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surender insan
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Neeraj Mishra "प्रेम" commented on surender insan's blog post "एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"
"क्या बात है बेहद लाजवाब ग़ज़ल के लिए  बहुत बहुत मुबारकबाद"
Tuesday
surender insan commented on surender insan's blog post ग़ज़ल " ग़मो का इक समंदर टूटता है।"
"आदरणीय लक्ष्मण जी, आदरणीय बृजेश कुमार जी, आदरणीय शेेेख शहजाद उस्मानी, आदरणीय सालिम रााजा रेवा जी, आदरणीय  विजय निकोर जी, आदरणीय सतविंद्र  भाई जी, आदरणीय अमोदजी, आदरणीय महेंद्र कुमार जी और आदरणीय…"
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surender insan commented on TEJ VEER SINGH's blog post घुटन – लघुकथा  -
"सोचने पर मजबूर करती बहुत अच्छी रचना की आपने ।बहुत बहुत बधाई हो।"
Feb 3
surender insan commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post ग़ज़ल इस्लाह के लिए :मनोज अहसास
"भाई मनोज जी आदाब। ग़ज़ल का बहुत अच्छा प्रयास हुआ है बधाई स्वीकार करे जी।  मतले में जो की जगह तो करे तो कैसा रहेगा? गुणीजनों की राय लीजिये इस पर। हमनें यूँ ज़िन्दगानी का नक्शा बदल लियादेखा तुझे तो दूर से रस्ता बदल लिया मक़्ता का सानी अभी मेहनत…"
Feb 3
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on surender insan's blog post ग़ज़ल " ग़मो का इक समंदर टूटता है।"
"भाई सुरेन्द्र जी , ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई."
Jan 29
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"भाई अजय जी बहुत बढ़िया ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई हो जी।"
Jan 27
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on surender insan's blog post ग़ज़ल " ग़मो का इक समंदर टूटता है।"
"वाह आदरणीय क्या खूब ग़ज़ल कही...शानदार"
Jan 26
Sheikh Shahzad Usmani commented on surender insan's blog post ग़ज़ल " ग़मो का इक समंदर टूटता है।"
"सच्ची बात। बहुत बढ़िया पेशकश के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेन्द्र इंसान जी।"
Jan 26
vijay nikore commented on surender insan's blog post ग़ज़ल " ग़मो का इक समंदर टूटता है।"
"गज़ल में भाव बहुत अच्छे चुने हैं। हार्दिक बधाई।"
Jan 25
SALIM RAZA REWA commented on surender insan's blog post ग़ज़ल " ग़मो का इक समंदर टूटता है।"
"भाई सुरेन्द्र जी ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई."
Jan 24
सतविन्द्र कुमार commented on surender insan's blog post ग़ज़ल " ग़मो का इक समंदर टूटता है।"
"उम्दा अशआर कहे हैं। हार्दिक बधाई आ सुरेन्द्र भाई"
Jan 24
amod srivastav (bindouri) commented on surender insan's blog post ग़ज़ल " ग़मो का इक समंदर टूटता है।"
"Wahhh बहुत उम्दा भाई। सादर बधाई"
Jan 24
Mahendra Kumar commented on surender insan's blog post ग़ज़ल " ग़मो का इक समंदर टूटता है।"
"बढ़िया ग़ज़ल कही है आ. सुरेन्द्र जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jan 24
Mohammed Arif commented on surender insan's blog post ग़ज़ल " ग़मो का इक समंदर टूटता है।"
"आदरणीय सुरेंद्र जी आदाब,                बहुत  दर्द उकेरा आपने अच्छे अश'आरों में । हार्दिक  बधाई स्वीकार करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Jan 24
surender insan commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अक़्ल पर ताले (लघुकथा)
"नयी पीढ़ी को आगाह करती बहुत अच्छी रचना की आपने। बधाई हो जी।"
Jan 24
surender insan commented on TEJ VEER SINGH's blog post बसंत - लघुकथा –
"बहुत अच्छी सार्थक रचना जी।बहुत बहुत बधाई हो जी।"
Jan 24

Profile Information

Gender
Male
City State
sirsa (haryana)
Native Place
india
Profession
self work
About me
a simple parson. give respect take respect .always be happy & let others be happy.

Surender insan's Blog

ग़ज़ल " ग़मो का इक समंदर टूटता है।"

1222 1222 122

ग़मो का इक समंदर टूटता है।

किसी का भी अगर घर टूटता है।।

मिले धोख़े पे धोख़ा जब किसी को।

तो वो अंदर ही अंदर टूटता है।।

सँभलता मुश्किलों से आदमी फिर।

भरोसा जब कहीं पर टूटता है।।

करो कोशिश भले तुम लाख यारो।

न आईने से पत्थर टूटता है।।

उजड़ते है परिंदों के कई घर।

कभी कोई भी खण्डहर टूटता है।।

यही तक़दीर में शायद लिखा हो।

जो देखूं ख़्वाब अक्सर टूटता है।।

ग़ज़ल…

Continue

Posted on January 24, 2018 at 9:30am — 10 Comments

ग़ज़ल "ऐसे भी माहौल बनाया जाता है"

22 22 22 22 22 2



रिश्ता जो इक बार बनाया जाता है।

वो फिर सारी उम्र निभाया जाता है।।

ऐसे भी माहौल बनाया जाता है।

कुछ होता कुछ और दिखाया जाता है।।

ऐसा देखा यार सियासत में अक्सर।

इक दूजे को चोर बताया जाता है।।

सच हो पाए जो न किसी भी सूरत में।

क्यों अक्सर वो ख़्वाब दिखाया जाता है।।

 रंग बदलते गिरगिट सा कुछ लोग यहाँ।

मतलब हो तो प्यार जताया जाता है।।

ये सच्चाई तो जग जाहिर है यारो।

जो…

Continue

Posted on January 12, 2018 at 2:30pm — 11 Comments

"एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ"

2122 2122 2122

एक क़तरा था समंदर हो गया हूँ।
मैं समय के साथ बेहतर हो गया हूँ।।

कल तलक अपना समझते थे मुझे जो।
उनकी ख़ातिर आज नश्तर हो गया हूँ।।

मैं बयां करता नहीं हूँ दर्द अपना।
सब समझते हैं कि पत्थर हो गया हूँ।।

ज़िन्दगी में हादसे ऐसे हुए कुछ।
मैं जरा सा तल्ख़ तेवर हो गया हूँ।।

जख़्म दिल के तो नहीं अब तक भरे हैं।
हां मगर पहले से बेहतर हो गया हूँ।।


सुरेन्द्र इंसान

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on December 2, 2017 at 1:00pm — 19 Comments

ग़ज़ल "हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया"

2122 2122 2122

रोज जीना रोज मरना है सिखाया।
मुफ़लिसी ने पाठ ये अच्छा पढ़ाया।।

दोस्ती का अस्ल मतलब यूँ बताया।
हर कदम उसने सही रस्ता दिखाया।।

बाँटना दुख सुख कभी मुझको न आया।
हाल-ए-दिल अपना कभी मैं कह न पाया।।

ख़ुद ब ख़ुद इक दिन इशारे से बुलाया।
प्यार अपना इस तरह उसने जताया।।

वो भरोसा प्यार में करता कभी तो।
क्यो मुझे हर बार उसने आज़माया।।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 14, 2017 at 8:30pm — 8 Comments

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At 11:48pm on July 7, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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