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पंकजोम " प्रेम "
  • 24, Male
  • भिवानी , हरियाणा
  • India
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पंकजोम " प्रेम "'s Friends

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Abha saxena and पंकजोम " प्रेम " are now friends
Jun 4, 2018
पंकजोम " प्रेम " commented on Sushil Sarna's blog post मैं ....
"वाह दादा ह्रदयस्पर्शी रचना उम्दा "
Jan 26, 2018
Ram Ashery commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " बच्चा सोता मिला "
"अति सुंदर रचना के लिए आपको सहृदय बधाई स्वीकार  हो "
Jan 14, 2018
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " फ़िर ग़ज़ल प्रेम की निशानी की "
"उम्दा ग़ज़ल कही आदरणीय..सादर"
Jan 3, 2018
narendrasinh chauhan commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " फ़िर ग़ज़ल प्रेम की निशानी की "
"खूब सुन्दर रचना "
Jan 3, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " फ़िर ग़ज़ल प्रेम की निशानी की "
"हार्दिक बधाई ।"
Jan 3, 2018
Mohammed Arif commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " फ़िर ग़ज़ल प्रेम की निशानी की "
"आदरणीय पंकजोम जी आदाब,                     औसत दर्जे की अच्छी ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।                  …"
Dec 31, 2017
पंकजोम " प्रेम " posted a blog post

" फ़िर ग़ज़ल प्रेम की निशानी की "

बहर - 2122 1212 22 अपने दुश्मन पे गुलफिशानी की lआबरू उसकी पानी पानी की ।।वार मैंने निहत्थों पर न किया यूँ ...अदा रस्म खानदानी की lख़त्म उस ने ही कर दी ऐ - यारो जिसने शुरू प्यार की कहानी की lहोंठ उनके जब न कह सके सच फ़िर निग़ाहों ने सच बयानी की lशख्स वो दोस्तों था पत्थर दिल खामखाँ उस पे गुलफिशानी की lसोचा  बेहद  के  क्या रखूँ ता - उम्र फ़िर ग़ज़ल " प्रेम " की निशानी की ...पंकजोम " प्रेम "See More
Dec 31, 2017
पंकजोम " प्रेम " commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " माँ बाप के चरणों मे दिखती यहाँ जन्नत है "
"आपके आशिर्वाद का बेहद शुक्रगुज़ार हूँ , आ0 दादा लक्ष्मण जी ..... आ0 भाई सुरेन्द्र जी ..... आ0 दादा मुहम्मद आरिफ जी ..... सलामत रहिये "
Dec 31, 2017
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " माँ बाप के चरणों मे दिखती यहाँ जन्नत है "
"हार्दिक बधाई।"
Dec 26, 2017
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " माँ बाप के चरणों मे दिखती यहाँ जन्नत है "
"आद0 पंकजोम जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल का बढ़िया प्रयास। शेष गुनिजनो की बातों का संज्ञान लीजिये। इस प्रस्तुति पर मेरी बधाई।"
Dec 26, 2017
Mohammed Arif commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " माँ बाप के चरणों मे दिखती यहाँ जन्नत है "
"आदरणीय पंकजोम जी आदाब,                     ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब और आदरणीयत्रनीलेश जी की बातों का तत्काल प्रभाव से अमल करें ।"
Dec 25, 2017
पंकजोम " प्रेम " commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " माँ बाप के चरणों मे दिखती यहाँ जन्नत है "
"आपके आशिर्वाद का बेहद शुक्रगुज़ार हूँ , आ0 दादा समर कबीर जी .... आ0 दादा नीलेश जी ..... ग़ज़ल को और दुरुस्त करने का प्रयास करता हूँ .."
Dec 24, 2017
Samar kabeer commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " माँ बाप के चरणों मे दिखती यहाँ जन्नत है "
"जनाब पंक्जोम "प्रेम" जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले का ऊला मिसरा लय में नहीं है । बाक़ी अशआर में अल्फ़ाज़ की बन्दिश चुस्त नहीं है । आख़री शैर का ऊला भी लय में नहीं है,एक बात ये कि 'चन्द'शब्द बहुवचन के लिए है…"
Dec 24, 2017
Nilesh Shevgaonkar commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " माँ बाप के चरणों मे दिखती यहाँ जन्नत है "
"मतले का ऊला बुजुर्गों के बु पर लड़खड़ा गया है ..देखिएगा सादर "
Dec 24, 2017
पंकजोम " प्रेम " posted a blog post

" माँ बाप के चरणों मे दिखती यहाँ जन्नत है "

