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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Page

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Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दिल्ली जलती है जलने दे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"//कब कहता हूँ आम आदमी मुझको अपने पैसे देहो सकता है तुझ से कुछ तो कुर्वानी में बच्चे दे।।दिल्ली जलती है जलने दे मुझे सियासत करने देमैं हूँ नेता मेरे हित में कुछ तो कुर्सी फलने दे।।// 'बच्चे दे' की जगह कुछ और कहें ।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दिल्ली जलती है जलने दे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर जी, क्या अब ठीक है ..देखियेगा कब कहता हूँ आम आदमी मुझको अपने पैसे देहो सकता है तुझ से कुछ तो कुर्वानी में बच्चे दे।।दिल्ली जलती है जलने दे मुझे सियासत करने देमैं हूँ नेता मेरे हित में कुछ तो कुर्सी फलने दे।।"
4 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दिल्ली जलती है जलने दे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"'दिल्ली जलती है जलने दे मुझे सियासत करने देहो सकता है तुझ से कुछ तो कुर्वानी में अपने दे' नहीं,इसमें 'ऐ' के क़वाफ़ी लेना होंगे,अच्छे दे,पैसे दे,वग़ैरह ।"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दिल्ली जलती है जलने दे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साह वर्धन के लिए आभार ।  क्या मतले को इस प्रकार करने से कवाफी ठीक हो सकती है , मार्गदर्शन कीजिए .. दिल्ली जलती है जलने दे मुझे सियासत करने देहो सकता है तुझ से कुछ तो कुर्वानी में अपने…"
7 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दिल्ली जलती है जलने दे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,लेकिन क़वाफ़ी दुरुस्त नहीं हैं,ग़ौर करें ।"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post जीवन्तता
"आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन । अच्छी प्रस्तुति हुई है । हार्दिक बधाई ।"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जानता हूँ मैं (ग़ज़ल)
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन । उम्दा गजल हुई है। हार्दिक बधाई । "
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दिल्ली जलती है जलने दे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२२२/२२२२/२२२२/२२२ ** दिल्ली जलती है जलने दे मुझे सियासत करने दे हर नेता का ये कहना  है  कुछ तो कुर्सी फलने दे।१। ** ये  लाशों  के  ढेर  हमेशा  सीढ़ी  बन  कर  उभरे  हैं इनको मत रो इन पर मुझको पद की खातिर चढ़ने दे।२। ** खूब सुरक्षा मुझे 'कैट' की मुझ तक आग न आयेगी जलकर इसमें शाम किसी की ढलती है तो ढलने दे।३। ** कोई  गौतम  कोई  अनवर  मेरे  काम  ही आया है देश भक्ति के नाम इन्हें भी अर्पण कुछ तो करने दे।४। ** साँस इसी से राजनीति की सफल तरीके चलती है विष पूरित इन पवनों  को  आजाद हमेशा बहने दे।५। ** मौलिक.अप्रकाशित लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'See More
10 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"//गढ़ गये पुरखे जो मजहब की हमारे बीच में'// इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं:- 'बीच जिसके दफ़्न हैं पुरखे हमारे आज भी' मज़हब का हवाला देने की ज़रूरत नहीं ।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और मार्गदर्शन के लिए आभार ।  इंगित मिसरे को इस प्रकार बदलने से भाव स्पष्ट हो रहा है या नहीं देखिऐगा.. "गढ़ गये पुरखे जो मजहब की हमारे बीच में'"
Monday
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ओबीओ के तरही मिसरे पर दूसरी ग़ज़ल भी अच्छी हुई है,बधाई स्वीकार करें । 'गढ़ गये पुरखे हमारे  बीच  मजहब नाम कीक्यों उसी दीवार को रस्ता समझ बैठे थे हम' इस शैर का भाव स्पष्ट नहीं हुआ,ऊला…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रविभसीन जी, सादर अभिवादन । गजल को समय देने और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई दण्डपाणि जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद । "
Sunday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण भाई, इस सुन्दर ग़ज़ल की रचना पर आपकी ख़िदमत में अपनी दाद और मुबारक़बाद पेश करता हूँ। सादर..."
Sunday
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी।बेहतरीन गज़ल। आस्तीनों  में  छिपे  विषधर  लगे  फुफकारनेयूँ जिन्हें जाँ से अधिक प्यारा समझ बैठे थे हम।४।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post तू ही नहीं मैं भी तो हूँ (ग़ज़ल)
"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । आपके मार्गदर्शन में बहुतकुछ नया सीखने समझने को मिलता है । इस ज्ञानवर्धन के लिए आभार.."
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post झूठी बातें कह कर दिनभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए आभार ।"
Sunday
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post झूठी बातें कह कर दिनभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आ. भाई अजय जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Delhi
Native Place
Dharchaula,uttarakhand
Profession
teaching

