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MUKESH SRIVASTAVA
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Seema Singh and MUKESH SRIVASTAVA are now friends
Oct 29, 2017
Mahendra Kumar commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post कुर्सी
"बहुत ख़ूब. आ. मुकेश जी. इस बढ़िया कविता के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Sep 25, 2017
Samar kabeer commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post कुर्सी
"जनाब मुकेश जी आदाब,वाह मज़ा आ गया,बहुत उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 25, 2017
MUKESH SRIVASTAVA commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post मुट्ठी भर ताकतवर और बुद्धिमान
"aabhar mitra Afroz Sahr AUr Salim Raza Rewa jee Rachna Pasandgee ke liye"
Sep 25, 2017
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post कुर्सी
"मुकेश जी कुर्सी के माध्यम से बढ़िया ताना बाना बुना आपने, बधाई आपको।"
Sep 25, 2017
MUKESH SRIVASTAVA commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post कुर्सी
"rachna pasandgee ke liye aap ka bahut bahut abhar mitra Mohammed Arif bhaee"
Sep 24, 2017
Mohammed Arif commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post कुर्सी
"आदरणीय मुकेश जी आदाब, आज की कुर्सी का अच्छा चरित्रांकन किया आपने । कुर्सी के माध्यम से सबकुछ बयाँ कर दिया । अदनी सी कुर्सी ने सबका चरित्र गिरा दिया है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 24, 2017
MUKESH SRIVASTAVA posted a blog post

कुर्सी

गुफासे निकले हुए लोगों ने'कुर्सी' बनाई,अपने राजा के लिएज़मीन पर बैठे - बैठेराजा कुर्सी पर बैठा है शान सेकुर्सी बनाने वाले ज़मीन परसबसे पहली कुर्सी 'पत्थर' की थीफिर इंसान ने लकड़ी की कुर्सी बनाईबाद में सोने ,चाँदी ,हीरे, जवाहरात की भी....इतिहास में तो कई बार नरमुंडों की भी कुर्सियां बनाई गयी और फिर उस पर बैठ के 'राजा' बहुत खुश हुआ...कुर्सी बनाई गयी थीइस उम्मीद में कि इस पर बैठा हुआराजा राज्य मेंसुख शांति समृद्धि लाएगा.....कई बार ऐसा भी हुआकुर्सी की वजह से हीसुख शांति और समृद्धि राज्य से विदा हो…See More
Sep 23, 2017
MUKESH SRIVASTAVA commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल -- कीचड़ के आस पास में देखा कवँल गया
"waah mitra "
Sep 23, 2017
Afroz 'sahr' commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post मुट्ठी भर ताकतवर और बुद्धिमान
"आदरणीय मुकेश जी अच्छा विषय है । सुंदर रचना बधाई आपको ।"
Sep 19, 2017
SALIM RAZA REWA commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post मुट्ठी भर ताकतवर और बुद्धिमान
"भाई मुकेश जी, ख़ूबसूरत रचना के लिए बधाई,"
Sep 19, 2017
MUKESH SRIVASTAVA posted a blog post

मुट्ठी भर ताकतवर और बुद्धिमान

मुट्ठी भर ताकतवर और बुद्धिमान लोगों ने इकठ्ठा किया ढेर सारे लोगों को और आवाहन किया  कहा "हमें इस धरती को स्वर्ग बनाना है और बेहतर बनाना है "और हम चल पड़े तमाम जंगल काटते हुए पहाड़ों को रौंदते हुए नदियों को सोखते हुए  समंदर के सीने को चीरते हुए हज़ारों युद्ध लड़ते हुए   अपनों के ही खिलाफ  और अभी भी चले जा रहे हैं ये और बात हमारी एंड़ियां ही नहीं पैर भी घिस चुके हैं पीठ झुक चुकी है आँखों में मोतिया बिन्द हो चूका है धरती क्षत विक्षत और आकाश लाल हो चुका है पर हम आज भी अडिग हैं धरती को स्वर्ग बनाने और…See More
Sep 19, 2017
Mohammed Arif commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post एक पति की आत्मस्वीक्रति
"आदरणीय मुकेश श्रीवास्तव जी आदाब, सुंदर रचना के लिए बधाई ।"
Sep 19, 2017
MUKESH SRIVASTAVA commented on Balram Dhakar's blog post अंधी जनता, राजा काना बढ़िया है ...गज़ल
"BEHATREEN TANZ BANDHUWAR - BADHAEE KE PATRA HO AP"
Sep 18, 2017
MUKESH SRIVASTAVA commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना हैतेरी यादों का मौसम है लबों पे इक तराना है KYA BAT MITRA"
Sep 18, 2017
MUKESH SRIVASTAVA commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post एक पति की आत्मस्वीक्रति
"rancha pasandgee ke liye aabhar adrneey SAMEER KABEER JEE, NILESH JEE , SALIM RAZAA JEE "
Sep 18, 2017

