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Sheikh Shahzad Usmani
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  • SHIVPURI M.P.
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Latest Activity

Dr. Vijai Shanker commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'तोप, बारूद और तोपची' (लघुकथा)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी , अच्छी लघु-कथा है. शीर्षक भी बहुत सही और सटीक है। हर कोई अपने हालात से परेशान है , परिवर्तन चाहता है , पर ढूंढता शार्ट-कट ही है। सही परिश्रम का रास्ता तो जैसे सूझता ही नहीं। प्रस्तुति के लिए बधाई , सादर।"
1 hour ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"स्वाधीनता दिवस की 72वीं सालगिरह की पावन बेला पर आप सभी ओबीओ परिवारजन को तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद और शुभकामनाएं। नई चुनौतियां, नये दायित्व के साथ नये  संतुलित सामंजस्य व नये समाधान हमें स्वविवेक से देश के लोकतांत्रिक विकास कायम रखते हुए…"
6 hours ago
Neelam Upadhyaya commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'तोप, बारूद और तोपची' (लघुकथा)
"आदरणीय उस्मानी जी,  नमस्कार । बढ़िया लघुकथा  की प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें।  "
19 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on vijay nikore's blog post खुदापरस्ती
" एक साथ कई यथार्थ समेटे जीवन की कड़वी और आदर्श बातें कहकर बहुत से संदेश वाहक सृजन हेतु व अंत में कठिन शब्दार्थ देने हेतु सादर हार्दिक आभार और बधाइयाँ मुहतरम जनाब विजय निकोरे  साहिब।"
yesterday
Samar kabeer commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'तोप, बारूद और तोपची' (लघुकथा)
"जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

'तोप, बारूद और तोपची' (लघुकथा)

"अरे, भाबीजी तुम तो अब भी घर पर ही जमी हो!" मोती ने बड़े ताअज्जुब से कहा - "ऊ दिना तो तुम बड़ी-बड़ी बातें फैंक रईं थीं कि अब नईं रहने इते हाउस-वाइफ़ बनके; बहोत सह लई!" "तो का अकेलेइ कऊं भग जाते! ई मुटिया को न तो कोनऊ फ़ादर है, न गोडफ़ादर.. कोनऊ लवर या फिरेंड मिलवे को तो सवालइ नईये, मोती बाबू!" "तुम तो कैरईं थीं कि पड़ोसन के घरे झांक-झांक के दुबले-पतले होवे की कसरतें सीख लईं तुमने और डाइटिंग करवा रये थे मुन्ना भाइसाब तुमें!" "दुबरो करावे को उनको मकसद दूसरो हतो! तुम तो जानत हो मर्दन की फ़ितरतें! ऊ पड़ोसन…See More
Monday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr. Vijai Shanker's blog post बात गज़ब की करते हो -- डॉo विजय शंकर
"बेहतरीन मार्गदर्शन/हिदायतें... कटाक्ष। हार्दिक बधाइयां आदरणीय डॉ. विजय शंकर साहिब।"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr. Vijai Shanker's blog post मार्केटिंग - डॉo विजय शंकर
"या शीर्षक "जोंक-बाज़ार"!"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Dr. Vijai Shanker's blog post मार्केटिंग - डॉo विजय शंकर
"निर्जीव और सजीव; उपयोगी और अनुपयोगी; राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय; उचित और अनुचित; स्वाभाविक और थोपी गई  सब चीज़ों/उत्पादों/प्रवृत्तियों पर गहरे और गंभीर कटाक्ष करती 'गागर में सागर' विचारोत्तेजक सृजन हेेतु सादर हार्दिक बधाइयां मुहतरम…"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"इस विशेष महाउत्सव में विषयांतर्गत बेहतरीन समापन प्रविष्टि के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले साहिब।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"विषयांतर्गत गाने योग्य बढ़िया गीत-सृजन प्रयास हेतु सादर हार्दिक बधाई आदरणीया उषा अवस्थी साहिबा।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"विषयांतर्गत उम्दा, भिन्न और बढ़िया गीत सृजन हेतु सादर हार्दिक बधाइयाँ आदरणीय सतीश मापतपुरी साहिब।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"आप जैसे बहुमुखी प्रतिभाशाली साथियों के साथ लेखन कर्म करते हुए ऐसा अभ्यास कर पाते हैं थोड़ा-थोड़ा सीखते हुए। आपकी उपस्थिति और हौसला अफ़ज़ाई हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"रचना पर इतनी गंभीरता से समय देकर महत्वपूर्ण टिप्पणी और प्रोत्साहन हेतु सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कनक हरलल्का साहिबा।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"मेरी इस तात्कालिक प्रविष्टि पर आपकी उपस्थिति और अनुमोदन के साथ हौसला अफ़ज़ाई हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-94
"मेरी इस तात्कालिक रचना पर समय देकर अनुमोदन व हौसला अफ़ज़ाई हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले साहिब।"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Shivpuri M.P.
Native Place
Shivpuri
Profession
Radio Announcer
About me
A Private School- teacher, Freelancer and a Casual Radio Announcer. Simlple living, high thinking, fond of reading and writing.

