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surender insan
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surender insan commented on Manan Kumar singh's blog post समय का फेर(लघु कथा)
"बहुत अच्छी रचना की आपने जी। बहुत बहुत बधाई हो जी।"
Thursday
surender insan posted blog posts
Wednesday
Ajay Tiwari commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"
"आदरणीय कालीपद जी, फइलुन(112) का प्रयोग मुतकारिब को छोड़ कर अन्य ज्यादातर बहरों में होता है लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रयोग मुतदारिक में होता है मिसाल के लिए…"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"
"हार्दिक बधाई ।"
Tuesday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"
"आद0 सुरेन्दर इंसान जी अच्छी ग़ज़ल कही आपने, बधाई"
Monday
Kalipad Prasad Mandal commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"
"आ अजय तिवारी जी ,नमन , फैलुन( २२ ) का २११ का प्रयोग तो समझमे आगया , कृपया २२ का ११२ या १२१ के रूप में कहाँ प्रयोग होता है एल उदाहरण दे\ सादर "
Sunday
Ajay Tiwari commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"
"आदरणीय सुरेन्द्र जी, सादर नमन, फेलुन(22) को 211 और 112 दोनों वजनों पर एक साथ किसी बह्र में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. फेलुन(22) का  211 के वजन पर सिर्फ मुतकारिब में ही इस्तेमाल होता है.(211 वस्तुत: सिर्फ एक गणितीय प्रारूप है वास्तविक तक्ती…"
Jan 14
Samar kabeer commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । जनाब अजय तिवारी जी सब कुछ बता चुके हैं,उनकी बातों का संज्ञान लें ।"
Jan 14
surender insan commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"
"आद. अजय जी सादर नमन जी। ग़ज़ल  को समय देने के लिए बहुत बहुत आभार जी।  इस बह्र में  22 को 211 या 112 तो किया जा सकता है। 22 को  121 करने की मनाही बारे तो सुना है या पहले फेलुन को 112 न करने बारे भी सुना है जी।  सादर जी।"
Jan 13
Ajay Tiwari commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"
"आदरणीय सुरेन्द्र जी, खूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. मतले के उला में आपने फइलुन(११२) का इस्तेमाल किया है जिसकी इस बह्र में अनुमति नहीं है. कुछ मिसरों को ग़ज़ल की आम प्रवृत्ति के अनुरूप ज्यादा स्वाभाविक वाक्यों के रूप में रखा जा सकता है :   इक…"
Jan 13
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-87
"बस यही रुका था ।  बहुत बहुत बधाई हो बेहतरीन रचना जी। सादर नमन जी "
Jan 13
surender insan commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(क्या क्या बदलोगे...)
"वाह जी वाह ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है बधाई स्वीकार करे  जी।"
Jan 12
surender insan commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post माँ के हाथों से जब खाया जाता है (ग़ज़ल)
"वाह वाह बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करे भाई सुरेन्द्र जी।"
Jan 12
surender insan commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post जाने सूरज कब निकले है वक्त अभी रुसवाई का------गज़ल
"     आदरणीय पंकज कुमार जी ,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है , बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 12
surender insan posted a blog post

ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"

22 22 22 22 22 2रिश्ता जो इक बार बनाया जाता है।वो फिर सारी उम्र निभाया जाता है।।ऐसे भी माहौल बनाया जाता है। कुछ होता कुछ और दिखाया जाता है।।ऐसा देखा यार सियासत में अक्सर। इक दूजे को चोर बताया जाता है।।सच हो पाए जो न किसी भी सूरत में। क्यों अक्सर वो ख़्वाब दिखाया जाता है।। रंग बदलते गिरगिट सा कुछ लोग यहाँ। मतलब हो तो प्यार जताया जाता है।।ये सच्चाई तो जग जाहिर है यारो। जो सच बोले खूब सताया जाता है।।जो औरों के सुख दुख को अपना समझे। वो अच्छा 'इंसान' बताया जाता है।।मौलिक व अप्रकाशितSee More
Jan 12
surender insan commented on surender insan's blog post "एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"
"    बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय बलराम  जी । बहुत बहुत आभार जी।"
Jan 12

Profile Information

Gender
Male
City State
sirsa (haryana)
Native Place
india
Profession
self work
About me
a simple parson. give respect take respect .always be happy & let others be happy.

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ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"

22 22 22 22 22 2



रिश्ता जो इक बार बनाया जाता है।

वो फिर सारी उम्र निभाया जाता है।।

ऐसे भी माहौल बनाया जाता है।

कुछ होता कुछ और दिखाया जाता है।।

ऐसा देखा यार सियासत में अक्सर।

इक दूजे को चोर बताया जाता है।।

सच हो पाए जो न किसी भी सूरत में।

क्यों अक्सर वो ख़्वाब दिखाया जाता है।।

 रंग बदलते गिरगिट सा कुछ लोग यहाँ।

मतलब हो तो प्यार जताया जाता है।।

ये सच्चाई तो जग जाहिर है यारो।

जो…

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Posted on January 12, 2018 at 2:30pm — 8 Comments

"एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"

2122 2122 2122

एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ।
मैं समय के साथ बेहतर हो गया हूँ।।

कल तलक अपना समझते थे मुझे जो।
उनकी ख़ातिर आज नश्तर हो गया हूँ।।

मैं बयां करता नहीं हूँ दर्द अपना।
सब समझते हैं कि पत्थर हो गया हूँ।।

ज़िन्दगी में हादसे ऐसे हुए कुछ।
मैं जरा सा तल्ख़ तेवर हो गया हूँ।।

जख़्म दिल के तो नहीं अब तक भरे हैं।
हां मगर पहले से बेहतर हो गया हूँ।।


सुरेन्द्र इंसान

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on December 2, 2017 at 1:00pm — 18 Comments

ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"

2122 2122 2122

रोज जीना रोज मरना है सिखाया।
मुफ़लिसी ने पाठ ये अच्छा पढ़ाया।।

दोस्ती का अस्ल मतलब यूँ बताया।
हर कदम उसने सही रस्ता दिखाया।।

बाँटना दुख सुख कभी मुझको न आया।
हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया।।

ख़ुद ब ख़ुद इक दिन इशारे से बुलाया।
प्यार अपना इस तरह उसने जताया।।

वो भरोसा प्यार में करता कभी तो।
क्यो मुझे हर बार उसने आज़माया।।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 14, 2017 at 8:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल "जिन्दगी इक अज़ब पहेली है"

2122 1212 22

ख़ुद उलझती है ख़ुद सुलझती है।

जिन्दगी इक अज़ब पहेली है।।



साथ तेरा मुझे मिला जबसे।

जिन्दगी मेरी मुस्कुराती है।।



सब्र करना व भूख से लड़ना।

मुफ़लिसी क्या नहीं सिखाती है।।



मैं बहुत चाहने लगा तुझको।

हर ग़ज़ल मेरी ये बताती है।।



बात कोई चुभे अगर दिल को।

तब ग़ज़ल ख़ुद मुझे बुलाती है।।



दुख घुटन दर्द आह मजबूरी।

ज़िन्दगी की यही कहानी है।।



मुस्कुराती हुई तेरी तस्वीर।

पास मेरे तेरी… Continue

Posted on October 6, 2017 at 2:32pm — 20 Comments

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At 11:48pm on July 7, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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