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Manan Kumar singh
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Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post अपनी अपनी धुन(लघुकथा)
"शुक्रिया आदरणीय उस्मानी जी।"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Manan Kumar singh's blog post अपनी अपनी धुन(लघुकथा)
"आदाब। ग़ज़ब की प्रतीकात्मक लघुकथा। कच्चा चिट्ठा। हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह साहिब।"
Sunday
Manan Kumar singh posted a blog post

अपनी अपनी धुन(लघुकथा)

कोयल मौसम में समरसता घोल रही थी।लोग उसकी सुमधुर धुन पर थिरक से रहे थे। लग रहा था कि पहले की रही सही रंजिश अब नहीं रही।यह सब कौवे को नागवार लगा।उसने अकस्मात अपनी पूरी कर्कशता से कांव कांव करना शुरू कर दिया।कोयल बिदकी,"यह कर्कशता कैसी भाई?अभी मेल जोल का माहौल है।खुशियां बांटें"। "कैसा मेल जोल?तू मेरी आवाज बदल सकती है क्या?" "नहीं।" "तो फिर? तू अपनी गा, मैं अपना गाऊंगा।" "ऐसा?" "और क्या?अपनी आवाज में गाने का मुझे हक़ है,गा रहा हूं।" फिर दोनों अपनी अपनी आवाज में गाने लगे,पर मधुरता कर्कशता पर हावी…See More
Sunday
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post काम
"जी शुक्रिया, गौर तलब है।"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Manan Kumar singh's blog post काम
"आद0 मनन कुमार सिंह जी सादर अभिवादन। आपने बात सही कही है पर लघुकथा पढ़ते समय अंत में जो एक बात अचानक से पाठक को हिचकोले देती है या पाठक को लघुकथा के मूल तक ले जाती है। उसी की बात मैं कह रहा था। सादर"
Nov 7
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post काम
"आदरणीय,आपका आभार।सभी रचनाओं/लघुकथाओं का अपना भाव  और प्रभाव क्षेत्र होता है। हां,कुछ खास इंगित होने पर उसका समावेश करने का जरूर प्रयास करूंगा,सादर।"
Nov 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Manan Kumar singh's blog post काम
"आद0 मनन कुमाद सिंह जी सादर अभिवादन। लघुकथा का प्रयास ठीक है पर इसमें मुझे वो वाली बात नहीं दिखी जो आपकी और लघुकथाओं म् मिलती है। बधाई स्वीकार कीजिये"
Nov 4
Samar kabeer commented on Manan Kumar singh's blog post काम
"जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 4
Manan Kumar singh posted a blog post

काम

काम(लघुकथा) ***"हम तुम्हें मुफ्त में सबकुछ देंगे", नेताजी ने एलान किया।"मुफ्त में सबकुछ?" भीड़ से आवाज आई।"हां। क्यों भरोसा नहीं तुमलोगों को?""अरे दे सको,तो काम दो सबको।"भीड़ से आवाज आई।"हां, हां। काम चाहिए,काम।जैसे तुम्हे रोजगार मिले,औरों को भी दोगे,ऐसा बोलो।"भीड़ फिर से चिल्लाई।"हम भी तो कुछ देने ही आए हैं।""जब सब कुछ देना ही है,तो फिर कुछ क्यों?हम बाद में ही मांगेंगे।तुम्हारा इस्तीफा भी,ज़रूरी हुआ तो।""ऐं?"नेताजी बगलें झांकने  लगे। " मौलिक व अप्रकाशित"See More
Nov 3
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"आभार आदरणीया।"
Oct 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"आभार आदरणीय।"
Oct 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"आभार आदरणीय उस्मानी जी!  क्षेत्र विशेष से संबंधित कथानक के हिसाब से स्वतः ही भाषा  चल निकली।"
Oct 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"आभार आदरणीय।"
Oct 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"आभार आदरणीय।"
Oct 31
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"फिरौती ***डॉक्टर इकबाल का खोया हुआ बच्चा गोरखपुर के पास एक रेलवे स्टेशन पर पाया गया है,यह खबर पूरे सूबे में जंगल की आग की भांति फैल गई।पहले उसके अपहृत होने की बात इसी तरह आम हुई थी।लोग थर्रा गए थे कि कब और कहां किसका बच्चा गायब हो जाए,कोई नहीं जानता…"
Oct 30
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"फिरौती ***डॉक्टर इकबाल का खोया हुआ बच्चा गोरखपुर के पास एक रेलवे स्टेशन पर पाया गया है,यह खबर पूरे सूबे में जंगल की आग की भांति फैल गई।पहले उसके अपहृत होने की बात इसी तरह आम हुई थी।लोग थर्रा गए थे कि कब और कहां किसका बच्चा गायब हो जाए,कोई नहीं जानता…"
Oct 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
E 52 Krishna Apt , Patna
Profession
Service
About me
A poet/ Writer

