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पंकजोम " प्रेम "
  • 23, Male
  • भिवानी , हरियाणा
  • India
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पंकजोम " प्रेम "'s Page

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पंकजोम " प्रेम " commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " शायरी "
"आपके आशिर्वाद का दिल से शुक्रगुज़ार हूँ , आ0 दादा समर कबीर जी , अफरोज़ जी , उस्मानी जी ..... और निखार लाने का प्रयास करता हूँ"
Wednesday
Samar kabeer commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " शायरी "
"जनाब पंक्जोम "प्रेम"साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन ग़ज़ल अभी और समय चाहती है,कई अशआर के ऊला मिसरे सानी मिसरे से रब्त पैदा नहीं कर सके,इस कारण रदीफ़ से पूरा इंसाफ़ नहीं हो सका,देखियेगा ,इस प्रस्तुति के लिए बधाई आपको ।"
Wednesday
Afroz 'sahr' commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " शायरी "
"आदरणीय पंकजोम प्रेम जी इस रचना पर बहुत बधाई आपको । रदीफ़,,, "कौन है शायरी" ज़ू, मानी दे रही है ,,देखिएगा सादर,,"
Wednesday
Sheikh Shahzad Usmani commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " शायरी "
"जज़्बात बयां करती दिलचस्प ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब पंकजोम 'प्रेम' साहिब। शायरी का चरित्र-चित्रण।"
Tuesday
पंकजोम " प्रेम " commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मज़ाहिया ग़ज़ल
"वाह जनाब उम्दा ग़ज़ल हुई है ........ वाह वाह बहुत ख़ूब"
Tuesday
पंकजोम " प्रेम " posted a blog post

" शायरी "

वजन - 212 212 212 212..... " शायरी " .........मेरे रुख़ की हँसी कौन है , शायरी .....मेरी जां जिंदगी कौन है , शायरी ....बेवफ़ाओं के पत्थर दिलों में यहाँकील बनकर चुभी कौन है , शायरी.......ऊँचे उड़ते दिखे है परिंदे , मगरइन से ऊँची उड़ी कौन है , शायरी ...मैं अकेला नहीं जागता रातभरसंग फिर जागती कौन है , शायरी ....ग़म भरे तम दिलों में मेरे दोस्तोंदीप बनकर जली कौन है , शायरी ....अपने है , दोस्त है , है सनम भी , मगरमेरे ग़म बाँटती कौन है , शायरी ......." प्रेम " को यूँ तो सब जानते है , मगरअच्छे से जानती कौन…See More
Tuesday
पंकजोम " प्रेम " commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"आपके आशिर्वाद का दिल से शुक्रगुज़ार हूँ , आ0 दादा समर कबीर जी ....."
Tuesday
पंकजोम " प्रेम " commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"बहुत बहुत शुक्रिया आ0 दादा आशुतोष जी ...आ0 दादा रामानुज जी .... आ0 दादा मुहम्मद आरिफ जी ...."
Tuesday
Dr Ashutosh Mishra commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"आदरणीय पंकजोम जी पहली बार आपकी रचना को पढने का अवसर प्राप्त हुआ आपकी रचना के माध्यम से आदरणीय समर सर और निलेश भाई जी की प्रतिक्रियाओं से बहुत सारी बारीकियाँ सीखने को मिलीं . इस  प्रयास पर हार्दिक बधाई सादर "
Oct 26
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"मुझे बहुत अधिक समझ तो नहीं पर कुछ शेर बह्र एवं मापनी में नजर नहीं आ रहे | एक बार गुणीजनों की टिपण्णी अनुसार पुनह अवलोकन करना उचित होगा | प्रयास के लिए हार्दिक बधाई "
Oct 24
Mohammed Arif commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"आदरणीय पंकजोम जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । गुणीजनों की बातों से मैं पूरी तरह से सहमत हूँ उनकी बातों का संज्ञान लें ।"
Oct 24
Samar kabeer commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"जनाब पंक्जोम"प्रेम" जी आदाब,कुछ बातें जनाब निलेश जी ने समझाईं कुछ मैं बताता हूँ । 'देख मुझको वो मुसलसल मुस्कुराती ही रही' ग़ज़ल कहते समय ये भी ध्यान रखें कि शाइरी में महबूब को स्त्रीलिंग की तरह नहीं बरता जाता,इस मिसरे को यूँ…"
Oct 23
पंकजोम " प्रेम "'s blog post was featured

" पर्दा हटाना हो गया "