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog

दिल्ली जलती है जलने दे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२२२/२२२२/२२२२/२२२

**

दिल्ली जलती है जलने दे मुझे सियासत करने दे

हर नेता का ये कहना  है  कुछ तो कुर्सी फलने दे।१।

**

ये  लाशों  के  ढेर  हमेशा  सीढ़ी  बन  कर  उभरे  हैं

इनको मत रो इन पर मुझको पद की खातिर चढ़ने दे।२।

**

खूब सुरक्षा मुझे 'कैट' की मुझ तक आग न आयेगी

जलकर इसमें शाम किसी की ढलती है तो ढलने दे।३।

**

कोई  गौतम  कोई  अनवर  मेरे  काम  ही आया है

देश भक्ति के नाम…

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Posted on February 28, 2020 at 8:43am — 5 Comments

तरही गजल - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

2122 / 2122 / 2122 /  212

**

उनका वादा राम का  वादा  समझ बैठे थे हम

हर सियासतदान को सच्चा समझ बैठे थे हम।१।

**

कह रहे थे सब  यहाँ  जम्हूरियत है इसलिए

देश में हर फैसला अपना समझ बैठे थे हम।२।

**

गढ़ गये पुरखे हमारे  बीच  मजहब नाम की

क्यों उसी दीवार को रस्ता समझ बैठे थे हम।३।

**

आस्तीनों  में  छिपे  विषधर  लगे  फुफकारने

यूँ जिन्हें जाँ से अधिक प्यारा समझ बैठे थे हम।४।…

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Posted on February 22, 2020 at 8:28am — 9 Comments

झूठी बातें कह कर दिनभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)

२२२२/२२२२/२२२२/२२२



झूठी बातें कह कर दिनभर जब झूठे इठलाते हैं

हम सच के झण्डावरदारी क्यों इतना शर्माते हैं।१।

***

अफवाहों के जंगल यारो सभ्य नगर तक फैल गये

क्या होगा अब विश्वासों  का  सोच सभी घबराते हैं।२।

***

कैसे सूरज चाँद सितारे  अब तक चुनते आये हम

बात उजाले की कर के  जो  नित्य  अँधेरा लाते हैं।३।

***

नित्य हादसे  होते  हैं  या  उन में  साजिश होती है

छोटा…

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Posted on February 17, 2020 at 11:00am — 8 Comments

रखकर जो नाम राम का -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/२२२/१२१२

**

जो भी वतन में दोस्तो दिखते कलाम हैं

हर वक्त उसकी शान में कहते सलाम हैं।१।

**

दुत्कार उनको हम रहे केवल सुनो यहाँ

जयचन्दी नीयतों में  जो  रहते इमाम हैं।२।

**

उनका भी मान है  नहीं  केवल लताड़ है

रखके जो नाम राम का रावण से काम हैं।३।

**

नेता  सभी  हैं  एक  से  जो  फूट चाहते

समझेंगे क्या कभी इसे जो लोग आम हैं।४।…

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Posted on February 8, 2020 at 4:48am — 8 Comments

Comment Wall (15 comments)

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At 10:58am on October 18, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत शुक्रिया
At 2:30pm on September 28, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय लक्ष्मण धामी ' मुसाफिर' जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफ़जाई का आपने समय निकाला मैं बहुत शुक्रगुज़ार हूँ
At 10:47am on August 24, 2019, dandpani nahak said…
बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्षमण धामी जी
At 10:03pm on May 24, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने के लिए!
At 4:04pm on August 8, 2018, babita garg said…

शुक्रिया लक्ष्मण जी

At 11:44am on March 3, 2018, Sanjay Kumar said…
बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। कोशिश करूंगा कि कुछ योगदान कर सकूं। बस हौसला अफजाई करते रहिएगा और जहां जरूरी हो तो कुछ सिखा दीजियेगा। सादर
At 5:20pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
शुक्रिया लक्ष्मण जी
At 7:27pm on March 10, 2016, TEJ VEER SINGH said…

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी!आपने मुझे इस क़ाबिल समझा!

At 4:26pm on April 2, 2015, gumnaam pithoragarhi said…
लक्ष्मण धामी जी नमस्कार शुक्रिया आपने मुझे ये सम्मान दिया क्या मैं आपसे बात कर सकता हूँ यदि आप चाहें तो ................ मेरा नंबर ये है ,,,,,,,,,,7579 100213.........क्या आप अपना नंबर देंगे ?
At 10:37pm on February 17, 2015,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

भाई लक्ष्मण धामीजी, यदि संभव हो तो 18 फरवरी को भी भेंट हो सकती है. मैं 18 फरवरी को भी प्रगति मैदान के पुस्तक मेले में उपस्थित रहूँगा.
शुभ-शुभ

 
 
 

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