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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आ. अनीता जी, सुंदर रचना हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आ. भाई नादिर खान जी, प्रदत्त विषय पर सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
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"आ. भाई आरिफ जी, प्रदत्त विषय पर सानदार कटाक्क्षिकाये हुयी हैं । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
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"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"सम्मान ( दोहे ) पाती नित घर गाँव में, जहाँ नार सम्मानकरें वहीं पर वास आ, संत कहें भगवान।१। सदा बुजुर्गों  का  करे, घर - बाहर सम्माननिर्धन होकर भी उन्हें, हर सुख है आसान।२। रिश्तों का सम्मान कर, धन का लालच छोड़ये ही सुख  की  रीत…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार ।"
9 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई फूल सिंह जी, सादर आभार ।"
18 hours ago
PHOOL SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"सुंदर ग़ज़ल की प्रस्तुति, बधाई स्वीकारे "
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post दूरदृष्टि - लघुकथा
"आ. भाई वीरेंद्र जी अच्छी कथा हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल: आइना बन सच सदा सबको दिखाता कौन है
"आ. भाई दयाराम जी, गजल का अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई । दीप अंधेरी डगर में अब जलाता कौन है यह मिसरा लय में नहीं है देखियेगा । शेष शुभ शुभ.."
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (चलो धुंआ तो उठा, इस गरीबख़ाने से)
"आ. भाई बलराम जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
Balram Dhakar commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जलूँ  कैसे  तुम्हारे बिन - लक्ष्मण धामी"मुसाफिर" ( गजल )
"आदरणीय लक्ष्मण जी, सादर अभिवादन। बहुत खूबसूरत ग़ज़ल, बधाई स्वीकार करें। सादर।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई राज नवादवी जी, गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए आभार ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आ. भाई सुशील जी, सुंदर कविता हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
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राज़ नवादवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आदाब। सुंदर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद। सादर। "
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८१
"आ. भाई राज नवादवी जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अजय गुप्ता's blog post ग़ज़ल (छिपा बैठा चितेरा है)
"आ. भाई अजय जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई । बाकी त्रुटियों के विषय में आ. समर जी बता ही चुके हैं । शेष शुभ शुभ..."
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

छलकते देख कर आँसू ग़मों की प्यास बढ़ जायेकभी ऐसा भी मौसम हो चुभन की आस बढ़ जाये।१।लगे ठोकर किसी को भी न चाहे घाव खुद को होमगर देखें तो दिल में दर्द का अहसास बढ़ जाये।२।भला कब चाहते  हैं  ये  जिन्हें  हम  शूल कहते हैंमिटे पतझड़ चमन का साथ ही मधुमास बढ़ जाये।३।लगाई नफरतों  ने  है  यहाँ  हर सिम्त ही बंदिशघुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये।४।रखो ये ज्ञान भी यारो जो चाहत घुड़सवारी की नहीं घोड़ा सँभलता है अगर जो रास बढ़ जाये।५।चलो माना तनिक बारिश जरूरी तो है सागर कोमगर तपते मरुस्थल भी कभी चौमास बढ़ जाये।६।मौलिक अप्रकाशितलक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'१२ दिसम्बर १८****See More
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (प्यार का हर दस्तूर निभाना पड़ता है)
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Wednesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

छलकते देख कर आँसू ग़मों की प्यास बढ़ जाये

कभी ऐसा भी मौसम हो चुभन की आस बढ़ जाये।१।



लगे ठोकर किसी को भी न चाहे घाव खुद को हो

मगर देखें तो दिल में दर्द का अहसास बढ़ जाये।२।



भला कब चाहते  हैं  ये  जिन्हें  हम  शूल कहते हैं

मिटे पतझड़ चमन का साथ ही मधुमास बढ़ जाये।३।



लगाई नफरतों  ने  है  यहाँ  हर सिम्त ही बंदिश

घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये।४।



रखो ये ज्ञान भी यारो जो चाहत घुड़सवारी की

नहीं घोड़ा सँभलता है अगर जो…

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Posted on December 12, 2018 at 12:36pm — 6 Comments

