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surender insan
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surender insan commented on Manan Kumar singh's blog post बाज़ (लघुकथा)
"वाह वाह वाह वाह बहुत बढ़िया।शानदार ।बहुत बहुत दिली बधाई आपको इस रचना के लिए। "
14 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on surender insan's blog post "गर अदब में नाम की दरकार है"
"वाह जी वाह बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय..."
Oct 4
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on surender insan's blog post "गर अदब में नाम की दरकार है"
"आ. भाई सुरेंद्र जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Oct 4
surender insan commented on surender insan's blog post "गर अदब में नाम की दरकार है"
"जी बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय अजय तिवारी जी। सादर नमन। जी टाइपिंग की ग़लतिया सुधार दी है और एक ङो मिसरे बदल दिए है। बहुत बहुत आभार आपका।"
Oct 2
surender insan posted a blog post

"गर अदब में नाम की दरकार है"

2122 2122 212गर अदब में नाम की दरकार है। तो ग़ज़ल कोई नयी दरकार है।।तू किसी को देख ले ग़मगीन तो। आँख में तेरी नमी दरकार है।।प्यार करते हो मुझे तुम भी अगर इक नज़र चाहत भरी दरकार है।।एक दूजे पे हमेशा हो यकीं। दोस्ती में बस यही दरकार है।।ये अँधेरा दूर होगा एक दिन। इल्म की बस रौशनी दरकार है।।बात सच्ची ही कहें हर शेर में। शाइरी में ये रही दरकार है।।तुम बढ़ा लो सोच का अब दायरा। यह बदलते वक्त की दरकार है।।अपने अंदर झाँकना है गर तुम्हें। एक गहरी ख़ामुशी दरकार है।।दर्द-ए-दिल में दे सके सबको सुकूँ। कर सकूँ वो…See More
Oct 2
Samar kabeer commented on surender insan's blog post "गर अदब में नाम की दरकार है"
"जनाब सुरेन्द्र इंसान जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें,बाक़ी जनाब अजय तिवारी जी बता ही चुके हैं ।"
Oct 2
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on surender insan's blog post "गर अदब में नाम की दरकार है"
"आद0 सुरेन्दर इंसान जी सादर अभिवादन। अच्छे अशआर बन पड़े हैं। कुछेक जगह कुछ बदलाव से और बेहतर हो जाएगी ग़ज़ल, इस बाबत गुणीजनों की इस्लाह को संज्ञान में लेना होगा। बधाई स्वीकार कीजिये "
Oct 2
Ajay Tiwari commented on surender insan's blog post "गर अदब में नाम की दरकार है"
"आदरणीय सुरेन्द्र जी, अच्छे अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई. प्रेम सच्चा और हो एतबार भी > प्रेम भी सच्चा हो और हो एतबार  बात सच्ची ही कहे हर शेर में - कहे >कहें  दर्द-के-दिल में दे सके सबको सुकूँ > दर्द-ए-दिल में दे सके…"
Oct 1
Ajay Tiwari commented on surender insan's blog post "गर अदब में नाम की दरकार है"
"आदरणीय सुरेन्द्र जी, अच्छे अशआर हुए हैं. प्रेम सच्चा और हो एतबार भी > प्रेम भी सच्चा हो और हो एतबार  बात सच्ची ही कहे हर शेर में - कहे >कहें  दर्द-के-दिल में दे सके सबको सुकूँ > दर्द-ए-दिल में दे सके सबको…"
Oct 1
surender insan posted a blog post

"गर अदब में नाम की दरकार है"