बहर - 221 1222 221 1222 ये  मेरा  नहीं  यारो  ये  बुजुर्गों  का  मत है ...... माँ बाप के चरणों में दिखती यहाँ ज़न्नत है ......बस मेरी ये नादानों से एक शिक़ायत है ..... बेटा लगे प्यारा क्यों बेटी से न चाहत है ..... ये  ख़्वाब  नहीं   कोई  ये   एक   हकीक़त  है ....कुछ लोग कहे उल्फ़त उल्फ़त नहीं आफ़त है ......संसार में इन दोनों में फ़र्क हैं इतना सा है हाथ  अगर  बेटा  तो बेटी इबादत है .....कुछ शख्स ही कह सकते है बात यहाँ मुँह पर हर  शख्स  की होती  ऐ - यारो कहाँ हिम्मत है ......यूँ तो मिरा उन पर अब कोई…See More
Dec 24, 2017

Profile Information

Gender
Male
City State
भिवानी , हरियाणा
Native Place
भिवानी
Profession
छात्र
About me
बेचकर अपनी ख़ुशी मेरे पिता ने .... ज़िंदगानी है मेरी जन्नत बनाई .......पंकजोम " प्रेम "

पंकजोम " प्रेम "'s Blog

" फ़िर ग़ज़ल प्रेम की निशानी की "

बहर - 2122 1212 22 

अपने दुश्मन पे गुलफिशानी की l

आबरू उसकी पानी पानी की ।।

वार मैंने निहत्थों पर न किया

यूँ ...अदा रस्म खानदानी की l

ख़त्म उस ने ही कर दी ऐ - यारो

जिसने शुरू प्यार की कहानी की l

होंठ उनके जब न कह सके सच

फ़िर निग़ाहों ने सच बयानी की l

शख्स वो दोस्तों था पत्थर दिल

खामखाँ उस पे गुलफिशानी की l

सोचा  बेहद  के  क्या रखूँ ता - उम्र

फ़िर ग़ज़ल " प्रेम " की निशानी की…

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Posted on December 31, 2017 at 1:12pm — 4 Comments

" माँ बाप के चरणों मे दिखती यहाँ जन्नत है "

बहर - 221 1222 221 1222 

ये  मेरा  नहीं  यारो  ये  बुजुर्गों  का  मत है ......

माँ बाप के चरणों में दिखती यहाँ ज़न्नत है ......

बस मेरी ये नादानों से एक शिक़ायत है .....

बेटा लगे प्यारा क्यों बेटी से न चाहत है .....

 

ये  ख़्वाब  नहीं   कोई  ये   एक   हकीक़त  है ....

कुछ लोग कहे उल्फ़त उल्फ़त नहीं आफ़त है ......

संसार में इन दोनों में फ़र्क हैं इतना सा

है हाथ  अगर  बेटा  तो बेटी इबादत है .....



कुछ शख्स ही कह…

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Posted on December 24, 2017 at 1:37pm — 7 Comments

" नज़रें ज़माने भर की उस इक गुलाब पर हैं "

बहर - 221 2122 221 2122



यूँ मेरी नज़रें ग़ज़लों की हर किताब पर हैं .......

जैसे....... शराबियों की नज़रें शराब पर हैं ....

जब .चल दिया मैं उनकी महफ़िल से तो वो बोले

ठहरो ......कुछेक पल लब मेरे ज़वाब पर हैं .....



हाँ , बेगुनाह होती है अपनी भावनायें

इल्जाम इसलिये तो लगते शबाब पर हैं .....

ऐ - मौला तुम भी रखना अपनी निगाहें उस पर

नज़रें ज़माने भर की उस इक ग़ुलाब पर हैं ......

मैंने चमकने की है जब से यूँ बात…

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Posted on December 17, 2017 at 9:17pm — 10 Comments

" बच्चा सोता मिला "

बहर - 2122 2122 2122 212



जिंदगी में फिर मुझे बचपन मेरा हँसता मिला ......

जब हुआ बटवारा तो माँ का मुझे कमरा मिला ........



आज़माये थे बहुत पर शख्स हर झूठा मिला ,

तेरे रूप में यार मुझको एक आईना मिला .......



राह में मैंने लिखा देखा था जिस पत्थर पे माँ ......

लौट कर आया तो इक बच्चा वहाँ सोता मिला ......





बुझ गये थे दीप सारे प्यार के उस बस्ती में

दर्द का इक दीप मुझको फिर वहाँ जलता मिला .......





जी रही थी वो फ़क़त सच्ची… Continue

Posted on December 3, 2017 at 1:23pm — 15 Comments

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At 9:13am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

At 4:53pm on August 8, 2017, surender insan said…
भाई पँकज जी आदाब। स्वागत है आपका obo परिवार में जी।
 
 
 

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