Sheikh Shahzad Usmani's Blog

'तोप, बारूद और तोपची' (लघुकथा)

"अरे, भाबीजी तुम तो अब भी घर पर ही जमी हो!" मोती ने बड़े ताअज्जुब से कहा - "ऊ दिना तो तुम बड़ी-बड़ी बातें फैंक रईं थीं कि अब नईं रहने इते हाउस-वाइफ़ बनके; बहोत सह लई!"



"तो का अकेलेइ कऊं भग जाते! ई मुटिया को न तो कोनऊ फ़ादर है, न गोडफ़ादर.. कोनऊ लवर या फिरेंड मिलवे को तो सवालइ नईये, मोती बाबू!"



"तुम तो कैरईं थीं कि पड़ोसन के घरे झांक-झांक के दुबले-पतले होवे की कसरतें सीख लईं तुमने और डाइटिंग करवा रये थे मुन्ना भाइसाब तुमें!"



"दुबरो करावे को उनको मकसद दूसरो हतो!…

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Posted on August 11, 2018 at 6:30am — 3 Comments

'आदी की चादर' (छंदमुक्त, अतुकांत कविता)

मां, गुजराती चादर दे दे!

मैं 'फ़ादर' सा बन जाऊं!

जनता अपने राष्ट्र की

स्वामियों, बापुओं सा आदर दे दे!

अंग्रेज़ों सा व्यापारी बन कर,

तोड़ूं-फोड़ूं और मारूं-काटूं

विदेशी सूट पहन इतराऊं!

मां किसी 'गांधी' सी 'चादर' ओढ़ाकर

तस्वीरें, मूर्तियाँ मेरी सजवादे

मैं भी जिंदा लीजेंड, किंवदंती कहलाऊं!

मुग़ल, अंग्रेज़, हिटलर, कट्टर

सब से शिक्षायें ले लेकर

आतंक कर आतंकी न कहलाऊं !

मां 'धर्म' की बरसाती दे दे

बदनामियों सा न भीग जाऊं!

मां…

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Posted on August 9, 2018 at 6:38am — 5 Comments

'करुणा-सन्निधि' (लघुकथा)

आधुनिक भारत के आधुनिक शहर की आधुनिक सड़कों पर एक बार फिर भावुक और अहसानमंद भीड़ एकत्रित थी। आम आदमी तो भीड़ में थे ही, नेता-अभिनेता और मीडिया भी था। कुछ करुणाद्र थे, कुछ कृतज्ञ और कुछ समर्थक या पूजक और कुछ अवसरवादी ढोंगी समर्थक भी थे! दृश्य बेहद करुणामय था। कुछ तो रोये ही जा रहे थे अपने प्रिय व्यक्तित्व या आका के स्वास्थ्य और जीवन संबंधित शुभकामनाओं और प्रार्थनाओं के साथ। जबकि कुछ ऐच्छिक समाचार सुनने की प्रतीक्षा में थे।



"समर्थकों, उपासकों, अहसानमंदों और अवसरवादियों की मिली-जुली…

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Posted on August 8, 2018 at 12:22am — 5 Comments

'अभिव्यक्ति की आज़ादी' (लघुकथा)

"ए ऑटो वाले भैया! 'दिन्नू' तक के क्या लोगे?"



