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Manan Kumar singh
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Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post लालटेन(लघुकथा)
"आदरणीय तेजवीर जी, शुक्रिया। "
May 14
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-91
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय समर जी,आदाब।"
May 12
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-91
"आभारी हूँ आदरणीय छोटेलाल जी।"
May 12
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-91
"आभारी हूँ आदरणीय अखिलेश जी।"
May 12
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-91
"आदरणीया राजेश जी,शुक्रिया।"
May 11
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-91
"बहुत बहुत आभार आदरणीय।"
May 11
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-91
"आपको ग़ज़ल पसंद आई,यह हौसलाआफजाई वाली बात है आदरणीय आरिफ जी,नमन एवं शुक्रिया।"
May 11
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-91
"2122 212 लक्ष्य साधा जा रहासब समझ में आ रहा।1 गीत जो भाये तुझेवह मसीहा गा रहा।2 भूलने की भूल करवह भले दिन ला रहा।3 हाथ मलना हाथ मेंआदमी पछता रहा।4 गलतियाँ जो हो गयींक्यूँ मुआ दुहरा रहा।5 मत लिया फिर तुहमतेंबेसबब वह ढ़ा रहा।6 रोशनी के आस थीपर…"
May 11
Tasdiq Ahmed Khan commented on Manan Kumar singh's blog post लालटेन(लघुकथा)
"जनाब मनन साहिब ,अच्छी लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।"
May 9
vijay nikore commented on Manan Kumar singh's blog post लालटेन(लघुकथा)
"लघुकथा में कटाक्ष अच्छा है।अच्छी रचना के किए बधाई।"
May 9
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post लालटेन(लघुकथा)
"आदरणीय समर जी ,नमन व आभार।"
May 9
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post लालटेन(लघुकथा)
"आपका आभारी हूँ आदरणीया राहिला जी।"
May 9
Rahila commented on Manan Kumar singh's blog post लालटेन(लघुकथा)
"वाह... बहुत सटीक रचना । आजकल की व्यवस्था पर खूब तंज करती हुई। बधाई स्वीकार करें"
May 9
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post लालटेन(लघुकथा)
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा, बधाई स्वीकार करें ।"
May 9
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(कहूँगा बात मैं....)
"आदरणीय बृज जी, आपका आभार। "
May 9
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post लालटेन(लघुकथा)
"आदरणीया बबीता गुप्ता जी, शुक्रिया। "
May 9

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
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About me
A poet/ Writer

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लालटेन(लघुकथा)

स्कूटर फर्राटे से थाने के सामने निकला।यह बात थाने को नागवार गुजरी।एक सिपाही ने हाथ दिया।स्कूटर रुक गया।उसने थाने के कंपाउंड में चलने का इशारा किया।अब स्कूटर थाने के मेन गेट पर खड़े इंचार्ज के सामने खड़ा था।सवार बगल में थे।इंचार्ज ने गाड़ी के कागज की माँग की,जो दिखा दिए गए।उसे गाड़ी का नंबर पढ़ने में दिक्कत हो रही थी।बार बार बताने के बावजूद वह अटक रहा था।अंत में स्कूटर सवार बुजुर्ग ने ध्यान दिलाया कि नंबर तो ठीक ही लिखा हुआ है।हाँ, लिखावट थोड़ी फीकी हो गयी है।लजाया-सा इंचार्ज झिझक भरे लहजे में…

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Posted on May 8, 2018 at 7:23am — 13 Comments

गजल(कहूँगा बात मैं....)

1222    1222    1222   1222

      ---------------------------------

कहूँगा बात हो जैसी,अरे मैं तो सलीके से

समझ लो बासमझ,झगड़ो नहीं ,आओ सलीके से।1



लगे हैं दाग ये कितने तुम्हारे आस्तीनों पर

अभी भी वक्त है पगले जरा धो लो सलीके से।2



बहाया खूं पता कितना शरीफों का, गरीबों का?

अगर सच में जिगर धड़के जरा रो लो सलीके से।3



बहुत इमदाद मुँह से बाँटते हो तुम गरीबों में

फ़टी झोली अभी भी है विलखते वो सलीके से।4



पटकने सर लगे कितने कहा…

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Posted on May 3, 2018 at 8:09pm — 10 Comments

गजल(ओ प न बु क् स औ न ला इ न)

2122    2122  212
ओस की बूंदें भी' प्यासी हैं अभी
परकटी चाहें अधूरी हैं अभी।1

नश्तरों का हाल अब मत पूछना
बुत बनी रातें यूँ तारी हैं अभी।2

क्या करोगे जानकर सब सिलसिला?
सच मरा है, बातें' टेढ़ी हैं अभी।3

औरतों के नाम लेके आजकल
नख चले,घातें यूँ' माती हैं अभी।4

लाइलाजों का करो कुछ तो जतन
इल्म वाली बाँहें' बाकी हैं अभी।5

नर्म बिस्तर के सिवा झपकी नहीं?
नाखुदाओ! लपटें' खासी हैं अभी।6
"मौलिक व अप्र का शि त"

Posted on April 22, 2018 at 8:49am — 8 Comments

गजल(अपना घाव...)

22  22  22  22           

अपना घाव छुपा के रखना

मन को भी समझा के रखना।1

ऊपर ऊपर जैसा भी हो

अंदर आग जला के रखना।2

और उजाला करना होगा

थोड़ा तेल बचा के रखना।3             

तीर चलेंगे जाने कितने

देखो ढ़ाल बढ़ा के रखना।4

कौन सुनेगा बातें  ढ़ब की

बाण-धनुष चमका के रखना।5

मंजिल कोई दूर नहीं है

ख्वाहिश को उमगा के रखना।6

रात अँधेरी,चंदा संगी,

रुनझुन बीन बजा के…

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Posted on April 21, 2018 at 7:30pm — 10 Comments

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At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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