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MUKESH SRIVASTAVA
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Samar kabeer commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post "मै" इक  समंदर में तब्दील हो जाता हूँ
"जनाब मुकेश श्रीवास्तव जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
MUKESH SRIVASTAVA posted a blog post

"मै" इक  समंदर में तब्दील हो जाता हूँ

एक --------रात होते ही "मै" इक  समंदर में तब्दील हो जाता हूँ और मेरे सीने केठीक ऊपर इक चाँद उग आता है अपनी पूरी भव्यता और ख़ूबसूरती  के साथ जो अपनी चॉँदनी सी किरणे बरसाने लगता हैं लगातार और -- तब मेरे सीने से तमाम लहरेंमेरे दोनों बाँहे बन हरहरा कर उठती हैं आसमान तक उस हंसीं चाँद को अपनी आगोश में भर लेने के लिए पर - हर बार लहरें हताश हो हो कर लौट आती हैं और फिर फिर उठती हैं "चाँद' को छूने उधर "चाँद" मेरी बेबसी पर मुस्कुराता है रात भर -  और सुबह होते ही न जाने किन बादलों के या पर्वतों की ओट…See More
Feb 21
MUKESH SRIVASTAVA commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post प्रेम गली अति सांकरी
"Bhaee Musafir ji, Post Pasandgee aur comment ke liye bahut bahut aabhar"
Feb 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post प्रेम गली अति सांकरी
"आ. भाई मुकेश जी, सुंदर कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Feb 17
MUKESH SRIVASTAVA posted a blog post

टीन एजर बेटे के मेसेज - मम्मी के लिए

एक ----- मुझे, मालूम है आप मेरी लापरवाहियां और बेतरतीबी की लिए ऊपर ऊपर डांटते हुए भी अंदर अंदर खुशी से और मेरे लिए प्रेम से भरपूर रहती होमेरे बिखरे हुए कपड़ों व किताबों को सहेजना अच्छा लगता है पर यहाँ हॉस्टल में आ कर अब मुझे अपने कपडे खुद तह कर के रखना सीख लिया है वहां तो आप सुबह ब्रश में टूथ पेस्ट भी आप लगा के देती थी टोस्ट में मक्खन भी लगा के हाथ में पकड़ा देती थी और प्यार भरी झिड़की से जल्दी से खाने की हिदायत देती थी पर अब तो सुबह बिना आप की प्यार भरी झुड़की के हॉस्टल के अलार्म पे…See More
Feb 17
MUKESH SRIVASTAVA commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post दो क्षणिकाएँ (गणेश जी बाग़ी)
"achee rachnaa mitra - badhaae"
Feb 15
MUKESH SRIVASTAVA commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post अतुकांत कविता : प्रगतिशील (गणेश जी बागी)
"achee rachnaa - badhaee"
Feb 12
MUKESH SRIVASTAVA commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post प्रेम गली अति सांकरी
"Aadarneeya  Samar Kabeer jee-  Rachna pasandgee ke liye bahut bahut aabhar"
Feb 12
Samar kabeer commented on MUKESH SRIVASTAVA's blog post प्रेम गली अति सांकरी
"जनाब मुकेश इलाहाबादी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 12
MUKESH SRIVASTAVA posted a blog post

प्रेम गली अति सांकरी

प्रेम गली अति सांकरी------------------------सुमी, सुना है, किसी सयाने ने कहा है। ' प्रेम गली अति सांकरी, जा में दुई न समाय'जब कभी सोचता हूँ इन पंक्तियों के बारे में तो लगता है, ऐसा कहने वाला, सयाना रहा हो या न रहा हो, पर प्रेमी ज़रूर रहा होगा,जिसने प्रेम की पराकष्ठा को जाना होगामहसूस होगा रोम - रोम से , रग - रेशे से, उसके लिए प्रेम कोई शब्दों का छलावा नरहा होगा, किसी कविता का या ग़ज़ल का छंद और बंद न रहा होगा, किसी हसीनशाम की यादें भर न रही होगा, प्रेम -उसके लिए तो प्रेम अपने और अपने प्रेमी के…See More
Feb 12

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"मै" इक  समंदर में तब्दील हो जाता हूँ

एक 
--------
रात 
होते ही 
"मै" इक  समंदर में तब्दील हो जाता हूँ 
और मेरे सीने के
ठीक ऊपर 
इक चाँद उग आता…
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Posted on February 20, 2020 at 5:30pm — 1 Comment

टीन एजर बेटे के मेसेज - मम्मी के लिए

एक

-----

मुझे,

मालूम है आप

मेरी लापरवाहियां और बेतरतीबी की लिए

ऊपर ऊपर डांटते हुए भी

अंदर अंदर खुशी से और मेरे लिए प्रेम से भरपूर रहती हो

मेरे बिखरे हुए कपड़ों व किताबों को सहेजना अच्छा लगता है

पर यहाँ हॉस्टल में आ कर अब मुझे अपने कपडे खुद तह कर के रखना सीख लिया है

वहां तो आप सुबह ब्रश में टूथ पेस्ट भी आप लगा के देती थी

टोस्ट में मक्खन भी लगा के हाथ में पकड़ा देती थी

और प्यार भरी झिड़की से जल्दी से खाने की हिदायत देती थी

पर…

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Posted on February 15, 2020 at 5:30pm

प्रेम गली अति सांकरी

प्रेम गली अति सांकरी

------------------------

सुमी,



सुना है, किसी सयाने ने कहा है। ' प्रेम गली अति सांकरी, जा में दुई न समाय'

जब कभी सोचता हूँ इन पंक्तियों के बारे में तो लगता है, ऐसा कहने वाला, सयाना

रहा हो या न रहा हो, पर प्रेमी ज़रूर रहा होगा,जिसने प्रेम की पराकष्ठा को जाना होगा

महसूस होगा रोम - रोम से , रग - रेशे से, उसके लिए प्रेम कोई शब्दों का छलावा न

रहा होगा, किसी कविता का या ग़ज़ल का छंद और बंद न रहा होगा, किसी हसीन

शाम की यादें भर न रही होगा,…

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Posted on February 12, 2020 at 1:58pm — 4 Comments

कुर्सी

गुफा

से निकले हुए लोगों ने

'कुर्सी' बनाई,

अपने राजा के लिए

ज़मीन पर बैठे - बैठे

राजा कुर्सी पर बैठा है शान से

कुर्सी बनाने वाले ज़मीन पर

सबसे पहली कुर्सी 'पत्थर' की थी

फिर इंसान ने लकड़ी की कुर्सी बनाई

बाद में सोने ,चाँदी ,हीरे, जवाहरात की भी....

इतिहास में तो कई बार नरमुंडों की भी कुर्सियां बनाई गयी

और फिर उस पर बैठ के 'राजा' बहुत खुश हुआ...

कुर्सी बनाई गयी थी

इस उम्मीद में कि इस पर बैठा हुआ

राजा राज्य में

सुख शांति…

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Posted on September 23, 2017 at 3:06pm — 5 Comments

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At 1:18pm on January 30, 2014, Meena Pathak said…

स्वागत है आप का आदरणीय मुकेश जी | सादर 

At 10:28am on January 4, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

 
 
 

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