For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Ravi Shukla
Share

Ravi Shukla's Friends

  • mirza javed baig
  • Ajay Tiwari
  • पंकजोम " प्रेम "
  • Gurpreet Singh jammu
  • Kalipad Prasad Mandal
  • KALPANA BHATT ('रौनक़')
  • deepak kumar shukla
  • Arpana Sharma
  • Nirdosh Dixit
  • Amit  Tripathi Azaad
  • सतविन्द्र कुमार राणा
  • Sheikh Shahzad Usmani
  • Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
  • Samar kabeer
  • C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"
 

Ravi Shukla's Page

Latest Activity

Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय अनीस अरमान साहब उम्दा मतले के साथ एक बेहतरीन गजल आपने आज के मुशायरे में कही है इसके लिए मेरी ओर से दिली मुबारकबाद कुबूल करें"
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय रूपम कुमार जी तरही मिसरे पर बहुत अच्छी गजल आपने कही है इसके लिए मैं आपको शेर दर शेर दिली मुबारकबाद पेश करता हूं आदरणीय रवि जी और आदरणीय  समर साहब ने इस पर काफी कुछ कह दिया है उनकी बातों का संज्ञान लीजिएगा"
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी आपको इस उम्दा ग़ज़ल पर दिली मुबारकबाद पेश करता हूँ। "
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय अनिल कुमार सिंह साहिब, आपको इस बेहतरीन ग़ज़ल पर दिली मुबारकबाद पेश करता हूँ। "
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय मुनीश तन्हाजी तरही मिसरे पर आपने उम्दा अशआर कहे हैं इसके लिए मेरी दिली मुबारकबाद कुबूल करें आदरणीय रवि जी और आदरणीय समर साहब ने काफी कुछ कह दिया है इस पर।उसका संज्ञान लीजिएगा"
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय तसदीक साहब गजल आपको पसंद आई दिली शुक्रिया"
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय लक्ष्मण जी गजल की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार"
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय अमीरुद्दीन साहब गजल पर आपकी सराहना के लिए दिल्ली शुक्रिया और मौजूद की टंकण त्रुटि को मूल प्रति में सुधार लिया है सादर"
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी गजल की सराहना के लिए हार्दिक आभार स्वीकार करें"
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीया डिंपल जी गजल आपको पसंद आई शेर भी खासतौर से पसंद आया उसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद"
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय समर साहब गजल को आपका आशीष मिला लिखना सार्थक हुआ हार्दिक धन्यवाद"
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय सालिक गणवीर जी ग़ज़ल की सराहना के लिए हार्दिक आभार स्वीकार करें"
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय दीदीहार्दिक आभार स्वीकार करें गजल आपको पसंद आई"
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"आदरणीय दिनेश कुमार जी उम्दा तरही ग़ज़ल के लिए मेरी दिली मुबारकबाद कुबूल करें तीसरा शेर खासतौर पर पसंद आया सादर"
Jul 25
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"दिली शाुक्रिया आपका आदरणीय रवि जी । आपकी सराहना से खुशी हुई । "
Jul 24
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-121
"वाह वाह आदरणीय  नाकाम साहब उम्दामतले से गजल काआगाज हुआ  हर शेर उम्दा शेर दर शेर दिली मुबारक बाद पेश करता हूँं । "
Jul 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Bikaner
Native Place
Bikaner
Profession
Govt. Service
About me
cool

Ravi Shukla's Blog

तरही ग़ज़ल फ़िराक़ साहब के मिसरे पर

थी यही फूल की किस्मत कि बिखर जाना था,

ये कहाँ तय था कि जुल्फों में ठहर जाना था।

मौज ने चाहा जिधर मोड़ दिया कश्ती को,

"मुझको ये भी न था मालूम किधर जाना था"।

जो थे साहिल पे तमाशाई यही कहते थे,

डूबने वाले को अब तक तो उभर जाना था।

बज़्मे अग्यार में है जलवा नुमाई तेरी ,

इस तग़ाफ़ुल पे तेरे मुझको तो मर जाना था।

गर्द हालात की चहरे पे है,लेकिन तुझको,

आईना बन के मैं आया तो सँवर जाना था।

सुब्ह का भूला…

Continue

Posted on March 1, 2019 at 4:30pm — 8 Comments

गीत दफ्तर पर

सिस्टम से अब और निभाना मुश्किल है,

आँसू पीकर हँसते जाना मुश्किल है।।

लंबे चौड़े दफ्तर हैं पर छोटी सोच लिए।

भाँग कुएँ में मिली हुई है पानी कौन पिए।

कागज के रेगिस्तानों में भटक रहा,

मृग तृष्णा से प्यास बुझाना मुश्किल है।

भावुकता में मैदां छोड़ूँ क्या होगा।

कोई और यहाँ आकर रुसवा होगा।।

अजगर बन कर पड़ा रहूँ कैसे संभव,

जोंकों को भी खून पिलाना मुश्किल है।

लानत और मलामत का है भार बहुत।

न्याय नहीं निर्णय का शिष्टाचार…

Continue

Posted on November 16, 2018 at 9:48pm — 5 Comments

तरही ग़ज़ल : साफ छुपते भी नहीं सामने आते भी नहीं

2122  1122  1122  22/112

कोई पूछे तो मेरा हाल बताते भी नहीं,

आशनाई का सबब सबसे छुपाते भी नहीं।

शेर कहते हैं बहुत हुस्न की तारीफ़ में हम

पर कभी अपनी ज़बाँ पर उन्हें लाते भी नहीं।

जब भी देते हैं किसी फूल को हँसने की दुआ,

शाख़ से ओस की बूंदों को गिराते भी नहीं।

ये तुम्हारी है अदा या है कोई मजबूरी,

प्यार भी करते हो और उसको जताते भी नहीं।

सिर्फ़ अल्फ़ाज़ से पहचान…

Continue

Posted on August 29, 2018 at 4:00pm — 17 Comments

गीत : एक भारत श्रेष्ठ भारत

एक भारत श्रेष्ठ भारत आइये मिलकर बनाएं

देश का  सम्मान गौरव लक्ष्य हासिल कर बढ़ाएं

 

