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surender insan
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surender insan commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post खामियाजा ( लघु कथा )
"बहुत बढ़िया जी । सार्थक रचना की बधाई हो ।"
Dec 13, 2018
surender insan commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय राज नवादवी साहब। सादर नमन।"
Dec 13, 2018
surender insan commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब। सादर नमन जी।"
Dec 13, 2018
surender insan commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"जी आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमन। बहुत बहुत शुक्रिया आपका। वह मिसरा बदल दिया है देखियेगा। सादर जी।"
Dec 13, 2018
surender insan commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय तेजवीर जी । सादर नमन।"
Dec 13, 2018
surender insan commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । सादर नमन जी।"
Dec 13, 2018
surender insan posted a blog post

"किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"

 1222 1222 1222 सुकूँ वो उम्र भर पाया नहीं करतें। बड़ों की बात जो माना नहीं करतें।।बुजुर्गों की नसीहत ये पुरानी है। बिना सोचे कभी बोला नहीं करतें।।सफल होते हमेशा लोग वो ही जो।किसी की बात सुन बहका नहीं करतें।।जिन्हें आदत हमेशा जीतने की हो। वो मैदां छोड़ कर भागा नहीं करतें।।हमेशा से रहा इक ही उसूल अपना। किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें।।मौलिक व अप्रकाशितSee More
Dec 12, 2018
राज़ नवादवी commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"आदरणीय सुरेंद्र इंसान साहब, आदाब। सुंदर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे बधाई। सादर।।"
Dec 12, 2018
Tasdiq Ahmed Khan commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान साहिब  , अच्छीग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l मुहतरम समर साहिब का कहना सही है , ज़ाया शब्द के आखिर में उर्दू के हिसाब से अलिफ नहीं बल्कि एन है इस ग़ज़ल में यह क़ा फिया नहीं होगा l शेर यूँ कर सकते हैं (सफ़ल वो लोग…"
Dec 12, 2018
Samar kabeer commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"भाई लक्ष्मण धामी जी,मेरी टिप्पणी स्पष्ट है,आपने ध्यान से नहीं पढ़ी शायद,इस शब्द का सहीह तलफ़्फ़ुज़(उच्चारण)"ज़ाए" है न कि 'ज़ाया'"
Dec 12, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । आपकी टिप्णी में ज़ाया शब्द को काफिया के तौर पर न लेने की सलाह से उलझन में हूँ । यह शब्द यहाँ अर्थ के हिसाब से ठीक नहीं है या किसी और वजह से मार्गदर्शन करें । मेरे हिसाब से यह यहाँ बरबाद के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है न…"
Dec 12, 2018
Samar kabeer commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ' जरा सा वक़्त भी ज़ाया नहीं करतें' इस मिसरे में "ज़ाया" क़ाफ़िया सहीह नहीं है,सहीह शब्द है "ज़ाए",जिसे आम तौर पर लोग "ज़ाया" बोलते…"
Dec 12, 2018
Surkhab Bashar commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"ग़ज़ल फिर ज़िंदगी से अपनी पहचान हो न जाए साँसों का आना जाना आसान हो न जाए अपनी शनावरी पे इतरा न ऐ शनावरशोहरत का ये समुंदर दालान हो न जाए इस बार भी मैं दफ़्तर ताख़ीर से गया तोडर है कि नौकरी का नुक़सान हो न जाए मज़लूम पे सितम के तुम ती मत…"
Dec 12, 2018
TEJ VEER SINGH commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेंद्र इंसान जी।बेहतरीन गज़ल । हमेशा से रहा इक ही उसूल अपना।किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें।।"
Dec 12, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"आ. भाई सुरेंद्र जी , अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई । करतें को - करते कर लें ।"
Dec 12, 2018
surender insan commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका। सादर नमन।"
Dec 11, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
sirsa (haryana)
Native Place
india
Profession
self work
About me
a simple parson. give respect take respect .always be happy & let others be happy.

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"किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"

 1222 1222 1222


सुकूँ वो उम्र भर पाया नहीं करतें।
बड़ों की बात जो माना नहीं करतें।।

बुजुर्गों की नसीहत ये पुरानी है।
बिना सोचे कभी बोला नहीं करतें।।

सफल होते हमेशा लोग वो ही जो।
किसी की बात सुन बहका नहीं करतें।।

जिन्हें आदत हमेशा जीतने की हो।
वो मैदां छोड़ कर भागा नहीं करतें।।

हमेशा से रहा इक ही उसूल अपना।
किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें।।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on December 11, 2018 at 4:30pm — 14 Comments

"गर अदब में नाम की दरकार है"

2122 2122 212

गर अदब में नाम की दरकार है।

तो ग़ज़ल कोई नयी दरकार है।।

तू किसी को देख ले ग़मगीन तो।

आँख में तेरी नमी दरकार है।।

प्यार करते हो मुझे तुम भी अगर

इक नज़र चाहत भरी दरकार है।।



एक दूजे पे हमेशा हो यकीं।

दोस्ती में बस यही दरकार है।।

ये अँधेरा दूर होगा एक दिन।

इल्म की बस रौशनी दरकार है।।

बात सच्ची ही कहें हर शेर में।

शाइरी में ये रही दरकार है।।

तुम बढ़ा…

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Posted on October 1, 2018 at 12:00pm — 6 Comments

"दर्द वो इस तरह छुपाता है"

2122 1212 22

हर समय खूब मुस्कुराता है।

दर्द वो इस तरह छुपाता है।।

वक़्त अच्छा बुरा जो आता है।

कुछ न कुछ तो सबक सिखाता है।।

दोस्त सच्चा उसे कहा जाता।

साथ जो हर कदम निभाता है।।

वो सकूँ से कभी नहीं रहता।

दिल किसी का भी जो दुखाता है।।

एक दिन ख़ुद मज़ाक बनता वो।

जो किसी का मज़ाक उड़ाता…

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Posted on July 24, 2018 at 9:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल "एक दिन मिल जायेगा सब ख़ाक में"

*२१२२ २१२२ २१२*

हर जगह रहता है अपनी धाक में।

ख़ासियत देखी ये उस चालाक में।।

चीज कोई मुफ़्त में कैसे मिले।

लोग रहते आजकल इस ताक में।।

आदमी करता गुमाँ किस बात का।

एक दिन मिल जायेगा सब ख़ाक में।।

ख़ुद-ब-ख़ुद सम्मान मिलता आजकल।

आप हो जब कीमती पोशाक में।।

जब न मोबाइल किसी के पास था।

लोग लिखते हाल अपना डाक में।।

डर हमेशा उस ख़ुदा से ही लगे।

मैं नहीं रहता किसी की धाक…

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Posted on March 28, 2018 at 3:00pm — 14 Comments

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At 11:48pm on July 7, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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