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surender insan
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surender insan commented on SALIM RAZA REWA's blog post सबसे बड़ी रदीफ़ में ग़ज़ल का प्रयास, सिर्फ रदीफ़ और क़ाफ़िया में पूरी ग़ज़ल - सलीम रज़ा रीवा
"बिना समझे न ढूंढो ऐब मेरी शायरी में तुम। सुख़न की बात करनी हो तो मेरे पास आ जाओ।। वाह जी वाह बहुत उम्दा जी। बहुत अच्छी ग़ज़ल के लिए दिली मुबारक़ बाद कबूल करे जी। आदरणीय एक बात जानकारी के लिए पूछ रहा हूँ जी। रदीफ़ के तीन प्रकार अभी तक पता है। छोटी…"
2 hours ago
surender insan posted a blog post

ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"

2122 2122 2122रोज जीना रोज मरना है सिखाया।मुफ़लिसी ने पाठ ये अच्छा पढ़ाया।।दोस्ती का अस्ल मतलब यूँ बताया।हर कदम उसने सही रस्ता दिखाया।।बाँटना दुख सुख कभी मुझको न आया।हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया।।ख़ुद ब ख़ुद इक दिन इशारे से बुलाया।प्यार अपना इस तरह उसने जताया।।वो भरोसा प्यार में करता कभी तो।क्यो मुझे हर बार उसने आज़माया।।मौलिक व अप्रकाशितSee More
Wednesday
surender insan commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"
"मोहतरम समर कबीर साहब आदाब। बहुत बहुत आभार आपका जी आपके सुझाव अनुसार बदलाव करूंगा जी। बहुत बहुत शुक्रिया जी सादर नमन जी।"
Monday
surender insan commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"
"आदरणीय salim raza rewa जी बहुत बहुत आभार आपका ।सादर नमन जी।"
Monday
surender insan commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"
"आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी बहुत बहुत आभार जी ।सादर नमन जी।"
Monday
Samar kabeer commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । पहले मतले का सानी मिसरा अगर यूँ कर लें तो कथ्य और रवानी बढ़ जायेगी:- 'मुफ़लिसी ने पाठ ये अच्छा पढ़ाया'"
Sunday
SALIM RAZA REWA commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"
"ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई."
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"
"बहुत बढ़िया प्रस्तुति। हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेन्द्र इंसान जी।"
Sunday
surender insan commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"
"जी आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी बहुत बहुत आभार जी ।सादर नमन जी।"
Sunday
Mohammed Arif commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"
"बाँटना दुख सुख कभी मुझको न आया। हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया। बहुत ही सच्चा शे'र है । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Sunday
surender insan commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "जिन्दगी इक अज़ब पहेली है"
"जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी। बहुत बहुत आभार जी।"
Saturday
surender insan commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "जिन्दगी इक अज़ब पहेली है"
"जी बेहद शुक्रिया आपका दिनेश भाई जी। बहुत बहुत आभार जी।"
Saturday
surender insan commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "जिन्दगी इक अज़ब पहेली है"
"जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय नीरज जी। बहुत बहुत आभार जी।"
Saturday
surender insan commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "जिन्दगी इक अज़ब पहेली है"
"जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीया राजेश दीदी जी। बहुत बहुत आभार जी।"
Saturday
surender insan commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "जिन्दगी इक अज़ब पहेली है"
"जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय सालिम राजा रेवा जी। बहुत बहुत आभार जी।"
Saturday
surender insan commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "जिन्दगी इक अज़ब पहेली है"
"जी बेहद शुक्रिया आपका आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी। बहुत बहुत आभार जी। जी बिल्कुल जी। में अन्य विधाओं कीरचनाए भी पढ़ता हूँ जी आपके कहे अनुसार कोशिश करूंगा जी।"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
sirsa (haryana)
Native Place
india
Profession
self work
About me
a simple parson. give respect take respect .always be happy & let others be happy.

Surender insan's Blog

ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"

2122 2122 2122

रोज जीना रोज मरना है सिखाया।
मुफ़लिसी ने पाठ ये अच्छा पढ़ाया।।

दोस्ती का अस्ल मतलब यूँ बताया।
हर कदम उसने सही रस्ता दिखाया।।

बाँटना दुख सुख कभी मुझको न आया।
हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया।।

ख़ुद ब ख़ुद इक दिन इशारे से बुलाया।
प्यार अपना इस तरह उसने जताया।।

वो भरोसा प्यार में करता कभी तो।
क्यो मुझे हर बार उसने आज़माया।।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 14, 2017 at 8:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल "जिन्दगी इक अज़ब पहेली है"

2122 1212 22

ख़ुद उलझती है ख़ुद सुलझती है।

जिन्दगी इक अज़ब पहेली है।।



साथ तेरा मुझे मिला जबसे।

जिन्दगी मेरी मुस्कुराती है।।



सब्र करना व भूख से लड़ना।

मुफ़लिसी क्या नहीं सिखाती है।।



मैं बहुत चाहने लगा तुझको।

हर ग़ज़ल मेरी ये बताती है।।



बात कोई चुभे अगर दिल को।

तब ग़ज़ल ख़ुद मुझे बुलाती है।।



दुख घुटन दर्द आह मजबूरी।

ज़िन्दगी की यही कहानी है।।



मुस्कुराती हुई तेरी तस्वीर।

पास मेरे तेरी… Continue

Posted on October 6, 2017 at 2:32pm — 20 Comments

ग़ज़ल " जिंदगी से जी भर गया कब का "

2122 1212 22

ज़िन्दगी,जी तो भर गया कब का।
टूट कर मैं बिखर गया कब का ।।

***
इक मुहब्बत का था नशा मुझको।
वो नशा भी उतर गया कब का।।
***
चाहता था तुझे दिल-ओ-जां से।
वक़्त वो तो गुज़र गया कब का।।

***
देख हालत नशे के मारों की।
ख़ुद-ब-ख़ुद वो सुधर गया कब का।।

***
देख कर छल फ़रेब दुनिया के।
एक "इंसान" मर गया कब का।।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on August 9, 2017 at 5:00pm — 16 Comments

ग़ज़ल "दिखाना ख़्वाब यूँ अच्छा नहीं है"

1222 1222 122

दिखाना ख़्वाब यूँ अच्छा नहीं है।

फ़क़त बातों से कुछ होता नहीं है।।



***

बुरा अंजाम होता है बुरे का।

ख़ुदा से कुछ भी तो छुपता नहीं है।।



***

कई धोख़े मिले हैं जिंदगी में।

किसी पर अब यकीं होता नहीं है।।



***

मुहब्बत में मुझे इक बेवफा ने।

दिया वो जख़्म जो भरता नहीं है।।



***

यकीं कोई न अब उस पर करेगा।

वो अपनी बात पर टिकता नहीं है।।



***

उसे है याद बातें सब पुरानी।

मगर अब गाँव वो… Continue

Posted on August 3, 2017 at 9:54am — 21 Comments

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At 11:48pm on July 7, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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