For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
Share on Facebook MySpace

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Friends

  • Om Parkash Sharma
  • Aazi Tamaam
  • Om Prakash Agrawal
  • AMAN SINHA
  • सालिक गणवीर
  • रवि भसीन 'शाहिद'
  • Pratibha Pandey
  • babita garg
  • Ajay Tiwari
  • बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
  • amod shrivastav (bindouri)
  • TEJ VEER SINGH
  • Samar kabeer
  • Rahul Dangi Panchal
  • harivallabh sharma
 

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनसुने अनकहे के बीच
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
May 24

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस ध्यान खींचते है.  हार्दिक बधाई    लेकिन आपने मिसरों का विन्यास तो दिया ही नहीं है. वस्तुतः, आपकी गजल का मिसरा   २२ १२१२ ११२२…"
May 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
May 11
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
May 11
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
Apr 26
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Apr 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन  शहादत  के  लिए।।*कर रहे ख़ून सभी रोज़ ही दौलत के लिएनेकियाँ तोल रहा कौन क़यामत के लिए।।*कर्म से मोड़ के मुँह हाल ये खुद का है कियादोष औरों को न…"
Apr 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। दोहों पर आपकी विस्तृत टिप्पणी और सुझाव के लिए हार्दिक आभार।  निश्चित तौर पर दोहे कमजोर और चित्र की मूल भावना से इतर हो गये हैं। इसका कारण यह भी है कि इनको समय नहीं दे पाया। मैं यह सोच रहा था कि पिछले माह की तरह ही…"
Apr 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Apr 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्रानुरूपसुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Apr 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चिचानुरूप उत्तम दोहावली हुई है। पर्यावरण, युद्ध के कारण गैस बाधित आपूर्ति और लोगो का पुनः लकड़ी और कंडे जैसे संसाधनों की और लौटने की विवशता को बखुबी उकेरा है आपने। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
Apr 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहा छंद********आग बुझाने पेट की, जूझ रहा दिन-रातबुरे किये  हैं  युद्ध ने, गैस  बिना हालात।।*लकड़ी ढोता आग को, पहुँचा हर घर गैसहाल   बिगाड़े   युद्ध  से,  पूँजीवादी  तैस।।*सबको प्यारी साइकिल, ढोने को…"
Apr 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन"
Apr 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Mar 3

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

दो गजलें- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

(एक)

२१२/२१२/२१२/२१२



जब अंधेरों के आंगन उजाले गये

न्याय के भी बदल रोज पाले गये।१।

*

पांत से नीच कह जब निकाले गये

मस्जिदें उठ गयीं सब शिवाले गये।२।

*

झूठ को ताज देकर जगत में सभी

सत्य दुत्कार  घर  से निकाले गये।३।

*

यूं सियासत ने सपने दिखाये हमें

हाथ आये थे जो भी निवाले गये।४।

*

क्या कहा सांकलों द्वार के कान में

चाबियां  रह  गयीं  और  ताले गये।५।

*

होना आसान था ज़िन्दगी का सफर

साथ…

Continue

Posted on November 4, 2026 at 5:30pm

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२

***

पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की

साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१।

*

कहने को  आयी  देश  में  इक्कीसवीं सदी

होली पे भाँग चढ़ती है फिर भी खयाल की।२।

*

कहने को पर्व  रंग  का, मस्ती मजाक का

पड़ती मगर है इस पे भी छाया बवाल की।३।

*

रति के बदलते भाव ने बदली कशिश तभी

साजन को देख बढ़ती न रंगत वो गाल की।४।

*

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े

टेढ़ी करो न  रोष  में  रेखा को भाल की।५।…

Continue

Posted on March 3, 2026 at 7:30am

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में

आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१।

*

अवसर समानता का कहे सम्विधान तो

पर  लोकतंत्र  व्यस्त  हुआ  भेदभाव में।२।

*

करना था दफ़्न देश ने जिस जातिवाद को

फिर से जिला  दिया  है  उसे  ताव-ताव में।३।

*

खतरा नहीं है घाव से मरहम से है मगर

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में।४।

*

सम्पन्न देश हो न हो इतना तो हो मगर

जीवन…

Continue

Posted on February 14, 2026 at 5:09pm — 2 Comments

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२

******

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये

उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१।

*

गुर्बत हटेगी बोल के कुर्सी जिन्हें मिली

उनको गरीब लोग ही जल-पान हो गये।२।

*

घर में बहार नल से जो आयी गरीब के

पनघट हर एक गाँव  के वीरान हो गये।३।

*

भारी हुए जो उनके ये व्यवहार कर्म पर

सारे ही फर्ज, कौम को अहसान हो गये।४।

*

हाथों अपढ़ के देखते शासन की डोर है

पढ़ लिख गये जो देश में दरवान हो…

Continue

Posted on February 7, 2026 at 6:23am — 1 Comment

Comment Wall (18 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 9:49pm on October 7, 2025,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

At 10:59am on January 25, 2023, Anita Bhatnagar said…

सादर आभार आदरणीय 

At 3:37pm on December 21, 2021, KullarSaddik said…

अपने आतिथ्य के लिए धन्यवाद :)

At 8:45am on January 16, 2021, Aazi Tamaam said…

मुसाफिर सर प्रणाम स्वीकार करें आपकी ग़ज़लें दिल छू लेती हैं

At 8:39pm on December 3, 2020,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी 

At 11:39pm on November 22, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

प्रिय भ्राता धामी जी सप्रेम नमन
आपके शब्द सहरा में नखलिस्तान जैसे - हैं

At 8:37am on May 14, 2020, Om Prakash Agrawal said…
आदरणीय
सराहना हेतु सहृदय आभार एवं धन्यवाद
At 4:12pm on May 7, 2020, सालिक गणवीर said…
हौसला अफजाई के लिए आपका ममनून हूँ आदरणीय
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनसुने अनकहे के बीच
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
Wednesday
sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service