शांति के हम पथ प्रदर्शक ध्वज अहिंसा ले चलेंगे

विश्‍व गुरु बन कर पुन: संस्थापना सच की करेंगे

दें नहीं उपदेश अपने आचरण से  कर दिखाएं

 

धर्म पूजा, जाति भाषा, वेश भूषा, बोलियाँ सब

एकता के सूत्र में बंध कर चली है टोलियाँ सब

संगठन में शक्ति है, ऐसी लिखें फिर से कथाएं

 

रेल का हमको दिखाई दे रहा है पथ समांतर

मूल में इसके छिपा है साथ…

Continue

Posted on July 25, 2017 at 11:00am — 9 Comments

Comment Wall (15 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:49am on June 29, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी आदाब , बहुत शुक्रिया मेरा हौसला बढ़ने के लिए
At 4:12pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय रवि शुक्ल जी आदाब, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकार करें
At 8:08am on January 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय रवि जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 12:59am on October 5, 2018, mirza javed baig said…

मोहतरम जनाब रविरवि शुक्ला जी आदाब 

मुझे अपने फ्रेंड्स लिस्ट में जोड़ने के लिए शुक्रिया 

आपसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिलेगा। 

At 9:25am on September 9, 2018, Ajay Tiwari said…

आदरणीय रवि जी,

आपकी मैत्री हासिल करना किसका सौभाग्य नहीं होगा. और मुझे ख़ुशी है कि ये सौभाग्य अब मुझे भी प्राप्त है. हार्दिक आभार.

At 5:11pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी प्रणाम
प्रथम तो मैं देरी से आपका आभार व्यक्त करते हुए शर्मिंदा हूँ और माफ़ी चाहता हूँ अपने मेरी पहली ही ग़ज़ल पढ़ी तथा इस पर अपने विचार व्यक्त किये मैं आपका शुक्रगुज़ार हूँ मेरी पहली ही ग़ज़ल में बहुत ख़ामियां है मुझे भरोषा है की आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में मैं कुछ सीख सकूँगा
आपका बहुत बहुत आभार
At 3:39pm on April 5, 2017, Gurpreet Singh jammu said…

आदरणीय रवि शुक्ला जी आपसे बहुत अच्छी चैटिंग हो रही थी... लेकिन ऐन वक़्त पर मेरे नेट ने धोखा दे दिया ( ये अक्सर मेरे साथ ऐसा ही करता है ) और आप से  बात चीत बीच में ही कट गई ,,, खैर फिर मौका मिला तो बात आगे बढ़ांएंगे,,, संपर्क करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 

At 11:45pm on July 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि शुक्ल जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - व्यापार होना चाहिए को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:23pm on December 17, 2015, Nirdosh Dixit said…
प्रणाम स्वीकारें आदरणीय शुक्ल जी, सादर आभार आपका।
At 11:19pm on November 7, 2015, जयनित कुमार मेहता said…
आपका हार्दिक आभार आदरणीय रवि जी..
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Dr Vandana Misra replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
""दोहा छंद" प्रमुदित बालाएं सभी, खेल रहीं फुटबॉल। चेहरों पर ही है लिखा, सारा दिल का…"
3 hours ago
Dr Vandana Misra joined Admin's group
Thumbnail

चित्र से काव्य तक

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोंत्सव" में भाग लेने हेतु सदस्य इस समूह को ज्वाइन कर ले |See More
3 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी रचना की प्रशंसा और उत्साहवर्धन के लिये आपका हार्दिक आभार"
5 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अजय गुप्ता जी रचना की सराहना और उत्साहवर्धन के लिये आपका हार्दिक आभार"
5 hours ago
सालिक गणवीर commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post अब से झूटा इश्क़ नहीं करना जानाँ (-रूपम कुमार 'मीत')
"प्रिय रुपम कुमार बह्र-ए-मीर इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए शैर दर शैर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल करो.सलामत रहो…"
6 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post कल कहा था आज भी कल भी कहो..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"भाई हर्ष महाजन जीसादर अभिवादनग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए ह्रदय तल से आपका आभार."
6 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

कश्ती में है मगर नहीं पतवार हाथ में- गजल

 221 2121 1221  212कश्ती में है मगर नहीं पतवार हाथ में. होता कहाँ किसी के ये संसार हाथ में.कर लो…See More
8 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"रचना पर अपनी उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार अखिलेश भाई। आपकी सभी इंगित त्रुटियां का संज्ञान…"
10 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी चल वर्जनाओं को लगायें, लात जमकर आ सखी मन की खिलायें धूप भागे, रात डरकर आ सखी…"
11 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणेवेय  अजय भाई गृहणियों का जोश और उत्साह बढ़ाती लम्बी और सुंदर रचना। हृदय से बधाई चार…"
11 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय  अजाय भाई रचना की प्रशंसा और मात्रा संबंधी अशुद्धियाँ बताने के लिए हृदय से धन्यवाद आभार…"
12 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-113 in the group चित्र से काव्य तक
"कृपया प्रथम पँक्ति को इस तरह पढ़िए मस्त मगन दिख रहीं सभी, हँसती हँसाती नारियाँ। धन्यवाद"
13 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service