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mirza javed baig
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TEJ VEER SINGH commented on mirza javed baig's blog post सबस्टिट्यूट (कहानी)
"हार्दिक बधाई आदरणीय मिर्ज़ा जावेद बेग जी।बेहतरीन कहानी।"
Tuesday
राज़ नवादवी commented on mirza javed baig's blog post सबस्टिट्यूट (कहानी)
"आपका स्वागत है जनाब समर कबीर साहब. सादर "
Monday
Samar kabeer commented on mirza javed baig's blog post सबस्टिट्यूट (कहानी)
"इस जानकारी के लिए शुक्रिया,राज़ साहिब ।"
Monday
राज़ नवादवी commented on mirza javed baig's blog post सबस्टिट्यूट (कहानी)
"'दरकना, शब्द बिहार एवं अन्य पूर्वांचल के राज्यों में इस्तेमाल किया जाता है जिसका अर्थ है किसी चीज़ में कोई हल्का शिगाफ़ या दरार का पड़ जाना. सादर "
Monday
Samar kabeer commented on mirza javed baig's blog post सबस्टिट्यूट (कहानी)
""दरकना" शब्द मेरे लिए नया है, शायद ये आँचलिक भाषा से है, शुक्रिया ।"
Monday
mirza javed baig commented on mirza javed baig's blog post सबस्टिट्यूट (कहानी)
"मुहतरम शैॆख़ उस्मान साहिब आदाब आपकी हौसला अफ़ज़ाई से यक़ीनन नई ऊर्जा मिलेगी।  आईंदा, और बहतर कहने की कोशिश करूंगा बहुत बहुत शुक्रिया "
Sunday
mirza javed baig commented on mirza javed baig's blog post सबस्टिट्यूट (कहानी)
"आली जनाब समर कबीर साहिब आदाब , हौसला अफ़जा़ई के लिए मशकूर हूँ मुहतरम टंकन त्रूटी नहीं है शायद आपको मेरे दरकना लफ़्ज़ के इस्तेमाल की वजह से एसा लगा होगा।  दरकना यानी धीरे धीरे टूटना बिखरना    "
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on mirza javed baig's blog post सबस्टिट्यूट (कहानी)
"आदाब।  प्यार-मुहब्बत-इज़हार-बेक़रार वाले सामान्य कथानक में क्रिकेट, बेट्समेन और पेवेलियन, सब्सटीट्यूट के मोती तुलनात्मक रूप से जोड़ने पर कहानी न सिर्फ़ दिलचस्प और प्रवाहमय बन गई, बल्कि कई अनुभवी आशिकों को अतीत की सैर करा कर सब्सटीट्यूशन के…"
Saturday
Samar kabeer commented on mirza javed baig's blog post सबस्टिट्यूट (कहानी)
"जनाब मिर्ज़ा जावेद बैग साहिब आदाब,बहुत उम्दा कहानी लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । अंतिम पंक्ति में टंकण त्रुटि है शायद ।"
Saturday
mirza javed baig posted a blog post

सबस्टिट्यूट (कहानी)

रमीज़ अपनी क्रिकेट टीम का बहतरीन विकेट कीपर बल्लेबाज होते हुए भी लगातार अपनी टीम के साथ नहीं खेल सका वजह थी टीम में पहले से एक सीनियर विकेट कीपर बल्लेबाज मोजूद था जब जब वो अनफ़िट होता या किसी और वजह से नहीं खेल पाता तब ही रमीज़ को टीम में खेलने का मोक़ा मिलता और रमीज़ उस मौक़े का भरपूर फायदा उठाते हुए उम्दा से उम्दा प्रदर्शन करता लेकिन बावजूद इसके भी सीनियर खिलाड़ी के आते ही अगले मेचों में फिर पहले की तरह रमीज़ को पेवेलियन में बेठकर मेच देखना पड़ता! वक़्त गुज़रता रहा अब रमीज़ ने क्रिकेट खेलना…See More
Saturday
mirza javed baig commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (ख़त्म कर के ही मुहब्बत का सफ़र जाऊंगा)
"मुहतरम जनाब तसदीक़ साहिब उम्दा अशआर के, लिए बहुत बहुत मुबारक बाद "
Nov 6
mirza javed baig commented on TEJ VEER SINGH's blog post मेरी धरोहर - लघुकथा -
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,  उम्दा तरीन लघू कथा के लिए बहुत बहुत बधाई दीप पर्व  की मुबारकबाद आपको और तमाम देशवासियों को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाईयां "
Nov 6
mirza javed baig replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक100 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"मुहतरम जनाब राना प्रताप साहिब, सौरभ पांडे साहिब, गणेश जी बागी साहिब ,प्रभाकर साहिब निलेश नूर साहिब अशोक रक्ताले साहिब  औरऔबीओ मँच के सभी पदाधिकारी गण ओर मँच के तमाम मेंबरान को इस सफ़लतम 100 वें आयोजन की बहुत बहुत मुबारक बाद  पिछले तीन…"
Oct 28
mirza javed baig commented on TEJ VEER SINGH's blog post मुआवज़ा - लघुकथा -
"जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब वाह न्याय व्यवस्था पर सटिक कटाक्ष करती हुई रचना के लिए बधाई स्वीकार करें"
Oct 25
mirza javed baig commented on विनय कुमार's blog post मिलन-लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,  बहुत अच्छी लघू कथा के लिए बधाई स्वीकार करें , आप सब की शानदार लघूकथाओं की चाशनी ने मुझे ग़ज़लों के साथ साथ लघू कथा कहने का चस्का लगा दिया है। "
Oct 24
mirza javed baig commented on Samar kabeer's blog post "तरही ग़ज़ल नम्बर 4
"आली जनाब समर कबीर साहिब आदाब,  पहली, फिर दूसरी तीसरी, और अब ये चौथी ग़ज़ल सभी एक से बढ़ कर एक हैं  चारों ग़ज़लों के पुरख़ुलूस दाद और मुबारक बाद पैश करता हूं  आप हमैशा ही कुछ अलग कुछ ख़ास करने पर विश्वास रखते हैं जहाँ पहली ग़ज़ल में…"
Oct 24

