेट फूलता जा रहा था।फिर रात को घरवालों ने…

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Posted on December 29, 2019 at 12:42pm — 1 Comment

गजल(वोटर.....)

वोटर पापड़ बेल रहे हैं

और मसीहे खेल रहे हैं।1

उम्मीदें जिनकी मुरझाईं

उट्ठक - बैठक पेल रहे हैं।2

मत देने पर स्याही सूखी,

दाग लगे, सब झेल रहे हैं।3

लड़ते - मरते लोग - लुगाई

नेता भरसक रेल रहे हैं।4

'अक्ल बड़ी कह भैंस लजाई,

अंधे गाड़ी ठेल रहे हैं।5

जिसकी पूंछ मिले,पकड़ें सब

बैतरणी को हेल रहे हैं।6

पाठ पढ़ाते चलते हैं वे

जो जीवन भर फेल रहे हैं।7

कुर्सी खातिर मिल…

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Posted on December 14, 2019 at 4:44pm — 3 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 12:51pm on January 23, 2020, TEJ VEER SINGH said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।

At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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