"..द..द..दिन्नू?"



"हां, भय्या 'दीनू जंक्शन'! मतलब नये नाम वाले 'डीडू यानि कि 'डीडीयू'!"



"पढ़ी-लिखी तो लगती हो आप! पूरा सही नाम 'दीनदयाल उपाध्याय' क्यों नहीं बोल पा रहीं? हम तो वहीं के चक्कर लगाते हैं न! आइए बैठिये; दस रुपये यहां से, बस!"



"भैया, पूरा नाम तो भाषण देने वाले ही कह पायेंगे! हमारे पास इतना टाइम कहां?"



"तो 'दीनसराय' कहो या फिर 'मुगलसराय' ही कहती रहो न! इसके लिए तो टाइम भी है…

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Posted on August 6, 2018 at 2:00am — 9 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 6:43am on July 2, 2018, राज़ नवादवी said…

"आदरणीय Sheikh Usmani साहब, तरही मुशायरे में मेरी ग़ज़ल में शिरकत का दिल से शुक्रिया. समयाभाव था, कमेंट बॉक्स बंद हो चुका है. इसलिए यहाँ से आभार प्रकट कर रहूँ हूँ.सादर "

At 11:59am on April 12, 2018, MD SHAFIQUE ASHRAF said…

जी बहूत  बहुत शुक्रिया जनाब ... नया हूँ .... थोड़ा सीखने का मौका दीजिये  

At 10:23am on January 8, 2017, Dr Ashutosh Mishra said…
आदरणीय शेख भाई जी आपके मित्रों की सूची में खुद को शामिल पाकर मैं सुखद अनुभूति कर रहा हूँ आपकी लघु कथाएं इस मंच पर मेरे बिशेष आकर्षण का केंद्र है आपकी हर लघु कथा मैं पढता हूँ आपकी कलम सृजन के नए आयाम स्थापित करती रहे ऐसी अपनी शुभकामनाओं के साथ सादर
At 8:23pm on August 5, 2016, pratibha pande said…

आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ  आदरणीय उस्मानी जी  ,आपका रचनाकर्म हर दिन नई बुलंदियां छुएँ ,ये कामना करती हूँ 

At 7:30am on June 20, 2016, सुरेश कुमार 'कल्याण' said…
श्रद्धेय शेख शहजाद उस्मानी साहब ये सब तो आप जैसे मित्रों के सहयोग से ही हुआ है और आशा करता हूं कि भविष्य में भी मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे। हृदय की गहराईयों से धन्यवाद ।
At 8:42am on May 24, 2016, महिमा वर्मा said…

आभार आपका आ.शेख उस्मानी सर जी,अभी जानकारी  पूरी नहीं है ,तो आपको जवाब देने में देर हो गई.पुनः आभार आपका .

At 2:11pm on May 1, 2016, pratibha pande said…

मित्रता के लिए आभार 

At 8:41am on November 18, 2015, pratibha pande said…

हार्दिक आभार आपका आदरणीय 

At 9:27am on November 4, 2015, kanta roy said…

देखी वफ़ा-ए-फ़ुरसत-ए-रंज-ओ-निशात-ए-दहर

ख़मियाज़ा यक दराज़ी-ए-उमर-ए-ख़ुमार था---- 

मिर्ज़ा ग़ालिब साहब का ये शेर आज आपके लिए
असीम शुभकामनाएँ आपको आदरणीय शहजाद जी।

 

At 3:47pm on October 17, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
आदरणीय Er. Ganesh Jee "Bagi" जी सूचना अनुसार वांछित जानकारी एडमिन की ई-मेल परआज प्रेषित कर दी है ।सादर सधन्यवाद
 
 
 

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