Profile Information

Gender
Male
City State
ujjan (m.p)ा
Native Place
ujjain
Profession
building contractor

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At 5:26pm on October 5, 2018, Sheikh Shahzad Usmani said…

मंचीय मित्रता सूची में शामिल होने पर हार्दिक आभार और बधाई। सुस्वागतम अभिनंदन मुहतरम जनाब मिर्ज़ा जावेद बेग साहिब।

At 12:10pm on August 13, 2018, Samar kabeer said…

जनाब मिर्ज़ा जावेद बैग साहिब आदाब,ओबीओ के मंच पर आपका स्वागत है ।

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सबस्टिट्यूट (कहानी)

रमीज़ अपनी क्रिकेट टीम का बहतरीन विकेट कीपर बल्लेबाज होते हुए भी लगातार अपनी टीम के साथ नहीं खेल सका वजह थी टीम में पहले से एक सीनियर विकेट कीपर बल्लेबाज मोजूद था जब जब वो अनफ़िट होता या किसी और वजह से नहीं खेल पाता तब ही रमीज़ को टीम में खेलने का मोक़ा मिलता और रमीज़ उस मौक़े का भरपूर फायदा उठाते हुए उम्दा से उम्दा प्रदर्शन करता लेकिन बावजूद इसके भी सीनियर खिलाड़ी के आते ही अगले मेचों में फिर पहले की तरह रमीज़ को पेवेलियन में बेठकर मेच देखना पड़ता!

वक़्त गुज़रता रहा अब रमीज़ ने…

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Posted on November 9, 2018 at 10:00pm — 9 Comments

नज़्म (मेरे अब्बू) मरहूम के नाम

  1. किस क़दर तल्ख़ियां हैं दुनिया में

नीम रिश्तों में जेसे दर आया

हर तरफ़ तीरगी सी फेली है

रूह घायल है और सहमी है

अपका साथ अब न होने से 

ज़िन्दगी जैसे एक मक़तल है 

और मक़तल में मैं अकेला हूं

ज़िन्दगी की तवील राहों में

ख़ुद को बेआसरा सा पाता हूँ 

साथ एसे में राहबर भी नहीं 

दिल की मेहफ़िल में रोशनी भी नहीं 

रूह में कोई ताज़गी भी नहीं 

मैं हूँ बेआसरा सा सहरा में

ढ़ूंढ़ता हूं वही…

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Posted on October 3, 2018 at 12:30am — 24 Comments

मिर्ज़ा ग़ालिब की ज़मीन में एक कोशिश ।

'भर के आँखों में नमी लहज-ए-साइल बाँधा ।

उनसे मिलने जो चला साथ ग़म ए दिल बाँधा ।

उनकी तशबीह सितारों से न अशआर में दी ।

उनके रुख़सार पै जो तिल था उसे तिल बाँधा ।

मैं भँवर से तो निकल आया मगर मैरे लिए ।

एक तूफ़ान भी उसने लबे साहिल बाँधा ।

हौसले पस्त हुए पल में मिरे क़ातिल के ।

तीर के सामने जब सीन-ए- बिस्मिल बाँधा ।

लुत्फ़ अंदोज़ है "जावेद"तग़ज़्ज़ल कितना ।

हमने मोज़ू ए…

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Posted on August 31, 2018 at 12:59am — 12 Comments

 
 
 

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