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कुर्सी

गुफा

से निकले हुए लोगों ने

'कुर्सी' बनाई,

अपने राजा के लिए

ज़मीन पर बैठे - बैठे

राजा कुर्सी पर बैठा है शान से

कुर्सी बनाने वाले ज़मीन पर

सबसे पहली कुर्सी 'पत्थर' की थी

फिर इंसान ने लकड़ी की कुर्सी बनाई

बाद में सोने ,चाँदी ,हीरे, जवाहरात की भी....

इतिहास में तो कई बार नरमुंडों की भी कुर्सियां बनाई गयी

और फिर उस पर बैठ के 'राजा' बहुत खुश हुआ...

कुर्सी बनाई गयी थी

इस उम्मीद में कि इस पर बैठा हुआ

राजा राज्य में

सुख शांति…

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Posted on September 23, 2017 at 3:06pm — 5 Comments

मुट्ठी भर ताकतवर और बुद्धिमान



मुट्ठी भर 

ताकतवर 

और बुद्धिमान 

लोगों ने 

इकठ्ठा किया 

ढेर सारे लोगों को 

और 

आवाहन किया  

कहा 

"हमें इस धरती को 

स्वर्ग बनाना है 

और बेहतर बनाना है "



और हम 

चल पड़े 

तमाम जंगल काटते हुए 

पहाड़ों को रौंदते…

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Posted on September 18, 2017 at 3:29pm — 3 Comments

एक पति की आत्मस्वीक्रति

  चुन्नों, मेरा चश्मा कंहा रखा है ? चुन्नो मेरी नयी वाली कमीज नहीं मिल रही है, चुन्नो तुमने मेरा रुमाल देखा है क्या? चुन्नो एक कप चाय मिलेगी क्या? चुन्नो चुन्नो चुन्नो सच घर आते ही चुन्नो चुन्नो के नाम की माला जपने लगता हूं। सच आफिस मे रहता हूं तो आफिस की छोटी छोटी बातें नही भूलती पर घर आते ही जैसे यादें हैं कि साथ छोड के फिर से आफिस मे ही दुपुक जाती हैं ये कह के कि जाओ अब अपनी चुन्नो के साथ ही रहो मेरी क्या जरुरत है वो जो है न तुम्हारी और…

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Posted on September 17, 2017 at 11:30am — 5 Comments

मै एक पेड़ होता और तुम होती गिलहरी

काश,

मै एक पेड़ होता

और तुम होती

गिलहरी

जो अपनी बटन सी

चमकती आँखों से

इधर - उधर देखती

ऊपर चढ़ती और कभी उतरती

तुम्हे देखता

चुक -चुक करते हुए हरी पत्तियों को

अपने मुहे में दबाये हुए फुदकते हुए

और फिर ज़रा सी आवाज़ या

आहट से भाग के मेरे तने की खोह में छुप जाना

जैसे, तुम दुपुक जाती थी

मेरी बाँहों में,

उन दिनों जब हम तुम दोनों थे

एक दूजे के गहन प्रेम में

(हलाकि मै तो आज भी हूँ

तुम्हारे प्रेम में, तुम्हारा पता नहीं… Continue

Posted on September 9, 2017 at 11:06pm — 8 Comments

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At 1:18pm on January 30, 2014, Meena Pathak said…

स्वागत है आप का आदरणीय मुकेश जी | सादर 

At 10:28am on January 4, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

 
 
 

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