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पंकजोम " प्रेम "
  • 23, Male
  • भिवानी , हरियाणा
  • India
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पंकजोम " प्रेम " commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सलीम भाई जी ....."
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पंकजोम " प्रेम " commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"जी नीलेश दादा .... आपके आशिर्वाद से और निखार आ गया ग़ज़ल में ...... बेहद शुक्रगुज़ार हूँ , आपके आशिर्वाद का ...."
14 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"आ. पंकजोम प्रेम जी,आपको मंच पर  पहली बार पढने का अवसर मिला है.ग़ज़ल सिर्फ शब्दों का संयोजन अथवा भावों की मालिका नहीं है. ग़ज़ल में भी बनते कोशिश व्याकरण के नियमों जैसे कर्ता ने कर्म को..आदि का ख़याल रखा जाय तो मिसरे भी बेहतर  होते हैं  …"
20 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on पंकजोम " प्रेम "'s blog post " पर्दा हटाना हो गया "
"भाई प्रेम जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई,"
22 hours ago
पंकजोम " प्रेम " posted blog posts
22 hours ago

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"वाह भाई जी वाह बेहतरीन ग़ज़ल , ख़ूब"
Friday
पंकजोम " प्रेम " commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल - वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ
"बेहतरीन ग़ज़ल भाई जी वाह वाह वाह"
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"उम्दा ग़ज़ल भाई जी ख़ूब..... मुबारकबाद क़बूल करें"
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पंकजोम " प्रेम " commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post हर मुख हिंदी कब गायेगा ?:-मोहित मुक्त
"बहुत ख़ूब भाई जो वाह"
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पंकजोम " प्रेम " commented on Er Kumar Nusrat's blog post गज़ल - बेटों से कहीं ज्यादा मैं बेटी की तरफ हूं
"वाह उम्दा ग़ज़ल भाई जी वाह"
Friday
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पंकजोम " प्रेम " commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अरमान और बिदाई (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"ह्र्दयस्पर्शी रचना आदरणीय दिली मुबारकबाद आपको"
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पंकजोम " प्रेम " commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल ( हाए वो शख़्स निकलता है सितमगर यारो )
"वाह उम्दा ग़ज़ल की दिली मुबारकबाद क़बूल करें"
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पंकजोम " प्रेम " commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"वाह ख़ूब भाई जी वाह"
Sep 13
पंकजोम " प्रेम " commented on Rahila's blog post *अनुवांशिक गुण*(लघुकथा)राहिला
"वाह दी बहुत खूब"
Sep 12

Profile Information

Gender
Male
City State
भिवानी , हरियाणा
Native Place
भिवानी
Profession
छात्र
About me
बेचकर अपनी ख़ुशी मेरे पिता ने .... ज़िंदगानी है मेरी जन्नत बनाई .......पंकजोम " प्रेम "

पंकजोम " प्रेम "'s Blog

" पर्दा हटाना हो गया "

बहर - 2122 2122 2122 212



एक तितली का चमन में रोज़ आना हो गया .....

देख ..उसको एक गुल यारों दिवाना हो गया ....



उनकी हर तस्वीर मेरे दिल मे धुँधली हो गई

उनको .. देखें दोस्तों जो इक ज़माना हो गया ....



देख मुझको वो मुसलसल मुस्कुराती ही रही

क्या.... सही मेरी निग़ाहों का निशाना हो गया ....



एक बच्चा खा रहा था कूड़े से जूठन , उसे

देखकर ....मेरे लबों से दूर दाना हो गया ..



जी , शहद जितनी मुझे मीठी मिठास आने लगी

रिश्ता शायद लगता है… Continue

Posted on September 18, 2017 at 7:30pm — 4 Comments

रुख से वो जब पर्दा हटा देगा

बहर - 1222 1222 1222 1222



वो ख़ुद अपनो का मारा हैं नहीं मुझको दग़ा देगा .....

मुहब्बत में यक़ीनन साथ वो मेरा निभा देगा ......





निगाहें देखकर उसकी , उसे कहते कयामत हो

कयामत होगी तब रुख से वो जब पर्दा हटा देगा ....



यहीं तो सोच के मंदिर में जाकर रोता है मुफ़लिस

कि मेरे अश्क़ को इक दिन ख़ुदा मोती बना देगा ......



वो ....बिस्तर मख़मली उसके लिए बेकार है यारों

उसे मेहनत का हासिल इक निवाला ही सुला देगा ....



मिरा घर है अँधेरे में… Continue

Posted on August 8, 2017 at 4:30pm — 10 Comments

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At 4:53pm on August 8, 2017, surender insan said…
भाई पँकज जी आदाब। स्वागत है आपका obo परिवार में जी।
 
 
 

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