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Ravi Shukla
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Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"पहले मिसरे में तो हमें  मैं लफ्ज की टंकण त्रुटि लग रही है । रमजान के कारण वो शायद न आ पाएं जब भी सक्रिय होंगे तो हमारी भी शंका का समाधान हो जाएगा  दुसरे मिसरे पर आदरणीय समर साहब ही कुछ कह सकते है"
23 hours ago
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"कोई मे पहले को की मात्रा गिराई गई है आदरणीय गुरप्रीत जी सानी में हर एक में अलिफ वस्‍ल है हरेक"
23 hours ago
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"वाह वाह आदरणीय समर साहब  क्‍या कहने अंदाजे बयां के बहुत खूब हर शेर की रवानी देखते ही बनती है और गिरह का जो जवाब ही नहीं । मतला आपकी सा‍हित्‍य के प्रति मुहब्‍बत को बखूबी बयां कर रहा है अलग अलग अंदाज के शेर से सजी एक कामयाब गजल के…"
23 hours ago
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय गिरिराज भाई जी आपकी सराहना से हिम्‍मत बढ़ जाती है शेर कहने की"
23 hours ago
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय योगराज भाई जी गजल पर आपके प्रोत्‍साहन से बहुत हिम्‍मत मिलती है शुक्रिया गजल पर आपकी शिरकत का"
23 hours ago
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"गजल पर शिरकत और हौसला आफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय नीलेश जी"
23 hours ago
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय वासुदेव जी गजल की सराहना से दिली खुशी हुई आभार"
23 hours ago
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय गुरप्रतीत जी शुकिया गजल पसंद आई आपको"
23 hours ago
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"बहुत बहुत शुक्रिया हौसलाआफजाई का  आदरणीय मोहम्‍मद आरिफ साहब"
23 hours ago
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय मुनीश जी बहुत बढि़या गजल कही आपने मुबारक बाद हाजिर है"
23 hours ago
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"दुआ सलाम लिए जब उधर से निकला था,बड़े इताब से नश्तर नज़र से निकला था।चमक रहा है किसी शाम की जबीं पर क्यों,सहर को छोड़ के जो शम्स घर से निकला था।सवाल एक ही बज़्मे सुखन में रोशन है,वो कौन है जो मेरी चश्मे तर से निकला था।किया है तर्क जो अहदे वफ़ा तो क्या…"
yesterday
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय लक्ष्‍मण जी हमारे ख्‍याल से उला की बात आदणीय गिरिराज जी ने कही है आखिरी रुक्‍न में बह्र गड़बड़ हाे गई है"
yesterday
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय माेहन बेगोवाल जी  गजल को अच्‍छा प्रयास हुआ है दिली मुबारक बाद पेश है"
yesterday
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदाणीय लक्ष्‍मण जी बहुत बढि़या गजल कही आपने। गिरह भी शानदार। शेर दर शेर मुबारक बाद कुबूल करें ।"
yesterday
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"वाह वाह आदरणीय साजिद साहब कमाल की गजल हुई है हर शेर दमदार  जलाए जाता है अखबार के दफातिर को वो एक जिन जो उसी की खबर से निकला था बहुत खुब शेर करिश्मा देखिये कितना घना दरख़्त हुआ वो बीज जो के इसी के समर से निकला था क्‍या कहने इसके …"
yesterday
Ravi Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आदरणीय आशुतोष जी बहुत अच्‍छा प्रयास गजल का हुआ है दिली मुबारक बाद पेश करते हैं । गिरह का शेर बहुत बढि़या गजल के प्र‍ति आपकी दाीवनगी का पता चलता है ।   तलाश रावण को  ... ये शेर भी अच्‍छा है । अगर बहुत अच्‍छी बात निकल के…"
yesterday

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तरही गजल : फूल जंगल में खिले किन के लिये