2122 2122 212गर अदब में नाम की दरकार है। तो ग़ज़ल कोई नयी दरकार है।।तू किसी को देख ले ग़मगीन तो। आँख में तेरी नमी दरकार है।।प्यार करते हो मुझे तुम भी अगर इक नज़र चाहत भरी दरकार है।।एक दूजे पे हमेशा हो यकीं। दोस्ती में बस यही दरकार है।।ये अँधेरा दूर होगा एक दिन। इल्म की बस रौशनी दरकार है।।बात सच्ची ही कहें हर शेर में। शाइरी में ये रही दरकार है।।तुम बढ़ा लो सोच का अब दायरा। यह बदलते वक्त की दरकार है।।अपने अंदर झाँकना है गर तुम्हें। एक गहरी ख़ामुशी दरकार है।।दर्द-ए-दिल में दे सके सबको सुकूँ। कर सकूँ वो…See More
Oct 1
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह जी , अच्छी ग़ज़ल हुई है।  बधाई स्वीकार करें  । सादर।"
Aug 25
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
"वाह वाह बहुत कमाल की ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान साहब, बेहतरीन मतले के साथ बहुत अच्छे अशआर कहे है आपने. बहुत बहुत बधाई आपको। सादर नमन जी "
Aug 25
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
"    आदरणीय गंगाधर जी आदाब,                       ग़ज़ल का  बहुत ही बेहतरीन  प्रयास। मुबारकबाद क़ुबूल करें जी। "
Aug 25
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
"भाई नवीन जी नमन। ग़ज़ल का प्रयास बहुत बेहतरीन है। मुबारकबाद कबूल करे। मोहतरम समर कबीर साहब की बातों पर गौर करिएगा। सादर जी।"
Aug 25
surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
"   मोहतरम समर कबीर साहब आदाब। अपनी महफ़िल में हमें अब वो बुलाते भी नहीं किसलिये हम से ख़फ़ा हैं ये बताते भी नहीं *वाह वाह वाह लाजवाब मतला जी* दनदनाते हुए करते हैं गुनह और उसपरकितने बेशर्म हैं आँखों को झुकाते भी नहीं *वाह वाह बहुत अच्छा है…"
Aug 25
vijay nikore commented on surender insan's blog post "दर्द वो इस तरह छुपाता है"
"सुरेन्द्र जी, आपकी गज़ल अच्छी लगी। बधाई।"
Aug 1

Profile Information

Gender
Male
City State
sirsa (haryana)
Native Place
india
Profession
self work
About me
a simple parson. give respect take respect .always be happy & let others be happy.

Surender insan's Blog

"गर अदब में नाम की दरकार है"

2122 2122 212

गर अदब में नाम की दरकार है।

तो ग़ज़ल कोई नयी दरकार है।।

तू किसी को देख ले ग़मगीन तो।

आँख में तेरी नमी दरकार है।।

प्यार करते हो मुझे तुम भी अगर

इक नज़र चाहत भरी दरकार है।।



एक दूजे पे हमेशा हो यकीं।

दोस्ती में बस यही दरकार है।।

ये अँधेरा दूर होगा एक दिन।

इल्म की बस रौशनी दरकार है।।

बात सच्ची ही कहें हर शेर में।

शाइरी में ये रही दरकार है।।

तुम बढ़ा…

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Posted on October 1, 2018 at 12:00pm — 6 Comments

"दर्द वो इस तरह छुपाता है"

2122 1212 22

हर समय खूब मुस्कुराता है।

दर्द वो इस तरह छुपाता है।।

वक़्त अच्छा बुरा जो आता है।

कुछ न कुछ तो सबक सिखाता है।।

दोस्त सच्चा उसे कहा जाता।

साथ जो हर कदम निभाता है।।

वो सकूँ से कभी नहीं रहता।

दिल किसी का भी जो दुखाता है।।

एक दिन ख़ुद मज़ाक बनता वो।

जो किसी का मज़ाक उड़ाता…

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Posted on July 24, 2018 at 9:00pm — 8 Comments

ग़ज़ल "एक दिन मिल जायेगा सब ख़ाक में"

*२१२२ २१२२ २१२*

हर जगह रहता है अपनी धाक में।

ख़ासियत देखी ये उस चालाक में।।

चीज कोई मुफ़्त में कैसे मिले।

लोग रहते आजकल इस ताक में।।

आदमी करता गुमाँ किस बात का।

एक दिन मिल जायेगा सब ख़ाक में।।

ख़ुद-ब-ख़ुद सम्मान मिलता आजकल।

आप हो जब कीमती पोशाक में।।

जब न मोबाइल किसी के पास था।

लोग लिखते हाल अपना डाक में।।

डर हमेशा उस ख़ुदा से ही लगे।

मैं नहीं रहता किसी की धाक…

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Posted on March 28, 2018 at 3:00pm — 14 Comments

ग़ज़ल "कहता हूँ अब ग़ज़ल मैं उसे सोचते हुए"

  

221 2121 1221 212

इंसानियत के तंग सभी दायरे हुए।

दिखते नहीं हैं लोग जमीं से जुड़े हुए।।

जो सुर्खियों में रहते हमेशा बने हुए।

रहते है लोग वो ही ज़ियादा डरे हुए।।

आहट हुई जरा सी बुरे वक़्त की तभी।

कुछ साँप आस्तीन से निकले छुपे हुए।।

वो इस लिये खड़ा है बुलन्दी पे आज भी।

डरता नहीं है झूठ कोई बोलते हुए।।

ख्वाबों में देखता हूँ जिसे रोज रात में।

कहता हूँ अब ग़ज़ल मैं उसे सोचते…

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Posted on March 11, 2018 at 4:00pm — 28 Comments

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At 11:48pm on July 7, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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