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surender insan
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vijay nikore commented on surender insan's blog post "दर्द वो इस तरह छुपाता है"
"सुरेन्द्र जी, आपकी गज़ल अच्छी लगी। बधाई।"
Aug 1
gumnaam pithoragarhi commented on surender insan's blog post "दर्द वो इस तरह छुपाता है"
"वाह बहुत खूबसूरत ग़ज़ल .................बधाई ....."
Jul 31
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on surender insan's blog post "दर्द वो इस तरह छुपाता है"
"अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय...बधाई"
Jul 29
Neelam Upadhyaya commented on surender insan's blog post "दर्द वो इस तरह छुपाता है"
"आदरणीय सुरेंद्र इंसान जी, बेहतरीन रचना के  लिए हार्दिक  बधाई ।    "
Jul 27
babitagupta commented on surender insan's blog post "दर्द वो इस तरह छुपाता है"
"वक्त अच्छा बुरा जो आता हैं  कुछ न कुछ तो  सबक सिखा जाता हैं. बेहतरीन पंक्तियाँ,हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।"
Jul 25
Shyam Narain Verma commented on surender insan's blog post "दर्द वो इस तरह छुपाता है"
"बहुत खूब ! इस सुंदर गजल हेतु बधाई स्वीकारें ।"
Jul 25
TEJ VEER SINGH commented on surender insan's blog post "दर्द वो इस तरह छुपाता है"
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेंद्र इंसान जी।बेहतरीन गज़ल। हर समय खूब मुस्कुराता है।दर्द वो इस तरह छुपाता है।।"
Jul 25
Samar kabeer commented on surender insan's blog post "दर्द वो इस तरह छुपाता है"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Jul 25
surender insan posted a blog post

"दर्द वो इस तरह छुपाता है"

2122 1212 22हर समय खूब मुस्कुराता है। दर्द वो इस तरह छुपाता है।।वक़्त अच्छा बुरा जो आता है। कुछ न कुछ तो सबक सिखाता है।।दोस्त सच्चा उसे कहा जाता। साथ जो हर कदम निभाता है।।वो सकूँ से कभी नहीं रहता। दिल किसी का भी जो दुखाता है।।एक दिन ख़ुद मज़ाक बनता वो। जो किसी का मज़ाक उड़ाता है।।अब यकीं किस तरह करूँ उस पर। जो न वादा कभी निभाता है।।दर्द अल्फाज में अगर ढाले। शाइरी में निख़ार आता है।।मौलिक व अप्रकाशितSee More
Jul 25
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"2122 1212 22 दोस्त दौलत भले कमानी है। पर न इज्ज़त कभी गँवानी है।। ये ज़माना रखे हमेशा याद। इस तरह ज़िन्दगी बितानी है।। ज़ह्र को ज़ह्र मारता अक्सर। ये कहावत बहुत पुरानी है।। गर मिले वक़्त तो मिलो मुझको। बात दिल की तुम्हें बतानी है।। क्या करें आप ही बताये…"
Jun 28
surender insan replied to Rana Pratap Singh's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94 सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आपकी मेहनत को तहेदिल से सलाम करता हूं । बहुत बहुत बधाई हो जी । संकलन में मेरी ग़ज़ल को जगह देने के लिए बहुत बहुत आभार जी।"
Apr 30
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदाब आदरणीय समर कबीर साहब जी। बहुत बहुत शुक्रिया जी आपका। "
Apr 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"भाई नवीन जी नमस्कार। ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है ।इसे थोड़ा समय देंगे तो और निखर जाएगी।  बहुत बहुत बधाई हो।"
Apr 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय मोहन जी सादर नमन। ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है। पर अभी बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। वाक्य रचना पर ध्यान दे। सादर।"
Apr 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीया मंजीत जी सादर नमन। ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है जी। बहुत बहुत बधाई हो। गुणीजनों की बातों पे गौर करे जी। लगातार प्रयास करती रहे खुद ब खुद निख़ार आएगा।"
Apr 28
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"आदरणीय लक्ष्मण जी सादर नमन। बहुत ही अच्छी गजल आपने कही शेर दर शेर मुबारकबाद पेश करता हूं। मेरे ख्याल से इस ग़ज़ल का सबसे अच्छा शेर यह है। मिलो न हँस के जमाना खराब है साहबभले ही बात हो झूठी उछल तो सकती है।"
Apr 28