2122 2122 212

कार्ड काफी था न लॉगिन के लिए

वो हमे भी ले गए पिन के लिए



चाँद पर जाकर शहद वो खा रहे

आप अब भी रो रहे जिन के लिए



शेर को आता है बस करना शिकार

फूल जंगल में खिले किन के लिए



गुठलियों के दाम भी वो ले गया

उसने शीरीं आम जब गिन के लिये



आ गई अब ब्रेड में बीमारियाँ

जी रहे थे क्या इसी दिन के लिए



आये थे जापान से कल लौट कर

फिर उड़े वो रूस बर्लिन के लिए



पास पप्पू एक दिन हो…

Continue

Posted on May 9, 2017 at 11:46am — 26 Comments

तरही गजल : दिन सुहाने हो गये राते सुहीनी हा गईं

2122   2122   2122   212

दिन सुहाने हो गए राते सुहानी हो गईं,

उनके आते ही बहारें जाफ़रानी हो गईं।



रंग और खुशबू की बातें अब कहानी हो गईं,

मुश्किलें लगता है जैसे जाविदानी हो गईं।



आसमाँ ने जब उफ़क पर चूम धरती को लिया,

कमसिनी को छोड़कर ऋतुएं सुहानी हो गईं।



बेकरारी आज जितनी है कभी पहले न थी,

आदतें भी सब्र की जैसे कहानी हो गईं।



मिहनतों को जब मिला तेरा सहारा ए ख़ुदा,

मुश्किलें भी मेरी घट कर दरमियानी हो गईं।



रेत का इक सैल…

Continue

Posted on March 31, 2017 at 11:06am — 17 Comments

ग़ज़ल :चुनाव के दिन हैं

1212 1122 1212 22



हमें न ख़्वाब दिखाओ चुनाव के दिन हैं,

अभी तो होश में आओ चुनाव के दिन है ।



बला से कोई बने शाह मुल्क में माना,

तुम अपना फ़र्ज़ निभाओ चुनाव के दिन हैं।



ख़ता मुआफ़ उसूलों को आज रहने दो,

अदू से हाथ मिलाओ चुनाव के दिन हैं।



ये इत्तिहाद मुबारक़ हो ओहदों के लिए,

हिसाब और लगाओ चुनाव के दिन हैं।



गुज़िश्ता पाँच बरस का हिसाब पूछेंगे

कहाँ थे आप बताओ चुनाव के दिन हैं।



सहीह आज ये मौका बदल दो सूरते… Continue

Posted on February 13, 2017 at 6:32pm — 18 Comments

ताटंक छंद आधारित गीत

माता तेरा बेटा वापस, ओढ़ तिरंगा आया था।

मातृ भूमि से मैंने अपना, वादा खूब निभाया था।



बरसो पहले घर में मेरी, गूंजी जब किलकारी थी।

माता और पिता ने अपनी हर तकलीफ बिसारी थी

पढ़ लिख कर मुझको भी घर का,बनना एक सहारा था

इकलौता बेटा था सबकी मैं आँखों का तारा था

केसरिया बाना पहना कर ,भेज दिया था सीमा पे

देश प्रेम का जज़्बा देकर ,इक फौलाद बनाया था



सोते सोते प्राण गँवाना, मुझे नहीं भाया यारो

कायर दुश्मन की हरकत पर ,क्रोध बहुत आया यारो

शुद्ध रक्त…

Continue

Posted on September 20, 2016 at 8:30pm — 20 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 3:39pm on April 5, 2017, Gurpreet Singh said…

आदरणीय रवि शुक्ला जी आपसे बहुत अच्छी चैटिंग हो रही थी... लेकिन ऐन वक़्त पर मेरे नेट ने धोखा दे दिया ( ये अक्सर मेरे साथ ऐसा ही करता है ) और आप से  बात चीत बीच में ही कट गई ,,, खैर फिर मौका मिला तो बात आगे बढ़ांएंगे,,, संपर्क करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 

At 11:45pm on July 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय रवि शुक्ल जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  ग़ज़ल - व्यापार होना चाहिए को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 8:23pm on December 17, 2015, Nirdosh Dixit said…
प्रणाम स्वीकारें आदरणीय शुक्ल जी, सादर आभार आपका।
At 11:19pm on November 7, 2015, जयनित कुमार मेहता said…
आपका हार्दिक आभार आदरणीय रवि जी..
At 7:31pm on November 4, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh
said…

क्षमा कीजियेगा आ० रवि शुक्ल जी आज ही आपका कमेंट देखा...

करवाचौथ पर लिखा गया मेरा गीत मात्रिक गीत नहीं है... इसे फायलुन X 4 की आवृति पर  लिखा गया है..

मात्रिक गीतों में मात्रा को गिराकर पढने का कोई विधान नहीं होता .. 

मात्रिक गीत (गीतिका छंद पर आधारित) के  कुछ  उदाहरण देखिये 

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:557225

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:518431

मंच पर गीत नवगीत पर एक आलेख देखिये 

http://www.openbooksonline.com/group/chhand/forum/topics/5170231:Topic:358338?commentId=5170231%3AComment%3A359492&xg_source=activity&groupId=5170231%3AGroup%3A156482

At 9:36pm on September 16, 2015, shree suneel said…
आदरणीय रवि शुक्ला जी, हार्दिक बधाई आपको 'महीने का सक्रिय सदस्य' चुने जाने पर, मेरी ओर से. सादर.
At 2:01pm on September 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

रवि शुक्ला जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 4:59pm on July 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपको दोहा गीत पसंद आया, जानकार मन गद्गद् हो गया. ओबीओ का यह आयोजन "चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" छंदों को ही समर्पित है. यह एक कार्यशाला है जहाँ सभी आपस में एक दुसरे से सीखते है. आप आयोजन में सम्मिलित होंगे तो आपको कुछ नया सीखने मिलेगा और आपके अनुभव का लाभ मंच के अन्य सदस्यों को होगा. आप इस आयोजन में सम्मिलित होंगे तो बहुत ख़ुशी होगी. लिंक साझा कर रहा हूँ - ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव"

At 1:36pm on July 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

स्वागत अभिनन्दन 

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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