ओढ़े बुढ़ापा  जी  रहा  बचपन कोई न हो - ( गजल)- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१ २१२१/२२२/१२१२



घर में किसी के और अब अनबन कोई न हो

सूना  पड़ा  हमेशा   ही  आगन  कोई   न  हो।१।



कुछ  तो  सहारा  दो  उसे  हँसने  जरा लगे

होकर निराश  घुट  रहा  जीवन  कोई न हो।२।



झुकना पड़े तनिक तो खुद झुकना सदा ही तुम

यारो  मिलन  की  राह  में  उलझन  कोई न हो।३।



आओ बनायें आज फिर ऐसा समाज हम

ओढ़े बुढ़ापा  जी  रहा  बचपन कोई न हो।४।



जल जाएँ…

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Posted on December 4, 2018 at 12:22pm — 14 Comments

अपना तो फर्ज एक है तदबीर कर गुजर - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" ( गजल )

221   2121   1221   212 

तुमको खबर है खूब खतावार कौन है

दो सोच कर सजाएँ गुनहगार कौन है।१।



यारो सिवा वो बात के करता ही कुछ नहीं

हाकिम से इसके बाद भी बे-ज़ार कौन है।२।



हम तो रहे जहीन कि जिस्मों पे मर मिटे

पहली नज़र का बोल तेरा प्यार कौन है।३।



सबसे बड़ा सबूत है मुंसिफ का फैसला

खाके कसम वफा की वफादार कौन है।४।



अपना तो फर्ज एक है तदबीर कर…

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Posted on November 25, 2018 at 1:14pm — 6 Comments

हुस्न तेरी आशिकी से कौन रखता दूरियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" ( गजल )

२१२२/ २१२२/ २१२२/२१२

आप कहते पंछियों के , 'हमने पर कतरे नहीं'

आँधियों के सामने फिर क्यों भला ठहरे नहीं।१।



जो भी देखा उस पे उँगली झट उठा देता है तू

क्यों कहा करता जमाने ख्वाब पर पहरे नहीं।२।



एक जुगनू ही बहुत है वक्त की इस धुंध में

साथ देने  चाँद  सूरज  गर  यहाँ उतरे नहीं।३।



आईना वो बनके  चल  तू  पत्थरों के शहर में

जिन्दगी की शक्ल जिसमें टूटकर बिखरे…

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Posted on November 16, 2018 at 7:34pm — 8 Comments

Comment Wall (11 comments)

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At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
At 5:20pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शुक्रिया लक्ष्मण जी
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

At 4:26pm on April 2, 2015, gumnaam pithoragarhi said…
लक्ष्मण धामी जी नमस्कार शुक्रिया आपने मुझे ये सम्मान दिया क्या मैं आपसे बात कर सकता हूँ यदि आप चाहें तो ................ मेरा नंबर ये है ,,,,,,,,,,7579 100213.........क्या आप अपना नंबर देंगे ?
At 10:37pm on February 17, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई लक्ष्मण धामीजी, यदि संभव हो तो 18 फरवरी को भी भेंट हो सकती है. मैं 18 फरवरी को भी प्रगति मैदान के पुस्तक मेले में उपस्थित रहूँगा.
शुभ-शुभ

At 6:34am on July 9, 2014, gumnaam pithoragarhi said…
माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना
sir main pithoragarh se hoon achchha laga ki aap bhi dharchula se hain ............................... ek baar fir badhai ,,,,,,,,,
At 2:53pm on July 8, 2014, Sushil Sarna said…

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी माह के सक्रिय सदस्य के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामना 

At 2:27pm on July 8, 2014, Nilesh Shevgaonkar said…

बधाई 

At 2:21pm on July 8, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन
 
 
 

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