Profile Information

Gender
Male
City State
sirsa (haryana)
Native Place
india
Profession
self work
About me
a simple parson. give respect take respect .always be happy & let others be happy.

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"दर्द वो इस तरह छुपाता है"

2122 1212 22

हर समय खूब मुस्कुराता है।

दर्द वो इस तरह छुपाता है।।

वक़्त अच्छा बुरा जो आता है।

कुछ न कुछ तो सबक सिखाता है।।

दोस्त सच्चा उसे कहा जाता।

साथ जो हर कदम निभाता है।।

वो सकूँ से कभी नहीं रहता।

दिल किसी का भी जो दुखाता है।।

एक दिन ख़ुद मज़ाक बनता वो।

जो किसी का मज़ाक उड़ाता…

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Posted on July 24, 2018 at 9:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल "एक दिन मिल जायेगा सब ख़ाक में"

*२१२२ २१२२ २१२*

हर जगह रहता है अपनी धाक में।

ख़ासियत देखी ये उस चालाक में।।

चीज कोई मुफ़्त में कैसे मिले।

लोग रहते आजकल इस ताक में।।

आदमी करता गुमाँ किस बात का।

एक दिन मिल जायेगा सब ख़ाक में।।

ख़ुद-ब-ख़ुद सम्मान मिलता आजकल।

आप हो जब कीमती पोशाक में।।

जब न मोबाइल किसी के पास था।

लोग लिखते हाल अपना डाक में।।

डर हमेशा उस ख़ुदा से ही लगे।

मैं नहीं रहता किसी की धाक…

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Posted on March 28, 2018 at 3:00pm — 14 Comments

ग़ज़ल "कहता हूँ अब ग़ज़ल मैं उसे सोचते हुए"

  

221 2121 1221 212

इंसानियत के तंग सभी दायरे हुए।

दिखते नहीं हैं लोग जमीं से जुड़े हुए।।

जो सुर्खियों में रहते हमेशा बने हुए।

रहते है लोग वो ही ज़ियादा डरे हुए।।

आहट हुई जरा सी बुरे वक़्त की तभी।

कुछ साँप आस्तीन से निकले छुपे हुए।।

वो इस लिये खड़ा है बुलन्दी पे आज भी।

डरता नहीं है झूठ कोई बोलते हुए।।

ख्वाबों में देखता हूँ जिसे रोज रात में।

कहता हूँ अब ग़ज़ल मैं उसे सोचते…

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Posted on March 11, 2018 at 4:00pm — 28 Comments

ग़ज़ल " ग़मो का इक समंदर टूटता है।"

1222 1222 122

ग़मो का इक समंदर टूटता है।

किसी का भी अगर घर टूटता है।।

मिले धोख़े पे धोख़ा जब किसी को।

तो वो अंदर ही अंदर टूटता है।।

सँभलता मुश्किलों से आदमी फिर।

भरोसा जब कहीं पर टूटता है।।

करो कोशिश भले तुम लाख यारो।

न आईने से पत्थर टूटता है।।

उजड़ते है परिंदों के कई घर।

कभी कोई भी खण्डहर टूटता है।।

यही तक़दीर में शायद लिखा हो।

जो देखूं ख़्वाब अक्सर टूटता है।।

ग़ज़ल…

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Posted on January 24, 2018 at 9:30am — 10 Comments

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At 11:48pm on July 7, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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