बहर - 2122 2122 2122 212एक तितली का चमन मे आना जाना हो गया .....देख ..उसको एक गुल यारों दिवाना हो गया ....उनकी हर तस्वीर मेरे दिल मे धुँधली हो गईउनको .. देखें दोस्तों जो इक ज़माना हो गया ....देख मुझको वो मुसलसल मुस्कुराती ही रहीक्या.... सही मेरी निग़ाहों का निशाना हो गया ....एक बच्चा खा रहा था कूड़े से जूठन , उसेदेखकर ....मेरे लबों से दूर दाना हो गया ..जी , शहद जितनी मुझे हर पल मिठास आने लगीअपना रिश्ता लगता है यारों पुराना हो गया .....मैंने .....तो बस चाह की उनके हसीं दीदार की ,रुख से उनका उस ही…See More
Oct 23
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"आद0 पँकजोम जी सादर अभिवादन, बेहतरीन प्रयास ग़ज़ल का । शेष गुनिजनो कह चुके है। बधाई सादर।"
Oct 23
Ram Awadh VIshwakarma commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"आदरणीय खूबसूरत ग़ज़ल कहने क लिये बधाई।ग़ज़ल में कुछ जाने अनजाने होना स्वाभाविक है। विद्वजन की टिप्पणी पर गौर करना आवश्यक है।ओपेन बुक्स आन लाइन एक पाठशाला है। जहाँ सब इसी तरह सीखते हैं। मैं भी सीखता हूँ।"
Oct 23
पंकजोम " प्रेम " posted blog posts
Oct 22

Profile Information

Gender
Male
City State
भिवानी , हरियाणा
Native Place
भिवानी
Profession
छात्र
About me
बेचकर अपनी ख़ुशी मेरे पिता ने .... ज़िंदगानी है मेरी जन्नत बनाई .......पंकजोम " प्रेम "

पंकजोम " प्रेम "'s Blog

" शायरी "

वजन - 212 212 212 212



..... " शायरी " .........



मेरे रुख़ की हँसी कौन है , शायरी .....

मेरी जां जिंदगी कौन है , शायरी ....



बेवफ़ाओं के पत्थर दिलों में यहाँ

कील बनकर चुभी कौन है , शायरी.......



ऊँचे उड़ते दिखे है परिंदे , मगर

इन से ऊँची उड़ी कौन है , शायरी ...



मैं अकेला नहीं जागता रातभर

संग फिर जागती कौन है , शायरी ....



ग़म भरे तम दिलों में मेरे दोस्तों

दीप बनकर जली कौन है , शायरी ....



अपने है , दोस्त… Continue

Posted on November 21, 2017 at 7:12pm — 4 Comments

" पर्दा हटाना हो गया "

बहर - 2122 2122 2122 212



एक तितली का चमन मे आना जाना हो गया .....

देख ..उसको एक गुल यारों दिवाना हो गया ....



उनकी हर तस्वीर मेरे दिल मे धुँधली हो गई

उनको .. देखें दोस्तों जो इक ज़माना हो गया ....



देख मुझको वो मुसलसल मुस्कुराती ही रही

क्या.... सही मेरी निग़ाहों का निशाना हो गया ....



एक बच्चा खा रहा था कूड़े से जूठन , उसे

देखकर ....मेरे लबों से दूर दाना हो गया ..



जी , शहद जितनी मुझे हर पल मिठास आने लगी

अपना रिश्ता लगता… Continue

Posted on October 22, 2017 at 7:30pm — 16 Comments

" उसको कहते किसान है यारों "

" उसको कहते किसान है यारों "



बहर - 2122 1212 22/112





सबसे जो मूल्यवान है यारों ....

उसको कहते किसान है यारों ....



मौला महफ़ूज आप सब को रखें

आप .....भारत कि शान है यारों ..



फेक दी जिसने बेटी कचरे में

माँ वो कितनी महान है यारों ...



जिंदगी से कहीं ज़ियादा , क्यों

प्यारा लगता श्मशान है यारों ...



झूठ देखों यहाँ पे चीखे और

सच... बना बेजुबान है यारों ...



तीर बस प्यार का चले जिस से

आप...... ऐसी… Continue

Posted on September 30, 2017 at 7:30pm — 3 Comments

रुख से वो जब पर्दा हटा देगा

बहर - 1222 1222 1222 1222



वो ख़ुद अपनो का मारा हैं नहीं मुझको दग़ा देगा .....

मुहब्बत में यक़ीनन साथ वो मेरा निभा देगा ......





निगाहें देखकर उसकी , उसे कहते कयामत हो

कयामत होगी तब रुख से वो जब पर्दा हटा देगा ....



यहीं तो सोच के मंदिर में जाकर रोता है मुफ़लिस

कि मेरे अश्क़ को इक दिन ख़ुदा मोती बना देगा ......



वो ....बिस्तर मख़मली उसके लिए बेकार है यारों

उसे मेहनत का हासिल इक निवाला ही सुला देगा ....



मिरा घर है अँधेरे में… Continue

Posted on August 8, 2017 at 4:30pm — 10 Comments

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At 4:53pm on August 8, 2017, surender insan said…
भाई पँकज जी आदाब। स्वागत है आपका obo परिवार में जी।
 
 
 

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