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अपनी अपनी धुन(लघुकथा)

कोयल मौसम में समरसता घोल रही थी।लोग उसकी सुमधुर धुन पर थिरक से रहे थे। लग रहा था कि पहले की रही सही रंजिश अब नहीं रही।यह सब कौवे को नागवार लगा।उसने अकस्मात अपनी पूरी कर्कशता से कांव कांव करना शुरू कर दिया।कोयल बिदकी,"यह कर्कशता कैसी भाई?अभी मेल जोल का माहौल है।खुशियां बांटें"।

"कैसा मेल जोल?तू मेरी आवाज बदल सकती है क्या?"

"नहीं।"

"तो फिर? तू अपनी गा, मैं अपना गाऊंगा।"

"ऐसा?"

"और क्या?अपनी आवाज में…

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Posted on November 10, 2019 at 7:30am — 2 Comments

काम

काम(लघुकथा)

***

"हम तुम्हें मुफ्त में सबकुछ देंगे", नेताजी ने एलान किया।

"मुफ्त में सबकुछ?" भीड़ से आवाज आई।

"हां। क्यों भरोसा नहीं तुमलोगों को?"

"अरे दे सको,तो काम दो सबको।"भीड़ से आवाज आई।

"हां, हां। काम चाहिए,काम।जैसे तुम्हे रोजगार मिले,औरों को भी दोगे,ऐसा बोलो।"भीड़ फिर से चिल्लाई।

"हम भी तो कुछ देने ही आए हैं।"

"जब सब कुछ देना ही है,तो फिर कुछ क्यों?हम बाद में ही मांगेंगे।तुम्हारा इस्तीफा भी,ज़रूरी हुआ तो।"

"ऐं?"नेताजी बगलें झांकने  लगे।

 "…

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Posted on November 3, 2019 at 7:50pm — 5 Comments

ग़ज़ल(ग़ज़ल बेबहर है...)

122  122  122  122

गजल बेबहर है, नदी बिन लहर है
कहो,क्या करूँ जब बिखरता जहर है?1

कहूँ क्या भला मैं? सुनेगा न कोई,
हुआ हादसा,मौन सारा शहर है।2

बचेगी नहीं लाज समझा करो तुम
बहकती यहां की हवा हर पहर है।3

गिनूँ क्या सितम गैर से जो मिले
मिले दर्द घर में, बड़ा ही कहर है।4

बुझाते रहे जो चिरागों को' अबतक
बताते कि होने को' अब तो सहर है।5
"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on October 21, 2019 at 11:00am — 2 Comments

चलो भी...(गजल)

122  122  122  12

चलो भी जला के दिखा दें दिये

चले जा रहे वे अँधेरा किये।1

बहुत दिन गये चोट खाते हुए

रहेंगे कहाँ तक कहो मुँह सिये।2

किये जा रहे मौज मस्ती बड़ी

भुलाते हमें,जो हमारे हिये।3

चले पाँव नंगे, मिलीं कुर्सियाँ

लगा आजकल हैं नशा वे पिये।4

उड़ीं जो पतंगें, हुईं बेवफा

पिटे लोग लगता है' अपने किये।5 

"मौलिक व अप्रकाशित"

Posted on October 2, 2019 at 7:28am — 3 Comments

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At 2:33pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी आदाब बहुत शुक्रिया आपने समय निकाला और मेरा हौसला बढ़ाया मैं ह्रदय से शुक्रगुज़ार हूँ| बहुत शुक्रिया!
At 11:05pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मनन कुमार सिंह जी बहुत शुक्रिया आपने जो हौसला बढ़ाया है
At 11:03pm on September 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय
श्री मनन कुमार सिंह जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
At 8:47pm on May 24, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका दोस्त
At 5:20pm on April 12, 2015, Manan Kumar singh said…
आदरणीय गोपालजी, आपकी मित्रता मेरे लिए अमूल्य है।
At 8:29pm on April 7, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ0 मनन जी

आपकी मित्रता मेरा गौरव है . सादर .

 
 
 

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"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब, सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया का दिल से आभारी है।"
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"आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब, सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया का दिल से आभारी है।"
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"आदरणीय Usha   जी सृजन आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभारी है। "
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"आदरणीयलक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सृजन आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभारी है। "
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